23 मार्च, 2023 को हेट स्पीच मामले में सुप्रीम कोर्ट में दूसरे दिन भी सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका कर्ता की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने कुछ सेलेक्टिव खबरों के आधार पर याचिका दायर की है। तुषार मेहता ने कहा कि हिंदुओं के खिलाफ भी लगातार द्वेषपूर्ण भाषण दिए जा रहे हैं। कोर्ट को इसमें सेलेक्टिव नहीं होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट शाहीन अब्दुल्ला की याचिका पर सुनवाई कर रही है। 23 मार्च, 2023 को केएम जोसेफ और बीवी नागरत्ना की पीठ ने मामले पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने हेट स्पीच को लेकर कई सख्त टिप्पणियाँ की। कोर्ट ने कहा कि हम इन याचिकाओं पर इसलिए सनवाई कर रहे हैं क्योंकि राज्य सरकारें समय पर कार्रवाई नहीं कर पा रही हैं। राज्य सरकारें इन मामलों में नाकाम और शक्तिहीन हो चुकी हैं।
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कहा गया कि हर दिन असामाजिक तत्व इस तरह के भाषण दे रहे हैं जिससे समाज में बैर की भावना पनप रही है। कोर्ट में तुषार मेहता और जजों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। तुषार मेहता ने हिंदुओं के खिलाफ दिए गए कई बयानों का उल्लेख किया। उन्होंने केरल के एक कार्यक्रम में फैलाए जा रहे हिंदू घृणा और तमिलनाडु में डीएमके नेता द्वारा ब्राह्मणों के वध की बात करने का उल्लेख किया।
जब हिन्दुओं और उनके देवी-देवताओं के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाने का क्यों नहीं ये लोग विरोध करते? आखिर हिन्दू भी कब तक हाथ में चूड़ी पहन बैठा रहेगा? कब तक चुप रहेगा?
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि याचिका कर्ता ने इन घटनाओं का उल्लेख अपनी याचिका में नहीं किया है। याचिकाकर्ता अब्दुल्ला ने खास घटनाओं को ही अपने पेटिशन में शामिल किया है जो उनकी मंशा जाहिर करता है। कोर्ट को ऐसे मामलों में सेलेक्टिव नहीं होना चाहिए। इस पर जस्टिस जोसेफ ने कहा कि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। तुषार मेहता ने इस पर अदालत से इस तरह की टिप्पणी न करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे इस तरह के हेट स्पीचों को उचित ठहराया जाना माना जाएगा।
वास्तव में हो क्या रहा है कि हिन्दू विरोधी षड्यंत्रों पर चुप्पी साध, उसकी प्रतिक्रिया होने पर हिन्दू विरोधियों को 'गंगा-जमुनी तहजीब' और 'संविधान' की दुहाई देनी शुरू हो जाती है। जिस पर कोर्ट को सख्ती से पेश आना चाहिए।
एसजी तुषार मेहता ने कहा कि यदि इन मामलों को वास्तव में कम करना है तो ऐसे मामलों में किसी खास धर्म, वर्ग या राज्य की बात न कर के सभी मामलों को एक साथ देखना होगा। कोर्ट ने 28 अप्रैल 2023 को मामले पर विचार करने की बात कही है।
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के 76 वकीलों ने 17 और 19 दिसंबर को दिल्ली (हिंदू युवा वाहिनी द्वारा) और हरिद्वार (यति नरसिंहानंद) में धर्म संसद के दौरान दिए गए भाषणों को लेकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) एनवी रमना को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में कथित आरोप लगाया है कि धर्म संसद के दो अलग-अलग आयोजनों में अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है। इस पर संज्ञान लिया जाए।
पत्र लिखने वालों में प्रशांत भूषण, सलमान खुर्शीद और दुष्यंत दवे भी शामिल हैं। उन्होंने भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 120बी, 121ए, 124ए, 153ए, 153बी, 295ए और 298 के तहत ‘दोषी व्यक्तियों’ के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है।
पत्र में कहा गया है कि इन भाषणों में ना केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है, बल्कि खुलेआम एक पूरे समुदाय की हत्या के लिए आह्वान किया गया है। इस प्रकार ये भाषण न केवल हमारे देश की एकता और अखंडता के लिए गंभीर खतरा हैं, बल्कि लाखों मुस्लिम नागरिकों के जीवन को भी खतरे में डालते हैं।
भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना को पत्र लिखकर उनसे इन भाषणों पर स्वत: संज्ञान लेने की माँग की गई थी, जबकि पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी थी। इसके बावजूद इन वकीलों ने दिल्ली और हरिद्वार के आयोजनों में किए गए कथित घृणास्पद भाषण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय को पत्र लिखा।
यहाँ हैरान करने वाली बात यह है कि जिस तेजी से वकीलों ने शीर्ष न्यायालय का रुख किया है और उनका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए उन्हें इन चुनिंदा घटनाओं के योग्य माना, यह उनके विवेक पर प्रश्न खड़े करता है।
जब ‘धर्म संसद‘ में दिए गए भाषणों के वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहे थे, उसी दौरान सोशल मीडिया पर एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के रैलियों में भड़काऊ भाषण के वीडियो भी सामने लगे।
वायरल वीडियो में एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी को कहते सुना जा सकता है, “मैं पुलिस वालों को बता देना चाहता हूँ कि वो याद रखें कि न तो योगी हमेशा मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे और न ही मोदी हमेशा प्रधानमंत्री। हम मुस्लिम समय को देख कर चुप हैं। पर ध्यान रहे कि हम कुछ भूलने वाले नहीं हैं। हमें तुम्हारा अन्याय याद रहेगा। अल्लाह अपनी ताकत से तुम्हे बर्बाद करेगा। इंशाल्लाह हम याद रखेंगे और समय भी बदलेगा। तब तुम्हे बचाने कौन आएगा जब योगी अपने मठ और मोदी हिमालय में चले जाएँगे? याद रहे, हम नहीं भूलने वाले।”
मुख्य जस्टिस जी
एक बार ओवैसी की सुन लीजिये, "असहिष्णुता" क्या होती है, समझ आ जायेगा -
जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने डाबर के करवा चौथ के विज्ञापन पर पूरी हिन्दू कौम को "असहिष्णु" कह दिया था जिसकी वजह से कंपनी को अपना विज्ञापन वापस लेना पड़ गया -
हिन्दू समुदाय को जलील करने वाले डाबर ने अपने विज्ञापन में 2 समलैंगिक शादी शुदा लड़कियों को करवा चौथ का व्रत करते दिखाया था जैसे हिन्दुओं की महिलाएं व्रत करती ही नहीं और
समलैंगिक लड़कियां ही हिंदुत्व की प्रतिनिधि हैं -इस पर ऐतराज को चंद्रचूड़ जी ने करार दिया था --
"असहिष्णुता" है --अब एक बार चंद्रचूड़ जी ओवैसी का बयान सुन लें तो समझ आएगा कि
"असहिष्णुता" किस चिड़िया का नाम है --
ओवैसी ने खुलेआम पुलिस वालों को धमकी दे कर दरअसल पूरे हिन्दू समाज को धमकी दी है कि मोदी योगी हमेशा सत्ता में नहीं रहेंगे और जब योगी मठ में और मोदी हिमालय पर चले जायेंगे तो तुम्हे बचाने कौन आएगा --हम मुसलमान तुम्हारे जुल्म भूलने वाले नहीं हैं -ऐसा नहीं है ओवैसी और उसके लोग पहली बार ऐसी धमकी दे रहे हैं -छोटे ओवैसी ने भी कहा था, 15 मिनट के लिए पुलिस हटा लो तो हम 100 करोड़ हिन्दुओं को ख़त्म कर सकते हैं।
कुछ दिन पहले वारिस पठान ने कहा था कि हम 15 करोड़ आज 100 करोड़ पर भारी हैं -
ओवैसी की अनर्गल बातें और तमाम मोदी विरोधियों का उसके खिलाफ अपशब्द बोलना आपकी
(सुप्रीम कोर्ट) की 7 साल से दी हुई "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता" का परिणाम है जिसकी वजह से लोग अराजकता फैलाने में आगे रहते हैं --
एक काम तो आप ओवैसी से पूछिए जो मोदी और योगी ने मुसलमानों के खिलाफ किया हो, किसी योजना में भेदभाव किया हो --अरे, श्री राम का मंदिर भी बनवा रहे हैं तो आपकी आज्ञा मिलने के बाद ही बनवा रहे हैं --मगर ओवैसी उसे भी जुल्म कहता है - ओवैसी की बातों पर आपको स्वतः संज्ञान ले कर उसे जेल में डालना चाहिए और उसकी पार्टी को बैन करने के आदेश देने चाहिए -ऐसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देश में आग लगाने का काम कर रही है जिसके लिए अदालत भी जिम्मेदार है --
याद रखिये, आज अगर ओवैसी मोदी और योगी के खिलाफ बोलने की हिम्मत कर रहा है, तो वो कल को आपको भी निशाना बना सकता है।
ओवैसी को वैसे याद रखना चाहिए कि 2019 चुनाव से पहले, कांग्रेस के नेताओं ने भी सभी जांच एजेंसियों के अधिकारियों ऐसे ही धमकी दी थी कि हमारी सरकार आई तो आप लोगों मुश्किल में आ जाओगे -ओवैसी का यह आपत्तिजनक बयान 12 दिसंबर को कानपुर की एक सभा में दिया गया था। लेकिन जिन वकीलों ने ‘धर्म संसद’ मामले में शीर्ष अदालत से हस्तक्षेप करने के लिए तेजी दिखाई। उन्होंने ओवैसी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय को पत्र नहीं लिखा। बहुसंख्यकों के खिलाफ किए गए कई अन्य नफरत भरे भाषणों इसी तरह आसानी से नजरअंदाज कर दिया गया और उनको शीर्ष अदालत के समक्ष लाना योग्य नहीं माना।
क्या आपने कभी इन पश्चिमी philosophers को पढ़ा है:
1. लियो टॉल्स्टॉय (1828 -1910):
"हिन्दू और हिन्दुत्व ही एक दिन दुनिया पर राज करेगी, क्योंकि इसी में ज्ञान और बुद्धि का संयोजन है"।
2. हर्बर्ट वेल्स (1846 - 1946):
" हिन्दुत्व का प्रभावीकरण फिर होने तक अनगिनत कितनी पीढ़ियां अत्याचार सहेंगी और जीवन कट जाएगा । तभी एक दिन पूरी दुनिया उसकी ओर आकर्षित हो जाएगी, उसी दिन ही दिलशाद होंगे और उसी दिन दुनिया आबाद होगी । सलाम हो उस दिन को "।
3. अल्बर्ट आइंस्टीन (1879 - 1955):
"मैं समझता हूँ कि हिन्दूओ ने अपनी बुद्धि और जागरूकता के माध्यम से वह किया जो यहूदी न कर सके । हिन्दुत्व मे ही वह शक्ति है जिससे शांति स्थापित हो सकती है"।
4. हस्टन स्मिथ (1919):
"जो विश्वास हम पर है और इस हम से बेहतर कुछ भी दुनिया में है तो वो हिन्दुत्व है । अगर हम अपना दिल और दिमाग इसके लिए खोलें तो उसमें हमारी ही भलाई होगी"।
5. माइकल नोस्टरैडैमस (1503 - 1566):
" हिन्दुत्व ही यूरोप में शासक धर्म बन जाएगा बल्कि यूरोप का प्रसिद्ध शहर हिन्दू राजधानी बन जाएगा"।
6. बर्टरेंड रसेल (1872 - 1970):
"मैंने हिन्दुत्व को पढ़ा और जान लिया कि यह सारी दुनिया और सारी मानवता का धर्म बनने के लिए है । हिन्दुत्व पूरे यूरोप में फैल जाएगा और यूरोप में हिन्दुत्व के बड़े विचारक सामने आएंगे । एक दिन ऐसा आएगा कि हिन्दू ही दुनिया की वास्तविक उत्तेजना होगा "।
7. गोस्टा लोबोन (1841 - 1931):
" हिन्दू ही सुलह और सुधार की बात करता है । सुधार ही के विश्वास की सराहना में ईसाइयों को आमंत्रित करता हूँ"।
8. बरनार्ड शा (1856 - 1950):
"सारी दुनिया एक दिन हिन्दू धर्म स्वीकार कर लेगी । अगर यह वास्तविक नाम स्वीकार नहीं भी कर सकी तो रूपक नाम से ही स्वीकार कर लेगी। पश्चिम एक दिन हिन्दुत्व स्वीकार कर लेगा और हिन्दू ही दुनिया में पढ़े लिखे लोगों का धर्म होगा "।
9. जोहान गीथ (1749 - 1832):
"हम सभी को अभी या बाद मे हिन्दू धर्म स्वीकार करना ही होगा । यही असली धर्म है ।मुझे कोई हिन्दू कहे तो मुझे बुरा नहीं लगेगा, मैं यह सही बात को स्वीकार करता हूँ ।"
Supreme Court से विनम्र निवेदन
तुम हमें वोट दो; हम तुम्हें-
... लैपटॉप देंगे ..
....सायकल देंगे
...स्कूटी देंगे ..
... हराम की बिजली देंगे ..
.... लोन माफ कर देंगे
..कर्जा डकार जाना, माफ कर देंगे
... ये देंगे .. वो देंगे ... वगैरह, वगैरह।
क्या ये खुल्लम खुल्ला रिश्वत नहीं?
क्या इससे चुनाव प्रक्रिया बाधित नहीं हो रही !!
क्या इन सब प्रलोभनों से चुनाव निष्पक्ष होंगे?
कोई चुनाव आयोग है भी कि नहीं इस देश में !
आयोग की कोई गाइडलाइंस है भी या नहीं?
वोट के लिए क्या आप कुछ भी प्रलोभन दे सकते हैं?
ये जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा है इसकी जवाबदेही होनी चाहिये,
रोकिए ये सब ..
वर्ना बन्द कीजिये ये चुनाव के नाटक .. और मतदान ।
हम मध्यमवर्गीय तंग आ गए हैं, क्या हम इन सबके लिए भर-भर कर टैक्स चुकाते रहें?
डिफाल्टर की कर्जमाफी... फोकट की स्कूटी...
हराम की बिजली...
हराम का घर...
दो रुपये किलो गेंहू...
एक रुपया किलो चावल...
चार से छह रुपये किलो दाल...
और कितना चूसोगे टेक्स दाताओं को?
क्योंकि! वे तुम्हारे आका हैं!
गरीब हैं, थोकिया वोट बैंक हैं, इसलिए फोकट खाना, घर, बिजली, कर्जा माफी दिए जा रहे हैं,
बाकी लोग किस बात की सजा भोगें ?
जबकि होना ये चाहिये कि हमारे टैक्स से सर्वजनहिताय काम हों,
देश के विकास का काम हों,
रेल मार्ग, सड़कें, पुल दुरुस्त हों,
रोजगारोन्मुखी कल कारखानें हों,
विकास की खेती लहलहाती हो,
तो सबको टैक्स चुकाना अच्छा लगता.. ।
लेकिन आप तो देश के एक बहुत बड़े भाग को शाश्वत गरीब ही बनाए रखना चाहते हो। उसके लिए रोजगार सृजन के अनूकूल परिस्थिति बनाने की बजाए आप तथाकथित सोशल वेलफेयर की खैराती योजनाओं के माध्यम से अपना अक्षुण्ण वोट बैंक स्थापित कर रहे हो।
Kashmiri Hindu tells her story what she saw as a child:
Her 9 months pregnant mom has to leave Kashmir after mob attack.
Her neighbor hindu doctor ganged raped, killed, & later her body was cut into 4 parts. Her scientist husband was killed
चुनाव आयोग एवं सर्वोच्च न्यायालय से निवेदन हैं कि कर्मशील देश के बाशिन्दों को तुरंत कानून लाकर कुछ भी फ्री देने पर बंदिश लगाई जाए ताकि देश के नागरिक निकम्मे व निठल्ले न बने।
पूर्व प्रधानमंत्री स्व.अटलजी कहा करते थे कि जनता को सिर्फ न्याय,शिक्षा व चिकित्सा के अलावा और कुछ भी मुफ्त में नहीं मिलनी चाहिए। तभी देश का विकास संभव है।
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार आज (फरवरी 28, 2020) सीएए विरोधी प्रदर्शनों में जनता को ट्वीट और भाषणों के जरिए भड़काने के आरोप में सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर, बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर, रेडियो जॉकी सायमा, AAP नेता अमानतुल्लाह खान के ख़िलाफ़ दर्ज हुई याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाइकोर्ट में एनआई जाँच के लिए अपील की गई। इसके बाद कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा पर भी भड़काऊ भाषण देने के आरोप में दिल्ली हाईकोर्ट में दर्ज हुई याचिका पर आज सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने दिल्ली पुलिस, केंद्र और राज्य सराकर को नोटिस भेजा। मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी। इसमें अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा और प्रवेश वर्मा के खिलाफ दी गई याचिकाओं पर भी सुनवाई होगी। दिल्ली हाईकोर्ट में आज तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इन याचिकाओं में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी, असदुद्दीन ओवैसी, अकबरुद्दीन ओवैसी, वारिस पठान, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, आम आदमी पार्टी विधायक अमानतुल्लाह खान और अभिनेत्री स्वरा भास्कर, आरजे सायमा समेत अन्य लोगों पर भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाया गया था। इस सुनवाई के दौरान आज याचिकाकर्ता ने कोर्ट में सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी के उन बयानों को पढ़कर सुनाया, जिसमें उन्होंने सीएएए का विरोध करने के लिए सड़क पर उतरने की बात कही थी। साथ ही कहा था कि कांग्रेस इस तरह का विरोध करने वाले लोगों के साथ खड़ी है। इसके साथ ही सुनवाई के दौरान मनीष सिसोदिया के उस बयान का जिक्र किया गया, जिसमें उन्होंने दिल्ली पुलिस पर बस में आग लगाने का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं असदुद्दीन ओवैसी, वारिस पठान द्वारा दिए गए भाषण को भी कोर्ट के सामने रखा गया। इसके साथ ही जिन अन्य लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं, उनके बयानों की कॉपी हाईकोर्ट के सामने पेश की गई। अवलोकन करें:-
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार संसद और राज्य सभा से नागरिकता संशोधक बिल पारित होने पर कानून बनते ही, मोदी विरोधी अपनी...
दिल्ली हाईकोर्ट ने तीनों याचिकाओं पर अलग-अलग सुनवाई करते हुए बाद आज केंद्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है कि इन तीनों पक्षों का इन याचिकाओं पर क्या कहना है, क्योंकि याचिका में माँग की गई है कि भड़काऊ बयान देने वाले सभी लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करनी चाहिए।