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आतंकियों को पालता है कनाडा, ट्रूडो बकवास करने में माहिर: श्रीलंका ने भी किया बेनकाब, कहा- हमारे साथ भी किया था ऐसा ही गेम

खालिस्तानी आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का समर्थन करते हुए श्रीलंका ने पूरी दुनिया के सामने कनाडा को नंगा कर दिया है। कहा है कि कनाडा आतंकियों को पनाह देता है। उसके प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के लिए कहा है कि वे बिना सबूत आरोप लगाने में माहिर हैं। खालिस्तानी राग अलापने पर कनाडा को भारत से मिली लताड़ को भी सही बताया है।

श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी ने 25 सितंबर 2023 को कनाडा को फटकार लगाई। उन्होंने कहा, “कुछ आतंकवादियों को कनाडा में सुरक्षित पनाहगाह मिल गई है। कनाडाई पीएम का यह तरीका है कि बगैर किसी सबूत के कुछ अपमानजनक आरोप लगाए जाएँ।”

साबरी ने कहा कि ट्रूडो ने ऐसा ही श्रीलंका के साथ भी किया था। उन्होंने कहा था कि श्रीलंका में एक भयानक नरसंहार हुआ था। यह सरासर झूठ है। हर कोई जानता है कि हमारे देश में कोई नरसंहार नहीं हुआ था।

श्रीलंका के विदेश मंत्री ने कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो पर यारोस्लाव हुंका को लेकर भी तंज किया। उन्होंने कहा, “मैंने कल देखा कि वो ऐसे शख्स के समर्थन और उसके जोरदार स्वागत में शामिल थे जो द्वितीय विश्व युद्ध में नाजियों के साथ जुड़ा था।”

उन्होंने ट्रूडो को संदेहास्पद शख्सियत बताते हुए कहा कि श्रीलंका अतीत में इससे निपट चुका है। जब भी ट्रूडो अपमानजनक और झूठे आरोप लगाते हैं तो श्रीलंका को हैरानी नहीं होती

वहीं फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCC South Asia) में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत में श्रीलंका के उच्चायुक्त मिलिंडा मोरागोडा ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद को लेकर उनके देश की नीति जीरो टॉलरेंस है। उन्होंने कहा कि इस मामले पर भारत की प्रतिक्रिया सख्त और बिना लाग-लपेट वाली रही है। कहा कि उनका देश इस मुद्दे पर भारत का समर्थन करता है।

श्रीलंकाई उच्चायुक्त ने कहा कि श्रीलंका पिछले चार दशकों में आतंकवाद के कई रूपों से पीड़ित रहा है, इसलिए उनका देश आतंकवाद को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करता। उन्होंने कहा कि अगर श्रीलंका को भारत से समर्थन नहीं मिला होता तो वह स्थिर नहीं होता। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि अगले साल मार्च तक एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का दोष भारत पर मढ़ने की कोशिश की थी। इसके बाद से दोनों देशों के रिश्तों में खासा तनाव है। ट्रूडो वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ गए हैं। घरेलू मोर्चे पर भी उनका विरोध हो रहा है।