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AMU के हॉस्टल से मिले जाली नोट और कारतूस, शहबाज फरार: पहली बार नहीं है यूनिवर्सिटी में संदिग्धों की तलाश, आतंकी मॉड्यूल तक का यहाँ से हो चुका खुलासा

एएमयू छात्र के कमरे में छापेमारी ( साभार-X@AN
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इतिहास साक्षी है कि भारत में जवाहरलाल यूनिवर्सिटी और अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी दोनों ही अपनी स्थापना से लेकर आज तक विवादित रही है। नेहरू सरकार से लेकर आज मोदी सरकार तक कोई यहाँ हो रही देश विरोधी गतिविधियों पर हंटर चलाने में पूर्णरूप से नाकाम रही है। संदिग्धों को गिरफ्तार कर सरकारें अपना दामन बचा लेती हैं। एक यूनिवर्सिटी में टुकड़े-टुकड़े गैंग सक्रीय है तो दूसरी में पाकिस्तान समर्थक। नोटबंदी लेकर जनता तक विरोधियों के दुष्प्रचार में फंस मोदी सरकार को कोसती नज़र आती है। लेकिन भूल जाती है कि नोटबंदी होने पर कितना जाली नोट कार्टन भर-भर कर नदियों और कब्रिस्तानों में फेंका गया था। जिस पर हर राष्ट्रीय मीडिया चुप्पी साधे रहा लेकिन सोशल मीडिया पर फोटो सहित खूब प्रसारित किया गया था।    

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों से जुड़े विवाद समय-समय पर सामने आते रहे हैं, और इस बार मामला और भी गंभीर है। एक छात्र, शहबाज, के कमरे से पुलिस को जाली नोट और जिंदा कारतूस मिले हैं। छापेमारी से पहले ही वह फरार हो गया। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने 13 अप्रैल को उसे सस्पेंड कर दिया।

पुलिस अब उसकी तलाश कर रही है। जाँच के दौरान 113 संदिग्धों की सूची भी बनाई गई है। इनकी तलाशी ली जाएगी। यह पहली बार नहीं है जब एएमयू का नाम ऐसे मामलों में आया है। इससे पहले भी यहाँ कट्टरपंथ और आतंकी मॉड्यूल से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं। 

जिस दिन शहबाज़ गिरफ्तार होगा जितने भी मुस्लिम कट्टरपंथी संगठन और इनके समर्थक सियासत पार्टियां victim card खेलने की नौटंकी कर कहेंगे कि "मुस्लिम है इसलिए फंसाया जा रहा है, गरीब है, दिमाग से पागल है, मज़लूम है" आदि आदि और एक से बढ़कर एक महंगा वकील खड़ा किया जायेगा और अदालतें उन वकीलों को सम्मान देते हुए उनकी दलीलों को सुनने में देश का समय बर्बाद कर गुमराह होकर देश को भी गुमराह कर जमानत दे देंगी।      

शहबाज की तलाश में पुलिस

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में शहबाज एमसीए का छात्र है। पुलिस ने खुफिया जानकारी के आधार पर एएमयू सुरक्षा विभाग के साथ मिलकर कॉलेज हॉस्टल में छापेमारी की थी, इसको लेकर कॉलेज प्रशासन की मदद से एटीएस ने कमरे की छापेमारी की थी। इस दौरान उसके कमरे से 32 बोर पिस्टल की गोलियाँ, 12 बोर हथियार के चार कारतूस, नकली नोट, आठ मोबाइल फोन, खोखे और मैगजीन के अलावा नकली आईडी कार्ड मिले थे, लेकिन शहबाज कमरे में मौजूद नहीं था।

उसका अब तक सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस उसकी तलाश में लगी हुई है। इस बीच यूनिवर्सिटी ने उसे सस्पेंड कर दिया है। बरामद सामानों की फॉरेंसिक जाँच की जा रही है। ये भी पता लगाया जा रहा है कि नकली नोट और छिपाकर रखे गए हथियार किस उद्देश्य के लिए और किसके कहने पर शहबाज ने रखे थे?

कॉलेज के हॉस्टल में छापेमारी हाल ही में हुए सिविल लाइंस क्षेत्र में फायरिंग को लेकर की गई थी। इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उनसे पूछताछ में ही शहबाज का नाम सामने आया था।

एएमयू की दो डिग्रियाँ और फर्जी सर्टिफिकेट

शहबाग ने इससे पहले डिप्लोमा इन कैमिकल इंजीनियरिंग करने के लिए भी नामांकन लिया था। उसके पास एएमयू के हाईस्कूल और 12वीं के फर्जी सर्टिफिकेट भी मिले हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन अब उसकी कुंडली खँगाल रही है। ये बात भी सामने आई है कि शहबाज को रूम अलॉट नहीं किया गया था। उसने कमरे पर अवैध रूप से महीनों से कब्जा कर रखा था। वह गैर आवासीय छात्र था।

शहबाज ने अलग-अलग वक्त पर अलग कोर्स में एडमिशन लिया था। उसने डिप्लोमा इन केमिकल इंजीनियरिंग में भी पहले नामांकन लिया था। दूसरी बार एमसीए में नामांकन लिया। उसके कमरे से कई सर्टिफिकेट और दस्तावेज मिले हैं। दो एएमयू की मार्कशीट मिली है, जो फर्जी बताया गया है। वह हाईस्कूल और 12वीं की है। यूनिवर्सिटी ने साफ कहा है कि उसने 12वीं यहाँ से नहीं किया है और वह फर्जी सर्टिफिकेट है। उसे सस्पेंड कर दिया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने 113 संदिग्धों की लिस्ट बनाई

एएमयू प्रशासन ने कॉलेज में आने जाने वालों पर कड़ी नजर रखने के सख्त हिदायत दिए हैं, साथ ही 113 संदिग्ध और अराजक तत्वों की लिस्ट तैयार की है। कॉलेज प्रशासन का मानना है कि कुछ छात्रों की वजह से पूरी यूनिवर्सिटी का नाम खराब होता है और करीब 26 हजार छात्र-छात्राओं के भविष्य पर असर पड़ता है।

कॉलेज प्रशासन का मानना है कि 99 फीसदी बच्चा पढ़ने आता है। बहुत कम बच्चे हैं, जो कॉलेज किसी और मकसद से आते हैं। उन्हें अलग किया जा रहा है। अब छात्र-छात्राएँ भी गोपनीय तरीके से इनकी जानकारी प्रशासन को दे रहे हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कितने स्टूडेंट नियमित कॉलेज आते हैं और कितने बाहरी बच्चें हैं, जो गलत काम में शामिल हैं। उन पर कार्रवाई की जा रही है।

एएमयू के कुछ छात्रों का ISIS कनेक्शन सामने आया था

यह पहला मामला नहीं है जब एएमयू के छात्र संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाए गए हों। नवबंर 2023 में ISIS मॉड्यूल का अलीगढ़ में भंडाफोड़ हुआ था जिसमें 7 एएमयू के छात्र थे। इसका पता तब चला जब एक फर्जी दस्तावेज और चोरी के मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी और उसकी जाँच के दौरान एटीएस को आईएसआईएस मॉड्यूल का पता चला था। इनमें से दो छात्र शाहनवाज और रिजवान एएमयू के छात्र संगठन एसएएमयू के सदस्य थे।

दरअसल छात्र संगठन SAMU पर CAA-NRC विरोधी हिंसा के दौरान ही खुफिया एजेंसियों की नजर थी। उस वक्त भी एटीएस ने एएमयू के कुछ छात्रों को हिरासत में लिया था। इसमें नवंबर 2025 में गिरफ्तार एएमयू के छात्र भी थे।

2023 में सामने आया था मामला

ISIS लिंक को लेकर नवंबर 2023 से फरार चल रहे दो छात्रों, अब्दुल समद मलिक और फैजान बख्तियार पर सरकार ने 25-25 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया था। ये लोग भी SAMU से जुड़े थे।

ATS की FIR के मुताबिक, फैजान बख्तियार और अब्दुल समद मलिक सोशल मीडिया के साथ कई अन्य माध्यमों से ISIS की विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर रहे थे। ये दोनों अपने अन्य साथियों के साथ मिल कर कई युवाओं को कट्टरपंथ की राह पर धकेलने की कोशिशों में जुटे थे। इन दोनों को जनवरी 2024 में एटीएस ने गिरफ्तार किया।

दिल्ली में हुई थी कई गिरफ्तारियाँ

अक्टूबर 2023 में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कई आतंकियों को दिल्ली से लेकर अलीगढ़ तक गिरफ्तार किया था। ये आतंकी आईएसआईएस का मॉड्यूल संचालित कर रहे थे। दिल्ली पुलिस के इस ऑपरेशन में पता चला था कि शहनवाज, रिजवान और अरशद नाम के आतंकी, जिसमें शहनवाज पुणे में यूएपीए केस में गिरफ्तारी के बाद से फरार था, वो उत्तरी भारत में आईएसआईएस का पूरा मॉड्यूल खड़ा कर रहे थे और दीपावली के त्योहार के समय कई जगहों पर धमाकों-हमलों की फिराक में थे।

इससे पहले 2023 में ही AMU से पीएचडी करने वाले ISIS आतंकी वजीउद्दीन की छत्तीसगढ़ में गिरफ्तारी हुई थी।

दरअसल एएमयू को आतंकी छिपने का अड्डा बनाते रहे है। हर तरह के कोर्स इस यूनिवर्सिटी में होते हैं। स्कूल से पीएचडी तक की पढ़ाई यहाँ होती है। ऐसे में किसी कोर्स में एडमिशन लेकर छिपना आसान होता है। छात्रों का ब्रेनवॉश कर उन्हें देश विरोधी गतिविधियों में शामिल करना भी तुलनात्मक रूप से आसान होता है, क्योंकि पढ़ने लिखनेवाले छात्र एक साथ रहते हैं और एक-दूसरे पर विश्वास कर लेते हैं। यही वजह है कि कई बार छात्रों के कनेक्शन आतंकियों, कट्टरपंथियों और देश में अराजकता फैलाने वालों से हो जाते है।