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श्रीलंका में राष्ट्रपति दिसानायके के गठबंधन को आम चुनावों में दो-तिहाई बहुमत, तमिल बहुल क्षेत्र में भारी जन समर्थन


श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की अगुवाई वाले गठबंधन NPP ने आम चुनावों में बड़ी जीत हासिल की है। दिसानायके के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 225 सीटों में से 159 सीटें हासिल की हैं। इस गठबंधन को 60% से अधिक वोट हासिल हुए हैं।

दिसानायके ने यह चुनाव सितम्बर में राष्ट्रपति बनने के बाद करवाए थे। इससे पहले उनके गठबंधन के पास संसद में मात्र 3 सीटें थी। उन्होंने संसद भंग कर दी थी और अब उन्हें यहाँ भी दो तिहाई बहुमत हासिल हुआ है। दिसानायके को वामपंथी विचारों वाला माना जाता है।

दिसानायके के गठबंधन को श्रीलंका के उत्तरी तमिल बहुत इलाके में भी अच्छा समर्थन मिला है। दिसानायके की पार्टी को बड़ी जीत हासिल होने के बाद श्रीलंका में भारतीय हाई कमिश्नर संतोष झा ने उनसे मुलाक़ात की है और उन्हें बधाई दी है। भारत ने इस चुनाव नतीजे का स्वागत किया है।

वर्ल्ड कप से बाहर हुए शाकिब अल हसन ; ‘मेरे पास बाकी थे 5 सेकेंड’: ‘टाइम्ड आउट’ होने वाले एंजिलो मैथ्यूज ने वीडियो शेयर कर ICC से माँगा न्याय

एं                       जिलो मैथ्यूज ने साकिब को आउट करके दिखाया बाहर का रास्ता (फोटो साभार : ESPNCRICINFO)
श्रीलंका के वरिष्ठ आल राउंडर एंजिलो मैथ्यूज ने दावा किया है कि वो टाइम आउट नहीं थे, बल्कि उनके पास पूरे 5 सेकंड बाकी थे। उन्होंने बाकायदा टीवी फुटेज भी अपने एक्स हैंडल पर शेयर किया है। उन्होंने आईसीसी से ‘न्याय’ की माँग की है। इस बीच, उन्हें आउट करने वाले शाकिब अल हसन विश्वकप से बाहर हो गए हैं। बताया गया है कि वो श्रीलंका के खिलाफ मैच के दौरान ही घायल हो गए थे और अब कम से कम 3-4 सप्ताह के लिए खेल से बाहर हो गए हैं।

मैथ्यूज बोले-मैं तो बेगुनाह था, गलत सजा मिली

श्रीलंका के स्टार ऑल राउंडर एंजेलो मैथ्यूज ने मैच का एक वीडियो शेयर किया। उसमें उन्होंने ये बताने की कोशिश की है कि वो दो मिनट की समय सीमा के अंदर पिच पर पहुँच गए थे और बल्लेबाज़ी के लिए तैयार थे, लेकिन आखिरी वक़्त पर हेलमेट का स्ट्रिप टूट गया था।
अपने दूसरे पोस्ट में मैथ्यूज ने दो तस्वीरें पोस्ट की हैं, जिसमें उन्होंने बताया है कि कैसे वो दो मिनट के अंदर पिच पर पहुँच कर खेलने के लिए तैयार थे, लेकिन इसी बीच उनके हेलमेट का स्ट्रेप टूट गया था। इसमें उन्होंने मैच के फुटेज का टाइम स्टैंप भी दिखाया है।

हर्षा भोगले बोले – मैथ्यूज को आउट दिया जाना सही

इस पूरे विवाद पर जाने-माने क्रिकेट कमेंटेटर और एक्सपर्ट हर्षा भोगले ने विस्तार से चर्चा की है और बताया है कि क्यों मैथ्यूज आउट थे। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “आपको अंपायरों पर विश्वास करना होगा। यदि वे कहते हैं कि दो मिनट बीत गए थे, तो उन्होंने ऐसा किया था क्योंकि ये बहुत अनुभवी और बहुत अच्छे अंपायर हैं और उनसे ऐसी गलतियाँ करने की संभावना नहीं है। दूसरा, नियम न जानने की बात कहने से काम नहीं चलने वाला। अगर कोई नियम है और आपने उसे तोड़ा है, तो आप को एक मिनट भी वहाँ रुकने का अधिकार नहीं।”
उन्होंने आगे लिखा, “शाकिब को अपील करने का अधिकार था और यह तय करना हमारा काम नहीं है कि उसे अपील करनी चाहिए या नहीं। यह उसका निर्णय है, वह इसी तरह खेलना चाहता है। हालाँकि, यहाँ मैथ्यूज कोई फायदा नहीं उठा रहे थे।” उन्होंने उदाहरण देते हुए अपनी बात को समझाया कि मैच के दौरान कोई बल्लेबाज अगर गेदबाज या फील्डर को देने के लिए बॉल उठाता भी है, तो उसके खिलाफ अपील नहीं की जाती।
हालाँकि, बल्लेबाज अक्सर पूछ लेते हैं कि क्या वो ऐसा कर सकते हैं। टीक इसी तरह से अगर मैथ्यूज ने अंपायरों से पूछा होता कि क्या उसका हेलमेट बदलना ठीक है, तो मुझे यकीन है कि कोई अपील नहीं होती। हर्षा भोगले ने अपनी बात में आगे कहा कि इस मामले में हमें खेल भावना को लाने की जरूरत नहीं है। मैथ्यूज़ और श्रीलंकाई प्रशंसक निराश और नाराज़ हो सकते हैं लेकिन खेल के नियमों के अनुसार, वो आउट थे।
हर्षा ने एक वीडियो भी शेयर किया। उन्होंने बताया, “5 जनवरी 2007 को गांगुली को टाइम आउट कर दिया गया लेकिन ग्रीम ने इसका उपयोग नहीं किया जो उस समय दक्षिण अफ्रीकी टीम के कप्तान थे। विपक्षी टीम के कप्तान के पास खेल की भावना का सम्मान करते हुए अंपायर से टाइम आउट नियम को नजरअंदाज करने का अनुरोध करने का विवेकाधिकार है। अगर आपको लगता है कि बल्लेबाज से वाजिब वजह के चलते देरी हुई।”
इस मामले में स्टार स्पोर्ट्स ने विशेषज्ञों की टीम से भी बातचीत की है। इस पैनल में इयान बिशप, रमीज रजा, संजय मांजरेकर और संजय बांगर जैसे दिग्गज शामिल थे। उन्होंने नियमों के मुताबिक मैथ्यूज को आउट माना।
हालाँकि, एंजिलो मैथ्यूज का ये कहना है कि वो देर नहीं कर रहे थे और 5 सेकंड का समय उनके पास बचा था। ऐसे में ये मामला दिलचस्प मोड़ ले चुका है। क्योंकि, कहा जा रहा है कि जिस नियम का हवाला देकर उन्हें आउट करार दिया गया, वो नियम उन्होंने तोड़ा ही नहीं। वहीं, इस बीच साकिब अल हसन, जिन्होंने मैथ्यूज के टाइम आउट के लिए अपील किया था, वो अब विश्वकप से ही बाहर हो गए हैं। उन्हें श्रीलंका के खिलाफ मैच के दौरान चोट लग गई थी, लेकिन वो पेन किलर्स और बैंडेड की सहायता से खेलते रहे और अपनी टीम को 3 विकेट से जीत दिलाई।

आतंकियों को पालता है कनाडा, ट्रूडो बकवास करने में माहिर: श्रीलंका ने भी किया बेनकाब, कहा- हमारे साथ भी किया था ऐसा ही गेम

खालिस्तानी आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का समर्थन करते हुए श्रीलंका ने पूरी दुनिया के सामने कनाडा को नंगा कर दिया है। कहा है कि कनाडा आतंकियों को पनाह देता है। उसके प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के लिए कहा है कि वे बिना सबूत आरोप लगाने में माहिर हैं। खालिस्तानी राग अलापने पर कनाडा को भारत से मिली लताड़ को भी सही बताया है।

श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी ने 25 सितंबर 2023 को कनाडा को फटकार लगाई। उन्होंने कहा, “कुछ आतंकवादियों को कनाडा में सुरक्षित पनाहगाह मिल गई है। कनाडाई पीएम का यह तरीका है कि बगैर किसी सबूत के कुछ अपमानजनक आरोप लगाए जाएँ।”

साबरी ने कहा कि ट्रूडो ने ऐसा ही श्रीलंका के साथ भी किया था। उन्होंने कहा था कि श्रीलंका में एक भयानक नरसंहार हुआ था। यह सरासर झूठ है। हर कोई जानता है कि हमारे देश में कोई नरसंहार नहीं हुआ था।

श्रीलंका के विदेश मंत्री ने कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो पर यारोस्लाव हुंका को लेकर भी तंज किया। उन्होंने कहा, “मैंने कल देखा कि वो ऐसे शख्स के समर्थन और उसके जोरदार स्वागत में शामिल थे जो द्वितीय विश्व युद्ध में नाजियों के साथ जुड़ा था।”

उन्होंने ट्रूडो को संदेहास्पद शख्सियत बताते हुए कहा कि श्रीलंका अतीत में इससे निपट चुका है। जब भी ट्रूडो अपमानजनक और झूठे आरोप लगाते हैं तो श्रीलंका को हैरानी नहीं होती

वहीं फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCC South Asia) में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत में श्रीलंका के उच्चायुक्त मिलिंडा मोरागोडा ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद को लेकर उनके देश की नीति जीरो टॉलरेंस है। उन्होंने कहा कि इस मामले पर भारत की प्रतिक्रिया सख्त और बिना लाग-लपेट वाली रही है। कहा कि उनका देश इस मुद्दे पर भारत का समर्थन करता है।

श्रीलंकाई उच्चायुक्त ने कहा कि श्रीलंका पिछले चार दशकों में आतंकवाद के कई रूपों से पीड़ित रहा है, इसलिए उनका देश आतंकवाद को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करता। उन्होंने कहा कि अगर श्रीलंका को भारत से समर्थन नहीं मिला होता तो वह स्थिर नहीं होता। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि अगले साल मार्च तक एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का दोष भारत पर मढ़ने की कोशिश की थी। इसके बाद से दोनों देशों के रिश्तों में खासा तनाव है। ट्रूडो वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ गए हैं। घरेलू मोर्चे पर भी उनका विरोध हो रहा है।

ऑस्ट्रेलिया T20 : बलात्कार मामले में श्रीलंकाई बल्लेबाज़ धनुष्का गुनातिलका गिरफ्तार

क्रिकेटर गुणतिलका (फाइल फोटो
ऑस्ट्रेलिया में T20 विश्वकप खेलने गए श्रीलंकाई बल्लेबाज धनुष्का गुनातिलका गिरफ्तार हो गए हैं। बताया जा रहा है कि यह गिरफ्तारी सिडनी पुलिस ने 6 नवम्बर 2022 को एक होटल से की है। उन पर रेप का आरोप लगा है।

डेटिंग ऐप पर मिली लड़की ने लगाया रेप का आरोप

कथिततौर पर श्रीलंकाई क्रिकेटर पर बलात्कार का आरोप डेटिंग ऐप पर मिली एक 29 साल की महिला ने लगाया है। श्रीलंका की टीम उनके बिना ही अपने देश लौट आई है। इंग्लैंड से हार कर श्रीलंका की टीम विश्वकप से बाहर हो चुकी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़ित महिला श्रीलंकाई क्रिकेटर से ऑनलाइन डेटिंग ऐप के जरिए काफी समय से बात कर रही थी। बताया जा रहा है कि वह इसी 2 नवम्बर 2022 को श्रीलंका के क्रिकेटर से सिडनी के रोज़ बे नाम की जगह पर मिली थी। महिला का आरोप है कि मुलाकात के बाद 31 वर्षीय क्रिकेटर धनुष्का ने उनके सहमति के बिना यौन संबंध बनाए। पुलिस ने महिला की शिकायत पर धनुष्का की तलाश शुरू कर दी थी।
ऑस्ट्रलिया की न्यू साउथ वेल्स की वेबसाइट पर भी यौन शोषण मामले में श्रीलंका के एक नागरिक की गिरफ्तारी का जिक्र है। पुलिस के मुताबिक 6 नवम्बर आरोपित को गिरफ्तार कर के सिडनी सिटी पुलिस स्टेशन लाया गया है। बताया जा रहा है कि श्रीलंकाई क्रिकेटर की जमानत ख़ारिज हो गई है। धनुष्का द्वारा इस फैसले को 7 नवम्बर 2022 को ऊपरी अदालत में चुनौती दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

धनुष्का पर पहले भी लगे हैं आरोप

धनुष्का गुनातिलका पर इस तरह का ये पहला आरोप नहीं है। इसी से मिलते-जुलते एक अन्य आरोप में जुलाई 2018 में एक नार्वे की महिला ने उनके दोस्त पर कोलम्बो के एक होटल में अपने साथ रेप किए जाने का आरोप लगाया था। महिला का कहना था कि उसका रेप क्रिकेटर धनुष्का के आगे ही हुआ था। इन आरोपों के बाद गुनातिलका को टीम से कुछ समय के लिए सस्पेंड कर दिया गया था। हालाँकि बाद में उनकी बहाली हो गई थी।
नवम्बर 2015 में अपना क्रिकेट करियर शुरू करने वाले धनुष्का ने श्रीलंका के लिए अब तक 8 टेस्ट, 47 एक दिवसीय और 46 T- 20 मैच खेले हैं।

संकट में श्रीलंका को आई ‘भगवान श्री राम’ की याद, रामायण से जुड़े स्थानों का हो रहा विकास


चीन के मकरजाल में फंस गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे श्रीलंका को अपने आर्थिक संकट से निकलने के लिए हिन्दुत्व की शरण में आशा की किरण दिखनी शुरू हो गयी है। श्रीलंका की अर्थव्‍यवस्‍था बड़े पैमाने पर टूरिज्‍म पर निर्भर थी। मगर आर्थिक संकट के चलते पर्यटन का कारोबार भी चौपट हो चुका है। भीषण आर्थिक संकट से गुजर रहा यह द्वीपीय देश अब आर्थिक सुधार के लिए पर्यटन को बढ़ावा देने पर ध्यान देना चाहता है। इस देश से रामायण का भी गहरा नाता है। श्रीलंका के नवनियुक्त पर्यटन दूत और क्रिकेट खिलाड़ी सनत जयसूर्या ने कहा है कि उनका देश भारतीय पर्यटकों के लिए रामायण से जुड़े स्थलों की यात्रा को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेगा। इस संदर्भ में जयसूर्या ने हाल में ही कोलंबो में भारत के उच्चायुक्त गोपाल बागले से मुलाकात की। बैठक भारत और श्रीलंका के लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने और आर्थिक सुधार के लिए एक माध्यम के रूप में पर्यटन को बढ़ावा देने पर केंद्रित थी। जयसूर्या ने कहा कि उनका देश भारतीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए रामायण ट्रेल (राम पथ गमन) को प्रोत्साहित करेगा। उन्होंने कहा कि इससे आर्थिक संकट में घिरे देश में पर्यटन को बढ़ावा मिलने से आर्थिक मदद मिलेगी।

संकट में श्रीलंका का मददगार बना भारत

श्रीलंका इस समय गंभीर आर्थिक संकट, ऐतिहासिक मंदी और भयानक महंगाई का सामना कर रहा है। लोगों को अब ईंधन और रोजाना की जरूरत की चीजों के लिए संघर्ष करना पड़ रह है। लोगों को खाने-पीने का सामान नहीं मिल रहा है, जिसकी वजह से पेट भरना भी मुश्किल हो गया है। ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संकटमोचक रूप में सामने आए हैं। श्रीलंका की सरकार और विपक्ष, दोनों मदद के लिए प्रधानमंत्री मोदी की ओर देख रहे थे। संकट काल में भारत ने अपने पड़ोसी देश की मदद कर रहा है। भारत की ओर से 40 मिट्रिक टन डीजल और 50 हजार टन चावल श्रीलंका भेजा गया। इसके साथ ही भारत ने श्रीलंका को 3.8 अरब डॉलर की मदद देने का ऐलान किया है।

अशोक वाटिका में बना है माता सीता मंदिर

माता सीता का हरण करने के बाद रावण ने उन्हें अपने महल की अशोक वाटिका में रखा था। यह जगह आज भी श्रीलंका में मौजूद है। यहां पर सीता माता का एक प्राचीन मंदिर भी बनाया गया है। इस जगह को सेता एलीया के नाम से जाना जाता है। ये नूवरा एलिया नामक जगह के पास स्थित है। मंदिर के पास ही एक झरना भी है। माना जाता है कि इस झरने में सीता माता स्‍नना करती थीं। इस झरने के आसपास की चट्टानों पर हनुमान जी के पैरों के निशान भी मिलते हैं। यही वो पर्वत है जहां हनुमान जी ने पहली बार कदम रखा था। इसे पवाला मलाई कहते हैं। ये पर्वत लंकापुरा और अशोक वाटिका के बीच में है

जहां गिरे थे माता सीता के आंसू, अब सीता तालाब


रावण जब सीता माता को हरण करके ले जा रहा था तब सीता माता अपने पति भगवान राम के पास जाने के लिए रावण से कह रही थीं। मगर, रावण उन्‍हें जबरन अपने साथ लंका ले जा रहा था। उस दौरान सीता माता के आंसू जिस-जिस स्‍थान पर गिरे वहां पर तलाब बन गया। श्रीलंका में भी एक ऐसा ही स्‍थान है जहां सीता माता के आंसू गिरे थे। तब से इस जगह को सीता अश्रु ताल कहा जाता है। श्रीलंका में कैंडी से लगभग 50 किलोमीटर दूर नम्बारा एलिया मार्ग पर यह तालाब मौजूद है। इसे कुछ लोग सीता टियर तालाब कहते हैं। जब लंका में गर्मी पड़ती है और सारे तलाब सूख जाते हैं तब भी यह तलाब नहीं सूखता। इस तलाब का पानी भी बहुत मीठा है।

माता सीता ने यहां दी थी अग्नि परीक्षा

श्रीलंका में वेलीमड़ा नामक एक जगह है। यहां एक मंदिर डिवाउरूम्पाला है। कहा जाता है कि यहां पर माता सीता ने अग्नि परीक्षा दी थी। आज भी स्थानीय लोग इस जगह पर सुनवाई करके न्याय करने का काम करते हैं। मान्यता है कि जिस तरह इस जगह पर देवी सीता ने सच्चाई साबित की थी उसी तरह यहां लिया गया हर फैसला सही साबित होता है।

मई में सबसे अधिक भारतीय पर्यटक श्रीलंका पहुंचे

श्रीलंका में रामायण से जुड़े 52 स्थल हैं। श्रीलंका इस वक्त भीषण आर्थिक संकट से जूझ रहा है, जिसके चलते यहां पर्यटन भी ठप पड़ा है। इस साल मई महीने में भारत की ओर से श्रीलंका के पर्यटन सेक्टर में सबसे अधिक योगदान दिया गया है। यहां 5562 पर्यटक भारत से पहुंचे हैं। इसके बाद दूसरे स्थान पर ब्रिटेन है, जहां के 3723 लोग श्रीलंका घूमने गए। भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं से संबंधित विरासत के आदान-प्रदान के लिए वर्ष 2008 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।


सिगिरिया में था रावण का महल

कहा जाता है कि सिगिरिया ही वह स्थान है, जहां रावण रहता था। माना जाता है कि रावण का साम्राज्य मध्य श्रीलंका में, बदुल्ला, अनुराधापुरा, केंडी, पोलोन्नुरुवा और नुवारा एलिया तक फैला हुआ था, मगर रावण सिगिरिया में रहता था। इस महल के लिए कहा जाता है कि यह महल भी कुबेर ने बनाया था, जो उनके भाई हैं। सिगरिया रॉक चट्टान के शीर्ष पर एक प्राचीन महल का अवशेष है, जो किलेबंदी, सीढ़ीदार बगीचे, तालाब, नहर, गलियों और फव्वारों से घिरा हुआ है। ये भी कहा जाता है कि यहां कुछ दिन माता सीता को रखा गया था। इसके बाद दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया था।

आठ हजार फुट की ऊंचाई  पर है रावण की गुफा

साल 2017 में एक रिसर्च हुई थी जिसमें 50 ऐसे स्थानों को खोज निकाले का दावा किया गया था जिनका रिश्‍ता रामायण से था। इसी रिसर्च में कहा गया था कि एक पहाड़ी में बनी गुफा में आज भी रावण का शव सुरक्षित है। रिसर्च में कहा गया है कि श्रीलंका में रैगला के जंगलो में एक चट्टान नुमा पहाड़ी है। इस पहाड़ी में एक गुफा है और गुफा में रावण का शव आज भी सुरक्षित रखा है। यह शोध श्रीलंका के रामायण रिसर्च सेंटर और पर्यटन विभाग ने मिलकर की है। शोध में दावा किया गया कि इसी गुफा में जाकर रावण तपस्या किया करता था। दावा है कि रैगला पहाड़ी में आठ हजार फुट की ऊंचाई पर यह गुफा बनी है जहां रावण का शव रखा गया है।


श्री लंका : हंबनटोटा बंदरगाह में नहीं रूका चीनी जहाज, श्रीलंका ने मानी भारत की बात


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के प्रभाव में काफी वृद्धि हुई है। आज भारत दूसरे देशों के लिए संकटमोचक के रूप में उभर कर सामने आया है। इसका असर श्रीलंका की आर्थिक बदहाली और चीन के जहाज हंबनटोटा के मामले में देखने को मिला है। भारत ने आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका की खुलकर मदद की है। इसका परिणाम है कि भारत आज श्रीलंका से अपनी बात मनवाने में कामयाब रहा। श्रीलंका ने चीनी रिसर्च शिप को अपने हंबनटोटा पोर्ट पर रूकने की अनुमति नहीं दी। इसे भारत की कूटनीतिक जीत मानी जा रही है।

 दरअसल भारत ने चीनी रिसर्च शिप की श्रीलंका में संभावित मौजूदगी को लेकर चिंता व्यक्त की थी। श्रीलंका ने भारत की बात का मान रखते हुए चीन को साफ इनकार कर दिया। इसके बाद चीन का जहाज श्रीलंका के हंबनटोटा पोर्ट पर नहीं रुका। श्रीलंकाई अधिकारियों ने गुरुवार (11 अगस्त, 2022) को बताया कि उच्च तकनीक वाला चीनी रिसर्च शिप तय कार्यक्रम के मुताबिक बंदरगाह नहीं पहुंचा। शिप के गुरुवार को हंबनटोटा पहुंचने की योजना थी। चीनी शिप 11 से 17 अगस्त तक हंबनटोटा बंदरगाह पर लंगर डालने वाला था।

‘न्यूजफर्स्ट डॉट एलके’ वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, हंबनटोटा बंदरगाह के ‘हार्बर मास्टर’ ने कहा कि कोई भी जहाज उनकी अनुमति के बिना बंदरगाह में प्रवेश नहीं कर सकता। ‘हार्बर मास्टर’ ने कहा था कि चीनी बैलिस्टिक मिसाइल और उपग्रह निगरानी जहाज ‘युआन वांग 5’ गुरुवार को हंबनटोटा बंदरगाह नहीं पहुंचेगा। पिछले हफ्ते, भारत द्वारा व्यक्त की गई सुरक्षा चिंताओं के कारण श्रीलंका के विदेश मंत्रालय ने बीजिंग से ‘युआन वांग 5’ के आगमन को टालने के लिए कहा था।

‘युआन वांग 5’ चीन से 14 जुलाई को रवाना हुआ था और अब तक इसने अपने रास्ते में एक भी बंदरगाह में प्रवेश नहीं किया है। जहाज लगभग 28 दिनों से यात्रा पर है। श्रीलंका के विदेश मंत्रालय ने 12 जुलाई को हंबनटोटा बंदरगाह पर जहाज को लंगर डालने के लिए मंजूरी दी थी। आठ अगस्त को, मंत्रालय ने कोलंबो में चीनी दूतावास को लिखे एक पत्र में जहाज के तय कार्यक्रम के मुताबिक ठहराव को स्थगित करने का अनुरोध किया। 

पहले श्रीलंका ने भारत सरकार के अनुरोध को गंभीरता से नहीं लिया था। वहां की सरकार का कहना था कि, जहाज के हंबनटोटा में रुकने की मुख्य वजह ईंधन है। इस तरह के जहाज समय-समय पर भारत, चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया जैसे विभिन्न देशों से आते रहे हैं और इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है। लेकिन भारत के बढ़ते दबाव के बाद श्रीलंका ने चीन को पत्र लिखकर जहाज को रोकने का अनुरोध किया।

हंबनटोटा के बंदरगाह को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। बंदरगाह को बड़े पैमाने पर चीनी कर्ज की मदद से विकसित किया गया है। वहीं युआन वांग 5 एक डबल यूज वाला जासूसी पोत है, जो अंतरिक्ष और उपग्रह ट्रैकिंग के लिए बनाया गया है। यह बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च में भी सक्षम है। शिप में 400 लोगों का क्रू है। साथ ही इस पर एक बड़ा सा पाराबोलिक एंटिना लगा हुआ है और कई तरह के सेंसर मौजूद हैं।

चीनी रिसर्च शिप ‘युआन वांग 5’ की सबसे खास बात यह है कि यह परमाणु ऊर्जा संयत्रों की भी जासूसी कर सकता है। ऐसे में भारत के लिए खतरा और बढ़ जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक हंबनटोटा बंदरगाह से भारत के कलपक्कम और कूडनकुलम परमाणु ऊर्जा स्टेशनों की दूरी 750 किलोमीटर है। इसके अलावा दक्षिणी भारत के 6 बंदरगाहों की दूरी भी ज्यादा नहीं है। ऐसे में इन सबकी “जासूसी” होने का खतरा था। यही वजह है कि इस पूरे घटनाक्रम पर भारत काफी नजदीक से नजर बनाए हुए था। 

आठ सालों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने विश्व क्षितिज पर किस तरह दमदार उपस्थिति दर्ज की है और वैश्विक ताकत बन गया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2014 में देश का नेतृत्व संभालने के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत के अग्रदूत बने हुए हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मंचों पर भारत की भागीदारी बढ़ी है। वैश्विक कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध से तीसरे विश्व युद्ध की आहट के बीच भारत की स्वतंत्र विदेश नीति ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। उसने बता दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी का नया भारत बिना किसी दबाव में अपने देश के हित में फैसले लेता है। भारत के खिलाफ उठने वाली हर अंतरराष्ट्रीय आवाज का मुंहतोड़ जवाब देता है। 


ग्लोबल लीडर बने प्रधानमंत्री मोदी
एक दौर वह भी था जब भारत विश्व की महाशक्तियों के भरोसे रहता था। आज भारत बोलता है तो दुनिया सुनती है। दरअसल दुनिया में इस समय किसी नेता की सबसे ज्यादा पूछ है तो वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं। प्रधानमंत्री मोदी की शख्सियत और व्यक्तित्व की पूरी दुनिया कायल है। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले आठ सालों में जिस तरह से भारत की छवि को पूरी दुनिया में पेश किया है, उसने दुनिया भर के नेताओं को प्रधानमंत्री मोदी का मुरीद बना दिया है। आज पूरी दुनिया प्रधानमंत्री मोदी के दमदार व्यक्तित्व और शानदार प्रतिनिधित्व का कायल है। घरेलू राजनीति में वे जितने लोकप्रिय हैं वैसे ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ चुके हैं। आलम यह है कि विश्व के तमाम राजनेता उन्हें एक ग्लोबल लीडर मानते हैं।

वर्ल्ड लीडर्स में पहले पायदान पर पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दिनों कोरोना संकट के दौरान जिस प्रकार से देश की 130 करोड़ जनता की रक्षा करते हुए पूरी दुनिया के लिए मदद के हाथ बढ़ाए हैं, उसने उन्हें एक बार फिर दुनिया का सबसे लोकप्रिय और शीर्ष नेता बना दिया है। अमेरिकी रिसर्च एजेंसी मॉर्निग कंसल्ट के ताजा सर्वे के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के सबसे लोकप्रिय और शीर्ष नेता बने हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी की अप्रूवल रेटिंग बढ़कर 77 प्रतिशत हो गई है और यह रेटिंग दुनिया के शीर्ष 13 नेताओं में सबसे ज्यादा है। प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया भर में वयस्कों के बीच सबसे ज्यादा रेटिंग मिली है। 18 मार्च, 2022 को ग्लोबल लीडर अप्रूवल ट्रैकर मॉर्निंग कंसल्ट ने अपना लेटेस्ट डेटा जारी किया था।

क्वाड सम्मेलन में बाइडेन ने की पीएम मोदी की तारीफ
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 23 मई,2022 को दो दिवसीय क्वाड शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जापान की राजधानी टोक्यो पहुंचे। इस दौरान भारतीय समुदाय ने प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत किया। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने सम्मेलन के दौरान कोरोना महामारी से लोकतांत्रिक तरीके से निपटने में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका की जमकर प्रशंसा की, वहीं चीन पर विफलता का आरोप लगाया। यह सम्मेलन भारत की दृष्टि से काफी सफल रहा। अमेरिका ने भारत के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। हिंद महासागर क्षेत्र में क्वाड का सहयोग भारत को एक रणनीतिक बढ़त प्रदान करेगा। इसका उपयोग भारत इस क्षेत्र की शांति के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन की आक्रामकता को नियंत्रित करने के लिए कर सकेगा। गौरतलब है कि नवंबर 2017 में हिंद-प्रशांत क्षेत्र को चीन के प्रभाव से मुक्त रखने हेतु नई रणनीति बनाने के लिये ‘क्वाड’ समूह की स्थापना की गई थी। 

आईपीईएफ कार्यक्रम में शामिल हुए प्रधानमंत्री मोदी 
प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 23 मई, 2022 को टोक्यो में इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क फॉर प्रॉस्पेरिटी (IPEF- आईपीईएफ) कार्यक्रम में भाग लिया। इस कार्यक्रम में अमेरिका के राष्ट्रपति जोसेफ आर बाइडेन और जापान के प्रधानमंत्री किशिदा फुमियो भी शामिल हुए। बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत एक समावेशी और लचीले ‘इंडो पैसिफिक इकोनॉमिक मॉडल’ के निर्माण के लिए आप सभी के साथ काम करेगा। उन्होंने कहा, ‘भारत आईपीईएफ के लिए सभी हिन्‍द-प्रशांत देशों के साथ काम मिलकर काम करेगा। मेरा मानना है की हमारे बीच लचीली आपूर्ति श्रृंखला के तीन मुख्य आधार होने चाहिए- Trust (विश्वास), Transparency (पारदर्शिता) और Timeliness (समयबद्धता)। मुझे विश्वास है कि यह फ्रेमवर्क इन तीनों स्तंभों को मजबूत करने में सहायक होगा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में विकास, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा।’

रूस-यूक्रेन युद्ध : वैश्विक कूटनीति में बढ़ी भारत की धमक
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के प्रभाव में काफी वृद्धि हुई है। इसका असर रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान देखने को मिल रहा है। युद्ध की वजह से दुनिया में मची उथल-पुथल के बीच भारत अचानक वैश्विक कूटनीति के केंद्र में आ गया है। एक महीने में 20 से अधिक ग्लोबल लीडर्स के भारत दौरे ने साबित किया कि आज वैश्विक कूटनीति में भारत का कद काफी बढ़ा है। भारत की राजधानी दिल्ली में रशिया के विदेश मंत्री सर्गी लावरोव, ब्रिटेन की विदेश मंत्री एलिजाबेथ ट्रस और अमेरिका के डिप्टी एनएसए दिलीप सिंह की मौजूदगी से भारत की कूटनीतिक ताकत के बारे में पता चला। भारत दुनिया का अकेला ऐसा देश है, जो रशिया से भी बात कर रहा है और अमेरिका से भी बात कर रहा है।

आतंकवाद पर दुनिया ने स्वीकारा पीएम मोदी का आह्वान
आतंकवाद अच्छा या बुरा नहीं होता, आतंकवाद तो बस आतंकवाद होता है। अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत की यही बात पहले अनसुनी रह जाती थी, लेकिन अब भारत की बातों को दुनिया मानने लगी है और एक सुर में आतंक की निंदा कर रही है। आतंक के खिलाफ आज अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, नार्वे, कनाडा, ईरान जैसे देश हमारे साथ खड़े हैं। पाकिस्तान को छोड़कर सार्क के सभी सदस्य देश अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव और नेपाल हमारे साथ हैं। जी-20 हो या हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन, ब्रिक्स हो या सार्क समिट सभी ने हमारे साथ आतंकवाद को मानवता का दुश्मन बताते हुए दुनिया को इसके खिलाफ एक होने का आह्वान किया है।

प्रधानमंत्री मोदी की नीति से पस्त हुआ पाकिस्तान
मोदी सरकार की स्पष्ट और दूरदर्शी विदेशनीति के प्रभाव से पाकिस्तान विश्व बिरादरी में अलग-थलग पड़ गया है। प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति में ऐसा घिरा है कि उसे विश्व पटल पर भारत के खिलाफ अपने साथ खड़ा होने वाला कोई एक सहयोगी देश नहीं मिल रहा। चीन तक भारत के खिलाफ उसका साथ देने को तैयार नहीं है। हाल में ही जब चीन ने पाकिस्तान की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें पाकिस्तान ने भारत पर ओबीओआर को नुकसान पहुंचाने के लिए भारत की साजिश की बात कही थी। दूसरी ओर अमेरिका की अफगान नीति से उसे बाहर किया जा चुका है और वह पाकिस्तान से सहयोग में भी लगातार कटौती कर रहा है। पाक को आतंकवाद का गढ़ कहते हुए अफगानिस्तान और बांग्लादेश भी अब पाकिस्तान का साथ पूरी तरह से छोड़ चुके हैं।

सर्जिकल स्ट्राइक पर भारत को दुनिया का साथ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का दुनिया में जो स्थान बन गया है वह निश्चित ही भारत के बढ़ते प्रभुत्व को बयां करता है। फरवरी 2019 में पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान के बालाकोट में हवाई हमला और जम्मू-कश्मीर के उरी में 18 सितंबर, 2016 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 29 सितम्बर 2016 को सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों और लॉन्चपैड को तबाह किया तो विश्व समुदाय भारत के साथ खड़ा रहा। इस के साथ ही पहली बड़ी सफलता 28 सितंबर को तब मिली जब पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन के बहिष्कार की घोषणा के तुरंत बाद तीन अन्य देशों (बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान) ने उसका समर्थन करते हुए सम्मेलन में ना जाने की बात कही। वहीं नेपाल ने सम्मेलन की जगह बदलने का प्रस्ताव दिया और पाकिस्तान के आंतकवाद के कारण सार्क सम्मेलन न हो सका। इसके अलावा चीन ने भी पाक के द्वारा कश्मीर में अंतराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग पर इसे द्विपक्षीय मामला कहकर कन्नी काट ली।

लद्दाख और डोकलाम में चीन ने देखी भारत की धमक
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने लद्दाख और डोकलाम में चीन को मुंहतोड़ जवाब दिया। गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के मारे जाने की संख्या को लेकर जमकर आलोचना का सामना करना पड़ा। अमेरिका के प्रतिष्ठित थिंक-टैंक हडसन इंस्टिट्यूट के सेंटर ऑन चाइनीज स्ट्रैटजी के डायरेक्टर माइकल पिल्स्बरी नो कहा कि चीन की बढ़ती ताकत के समक्ष मोदी अकेले खड़े हैं। दरअसल ये टिप्पणी उन्होंने ‘वन बेल्ट, वन रोड’ परियोजना को ध्यान में रखते हुए कही थी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और उनकी टीम चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के इस महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट के खिलाफ मुखर रही है। दरअसल अमेरिकी थिंक टैंक का मानना बिल्कुल सही है, क्योंकि भारत ने चीन को डोकलाम विवाद में भी अपनी दृढ़ता का परिचय करा दिया है और चीन को अपनी सेना को वापस बुलाने पर मजबूर होना पड़ा। चीन ने भारत को युद्ध की भी धमकी दी लेकिन पीएम मोदी की नीतियों से चीन अकेला हो गया और पश्चिमी देशों ने उसे संयम बरतने की सलाह दी। अमेरिका, फ्रांस, जापान, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भारत के साथ खड़े रहे।

‘ऑपरेशन गंगा’ की सफलता के पीछे भारत का बढ़ता कद 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल और दमदार नेतृत्व से वैश्विक स्तर पर आज भारत अपने देश और उसके नागरिकों की सुरक्षा के लिए बिना संकोच अपनी बात रखने में सक्षम है। इसका फिर प्रमाण रूस-यूक्रेन युद्ध में मिला है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने देश के नागरिकों की सुरक्षा को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी बात की और उन्हें अपनी चिंताओं से अवगत कराया। इससे दोनों देशों ने भारतीयों की सुरक्षित निकासी का आश्वासन दिया। जहां अमेरिका जैसे ताकतवर देश अपने नागरिकों को युद्धग्रस्त युक्रेन से निकालने में असमर्थ था, वहीं भारत ‘ऑपरेशन गंगा’ के तहत 20 हजार से अधिक अपने नागरिकों को निकालने में सफल रहा। इस सफलता के पीछे वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव, प्रधानमंत्री मोदी, चार केंद्रीय मंत्रियों और सुपर 30 का प्रमुख योगदान रहा है।

रूस पर प्रतिबंध के बावजूद भारत ने खरीदा कच्चा तेल
यूक्रेन पर रूस के हमले के खिलाफ पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और अमेरिका की नसीहत के बावजूद भारत ने रूस से रियायती कच्चा तेल खरीदने का फैसला किया। भारत के वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी व्यापार आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अप्रैल में 20.19 बिलियन डॉलर का पेट्रोलियम खरीदा, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 10.76 बिलियन डॉलर था। भारत रूस से 70 डॉलर प्रति बैरेल तेल खरीदने लगा। हालांकि इसकी यूरोपीय देशों ने खूब आलोचना की। जिसके बाद भारत ने भी पश्चिमी देशों को दो टूक जवाब दिया। परिणाम सामने है। भारत ने अपने राष्ट्रीय हित को ध्यन में रखते हुए मात्र चार महीने में रूस से 1 प्रतिशत तेल की जगह 17 प्रतिशत तेल खरीदने लगा। भारत अब रूस से कच्चा तेल मंगवाकर जामनगर की फैक्ट्री में पेट्रोल-डीजल तेल तैयार करता है और यूरोपीय देशों को बेचता है।

अमेरिका के दबाव के बावजूद रूस से S-400 की आपूर्ति 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पिछले आठ साल के शासन में आत्मविश्वास से लबरेज एक ‘न्यू इंडिया’ का उदय हुआ है, जो हर चुनौती से टकराने का साहस और सामर्थ्य रखता है। भारत अब दूसरे देशों की सोच और उनके दबाव में नहीं, बल्कि अपने संकल्प से चलता है। राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर समझौता नहीं करता। इसका प्रमाण चीन से तनाव के बीच रूस से आधुनिक ब्रह्मास्‍त्र कहे जाने वाले एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम की आपूर्ति शुरू होने से मिलता है। इस सिस्टम की दो खेप भारत पहुंच चुकी है और तीसरी खेप भी जल्द मिलने वाली है। गौरतलब है कि दिसंबर में मिले पहले मिसाइल डिफेंस सिस्टम को सेना ने पंजाब सेक्टर में तैनात किया है। भारत ने रूस के साथ पांच एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 खरीदने के लिए 5.43 बिलियन डॉलर यानि 40 हजार करोड़ रुपये में सौदा किया था। अक्टूबर 2023 तक भारतीय वायुसेना को एस-400 ट्रायम्फ मिसाइल की कुल पांच रेजीमेंट मिलनी है।

कोरोना के खिलाफ जंग में मिली वैश्विक सराहना
प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना से जंग में पूरी दुनिया को रास्ता दिखाया है। विश्व के तमाम संगठनों ने कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में निर्णयकारी नेतृत्व निभाने वाले प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत बताया है। कई दिग्गज अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सर्वे में भी प्रधानमंत्री मोदी की वाहवाही की गई है। मशहूर अमेरिकी पत्रकार थॉमस फ्रायडमैन ने भी माना कि मोदी सरकार ने कोरोना वायरस को परास्त करने में बेहतरीन काम किया है। इससे विश्व स्तर पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ भारत का सम्मान बढ़ा है। वैश्विक कोरोना संकट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ना सिर्फ देश के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए संकटमोचक बन गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर दुनिया के तमाम देशों में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए मदद भेजी जा रही है। वैक्सीन के साथ कई देशों को मोदी सरकार ने दवाएं और चिकित्सीय उपकरण भेजे हैं।

अमेरिका और रूस से एक साथ दोस्ती
अमेरिका और रूस की अदावत सभी जानते हैं। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की के कूटनीतिक कौशल के कारण आज दोनों ही देश भारत के साथ खड़े दिखते हैं। ब्रिक्स सम्मेलन में जिस तरह से रुस ने भारत का साथ देते हुए चीन की हेकड़ी गुम कर दी वह काबिले तारीफ है। ठीक इसी तरह पाकिस्तान परस्त रहे अमेरिका को भारत की तरफ ले आना भी बड़ी बात है। आज अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने का खतरा मंडरा रहा है। अमेरिका ने भारत से दोस्ती की खातिर आज पाकिस्तान को हर मंच पर अकेला छोड़ दिया है।

Asean देशों को चीन के ‘चंगुल’ से छुड़ाया
26 जनवरी, 2018 को नई दिल्ली के राजपथ पर विश्व ने एक और अनोखा दृश्य तब देखा जब आसियान देशों के 10 राष्ट्राध्यक्ष भारत की जमीन पर एक साथ दिखे। थाइलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस, सिंगापुर, म्यांमार, कंबोडिया, लाओस और ब्रुनेई आसियान के नेताओं ने भारत को अपनी इस इच्छा से अवगत कराया कि रणनीतिक तौर पर अहम भारत-प्रशांत क्षेत्र में ज्यादा मुखर भूमिका निभाए। साफ है कि आसियान देशों के नेताओं का पीएम मोदी पर भरोसा व्यक्त किया जाना विश्व राजनीति में भारत के दबदबे को दिखा रहा है।

‘प्रधानमंत्री के आवास में घुस जाएँगे लोग’: ओवैसी ने दिखाया श्रीलंका वाला डर

AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने भारत में श्रीलंका वाले हालात का डर दिखाते हुए कहा है कि लोग पीएम मोदी के घर में भी घुस सकते हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित एक टॉक शो में शामिल हुए हैदराबाद के सांसद ने कहा कि देश के मौजूदा हालात को देख कर लगता है कि श्रीलंका की तर्ज पर यहाँ भी लोग प्रधानमंत्री आवास में घुस जाएँगे। उन्होंने दावा किया कि भारत में हिन्दू-मुस्लिम राजनीति हो रही है, जिसमें नुकसान मुस्लिमों का हो रहा है।

असदुद्दीन स्वयं एक वकील नहीं बैरिस्टर हैं और इतना भी नहीं जानते कि मुसलमानों को बलि का बकरा बनाने वाले कौन हैं? श्रीलंका वाला डर दिखाकर क्या कहना चाहते हैं? अगर ऐसी नौबत आयी तो प्रधानमंत्री आवास पर कूच करने वालों का नेतृत्व करेंगे या बेकसूर लोगों को मरवाने के लिए खुद संसद में छुप कर बैठ जाएंगे। आखिर मुसलमानों को कब तक बलि का बकरा बनाया जाता रहेगा? ओवैसी साहब तस्लीम रहमानी वाला भड़काने का खेल मत खेलो। भड़काऊ लोगों की ही वजह से आज इस्लाम और कुरान पर बहस हो रही है, आंखें खोलो और देखो News Nation का यह वीडियो:   

दूसरे, TimesNow नवभारत चैनल पर सुशांत सिन्हा के न्यूज़ की पाठशाला में एक इस्लामिक विद्वान वकील ज्ञानवापी में त्रिशूल पर यह बोल गए कि "क्या मस्जिद में त्रिशूल नहीं हो सकता?" उनके यह कहते ही शो में उपस्थित सभी हिन्दू मुसलमान हंसने लगे और जिस पर एंकर सुशांत सिन्हा को कहना पड़ा कि "वकील की वकालत का रिकॉर्ड चेक करना पड़ेगा।"  

असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया कि आजकल राजनीतिक पार्टियाँ अप्रासंगिक हो रही हैं। उन्होंने दिल्ली की सीमाओं पर हुए किसान आंदोलन, CAA विरोधी दंगों, दिल्ली में वकीलों के प्रदर्शन और ‘अग्निपथ योजना’ के खिलाफ उपद्रव – इन सबको जनता का आंदोलन बताते हुए कहा कि नेताओं के बिना ही लोग सड़क पर उतर रहे हैं। ओवैसी ने राजनीतिक पार्टियों को इस पर गंभीरता से सोचने की सलाह देते हुए बदलाव की बात कही।

इस दौरान उन्होंने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहलकर (NSA)’ अजीत डोभाल का भी नाम लेकर उन पर निशाना साधा। ओवैसी ने कहा कि डोभाल को बताना चाहिए कि कट्टरता कौन फैला रहा है और कट्टर कौन है। बता दें कि NSA डोभाल ने हाल ही में एक कार्यक्रम में बयान दिया था कि कुछ लोग धर्म एवं विचारधारा के नाम पर कटुता फैला रहे हैं। ओवैसी ने राजस्थान के अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में पूरी ताकत से लड़ने का ऐलान किया।

उन्होंने कहा कि AIMIM चुनाव नहीं लड़ती है फिर भी कॉन्ग्रेस हार जाती है। उन्होंने कहा कि राजस्थान किसी एक पार्टी का नहीं है और उनका भी उतना ही है, जितना दूसरे दलों का। ओवैसी इससे पहले भारत में एक समुदाय विशेष के खिलाफ नफरत होने का दावा कर चुके हैं। उन्होंने RSS पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें इंद्रेश कुमार से सर्टिफिकेट नहीं चाहिए, उन्हें ये बताना चाहिए कि संघ की शाखाओं में किसके नाम पर और क्या शपथ ली जाती है।

श्रीलंका में इमरजेंसी लागू… चीन के जाल में फँस कंगाली के कगार पर

  श्रीलंकाई राष्ट्रपति राजपक्षे (बाएँ) और विरोध प्रदर्शन के बाद की तस्वीर (दाएँ) (फोटो साभार: आजतक एवं न्यूज फर्स्ट)
चीन के ऋण के जाल में फँसकर श्रीलंका कंगाली के कगार पर खड़ा हो गया है। महँगाई चरम पर पहुँच गई है, जिसके कारण लोगों द्वारा हिंसक प्रदर्शन किए जा रहे हैं। परिणाम यह हुआ कि सरकार को वहाँ आपातकाल की घोषणा करना पड़ा है। श्रीलंका के राष्ट्रपति गोताबाया राजपक्षे की इस घोषणा के बाद पुलिस एवं सुरक्षाबलों को असीमित अधिकार मिल गए हैं।

देश में जारी आर्थिक संकट के कारण गुरुवार (31 मार्च 2022) को लोगों ने राष्ट्रपति आवास के बाहर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया था। लोग इस हालात के लिए राजपक्षे को जिम्मेदार मानते हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था। इस दौरान 45 लोगों को गिरफ्तार भी किया था। इसके अलावा, अलग-अलग शहरों में कर्फ्यू लगाने की स्थिति आ गई है। लोगों के रोष को देखते हुए राष्ट्रपति ने शुक्रवार (1 अप्रैल 2022) को इसे लागू करने का निर्णय लिया।

श्रीलंका में खाद्यान्न और जरूरत की वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। बिजली की सप्लाई बंद कर दी गई है। लोगों को पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस नहीं मिल रही हैं। इस तरह खाने से लेकर परिवहन तक की व्यवस्था ठप पड़ गई है। इस कारण लोग सड़कों पर निकल आए हैं। लोगों के विरोध को दबाने के लिए पुलिस लाठी चार्ज कर रही है तो कहीं उन पर वॉटर कैनन का इस्तेमाल कर रही है। प्रदर्शनकारियों पर आँसू गैस के गोले भी छोड़े जा रहे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार एक कप चाय की कीमत 100 रुपए हो गई है। दूध की कीमत 2,000 रुपए पर पहुँच गई है। मिर्च 700 रुपए किलोग्राम बिक रही है। एक किलो आलू के लिए 200 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। फ्यूल की कमी का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है। कई शहरों में 13 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। परीक्षा के लिए पेपर-इंक नहीं हैं।

हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि चीनी की कीमत 290 रुपए किलो तो चावल की कीमत 500 रुपए किलो हो चुकी है। एक पैकेट ब्रेड की कीमत 150 रुपए हो चुकी है। दूध का पाउडर 1,975 रुपए किलो, तो एलपीजी सिलेंडर का दाम 4,119 रुपए है। इसी तरह पेट्रोल 303 रुपए लीटर और डीजल 176 रुपए लीटर बिक रहा है। सभी वस्तुओं की कीमतें श्रीलंकाई रुपए में है। डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई रुपए की कीमत 46 फीसदी तक गिर गई है। एक मार्च को 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत 295 श्रीलंकाई रुपए हो चुकी थी।

वहीं, लोगों की गुस्से और उनके हिंसक प्रदर्शन को वहाँ की राजपक्षे सरकार ने ‘आतंकी कृत्य’ बता दिया था और कहा था कि विपक्षी दलों से जुड़े ‘चरमपंथी तत्वों’ द्वारा ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। सरकार की विफलता को ढंकने के लिए वहाँ की सरकार विपक्षी दलों को जिम्मेवार ठहरा रही है।

राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे द्वारा पब्लिक इमरजेेंसी लगाने के बाद सरकार सार्वजनिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, विद्रोह व दंगा और नागरिक आपूर्ति आदि के लिए नियम कठोर नियम बना सकती है। इमरजेंसी के दौरान राष्ट्रपति के आदेश के बाद किसी भी व्यक्ति की संपत्ति पर कब्जा की जा सकती है। किसी भी परिसर की तलाशी ली जा सकती है और किसी को भी बिना कारण बताए गिरफ्तार किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति किसी भी कानून को बदल या निलंबित भी कर सकता है।

चीन ने श्रीलंका को किया कंगाल : 2000 रूपए किलो बिक रहा दूध, भारत में शरण लेने की होड़

चीन के कर्ज जाल में फँसे श्रीलंका की हालत खस्ता हो गई है। वहाँ महंगाई इतनी चरम पर है कि गरीब अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष कर रहा है। देश के हालातों से मजबूर नागरिक पेट भरने के लिए भारत की ओर रुख कर रहे हैं। 22 मार्च को 16 से ज्यादा श्रीलंकाई पानी के रास्ते तमिलनाडु उतरे थे। ये लोग मन्नार और जाफना के हैं। राज्य के खुफिया अधिकारियों का मानना है कि ये बस शुरुआत है। हो सकता है आने वाले हफ्तों में भारत के यहाँ 2 हजार शरणार्थी आएँ। खुद श्रीलंका की राजनैतिक पार्टी एलम पीपुल्स रेवोल्यूशनरी लिबरेशन फ्रंट का नेतृत्व करने वाले सुरेश प्रेमचंद्रन ने कहा है कि महंगाई की वजह से मजदूर संघर्षरत हैं… अर्थव्यवस्था अगर स्थिर नहीं होती तो ज्यादा से ज्याद लोग देश छोड़ सकते हैं।

साल 2020 में कोरोना के बाद श्रीलंका पर कर्ज का भार बढ़ना शुरू हुआ था। सबसे पहले तो उनकी आय का मुख्य स्रोत जो कि पर्यटन है उस पर रोक लगी और फिर सरकार की कर्ज लेने की नीतियों ने इस हाल और चिंताजनक बनाया। आगे बढ़ने से पहले बता दें कि श्रीलंका जो है वो जरूरी सामानों के लिए आयात पर निर्भर होता है। चाहे वो खाना हो, कागज हो, चीनी, दाल, दवाई या फिर ट्रांसपोर्टेशन के उपकरण हों…हर चीज बाहर से आती है। लेकिन अब श्रीलंका पर इतना भी पैसा नहीं है कि वो इन सामानों के लिए पहले का ऋण चुका सके। मौजूदा जानकारी के अनुसार,  इस वर्ष में श्रीलंका को करीब 6 (4,58,27,88,00,000रूपए ) बिलियन डॉलर का बकाया चुकाना हैं इसमें 1 बिलियन डॉलर (76380800000रूपए ) का सॉवरेन बॉन्ड भी है। लेकिन, फरवरी के अंत तक उनके पास विदेशी मुद्रा भंडार में सिर्फ 2.31 बिलियन डॉलर (176415855000रूपए ) की विदेशी मुद्रा थी।

परीक्षाएँ रद्द, रसोई गैस खत्म: श्रीलंका में बुनियादी जरूरतें भी नहीं हो रही पूरी

देश के हालात इतने नीचे गिर गए हैं कि पेपर-स्याही की कमी के कारण पिछले हफ्तों में श्रीलंकाई सरकार को स्कूल एग्जाम कैंसिल करने पड़े जिसकी वजह से 45 लाख छात्र प्रभावित हुए। वहीं 1000 बेकरी देश में रसोई गैस न मिल पाने के कारण बंद हो गईं। कुछ को केरोसीन की मदद से चलाया जा रहा है। दूध की कीमत करीब 2000 रुपए हो गई हैं। 400 ग्राम दूध 790 रुपए का आ रहा है। इसी तरह चावल-चीनी भी वहाँ 290 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। अनुमान है कि ये दाम एक हफ्ते में 500 रुपए तक हो जाएँगे।

भारत की मदद

अगर हाल ऐसे हैं तो भारत कैसे श्रीलंका की मदद करेगा या कर रहा होगा। तो बता दें कि भारत के लिए अपने पड़ोसी देशों की मदद करना प्राथमिकता रहा है। इसी के चलते उन्होंने जनवरी के बाद से श्रीलंका की 2.4 बिलियन डॉलर (183206760000रूपए ) की मदद की है। वहीं 17 मार्च को भी भारत ने श्रीलंका को 1 अरब डॉलर (76336150000रूपए ) की ऋण सुविधा प्रदान करने की घोषणा की है।
श्रीलंका ने अपनी चरमराई हालत से उभरने के लिए भारत की तरह कई देशों से कर्ज लिया है। मगर उनके ऊपर चीन का कर्ज पहले से इतना ज्यादा है कि वो पूरे देश को खोखला कर रहा है। शुरुआत में इस कर्जे को श्रीलंका ने बुनियादी ढाँचे सुधारने, ज्यादा रोजगार, बढ़िया आय, आर्थिक स्थिरता की उम्मीदों के साथ चीन से लिया था और यहीं श्रीलंका की सारी गलती थी। 

चीन कर रहा श्रीलंका को खोखला

पूरी दुनिया अच्छे से जानती है कि कैसे चीन विस्तारवादी नीतियों से अन्य देशों को अपने अधीन करने की नीयत से आगे बढ़ता आया है। मगर कर्ज देकर खोखला करने की उसकी नीयत पिछले कुछ सालों में देशों की नजर में आई है। बात सिर्फ श्रीलंका की नहीं है, आप पाकिस्तान जैसे कट्टरपंथी देश को देखिए या फिर युगांडा जैसे छोटे देश को। हर जगह चीन ने कर्जे के दम पर अपना दबदबाया बनाया। श्रीलंका में भी चीन ने  पुल, सड़क, बंदरगाह, हवाई अड्डे, औद्योगिक कस्बे, एलएनजी आदि को विकसित करने के प्रस्तावों के साथ एंट्री की थी। हालाँकि विकास क्या हुआ, इसकी खबरें कम आई लेकिन कर्जदारों की लिस्ट में श्रीलंका टॉप देशों में पहुँच गया। केवल चीन का उस पर 5 बिलियन डॉलर (381869000000रूपए ) का कर्जा है।
पिछले साल उसने अपने गंभीर वित्तीय संकट से निपटने में मदद के लिए बीजिंग से अतिरिक्त 1 अरब डॉलर का ऋण लिया था, जिसका भुगतान किस्तों में किया जा रहा है। बावजूद इसके हाल में खबर आई कि चीन फिर से श्रीलंका को 1.5 बिलियन (114546450000रूपए ) नया कर्ज देने पर विचार कर रहा है। चीन के राजदूत ची झेनहोंगे ने सोमवार को बताया कि चीन डेवलपमेंट बैंक ने श्रीलंका को 50 करोड़ डॉलर का कर्ज देने की पेश की है। इसके अलावा 1 बिलियन डॉलर के कर्ज के लिए श्रीलंका सरकार ने अनुरोध किया है जिस पर वह विचार कर रहा है।
चीन से जब पूछा गया कि क्या वो श्रीलंका की ऐसी परेशानी को देखते हुए अपने कर्ज चुकाने की समय सीमा को आगे बढ़ाएँगे तो चीनी राजदूत ने स्पष्ट जवाब देने की बजाय कहा कि उनका मकसद समस्या का समधान है पर इसके अलग-अलग तरीके हो सकते हैं।
मालूम हो कि चीन के साथ श्रीलंका पर जिनके सबसे ज्यादा कर्जे का भार है वो अंतरराष्ट्री वित्तीय संस्थान, एशियन डेवलपमेंट बैंक और जापान हैं। चीन विदेश मंत्री वांग से तो पिछले दिनों श्रीलंका के राष्ट्रपति ने कर्ज चुकाने की अवधि फिर बढ़ाने के लिए गुजारिश भी की थी। श्रीलंका के वित्त मंत्रालय ने बताया था कि उन्हें 50 करोड़ डॉलर तक इस वर्ष चुकाना है। इसके अतिरिक्त इम्पोर्ट की जो कीमत चुकानी है वो बोझ अलग से हैं। श्रीलंका के राष्ट्रपति राजपक्षे ने पिछले हफ्ते कहा था कि वो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की मदद से आर्थिक संकट को हल करने पर विचार कर रहे है। हालाँकि विशेषज्ञों का कहना है कि श्रीलंका दूसरे स्रोतों से भी कर्ज लेने के प्रयास में है।

99 साल के लिए पोर्ट दिया लीज पर

श्रीलंका की चरमराई हालत के लिए जो बार बार चीन को दोषी माना जा रहा है वो आरोप निराधार नहीं है। जो लोग चीन की विस्तारवादी नीति समझते हैं उन्हें अंदाजा है कि कैसे सीमा के भीतर आकर चीन देशों को कमजोर करने का काम करता है। श्रीलंका के मामले में उसने ये सब कर्ज देकर किया, बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट के नाम पर किया। कुछ समय पहले खबर आई कि चीन का श्रीलंका के हंबनटोटा पोर्ट पर कब्जा हो गया है। ये पोर्ट श्रीलंका ने चीन को 99 सालों के लिए लीज पर दिया ताकि उन्हें 1.25 अरब डॉलर कर्ज मिले। हाल में श्रीलंका के इस फैसले के लिए वर्तमान राष्ट्रपति ने पूर्व यूएनपी सरकार को कोसा था कि उन्होंने ये सब किया जबकि पिछले साल मई की खबर है कि राजपक्षे सरकार ने कोलंबो पोर्ट सिटी कमीशन बिल पारित किया था जिसमें चीनी विशेषज्ञों अधिकारियों को उन्होंने अपने शासी निकाय में प्रमख प्रतिनिधित्व करने का का दिया था।