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श्रीलंका में राष्ट्रपति दिसानायके के गठबंधन को आम चुनावों में दो-तिहाई बहुमत, तमिल बहुल क्षेत्र में भारी जन समर्थन


श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की अगुवाई वाले गठबंधन NPP ने आम चुनावों में बड़ी जीत हासिल की है। दिसानायके के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 225 सीटों में से 159 सीटें हासिल की हैं। इस गठबंधन को 60% से अधिक वोट हासिल हुए हैं।

दिसानायके ने यह चुनाव सितम्बर में राष्ट्रपति बनने के बाद करवाए थे। इससे पहले उनके गठबंधन के पास संसद में मात्र 3 सीटें थी। उन्होंने संसद भंग कर दी थी और अब उन्हें यहाँ भी दो तिहाई बहुमत हासिल हुआ है। दिसानायके को वामपंथी विचारों वाला माना जाता है।

दिसानायके के गठबंधन को श्रीलंका के उत्तरी तमिल बहुत इलाके में भी अच्छा समर्थन मिला है। दिसानायके की पार्टी को बड़ी जीत हासिल होने के बाद श्रीलंका में भारतीय हाई कमिश्नर संतोष झा ने उनसे मुलाक़ात की है और उन्हें बधाई दी है। भारत ने इस चुनाव नतीजे का स्वागत किया है।

ट्रंप जीता तो सरेआम करूँगा गोलीबारी: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बीच हमलों की धमकी देने वाला गिरफ्तार, वह भी पकड़ा गया जो शरीर पर ज्वलनशील पदार्थ डाल घूम रहा था; ट्रम्प की जीत से भारत विरोधियों को तगड़ा झटका; भारतीय विपक्ष भी हुआ दम

डोनाल्ड ट्रम्प की जीत अमेरिका के लिए तो ऐतिहासिक है कि भूतपूर्व राष्ट्रपति पिछले चुनाव में हारने के बाद अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति बन इतिहास रच दिया है। ट्रम्प की जीत का विश्व भर में असर पड़ेगा, विशेषकर कट्टरपंथियों के लिए। ट्रम्प की जीत से खालिस्तानी पुन्नू को भी भारत के विरुद्ध जहर उगलने से पहले सोंचना होगा क्योकि अब कोई बीडेन उसे संरक्षण देने नहीं आएगा। बांग्लादेश और पाकिस्तान को भी अब होशियार रहने की जरुरत है। कमला हैरिस की हार भारत विरोधियों के लिए भी बहुत बड़ा झटका है। कमला को समर्थन देने में अधिकतर भारत विरोधी ही थे। कमला की हार से भारतीय विपक्ष को भी तगड़ा झटका लगा है।  
जिस तरह भारतीय विपक्ष मोदी और बीजेपी के विरुद्ध लोकसभा चुनाव में चीखता-चिल्लाता रहता था कि संविधान और लोकतंत्र खतरे में उसे बचाने I.N.D.I. गठबंधन को जिताओं। ठीक यही प्रमुख प्रचार कमला ट्रम्प के विरुद्ध कर रही थे। लेकिन सच्चाई जनता देख रही थी। ट्रम्प की जीत ने भारत विरोधियों को भी जोर का झटका दिया है। 

अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप ने जीत हासिल कर ली है। उन्हें डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रत्याशी कमला हैरिस से पहले 270 इलेक्टोरल वोट हासिल करके उन्हें मात दी। खबर लिखे जाने तक हैरिस को 213 इलेक्टोरल वोट प्राप्त हुए और ट्रंप को 270।

इसी के साथ अब डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में फिर से वापसी होगी। उनके चाहने वाले सड़कों पर उतर खुशियाँ मना रहे हैं। वहीं उनके अन्य समर्थक सोशल मीडिया के जरिए अपना उत्साह दिखा रहे हैं। एलन मस्क भी इस लिस्ट में शामिल हैं।
अमेरिका में हो रहे राष्ट्रपति चुनावों के बीच पुलिस ने आईजैक सिसेल नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आईजैक सिसेल ने धमकी दी थी कि अगर राष्ट्रपति चुनावों में ट्रंप जीते तो वह सरेआम गोलीबारी करेगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उसने यह धमकी एफबीआई नेशनल हेडक्वार्टर को भेजी थी। धमकी में उसने कहा था कि उसके पास हमला करने के लिए हथियार भी है। वो इंतजार बस ट्रंप के जीतने का करना है।

वेस्ट वर्जिनिया के एफबीआई हेडक्वार्टर में भेजे गए धमकी वाले संदेश में लिखा गया, “अगर ट्रंप जीते तो मैं रुढिवादी ईसाई गंदगी पर हमला करूँगा। मेरे पास एक चुराई हुई एआर15 है और इसके निशाने पर कौन है इसका नाम मैं नहीं बता रहा ताकि मैं अपने प्लान पर काम कर सकूँ…एफबीआई तब तक कुछ नहीं कर सकती जब तक मैं हमले को अंजाम नहीं दे देता।”

एक तरफ जहाँ मास शूटिंग की धमकी देने पर आईजैक को गिरफ्तार गया है तो वहीं अमेरिका में अलग-अलग जगहों पर पुलिस को अराजक तत्वों से धमकियाँ मिलने की बात सामने आई है। कहीं बम धमाकों की बात कही जा रही है तो कहीं किसी और हमले की।

मतगणना चालू रहने के बीच वाशिंगटन डीसी से भी एक मामला सामने आया है जहाँ एक युवक को पुलिस ने इसलिए अरेस्ट किया क्योंकि उसका बदन से ज्वलनशील पदार्थ डालने जाने की गंध आ रही थी। पुलिस ने फौरन उसे अपनी हिरासत में लिया।

जहाँ 80% मुस्लिम, वहाँ जीता मामन खान जिसका हिंदू विरोधी दंगों में नाम, BJP के मुस्लिम नहीं कबूल: फिर बेशर्मी से कहते है कि BJP किसी मुस्लिम को मंत्री नहीं बनाती

                           मामन खान (हाथ में टोपी लिए) (चित्र साभार: Mammankhanmla/ig)
भारत में हर तीन-चार महीने पर एक-दो चुनाव आते रहते हैं। हर चुनाव के साथ देश की वोटबैंक राजनीति और उससे जुड़े मुद्दे भी उठते हैं। प्रत्येक चुनाव में जब भाजपा अपने उम्मीदवार घोषित करती है तो लिस्ट में मुस्लिम नाम ढूँढने वाले हमेशा शोर मचाते हैं। उनका आरोप रहता है कि भाजपा की राजनीति में मुस्लिमों के लिए कोई जगह नहीं है और वह मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट नहीं देती। यह आरोप गुजरात चुनाव से लेकर उत्तर प्रदेश और हालिया लोकसभा चुनावों तक लगता आया है।

भाजपा पर यह आरोप लगाने 2024 के हरियाणा और जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में निरुत्तर हो गए। भाजपा ने इन चुनावों में कुल 28 मुस्लिमों को टिकट दिया। 2 मुस्लिमों को हरियाणा में जबकि 26 मुस्लिम उम्मीदवारों को भाजपा ने जम्मू कश्मीर में उतारा। भाजपा ने हरियाणा के नूंह जिले की 3 में से 2 सीटों में पर मुस्लिम उम्मीदवार दिए। उसने फिरोजपुर झिरका से नसीम अहमद जबकि पुन्हाना से एजाज खान को उतारा था।

चुनाव नतीजों में इनमें से एक भी मुस्लिम उम्मीदवार जीतने में सफल नहीं रहा है। जम्मू कश्मीर में भी भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवारों को सफलता नहीं हासिल हुई। हरियाणा में भी उसके दोनों उम्मीदवार हार गए। हरियाणा में उन सीटों पर भी भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार हारे जहाँ लगभग 80% जनसंख्या मुस्लिम है। फिरोजपुर झिरका में मुस्लिम आबादी ने भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार नसीम अहमद को ना चुन कर कॉन्ग्रेस के मामन खान को चुना।

कॉन्ग्रेस के मामन खान ने हरियाणा के अंदर सबसे बड़ी जीत दर्ज की है। वह 98000 वोटों के अंतर से जीते हैं। गौरतलब है कि यह वही मामन खान हैं जो नूंह दंगों में आरोपित हैं और इस मामले में जेल तक जा चुका है। मामन खान को इन नूंह दंगों, जिनमें एक युवक की मौत हुई थी, उनका सरगना बताया गया था। मामन खान पर मात्र दंगा भड़काने ही नहीं बल्कि धमकी देने का भी आरोप है। हाल ही में उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस सरकार बनेगी तो अन्याय करने वालों मेवात छोड़ना पड़ेगा।

मामन खान को जिताना और वह भी हरियाणा में सबसे बड़े अंतर से जिताना दिखाता है कि मुस्लिम जनसंख्या को भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार पसंद नहीं है। इसका अर्थ है कि यदि उनके सामने भाजपा मुस्लिम उम्मीदवार देती भी है तो उसे मुस्लिम वोट नहीं देंगे। उनका वोट ऐसे व्यक्ति को जाने की संभावना अधिक दिखाई पड़ती है जो दंगे में आरोपित है और विकास-इन्फ्रा जैसी बातों से कोसों दूर है। मामन खान की जीत यह भी दर्शाती है कि मुस्लिम वोट उसे पसंद करता है जो भाजपा को हराता हो, भले ही वह दंगा आरोपित क्यों ना हो।

मामन खान और आफताब खान जैसे उम्मीदवारों की जीत में बड़े अंतर यह भी दिखाते हैं कि मुस्लिम आबादी का ध्यान विकास की तरफ कम और खुद को वोटबैंक बना कर राजनीति की तरफ अधिक है। मेवात देश के सबसे अधिक पिछड़े, गरीब और अपराध ग्रसित इलाकों में से एक है।

राजधानी दिल्ली से मात्र 100 किलोमीटर के दायरे में होने के बावजूद हाल तक यहाँ मूलभूत सुविधाएँ नहीं पहुँची थी। यहाँ महिलाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। यही पर बीत वर्ष नल्हड़ महादेव में जल चढ़ाने गए हिन्दुओं पर कट्टरपंथी भीड़ ने हमला किया था। लेकिन इन सब मुद्दों को सुलझाने का वादा करने के बजाय मामन जैसे लोगों को चुना जाता है।

ऐसे में मुस्लिमों को खुद इस यह सोचना होगा कि कब तक केवल भाजपा को हराने के नाम पर ही वोट करते रहेंगे भले ही उनके पास अपने ही समुदाय का उम्मीदवार हो। उन्हें यह भी सोचना होगा कि मात्र भाजपा का हौव्वा दिखा कर उनसे वोट लेने वाली पार्टियाँ उनका विकास कब करेंगी। भाजपा पर यह आरोप लगाने वाले मुस्लिम समाज को यह समझना होगा कि सबका साथ और सबका विश्वास का नारा तभी आगे बढेगा जब मुस्लिम उसमें शामिल हो जाएँ।