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प्रोफेसर जोसफ का हाथ काटने से प्रवीण नेट्टारू की हत्या तक: PFI और शरिया कोर्ट, इस्लामीकरण के विरोधी हिंदुओं के कत्लेआम का फरमान

                                                                                                      फोटो साभार: फोर्ब्स एवं ऑपइंडिया
आज कन्हैया की निर्मम हत्या से जो हिन्दू स्वयंसेवी संस्थाएं हरकत में आयी हैं, अगर ये 4 जुलाई 2010 को जब प्रश्नपत्र में पैगम्बर के विषय में प्रश्न पूछे जाने पर प्रश्न पत्र तैयार करने वाले प्रो जोसफ का हाथ काट दिया था। वैसे तो देश के इस्लामीकरण का संकेत 1926 में ही मिल गया था, जब अब्दुल राशिद ने स्वामी श्रद्धानन्द का क़त्ल किया था 
और महात्मा गाँधी राशिद के पक्ष में खड़े हो गए थे। वह भारत को इस्लामिक बनाने का स्पष्ट संकेत था। वैसे इसकी तैयारी तो रामजन्मभूमि आंदोलन के समय चल रही थी। लेकिन हिन्दू समाज और हिन्दू स्वयंसेवी संस्थाएं पता नहीं किस नशे में रहे। अब जब ये जेहादी देश में अपना जाल बिछा चुके हैं, तब इनका नशा उतरना शुरू है। इजराइल, चीन और फ्रांस से कुछ सीखो। उनके फैसले पर सारे मुस्लिम देश तक खामोश हैं, किसी की आवाज़ नहीं निकल रही। इन देशों में और भारत में फर्क इतना है कि वहां देश की खातिर विपक्ष सरकार के साथ खड़ा है, परन्तु यहाँ कुर्सी का भूखा विपक्ष धर्म निरपेक्षता के नाम पर विधवा विलाप कर कट्टरपंथियों के लिए ग्लूकोस और ऑक्सीजन का काम करता है। 

                       याद करो जब केरल के प्रोफेसर पर ईशनिंदा का आरोप लगा उनका हाथ काट दिया गया था

अफगानिस्तान में सजा के तौर पर हाथ काटने, आँख निकालने, गला काटने, पत्थर मारकर मौत के घाट उतारने, सरेआम फाँसी देने और मृतक के शवों को सार्वजनिक जगहों पर खुलेआम लटकाने जैसी घटनाओं के बारे में अक्सर हम पढ़ते और सुनते हैं। ये सजाएँ इस्लामी नियमों और कानूनों के तहत दी जाती हैं। इसका निर्धारण इस्लामी कोर्ट यानी शरिया अदालतें करती हैं, जिन्हें दारुल कजा (Darul Khada) कहा जाता है।

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दारुल कजा का अर्थ होता है, न्याय का घर या अल्लाह का घर। यह वही दारुल कजा उर्फ शरिया कोर्ट है, जिसने साल 2010 में केरल के थोडुपुझा में स्थित न्यूमैन कॉलेज के ईसाई प्रोफेसर टीडी जोसेफ का हाथ काटने का आदेश दिया था। प्रोफेसर जोसेफ पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने इस्लाम के पैगंबर का अपमान किया है। दारुल कजा की भूमिका का खुलासा PFI के गिरफ्तार सदस्य अशरफ ने किया था।

कुछ दिन पहले कर्नाटक में भाजयुमो (BJYM) के नेता प्रवीण नेट्टारू की जिस तरह से हत्या की गई है, उसमें ऐसे में PFI और दारुल कजा संदेह के घेरे में है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसावाराज बोम्मई ने कहा था कि हत्यारे केरल से आकर घटना को अंजाम दिए और वापस भाग गए, ऐसा संदेह है।

NIA ने कुछ साल पहले केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में PFI की आतंकी गतिविधियों और उसके मजबूत आधार पर एक रिपोर्ट दी थी। हाल के दिनों में कथित ईशनिंदा के नाम पर देश के अलग-अलग हिस्सों में दंगा करने और हत्या करने की घटनाओं के लिंक PFI से जुड़े हुए पाए गए हैं। इसमें में इसके कंगारू कोर्ट को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

देश भर में दारुल कजा, AIMPLB ने हर जिले के लिए की थी वकालत

देश के न्यायिक व्यवस्था के समानांतर ये दारुल कजा आज देश के तमाम राज्यों में अवैध रूप से चल रही हैं। साल 2018 में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इन शरिया अदालतों को बढ़ाकर देश के हर जिले में खोलने की वकालत की थी। हालाँकि, उस वक्त इसका काफी विरोध हुआ था, लेकिन यह काम रूका नहीं।
छह महीना पहले एदार-ए-शरिया झारखंड के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी ने कहा था कि राज्य के सभी जिलों में दारुल कजा या शरिया कोर्ट स्थापित किया जाएगा। मार्च 2022 तक राज्य के डाल्टनगंज, गोड्डा, मधुपुर और जामताड़ा में इसकी शाखाएँ खोलने का लक्ष्य रखा था।
उस दौरान रिजवी ने बताया था कि जमशेदपुर, राँची, धनबाद, दुमका, हजारीबाग, कोडरमा, लोहरदग्गा, राजमहल (साहिबगंज) और बोकारो में पहले से ही शरिया कोर्ट संचालित हैं। उन्होंने तर्क दिया था कि मुस्लिमों की माँग पर इसे खोला जा रहा है।
मुस्लिम स्कॉलर द्वारा आमतौर पर तर्क दिया जाता है कि दारुल कजा में मुस्लिमों के छोटे-मोटे और घरेलू मुकदमों को देखा जाता है और उनमें सुलह कराकर कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने से बचाया जाता है। इससे देश की न्यायिक व्यवस्था पर से भार कम होता है।
हालाँकि, देश में बढ़ते इस्लामी कट्टरपंथ और इन शरिया अदालतों के संबंध स्पष्ट रूप से सामने आए हैं। कट्टरपंथी संगठनों ने भी शरिया कोर्ट स्थापित की है और मुस्लिमों को कोर्ट के बदले इन दारुल कजा में जाने के लिए प्रेरित किया है।

PFI ने साल 2009 में बनाई अपनी दारुल कजा

पिछले कुछ वर्षों से आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) और तालिबान की स्टाइल में लोगों को मारने के कारण चर्चा में आए चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने भी शरिया कोर्ट स्थापित की है।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को पता चला है कि ये अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में समानांतर न्याय-व्यवस्था चलाते हैं और मुस्लिमों से जुड़े मुद्दों को सुलझाती है। रिपोर्टों के अनुसार, PFI की राजनीतिक शाखा सोशल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ इंडिया (SDPI) के राष्ट्रीय प्रमुख और संस्थापक ई अबूबकर ने साल 2009 में अपनी शरिया कोर्ट यानी दारुल कजा की स्थापना केरल में की थी।

इसमें उसने मुस्लिम विद्वानों के साथ-साथ अधिवक्ताओं को शामिल किया था। हालाँकि, बाद के वर्षों में धर्मांतरण का विरोध करने वाले हिंदुओं और कई नेताओं की हत्याओं में इस शरिया कोर्ट की भूमिका पाई गई।

धर्मांतरण का विरोध करने वाले हिंदू नेताओं की ‘दावा’ टीम द्वारा हत्या

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह भी पता चला है कि PFI का दारुल कजा केरल में ना सिर्फ मुस्लिमों को न्यायालयों में जाने रोकता है, बल्कि ये उन हिंदू नेताओं की हत्या करने का भी निर्देश भी देता है, जो इन शरिया कोर्ट का विरोध करते हैं। इसके साथ ही यह मुस्लिमों से जुड़े मामलों में यह हिंदुओं की टारगेट किलिंग करने का निर्देश देता है।
कई हिंदू नेताओं की हत्या से जुड़े मामलों की जाँच के दौरान NIA को यह भी पता चला कि PFI ने हत्याओं के जरिए हिंदुओं में डर पैदा करने के लिए ‘दावा’ टीम का गठन किया है। इस टीम का मुख्य काम सामाजिक कार्य के नाम पर हिंदुओं का इस्लाम में धर्मांतरण है और जो इस धर्मांतरण का विरोध करे उसकी हत्या करना है।
PFI का सत्यसारणी केंद्र इसका प्रमुख उदाहरण है, जहाँ हिंदुओं लड़कियों को लव जिहाद में फँसाकर लाया जाता है और उनका ब्रेनवॉश कर उन्हें इस्लाम में धर्मांतरित किया जाता है। लव जिहाद के अलावा कई तरह के प्रलोभन और डर पैदा करके भी ये धर्मांतरण का काम करते हैं।

NIA ने साल 2017 में गृह मंत्रालय को सौंपे अपने डोजियर में कहा था कि केरल के मंजेरी स्थित सत्यसारणी इस्लामिक दावा इंस्टीट्यूट उर्फ मरकज-उल-हिदया धर्मांतरण केंद्र के रूप में काम करता है। इतना ही नहीं, यहाँ आने वाले लोगों को धर्मांतरण के लिए बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण दिया जाता है और उनका ब्रेनवॉश किया जाता है।

ईसाई प्रोफेसर का हाथ काटकर ‘ईशनिंदा’ की सजा

साल 2010 में केरल के थोडुपुझा स्थित न्यूमैन कॉलेज के ईसाई प्रोफेसर टीडी जोसेफ ने B.Com कक्षा के लिए एक प्रश्न-पत्र तैयार किया था। क्लास के मुस्लिम छात्रों ने हंगामा कर दिया कि इसमें इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद का अपमान किया गया है।

इसके बाद PFI से जुड़े 8 मुस्लिमों के एक समूह ने प्रोफेसर जोसेफ का दाहिना हाथ काटकर उस समय अलग कर दिया, जब वे मुवत्तुपुझा के निर्मला चर्च में रविवार की प्रार्थना सभा से भाग लेकर अपनी माँ और बहन के साथ वापस घर लौट रहे थे।

इस मामले में गिरफ्तार अशरफ नाम के एक आरोपित ने बताया था कि शरिया कोर्ट उर्फ दारुल कजा ने ईशनिंदा के आरोप में प्रोफेसर जोसेफ का हाथ काटने की सजा सुनाई थी और ऐसा करने के लिए उसे निर्देश दिया गया था। उस दौरान केरल के शरिया कोर्ट का समन्वयक मौलवी ईसा था और उसी के अंतर्गत आने वाले कोर्ट ने यह सजा सुनाई थी।

धर्मांतरण का विरोध करने पर हुई थी रामालिंगम की हत्या

फरवरी 2019 में तमिलनाडु के तंजावूर में रामलिंगम की PFI के ‘दावा’ दल ने धारदार हथियार से काटकर हत्या कर दी थी। रामलिंगम ने PFI द्वारा किए जा रहे धर्मांतरण का विरोध किया था। इसके बाद चरमपंथी संगठन ने उनकी हत्या कर दी थी।

NIA को पता चला कि PFI की विचारधारा से मेल खाने के कारण कुख्यात आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने भी उसकी मदद की। इसके बाद PFI ने केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में अपने आधार को खूब मजबूत किया। उसने बड़े पैमाने पर हथियार खरीदे और लोगों को प्रशिक्षित किया।

देश में हत्याओं का एक ही पैटर्न और PFI का जनाधार

आज प्रवीण नट्टारे ही नहीं, राजस्थान में कन्हैया लाल की हत्या, अमरावती में उमेश कोल्हे की हत्या, कानपुर में सांप्रदायिक दंगों का मुख्य आरोपित जफर हयात हाशमी और अजमेर के चिश्ती दरगाह के खादिम द्वारा PFI का सदस्य होने की स्वीकृति इसके फैलाव की ओर इशारा करती हैं।

हाल ही में बिहार के फुलवारी शरीफ में छापेमारी के बाद PFI की ‘विजन 2047’ दस्तावेज का खुलासा हुआ और उसके प्रशिक्षण स्थलों के बारे में जानकारी मिली। जाँच के दौरान यह बात भी खुल कर सामने आ रहा है कि बिहार में PFI के कैडर बड़ी संख्या में मौजूद हैं। बिहार में इस संगठन ने 25 हजार से अधिक लोगों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी है।

NIA ने अपनी रिपोर्ट में बताया था PFI को कट्टरपंथी संगठन

आतंकी गतिविधियों में शामिल होने को लेकर NIA ने PFI की जाँच की थी। साल 2017 में अपने डोजियर (रिपोर्ट) में NIA ने कहा था कि पीएफआई के आतंकी संपर्कों को लेकर उसके पास पर्याप्त साक्ष्य हैं।

गृह मंत्रालय को सौंपे गए इस डोजियर में NIA ने PFI द्वारा प्रोफेसर जोसेफ का हाथ काटने से लेकर हथियार चलाने एवं देशी बम बनाने के लिए चलाए जा रहे शिविर तक का जिक्र किया था। इसके अलावा बंगलुरु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेता रुद्रेश की हत्या का भी जिक्र किया गया था।

NIA ने यह भी कहा था कि PFI अपने कैडरों को इस्लामी मूल्यों के रखवाले के रूप में संदर्भित करता है। इसलिए वह लोगों को कोर्ट में जाने के बजाए शरिया कोर्ट में जाने के लिए कहता है। उसने दारुल कजा की भी स्थापना की थी, जो मुस्लिमों के मामलों की सुनवाई करता था।

शरिया कोर्ट और सरकार एवं सुप्रीम कोर्ट

देश में संवैधानिक न्यायिक व्यवस्था के समानांतर न्यायिक व्यवस्था चलाई जा रही है। यह खुलेआम हो रहा है। स्वत: संज्ञान लेकर मामले की सुनवाई करने वाले संविधान के रखवाले सुप्रीम कोर्ट ने शरिया कोर्ट और इसके फैसले अथवा फतवे को लेकर एक मामले की सुनवाई की थी।

विश्वलोचन मदन बनाम भारत संघ एवं अन्य (2014) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि शरिया अदालतों द्वारा दिए गए फतवे या इस्लामी आदेशों का ‘स्वतंत्र भारत में कोई स्थान नहीं है’ और इन्हें मासूमों को दंडित करने के लिए उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने आगे यह भी कहा था कि इन अदालतों का सलाह मानना बाध्यकारी नहीं है और कोई भी पक्ष इसे स्वीकार या अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र है। हालाँकि, दारुल कजा को अवैध घोषित करने से सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट मना कर दिया था।

साल 2010 में जब केरल में प्रोफेस जोसेफ का हाथ काट दिया गया था, तब केरल के तत्कालीन गृहमंत्री कोडियेरी बालकृष्णन ने विधानसभा को बताया था कि सरकार शरिया अदालतों के कामकाज की जाँच करेगी। हालाँकि, वह जाँच हुई या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। हाँ, केरल सरकार की तुष्टिकरण की खबरें समय-समय पर सामने आती रहती हैं।

‘मुस्लिम महिलाओं के हस्तमैथुन’ से लेकर ‘सेक्स के बाद नहाने’ तक: दारुल उलूम देवबंद के फतवे

इस्लाम में ‘क्या सही है और क्या नहीं’ इसकी जानकारी के लिए दारुल उलूम देवबंद के पास सैंकड़ों मुस्लिम आते हैं। वे अपनी निजी जीवन से संबंधी कुछ सवाल करते हैं और देवबंद से उन्हें जवाब ‘क्या हलाल है क्या हराम’ इसके आधार पर फतवा जारी करके दिया जाता है। इन्हीं सवालों में कई सवाल महिलाओं से जुड़े होते हैं। कुछ प्रश्न हस्तमैथुन पर होते हैं, कुछ सेक्स से जुड़े और कुछ गैर मजहबी औरतों से जुड़े।

ऑपइंडिया दोबारा कुछ चुनिंदा सवालों की सूची आपके लिए देवबंद की साइट दारुलइफ्ता से लेकर आया है। ये सारे सवाल महिलाओं से संबंधी हैं।

गैर-किताबी महिला से निकाह 

दारुलइफ्ता साइट पर जॉर्डन के एक शख्स ने मजहबी सलाह पाने के लिए दारुल उलूम से सवाल किया कि उसने एक जर्मन लड़की से शादी की थी। मगर लड़की न तो इस्लाम और न ईसाइयत और न ही कोई धर्म मानती है। वह मौत के बाद की जिंदगी और हूरों में भी विश्वास नहीं करती। मगर निकाह से पहले उसने ‘ला इला इल्लाह’ बोला है। शौहर ने पूछा कि आखिर उनकी शरिया के अनुसार क्या स्थिति है। वो अपनी बीवी को छोड़ना नहीं चाहता।

एक मजहबी शौहर के सवाल पर दारुल उलूम ने कहा कि अगर उस व्यक्ति की बीवी कोई मजहब नहीं मानती है तो मतलब है कि वो नास्तिक है/काफिर है। उससे साफ पूछा जाना चाहिए कि वो अल्लाह को मानेगी या नहीं और अगर वो मानने से मना करती है तो उससे फौरन दूरी बना ली जानी चाहिए।

वलीमा के कार्ड में दुल्हन का नाम

गैर-मजहबी महिला से जुड़े सवाल के अलावा इस साइट पर कई सवाल मजहबी लड़कियों/महिलाओं को लेकर भी हैं। यहाँ एक व्यक्ति ने सवाल किया हुआ है कि क्या वो अपने वलीमा के कार्ड में अपनी होने वाली बीवी का नाम छपवा सकता है या नहीं। इस सवाल के जवाब में दारुल उलूम देवबंद ने उसे बताया कि होने वाली बीवी का नाम दावत पत्र में नहीं लिखवाना चाहिए।

बैंक में काम करने वाले आदमी के घर निकाह

अगला सवाल है कि क्या उस परिवार से निकाह के ऑफर को स्वीकारा जाना चाहिए जहाँ लड़की के पिता बैंक क्षेत्र में हों। इस प्रश्न के जवाब में दारुल उलूम की ओर से कहा गया कि जो लोग हराम के पैसे कमाते हैं उनमें  नैतिकता की कमी होती है इसलिए ऐसे रिश्तों से बचा जाना चाहिए।

मुस्लिम महिला हस्तमैथुन कर सकती है क्या?

मजहबी शिक्षा से संबंधी साइट पर हस्तमैथुन को लेकर भी सवाल किए गए हैं। पूछा गया है कि क्या शरिया लॉ के अनुसार मुस्लिम लड़की हस्तमैथुन कर सकती है या नहीं। देवबंद ने इस सवाल पर जवाब दिया कि किसी भी मुस्लिम लड़की को ऐसे गुनाह करने से बचना चाहिए।

यौन संबंध के बाद नहाना जरूरी या नहीं?

ये सवाल एक महिला ने किया है। वह पूछती हैं कि अगर कोई शादीशुदा महिला सिर्फ संतुष्टि के लिए उंगली से स्पर्श करवाती है और कोई तरल पदार्थ बाहर नहीं निकलता तो क्या नहाना या खुद को साफ करना जरूरी है या नहीं। इसके जवाब में उसे बताया गया कि अगर खातून बिना किसी वासना के अपनी योनि में उंगली डालती है और उसे कुछ महसूस नहीं होता तो नहाना आवश्यक नहीं है। मगर ये काम अगर शौहर ने किया हो तो नहाना जरूरी है।

बहन की आधुनिक शिक्षा पर सवाल

इस साइट पर एक व्यक्ति ने अपनी 14 साल की बहन के लिए सवाल किया कि उसकी बहन मॉर्डन शिक्षा ले रही है और इस्लाम के निर्देश नहीं मानती। उसे इस्लामी संस्थान भी भेजा गया। दारुल उलूम ने इस सवाल को सुनकर कहा कि उन लोगों की कोशिशें फायदा देंगी और बहन जल्दी इस्लामी मानदंडों को अपनाना शुरू कर देगी।
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कंडोम से लेकर पेपर में नकल, स्मार्टफोन के कैमरे और फर्जी अटेंडेस तक… दारुल उलूम देवबंद के 6 अजीब
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अपने विवादित फतवों के कारण आए दिन चर्चा में रहने वा

विवादित फतवों के लिए नामी है दारुल उलूम देवबंद

इस्लामी शिक्षा देने के लिहाज से स्थापित किया गया दारुल उलूम देवंबंद मुस्लिमों में बेहद जाना-माना शिक्षण संस्थान है। ये उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में स्थित है और विवादित फतवों के लिए जाना जाता है। साल 2018 में इनकी ओर से सीसीटीवी लगाने का विरोध किया गया था। इसी प्रकार महिलाओं के फुटबॉल देखने पर भी इन लोगों ने विरोध किया हुआ है। इतना ही नहीं, एक बार इस जगह से फतवा जारी किया गया था कि चूड़ियाँ पहनाते वक्त भी दुकानदार को महिला को छूना नहीं चाहिए। अभी हाल में ‘गोद लिए बच्चे के वारिस बनने या न बनने’ पर फतवा जारी करके ये विवादो में आया था।

तालिबान के लिए महबूबा मुफ्ती की राय पर लोगों ने कहा- ‘इन्हें भेज दो अफगानिस्तान’

सितम्बर 8 को News18 पर तालिबान पर चर्चा के दौरान एक मुस्लिम नेता ने तालिबान का बचाव करते महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों पर जैसे ही कहा कि "मुझे नहीं मालूम" वहां मौजूद अफगानी महिलाओं ने उन्हें इतना जलील किया किया अगर शर्म होगी तो शायद ज़िंदगी में कभी ये मुस्लिम नेता और शोएब जामई तालिबान का बचाव करने किसी टीवी चैनल पर नहीं आएंगे। वैसे यह कुछ दिन पूर्व हुई चर्चा को पुनः चलाया गया था। इसी चर्चा में शहज़ाद पुणेवाला, मुस्लिम विश्लेषक ने तालिबान का समर्थन करने वालों अफ़ग़ानिस्तान जाने की सलाह दे डाली। 

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार की घोषण के बाद कुछ कश्मीरी नेता अब तालिबान का गुणगान कर रहे हैं। फारूक अब्दुल्ला के बाद महबूबा मुफ्ती ने इस विषय पर बयान दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कुलगाम में कहा कि तालिबान हकीकत बन कर सामने आ रहा है। ऐसे में अगर वो अपनी छवि को बदलेगा तो दुनिया के लिए मिसाल बन सकता है।

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती कहती हैं, “तालिबान हकीकत बनकर उभरा है। अगर वे इस बार शासन करना चाहते हैं तो शरिया जो कहता है जिसमें, औरतों, बूढे, बच्चों के अधिकारी है और किस तरह शासन करना चाहिए। अगर वे इसपर अमल करना चाहते हैं तो मुझे लगता है वे(तालिबान) दुनिया के लिए मिसाल बन सकते हैं। अगर वो उस पर अमल करेंगे तभी दुनिया के देश हैं उनके साथ कारोबार कर सकते हैं।”

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक मुफ्ती कहती हैं, “खुदा ना खास्ता अगर जो बीते सालों का वह अपना एक तरीका अपनाएँगे तो फिर सारी दुनिया के लिए ही नहीं अफगानिस्तान के लोगों के लिए भी मुश्किल हो जाएगी।”

इससे पहले तालिबान के पक्ष में फारूक अब्दुल्ला ने बयान दिया था। उन्होंने तालिबान का राग अलापते हुए कहा था, “मुझे उम्मीद है कि वे (तालिबान) इस्लामी सिद्धांतों का पालन करते हुए उस देश (अफगानिस्तान) में सुशासन देंगे और मानवाधिकारों का सम्मान भी करेंगे। उन्हें हर देश के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करने का प्रयास भी करना चाहिए।”

महबूबा मुफ्ती और अब्दुल्ला जैसे नेताओं के मुँह से तालिबान के पक्ष में बयानबाजी सुनने के बाद सोशल मीडिया यूजर गुस्साए हुए हैं। एक यूजर लिखता है, “मैं भारत सरकार से अनुरोध करता हूँ कि इन्हें अफगानिस्तान भेजे ताकि तालिबानी शासन में ये चैन से जिएँ। 8 माह की गर्भवती औरत की हत्या देखने के बाद भी ये ऐसे बोल रही हैं। भगवान ऐसे लोगों से जम्मू-कश्मीर को बचाए।”

कपिल मिश्रा का सिर काटने पर 1 लाख रूपए का ऐलान : अजहरुद्दीन अंसारी

क्या दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल अपने पूर्व मंत्री और वर्तमान में भाजपा नेता कपिल मिश्रा को आयी धमकी को गंभीरता से लेंगे? दिल्ली में किसी न किसी कारण शांतिदूत हिन्दुओं की हत्या कर रहे हैं, नागरिकता संशोधक कानून की आड़ में हिन्दू विरोधी दंगे, हिन्दू और हिन्दुत्व के विरुद्ध नारेबाजी आदि आदि होने पर भी चुप्पी साधे रहना उनकी निष्ठा पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। नाराजगी केन्द्र में मोदी सरकार से थी, हिन्दू और हिन्दुत्व को अपमानित करना किसी षड़यंत्र का स्पष्ट प्रमाण है। 

क्या भाजपा विरोधियों के शांतिदूत फ़्रांस की आग भारत में लगाएंगे?  
भाजपा नेता कपिल मिश्रा को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिए जान से मार डालने की धमकी दी गई है। अजहरुद्दीन नामक व्यक्ति ने उनके एक फेसबुक पोस्ट पर टिप्पणी की है कि जो भी कपिल मिश्रा का सिर काट कर ले आएगा, उसे वो 1 लाख रुपए का इनाम देगा। साथ ही उसने कपिल मिश्रा के लिए गाली का भी प्रयोग किया। दिल्ली के पूर्व मंत्री ने ट्विटर पर अजहरुद्दीन की टिप्पणी का स्क्रीनशॉट डाल कर उसकी पोल खोली।

साथ ही उन्होंने धमकी देने वाले अजहरुद्दीन के फेसबुक प्रोफाइल का लिंक और उसकी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “ये कमेंट मेरे फेसबुक पर किया गया हैं। मेरा सिर काटने पर एक लाख का ईनाम घोषित करने वाला ये आदमी दिल्ली में ही रहता है।” अजहरुद्दीन अपने फेसबुक टाइमलाइन पर भी अक्सर भाजपा विरोधी पोस्ट डालता रहता है। अजहरुद्दीन अंसारी ने अपना निवास स्थान दिल्ली ही डाल रखा है।

कपिल मिश्रा द्वारा उसकी करतूतों को शेयर किए जाने के बाद गुस्साए लोगों ने पुलिस से उसके खिलाफ कार्रवाई की माँग की। कई लोगों ने अजहरुद्दीन की तस्वीर शेयर कर दिल्ली पुलिस को टैग किया और उसकी गिरफ़्तारी की माँग की। लोगों ने याद दिलाया कि आजकल फ्रांस में जो कुछ भी हो रहा है, उसे देखते हुए ऐसे तत्वों पर कड़ी कार्रवाई की ज़रूरत है क्योंकि ये कुछ भी कर सकते हैं। कई लोगों ने कपिल मिश्रा के प्रति समर्थन जताया।

कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया पर फ्रांस का समर्थन किया और हो रही आतंकी घटनाओं की निंदा की थी। साथ ही राजस्थान में जब पुजारी की हत्या हुई थी तो उन्होंने धन इकट्ठा कर के पीड़ित परिवार की मदद की थी। वो दिल्ली के आदर्श नगर में मार डाले गए राहुल राजपूत के भी परिजनों से मिले थे। इन कारणों से वो हमेशा से इस्लामी कट्टरवादियों की आलोचना का शिकार बनते रहे हैं। उन्होंने दिल्ली दंगे के पीड़ितों के लिए भी डोनेशन अभियान चलाया था। 

तेलंगाना : शरिया के हिसाब से कंगारू कोर्ट के गठन की कवायद? वक्फ बोर्ड को ज्यूडिशियल पावर देने की तैयारी

तेलंगाना में शरिया अदालतों की तैयारी?
                                                                                                                                                         प्रतीकात्मक 
ऐसा लगता है कि तेलंगाना की सरकार शरिया कानून के हिसाब से कंगारू अदालतों के गठन का मन बना रही है। इसके लिए वक़्फ़ बोर्ड को ज्यूडिशियल पावर देने की तैयारी चल रही है। यह खुलासा ‘तेलंगाना टुडे’ की रिपोर्ट से हुआ है।
राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री कोप्पुला ईश्वर ने कहा कि वक्फ बोर्ड को न्यायिक दर्जा देने के मुद्दे पर जल्द ही मुख्यमंत्री द्वारा विचार किया जाएगा। AIMIM के अकबरुद्दीन ओवैसी द्वारा उठाए गए एक सवाल के जवाब में मंत्री ने आश्वासन दिया कि तेलंगाना सरकार राज्य भर में वक़्फ़ बोर्ड की संपत्तियों की सुरक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही वक़्फ की जमीनों के हुए दूसरे सर्वे के लिए गैजेट नोटिफिकेशन आने में देरी को लेकर भी उन्होंने बैठक बुलाने का आश्वासन दिया।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) सहित कट्टरपंथी मुस्लिम लंबे समय से भारत में शरिया अदालतें स्थापित करने की माँग कर रहे हैं। AIMPLB यहाँ तक यह दावा कर चुका है कि वह देश के प्रत्येक जिले में शरिया अदालतें स्थापित करना चाहता है।
तेलंगाना सरकार द्वारा शरिया अदालतों को वैध बनाने पर विचार करने का निर्णय खतरनाक परिणामों से भरा हुआ है। यह देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए आफत पैदा कर सकता है। अगर इसे तेलंगाना सरकार द्वारा अधिकृत किया गया तो इसका अन्य राज्य सरकारों द्वारा अनुसरण किया जा सकता है, जो मुस्लिम कट्टरपंथियों का समर्थन हासिल करने के लिए अपने राज्यों में इसी तरह के आदेश पारित करने के लिए इसका इस्तेमाल करेंगे।
शरिया अदालतें न्यायिक अदालतों के अधिकार को कमज़ोर कर देंगी और देश में एक समानांतर न्यायिक प्रणाली के समान होगी। इतना ही नहीं यह मुल्लों को इस्लाम और सख्ती से स्थापित करने का अवसर भी प्रदान करेगा। जो लोग इसका विरोध करेंगे उन्हें इस्लामी कानून के हिसाब से दंडित करने का अधिकार भी इन्हें मिल जाएगा। इसके जरिए मुल्ले इस्लाम के मध्ययुगीन कानून को फिर से लागू करने का दबाव भी बनाएँगे। जिसके परिणामस्वरूप राज्य में न्यायिक व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो जाएगी।

कांग्रेस के दलित विधायक के भतीजे का सर कलम करने वाले को ₹51 लाख का इनाम :पूर्व सपा नेता शाहजेब रिजवी

Former SP leader Shahzeb Rizvi
जिस समाज की खातिर समाजवादी पार्टी के मुखिया एवं तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने निहत्ते रामभक्तों पर गोली चलवाकर खून की होली खेली थी, उसी पार्टी मुस्लिम हितों को सर्वोपरि मानने वाले शाहज़ेब रिज़वी ने बेंगलुरु की आग को भड़का रहा है, फिर कहते हैं अपने आपको समाजसेवी। ऐसे दो टके के नेता जनता हितैषी का चोला ओढ़ सरकार और जनता को मुर्ख बनाने का काम कर रहे हैं। रिज़वी ने भले ही पार्टी छोड़ दी हो, लेकिन उसको मालूम है कि जो मै कहने जा रहा हूँ, अगर सरकार कोई कार्यवाही करती है तो अखिलेश और मुलायम सिंह जरूर मेरे बचाव में आएंगे। इन्ही जैसे फिरकापरस्त लोगों की वजह से बेगुनाह मुसलमान बदनाम हो रहा है। 
उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकारों को सबसे पहले इस शांतिप्रिय, गरीब, मजलूम और नासमझ को किसी भी रूप में मिलने वाली सरकारी सहायता को बंद कर इसके और इसके परिवार के बैंक खातों की जाँच करे। भड़काऊ पोस्ट डालकर फरार रिज़वी जब भी पकड़ में आये, इसे संरक्षण देने वालों को गुनहगार को पनाह देने के जुल्म में गिरफ्तार किया जाए। साथ में यह भी कानून बनाकर संसद में पारित करवाएं कि "जब किसी को मोहम्मद के खिलाफ कोई भी टिप्पणी बर्दाश्त नहीं, तो हिन्दू देवी-देवताओं पर अभद्र व्यंग अथवा टिप्पणी करने वाले को भी एक निश्चित अवधि की कारावास और नकद जुर्माना देना होगा।"     
मुस्लिम नेता शाहजेब रिजवी (Shahzeb Rizvi) ने गुरुवार (13 अगस्त, 2020) को एक विवादित वीडियो पोस्ट करते हुए बेंगलुरु में कांग्रेस के दलित विधायक के भतीजे नवीन का सिर काटने पर 51 लाख रुपया का इनाम रखा है। नवीन ने पैगम्बर मोहम्मद के खिलाफ़ आपत्तिजनक पोस्ट किया था। सोशल मीडिया पर यह वीडियो इस वक्त तेजी से वायरल हो रहा है।
शाहजेब रिजवी ने अपने विवादित वीडियो में कहा, “फेसबुक पोस्ट के माध्यम से उसनें हुजूर के शान में जो गुस्ताखी की है, मैं उसकी कड़ी शब्दों में निंदा करता हूँ, रिजवी ने ऐलान किया की इस युवक जो सर कलम करके लाएगा उसे मैं 51 लाख का नगद ईनाम दूँगा। रिजवी ने मुस्लिमों से अपील की है कि सब मिलकर 51 लाख रुपए जमा करो।”


हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक शाहजेब रिजवी उत्तरप्रदेश के मेरठ में फलावदा थाना क्षेत्र के रसूलपुर गाँव के रहने वाला हैं। वह पहले समाजवादी पार्टी का अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश सचिव रह चुका है। लेकिन इस वक्त वह सपा में सक्रिय नहीं हैं। पिछली बार जिला पंचायत के चुनाव में वह हार गया था।
फिलहाल मेरठ पुलिस रिजवी की धरपकड़ में जुट गई है। इस विवादित वीडियो को एसएसपी अजय साहनी ने संज्ञान में लेते हुए थाना अधिकारियों को जाँच के आदेश दिए है। पुलिस मामले की तहकीकात में जुट गई है।
कांग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे नवीन के फेसबुक पोस्ट को लेकर सारा विवाद शुरू हुआ था। उस पर पैगम्बर मुहम्मद को लेकर विवादित पोस्ट डालने का आरोप है।
बेंगलुरु दंगों में शामिल अब तक हिंसा करने वालों में से 150 को गिरफ्तार किया गया है। बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर कमल पंत ने लोगों को शांति बनाए रखने की अपील की है। इस घटना में 3 लोग मारे गए और 60 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इसके साथ ही दंगाइयों ने 250 के करीब गाड़ियों को आग लगा दी और करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुँचया है।
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सोशल मीडिया पर अभी तक भी नवीन को लेकर मुस्लिम समुदाय के युवकों में गुस्सा देखा जा रहा है और उसे जान से मारने की बाते.....
मुस्लिम भीड़ ने न सिर्फ कांग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर पर तोड़फोड़ की थी बल्कि बाहर खड़ी गाड़ियों को भी जला डाला था। विधायक आवास में तोड़फोड़ का नज़ारा अभी भी देखा जा सकता है। दंगाइयों ने मजहबी नारे लगाते हुए पत्थरबाजी और आगजनी की। जिसके बाद कर्नाटक के गृहमंत्री बोम्मई ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा था कि सार्वजनिक संपत्ति और वाहनों को नुकसान की भरपाई क्षति पहुँचाने वाले दंगाइयों को करना होगा।