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दुरंतो एक्सप्रेस में टॉयलेट सीट पर रखे दिखे बर्तन, Video हुआ वायरल

                                                    दुरंतो एक्सप्रेस ट्रेन की टॉयलेट सीट पर दिखे बर्तन

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (IRCTC) को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद भेजा गया है जिसमें ट्रेन नंबर 12223, मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस-एर्नाकुलम दुरंतो एक्सप्रेस के अंदर कैटरिंग स्टाफ को ट्रेन के टॉयलेट में बर्तन धोते हुए नजर आए थे।

सोशल मीडिया पर सामने आए इस वीडियो ने लोगों में काफी नाराजगी पैदा कर दी। बताया जा रहा है कि यह वीडियो मुंबई-एर्नाकुलम दुरंतो एक्सप्रेस की फर्स्ट एसी कोच H1 में रिकॉर्ड किया गया था। वीडियो में कैटरिंग/कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारी टॉयलेट के अंदर प्लेट, कटोरी और कटलरी (खाने के बर्तन) कथित तौर पर धोते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में प्लास्टिक की एक क्रेट (टोकरा) में रखी चीनी मिट्टी की प्लेटें और कटोरियाँ टॉयलेट सीट पर रखी नजर आती हैं।

फर्स्ट एसी कोच में यात्रा कर रहे एक यात्री ने यह देखने के बाद स्टाफ से बहस की और उसका वीडियो बना लिया। वीडियो क्लिप में यात्री कर्मचारी से टॉयलेट में बर्तन धोने और उन्हीं बर्तनों में खाना परोसने को लेकर सवाल करता दिखाई देता है। हालाँकि, कर्मचारी ने कहा कि वह अभी-अभी वहाँ आया है और उसने कैटरिंग स्टाफ को टॉयलेट में बर्तनों के साथ नहीं देखा।

IRCTC के ठेकेदार के तहत काम करने वाला कैटरिंग कर्मचारी यह नहीं बता पाया कि वह वहाँ क्या कर रहा था। उसने केवल अपना नाम सुरेश बताया। वीडियो से ऐसा लग रहा था कि कैटरिंग स्टाफ ने टॉयलेट के अंदर बर्तन धोए और फिर उन्हें टॉयलेट सीट पर रखी क्रेट में रख दिया।

यह वीडियो X जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद खासकर प्रीमियम और महँगे किराए वाली ट्रेन में सफाई और खानपान के मानकों को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। यात्री ने इस मामले में IRCTC, रेल मदद (Rail Madad) और रेलवे मंत्रालय में औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई।

FSSAI के नोटिस के अनुसार, यह तरीका खाद्य सुरक्षा और मानक (फूड बिजनेस लाइसेंसिंग और रजिस्ट्रेशन) नियम, 2011 के शेड्यूल-4 का उल्लंघन है। इन नियमों के तहत खाद्य कारोबार से जुड़े संस्थानों को भोजन बनाने, संभालने, धोने और सफाई के दौरान पूरी स्वच्छता बनाए रखना जरूरी होता है ताकि खाने और खाने के संपर्क में आने वाली चीजों में किसी तरह की गंदगी या संक्रमण न फैले।

FSSAI ने कहा कि यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के जरिए उसके ध्यान में आया। इसके बाद IRCTC को निर्देश दिया गया है कि वह इस घटना को लेकर तथ्यात्मक जानकारी और विस्तृत जवाब पेश करे जिसमें ऑनबोर्ड कैटरिंग स्टाफ की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी जाए।

अब तक IRCTC ने इस मामले पर कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है। हालाँकि, X पर घटना साझा करने वाली एक पोस्ट पर जवाब देते हुए IRCTC ने सामान्य प्रक्रिया के तहत यात्री से PNR नंबर और फोन नंबर माँगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ट्रेन का कैटरिंग ठेका वृंदावन फूड प्रोडक्ट्स कंपनी के पास है जो RK ग्रुप का हिस्सा है। यह कंपनी रेलवे की कई प्रीमियम ट्रेनों में खानपान सेवा देने वाली सबसे बड़ी ठेकेदार कंपनियों में गिनी जाती है। रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस मामले में कैटरिंग ठेकेदार पर 50,000 रूपए का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही, जिस कर्मचारी ने यह हरकत की उसे ड्यूटी से हटाने का आदेश दिया गया है। ट्रेन के पैंट्री कार मैनेजर को भी कड़ी चेतावनी दी गई है।

क्यों विवादों में घिरी सेरेलक बनाने वाली नेस्ले, बेबी फूड में कैसे कर रही मिलावट: खुलासे के बाद हरकत में आयीं सोयी हुई भारतीय एजेंसियाँ


खाने पीने के उत्पाद बनाने वाली कम्पनी नेस्ले के भारतीय समेत तमाम विकाशील या गरीब देशों के बच्चों पर दोहरे मानक सामने आ गए हैं। एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि नेस्ले भारतीय बच्चों के लिए बेचे जाने फूड सेरेलेक में मिठास के लिए चीनी जैसे उत्पाद मिलाती है जबकि यही काम यूरोप के बच्चों के लिए नहीं किया जाता। भारतीय बच्चों और यूरोपियन बच्चों के लिए बेंचे जाने एक ही उत्पाद में इतना अंतर कैसे है,नेस्ले से इस बात का जवाब देते नहीं बन रहा है। अब भारत सरकार भी इस मामले का संज्ञान ले रही है।

आखिर बच्चों से लेकर बड़ों तक के स्वास्थ्य के साथ कब से खिलवाड़ किया जाता है? इसका मतलब है कि भारत में FSSAI का कोई डर नहीं? क्यों बनाया गया यह विभाग? क्या इसके अधिकारियों पर कोई कार्यवाही नहीं होनी चाहिए? ऐसे अनेकों खाद्य पदार्थ हैं, जिनकी जाँच की जानी चाहिए। अक्सर देखा गया है कि जब जाँच टीम बाजार में आती है दुकाने बंद कर दी जाती हैं, ऐसे हालत में उस जाँच टीम को अधिकार होना चाहिए कि दुकान बंद मिलने पर टीम दुकान सील कर दे। जब दुकानदार सैंपल देने को तैयार हो तभी सील तोड़ी जाये। जब ग्राहक बड़ी हुई कीमत दे रहा है फिर मिलावटी खाद्य पदार्थ क्यों? मोदी सरकार को वापस आने पर जनता की सेहत को देखते इस ओर कढोर कदम उठाने होंगे। 

स्विटज़रलैंड के पब्लिक आई और इंटरनेशनल बेबीफूड एक्शन नेटवर्क (IBFAN) ने पूरे विश्व से नेस्ले के बच्चों के लिए बेंचें जाने वाले उत्पादों के सैंपल की जाँच की है। भारत समेत कई देशों में यह उत्पाद सेरेलेक के नाम से बेचा जाता है। यह उत्पाद छोटे बच्चों को खाने के रूप में दिया जाता है। फिलिपीन्स में बेचे जाने वाले इसी उत्पाद में प्रति खुराक में 7.3 ग्राम चीनी पाई गई। स्विटज़रलैंड समेत अन्य यूरोपियन देशों में बेंचे जाने वाले इन्हीं उत्पादों में बिलकुल भी चीनी नहीं थी।

इस रिपोर्ट में बताया गया कि नेस्ले सेरेलेक के सभी उत्पादों में चीनी डाली जाती है। औसतन यह 4 ग्राम होती है। सबसे ज्यादा फ़िलीपीन्स के सैंपल में चीनी पाई गई। यूरोपियन बाजारों के सैंपल में चीनी नहीं मिली। भारत से लिए गए सैंपल की जाँच में भी बड़े खुलासे हुए। भारत में बिकने वाले सेरेलेक में औसतन हर खुराक में 3 ग्राम चीनी पाई गई है। यह भी बताया गया है कि चीनी इस उत्पाद में डाली गई लेकिन उसके विषय में डिब्बों पर स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया।

रिपोर्ट में बताया गया है, “भारत में, जहाँ इस उत्पाद की बिक्री 2022 $250 मिलियन (लगभग ₹2000 करोड़) के पार थी, सभी सेरेलैक बेबीफूड में प्रति खुराक लगभग 3 ग्राम अतिरिक्त चीनी होती है। यही स्थिति अफ्रिका के मुख्य बाज़ार दक्षिण अफ़्रीका में भी है, जहाँ सभी सेरेलैक प्रति खुराक में 4 ग्राम या अधिक चीनी होती है।”

सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश और पाकिस्तान समेत तमाम देशों में भी नेस्ले ने यही किया। यह भी बताया गया कि इनमें से कुछ पैकेज पर इनमें चीनी होने की बात लिखी तक नहीं थी। इन उत्पादों में शहद के रूप में चीनी थी जिसको लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) मना करता है।

नेस्ले का यह कदम बच्चों के लिए खतरनाक क्यों?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के खाने में छोटी उम्र से ही अधिक चीनी दिया जाना ठीक नहीं है। इससे उनमें मोटापा, ह्रदय सम्बंधित बीमारियाँ और कैंसर आदि का खतरा बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा बच्चों के दांतों पर भी चीनी का विपरीत प्रभाव पड़ता है। मिठास के लिए उत्पाद कम्पनियाँ उपयोग करती हैं, वह भी शुद्ध चीनी ना होकर अन्य मिठास वाले उत्पाद होते हैं। ऐसे में इनसे बचने की सलाह दी जाती है।

औपनिवेशिक सोच का नतीजा

नेस्ले के दोहरे मानकों पर सवाल उठाते हुए, जोहान्सबर्ग में विटवाटरसैंड विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य के प्रोफेसर और एक बाल रोग विशेषज्ञ करेन हॉफमैन ने पब्लिक आई से कहा, ”मुझे समझ में नहीं आता कि दक्षिण अफ्रीका बिकने वाले उत्पाद उन उत्पादों से अलग क्यों है जो विकसित देशों में बेचे जाते हैं। यह औपनिवेशीकरण का एक रूप है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। बच्चों के खाने में चीनी मिलाना भी एकदम सही नहीं है।”
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नेस्ले ने इस मामले पर बयान जारी किया है। भारत में नेस्ले के प्रवक्ता ने कहा है, “नेस्ले इंडिया अपने उपभोक्ताओं को सबसे अच्छा न्यूट्रीशन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, यह हम पिछले 100 सालों से कर रहे हैं और हम हमेशा अपने उत्पादों में पोषण, गुणवत्ता और सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखेंगे।”
भारत में खाने-पीने की वस्तुओं की गुणवता का प्रमाणन करने वाली एजेंसी FSSAI ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है और पब्लिक आई की रिपोर्ट के बाद इस पर कार्रवाई करेगी।

हलाल सर्टिफिकेट के नाम पर हिंदू एवं अन्य समुदाय के व्यापारियों का बहिष्कार, आतंकियों को फंडिंग की आशंका: FIR में साजिशों का खुलासा

                                                                                                                      साभार- दैनिक जागरण
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 17 नवम्बर 2023 को हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी और जमीयत उलेमा-ए-हिन्द सहित कुछ अन्य संस्थाओं एवं लोगों पर FIR दर्ज हुई थी। इस FIR में हलाल सर्टिफिकेट को हिन्दू आस्था पर आघात बताते हुए इससे जुड़े लोगों पर कार्रवाई करने की माँग की गई थी। केस दर्ज होने के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने अगले दिन 18 नवम्बर को हलाल के बजाय FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) प्रमाण पत्र को मानकों के लिए उचित बताया।

ऑपइंडिया के पास मौजूद इस केस में दर्ज हुई FIR में हलाल इंडिया के चेन्नई और मुंबई कार्यालय के साथ जमीयत उलेमा ए हिन्द के दिल्ली और मुंबई ऑफिस को नामजद किया है। इसके अलावा हलाल सर्टिफिकेट को बढ़ावा देने वाली कुछ अज्ञात कम्पनियाँ, राष्ट्र विरोधी साजिश रचने वाले कुछ अन्य अज्ञात लोग, आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे अज्ञात समूह और जनआस्था से खिलवाड़ करने के साथ दंगे करवाने की साजिश रच रहे कुछ अज्ञात लोगों को नामजद किया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

शिकायतकर्ता शैलेन्द्र कुमार ने अपनी शिकायत में बताया है कि हलाल सर्टिफिकेट मजहब के नाम पर मजहब विशेष के लोगों द्वारा जारी किया जा रहा है। इस साजिश में एक मजहब विशेष के लोगों के सामानों की बिक्री बढ़ाने के लिए हलाल के नाम पर छल किया जा रहा है। FIR में कहा गया है कि जिन कंपनियों ने इनसे हलाल सर्टिफिकेट नहीं लिया है, उनकी बिक्री घटाने के लिए आपराधिक कृत्य किया जा रहा है।

शिकायत में हलाल सर्टिफिकेट को मुस्लिमों की अपनी तरफ आकर्षित करने का खास तरीका बताया गया है। FIR में आरोप है कि हलाल सर्टिफिकेट देने वाली कंपनियों ने सरकार के नाम का भी फर्जी कागजातों से दुरूपयोग किया है। हालात सर्टिफिकेट देने वाली कंपनियों के कागजातों में भी गड़बड़ी होने की बात कही गई है। इसके साथ ही गया है कि इसके जरिए समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

शिकायतकर्ता ने सभी आरोपितों पर समाज में विद्वेष फैलाने, आपराधिक कृत्य कर के करोड़ों रुपए कमाने, राष्ट्र विरोधी साजिश रचने के साथ हलाल सर्टिफिकेट से मिल रहे पैसे से आतंकियों को फंडिंग होने की आशंका जताई गई है। FIR में कहा गया है कि इससे होने वाले अनुचित लाभ को देश विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा रहा है।

अवलोकन करें:-

उत्तर प्रदेश : अब जेल भेजवा देगा ‘हलाल’: निर्माण, भंडारण, वितरण, खरीद-बेच सब पर योगी सरकार ने लगा द

FIR में कहा गया है कि तेल, साबुन, टूथपेस्ट, शहद आदि तक के लिए हलाल सर्टिफिकेट दिए जा रहे हैं, जबकि इनके लिए हलाल सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि ये शाकाहारी वस्तुएँ हैं। शाकाहारी वस्तुओं के लिए हलाल सर्टिफिकेट की आवश्कयता नहीं होती। इसमें आगे कहा गया है कि एक विशेष वर्ग द्वारा प्रचार किया जा रहा है कि उन वस्तुओं का इस्तेमाल ना करो, जिन्हें हलाल सर्टिफिकेट नहीं दिया गया हो। इससे दूसरे वर्ग के व्यापारियों के हितों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है।