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औकात में आया कनाडा: जस्टिन ट्रूडो के सलाहकार ने कहा- निज्जर की हत्या में PM मोदी और अजीत डोवाल को जोड़ना निराधार, इसके कोई सबूत नहीं


कनाडियन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो अपने निजी राजनीतिक स्वार्थ और खालिस्तानियों को खुश करने के चक्कर में भारत-कनाडा के रिश्तों में खाई खोदने का काम लगातार कर रहे हैं। अपने पीएम को खुश करने के लिए अब इसी काम को कनाडा का मीडिया आगे बढ़ा रहा है। हालांकि जिस तरह जस्टिन ट्रूडो की दाल पीएम मोदी से पंगा लेने की कोशिश के बावजूद नहीं गली थी। वही हाल कनाडा के मीडिया का भी हो रहा है। दरअसल, कनाडा के प्रमुख अखबार द ग्लोब एंड मेल ने अपनी के विशेष रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि भारत के प्रधानमंत्री को खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की साजिश के बारे में पता था। हालांकि भारत सरकार ने कनाडाई अखबार की रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया है। साथ ही इसे भारत को बदनाम करने की साजिश करार दिया है। कनाडा के पीएम ने भी पहले इसी तरह के आरोप भारत सरकार पर लगाए थे, लेकिन अपनी तीखी आलोचनाओं के बीच उनको यहां तक खुद कबूलना पड़ा है कि निज्जर हत्याकांड को लेकर उनकी सरकार ने भारत को कोई ठोस सबूत नहीं दिया है। अब कनाडाई मीडिया में भारत को बदनाम करने वाली रिपोर्ट पर नई दिल्ली की फटकार के बाद कनाडा की जस्टिन ट्रूडो सरकार लाइन पर आ गई है। कनाडा सरकार ने बयान जारी कर उस रिपोर्ट को खारिज किया है, जिसमें कनाडा में (निज्जर हत्याकांड) आपराधिक गतिविधि के मामले में पीएम मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का नाम लिया गया था।

भारत को बदनाम करने वाले ट्रूडो की पोल खुलने के बाद हो रही आलोचना
प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की अगुवाई वाली कनाडा की सरकार ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर पहले भी मढ़ा है। लेकिन पीएम की कुर्सी बचाने और चुनाव जीतने की कोशिश में भारत को बदनाम करने वाले ट्रूडो की पोल खुल गई थी। इस पूरे विवाद को लेकर जस्टिन ट्रूडो की काफी आलोचना हुई। कनाडा में अब लोग उनसे ऊब चुके हैं। कनाडा में चुनाव से पहले ही उनके इस्तीफे की मांग बहुत जोर पकड़ने लगी है। भारत और कनाडा में जारी कूटनीतिक विवाद के बीच कनाडा के एक लिबरल सांसद ने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो से अगले चुनाव से पहले पार्टी नेता के पद से इस्तीफा देने को कहा है। कनाडा के सांसद सीन केसी का कहना है कि देश के लोग जस्टिन ट्रूडो को अब और बर्दाश्त नहीं कर सकते।

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में कनाडा की जस्टिन ट्रूडो सरकार बैकफुट पर आ गई है। कनाडा सरकार ने कहा कि भारत में वांछित निज्जर की हत्या में भारत के होने का उसके पास कोई सबूत नहीं है। ट्रूडो सरकार ने एक बयान जारी कर कहा कि उसने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवाल पर कभी कोई आरोप नहीं लगाया।

प्रिवी काउंसिल के डिप्टी क्लर्क और प्रधानमंत्री ट्रूडो के राष्ट्रीय सुरक्षा एवं खुफिया सलाहकार नथाली जी ड्रौइन ने कहा, “सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण और जारी खतरे के कारण RCMP (रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस) और अधिकारियों ने 14 अक्टूबर को कनाडा में भारत सरकार के एजेंटों द्वारा की गई गंभीर आपराधिक गतिविधि के सार्वजनिक आरोप लगाने का असाधारण कदम उठाया।”

प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने आगे कहा, “कनाडा सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री जयशंकर या NSA डोवाल को कनाडा के भीतर गंभीर आपराधिक गतिविधि से जोड़ने के बारे में कभी नहीं कहा है और ना ही इससे जुड़े सबूतों की उसे जानकारी है। इसके विपरीत, कोई भी सुझाव काल्पनिक और ग़लत दोनों है।”

ट्रूडो सरकार का ये स्पष्टीकरण कनाडा के एक अखबार ‘द ग्लोब एंड मेल’ में छपी रिपोर्ट के बाद आया है। उस अखबार में भारत पर आरोप लगाते हुए कहा गया था कि खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या की साजिश केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रची थी। इसमें यह भी कहा गया था कि प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री जयशंकर और एनएसए अजीत डोभाल को इस योजना की जानकारी थी।

अखबार में यह रिपोर्ट एक अनाम कनाडाई अधिकारी के हवाले से छापी गई थी। हालाँकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि इसको लेकर कनाडा के पास प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। इस मीडिया रिपोर्ट को विदेश मंत्रालय ने 20 नवंबर को खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस तरह के बेतुके बयानों को खारिज कर देना चाहिए।

इससे पहले 14 अक्टूबर 2024 को कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार पर अपमानजनक आरोप लगाए थे और कनाडा की धरती पर हत्याओं को अंजाम देने का दावा किया था। RCMP के हवाले से उन्होंने कनाडा में दक्षिण एशियाई समुदाय, खालिस्तान समर्थक आंदोलन से जुड़े लोगों को निशाना बनाने वाले हिंसक खतरों की एक श्रृंखला खोज निकालने का दावा किया था।

द ग्लोब एंड मेल ने अपनी एक खास रिपोर्ट में अनर्गल आरोप लगाए
कनाडा का मीडिया भी आंखें बंद करके अपने पीएम की हां में हां मिलाने में लगा है। कनाडा के प्रमुख अखबार द ग्लोब एंड मेल ने अपनी एक रिपोर्ट में अनर्गल आरोप लगाए हैं। इस अखबार ने एक लेख में कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री को खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की साजिश के बारे में पहले से ही पता था। यहां तक कि कनाडाई मीडिया ने दावा किया कि इस साजिश की जानकारी गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, और एनएसए अजीत डोभाल को भी थी। हालांकि रिपोर्ट में हैरतअंगेज दावे के समर्थन में की सबूत नहीं दिए गए हैं। लेकिन भारत और कनाडा के बीच जारी तनाव और तल्खी को वहां के मीडिया ने झूठ फैलाकर बढ़ा जरूर दिया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने आरोप को बेतुका और हास्यास्पद बताया
भारत सरकार ने कनाडाई अखबार की रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया है। साथ ही इसे भारत को बदनाम करने की साजिश करार दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा- हम आमतौर पर मीडिया रिपोर्ट पर टिप्पणी नहीं करते हैं, लेकिन इस तरह के ‘बेतुके’ और हास्यास्पद बयानों को उसी तरह खारिज किया जाना चाहिए, जिसके वे हकदार हैं। जायसवाल ने ये भी कहा कि इस तरह की गलतबयानी, मनगढ़ंत रिपोर्ट हमारे पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों को और नुकसान पहुंचाएगी। गौरतलब है कि पिछले साल कनाडा में आतंकी निज्जर की हत्या हुई थी। तब से ही कनाडा इसके लिए भारत पर साजिश के गंभीर आरोप लगाता रहा है। हालांकि, वह अब तक अपने दावों के बारे में कोई सुबूत नहीं दे पाया है।

रिपोर्ट में दावा- एनएसए डोभाल और जयशंकर को भी जानकारी थी
निज्जर की हत्या के मामले में यह पहली बार है, जब सीधे भारत के प्रधानमंत्री पर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इसे लेकर कनाडा सरकार के पास कोई ठोस सबूत नहीं हैं। कनाडाई अखबार की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कनाडा की सिक्योरिटी एजेंसियों को शक है कि भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर को भी इस साजिश के बारे में पहले से जानकारी थी।

ट्रूडो सरकार ने भारत आने वाले यात्रियों की सुरक्षा जांच को बढ़ाया
इससे पहले ब्राजील में G20 समिट के दौरान PM मोदी और कनाडाई PM जस्टिन ट्रूडो की साथ में तस्वीर आई थी, जिसके बाद माना जा रहा था कि इससे दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलने की शुरुआत हो सकती है। हालांकि इस मुलाकात के अगले दिन ही ट्रूडो सरकार ने भारत आने वाले यात्रियों की सुरक्षा जांच को बढ़ा दिया। इस वजह से यात्रियों को एयरपोर्ट पर कड़ी सुरक्षा जांच से होकर गुजरना पड़ रहा है। कनाडाई न्यूज एजेंसी CBC के मुताबिक अधिकारियों ने सुरक्षा जांच बढ़ाने की वजह नहीं बताई।

कनाडा उन लोगों को वीजा देता है, जो भारत में वांटेड हैं- जयशंकर
बता दें कि पिछले साल 18 जून की शाम को सरे शहर के एक गुरुद्वारे से निकलते समय निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रूडो ने भारत सरकार पर निज्जर की हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया था, जिसे भारत ने खारिज कर दिया था। इसके बाद दोनों देशों के आपसी रिश्तों में काफी तल्खी आ गई थी। विदेश मंत्री जयशंकर ने आरोप लगाया था कि कनाडा उन लोगों को वीजा देता है, जो भारत में वांटेड हैं। उन्होंने कहा था, ‘पंजाब में संगठित अपराधों से जुड़े लोगों का कनाडा में स्वागत किया जाता है।’ वहीं, कनाडा की संसद ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के एक साल पूरे होने पर उसे श्रद्धांजलि दी थी। इसके लिए संसद में एक मिनट का मौन रखा गया था।

सख्ती के बाद कनाडा सरकार ने भी मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया
कनाडाई अखबार द ग्लोब एंड मेल की मनगढ़ंत रिपोर्ट की भारत समेत चहुंओर आलोचना होने के बाद कनाडा की सरकार अब जागी है। कनाडा सरकार ने रिपोर्ट को ‘अटकलबाजी और गलत’ बताते हुए कहा है कि उसे ऐसे किसी सबूत की जानकारी नहीं है कि भारत के पीएम मोदी को ऐसी किसी गंभीर आपराधिक गतिविधि की जानकारी थी। कनाडा सरकार ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री मोदी को खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की प्लानिंग की जानकारी थी। ट्रूडो सरकार की तरफ से शुक्रवार को बयान जारी करके साफ किया गया कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि कनाडा में आपराधिक गतिविधियों से भारत के प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और NSA का लिंक है। कनाडा में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के इंटेलिजेंस एडवाइजर की तरफ से जारी बयान में कहा गया, ’14 अक्टूबर को नागरिकों की सुरक्षा को खतरे की वजह से अफसरों ने कनाडा में जारी आपराधिक गतिविधियों के पीछे भारत सरकार के एजेंटों का हाथ होने की बात कही थी।

आखिर PFI को बैन करने वाले प्रस्ताव से मौलाना सलमान नदवी क्यों पलटे ?

PFI पर दिए अपने बयान से पलटे मौलाना सलमान नदवी
ये कट्टरपंथी मुल्लावाद आम मुसलमान के जीवन को क्यों नर्क बना रहा है?इनकी हरकतों की वजह से मेहनत कर रोजी-रोटी कमाने वाला मुसलमान तुम्हारी बातों में आकर बलि का बकरा बन रहा है। ये टीवी पर कुछ बोलते हैं और टीवी ऐ बाहर कुछ। अक्सर लेखों में कहता रहता हूँ कि तुम्हारी हरकतों की वजह से आम मुसलमान बलि का बकरा बन रहा है और ये लोग मालपुए खा रहे हैं। जिस कुरान के खिलाफ बोलने से लोग डरते थे, आज यूट्यूब, Face To Face, The Jaipur Dialogue, और Sachwala आदि पर कुरान पर खुलकर चर्चा हो रही है। इतना ही नहीं, NewsNation चैनल भी 'इस्लाम क्या कहता है' नाम से प्रोग्राम प्रसारित कर रहा है, जो नूपुर शर्मा को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन कर रहे हैं। इनमें इतनी ज्यादा बौखलाहट है कि उन्हें क्या बोलना है और क्या नहीं। अभी कुछ दिन पहले एंकर सुशांत सिन्हा के शो में एक इस्लामिक स्कॉलर, जो पेशे से वकील भी है, ज्ञानवापी मस्जिद में त्रिशूल की बात बोले "मस्जिद में त्रिशूल क्यों नहीं हो सकता?" उनके इतना बोलते ही शो में उपस्थित समस्त हिन्दू मुसलमान ठहाका मारकर हंसने लगे।    

सैयद सलमान नदवी कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI को प्रतिबंधित करने के अपने बयान से पलट गए हैं। हाल ही में NSA अजीत डोभाल ने उनसे मुलाकात की थी। ‘ऑल इंडिया सूफी सज्दानशीं काउंसिल (AISSC)’ के सम्मेलन में ये मुलाकात हुई थी। इसी कार्यक्रम के दौरान अजीत डोभाल ने कहा था कि कुछ लोग धर्म के नाम पर कटुता फैलाने में लगे हैं, जिसका न सिर्फ देश पर विपरीत असर पड़ता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसके दुष्परिणाम आते हैं।

हाल ही में जारी किए गए एक वीडियो में सैयद सलमान नदवी ने कहा कि इस्लाम में आस्था रखने वाले हर उस व्यक्ति का कार्य है कि वो मिल्लत को जोड़े, उम्मत को जोड़े और कलमे की बुनियाद पर पूरी उम्मत में इत्तिफाक पैदा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी अभियान के तहत उन्होंने उस कार्यक्रम में शिरकत की थी और उन्हें पता भी नहीं था कि PFI पर प्रतिबंध की जा रही है, न ही ऐसा कोई प्रस्ताव लाया गया और न ही इस पर किसी ने हस्ताक्षर किए।”

सलमान नदवी ने दावा किया कि PFI ढंग के काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर उसके किसी व्यक्ति की तरफ से ऐसी कोई गलती हुई जो कानून की नजर में गलत है, अगर उसके खिलाफ सबूत हो तो उस व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन्होंने अपराध किया है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए और कोई जुल्म नहीं होनी चाहिए। मौलाना ने कहा कि पूरी जमात को प्रतिबंधित किए जाने का कार्य नहीं होना चाहिए।

हैरान करने वाली बात ये है कि उन्होंने इस दौरान PFI और तबलीगी जमात जैसे संगठनों की तुलना RSS, VHP (विश्व हिन्दू परिषद) और ‘बजरंग दल’ से कर डाली। उन्होंने एक साथ इन सबका नाम लेते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के अपराध के लिए पूरे संगठन को बैन करने का कोई तुक नहीं। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति कुछ ऐसे बयान दे या कार्य करे जो कानून की नजर में गलत हो तो उसी पर कार्रवाई हो, पूरे संगठन को इसका दोष नहीं देना चाहिए।

इस दौरान PFI की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन कई अच्छे कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और समाज के क्षेत्र में PFI ने अच्छा कार्य किया है, लेकिन अगर उसके कुछ अपराध हद से आगे बढ़ गए हैं तो उस व्यक्ति पर कार्रवाई हो। ‘जमीयत शबाब इल-इस्लाम’ के अध्यक्ष ने इससे पहले कार्यक्रम में कहा था कि भारत में किसी भी धर्म के विरुद्ध घृणा या उत्तेजना के लिए कोई जगह नहीं है। अजीत डोभाल का इस मौलानाओं से मिलना ‘उदार मुस्लिमों’ के बीच मोदी सरकार की पहुँच स्थापित करने के रूप में देखा गया था।

‘प्रधानमंत्री के आवास में घुस जाएँगे लोग’: ओवैसी ने दिखाया श्रीलंका वाला डर

AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने भारत में श्रीलंका वाले हालात का डर दिखाते हुए कहा है कि लोग पीएम मोदी के घर में भी घुस सकते हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित एक टॉक शो में शामिल हुए हैदराबाद के सांसद ने कहा कि देश के मौजूदा हालात को देख कर लगता है कि श्रीलंका की तर्ज पर यहाँ भी लोग प्रधानमंत्री आवास में घुस जाएँगे। उन्होंने दावा किया कि भारत में हिन्दू-मुस्लिम राजनीति हो रही है, जिसमें नुकसान मुस्लिमों का हो रहा है।

असदुद्दीन स्वयं एक वकील नहीं बैरिस्टर हैं और इतना भी नहीं जानते कि मुसलमानों को बलि का बकरा बनाने वाले कौन हैं? श्रीलंका वाला डर दिखाकर क्या कहना चाहते हैं? अगर ऐसी नौबत आयी तो प्रधानमंत्री आवास पर कूच करने वालों का नेतृत्व करेंगे या बेकसूर लोगों को मरवाने के लिए खुद संसद में छुप कर बैठ जाएंगे। आखिर मुसलमानों को कब तक बलि का बकरा बनाया जाता रहेगा? ओवैसी साहब तस्लीम रहमानी वाला भड़काने का खेल मत खेलो। भड़काऊ लोगों की ही वजह से आज इस्लाम और कुरान पर बहस हो रही है, आंखें खोलो और देखो News Nation का यह वीडियो:   

दूसरे, TimesNow नवभारत चैनल पर सुशांत सिन्हा के न्यूज़ की पाठशाला में एक इस्लामिक विद्वान वकील ज्ञानवापी में त्रिशूल पर यह बोल गए कि "क्या मस्जिद में त्रिशूल नहीं हो सकता?" उनके यह कहते ही शो में उपस्थित सभी हिन्दू मुसलमान हंसने लगे और जिस पर एंकर सुशांत सिन्हा को कहना पड़ा कि "वकील की वकालत का रिकॉर्ड चेक करना पड़ेगा।"  

असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया कि आजकल राजनीतिक पार्टियाँ अप्रासंगिक हो रही हैं। उन्होंने दिल्ली की सीमाओं पर हुए किसान आंदोलन, CAA विरोधी दंगों, दिल्ली में वकीलों के प्रदर्शन और ‘अग्निपथ योजना’ के खिलाफ उपद्रव – इन सबको जनता का आंदोलन बताते हुए कहा कि नेताओं के बिना ही लोग सड़क पर उतर रहे हैं। ओवैसी ने राजनीतिक पार्टियों को इस पर गंभीरता से सोचने की सलाह देते हुए बदलाव की बात कही।

इस दौरान उन्होंने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहलकर (NSA)’ अजीत डोभाल का भी नाम लेकर उन पर निशाना साधा। ओवैसी ने कहा कि डोभाल को बताना चाहिए कि कट्टरता कौन फैला रहा है और कट्टर कौन है। बता दें कि NSA डोभाल ने हाल ही में एक कार्यक्रम में बयान दिया था कि कुछ लोग धर्म एवं विचारधारा के नाम पर कटुता फैला रहे हैं। ओवैसी ने राजस्थान के अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में पूरी ताकत से लड़ने का ऐलान किया।

उन्होंने कहा कि AIMIM चुनाव नहीं लड़ती है फिर भी कॉन्ग्रेस हार जाती है। उन्होंने कहा कि राजस्थान किसी एक पार्टी का नहीं है और उनका भी उतना ही है, जितना दूसरे दलों का। ओवैसी इससे पहले भारत में एक समुदाय विशेष के खिलाफ नफरत होने का दावा कर चुके हैं। उन्होंने RSS पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें इंद्रेश कुमार से सर्टिफिकेट नहीं चाहिए, उन्हें ये बताना चाहिए कि संघ की शाखाओं में किसके नाम पर और क्या शपथ ली जाती है।

रहस्योघाटन : क्या UPA काल में पाकिस्तान के इशारों पर चलती थी भारत सरकार?

आज जिस तरह कांग्रेस के आतंकवाद, पाकिस्तान और चीन के साथ संबंधों का खुलासा हो रहा है, उसे देख हर देशप्रेमी कांग्रेसी को चाहे वह किसी भी जाति, धर्म, मजहब अथवा समुदाय से हो, देशहित में कांग्रेस और यूपीए समर्थक हर पार्टी को त्याग देना चाहिए। विशेषकर हर हिन्दू को। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं भूतपूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी ने भी अपनी पुस्तक तक में सोनिया के हिन्दू विरोधी होने का जिक्र किया है। 
स्मरण हो, 1962 भारत-चीन युद्ध के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी ने जवानों के लिए खून देने से साफ इंकार कर दिया था। फिर किस आधार पर कम्युनिस्ट भारत की जनता से वोट मांगते हैं? और जनता भी इतनी मुर्ख है, चुनावों में इनको वोट दे आती है। 

लेकिन डाटा वैज्ञानिक डॉ गौरव प्रधान द्वारा सोनिया कांग्रेस का आतंकवाद के साथ चोली-दामन का साथ होने के कई प्रमाण दिए हैं। वैसे इन मुद्दों पर यदाकदा चर्चा होती रहती भी थी। लेकिन कांग्रेस को एक बेगुनाह दोषी के रूप में हमारा मीडिया प्रस्तुत करता रहा। हैरानी की बात यह है कि कुर्सी की खातिर यूपीए को समर्थन दे रही पार्टियां भी खामोश रही। चुनावों में ये ही सभी पार्टियां अपने-आपको बहुत बड़ा देश-हितैषी और जनहित की बात करते नज़र आते हैं, जबकि हकीकत में कर इसके विपरीत हैं। 

मेरी अपनी व्यक्तिगत राय यह है कि इन देश विरोधी पार्टियों को बेनकाब करने के लिए व्यापक स्तर पर अजित डोवाल, कर्नल पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा और स्वामी असीमानंद आदि के कटु अनुभवों को उजागर करना चाहिए। 2019 चुनाव में साध्वी प्रज्ञा द्वारा अपने दर्द भरे अनुभव सार्वजनिक करने पर विपक्ष चुनाव आयोग तक पहुँच जाता है, लेकिन चुनाव आयोग भी सच्चाई को छिपाने के लिए प्रज्ञा पर ही अंकुश लगा देती है। 

जिस कश्मीरी कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद के राज्य सभा से विदाई समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी प्रशंसा में कसीदे तो खूब पढ़े, लेकिन आज़ाद की देश विरोधी हरकतों को क्यों भूल गए? क्या मोदी को आज़ाद की वास्तविकता नहीं मालूम थी?      
कर्नल पुरोहित का पाक में जासूसी नेटवर्क इतना मजबूत था कि आतंकी हाफिज सईद और लख्वी तक उनसे डरते थे। 

कर्नल पुरोहित 9 साल बाद नवी मुंबई की तालोजा जेल से रिहा हो गए है। उनकी रिहाई के बाद कई खुलासे सामने आ रहे है। एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा डाटा वैज्ञानिक गौरव प्रधान ने किया है। 

डॉक्टर गौरव प्रधान ने कई बड़े नेताओं पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं, जिनकी सत्यता की जांच की जानी बेहद जरूरी हो गयी है। 

2010 में होनी थी सोनिया गाँधी और हाफिज सईद की मुलाकात ?

डॉक्टर प्रधान ने खुलासा किया है कि 2010 में सोनिया गाँधी और हाफिज सईद की मुलाकात होनी थी। पाकिस्तानी आतंकी हाफिज सईद इटालियन माता से 2010 में मिलना चाहता था, मगर इटालियन माता ने इंकार कर दिया क्योंकि इसमें काफी रिस्क था। 

वैसे सोनिया गांधी की आतंकियों से हमदर्दी कोई नयी बात नहीं है, इससे पहले पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद भी आजमगढ़ की चुनावी रैली में कबूल कर चुके हैं कि बाटला हाउस एनकाउंटर में आतंकियों के मारे जाने की तस्वीरें देखकर सोनिया गांधी रो पड़ी थी। 

वैसे चर्चा भी है कि डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने भी कई बार सोनिया गाँधी और आतंकवादियों के बीच कुछ साठगाँठ होने की बात करते रहते हैं। 

दाऊद को बचाने के लिए अजित डोवाल को करवाया गिरफ्तार?

डॉक्टर प्रधान ने ये भी खुलासा किया कि 2005 में सोनिया-मनमोहन की सरकार के दौरान आज के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल को मुंबई में गिरफ्तार कर लिया गया था, क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान मे बैठे दाऊद को मारने की पूरी योजना बना ली थी। 

पाकिस्तान के कहने पर कर्नल पुरोहित को किया गिरफ्तार!

डॉक्टर गौरव प्रधान ने ये भी खुलासा किया कि 26/11 के मुंबई आतंकी हमले से ठीक पहले ही कर्नल पुरोहित को गिरफ्तार किया गया, क्योंकि कर्नल पुरोहित सेना के जासूस थे और 26/11 आतंकी हमले के प्लान के बारे में जानते थे। 

डॉ गौरव ने ये भी बताया कि कर्नल पुरोहित की पत्नी अपर्णा पुरोहित ने कहा था कि पाकिस्तान चाहता था कि कर्नल पुरोहित को गिरफ्तार कर लिया जाए और सोनिया-मनमोहन सरकार भी इसके बारे में विचार भी कर रही थी।

अपने खुफिया मिशन के दौरान  कर्नल पुरोहित पाकिस्तान के कई संवेदनशील और नापाक राज जान गए थे, कर्नल पुरोहित का बड़ा जासूसी नेटवर्क भी पाकिस्तान में खुफिया जानकारियां जुटा रहा था। इसीलिए पाकिस्तान कर्नल पुरोहित की कस्टडी की मांग कर रहा था..

गौरव प्रधान ने आगे खुलासा किया कि पाकिस्तानी जनरल पाशा के कहने पर ही कर्नल पुरोहित को ठीक 26/11 आतंकी हमले से पहले गिरफ्तार कर लिया गया, क्योंकि पाकिस्तानियों को शक था कि कर्नल पुरोहित को इस आतंकी हमले की भनक लग चुकी थी और वो हमले को विफल कर सकते थे..

कश्मीरी और कोंग्रेसी नेता आतंकियों की मदद करते थे?

इसके बाद डॉक्टर प्रधान ने और भी ज्यादा सनसनीखेज खुलासे करते हुए बताया कि कर्नल पुरोहित को पता चल गया था कि एक कश्मीरी नेता जो जम्मू कश्मीर का मुख्यमंत्री भी था, वो और कांग्रेसी नेता “मिया आज़ाद” (गुलाम नबी आज़ाद) एक ही गाड़ी में घुमते थे और उनके साथ उसी गाडी में आतंकी भी घूमते थे। गाड़ी पर लाल बत्ती लगी होने के चलते किसी को कानो-कान खबर तक नहीं होती थी। इसी नेता की गाड़ी का इस्तेमाल करके 2005 से लेकर 2010 तक कश्मीर में पैसों की फंडिंग में भी की गयी। 

हिन्दू आतंकवाद जुमले को साबित करने की साजिश?

डॉक्टर गौरव प्रधान ने खुलासा किया कि 26/11 मुंबई हमले का पूरा षड्यंत्र हिन्दुओ को आतंकी घोषित करने के लिए पाकिस्तान ने रचा था, ताकि इस्लामिक कट्टरपंथी आतंकियों पर से ध्यान हटाया जा सके। प्लान था कि आतंकी हमला करने के बाद सभी आतंकियों को मार दिया जाएगा और इस हमले को भी हिन्दू आतंकवाद से जोड़ दिया जाएगा..

उन्होंने बताया कि “26/11 आरएसएस की साजिश” नाम की किताब तो पहले से छाप कर रख ली गयी थी, जिसका विमोचन कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने खुद किया था। गौरव प्रधान ने खुलासा किया कि जब आतंकी मुंबई में घुसे, उससे पहले ही देश के कई नेता इसके बारे में जानते थे और उन्होंने हेमंत करकरे को ख़ास निर्देश दिए थे कि एक भी आतंकी ज़िंदा ना बचने पाए..

मगर सिपाही तुकाराम ओम्बले ने कांग्रेस और पाकिस्तान की सारी योजना पर पानी फेर दिया और आतंकी कसाब को जिन्दा पकड़ लिए गया। आतंकियों ने हेमंत करकरे को पहचाना नहीं और धोखे से उन्हें गोली मार दी..

पी चिदंबरम, सुशील कुमार शिंदे, अहमद पटेल और सोनिया गांधी का साजिश में हाथ?

इस पूरी साजिश के पीछे डॉक्टर प्रधान ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम, पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और अहमद पटेल का नाम लिया। उन्होंने साजिश के पीछे इटालियन आंटी कहते हुए सोनिया गाँधी की और भी इशारा किया। 

लाल कृष्ण आडवाणी, नरेंद्र मोदी और बाल ठाकरे को मारने की साजिश?

डॉक्टर प्रधान ने खुलासा किया कि मुद्रिक में पाकिस्तानियों और भारत के गद्दारों की एक मीटिंग हुई थी, पाकिस्तान भारत की सैन्य ख़ुफ़िया एजेंसियों के बारे में जानना चाहता था। इसी मीटिंग में योजना रखी गयी कि बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी, गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे को मार दिया जाये। मगर इटालियन माता ने इंकार कर दिया क्योंकि 2009 के चुनाव आने वाले थे और हिंदूवादी नेताओं के मारे जाने से कांग्रेस को चुनाव में नुक्सान होने का डर था। 

मोदी को फंसाने के लिए असीमानंद पर दबाव?

उन्होंने आगे खुलासा किया कि 26/11 हमले का पूरा का पूरा प्लान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) को आतंकी संगठन बताकर हिन्दू आतंकवाद को सिद्ध करने के मकसद से बनाया गया था। इसी तरह समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में ब्लास्ट के बाद गिरफ्तार किये गए पाकिस्तानी आतंकी को छोड़ दिया गया और स्वामी असीमानंद को इस केस में फंसा दिया गया। 

स्वामी असीमानंद को गिरफ्तार करके थर्ड डिग्री की यातनाएं दी गयीं और उनसे कहा गया कि यदि इन यातनाओं से बचना है तो गुजरात के एक बड़े बीजेपी नेता (नरेंद्र मोदी) का नाम ले लो।  इंकार करने पर असीमानंद को और यातनाएं दी गयी, ऐसा ही साध्वी प्रज्ञा के साथ भी किया गया। 

योजना थी कि 26/11 के आतंकी हमले में सभी आतंकियों को मार कर सारा इल्जाम आरएसएस पर लगा कर संघ को आतंकी संगठन घोषित किया जायेगा। इसके बाद नरेंद्र मोदी और अमित शाह को भी इसी तरह के केस में फंसा दिया जाएगा क्योंकि इटालियन माता 2004 से ही जानती थी की ये दोनों उसके लिए बड़ा खतरा है। 

10 सालों तक जनरल पाशा का था भारत पर राज?

गौरव प्रधान ने दावा किया कि दरअसल 2004 से 2014 तक देश में मनमोहन-सोनिया नहीं बल्कि पाक आईएसआई का जनरल पाशा राज कर रहा था, जो वो चाहता था वही यहाँ होता था।  डॉक्टर गौरव प्रधान ने बताया कि कर्नल पुरोहित का पाकिस्तान में काफी अच्छा जासूसी नेटवर्क था, जिसके कायल खुद अजित डोभाल भी थे। अजित डोभाल भी ये देखकर हैरान थे कि कर्नल पुरोहित ने अपने इसी जासूसी नेटवर्क के दम पर सात बार पाकिस्तान की साजिशों और हमलों को विफल कर दिया था..

डॉक्टर प्रधान ने ये खुलासा भी किया कि कर्नल पुरोहित का पाकिस्तान में जासूसी नेटवर्क इतना मजबूत था कि आतंकी हाफिज सईद और लख्वी तक उनसे डरते थे। इसी डर से दोनों आतंकी आकाओं की सुरक्षा भी पाकिस्तान ने बढ़ा दी थी। 

कर्नल पुरोहित पाक खुफिया एजेंसी और पाक आतंकियों दोनों के निशाने पर थे। जनरल पाशा के इशारे पर कांग्रेस सरकार ने कर्नल पुरोहित को गिरफ्तार कर जेल में डलवा दिया और बेपनाह यातनाएं दी। पूरी कोशिश की गयी कि इस देशभक्त सेना के अफसर को आतंकी घोषित कर दिया जाये!