आरोपित साजिद खान और थाने में हिंदू समाज के लोग (साभार: नई दुनिया) छत्तीसगढ़ में साजिद खान नाम का एक शख्स गोमांस दिखाकर हिंदू संगठनों और भाजपा को गाली दे रहा है। इसका उसने वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया है। वीडियो में साजिद खान कह रहा है कि वह गाय का मांस खाएगा और अगर किसी में हिम्मत है तो उसका कोई कुछ बिगाड़ कर दिखाए।
मामला छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है। 5 अप्रैल 2023 को अपलोड किए गए वीडियो में साजिद हिंदू संगठनों को गालियाँ दे रहा है और कह रहा है, “हिम्मत है तो मेरा जो करना चाहो कर लो।”
वीडियो वायरल होते ही शहर में तनाव फैल गया हो गया। इसके बाद हिंदू संगठनों ने मामले की शिकायत सिटी कोतवाली में की। 5 अप्रैल 2023 की देर रात तक बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, गौ सेवक समेत अन्य हिंदू संगठनों के लोग थाने में बैठे रहे।
इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने आरोपित पर कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। स्थिति को देखते हुए पुलिस भी अलर्ट हो गई। इसके बाद हालात को देखते हुए मुस्लिम समाज के लोगों ने साजिद खान को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।
सुकमा जिले में रामनवनी के कुछ दिन पहले से ही हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच तनाव है। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई थी कि पुलिस ने लाठी चार्ज करना पड़ा था। पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ अगले दिन हिंदू संगठनों ने शहर बंद करवाया था।
बाद में मामला शांत हो गया था। इसके बाद रामनवमी के दिन किसी तरह की अप्रिय घटना ना हो, इसके लिए सैकड़ों की संख्या में फोर्स को तैनात किया गया था। हालाँकि, फोर्स तैनात होने के बावजूद तनाव को महसूस किया जा सकता है।
ये कट्टरपंथी मुल्लावाद आम मुसलमान के जीवन को क्यों नर्क बना रहा है?इनकी हरकतों की वजह से मेहनत कर रोजी-रोटी कमाने वाला मुसलमान तुम्हारी बातों में आकर बलि का बकरा बन रहा है। ये टीवी पर कुछ बोलते हैं और टीवी ऐ बाहर कुछ। अक्सर लेखों में कहता रहता हूँ कि तुम्हारी हरकतों की वजह से आम मुसलमान बलि का बकरा बन रहा है और ये लोग मालपुए खा रहे हैं। जिस कुरान के खिलाफ बोलने से लोग डरते थे, आज यूट्यूब, Face To Face, The Jaipur Dialogue, और Sachwala आदि पर कुरान पर खुलकर चर्चा हो रही है। इतना ही नहीं, NewsNation चैनल भी 'इस्लाम क्या कहता है' नाम से प्रोग्राम प्रसारित कर रहा है, जो नूपुर शर्मा को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन कर रहे हैं। इनमें इतनी ज्यादा बौखलाहट है कि उन्हें क्या बोलना है और क्या नहीं। अभी कुछ दिन पहले एंकर सुशांत सिन्हा के शो में एक इस्लामिक स्कॉलर, जो पेशे से वकील भी है, ज्ञानवापी मस्जिद में त्रिशूल की बात बोले "मस्जिद में त्रिशूल क्यों नहीं हो सकता?" उनके इतना बोलते ही शो में उपस्थित समस्त हिन्दू मुसलमान ठहाका मारकर हंसने लगे।
सैयद सलमान नदवी कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI को प्रतिबंधित करने के अपने बयान से पलट गए हैं। हाल ही में NSA अजीत डोभाल ने उनसे मुलाकात की थी। ‘ऑल इंडिया सूफी सज्दानशीं काउंसिल (AISSC)’ के सम्मेलन में ये मुलाकात हुई थी। इसी कार्यक्रम के दौरान अजीत डोभाल ने कहा था कि कुछ लोग धर्म के नाम पर कटुता फैलाने में लगे हैं, जिसका न सिर्फ देश पर विपरीत असर पड़ता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसके दुष्परिणाम आते हैं।
हाल ही में जारी किए गए एक वीडियो में सैयद सलमान नदवी ने कहा कि इस्लाम में आस्था रखने वाले हर उस व्यक्ति का कार्य है कि वो मिल्लत को जोड़े, उम्मत को जोड़े और कलमे की बुनियाद पर पूरी उम्मत में इत्तिफाक पैदा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी अभियान के तहत उन्होंने उस कार्यक्रम में शिरकत की थी और उन्हें पता भी नहीं था कि PFI पर प्रतिबंध की जा रही है, न ही ऐसा कोई प्रस्ताव लाया गया और न ही इस पर किसी ने हस्ताक्षर किए।”
सलमान नदवी ने दावा किया कि PFI ढंग के काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर उसके किसी व्यक्ति की तरफ से ऐसी कोई गलती हुई जो कानून की नजर में गलत है, अगर उसके खिलाफ सबूत हो तो उस व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन्होंने अपराध किया है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए और कोई जुल्म नहीं होनी चाहिए। मौलाना ने कहा कि पूरी जमात को प्रतिबंधित किए जाने का कार्य नहीं होना चाहिए।
हैरान करने वाली बात ये है कि उन्होंने इस दौरान PFI और तबलीगी जमात जैसे संगठनों की तुलना RSS, VHP (विश्व हिन्दू परिषद) और ‘बजरंग दल’ से कर डाली। उन्होंने एक साथ इन सबका नाम लेते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के अपराध के लिए पूरे संगठन को बैन करने का कोई तुक नहीं। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति कुछ ऐसे बयान दे या कार्य करे जो कानून की नजर में गलत हो तो उसी पर कार्रवाई हो, पूरे संगठन को इसका दोष नहीं देना चाहिए।
इस दौरान PFI की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन कई अच्छे कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और समाज के क्षेत्र में PFI ने अच्छा कार्य किया है, लेकिन अगर उसके कुछ अपराध हद से आगे बढ़ गए हैं तो उस व्यक्ति पर कार्रवाई हो। ‘जमीयत शबाब इल-इस्लाम’ के अध्यक्ष ने इससे पहले कार्यक्रम में कहा था कि भारत में किसी भी धर्म के विरुद्ध घृणा या उत्तेजना के लिए कोई जगह नहीं है। अजीत डोभाल का इस मौलानाओं से मिलना ‘उदार मुस्लिमों’ के बीच मोदी सरकार की पहुँच स्थापित करने के रूप में देखा गया था।
कन्हैया लाल की बेरहम हत्या के विरुद्ध सड़क पर उतरे हिन्दू
नूपुर विवाद में जिस बात की शंका थी, जिसे दबे शब्दों में व्यक्त भी किया जा रहा था, वह सत्य होती दिख रही है। जून 29 को दो काम ऐसे हुए हैं, अगर इन दोनों ने तूल पकड़ लिया, कोई मुस्लिम देश बचाव में नहीं आएगा, पहला, केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान द्वारा मदरसों पर प्रहार, दूसरा हिन्दुओं द्वारा कन्हैया लाल की हत्या को लेकर राजस्थान हाउस दिल्ली में हुए प्रदर्शन में उठी कुरान पर बैन की मांग। भारतीय कट्टरपंथियों को एक बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि आज प्रधानमंत्री राजीव गाँधी नहीं है, जिसने 31 जुलाई 1986 को तीस हज़ारी कोर्ट के कुरान की आयतों के विरुद्ध निर्णय को लागु होने से रुकवा दिया था। नीचे लिंक पर क्लिक करें। दूसरे, कलकत्ता हाई कोर्ट में भी 124 आयतों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। किताब Quran Petition पढ़ लो। 29 मार्च 1985 को कुरान को Sections 153A and 295Aके अंतर्गत बैन करने का केस दर्ज हुआ था।
और अगर अनवर शेख की पुस्तकें चलन में आ गयीं, फिर तो ऊपर वाला ही मालिक है। लेखक अनवर शेख के खिलाफ किसी में फतवा देने या फिर उनकी किसी भी किताब को बैन बनने की हिम्मत नहीं हुई।
कट्टरपंथियों के दोगलेपन की भी हद है, जिसे हर शांतिप्रिय मुस्लिम को समझना होगा। वह यह कि एक तरफ तो टीवी पर चर्चाओं में कहते हैं कि मुगलों से हमारा कोई वास्ता नहीं, दूसरी तरफ कहते हैं कि 'एक मस्जिद खो दी दूसरी नहीं खोएंगे।' मतलब यह की मुगलों की वकालत भी कर रहे हैं।
अयोध्या पर कितना विवाद खड़ा किया था। खुदाई में मिले सबूतों को ही कोर्ट से छुपा लिया गया था। जिसका उल्लेख पुरातत्व विभाग के तत्कालीन निदेशक के.के. मोहम्मद जिनके संरक्षण में अयोध्या में खुदाई हुई थी, ने अपनी पुस्तक में लिखा कि मंदिर कई साल पहले बन चुका होता, अगर कोर्ट से खुदाई में मिले सबूत छुपाये नहीं गए होते। नूपुर तो एक बहाना है, ज्ञानवापी और मथुरा को बचाना है।
कश्मीर से जब हिन्दुओं को भगाया गया, महिलाओं इस्लाम न कबूलने पर बलात्कार और हत्या की जा रही थी, सबके मुंह में दही जमा हुआ था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘बजरंग दल’ और ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ ने राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल तेली का सिर कलम कर हत्या किए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान कइयों ने गिरफ्तारियाँ भी दी। पुलिस उन्हें DTC की बसों में भर कर ले गई। कई अन्य जगहों पर भी हिन्दू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। पृथ्वीराज रोड स्थित राजस्थान हाउस के सामने भी हिन्दू कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा।
इस दौरान एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “वो बाहर आकर वही करते हैं जो उनकी किताब में लिखा है। नूपुर शर्मा ने कुछ बोल भी दिया तो वही बोला जो उनकी किताब में लिखा है। क्या गलत बोला? इस बेचारे का क्या कसूर है? इसने सिर्फ समर्थन में एक डीपी लगाई थी। एक सप्ताह पहले इन्होंने रिपोर्ट लिखवाई थी, लेकिन अशोक गहलोत की सरकार बैठी रही। ये सब मदरसों में सिखाया जा रहा है। कश्मीर से हिन्दुओं को भगा दिया गया।”
बीजेपी से सस्पेंड होने से पहले नूपुर शर्मा और समाजवादी पार्टी के अमीक जमाई के बीच हुई डिबेट की यह वीडियो बहुत महत्वपूर्ण है । आप जिस किसी भी ग्रुप से जुड़े हो, उसमें भी इसे भेजो और अपने परिवार के एक एक बच्चों को सुनाओ । ऐसी सच्ची व अद्भुत जानकारी, कम से कम सभी हिन्दुओं को होनी ह pic.twitter.com/ugk5ogJkoX
एक प्रदर्शनकारी महिला ने कहा कि सरेआम सारे सबूत पब्लिक डोमेन में मौजूद हैं, ऐसे में उसका कीमा बना दिया जाना चाहिए, उसे फाँसी होनी चाहिए। महिलाओं ने कहा कि नूपुर शर्मा हमारी बहन है, हम सब उनकी डीपी लगाएँगे। महिलाओं ने नूपुर शर्मा के बयान को दोहराया। उन्होंने कहा कि हिन्दुओं का क़त्ल करना इन्हें सिखाया जाता है। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को धमकी दी गई है वीडियो बना कर, उन्हें जरा भी खरोंच भी आ गई तो गजब हो जाएगा। इस दौरान उन्होंने ‘हिंदुस्तान को तालिबान नहीं बनने देंगे’ जैसे पोस्टर्स भी ले रखे थे।
महिलाओं ने कहा कि नूपुर शर्मा हमारी बहन है, हम सब उनकी DP लगाएँगे। महिलाओं ने नूपुर शर्मा के बयान को दोहराया। उन्होंने कहा कि हिन्दुओं का क़त्ल करना इन्हें सिखाया जाता है।#KanhaiyaLalTeli का सिर कलम किए जाने के विरोध में दिल्ली में सड़कों पर हिन्दू, कहा- "आसमानी किताब बैन करो।" https://t.co/rR19eIEzjKpic.twitter.com/XgZBe1onmJ
हिन्दू प्रदर्शनकारियों ने कहा, "देश में आसमानी किताब पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।" साथ ही लोगों ने हिन्दुओं को बाँटने का आरोप लगाते हुए पूछा कि 'अवॉर्ड वापसी गैंग' चुप क्यों हैं?#UdaipurHorror के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को दिल्ली पुलिस बसों में भर कर ले गई। हिन्दू शांत रहे। pic.twitter.com/iwJXPbBM35
उदयपुर की पैशाचिक घटना कोई सामान्य हत्याकाण्ड नहीं है, ये पूरी तरह से एक आतंकवादी वारदात है, प्रदेश और देश की सरकार को भी उसी कड़ाई से इससे निपटना चाहिये।’कठोर कार्यवाही’ केवल बयानों में ही नहीं धरातल पे भी दिखनी चाहिये। पूरा देश स्तब्ध है… सबको मुखर भी होना पड़ेगा।
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि पूरा मामला साफ़ होना चाहिए और जो-जो साजिश में शामिल हैं, सबको पकड़ा जाना चाहिए। लोगों ने कहा कि नरेंद्र मोदी को धमकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोनों हत्याओं को हमारे हवाले कर दो – लोगों ने डिमांड की। इस दौरान उन्होंने कहा, “इस देश में आसमानी किताब पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।” साथ ही लोगों ने हिन्दुओं को बाँटने का आरोप लगाते हुए पूछा कि ‘अवॉर्ड वापसी गैंग’ चुप क्यों हैं?
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हिन्दू संगठन के एक अन्य पदाधिकारी ने कहा कि सीमा पार करने वालों को जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘बजरंग दल’ हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है और हम हर एक हिन्दू पीड़ित के साथ खड़े हैं। उन्होंने प्रशासन पर भी FIR करने की माँग की, क्योंकि हिन्दुओं की टारगेट किलिंग और कई बार शिकायत दिए जाने के बावजूद वो चुप बैठे रहे। इस दौरान लगातार ‘जय श्री राम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगते रहे।