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नूहं हिंसा में शामिल रोहिंग्या और बांग्लादेशियों की 250 झुग्गियों पर प्रशासन ने चलाया बुलडोजर

नूहं में रोहिंग्याओं की बस्ती पर बुलडोजर 
हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिंदुओं की ब्रिजमंडल जलाभिषेक यात्रा पर कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा किए गए हमले के बाद हरियाणा सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। राज्य सरकार ने गुरुवार (3 जुलाई 2023) की शाम को इलाके के लगभग 250 झुग्गियों पर बुलडोजर चलाए हैं। ये झुग्गियाँ रोहिंग्या घुसपैठियों के हैं। इस दौरान रैपिड ऐक्शन फोर्स को तैनात किया गया था।

इसके पहले, गुरुवार (3 जुलाई 2023) की रात को सरकार ने नूहं जिले के SP वरुण सिंघला का ट्रांसफर कर दिया। वह हिंसा के दिन छुट्‌टी पर थे। सिंघला को भिवानी जिले का चार्ज दिया गया है। उनकी जगह नरेंद्र बिजारणिया को नूहं का चार्ज दिया गया है। बिजारणिया भिवानी के SP थे।

हरियाणा सरकार ने तावड़ू में जहाँ बुलडोजर चलाकर झुग्गियों को हटाया है, वहाँ म्यांमार से अवैध रूप से आए हुए रोहिंग्या रह रहे थे। रोहिंग्याओं के 250 से अधिक परिवार पिछले 4 सालों से अधिक समय से हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की जमीन पर अवैध कब्जा कर रह रहे थे। ये यहाँ कूड़ा बिनने और कबाड़ बेचने का काम कर रहे थे।

इसके अलावा, इस इलाके के जिन किसानों की जमीन सरकार ने अधिग्रहित की है, वे भी इन रोहिंग्याओं को किराए पर दे रखे थे और इसके बदले में वे इनसे किराया वसूल कर रहे थे। ये लोग नूहं हिंसा में शामिल थे। पुलिस की FIR में दंगा फैलाने में कई रोहिंग्या युवकों के नाम दर्ज हैं। इनमें से कुछ को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है।

अवैध रूप से बसाई गई इस बस्ती में म्यांमार और बांग्लादेश से आए घुसपैठिए अवैध रूप से रह रहे हैं। करीब 4 घंटे चली कार्रवाई में 200 से अधिक झुग्गियों को गिरा दिया गया। इस दौरान कुछ मुस्लिम महिलाओं ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की सख्ती के बाद वे पीछे हट गईं।

कहा जा रहा है कि मेवात के कई इलाकों में ये घुसपैठिए अवैध रूप से रह रहे हैं। तावडू के अलावा नूहं, पुन्हाना, पिनगवां, नगीना और फिरोजपुर झिरका में भी ये घुसपैठिए सैकड़ों की संख्या में झोपड़ी बनाकर रह रहे। उनके उपर भी प्रशासन अब कार्रवाई करने की योजना बना रहा है।

इसके साथ ही, आज शुक्रवार होने के कारण नूहं के मुस्लिमों को जुमे की नमाज अपने घरों में पढ़ने के लिए कहा गया है। नूंह के कलेक्टर प्रशांत पंवार और पुलिस अधीक्षक ने उलेमाओं से कहा कि प्रशासन के इस निर्णय का वे सख्ती से पालन कराएँ। इसके साथ ही गुरुग्राम सहित अन्य इलाकों में जुमे की नमाज खुले में न पढ़ने के लिए कहा गया है।

इलाके में तनाव को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। हिंसा के चलते 4 जिलों- नूहं, पलवल, फरीदाबाद और गुरुग्राम में हालात तनावपूर्ण हुए हैं। जुमे को देखते हुए मस्जिदों के पास पुलिस बल तैनात किए गए हैं। इन चार जिलों में पैरामिलिट्री फोर्स की 20 कंपनियाँ तैनात की गई हैं।

इसके साथ ही राज्य के 9 जिलों में धारा 144 लागू किया गया है। नूहं, पलवल, फरीदाबाद और गुरुग्राम के सोहना, मानेसर और पटौदी में 5 अगस्त 2023 तक इंटरनेट और SMS सेवा बंद की गई है। हालाँकि, CET स्क्रीनिंग टेस्ट को देखते हुए गुरुवार को दोपहर 1 से 4 बजे तक बैन हटाया गया था।

नूहं में हुई हिंसा में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में होमगार्ड के गुरसेवक और नीरज शामिल हैं। इसके अलावा, नूहं के शक्ति सैनी, पानीपत के अभिषेक चौहान उर्फ अभिषेक राजपूत, गुरुग्राम के इमाम साद, बादशाहपुर के प्रदीप शर्मा और एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं।

इस हिंसा को लेकर पूरे राज्य में पुलिस ने कुल 93 केस दर्ज किए हैं। इनमें अभी तक 186 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पूछताछ के लिए 78 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें ज्यादातर की उम्र 19 से 25 साल के बीच है।

पुलिस द्वारा की जा रही पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि हिंसा के बाद कई आरोपित मेवात की पहाड़ियों में, राजस्थान के जयपुर और उदयपुर तथा उत्तर प्रदेश के मेरठ, आगरा और अलीगढ़ में जाकर छिप गए हैं। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए दबिश दे रही है। 

हिंसा की जाँच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की 8 टीमें और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के 3 दल बनाए गए हैं। पुलिस जाँच में अब तक सामने आया है कि यह हिंसा सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई थी।

पुलिस ने सोशल मीडिया पर 2300 से अधिक वीडियो को चिन्हित किया है, जिनके जरिए अफवाह फैला फैलाया गया और हिंसा भड़काई गई। अब पुलिस इन वीडियो के आधार पर भी कार्रवाई करने में जुटी हुई है।


जमीनी हकीकत जहाँ साहिल खान ने की साक्षी की हत्या : बांग्लादेशी घुसपैठिए, बढ़ती मुस्लिम आबादी, अवैध शराब और ड्रग्स

                         दिल्ली में अवैध शराब-ड्रग्स का बांग्लादेशी कनेक्शन (फोटो साभार: bing AI)
देश श्रद्धा हत्याकांड को भूला भी नहीं कि उससे पहले ही राजधानी दिल्ली में 16 साल की लड़की साक्षी की हत्या ने फिर से पूरे समाज को आक्रोश से भर दिया। हत्या किस जघन्य तरीके से की गई, उस वायरल वीडियो को देखने से स्पष्ट है। इतनी निर्मम हत्या जहाँ हुई, वहाँ का माहौल क्या है? आस-पास कैसा समाज है? पुलिस-प्रशासन को लेकर वहाँ के लोगों का क्या कहना है? इन्हीं चंद सवालों को तलाशते ऑपइंडिया की टीम पहुँची शाहबाद डेरी।

शाहबाद डेरी पहुँच कर सबसे पहले हम गए हत्या वाली जगह पर। वहाँ आस-पास जिन चीजों ने हमारा ध्यान खींचा, उनमें सबसे प्रमुख था एक अवैध मजार का होना। इसके अलावे हत्या वाली जगह के ठीक सामने 200 मीटर की दूरी पर आम आदमी पार्टी के विधायक का ऑफिस भी है। 

अवैध मजार के अलावा हत्या वाली जगह और वहाँ के समाज को देखने पर मोटा-मोटी यह अंदाजा लगा कि सरकारी तंत्र लचर है। किस हद तक लचर है, किन-किन मसलों पर सरकार फेल रही है, यह जानने के लिए हमने वहाँ के कई स्थानीय लोगों से बात की। इलाके में खुलेआम अवैध शराब और ड्रग्स के धंधे पर लोगों ने सरकार और पुलिस को घेरा। इन्हीं लोगों में से एक मिले स्थानीय पत्रकार। देव सिंह हैं उनका नाम।

पत्रकार देव सिंह ‘तेज टी24 न्यूज’ के लिए काम करते हैं। साक्षी की हत्या वाली जगह से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर उनका घर है। ऑपइंडिया से बातचीत में देव ने साक्षी की हत्या के अलावा इस क्षेत्र में लव जिहाद के मामले से लेकर मुस्लिम आबादी और अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों तक की जानकारी दी। देव सिंह ने बताया: “यहाँ धीरे-धीरे मुस्लिमों की आबादी बढ़ती जा रही है। ये लोग जिस मस्जिद और मदरसे में नमाज पढ़ने जाते हैं, वहाँ इन लोगों को इन सब चीजों की ट्रेनिंग दी जाती है। इलाके में होने वाले अवैध धंधों में बांग्लादेशी मुस्लिम भी शामिल हैं।”

सरकारी जमीन-पार्क पर अवैध कब्जा

देव सिंह ने बताया कि शाहबाद डेरी इलाके के आधे से अधिक पार्कों में अवैध कब्जा हो गया है। लोगों को टहलने, घूमने के लिए जगह नहीं बची है। उनके अनुसार यहाँ इतने बड़े-बड़े पार्क हैं, जहाँ लोग आसानी से घूम फिर सकते हैं लेकिन अवैध कब्जों के कारण यह संभव नहीं। लोगों को टहलने के लिए दूर जाना पड़ता है।
इसी समस्या पर आगे बात करते हुए उन्होंने बताया कि जब इलाके की लड़कियाँ घूमने-खेलने दूर जाती हैं तो उनके साथ छेड़खानी होती है। पास में जो पार्क है, उनमें कब्जे हो गए हैं। ऐसे में बच्चे-बच्चियाँ खेलने के लिए आखिर कहाँ जाएँ?

अवैध शराब, ड्रग्स, अफीम… शाहबाद डेरी इलाके में सब कुछ

लचर सरकारी तंत्र (पुलिस और प्रशासन) पर बात करते हुए देव सिंह ने बताया कि शाहबाद डेरी इलाके में अवैध शराब से लेकर ड्रग्स, अफीम सब कुछ आसानी से मिल जाता है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए भी ड्रग्स और शराब के धंधे में लिप्त हैं।
देव के अनुसार मीडिया में खबर आने के बाद एक-दो जगह छापेमारी हो जाती है। लेकिन अवैध धंधा चलता रहता है। शाहबाद डेयरी से लेकर रोहिणी सेक्टर-25, सेक्टर-26, सेक्टर-27 और तमाम झुग्गियों में रहने वाले लोग अवैध शराब, ड्रग्स और सट्टेबाजी का कारोबार करते हैं। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले इसी इलाके से नारकोटिक्स सेल ने 35 लाख रुपए की ड्रग्स बरामद थी।

लव जिहाद का मामला साक्षी तक सीमित नहीं

साहिल खान अक्सर हाथ पर कलावा बाँधता था और साक्षी उसे एक हिंदू समझती थी। देव सिंह ने आशंका जताई कि हो सकता है साक्षी को साहिल के मजहब के बारे में जानकारी हो गई हो। इसके बाद साक्षी ने साहिल से दूरी बनाने की कोशिश की होगी। ये बात साहिल को नागवार गुजरी और उसने साक्षी की बेरहमी से हत्या कर दी।
साक्षी के अलावा शाहबाद डेरी इलाके में कोई दूसरी घटना लव जिहाद से जुड़ी रही हो, इस सवाल पर पत्रकार देव सिंह ने दो मामलों का जिक्र किया। हालाँकि यह भी बताया कि मामले पुराने हैं, इसलिए पीड़ित लड़कियों या आरोपितों का नाम याद नहीं। दोनों मामले किस जगह पर हुए, इसकी जानकारी उन्होंने दी: “इससे पहले यहाँ सेक्टर-25 (रोहिणी) में लव जिहाद का एक मामला सामने आया था। जो काफी दिनों तक चर्चा में था। एक मामला सेक्टर-27 में भी आया था। एक तरफा प्यार के सनकी युवक ने लड़की की हत्या कर दी थी।” 

AAP की केजरीवाल सरकार और क्राइम

दिल्ली में शीला दीक्षित के मुख्यमंत्री रहते रेप-क्राइम कितने थे? केजरीवाल ने भ्रष्टाचार और ‘रेप-कैपिटल दिल्ली’ के खिलाफ सत्ता हासिल की। ऐसे में स्थानीय पत्रकार होने के नाते दोनों वक्त की सत्ता और सरकारी तंत्र में होने वाले क्राइम को लेकर पूछे गए सवाल का देव सिंह ने जो जवाब दिया, वो पढ़िए: “दिल्ली में किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं हुआ। जैसे पहले हालात थे, वैसे ही अब भी हैं। यहाँ आए दिन गौहत्या हो रही है। सबसे अच्छा तो यह है कि इस देश में योगी राज आना चाहिए। जब तक देश में बांगलादेशी और ऐसे लोग हैं, तब तक देश में अपराध कम नहीं होगा।”

असम में 600 मदरसे बंद, सारे बंद करने का इरादा: कर्नाटक में असम मुख्यमंत्री सरमा, कहा- कांग्रेस आज की मुगल

असम में करीब 600 मदरसे बंद किए गए हैं। राज्य सरकार का इरादा सभी मदरसों को बंद करने का है। यह बात असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कही है। वे कर्नाटक के बेलगावी में बीजेपी की एक सभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारतीय संस्कृति के लिए खतरा बताते हुए कांग्रेस को आज के दौर का मुगल करार दिया।

सरमा ने कहा कि कांग्रेस आज के समय की मुगल है। वह देश को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। सभा को संबोधित करते हुए असम के मुख्यमंत्री ने नए भारत की बात करते हुए कहा कि एक समय दिल्ली के बादशाह मंदिर तोड़ने की बात किया करते थे। आज नरेंद्र मोदी के दौर में हम मंदिर निर्माण की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नए भारत की अर्थव्यवस्था आज ब्रिटेन से मजबूत है। नए भारत में कोविड से मुकाबले के लिए अपनी वैक्सीन का निर्माण किया जाता है। नए भारत में पाकिस्तान को मुँहतोड़ जवाब दिया जाता है। कांग्रेस इसी नए भारत को कमजोर करने की साजिश कर रही है। पहले भारत को कमजोर करने का काम मुगल किया करते थे।

हिमंता ने पूछा कि क्या वे लोग मुगल के बच्चे हैं जो बाबरी के लिए तो बोलते हैं, लेकिन राम मंदिर की बात नहीं करते। उन्होंने लोगों से छत्रपति शिवाजी और स्वामी विवेकानंद का भारत बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साथ देने की अपील की। असम मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में बहुत सारे लोग हैं जो गर्व से कहते हैं कि मैं मुस्लिम। मैं ईसाई हूँ। इससे मुझे आपत्ति नहीं है। लेकिन हमें ऐसे लोगों की जरूरत है जो गर्व से कह सके कि मैं हिंदू हूँ।

असम के मुख्यमंत्री ने राज्य में 600 मदरसों को बंद करने की जानकारी देते हुए कहा कि इसकी जरूरत नहीं है। वे सभी मदरसों को बंद करना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि मदरसों की जगह स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी खुले। सीएम सरमा ने बांग्लादेश से होने वाले घुसपैठ को खतरनाक करार दिया। कहा कि बांग्लादेश से असम में घुसपैठ करने वाले संस्कृति के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं।

5000 लड़कियों को सेक्स रैकेट में धकेल चुका है बांग्लादेश का मोमिन, 100 ‘गर्लफ्रेंड्स’ भी शामिल: 25 साल से भारत में, 10 शादियाँ

                     बांग्लादेश से लड़कियों भारत लाकर सेक्स रैकेट चलाने वाला गिरफ्तार (साभार: न्यूज 18)
मध्य प्रदेश स्थित इंदौर की पुलिस ने बहुत बड़े सेक्स रैकेट का खुलासा किया है। पुलिस ने मानव तस्करी और देह व्यापार में शामिल मोमिन नाम के एक बांग्लादेशी को उसके साथी बबलू के साथ गिरफ्तार किया है। उसने पुलिस के सामने 5000 से अधिक लड़कियों की खरीद-फरोख्त और उन्हें सेक्स रैकेट में धकेलने का खुलासा किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘विजय कुमार’ के छद्म नाम से रह रहा मोमिन करीब 25 साल पहले बांग्लादेश से भारत आया था, भारत में घुसने के बाद वो मुंबई के नाला सोपारा इलाके के तंग इलाके में रहने लगा। फिलहाल, पूछताछ में उसने कबूल किया है कि मुंबई और सूरत जैसी जगहों पर दलालों की संख्या काफी ज्यादा थी। इसी कारण उसने इंदौर को अपने धंधे का नया ठिकाना बनाने की कोशिश में लगा हुआ था, ताकि एक सप्लाई चेन बनाई जा सके।

बांग्लादेशी दलाल की बीवी अपने देश में समाज कल्याण के नाम पर एक एनजीओ चलाती है, जिसकी आड़ में वो बांग्लादेश से भारत में लड़कियों की सप्लाई करती थी। वो गरीब घर की लड़कियों को नौकरी दिलवाने के बहाने भारत भेजती थी, लेकिन यहाँ पहुँचते ही उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें देह व्यापार के धंधे में धकेल दिया जाता था।

10 शादियाँ और 100 गर्लफ्रेंड 

इंदौर के आईजी हरिनारायण मिश्रा चारी का कहना कि मुख्य आरोपित मोमिन ने 10 शादियाँ की हैं और उसकी 100 गर्लफ्रेंड हैं। उसने इंदौर, धार, झाबुआ, अहमदाबाद, सूरत, जयपुर समेत देश के कई शहरों में सप्लाई चेन बना ली थी। देह व्यापार की आड़ में वो नशीले पदार्थों की तस्करी भी कर रहा था।
ऐसे पकड़ा गया दलाल 
इंदौर की विजयनगर थाना पुलिस के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर 2020 में पुलिस में शिकायत कर बताया था कि वो बांग्लादेश की रहने वाली है और उसे शबाना औऱ बख्तियार ने अवैध तरीके से सीमा पार करवाकर भारत में विजय के हवाले किया था। तभी से वह पुलिस की रडार पर था। उसे पकड़ने के लिए पुलिस ने टीम बनाई थी। वो करीब एक सप्ताह पहले मुंबई में था, लेकिन जैसे ही उसे पुलिस की कार्रवाई का पता चला तो वो इंदौर आ गया। हालाँकि, यहाँ विजयनगर पुलिस ने उसे धर दबोचा।

अवैध बांग्लादेशियों के फर्जी आधारकार्ड, पैनकार्ड बनाने के गोरखधंदे का पर्दाफाश: ओवैसी के पार्टी के दो MLA का लेटर हेड बरामद

                                                       प्रतीकात्मक 
मुंबई पुलिस ने बांग्लादेश के अवैध नागरिकों के फर्जी दस्तावेज बनाने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने साकीनाका इलाके में दो बांग्लादेशी नागरिकों एवं दो एजेंटों को गिरफ्तार किया है। हैरान करने वाली बात है कि पुलिस ने एक एजेंट के पास से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के दो विधायकों के लेटर हेड मिले हैं।

आशंका जताई गई है कि विधायकों के इन लेटरहेडर का इस्तेमाल फर्जी कागजात बनाने के लिए होता था। एआईएमआईएम के जिन विधायकों के लेटर हेड मिले हैं, उनके नाम मुफ्ती मोहम्मद इस्माईल और शेख आसिफ शेख रसीद है।

बताया जा रहा है कि एजेंट के पास से 5 अन्य विधायकों के लेटर हेड भी मिले हैं लेकिन अभी इनके नाम का खुलासा नहीं किया गया है। सवाल है कि ये लेटर हेड असली हैं या नकली है, इसकी जाँच होनी अभी बाकी है। जाँच में यदि ये लेटर हेड सही साबित होते हैं तो एआईएमआईएम के इन विधायकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। फर्जी दस्तावेज का मामला सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इसे गंभीर बात बताई है। भाजपा ने विधायकों के लेटर हेड की जाँच कराए जाने की माँग की है। भाजपा ने कहा है कि इस पूरे मामले की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) से करानी चाहिए।

पुलिस ने नाशिक मालेगाँव के एक एजेंट के पास से 155 आधार कार्ड, 34 पासपोर्ट, 28 पैनकार्ड, 8 राशन कार्ड, 187 बैंक और पोस्टल डिपार्टमेंट के पासबुक, 19 रबर स्टैम्प और स्कूल छोड़ने के 29 नकली लीविंग सर्टिफिकेट बरामद किए हैं। 

भाजपा प्रवक्ता अतुल भटखालकर ने कहा कि इस मामले की जल्द से जल्द जाँच कर दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए। एमआईएमआईएम विधायकों के लेटर हेड की जाँच होनी चाहिए। उन्‍होंने कहा है कि 24 घंटे में इन दोनों विधायकों के लेटर पैड की जाँच की जाए औए इनकी गिरफ्तारी हो। साथ ही इस केस को NIA को सौंपा जाए, यह एक बड़ा रैकेट है जो कि देश मे चल रहा है।

पूर्वांचल में बहुत गहरे हैं बंग्लादेशियों के पांव

वे कौन हैं? कहां से आए हैं। यहां रहने का मकसद क्या है। कुछ पता नहीं। प्रशासन भी खामोश और खुफिया एजेंसियां भी बेपरवाह। वजहें चाहे जो भी हो लेकिन बुधवार को हुई कार्रवाई से संदेश जरूर मिला कि इनके पांव बहुत गहरे हैं। बोलते हैं ये सभी बंगाली भाषा। मांगते हैं भीख। बीनते हैं प्लास्टिक और पानी की बोतलें। हाव-भाव भी भाषा के अनुरुप ही है। कोई इन्हें बंग्लादेशी कहता है तो कोई पश्चिम बंगाल के।
किसी के पास इनका असल ठिकाना नहीं है, फिर भी बहुतों के पास आधार कार्ड से लेकर जरुरी दस्तावेज उपलब्ध हैं। राशन भी इन्हेंं हर महीने आपूर्ति विभाग दे रहा है लेकिन किस आधार पर? इतने सवालों के बीच बुधवार को अतिक्रमण हटाने के लिए गई टीम भी इनकी ओर बिना देखे वापस लौट आई। जबकि इन सभी ने 12 से अधिक स्थानों पर अस्थाई रुप से कब्जा कर लिया है। आसपास गंदगी का आलम है। नगर पालिका इनके आसपास सफाई भी करता है। बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया करा रहा है। इन झुग्गी-झोपड़ी डालकर रहने वालों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
बीडा ने बसाई है छह कालोनियां
पिछले वर्ष महानगरों में अवैध कालोनियों के खिलाफ अभियान चलाया गया था। कागज पर कालीन नगरी में अवैध कालोनी एक भी नहीं है। भदोही औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) ने शहरी के बाहरी क्षेत्रों में छह आवासीय कालोनियां स्थापित की हैं, जिसकी रखरखाव व सुख सुविधा की जिम्मेदारी बीडा पर है।
यहां डाल रखे हैं अवैध डेरा
– नेशनल कालेज, चौरी रोड स्थित अभयनपुर व जलालपुर।
– ज्ञानपुर रोड स्थित नेशनल कालेज के पास
– चौरी रोड पर भिखारीपुर।
– ज्ञानपुर रोड के हरियांव के पास
– जलालपुर स्थित रेलवे की जमीन पर
– गोपीगंज स्थित फूलबाग वार्ड में।
करेंगे कार्रवाई अवैध बस्तियों पर : एसडीएम
एसडीएम रमेश कुमार ने बताया कि को अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद अन्य स्थानों पर अवैध रूप से कब्जा कर रहने वालों के खिलाफ अभियान छेड़ा जाएगा। अवैध रूप से स्थापित बस्तियों की जांच पड़ताल कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
भारत सरकार द्वारा गंभीरता से जाँच करने पर केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान और देश में अन्य भागों में बांग्लादेशियों की भरमार मिल जाएगी। मजे की बात यह है कि इन लोगों के राशन कार्ड, आधार एवं मतदान कार्ड तक बने हुए हैं। दूसरी विशेष बात जो चर्चा में है, वह यह कि इनमें से अधिकतर लोग हिन्दू नाम रख घरों में झाड़ू-पोछा और खाने बनाने का काम कर रही हैं। रेलवे लाइन के पास भी इनकी भारी तादाद मिलेगी। पिछली सरकारों ने जो तुष्टिकरण के चलते अवैध रूप से आए बांग्लादेशियों को एक भारतीय के समान्तर सुविधाएं प्रदान कर देश की जनता के साथ घोर अनर्थ किया है। 

वोटर लिस्ट से काटे गए चार बांग्लादेशियों के नाम

उत्तर प्रदेश आगरा में बांग्लादेशियों के शरणदाता और सालों से रुनकता में रह रहा सईदुल गाजी व उसके तीन परिजनों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं। चारों ने फर्जी तरीके से पहचान पत्र बनवा लिए थे और वह हर चुनाव में मतदान करते थे। चारों परिजन जेल में हैं।
बांग्लादेश मूल का सईदुल गाजी, पत्नी रतना गाजी, बेटे हसन व शमीम के साथ रुनकता में सालों से झोपड़ी बनाकर रह रहा था। उसने अन्य बांग्लादेशियों को भी यहां बुलाकर उन्हें रहने का ठिकाना उपलब्ध कराया। बीते दिनों खुफिया रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। तब पता चला कि पूरे परिवार के नाम वोटर लिस्ट में दर्ज हैं।
राज्य निर्वाचन अधिकारी वेंकटेश्वर लू ने भी जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार को इसकी जांच कराने को कहा। किरावली तहसीलदार ने बताया कि चारों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए हैं। ज्ञात हो, शातिर गाजी पर पुलिस द्वारा शिकंजा कसने के बाद प्रशासन भी उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई रहा है। काफी मुश्किल से हुई उसकी गिरफ्तारी के बाद अब प्रशासन इस मामले में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरतना चाहता। यही वजह है कि मतदाता सूची से उसका व उसके परिवार का नाम हटाया गया है।
बड़ा सवाल-वोट बनाने के लिए कौन जिम्मेदार
गाजी परिवार के चार लोगों के नाम वोटर लिस्ट में दर्ज होने में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इनके वोट कैसे बन गए? इसके बारे में अभी किसी अधिकारी के पास जवाब नहीं है। काबिलेगौर है कि वोट बनवाने के लिए जांच की प्रक्रिया से भी आवेदक को गुजरना होता है, इसके बाद भी बांग्लादेशियों के वोट बन गए।
यदि इसी गम्भीरता समस्त अल्पसंख्यक क्षेत्रों की मतदान सूची की जाँच करने पर ना जाने कितने फर्जी नाम निकाले जाएँगे।  कहना कठिन है, क्योकि प्रश्न यही आता है, कि बिल्ली के गले में घण्टी बांधे कौन? तुष्टिकरण के चलते कोई हाथ डालना नहीं चाहता, नौकरी सबको प्यारी है, घर-परिवार सभी के हैं। लेकिन लोगों ने चुनावों में नोट कमाने की खातिर ऐसा काम करते हैं। 
पीछे सम्पन्न हुए दिल्ली नगर निगम चुनावों में एक पोलिंग स्टेशन पर एक बहुत ही रोचक ड्रामा दिखा। भाजपा का पोलिंग एजेंट अपने ही घर और पड़ोसियों के 15 वोटों के 500 रूपए प्रति वोट माँग रहा है। यह ड्रामा उस पोलिंग स्टेशन का है, जहाँ भाजपा उम्मीदवार मतदान से एक दिन पूर्व 450 वोट पक्के करने का दावा कर रही थी। जानते हैं, उस पोलिंग से केवल 15 वोट मिले। जिस अल्पसंख्यक ने भाजपा को 450 वोटों का आश्वासन दिलवाया था, उसके आगे उम्मीदवार ने अपने वरिष्ठ कार्यकर्ता की कोई बात ही नहीं सुनी, बल्कि उसका अपमान करने का कोई अवसर नहीं छोड़ा। आज तक पोलिंग पर किए खर्चे तक का पूरा भुगतान नहीं किया। 
कहने का मतलब केवल इतना ही है कि सौदा करके पड़ने वाले अधिकतर वोट बोगस ही होते हैं। जिसे चुनाव आयोग द्वारा इतनी सख्ती होने के बावजूद रोका नहीं जा सका।