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हजारों ईसाइयों का कत्लेआम, ISIS का बढ़ता आतंक और अमेरिका की अंतिम चेतावनी: ट्रंप ने क्रिसमस पर क्यों कराया नाइजीरिया पर हमला?

   ईसाइयों के नरसंहार के खिलाफ अमेरिका ने आतंकवादियों को निशाना बनाकर घातक एयर स्ट्राइक की (साभार: BBC/HT)
क्रिसमस पर अमेरिका ने नाइजीरिया में आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाते हुए घातक एयर स्ट्राइक की। अमेरिकी सेना का दावा है कि इस स्ट्राइक में कई ISIS आतंकवादी मारे गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक, यह स्ट्राइक नाइजीरिया के आग्रह पर की गई है, जहाँ लगातार ईसाइयों को निशाना बनाया जा रहा था। इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने नाइजीरिया में ईसाइयों की लगातार हत्या को लेकर नाइजीरिया को चेतावनी दी थी।

नाइजीरिया के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (26 दिसंबर 2025) को कहा कि अमेरिका के सटीक हमलों में देश के उत्तर-पश्चिम में ‘आतंकवादी ठिकानों’ को निशाना बनाया है। साथ ही कहा कि नाइजीरिया वॉशिंगटन के साथ संरचित सुरक्षा सहयोग में लगा हुआ है। अमेरिकी सेना के अफ्रीका कमांड ने भी बताया कि यह हमला नाइजीरियाई अधिकारियों के अनुरोध पर किया गया था और इसमें कई ISIS आतंकवादी मारे गए हैं।

एयर स्ट्राइक पर डोनाल्ड ट्रंप का बयान

स्ट्राइक की जानकारी देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने एक्स पर कहा, “आज रात कमांडर इन चीफ के रूप में मेरे निर्देश पर अमेरिका ने उत्तर-पश्चिम नाइजरिया में ISIS के आतंकवादी कचरे पर एक शक्तिशाली और घातक हमला किया, जो मुख्य रूप से निर्दोष ईसाइयों को निशाना बना रहे थे और उनकी क्रूरता से हत्या कर रहे थे, जो कई वर्षों और सदियों में नहीं देखी गई थी।”

डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा, “मैंने पहले भी इन आतंकवादियों को चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने ईसाइयों का नरसंहार नहीं रोका तो उन्हें इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा और आज रात वही हुआ।” आतंकवाद पर सख्त नीति को लेकर उन्होंने कहा, “अमेरिकी सेना ने कई सटीक हमले किए, जैसा कि केवल अमेरिका की कर सकता है। मेरे नेतृत्व में हमारा देश कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद को पनपने नहीं देगा।”

अंत में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “सभी को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएँ, जिनमें मारे गए आतंकवादी भी शामिल हैं, जिनकी संख्या और भी अधिक होगी अगर वे ईसाइयों का नरसंहार जारी रखते हैं।”

डोनाल्ड ट्रंप की नाइजीरिया को चेतावनी

नाइजीरिया में ईसाइयों के नरसंहार पर डोनाल्ड ट्रंप पहले भी आतंकवादियों को चेतावनी दे चुके हैं। दो महीने पहले ही अक्टूबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति ने नाइजीरियन सरकार पर ईसाइयों के खिलाफ हो रहे सामूहिक नरसंहार को नहीं रोक पाने का आरोप लगाते हुए सैन्य संघर्ष के संकेत दिए थे।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा था, “अगर नाइजीरियाई सरकार ईसाइयों की हत्या की इजाजत देती रही, तो अमेरिका नाइजीरिया को दी जाने वाली सभी तरह की मदद तुरंत बंद कर देगा, और हो सकता है कि उस बदनाम देश में ‘गोलियाँ बरसाकर’ उन इस्लामी आतंकवादियों का सफाया कर दे, जो ये भयानक अत्याचार कर रहे हैं।”

डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा था कि अगर नाइजीरियन सरकार इन आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है, तो अमेरिका घातक हमले के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “मैं अपने युद्ध विभाग को संभावित कार्रवाई के लिए तैयार रहने का निर्देश दे रहा हूँ। अगर हम हमला करेंगे, तो वह तेज, क्रूर और तीखा होगा, ठीक वैसे ही जैसे आतंकवादी गुंडे हमारे प्यारे ईसाइयों पर हमला करते हैं।”

नाइजीरिया में ईसाइयों का नरसंहार

 डोनाल्ड ट्रंप नाइजीरिया में ईसाइयों के नरसंहार की जो बात कर रहे हैं, उसकी असलियत जानते हैं। नाइजीरिया में बोको हराम और फुलानी चरवाहों जैसे इस्लामी कट्टरपंथी संगठन सक्रिय हैं, जो लगातार ईसाइयों के गाँवों और चर्च को निशाना बना रहे हैं। ईसाइयों और इस्लामी कट्टरपंथियों के बीच यह टकराव साल 1950 के दशक से चला आ रहा है।

साल 2025 की बात करें तो 14 अक्टूबर को नाइजीरिया के प्लेटू राज्य के रचास और रावुरु गाँव में फुलानी मिलिटेंट्स ने हमला कर 13 लोगों को मौत के घाट उतार दिया।

23 सितंबर 2025 को बोको हराम ने अदमवा राज्य के वाग्गा मोंगारो गाँव में 4 ईसाइयों की हत्या कर दी, घरों और चर्च को नेस्तनाबूद कर दिया। इस हमले में कई लोग घायल भी हुए। वहीं 5 सितंबर को इसी संगठन ने बोर्नो राज्य के दरुल जमाल गाँव में हमला कर 63 लोगों को मार डाला। 

13-14 जून की रात बेन्युए राज्य के इएलेवाटा गाँव में फुलानी चरवाहों ने 100 से ज्यादा ईसाइयों की हत्या कर दी और उनके घरों में आग लगा दी। इससे पहले 24 मई को फुलानी चरवाहों ने ही ताराबा राज्य के करिम लामिदो पर हमला कर 42 ईसाइयों की हत्या कर दी और 60 से ज्यादा घर जला दिए।

गाँव के आसपास के करीब 5000 लोग अपना घर-बार छोड़ कर विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं। अमेरिका स्थित काउंसिल ऑफ फॉरेन रिलेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, 2011 से अब तक अलग-अलग वजहों से 60000 लोगों की मौत हो चुकी है।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2009 से बोको हराम ने 40000 से ज्यादा ईसाइयों की यहाँ हत्या कर दी। हजारों बच्चे मारे गए हैं और करोड़ों लोग विस्थापित हुए हैं। 2011 से अभी तक बोको हराम और इस्लामिक स्टेट इन वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस ने 37500 से अधिक लोगों की हत्या कर दी।

अल-कायदा का कनेक्शन और इस्लामी कट्टरपंथ पर पकड़

ईसाइयों को निशाना बना रहा ये इस्लामी संगठन बोको हराम का अल-कायदा और उत्तरी अफ्रीका के कई आतंकी संगठन के साथ कनेक्शन है। नाइजीरिया में इसने राजनीतिक रूप से पैर पहले ही जमा लिए हैं। यहीं वजह है कि ईसाइयों की हत्या करने वाले इस संगठन के समर्थक नाईजीरिया में ऊँचे पदों पर हैं।

करीब 22 करोड़ की आबादी वाले इस देश में करीब करीब आधी-आधी आबादी मुस्लिम और ईसाइयों की है। जनमत सर्वेक्षणों से पता चलता है कि नाइजीरियाई आबादी का बड़ा हिस्सा इस्लामी कट्टरपंथ का समर्थक है । प्यू ग्लोबल एटीट्यूड्स प्रोजेक्ट द्वारा 2009 में किए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक नाइजीरिया में 43 फीसदी मुसलमान आत्मघाती बम विस्फोट को सही मानते हैं। सर्वेक्षण में शामिल आधे से ज्यादा मुसलमानों ने आतंकी ओसामा बिन लादेन पर ‘विश्वास’ था।

इस्लामी कट्टरपंथियों ने नाइजीरिया में दो रास्ते अपनाए हैं- पहला, बोको हराम जैसे कट्टरपंथियों द्वारा चलाया गया मार काट का रास्ता। इसका मकसद गैर इस्लामी जनसंख्या को कम करना है। दूसरा, कानूनी और संवैधानिक रास्ता यानी शरिया कानून लागू करने की कोशिश करना। ऐसा उत्तरी राज्यों में हो रहा है।

1999 और 2002 के बीच, 12 उत्तरी नाइजीरियाई राज्यों में शरिया कानून लागू किया गया था। इसका असर इन राज्यों में दिखता है। नाइजीरिया की सरकार भले ही इससे इनकार करे, लेकिन इस्लामिक कट्टरवाद नाइजीरिया की हकीकत बन गई है और गैरमुस्लिमों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।

नाइजीरिया में मस्जिद में फटा बम

डोनाल्ड ट्रंप की क्रिसमस पर एयर स्ट्राइक से एक दिन पहले ही नाइजीरिया में मस्जिद में विस्फोटक बम फटने की खबर सामने आई थी। नाइजीरिया के उत्तर-पूर्वी शहर मैदुगुरी में बुधवार (24 दिसंबर 2025) की शाम नमाज के दौरान एक मस्जिद में हुए जोरदार विस्फोट में कम से कम 7 लोगों की मौत, जबकि 35 से ज्यादा लोग घायल हुए। 

हमले के बाद सामने आए वीडियो में खून से लथपथ लोग और चादरों से ढके शव देखे गए हैं। हालाँकि, हमले की किसी भी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली। पुलिस की शुरुआती जाँच में इसे आत्मघाती बम हमला बताया गया, क्योंकि मौके पर आत्मघाती जैकेट के टुकड़े मिले।

नाइजीरिया में ISIS आतंकियों को US ने किया ढेर, क्रिसमस की रात हुई बमबारी: ईसाइयों के नरसंहार का अमेरिका ने लिया बदला, ट्रंप ने पहले दी थी चेतावनी

नाइजीरिया में ईसाइयों के नरसंहार के खिलाफ अमेरिका ने आतंकवादियों को निशाना बनाकर घातक एयर स्ट्राइक की (साभार: BBC/HT)
क्रिसमस पर अमेरिका ने नाइजीरिया में आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाते हुए घातक एयर स्ट्राइक की। अमेरिकी सेना का दावा है कि इस स्ट्राइक में कई ISIS आतंकवादी मारे गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक, यह स्ट्राइक नाइजीरिया के आग्रह पर की गई है, जहाँ लगातार ईसाइयों को निशाना बनाया जा रहा था। इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने नाइजीरिया में ईसाइयों की लगातार हत्या को लेकर नाइजीरिया को चेतावनी दी थी।

नाइजीरिया के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (26 दिसंबर 2025) को कहा कि अमेरिका के सटीक हमलों में देश के उत्तर-पश्चिम में ‘आतंकवादी ठिकानों’ को निशाना बनाया है। साथ ही कहा कि नाइजीरिया वॉशिंगटन के साथ संरचित सुरक्षा सहयोग में लगा हुआ है। अमेरिकी सेना के अफ्रीका कमांड ने भी बताया कि यह हमला नाइजीरियाई अधिकारियों के अनुरोध पर किया गया था और इसमें कई ISIS आतंकवादी मारे गए हैं।

एयर स्ट्राइक पर डोनाल्ड ट्रंप का बयान

स्ट्राइक की जानकारी देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने एक्स पर कहा, “आज रात कमांडर इन चीफ के रूप में मेरे निर्देश पर अमेरिका ने उत्तर-पश्चिम नाइजरिया में ISIS के आतंकवादी कचरे पर एक शक्तिशाली और घातक हमला किया, जो मुख्य रूप से निर्दोष ईसाइयों को निशाना बना रहे थे और उनकी क्रूरता से हत्या कर रहे थे, जो कई वर्षों और सदियों में नहीं देखी गई थी।”

डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा, “मैंने पहले भी इन आतंकवादियों को चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने ईसाइयों का नरसंहार नहीं रोका तो उन्हें इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा और आज रात वही हुआ।” आतंकवाद पर सख्त नीति को लेकर उन्होंने कहा, “अमेरिकी सेना ने कई सटीक हमले किए, जैसा कि केवल अमेरिका की कर सकता है। मेरे नेतृत्व में हमारा देश कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद को पनपने नहीं देगा।”

अंत में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “सभी को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएँ, जिनमें मारे गए आतंकवादी भी शामिल हैं, जिनकी संख्या और भी अधिक होगी अगर वे ईसाइयों का नरसंहार जारी रखते हैं।”

डोनाल्ड ट्रंप की नाइजीरिया को चेतावनी

नाइजीरिया में ईसाइयों के नरसंहार पर डोनाल्ड ट्रंप पहले भी आतंकवादियों को चेतावनी दे चुके हैं। दो महीने पहले ही अक्टूबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति ने नाइजीरियन सरकार पर ईसाइयों के खिलाफ हो रहे सामूहिक नरसंहार को नहीं रोक पाने का आरोप लगाते हुए सैन्य संघर्ष के संकेत दिए थे।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा था, “अगर नाइजीरियाई सरकार ईसाइयों की हत्या की इजाजत देती रही, तो अमेरिका नाइजीरिया को दी जाने वाली सभी तरह की मदद तुरंत बंद कर देगा, और हो सकता है कि उस बदनाम देश में ‘गोलियाँ बरसाकर’ उन इस्लामी आतंकवादियों का सफाया कर दे, जो ये भयानक अत्याचार कर रहे हैं।”

डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा था कि अगर नाइजीरियन सरकार इन आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है, तो अमेरिका घातक हमले के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “मैं अपने युद्ध विभाग को संभावित कार्रवाई के लिए तैयार रहने का निर्देश दे रहा हूँ। अगर हम हमला करेंगे, तो वह तेज, क्रूर और तीखा होगा, ठीक वैसे ही जैसे आतंकवादी गुंडे हमारे प्यारे ईसाइयों पर हमला करते हैं।”

नाइजीरिया में ईसाइयों का नरसंहार

डोनाल्ड ट्रंप नाइजीरिया में ईसाइयों के नरसंहार की जो बात कर रहे हैं, उसकी असलियज जानते हैं। नाइजीरिया में बोको हराम और फुलानी चरवाहों जैसे इस्लामी कट्टरपंथी संगठन सक्रिय हैं, जो लगातार ईसाइयों के गाँवों और चर्च को निशाना बना रहे हैं। ईसाइयों और इस्लामी कट्टरपंथियों के बीच यह टकराव साल 1950 के दशक से चला आ रहा है।

साल 2025 की बात करें तो 14 अक्टूबर को नाइजीरिया के प्लेटू राज्य के रचास और रावुरु गाँव में फुलानी मिलिटेंट्स ने हमला कर 13 लोगों को मौत के घाट उतार दिया।

23 सितंबर 2025 को बोको हराम ने अदमवा राज्य के वाग्गा मोंगारो गाँव में 4 ईसाइयों की हत्या कर दी, घरों और चर्च को नेस्तनाबूद कर दिया। इस हमले में कई लोग घायल भी हुए। वहीं 5 सितंबर को इसी संगठन ने बोर्नो राज्य के दरुल जमाल गाँव में हमला कर 63 लोगों को मार डाला।

13-14 जून की रात बेन्युए राज्य के इएलेवाटा गाँव में फुलानी चरवाहों ने 100 से ज्यादा ईसाइयों की हत्या कर दी और उनके घरों में आग लगा दी। इससे पहले 24 मई को फुलानी चरवाहों ने ही ताराबा राज्य के करिम लामिदो पर हमला कर 42 ईसाइयों की हत्या कर दी और 60 से ज्यादा घर जला दिए।

गाँव के आसपास के करीब 5000 लोग अपना घर-बार छोड़ कर विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं। अमेरिका स्थित काउंसिल ऑफ फॉरेन रिलेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, 2011 से अब तक अलग-अलग वजहों से 60000 लोगों की मौत हो चुकी है।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2009 से बोको हराम ने 40000 से ज्यादा ईसाइयों की यहाँ हत्या कर दी। हजारों बच्चे मारे गए हैं और करोड़ों लोग विस्थापित हुए हैं। 2011 से अभी तक बोको हराम और इस्लामिक स्टेट इन वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस ने 37500 से अधिक लोगों की हत्या कर दी।

अल-कायदा का कनेक्शन और इस्लामी कट्टरपंथ पर पकड़

ईसाइयों को निशाना बना रहा ये इस्लामी संगठन बोको हराम का अल-कायदा और उत्तरी अफ्रीका के कई आतंकी संगठन के साथ कनेक्शन है। नाइजीरिया में इसने राजनीतिक रूप से पैर पहले ही जमा लिए हैं। यहीं वजह है कि ईसाइयों की हत्या करने वाले इस संगठन के समर्थक नाईजीरिया में ऊँचे पदों पर हैं।

करीब 22 करोड़ की आबादी वाले इस देश में करीब करीब आधी-आधी आबादी मुस्लिम और ईसाइयों की है। जनमत सर्वेक्षणों से पता चलता है कि नाइजीरियाई आबादी का बड़ा हिस्सा इस्लामी कट्टरपंथ का समर्थक है । प्यू ग्लोबल एटीट्यूड्स प्रोजेक्ट द्वारा 2009 में किए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक नाइजीरिया में 43 फीसदी मुसलमान आत्मघाती बम विस्फोट को सही मानते हैं। सर्वेक्षण में शामिल आधे से ज्यादा मुसलमानों ने आतंकी ओसामा बिन लादेन पर ‘विश्वास’ था।

इस्लामी कट्टरपंथियों ने नाइजीरिया में दो रास्ते अपनाए हैं- पहला, बोको हराम जैसे कट्टरपंथियों द्वारा चलाया गया मार काट का रास्ता। इसका मकसद गैर इस्लामी जनसंख्या को कम करना है। दूसरा, कानूनी और संवैधानिक रास्ता यानी शरिया कानून लागू करने की कोशिश करना। ऐसा उत्तरी राज्यों में हो रहा है।

1999 और 2002 के बीच, 12 उत्तरी नाइजीरियाई राज्यों में शरिया कानून लागू किया गया था। इसका असर इन राज्यों में दिखता है। नाइजीरिया की सरकार भले ही इससे इनकार करे, लेकिन इस्लामिक कट्टरवाद नाइजीरिया की हकीकत बन गई है और गैरमुस्लिमों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।

नाइजीरिया में मस्जिद में फटा बम

डोनाल्ड ट्रंप की क्रिसमस पर एयर स्ट्राइक से एक दिन पहले ही नाइजीरिया में मस्जिद में विस्फोटक बम फटने की खबर सामने आई थी। नाइजीरिया के उत्तर-पूर्वी शहर मैदुगुरी में बुधवार (24 दिसंबर 2025) की शाम नमाज के दौरान एक मस्जिद में हुए जोरदार विस्फोट में कम से कम 7 लोगों की मौत, जबकि 35 से ज्यादा लोग घायल हुए। 

हमले के बाद सामने आए वीडियो में खून से लथपथ लोग और चादरों से ढके शव देखे गए हैं। हालाँकि, हमले की किसी भी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली। पुलिस की शुरुआती जाँच में इसे आत्मघाती बम हमला बताया गया, क्योंकि मौके पर आत्मघाती जैकेट के टुकड़े मिले।

नाइजीरिया में हो रहे ईसाइयों के नरसंहार के लिए इस्लामी कट्टरपंथी जिम्मेदार: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ; पत्नी से जुड़े विवाद में घिरे जेडी वेंस भी समर्थन में


अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पत्नी उषा वेंस के धर्म को लेकर दिए विवादास्पद बयानों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक पोस्ट शेयर की है। इस पोस्ट में ट्रंप ने लिखा है, “नाइजीरिया में ईसाई धर्म पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है। वहाँ हजारों ईसाइयों की हत्या की जा रही है। इन नरसंहारों के पीछे कट्टरपंथी इस्लामी समूह जिम्मेदार हैं।”

ट्रंप ने आगे लिखा है, “लेकिन बात सिर्फ इतनी नहीं है, जब ईसाइयों या किसी भी समुदाय के लोगों की इस तरह हत्या होती है (सिर्फ नाइजीरिया में 3,100, जबकि दुनिया भर में 4,476 मौतें), तो हमें कार्रवाई करनी ही होगी। संयुक्त राज्य अमेरिका चुप नहीं रह सकता जब नाइजीरिया और कई अन्य देशों में ऐसे अत्याचार हो रहे हैं। हम दुनिया भर में अपने महान ईसाई समुदाय की रक्षा करने के लिए तैयार, इच्छुक और सक्षम हैं।”

राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया, “नाइजीरिया के एक गाँव में आतंकी हमला हुआ था, जिसमें करीब 20 ईसाई मारे गए। साल 2024 दुनियाभर में धर्म के नाम पर मारे गए लोगों में 70 प्रतिशत लोग ईसाई थे और नाइजीरिया निवासी थे। इस नरसंहार के लिए बोको हराम, इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस (ISWAP) और फुलानी उग्रवादी चरवाहे जिम्मेदार हैं।”

जेडी वेंस ने ईसाईयों की रक्षा को लेकर लिखी गई ट्रंप की यह पोस्ट ऐसे समय में शेयर की है, जब वे खुद अपनी हिंदू पत्नी के ईसाई धर्म अपनाने की इच्छा जता रहे हैं और लगातार आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं।

‘मेरी आलोचना करने वाले दिखा रहे नफरत’: हिंदू पत्नी को ईसाई बनाने की इच्छा रखकर घिरे अमेरिकी राष्ट्रपति जेडी वेंस, सफाई में बोले- वो नहीं बदलेगी धर्म

                              अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पत्नी उषा वेंस के साथ (फोटो साभार: न्यूज 18)

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने अपनी हिंदू पत्नी उषा वेंस के ईसाई मजहब अपनाने की इच्छा जताई थी। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भारी आलोचना शुरू हो गई, जिसमें कई लोगों ने कहा कि उन्होंने अपनी पत्नी के हिंदू धर्म का अपमान किया है। इसके बाद अब इस मामले में जेडी वेंस ने प्रतिक्रिया दी है।

जेडी वेंस ने शुक्रवार (31 अक्टूबर 2025) को अपनी पत्नी उषा वेंस के धर्म को लेकर दिए गए बयान पर बचाव करते हुए कहा कि उनकी पत्नी क्रिश्चियन नहीं हैं और उनका धर्म बदलने का कोई इरादा भी नहीं है। वेंस ने इस मुद्दे पर हुई आलोचना को घृणित बताया और आरोप लगाया कि यह ‘ईसाई-विरोधी पूर्वाग्रह (anti-Christian bigotry)’ से प्रेरित है।

जेडी वेंस ने कहा- चाहता हूँ वह मेरे नजरिए को समझें

वेंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्पष्टीकरण देते हुए लिखा, “वह क्रिश्चियन नहीं हैं और धर्म परिवर्तन की कोई योजना भी नहीं है। लेकिन जैसे हर इंटरफेथ (मिश्रित धर्म) शादी में होता है, मैं भी चाहता हूँ कि एक दिन वह मेरे नजरिए को समझें, फिर भी मैं उन्हें प्यार करता रहूँगा, उनका साथ दूँगा और हम जीवन और आस्था पर बात करते रहेंगे, क्योंकि वह मेरी पत्नी हैं।”

वेंस ने यह भी बताया कि उषा ही वो व्यक्ति हैं जिन्होंने उन्हें सालों पहले दोबारा अपने धर्म से जुड़ने के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने कहा, “मेरी पत्नी मेरे जीवन का सबसे बड़ा आशीर्वाद हैं। उन्होंने ही मुझे अपने धर्म और विश्वास से दोबारा जोड़ने में मदद की।”

अंत में वेंस ने लिखा, “इस तरह की पोस्ट ईसाई-विरोधी कट्टरता को बढ़ावा देती हैं। हाँ, ईसाइयों की भी अपनी मान्यताएँ होती हैं और हाँ, इन मान्यताओं के कई परिणाम होते हैं, जिनमें से एक यह है कि हम उन्हें दूसरों के साथ साझा करना चाहते हैं। यह बिल्कुल सामान्य बात है, और जो कोई भी आपको इसके विपरीत बता रहा है, उसका कोई न कोई एजेंडा जरूर है।”

दरअसल, मिसिसिपी विश्वविद्यालय में Turning Point USA के एक कार्यक्रम के दौरान वेंस ने कहा था कि वे चाहते हैं कि उनकी पत्नी उषा, जो एक हिंदू परिवार से हैं, भविष्य में ईसाई मजहब को अपनाएँ। उन्होंने कहा था, “अधिकतर रविवार वह मेरे साथ चर्च आती हैं। क्या मैं चाहता हूँ कि किसी दिन उन्हें भी वही अनुभव हो जो मुझे चर्च में हुआ था? हाँ, मैं वास्तव में चाहता हूँ।”

‘मिस वर्ल्ड’ पर आर्टिकल में पैगंबर मोहम्मद का नाम, दंगों में चली गई 100 की जान: हिंसा के बाद 2002 में नाइजीरिया में रद्द कर दी थी प्रतियोगिता

   नाइजीरिया के 2002 मिस वर्ल्ड दंगों में मुस्लिम और ईसाईयों के आपस में भिड़ने से 100 से अधिक लोग मारे गए थे। (      फोटो साभार: yorubaness)
आज से 21 साल पहले 22 नवंबर, 2002 को अमूमन अमन में रहने वाला अफ्रीकी मुल्क नाइजीरिया अचानक से दुनिया में सुर्खियों में आ गया था। वजह थी वहाँ मजहबी और जातीय हिंसा भड़क उठी थी और 23 नवंबर 2002 को यहाँ होने वाला मिस वर्ल्ड कॉन्टेस्ट आयोजकों ने रद्द कर दिया था। आज इस घटना को घटे हुए 21 वर्ष से ज़्यादा हो गए लेकिन वह घटना आज भी ताजा है।

इस मुल्क में एक-दूसरे के साथ मिलजुल कर रहने वाली मुस्लिम और ईसाई आबादी के बीच ये खूनी संघर्ष एक-दूसरे की जान लेने तक जा पहुँचा। इस हिंसक आक्रोश और खून-खराबे में 100 लोग मारे गए और इस सबकी वजह थी पैगंबर मोहम्मद के बारे में दिसडे (ThisDay) अखबार में छपी एक रिपोर्ट।

इस रिपोर्ट में मुल्क में होने जा रहे मिस वर्ल्ड पैजेंट की मेजबानी के साथ मेल खाती थी। इस रिपोर्ट पर मुस्लिमों ने खासा एतराज जताया था। दरअसल, 2002 में नाइजीरिया ने मिस वर्ल्ड पैजेंट की मेजबानी करने का फैसला लिया था। हालाँकि, इस मुल्क ने ये फैसला जोश और डर दोनों के साथ लिया था।

दरअसल, इस ब्यूटी पैजेंट के जरिए इस अफ्रीकी मुल्क की सांस्कृतिक समृद्धि को दुनिया से रूबरू कराने का का वादा किया था। लेकिन इसे लेकर कुछ मजहबी समूहों खासकर मुस्लिम समुदाय के रूढ़िवादी रवैये की वजह से पहले ही खासी चुनौतियाँ पेश आ रही थी।

इन समूहों का आरोप था कि इस आयोजन से व्यभिचार और अश्लीलता को बढ़ावा मिलेगा। इसी बीच अखबार दिसडे में छपी रिपोर्ट ने आग में भी डालने का काम किया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मिस वर्ल्ड की मेजबानी की तैयारियों के बीच ‘दिसडे अखबार’ में इसियोमा डैनियल की लिखी रिपोर्ट में पैगंबर मोहम्मद को उनकी बीवी को लेकर एक काल्पनिक सुझाव दिया गया था। इसमें लिखा गया था कि मिस वर्ल्ड में शिरकत करने वाली हसीनाओं को अगर पैगंबर देखते तो उन्होंने भी अपनी शरीक-ए-हयात को उन्हीं एक में से चुना होता।

डैनियल ने लिखा था, “(पैगंबर) मुहम्मद इन हसीनओं को देख क्या सोचेंगे? पूरी ईमानदारी से कहें तो वो शायद इन (मिस वर्ल्ड कंटेस्टेंट ) में से एक को बीवी चुनेंगे। इस रिपोर्ट के तीखे लफ्जों ने मुस्लिम समुदाय को नाराज कर दिया। नाइजीरियन मुस्लिमों ने इसे अपने मजहब की बेइज्जती के तौर पर लिया।

‘दिसडे अखबार’ में ये रिपोर्ट रविवार के एडिशन में छपी थी। अखबार के छपे इस लेख के तुरंत बाद मुस्लिम समूहों ने अखबार से माफी की माँग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया था।

मुस्लिमों की नाराजगी को देखते हुए अगले ही दिन अखबार ने पहले पन्ने पर एक छोटा सा माफीनामा छापा था। इसके एक दिन बाद ही अखबार ने मंगलवार को फिर से मुस्लिमों के एतराज जताने वाले इस अंश के रिपोर्ट में गलती से छप जाने को लेकर लंबा तर्क छापा था।

अखबार के इस तरह से दो बार छापे गए लिखित माफीनामे के बाद भी नाइजीरिया में हालात काबू में नहीं हो पाए थे। वहाँ हिंसा का नंगा नाच चलता रहा था और तेजी से हालात काबू से बाहर होते चले गए थे।

खासकर मुल्क के उत्तरी राज्य कदूना में हिंसा भड़क उठी थी। ईसाई और मुस्लिम आपस में भिड़ गए। इससे जानमाल का काफी नुकसान हुआ। बड़े पैमाने पर सार्वजनिक और निजी संपत्ति का नुकसान हुआ है। इसके बाद वहाँ खौफ और संदेह का माहौल बन गया।

चूँकि, नाइजीरिया में मिस वर्ल्ड की मेजबानी को लेकर ये हिसंक दंगे भड़के थे तो इसे दुनिया में अक्सर ‘2002 के मिस वर्ल्ड दंगे’ के नाम से भी जाना जाता है। रिपोर्टों से पता चलता है कि शहर भर में गुस्साई भीड़ ने आसपास खड़े लोगों पर चाकू से हमला किया था।

ये दंगे यहाँ कम से कम तीन दिनों तक चले। इसमें 100 से अधिक मौतें हुईं और नाइजीरिया के सांप्रदायिक सद्भाव के माथे पर लंबे वक्त तक इन दंगों का दाग बना रहा।

वैसे तो नाइजीरिया अपनी अलग-अलग तरह की आबादी के लिए जाना जाता है। यहाँ मुस्लिम और ईसाई समुदाय बहुतायत में है। ये दोनों ही यहाँ शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में रहते हैं, लेकिन राजनीतिक पेचीदीगियों, मजहबी मतभेदों और आर्थिक असमानताओं के बीच इस तरह की हिंसाकी ऐतिहासिक घटनाएँ भी हुई हैं।

नाइजीरिया के मिस वर्ल्ड दंगों में हुई हिंसा की रिपोर्ट जैसे ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक पहुँची तो फिक्र के साथ ही इस मुल्क की खासी लानत-मलामत हुई। मिस वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन ने प्रतियोगियों और आयोजक टीम की सुरक्षा को वरीयता देते हुए इस ब्यूटी पैजेंट की मेजबानी का जिम्मा लंदन को सौंप दिया।

नाइजीरिया में शरिया कानून

संयुक्त राज्य के इंटरनेशनल रीलिजियस फ्रीडम कमीशन (International Religious Freedom) के मुताबिक, नाइजीरिया के 36 राज्यों में से 12 में शरिया कानून लागू है। दरअसल, साल 1999 में इस मुल्क ने एक संविधान अपनाया गया। इसमें सरकार की संघीय प्रणाली और मजहबी, रिवाजों और नागरिक कानूनों का एक खाका तैयार किया। इसके तहत यहाँ के संविधान में प्रावधान है कि राज्यों में हाईकोर्ट तो होंगे ही, लेकिन जहाँ जरूरी हो वहाँ शरिया और अपील की रिवाजी अदालतें भी हो सकती हैं।
हालाँकि, इन वर्षों में यहाँ के कई राज्यों ने देश के इस्लामी आपराधिक कानून या शरिया कानून को फिर से एक कर दिया। ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ शरिया कानून ने ईशनिंदा के लिए लोगों को मौत की सजा सुनाई है।
दिसंबर 2022 में, एक मौलवी को कथित ईशनिंदा के लिए शरिया अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। उन्होंने कह दिया था कि शिया मजहब सुन्नी से बेहतर था। अगस्त 2020 में ही एक शरिया अदालत ने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ कथित ईशनिंदा के लिए एक नाइजीरियाई सिंगर को मौत की सजा सुनाई।
नाइजीरिया में ईशनिंदा के आरोप में मुस्लिम भीड़ के ईसाइयों के पीट-पीट कर हत्या किए जाने की अनगिनत खबरें आई हैं। मई 2022 में, सोकोतो में मुस्लिम छात्रों ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ ईशनिंदा का आरोप लगाने के बाद एक ईसाई छात्र की पत्थर मारकर हत्या कर दी और उसकी लाश को जला दिया।

 

सोशल मीडिया फ्रेंड से मिलने नाइजीरिया गई असम की महिला बॉक्सर बरनाली बौरा सैकिया का अपहरण

                                           नाइजीरियन दोस्त ने असम की बॉक्सर का किया अपहरण
असम के गुवाहटी में रहने वाली एक महिला बॉक्सर व सर्टिफाइड जिम ट्रेनर को उनके ‘दोस्त’ ने नाइजीरिया में कथिततौर पर बंधक बना लिया है। महिला बॉक्सर की पहचान ‘बरनाली बौरा सैकिया’ के तौर पर हुई है। बताया जा रहा है कि नाइजीरिया के दोस्त से वह सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में आई थीं। इसी के बाद वो उससे मिलने गईं। शुरुआत में तो सब ठीक रहा लेकिन बाद में उन्हें कमरे में बंदी बना लिया गया और उनके घर फोन करके फिरौती के पैसे माँगे जाने लगे।

जानकारी के मुताबिक बरनाली को उनके दोस्त किंग और उसके साथी डेनियल ने बंधक बनाया है। वो लोग महिला बॉक्सर के घर फोन कर करके उनसे फिरौती माँग रहे हैं। अब घरवालों ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज करवाई है। शिकायत में बताया गया है कि बरनाली के पति नयन सैकिया के जरिए किंग उनके घर के लोगों को जानने लगा था। धीरे-धीरे बरनाली और वो चैट करने लगे। दोस्ती इतनी घनिष्ठ हो गई कि बरनाली ने एक दिन टूरिस्ट वीजा पर नाइजीरिया जाने का निर्णय लिया और 28 अक्टूबर को बेंगलुरु से लागोस की फ्लाइट लेकर वो नाइजीरिया चली गईं।

नाइजीरिया में जाकर वह किंग से दोस्त बनकर मिलीं, लेकिन उनके उसी दोस्त ने उनको बंदी बना लिया। 3 दिन तक बरनाली अपने घर में संपर्क नहीं कर पाईं। चौथे दिन जाकर किसी तरह उन्होंने अपने घर एक वॉट्सऐप कॉल की और मदद माँगी। उन्होंने बताया कि वो एक कमरे में बंदी बनाकर रखी गई हैं। उन्हें खाने को खाना तक नहीं दिया जाता है।

इसी बीच किंग के परिजन भी बरनाली को छोड़ने के बदले उनके घरवालों से फिरौती माँगने लगे और उनको धमकियाँ देने लगे। इस मामले में परिवार ने पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाई है। महिला बॉक्सर की बेटी ने बताया- “28 अक्टूबर को मेरी माँ बेंगलुरु से लागोस गई थी। शुरू में सब ठीक था लेकिन कुछ दिनों से उन्हें खाने को कुछ नहीं दिया जा रहा है, उन्हें बंदी बनाकर रख लिया गया है।”

ये शिकायत असम के डिसपुर पुलिस थाने में हुई है। शिकायत में कहा गया कि बरनाली की वापसी की टिकट 13 नवंबर की कराई गई थी लेकिन बरनाली को एयरपोर्ट तक नहीं आने दिया दिया गया। परिजनों ने दिल्ली क्राइम ब्रांच को भी संपर्क किया है। वहीं पति ने भारतीय प्रशासन अधिकारियों से भी मदद माँगी है ताकि उनके हस्तक्षेप से उनकी बीवी आराम से घर आ पाएँ।

पति ने बताया कि शुरू में नाइजीरिया में उनकी बीवी को एक होटल में रखा गया लेकिन बाद में एक कमरे में शिफ्ट कर दिया गया। नयन के अनुसार वह अब तक 5 से 6 लाख रुपए किंग को दे चुके हैं, लेकिन उसने उनकी पत्नी को नहीं छोड़ा है।