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अडानी के विरुद्ध चीखने-चिल्लाने वालों को तेलंगाना में अडानी चाहिए , क्यों?

सुभाष चन्द्र

राहुल “कालनेमि” हो या कांग्रेस और TMC की महुआ मोइत्रा जैसे नेता हों, चीखते-चिल्लाते  हैं गौतम अडानी पर और कहते नहीं थकते कि मोदी ने देश बेच दिया अडानी अंबानी को लेकिन आज उसी अडानी के आगे कांग्रेस दुम हिला रही है। फिर भी चिदंबरम और सुप्रिया श्रीनेत जवाब देने को तैयार नहीं हैं कि अडानी से तेलंगाना में निवेश के लिए करार क्यों किया? अब क्या कांग्रेस ने तेलंगाना बेच दिया अडानी को? अब इसको विपक्ष का दोगलापन न कहा जाये तो क्या कहा जाये। अगर मोदी द्वारा अडानी और अम्बानी के हाथों देश को बेचा जा रहा है, फिर कांग्रेस क्यों अडानी के आगे-पीछे डोल रहे हैं?

अडानी पहले कांग्रेस सरकार में राजस्थान में निवेश कर चुका है और कुछ दिन पहले बिहार में 10 हज़ार करोड़ निवेश करने का भी फैसला किया था जहां कांग्रेस सरकार में शामिल है। कर्नाटक को तो कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार ने 6 महीने में दिवालिया कर दिया है और साफ़ कह दिया है कि मुफ्त की रेवड़ियां बांट कर खज़ाना खाली है, अब केंद्र से हमें पैसा चाहिए। राज्य सरकार ने कहा है कि मुफ्त रेवड़ियों पर खर्च 58 हज़ार करोड़ की रकम को हम नहीं झेल सकते। 

लेखक 
कांग्रेस की तेलंगाना सरकार के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भारत में नहीं स्विट्ज़रलैंड के दावोस में बैठ कर गौतम अडानी के साथ 12000 करोड़ के निवेश के लिए 4 MOU साइन किये हैं। इसमें अडानी एंटरप्राइज 5000 करोड़ का 100 MW data center बनाएगा; अडानी ग्रीन 5000 करोड़ के 2 pup storage projects लगाएगा; अम्बुजा सीमेंट 1400 करोड़ के प्लांट लगाएगा और अडानी डिफेन्स 1000 करोड़ के drone system तैयार करने का प्रोजेक्ट शुरू करेगा।

इसके अलावा JSW Energy के साथ भी बिजली उत्पादन के लिए करार हुए हैं - कुल 36500 करोड़ का निवेश होगा।

चिदंबरम से पत्रकारों ने सवाल किया कि आप लोग तो अडानी के खिलाफ हो तो फिर उसके साथ क्यों खड़े हो गए तो उसने माइक सुप्रिया श्रीनेत की तरफ सरका दिया और सुप्रिया कहती है कि इस विषय पर बात मत कीजिए, आज का मामला तो केवल menifesto का है।

उधर बिहार में लालू यादव का लाल तेजस्वी जो श्री राम मंदिर की जगह अस्पताल बनाने की वकालत कर रहा है, उसने आज घोषणा की है कि सभी जातियों के आर्थिक रूप से गरीब पाए गए 94 लाख 33 हज़ार 212 परिवारों को स्वरोजगार के लिए 2-2 लाख रुपए दिए जाएंगे और इसके लिए 1250 करोड़ की स्वीकृति दे दी जबकि इस योजना का खर्च 1 लाख 90 हज़ार करोड़ रुपया चाहिए। बिहार का सालाना बजट ही 2 लाख 65 हज़ार करोड़ है। यानी बिहार को भी दिवालिया बनाने की रूपरेखा तैयार कर दी गई है। 1250 करोड़ की राशि ऐसे ही स्वीकृत की गई जैसे 50000 हज़ार करोड़ के OROP के लिए कांग्रेस सरकार ने 500 करोड़ स्वीकृत किये थे।

एक ताजा खबर और है कि कांग्रेस के युवराज राहुल “कालनेमि” मणिपुर में कुकी आतंकी ग्रुप के close relation Dr Latmtinthang HK के साथ अपनी यात्रा में “न्याय” कर रहा है। अब समझ आ जाना चाहिए सुप्रीम कोर्ट के CJI चंद्रचूड़ को भी कि मणिपुर हिंसा के पीछे कौन था जो बड़े जोर शोर से कह रहे थे कि सरकार कुछ कार्रवाई नहीं करेगी तो हम करेंगे।

हर तरह का विलाप करेंगे, मोदी अडानी अंबानी को कोसते रहेंगे, राम मंदिर पर भड़ांस निकालते रहेंगे लेकिन अंदर ही अंदर हर कुकर्म भी करेंगे। यह है कांग्रेस नीति।

उत्तर प्रदेश : ‘देश का इकलौता राज्य जहाँ 5 अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे, सोच और अप्रोच में लाए बदलाव’: यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में बोले मोदी

               मोदी ने लखनऊ में यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 का उद्घाटन किया, सीएम योगी भी मौजूद रहे 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने शुक्रवार (10 फरवरी 2023) को राजधानी लखनऊ में आयोजित यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 (UP Global Investors Summit 2023) का उद्घाटन किया। इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यना​थ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजद रहे।

इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “उत्तर प्रदेश के प्रति मेरा एक विशेष स्नेह है और यूपी के लोगों के प्रति मेरी एक विशेष जिम्मेदारी भी है। मैं आप सभी निवेशकों का यूपी में स्वागत करता हूँ, यहाँ आने के लिए धन्यवाद करता हूँ।”

यूपी ने नई पहचान स्थापित की: पीएम मोदी

पीएम ने अपने संबोधन में कहा कि एक समय पर यूपी बीमारू राज्य कहलाता था। हर कोई इस राज्य से अपनी उम्मीदें छोड़ चुका था, लेकिन बीते 5-6 वर्षों में यूपी ने अपनी नई पहचान स्थापित कर ली है। अब यूपी अपने सुशासन से गुड गवर्नेंस (Good Governance) के लिए पहचाना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बहुत जल्द यूपी देश के उस इकलौते राज्य के रूप में जाना जाएगा, जहाँ 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ यूपी में सरकारी सोच और अप्रोच में ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस को लेकर सार्थक बदलाव आया है। आज यूपी एक आशा… एक उम्मीद बन चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि आज दुनिया की हर विश्वसनीय आवाज यह मानती है कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ती रहेगी। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है भारतीयों का खुद पर बढ़ता भरोसा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत का हर नागरिक ज्यादा से ज्यादा विकास होते देखना चाहता है, वो अब भारत को जल्द से जल्द विकसित होते देखना चाहता है। ये जन आशाएँ ही विकास के कार्यों में गति ला रही हैं।

’35 हजार करोड़ रुपए एनर्जी ट्रांजिशन के लिए’

उन्होंने अपनी बात को जारी रखते हुए उन्होंने कहा, “आज भारत में सोशल, डिजिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जो काम हुआ है, उसका बड़ा लाभ यूपी को भी मिला है। हमने दर्जनों पुराने कानूनों को खत्म किया है और आज भारत सही मायनों में स्पीड और स्केल के रास्ते पर चल पड़ा है। वर्तमान में इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार रिकॉर्ड खर्च कर रही है और हर साल इसे बढ़ा रही है।”
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को लेकर पीएम ने कहा, “ग्रीन ग्रोथ के जिस रास्ते पर भारत चल पड़ा है, उस पर मैं आपको विशेष रूप से आमंत्रित करता हूँ। इस वर्ष बजट में हमने 35 हजार करोड़ रुपए सिर्फ एनर्जी ट्रांजिशन के लिए रखे हैं। यह दिखाता है कि हमारा इरादा क्या है।”

10 हजार बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर

पीएम ने आगे कहा कि इस बजट में किसानों के लिए 10 हजार बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर स्थापित करने की घोषणा की गई है। इस कदम से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा और इसमें प्राइवेट कारो​बारियों के लिए निवेश की संभावनाएँ हैं। स्किल डेवलपमेंट मिशन के तहत यूपी के 16 लाख से अधिक युवाओं को विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि पीजीआई लखनऊ और आईआईटी कानपुर में एआई से संबंधित कोर्स शुरू किए गए हैं। आज भारत के कुल मोबाइल उत्पादन में से 60 फीसदी से अधिक यूपी में होता है। देश के दो डिफेंस कॉरिडोर में से एक यूपी में है। यहाँ फिशरी, डेयरी और फूड प्रोसेसिंग को लेकर भी अनंत संभावनाएँ हैं।
रिलायंस समूह 75000 करोड़ रुपए करेगा निवेश
यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 (UP Global Investors Submit 2023) का आयोजन जारी है। इस आयोजन में कई दिग्गज उद्योगपतियों ने उत्तर प्रदेश में निवेश की घोषणा की। इस दौरान रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) ने प्रदेश में 75,000 करोड़ रुपए निवेश करने का ऐलान किया है।
समिट में मुकेश अंबानी ने कहा कि रिलायंस ने अगले चार वर्षों में यूपी में जियो, खुदरा और नवीकरणीय व्यवसायों में 75000 करोड़ रुपए का निवेश करने की योजना बनाई है। इससे राज्य में 1,00,000 से अधिक अतिरिक्त रोजगार पैदा होंगे। उन्होंने इस समिट को विकास का महाकुंभ बताते हुए कहा कि जियो दिसंबर 2023 तक पूरे राज्य में 5G सर्विस शुरू कर देगी।
मुकेश अंबानी ने कहा कि इस साल के बजट ने भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में उभरने की नींव रखी है। भारत बहुत मजबूत विकास पथ पर है। रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन ने कहा कि उनका ग्रुप उत्तर प्रदेश में 10 गीगावॉट नवीकरणीय क्षमता स्थापित करेगा। यह उत्तर प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी अक्षय ऊर्जा परियोजना होगी।
मुकेश अंबानी ने बायो-गैस एनर्जी बिजनेस में उतरने की घोषणा भी की। उनका कहना है कि बायो-गैस से पर्यावरण में सुधार के साथ ही किसानों को भी बड़ा लाभ होगा। किसान हमारे अन्नदाता तो हैं ही, अब ऊर्जादाता भी बनेंगे।
उन्होंने आगे ​कहा कि 2018 से अब तक रिलायंस प्रभु श्रीराम की नगरी उत्तर प्रदेश में 50 हजार करोड़ रुपए निवेश कर चुकी है। 75000 करोड़ के नए निवेश को मिलाकर कुल निवेश 1.25 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा। यूपी 5 साल के भीतर ही 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बन जाएगा।
इस खास मौके पर पीएम ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि एक समय पर यूपी बीमारू राज्य कहलाता था। हर कोई इस राज्य से अपनी उम्मीदें छोड़ चुका था, लेकिन बीते 5-6 वर्षों में यूपी ने अपनी नई पहचान स्थापित कर ली है। अब यूपी अपने सुशासन से गुड गवर्नेंस (Good Governance) के लिए पहचाना जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमें 32.92 लाख करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव मिला है, जबकि हमने 23 लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा था। उन्होंने कहा कि यूपी लक्ष्य से कई गुना अधिक निवेश हासिल करने में सफल हुए।

अडानी विवाद : विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचा रहे भारत के तथाकथित देशप्रेमी नेता


सोशल मीडिया पर वायरल 
जिस विदेशी हिंडनबर्ग की रपट पर अपने आपको देशहितैषी कहने वाले नेता और उनकी पार्टियां विदेशी दान या कहे भीख पर गौतम अडानी पर कर रहे हंगामें से ये लोग देश का हित कर रहे हैं अथवा अहित? इस कटु सच्चाई को हर देशप्रेमी को समझनी होगी। जबसे बिकाऊ नेताओं ने अडानी पर हंगामा बरपाया है, विदेशी उद्योगपतियों के शेयर में बढ़ोतरी देखी जा सकती है यानि ये उपद्रवी नेता किसकी सहायता कर रहे हैं? क्या है इन नेताओं का चरित्र, चुनाव लड़ते किसी पार्टी से और सत्ताभोग के लिए दूसरी पार्टी में जा मिलते हैं। देश को खोखला करते नेता और उनकी पार्टियों को भी चुनावी मैदान में धूल चटाकर इनकी असलियत दिखाने का समय आ गया है।   भारत वैश्विक मंच पर एक ताकत बन गया है। कोराना महामारी से लेकर यूक्रेन-रूस संकट के बावजूद भारत की विकास रफ्तार से विश्व के ताकतवर देशों में खलबली मची हुई है। बहुत सारे ताकतवर देश अब तक भारत को बहुत सारे सामान बेचा करते थे यानी निर्यात किया करते थे लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत जैसे-जैसे आत्मनिर्भर हो रहा है उनकी दुकानदारी पर संकट के बादल छाने लगे हैं। इससे घबराए पश्चिम के देश भारत और पीएम मोदी के खिलाफ षडयंत्र में जुट गए हैं। और हमारे तथाकथित देशप्रेमी नेता उनके हाथ की कठपुतली बन देश का अहित कर रहे हैं। 

देश में होने हैं 10 चुनाव, इसीलिए रची जा रही साजिशें

देश में इस साल 9 विधानसभा चुनाव होने हैं और 2024 में लोकसभा चुनाव भी है। ऐसे में विदेशी ताकतें अपनी पूरी शक्ति झोंककर पीएम मोदी को सत्ता से बाहर करना चाहती हैं। इसीलिए बीबीसी डाक्यूमेंट्री लाई गई और उसके बाद भारत के विकास में योगदान देने वाली प्रमुख कंपनी अडानी समूह के खिलाफ हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट। लेकिन ऐसी साजिश करने वालों को समझनी चाहिए भारत का मतलब अडानी नहीं है। भारत में विकास की रफ्तार अब थमने वाली नहीं है।

मोदी की लोकप्रियता साजिशकर्ताओं के लिए चिंता

मोदी लगातार तीन साल से लोकप्रियता में वैश्विक स्तर पर सबसे ऊपर बने हुए हैं। यह केवल देश की बात नहीं है विदेशों में भी पीएम मोदी उतने ही लोकप्रिय हैं जितने कि देश में। भारत के खिलाफ साजिशकर्ताओं के लिए यह भी एक चिंता का सबब है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि भारत को बदनाम कैसे किया जाए जिससे निवेशक दूरी बना लें और पीएम मोदी के विकास के संकल्प पर ब्रेक लगाया जा सके। पद्म विभूषण से सम्मानित आनंद महिंद्रा ने सही ही कहा है कि भारत ने भूकंप, सूखा, मंदी, युद्ध और आतंकवादी हमलों के कई दौर देखे हैं। इसीलिए भारत के खिलाफ कभी शर्त मत लगाना।

अडानी ग्रुप के वैश्विक विस्तार मिशन से डरी विदेशी कंपनियां

पिछले कुछ सालों में अडानी ग्रुप ने अपना प्रभाव जमाया है। गौतम अडानी ने अडानी ग्रुप के वैश्विक विस्तार मिशन को आगे बढ़ाया। ऐसे में वैश्विक रूप से अडानी ग्रुप का बढ़ना भला विदेशी कंपनियों को कैसे रास आ सकता है। तब तो और नहीं जब अडानी ग्रुप भारत की पहचान को दिनोदिन और सुदृढ़ करने में आगे की ओर बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में पश्चिमी दुनिया में जिस गति से भारत विरोधी नैरेटिव को फैलाया जा रहा है उसमें काफी वृद्धि हुई है।

सोरोस, फोर्ड फाउंडेशन, बिल गेट्स के फंड से आस्ट्रेलिया में हुआ अडानी का विरोध

एनजीओ http://350.org को Tides Foundation द्वारा अत्यधिक वित्त पोषित किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि टाइड्स फाउंडेशन को फंड कौन देता है? सिर्फ एक साल के लिए नाम और रकम देखें! इसमें सोरोस, फोर्ड फाउंडेशन, रॉकफेलर, ओमिडयार और बिल गेट्स के नाम हैं।

वालस्ट्रीट जनरल की प्रोपेगेंडा रिपोर्ट, अडानी को ही भारत बता दिया

बीबीसी डाक्यूमेंट्री और हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद विदेशी प्रोपेगेंडा मीडिया के साथ ही भारत के विपक्षी दलों और लेफ्ट लिबरल इकोसिस्टम को सरकार पर हमला करने का टूल मिल गया। अडानी का मतलब भारत नहीं है लेकिन वालस्ट्रीट जनरल ने अपनी रिपोर्ट में कुछ ऐसा ही लिखकर प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश की। उसने लिखा- हिंडनबर्ग ने “हिंदू राष्ट्रवादी पीएम” मोदी के आर्थिक विकास के गुजरात मॉडल से भरोसा हिला दिया है और “यह कॉर्पोरेट भारत के बारे में बहुत कुछ कहता है”।

भारत की छवि खराब करने का षड्यंत्र

ब्रिटिश न्यूज़ एजेंसी बीबीसी (BBC) ने अपनी डॉक्टूमेंट्री के माध्यम से पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने की कोशिश की और अब उसके बाद हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के जरिये अडानी ग्रुप पर हमला कर अर्थव्यवस्था पर चोट पहुंचाने की साजिश रची गई। इन सभी का एक साथ आना संयोग नहीं हो सकता। इसके पीछ इन विरोधियों का अपना लाभ तो है ही साथ ही साथ भारत की छवि खराब करने का षड्यंत्र भी है। हिंडनबर्ग जैसे रिपोर्ट भी ऐसे ही षड्यंत्र रच रहे हैं। अब फिच रेटिंग्स ने भी कह दिया है कि फिलहाल अडानी ग्रुप की कंपनियों के रेटिंग्स पर असर नहीं है।

आनंद महिंद्रा ने कहा- भारत के खिलाफ कभी शर्त मत लगाना

पद्म विभूषण से सम्मानित आनंद महिंद्रा ने अडानी संकट के जरिए भारत की आर्थिक ताकत पर सवाल उठा रहे लोगों को करारा जवाब दिया है। बेबाकी के साथ अपनी बात कहने वाले महिंद्रा ने एक ट्वीट में कहा, ‘ग्लोबल मीडिया में अटकलें लगाई जा रही है कि क्या बिजनस सेक्टर की मौजूदा चुनौतियां भारत की आर्थिक ताकत बनने का सपना पूरा कर सकेगा। मैंने भूकंप, सूखा, मंदी, युद्ध और आतंकवादी हमलों के कई दौर देखे हैं। मैं केवल यही कहूंगा कि भारत के खिलाफ कभी शर्त मत लगाना।’ इस तरह महिंद्रा ने विदेश ही नहीं बल्कि देश में भी ऐसे लोगों को जवाब दिया है जो अडानी संकट के बहाने सरकार की इकॉनमिक पॉलिसीज पर सवाल खड़े कर रहे हैं। ट्विटर पर उनके एक करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हैं।

हिंडनबर्ग रिसर्च के साथ शेयर शार्ट-शेलिंग भी करती है, इसीलिए उसकी भूमिका पर संदेह

हिंडनबर्ग अमेरिका की इनवेस्टमेंट रिसर्च कंपनी है। 2017 में इसे ‘नाथन एंडरसन’ नाम के एक अमेरिकी व्यक्ति ने स्थापित किया था। इस कंपनी का मुख्य काम शेयर मार्केट, इक्विटी, क्रेडिट और डेरिवेटिव्स पर रिसर्च करना है यानी कि शेयर मार्केट में कंपनियां पैसों की हेरा-फेरी तो नहीं कर रही हैं या फिर बड़ी कंपनियां अपने फायदे के लिए अकाउंट मिसमैनेजमेंट तो नहीं कर रही हैं। लेकिन इनवेस्टमेंट रिसर्च करने के साथ-साथ यह एक शार्ट-शेलर कंपनी भी है जोकि शेयर मार्केट में अलग-अलग कंपनियों के शेयर खरीदती और बेचती है और उससे मुनाफा कमाती है। इससे यह साफ हो जाती है कि हिंडनबर्ग ने शेयर के जरिये अपने मुनाफे के साथ-साथ इस रिसर्च के जरिये विदेशी मीडिया और भारत के विपक्षी दल को सरकार पर हमला करने का एक टूल दिया है।

अडानी के शेयरों में गिरावट से विदेशी कंपनियों को फायदा

अडानी के शेयरो में गिरावट और निवेशकों के नकारात्मक रुझान से इस सेक्टर की विदेशी कंपनियों को फायदा होगा। हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में कुछ छिपाना और कुछ बताना वाली नीति को अपनाया है यानी उसने अडानी ग्रुप के बारे में उन्हीं चीजों को बताया है जो उसके हित में हैं और जो शेयर बाजार में अडानी ग्रुप के शेयरों की कीमत को घटाने का काम करे। अडानी पर हमला करने से बहुत से समूहों को कई गुना लाभ होता है। अडानी साम्राज्य सोलर मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, इंडस्ट्रियल लैंड, डिफेंस, एयरोस्पेस, फ्रूट्स, डेटा सेंटर्स, रोड, रेल, रियल एस्टेट लेंडिंग, कोल और कई अन्य क्षेत्रों में मौजूद है।

वैश्विक रूप से आगे बढ़ रहा है अडानी ग्रुप

अडानी ग्रुप पिछले 12 साल से ऑस्ट्रेलिया में मौजूद है। ग्रुप ने कई विरोधों के बाद भी कारमाइकल कोयला खदान का विकास किया। 2017 में अडानी ने चीनी बेल्ट एंड रोड पहल में सेंधमारी की। उस वर्ष, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (लिमिटेड) ने कुआलालंपुर से 50 किमी दूर स्थित कैरी द्वीप में कंटेनरों को संभालने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह सभी अपेक्षाओं के विपरीत था इससे भी अधिक, यह मलेशिया में भारत की स्थिति को बढ़ावा देने वाला था।फिर श्रीलंका में चीनी उपस्थिति के बीच अडानी समूह को कोलंबो बंदरगाह पर एक पश्चिमी कंटेनर टर्मिनल के विकास और संचालन का ठेका मिला है। कुछ महीनों के भीतर, समूह ने द्वीप राष्ट्र में दो पवन ऊर्जा परियोजनाओं को समाप्त कर दिया। अडानी की उपस्थिति से बांग्लादेश के बिजली क्षेत्र को भी बढ़ावा मिल रहा है।

इज़राइल ने हाइफा बंदरगाह अडानी समूह को सौंपा

एशिया के बाहर भी अडानी ग्रुप भारत की मौजूदगी बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है. पिछले साल, अडानी समूह ने इज़राइल के हाइफा बंदरगाह में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने के लिए 1.18 अरब डॉलर खर्च किए। अडानी अब इज़राइल में चीनी राज्य के स्वामित्व वाले शंघाई इंटरनेशनल पोर्ट ग्रुप के साथ सीधी प्रतिस्पर्धा में है। राष्ट्रवाद के संदर्भ में यह चीनी राज्य के व्यापारिक हितों पर सीधा हमला है। तंजानिया में, अडानी ने पूर्ववर्ती प्रीमियम बीआरआई परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करके चीन को भारी झटका दिया। देखना होगा कि समूह तेजी से यूरोप और यहां तक ​​कि अजरबैजान जैसे भौगोलिक क्षेत्रों में अपने पैर फैला रहा है।

यह सच है कि अडानी से पहले टाटा, रिलायंस और कई अन्य कंपनियों ने भी अन्य देशों में विस्तार किया। लेकिन उनके विस्तार के बीच उल्लेखनीय अंतर हैं। एक तो ये कि इन औद्योगिक समूहों ने भारत के बढ़ते दबदबे के समानांतर विस्तार नहीं किया। दूसरा अंतर यह है कि अडानी को पीएम मोदी का करीबी माना जाता है, जो सच न भी हो तो भी विदेशी ताकतों को झटका देना तय है।

फिच रेटिंग्स ने कहा- फिलहाल अडानी ग्रुप की कंपनियों के रेटिंग्स पर असर नहीं

अडानी समूह के स्टॉक्स में भारी गिरावट के बीच रेटिंग एजेंसी फिच की तरफ से बड़ा बयान आया है। फिच रेटिंग्स ने कहा है कि शार्ट सेलर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट का अडानी समूह की कंपनियों के रेटिंग्स और उनके सिक्योरिटिज पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ने वाला है जिसे उसने पहले से रेटिंग दी हुई है। साथ ही फिच ने कहा कि कंपनी के कैश फ्लो के उसके अनुमान में भी कोई बदलाव नहीं आया है। फिच रेटिंग्स के इस बयान से अडानी समूह को राहत मिली है।

फिच रेटिंग्स ने मौजूदा समय में अडानी समूह के 8 कंपनियों को रेटिंग दी हुई है। जिसमें अडानी ट्रांसमिशन को BBB-/Stable, अडानी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लिमिटेड के सीनियर सिक्योर्ड डॉलर नोट्स को BBB- रेटिंग हासिल है। अडानी इंटरनेशनल कंटेनर टर्मिनल प्राइवेट लिमिटेड को सीनियर सिक्योर्ड डॉलर नोट्स को BBB-/Stable, अडानी ट्रांसमिशन को BBB-/Stable, अडानी ग्रीन एनर्जी के सीनियर सिक्योर्ड डॉलर नोट्स को BBB-/Stable, मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड को सीनियर सिक्योर्ड डॉलर नोट्स BB+/Stable रेटिंग्स हासिल है।

अडानी पर हमला 2017 में ही शुरू हो गया था

यह हमला हिंडनबर्ग शोध रिपोर्ट के बाद 25 जनवरी 2023 को शुरू नहीं हुआ है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया से 2016/17 में शुरू हुआ था। अडानी को 2010 में ऑस्ट्रेलिया में कारमाइकल कोल माइन का प्रोजेक्ट मिला था। 2017 में http://350.org एनजीओ के नेतृत्व में कुछ एनजीओ द्वारा अडानी के खिलाफ विरोध शुरू किया गया था। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को रोकने के लिए एक ग्रुप #StopAdani बनाया।

भारतीय एनजीओ NFI को भी सोरोस, फोर्ड फाउंडेशन देती है फंड

सीमा चिश्ती एनएफआई में मीडिया फेलोशिप सलाहकार

भारत में एक एनजीओ नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया (NFI) है। अब एनएफआई के दानदाताओं की एक सूची देखिए। इसमें सोरोस, फोर्ड फाउंडेशन, रॉकफेलर, ओमिड्यार, बिल गेट्स और अजीम प्रेमजी के नाम भी हैं। सीमा चिश्ती एनएफआई में मीडिया फेलोशिप सलाहकार हैं। वह द वायर में संपादक हैं। वह कारवां के लिए लिखती हैं और वह माकपा नेता सीताराम येचुरी की पत्नी हैं!

अजीम प्रेमजी के नेतृत्व में एनजीओ IPSMF शुरू हुआ

अजीम प्रेमजी के नेतृत्व में एक एनजीओ IPSMF शुरू हुआ, जो Altnews, The Wire, The Caravan, The News Minute, आदि प्रचार समाचार वेबसाइटों को फंड करता है। अब IPSMF के संस्थापक सदस्यों की सूची में नाम देखें। अगर आप प्रोपगंडा वेबसाइटों से जुड़े लोगों की टाइमलाइन चेक करेंगे, तो आपको अडानी के खिलाफ लगभग वही प्रॉपेगैंडा ट्वीट और समन्वित हमले मिलेंगे। इस कार्टेल ने अडानी के खिलाफ अपने प्रचार लेख और ट्वीट के साथ सोशल मीडिया और उनकी वेबसाइटों पर समन्वित हमले की शुरुआत की है।

बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री के किरदार अलीशान जाफरी को एक विदेशी फंडेड NFI में फेलोशिप मिली। उन्हीं के साथ शुरू हुई थी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री! सीमा चिश्ती ने उनकी मदद की और उनका मार्गदर्शन किया। सीमा चिश्ती दस साल तक बीबीसी की संपादक रहीं और अब वह द वायर की संपादक हैं।

मुस्लिम तुष्टिकरण में कांग्रेस से एक कदम आगे निकले दिल्ली के सीएम केजरीवाल


मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए कांग्रेस और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के बीच जमकर प्रतिस्पर्धा चल रही है। पहले कांग्रेस ने मुस्लिमों को खुश करने के लिए देश के संसाधनों पर पहला अधिकार बताया था। वक्फ बोर्डों को जहां मन हो, वहां किसी भी जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित करने की असीमित शक्तियां दीं। वक्फ बोर्ड ने इस शक्ति का पूरा उपयोग करते हुए खाली पड़ी और बंजर जमीन पर दावा शुरू कर दिया और बेहिसाब जमीन पर कब्जा किया। अब केजरीवाल मुस्लिम तुष्टिकरण में कांग्रेस से एक कदम आगे निकलते हुए नजर आ रहे हैं। यहां तक कि तथाकथित वक्फ जमीनों पर से हिन्दुओं को बेदखल करने और उनके मकानों को तोड़ने की बात कर रहे हैं।

वक्फ बोर्ड के प्रति तन, मन, धन से समर्पित केजरीवाल

दरअसल सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें केजरीवाल मुस्लिमों की एक सभा को संबोधित करते नजर आ रहे हैं। इस दौरान उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “कभी भी जरूरत पड़े आपको… तन, मन, धन से केजरीवाल और दिल्ली सरकार पूरी तरह से वक्फ बोर्ड के साथ है। बंबई के अंदर इस देश का जो सबसे अमीर आदमी है, बताते हैं उसका घर वक्फ बोर्ड की प्रोपर्टी पर बना हुआ है। मैं गलत तो नहीं कह रहा?” केजरीवाल इतने पर नहीं रूके। उन्होंने आगे कहा, “वहां की सरकार की हिम्मत नहीं है, जो उसको कुछ कर दे। हमारी सरकार अगर वहां होती, तो उसकी प्रोपर्टी तुड़वा देती। वक्फ बोर्ड को जब भी किसी चीज की जरूरत होगी। दिल्ली सरकार वक्फ बोर्ड के साथ है।”

वक्फ बोर्ड और मौलानाओं पर मेहरबान हुए केजरीवाल

वायरल हो रहा यह वीडियो 3 साल पुराना है। इस वीडियो को तीन साल पहले 24 जनवरी, 2019 को आम आदमी पार्टी के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया था। दिल्ली के एवान ए गालिब ऑडिटोरियम में दिल्ली वक्फ बोर्ड ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया था, जिसमें केजरीवाल ने वक्फ बोर्ड अध्यक्ष अमानतुल्ला खान की जमकर तारीफ की और उन्हें अपना छोटा भाई व शेर बताया। दूसरी तरफ, अमानतुल्ला खान ने मौलाना और मुअज्जिन का वेतन बढ़ाने का एलान किया। मौलाना की सैलरी दस हजार से बढ़ाकर 18000 और मुअज्जिन की सैलरी 9000 से बढ़ाकर 16 हजार कर दी।

क्या केजरीवाल ने कभी मंदिरों पर कब्जे के खिलाफ आवाज उठाई ?

केजरीवाल ने एवान ए गालिब ऑडिटोरियम में दिल्ली वक्फ बोर्ड और मुस्लिमों को खुश करने के लिए प्रोपर्टी तुड़वाने की बात कही। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या केजरीवाल ने हिन्दू मंदिरों पर कब्जा जमाये बैठे मुस्लिमों के खिलाफ कभी आवाज उठाई है। अभी ज्ञानवापी मस्जिद में शिव लिंग मिलने पर भी केजरीवाल ने चुप्पी साध रखी है। इससे पहले केजरीवाल ने अयोध्या में भगवान राम के मंदिर के खिलाफ बयान दिया था। उन्होंने एक रैली में नानी की बात सुनाते हुए कहा था, “जब बाबरी मंदिर का ध्वंस हुआ तब मैंने अपनी नानी से पूछा कि नानी आप तो अब बहुत खुश होंगी? अब तो आपके भगवान राम का मंदिर बनेगा। नानी ने जवाब दिया – ना बेटा, मेरा राम किसी की मस्जिद तोड़ कर ऐसे मंदिर में नहीं बस सकता।” केजरीवाल ने मार्च 2014 में ये बयान दिया था।

हिन्दू बहुल गांवों और मंदिर पर वक्फ बोर्ड के दावे पर विवाद

अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर तीन साल पुराना यह वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हो रहा है। इसके पीछे वक्फ बोर्ड के दावे को लेकर चल रहा विवाद है। तमिलनाडु में वक्फ बोर्ड ने हिंदू बहुल गांव से लेकर हिंदू मंदिर तक को अपनी संपत्ति बता दी। वाराणसी ज्ञानवापी मामले की सुनवाई में मुस्लिम पक्ष का यही दावा है कि यह सुन्नी वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। ताजमहल पर 2005 में वक्फ बोर्ड ने दावा कर दिया था। उत्तर प्रदेश में ऐसे अनेक स्थल हैं जिन पर वक्फ दावा करता है और विवाद चल रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने मदरसों के बाद अब वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का भी सर्वे कराने का निर्णय लिया है। मुस्लिम समाज इस सर्वे का तीव्र विरोध कर रहा है।

वक्फ बोर्ड कांग्रेस के मुस्लिम तुष्टिकरण की उपज

अब वक्फ की अवधारणा पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि अनेक इस्लामी देशों मसलन तुर्किये जो पहले तुर्की था उसके अलावा लीबिया, मिस्र, सूडान, लेबनान, सीरिया, जार्डन, ट्यूनीशिया और इराक आदि में वक्फ नहीं है। दरअसल ये वक्फ बोर्ड मुस्लिम तुष्टिकरण की उपज है। कांग्रेस की तथाकथित धर्मनिरपेक्ष सरकार ने मुस्लिम वोट बैंक के लिए वक्फ के रूप में मजहबी जमींदार की अवधारणा का साकार रूप उपस्थित कर दिया। इसके बाद कांग्रेस इसा अवधारणा को लगातार मजबूती प्रदान करती गई। अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल वक्फ बोर्ड के नए संरक्षक के रूप में उभर कर सामने आए हैं।

कांग्रेस सरकार ने वक्फ बोर्ड को दी असीमित शक्तियां

कांग्रेस की पीवी नरसिंह राव सरकार ने 1995 में वक्फ कानून को इतना मजबूत बना दिया कि उसे निर्णय लेने तक का अधिकार हो गया। वक्फ कानून की धारा-40 वक्फ बोर्ड को किसी भी संपत्ति के वक्फ संपत्ति होने या नहीं होने की जांच करने का विशेष अधिकार देती है। अगर वक्फ बोर्ड को यह विश्वास होता है कि किसी ट्रस्ट या सोसायटी की संपत्ति वक्फ संपत्ति है तो बोर्ड उस ट्रस्ट एवं सोसायटी को कारण बताओ नोटिस जारी कर सकता है कि ‘क्यों न इस संपत्ति को वक्फ संपत्ति की तरह दर्ज कर लिया जाए?’ जवाब से संतुष्ट न होने को आधार बनाकर वह बड़ी सुविधानुसार और सहजता से उसे अपनी संपत्ति घोषित कर सकता है। इस समय यह आठ लाख एकड़ से ज्यादा हो चुकी है। वक्फ की जमीनें लगातार बढ़ती जा रही हैं।

कांग्रेस ने सैकड़ों करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी संपत्तियों को वक्फ को दिया उपहार

कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले दिल्ली के लुटियंस इलाके में 123 अत्यंत महत्वपूर्ण और सैंकड़ो करोड़ मूल्य की सरकारी संपत्तियों को वक्फ को उपहार में दिया था। यह निर्णय तत्कालीन प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कैबिनेट द्वारा लिया गया था। उस समय लोकसभा चुनावों की तैयारियां चल रही थीं, और चुनावों से कुछ ही दिन पहले एक गुप्त नोट के माध्यम से इस निर्णय के बारे में सबको अवगत कराया गया था। ये संपत्तियां दिल्ली के अतिमहत्वपूर्ण और महंगे इलाकों जैसे कनॉट प्लेस, अशोक रोड, मथुरा रोड और अन्य वीवीआईपी एन्क्लेव जैसे प्रमुख स्थानों पर स्थित हैं।

वक्फ बोर्ड को खत्म करने की उठ रही मांग

जिस तरह से वक्फ बोर्ड के दावे बढ़ते जा रहे हैं, उससे लगता है कि वक्फ की अवधारणा में संपूर्ण भारत ही उनकी संपत्ति होगी। इसका एक पहलू भ्रष्टाचार भी है। ऐसा कोई प्रमुख राज्य नहीं जहां वक्फ संपत्तियों में भ्रष्टाचार के मामले नहीं चल रहे हों। जहां कांग्रेस और केजरीवाल की आम आदमी पार्टी जैसे मुस्लिम तुष्टिकरण वाली पार्टियों ने वक्फ बोर्डों की आड़ में वोट बैंक तैयार करने की कोशिश की है, उससे हिन्दुओं को अपनी संपत्ति और मंदिरों को बचाना मुश्किल हो रहा है। इससे अब देश भर में वक्फ बोर्ड को दी गयी असीमित शक्तियों के खिलाफ आवाजें उठ रही हैं। इसे तुरंत प्रभाव से प्रतिबंधित करने की मांग हो रही है। अगर वक्फ संपत्तियों का सर्वे सही तरीके से हो तो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के कई नेता बेनकाब होंगे और उनकी असलियत पूरे समाज के सामने आ जाएगी।