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मुसलमानों आंखे खोलो, पहचानों अपने असली दुश्मनों को ; देखो तुम्हे भड़काने वाले किस तरह अपनी तिजोरियां भर रहे हैं: राणा अय्यूब ने कोरोना में किया जो करोड़ों का घपला : ITAT का आदेश; गरीबों के नाम पर हड़पे थे सारे रुपए, परिवार को दिया फायदा; 50 लाख रूपए की सिर्फ FD करवाई

आखिर मुसलमान कब तक कुँए का मेंढक बना रहेगा? कब कुँए से बाहर आकर अपने असली दुश्मनों को  पहचानेगा, क्योकि कट्टरपंथियों ने इतना डरा-धमका कर रखा हुआ जिस वजह से सच्चाई जानने की कोशिश नहीं करते। तुम्हारा दुश्मन कोई बीजेपी या आरएसएस नहीं ये ही मुस्लिम कट्टरपंथी हैं। इन्हे कट्टरपंथी अगर कहें कि बकरे की चार नहीं दो टांगें होती हैं ये सभी चार नहीं दो ही बोलेंगे। गुजरात दंगों में देखा कि किस तरह तीस्ता सीतलवाड़ ने दंगा पीड़ितों को मदद करने के लिए उगाए धन का अधिकतर अपने निजी रूप में  दुरूपयोग किया, उसी तरह राणा अयूब, जो अपने लेखों से तुम्हे भड़काती है, ने कोरोना काल में घपला किया है।    
कोविड-19 महामारी के दौरान जब देश संकट से जूझ रहा था, उस समय पत्रकार राणा अय्यूब ने राहत कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये का फंड जुटाया। लेकिन इस पैसे का उपयोग राहत कार्यों से ज्यादा उन्होंने निजी कामों के लिए किया। इसके खुलासा मुंबई स्थित आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (
ITAT) ने किया है।

ITAT का कहना है कि इस फंड का कुछ हिस्सा निजी उपयोग में लाने के साथ साथ विदेशी फंडिंग के नियमों का भी उल्लंघन किया गया है। ITAT ने राणा अय्यूब को पूरे फंड पर टैक्स जमा करने का आदेश दिया है।

राणा अय्यूब ने कोरोना महामारी के समय ‘केट्टो’ प्लेटफॉर्म पर तीन क्राउडफंडिंग अभियानों के जरिए कुल ₹2.69 करोड़ जुटाए थे। इस रकम में से ₹80.49 लाख की फंडिंग विदेश से मिली था, जो FCRA, 2010 का उल्लंघन था।

                     COVID-19 महामारी के दौरान राणा अय्यूब द्वारा जुटाई गई धनराशि का स्क्रीनग्रैब

राणा अय्यूब ने कोविड-19 राहत कार्यों के लिए जुटाई गई रकम में से ₹1.60 करोड़ अपने पिता मोहम्मद अय्यूब शेख और ₹37.15 लाख अपनी बहन इफ़्फ़त शेख के बैंक खातों में जमा किए। उन्होंने आयकर विभाग को बताया कि उनका पैन कार्ड नहीं मिल रहा था, इसलिए केट्टो से फंड निकालने के लिए उन्होंने अपने पिता और बहन के पैन कार्ड का इस्तेमाल किया।

बाद में राणा अय्यूब ने अपने पिता के खाते से ₹84.40 लाख और बहन के खाते से ₹36.40 लाख अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर लिए। इस तरह उनके खाते में कुल ₹1.20 करोड़ से ज्यादा की राशि ट्रान्सफर।

अप्रैल 2022 में उन्होंने इस बड़ी रकम के गबन को सिर्फ 20,000 डॉलर की छोटी राशि’ बताकर गंभीरता को कम करने की कोशिश की, जबकि असल में मामला ₹2.69 करोड़ (करीब 3.14 लाख डॉलर) का था।

            राणा अय्यूब द्वारा अपने पिता और बहन के खाते से अपने निजी बैंक खाते में स्थानांतरित किया गया धन

ITAT ने कहा कि एक साल बाद भी क्राउडफंडिंग से जुटाए गए लगभग ₹2.4 करोड़ का उपयोग राहत कार्यों के लिए नहीं हुआ। पैसा राणा अय्यूब और उनके परिवार के व्यक्तिगत बचत खातों में जमा किया गया था। राहत कार्य करने के बजाय, राणा अय्यूब ने अपने नाम पर चालू खाता खोला, FD में निवेश किया और उसी खाते से निजी खर्च भी किए।

राणा अय्यूब द्वारा धन के दुरुपयोग का मामला उजागर

ITAT ने पत्रकार राणा अय्यूब के खिलाफ यह टिप्पणी की है कि उन्होंने COVID-19 राहत कार्यों और व्यक्तिगत जरूरतों के लिए क्राउडफंडिंग से जुटाई गई राशि के लिए अलग-अलग बैंक खाते नहीं खोले।

ITAT के अनुसार, ये पैसा उनके पिता और उनकी बहन के व्यक्तिगत खातों में भेजा गया पहले और दूसरे क्राउडफंडिंग अभियान के दौरान उनके परिवार के सदस्यों के खातों में और तीसरे अभियान के दौरान सीधे उनके अपने खाते में।

राणा अय्यूब ने दावा किया कि वह इन पैसों का इस्तेमाल खुद के लिए नहीं किया हैं, लेकिन ITAT ने कहा कि यह साबित नहीं किया जा सकता क्योंकि उन्होंने धन को निजी खातों में मिलाकर रखा और कोई अलग खाता नहीं बनाया।

उन्होंने यह भी कहा कि केट्टो प्लेटफॉर्म पर लाभार्थी की पहचान स्पष्ट थी, लेकिन चूंकि पैसा सीधे उनके और उनके परिवार के खातों में गया, यह दलील भी स्वीकार नहीं की गई। ITAT ने यह भी बताया कि जब आयकर विभाग ने इस पर सवाल उठाए, तो राणा अय्यूब ने क्राउडफंडिंग से प्राप्त पूरी राशि को ‘अन्य स्रोतों से आय’ के रूप में घोषित कर दिया।

उन्होंने यह स्वीकार किया कि 2.69 करोड़ रुपये में से केवल 28 लाख रुपये ही राहत कार्यों जैसे कि प्रवासी मजदूरों की मदद, राशन, अस्पताल में भर्ती, परिवहन और पश्चिम बंगाल में बाढ़ पीड़ितों के लिए तिरपाल खरीदने में खर्च किए गए।

ITAT की जाँच में यह भी सामने आया कि राणा अय्यूब ने क्राउडफंडिंग से मिले पैसों में से 19 लाख रुपए का इस्तेमाल अपने निजी खर्चों के लिए किया है। इसके अलावा, 50 लाख रुपए की राशि को अपने नाम से व्यक्तिगत फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में डाल दिया।

ITAT ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर उनकी मंशा वास्तव में राहत कार्यों की थी, तो उन्होंने अपने नाम से इतनी बड़ी FD क्यों करवाई? ITAT ने यह भी बताया कि केट्टो प्लेटफॉर्म पर पहले क्राउडफंडिंग अभियान से राणा अय्यूब को 1.23 करोड़ रुपए मिले थे, लेकिन उसमें से सिर्फ 18 लाख ही राहत कार्यों में खर्च किए गए।

उन्होंने यह तर्क दिया कि बची हुई रकम अस्पताल निर्माण के लिए रखी गई थी, जबकि फंडरेज़िंग के दौरान इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई थी। इसके अलावा, जब उन्हें टैक्स संबंधी कार्रवाई का डर हुआ, तब उन्होंने विदेशी स्रोतों से मिले कुछ धन को वापस लौटा दिया।

लेकिन पहले क्राउडफंडिंग अभियान के एक साल बाद तक वे केवल 18 लाख रुपए के खर्च का ही सबूत दे पाईं। ITAT ने इस आधार पर उनके दावों पर संदेह जताया और कई वित्तीय अनियमितताओं को उजागर किया।

FCRA नियमों का उल्लंघन

ITAT ने यह भी कहा कि राणा अय्यूब ने FCRA, 2010 का उल्लंघन किया है। ITAT के अनुसार, अय्यूब ने खुद को वाशिंगटन पोस्ट के लिए पत्रकार बताया था और FCRA की धारा 3(1)(H) के तहत पत्रकारों को विदेशी दान सीधे अपने खाते में प्राप्त करने की अनुमति नहीं है। ट्रिब्यूनल ने साफ कहा कि पत्रकार होने के नाते राणा अय्यूब को विदेशी फंड सीधे प्राप्त नहीं करने चाहिए थे, इसलिए यह कानून का उल्लंघन माना गया।

धर्मार्थ गतिविधियों के लिए एकत्रित धनराशि अप्रमाणित: आईटीएटी

ITAT  ने बताया कि राणा अय्यूब ने कोविड-19 राहत, झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों और किसानों की मदद के नाम पर धन इकट्ठा किया था, लेकिन यह पूरा दान उनके और उनके परिवार के सदस्यों के निजी बैंक खातों में जमा किया गया।

उन्होंने कोई अलग खाता नहीं खोला और इस धन का इस्तेमाल निजी खर्चों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश के लिए किया गया। बड़ी राशि लंबे समय तक बिना उपयोग के पड़ी रही। ITAT के अनुसार राणा अय्यूब का यह दावा कि यह धन धर्मार्थ कार्यों के लिए इस्तेमाल किया गया, साबित नहीं हो सका है।

जिस तरह से फंड एकत्र किया गया और उसे उनके रिश्तेदारों के खातों में जमा किया गया, इस बात का भी कोई ठोस सबूत नहीं है। ट्रिब्यूनल ने निष्कर्ष निकाला कि यह क्राउडफंडिंग की गई राशि ‘कर छूट’ (tax free) के योग्य नहीं है और इसे उनकी आय माना गया है, जिस पर आकलन वर्ष 2021-22 और 2022-23 में कर लगाया गया है।

दिल्ली, मुंबई, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक… तेजी से पैर पसार रहा कोरोना का नया वेरिएंट, अस्पतालों में बेड-ऑक्सीजन-दवाओं को लेकर BJP सरकार का अलर्ट: संक्रमितों की होगी जीनोम सीक्वेंसिंग

                                                       कोरोना के नए वेरिएंट का संक्रमण बढ़ रहा है।
कोरोना महामारी ने तीन वर्ष के बाद एशिया में एक बार फिर तेजी से पैर पसारना शुरू कर दिया है। दिल्ली में भी कोविड-19 के संक्रमित की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यहाँ कोरोना के 23 सक्रिय मामले मिले हैं।

कोविड-19 के मामलों में लगातार वृद्धि के बाद दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने शनिवार (24 मई 2025) को संक्रमण की स्थिति के बारे में समीक्षा की। मीडिया ब्रीफिंग में उन्होंने कहा कि दिल्ली में अभी तक सामने आए कोरोना संक्रमितों की जाँच रिपोर्ट निजी टेस्टिंग लैब से आई है।

दिल्ली में स्वास्थ्य संस्थानों और अस्पतालों में आने वाले संक्रमितों में कोरोना के वेरिएंट की पहचान के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग की जाएगी। इसके लिए संक्रमितों के नमूने लोकनायक अस्पताल में भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा बढ़ते मामलों को देखते हुए दिल्ली स्टेट हेल्थ डेटा मैनेजमेंट पोर्टल पर भी कोरोना से जुड़ी सभी जानकारियों की दैनिक रिपोर्टिंग को अनिवार्य कर दिया गया है।

अस्पतालों में जारी किया गया अलर्ट

दिल्ली सरकार की ओर से सभी सरकारी और निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को कोविड-19 को लेकर सतर्क रहने के साथ दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत अस्पतालों में बिस्तरों, ऑक्सीजन, कंसंट्रेटर, वेंटिलेटर, दवाइयाँ, बाय-पैप, समेत अन्य जरूरी चीजों की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने की बात शामिल की गई है।
अस्पताल परिसर में मास्क पहनने और अन्य कोरोना के बचाव संबंधी अन्य कदम लागू करने के निर्देश भी शामिल किए गए हैं। बढ़ते मामलों के साथ कोविड ड्यूटी के लिए अस्पताल के कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण देने की एडवाइजरी जारी की गई है।
आईसीएमआर के द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार ही कोरोना संदिग्ध संक्रमितों की जाँच किए जाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके तहत इंफ्लुएंजा लाइक इंफेक्शन (ILI) के 5% और सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (SARI) के 100% मामलों की जाँच अनिवार्य कर दी गई है। इन मामलों की दैनिक रिपोर्टिंग इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म (IHIP) पोर्टल पर दिए जाने की बात भी कही गई है।

कहाँ कितने मामले

दिल्ली के साथ साथ भारत के अन्य राज्यों में भी कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इनमें केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात, हरियाणा और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्य शामिल हैं। केरल में अब तक कोविड के 182 मामले सामने आ चुके हैं। 21 मई तक कर्नाटक में 16 सक्रिय मामले थे। बेंगलुरू में 9 महीने के बच्चे में भी संक्रमण मिला है। 22 मई तक गुजरात में कोरोना के 15 नए मामले सामने आए। हरियाणा के गुरुग्राम और फरीदाबाद में तीन मामले मिले हैं।

300% महँगी खरीदी गई PPE किट, कोविड में जिस केरल मॉडल का ‘लिबरल’ करते थे बखान, उसका CAG ने किया भंडाफोड़: खास कंपनी को पहुँचाया गया फायदा

  केरल में पीपीई किटों की खरीदी में जमकर भ्रष्टाचार, तत्कालीन मंत्री केके शैलजा (फोटो साभार: India Today/TOI)
कोरोना महामारी के दौरान पूरे देश में केरल सरकार के ‘केरल मॉडल’ की खूब तारीफ की गई। केरल की तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा की कार्यशैली को ‘लिबरल गैंग’ ने आदर्श माना। लेकिन अब नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने पिनराई विजयन सरकार के कोविड प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि महामारी के दौरान पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) किट की खरीदारी में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुईं और एक खास कंपनी को फायदा पहुँचाया गया।

CAG की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2020 में सरकार ने केरल मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KMSCL) को PPE किट और अन्य स्वास्थ्य उपकरण खरीदने की विशेष अनुमति दी थी। सरकार ने उस समय PPE किट की अधिकतम दर 545 रूपए प्रति किट निर्धारित की थी, ताकि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके। इसके बावजूद केरल में PPE किट को 1,550 रूपए प्रति किट की ऊँची दर पर खरीदा गया। यह दर सरकारी सीमा से लगभग 300% अधिक थी।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस खरीद प्रक्रिया में सन फार्मा (San Farma) नाम की कंपनी को विशेष लाभ दिया गया। इस कंपनी को 100% भुगतान एडवांस में दिया गया, जबकि अन्य कंपनियों ने कम दर पर किट देने की पेशकश की थी। CAG ने इस प्रक्रिया को गलत ठहराते हुए कहा कि इससे राज्य को 10.23 करोड़ रूपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ा।

रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च और अप्रैल 2020 के बीच ऊँची कीमत पर की गई खरीदारी ने राज्य के संसाधनों पर अनावश्यक दबाव डाला। जहाँ लाखों किट सस्ती दरों पर खरीदी जा सकती थीं, लेकिन महँगे दामों पर 15,000 किट की खरीदी गई। इसके अलावा राज्य में दवाइयों, मेडिकल सामानों का भारी अभाव रहा। केरल में डॉक्टरों की कमी, दवाइयों की कमी भी रही। सीएजी रिपोर्ट में साफ है कि सस्ते दाम पर पीपीई किट देने वाली कंपनियों को कम ऑर्डर दिया गया, जबकि महँगा पीपीई देने वाली कंपनी को एडवाँस में ज्यादा पैसों का भुगतान किया गया और ऑर्डर भी बड़ा दिया गया।

 इस खुलासे के बाद विपक्ष ने सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सरकार पर हमला बोला है। कॉन्ग्रेस के नेता वी.डी. सतीशन ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “कोविड महामारी को लोगों की जान बचाने के बजाय सरकार ने अपनी जेबें भरने का अवसर बना लिया।” उन्होंने यह भी कहा कि यह भ्रष्टाचार मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा की जानकारी में हुआ।

केके शैलजा ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने CAG रिपोर्ट अभी तक नहीं पढ़ी है, लेकिन उस समय की परिस्थितियों को देखते हुए PPE किट की खरीदारी जरूरी थी। उन्होंने कहा कि “महामारी के दौरान PPE किट की भारी कमी थी। कुछ किट महँगे दाम पर खरीदने पड़े, लेकिन लाखों किट सस्ते दामों पर खरीदी गईं।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि जब यह मामला विधानसभा में उठाया गया था, तब इसका स्पष्ट उत्तर दिया गया था। उन्होंने कहा, “सिर्फ 15,000 किट ऊँची कीमत पर खरीदी गई थीं, और यह उस समय की परिस्थितियों की वजह से हुआ। विपक्ष इस मुद्दे को बार-बार उठाकर लोगों को गुमराह कर रहा है।”

CAG रिपोर्ट ने राज्य के कोविड प्रबंधन के दौरान हुए वित्तीय दुरुपयोग को उजागर करते हुए इसे ‘गैर-जरूरी खर्च’ बताया है। रिपोर्ट ने संकेत दिया कि खरीदारी के दौरान पारदर्शिता की कमी थी और कुछ कंपनियों को गलत तरीके से लाभ दिया गया।

इस बीच, राज्य सरकार ने CAG रिपोर्ट पर विस्तार से जवाब देने की बात कही है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा है कि “रिपोर्ट का गहन अध्ययन किया जाएगा, और जरूरत पड़ी तो सरकार उचित जवाब देगी।” वहीं, विपक्ष ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाने की योजना बनाई है और इसे विधानसभा में फिर से उठाने का इरादा जाहिर किया है। फिरलहाल, CAG रिपोर्ट के इस खुलासे ने न केवल केरल सरकार के कोविड प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उन प्रशंसाओं और पुरस्कारों पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है जो महामारी के दौरान राज्य सरकार को मिले थे।

‘Disease X’ को लेकर WHO की चेतावनी : दुनिया पर कोरोना से 20 गुना खतरनाक महामारी का साया

                          कोविड-19 से 20 गुना खतरनाक है डिजीज-एक्स (साभार इंडिया.कॉम)
दुनिया पर कोविड-19 से भी 20 गुना अधिक घातक बीमारी का खतरा मंडरा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेताया है कि डिजीज एक्स (Disease X) को लेकर पहले से सावधानी नहीं बरती गई तो ये कहर बरपाएगी।

एक पुरानी कहावत है कि ‘रोकथाम इलाज से बेहतर है’ और ये डिज़ीज़ एक्स पर सटीक बैठती है। डिजीज एक्स इस बात का प्रतिनिधित्व करता है कि एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय महामारी एक रोगज़नक़ (Pathogen) की वजह से हो सकती है। हालाँकि, वर्तमान में इंसानों में बीमारी पैदा करने वाला ये रोगजनक अज्ञात है। आइए इसी खतरनाक बीमारी के बारे में यहाँ जानने की कोशिश करते हैं।

डिज़ीज़ X ने हिला दिया मेडिकल जगत को

कॉलिशन फॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशन (सीईपीआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रिचर्ड हैचेट ने डिजीज एक्स के बारे में कहा, “यह साइंस फिक्शन की तरह लग सकता है, लेकिन डिजीज एक्स एक ऐसी चीज है जिसके लिए हमें तैयार रहना चाहिए।”
उन बीमारियों की सूची में जिन्हें WHO अनुसंधान और विकास के मामले में सबसे अधिक प्राथमिकता देता है उन रोगों में डिजीज एक्स ने इबोला, जीका और कोरोनो वायरस 2019 (कोविड-19) जैसी बीमारियों के बीच अपनी जगह पक्की कर ली है। संक्रामक रोग (डिज़ीज़ एक्स) के अप्रत्याशित प्रकोप ने बार-बार चिकित्सा जगत के विश्वास को हिलाने के साथ ही हैरानी में डाल दिया है।
कुछ विशेषज्ञों ने यहाँ तक कहा है कि गंभीर सांस के रोग वाला कोरोना वायरस, वायरस-2 (SARS-CoV-2) की वजह से होने वाला COVID-19, पहली डिजीज X.4 के मानकों पर खरा उतरता है।
वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ये जीका डिजीज X.5 है। ऐसे में एक संभावना यह भी है कि COVID-19 और अन्य हालिया महामारियों में डिजीज X सबसे खतरनाक होने जा रही है।
तीन साल से अधिक की छोटी और बड़ी लहरों के साथ कोरोनो वायरस अब काफी कम हो गया है और एक जानी पहचानी सेहत संबंधी फिक्र वाली लिस्ट में आ गया है।
ऐसा माना जाता है कि डिजीज X “डिजीज X” की वजह से होता है। ऐसा रोगज़नक़ एक ज़ूनोसिस होने की उम्मीद है यानी ऐसी बीमारी जो जानवरों से इंसानों में फैल सकती है। सबसे अधिक संभावना इसके एक आरएनए वायरस होने की है।
आरएनए वायरस ऐसा वायरस होता है जिसके अनुवांशिक जीनोम का निर्माण आरएनए नाभिकीय अम्ल से हुआ हो। यह नाभिकीय अम्ल आमतौर पर एक रेशे में संगठित होता है।
यही वजह है कि आरएनए वायरस की उत्परिवर्तन दर (Mutation Rate) डीएनए वायरस के मुकाबले काफी अधिक होती है। जिसकी वजह से इसमें आनुवंशिक विविधता आ जाती है और इसके खिलाफ प्रभावी टीके का निर्माण करना काफी मुश्किल हो जाता है।
ऐसा इसलिए है क्योंकि कोरोना वायरस में आनुवंशिक तौर से एक “प्रूफरीडिंग मेकनिज़्म” (Proofreading Mechanism) पाया जाता है जो प्रतिकृति (Replication) के दौरान की गई कुछ गलतियों को ठीक कर म्यूटेट होता रहता है।
उभरते हुए ज़ूनोटिक रोगज़नक़ एक खतरा हैं जिनकी निगरानी करने की जरूरत है। इस महामारी रोगज़नक़ की संभावना को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
डिज़ीज़ एक्स जैसे रोगज़नक़ों की रिलीज या तो प्रयोगशाला दुर्घटनाओं के जरिए से या जैव आतंकवाद के तौर पर विनाशकारी हो सकती है। इस वजह से भी डीजीज एक्स को एक वैश्विक विनाशकारी जोखिम के तौर पर मार्क किया गया है।
डीएनए वायरस में एक जीनोम होता है जो डीऑक्सीराइबोन्यक्लिक अम्ल से बना होता है। ये वायरस में आमतौर पर डबल-स्ट्रैंडेड डीएनए (डीएसडीएनए) और शायद ही कभी सिंगल-स्ट्रैंडेड डीएनए (एसएसडीएनए) होता है। ये वायरस डीएनए-निर्भर डीएनए पोलीमरेज़ का इस्तेमाल करके कॉपी बनाते हैं।
यही वजह है कि अब, यूनाइटेड किंगडम में स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर संभावित नई महामारी ‘डिज़ीज़ एक्स’ के लिए तैयारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ये नया वायरस कोविड-19 से भी अधिक घातक हो सकता है और इसका असर स्पैनिश फ़्लू की तरह हो सकता है।

‘डिज़ीज़ एक्स’ क्या है?

डब्ल्यूएचओ ने संभावित अगली महामारी को डिजीज एक्स करार दिया और कहा कि ये पहले से ही फैलने की राह पर हो सकती है। साल 2020 में मई से दिसंबर तक यूके के वैक्सीन टास्कफोर्स की अध्यक्षता करने वाली स्वास्थ्य विशेषज्ञ केट बिंघम के मुताबिक, डिजीज एक्स में कोविड-19 के मुकाबले 20 गुना अधिक मौत (लगभग 50 मिलियन यानी 5 करोड़ मौत) की क्षमता हो सकती है।
उन्होंने आगे कहा, “1918-19 फ्लू महामारी ने दुनिया भर में कम से कम 50 मिलियन लोगों की जान ले ली, जो प्रथम विश्व युद्ध में मारे गए लोगों की तुलना में दोगुना है।”
बिंघम ने कहा, “दुनिया को बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान के लिए तैयार होना होगा और रिकॉर्ड समय में खुराक देनी होगी। कल्पना करें कि रोग एक्स इबोला (67 फीसदी) की मृत्यु दर के साथ खसरे जितना ही संक्रामक है। दुनिया में कहीं न कहीं ये रूप ले रहा रहा है और देर-सबेर इससे कोई न कोई बीमार महसूस करने लगेगा।”
बिंघम का कहना है कि मौजूदा वक्त में ‘डिज़ीज़ एक्स’ के लिए कोई स्वीकृत टीका नहीं है। वैज्ञानिकों द्वारा प्रत्येक खतरनाक वायरस परिवार के लिए अलग-अलग प्रोटोटाइप टीकों का एक संग्रह विकसित करने के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि घातक वायरस के लिए टीकों पर एक शुरुआत ही इसकी विशिष्ट विशेषताओं को टारगेट करने में मदद कर सकती है।
केट ने उस खतरे के बारे में बात की जो करीब दस लाख अनदेखे वायरस इंसानों पर डाल सकते हैं। उनके के अनुसार, वैज्ञानिकों ने 25 वायरस परिवारों की पहचान की है, जिसमें हजारों व्यक्तिगत वायरस शामिल हैं जबकि लाखों अन्य वायरस अभी भी खोजे जाने बाकी हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने कहा कि इससे बचने के लिए उठाए जाने वाले शुरुआती कदमों में से एक जरूरी चीज वित्तीय संसाधनों का निर्धारण करना है।
उनका कहना था कि अगर इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया तो इसकी मौद्रिक लागत भूकंप से होने वाले नुकसान के बराबर होगी। जब डिज़ीज़ एक्स से भी हल्का वायरस कोविड-19 अन्य नुकसानों के साथ ही सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च दोनों में 16 डॉलर ट्रिलियन का बिल बैठाने में कामयाब रहा है तो डिज़ीज़ एक्स से होने वाला नुकसान उससे भी कई गुना अधिक हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ केट बिंघम ने जानवरों से मनुष्यों में वायरस के फैलने पर भी प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया, “एक वायरस का पूरा उद्देश्य जितना संभव हो उतने मेजबानों में जितनी बार संभव हो अपनी कॉपी बनाना है। इसलिए वे लगातार म्यूटेशन कर रहे हैं और अलग-अलग जानवरों पर हमला कर रहे हैं। वास्तव में, कुछ सबसे खतरनाक वायरस – जैसे कि चेचक, खसरा, इबोला और एचआईवी जानवरों में उत्पन्न हुए और बाद में मनुष्यों के बीच अत्यधिक संक्रामक हो गए।”

क्यों बढ़ रही हैं महामारियाँ?

केट बताती हैं कि वैश्वीकरण के साथ शहरीकरण और प्रकृति का विनाश महामारी की बढ़ती घटनाओं में योगदान दे रहा है। वह इस बात पर जोर देती हैं कि वनों की कटाई, आधुनिक कृषि विधियों का उपयोग और आर्द्रभूमि का विनाश जानवरों से मनुष्यों में संक्रामक रोगों के फैलने के लिए जिम्मेदार हैं क्योंकि जानवरों के आवासों का नुकसान उनको मानव बस्तियों के करीब जाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

चीन : 80% आबादी कोरोना संक्रमित, छिपाए जा रहे मौत के आँकड़े

                                    चीन में कोविड का कहर (साभार: जागरण)
कोविड (Covid-19) की मार झेल रहा चीन परेशान है। चीन ने कहा है कि उसकी 80 प्रतिशत जनसंख्या कोरोना (Corona) से संक्रमित हो चुकी है। अब नई लहर की आशंका कम है। वहीं, चीनी कोविड कार्यकर्ताओं ने एंटीजेन टेस्ट के बॉक्स को सडकों पर फेंक कर अपना विरोध प्रदर्शन किया।

चीन के एक सरकारी वैज्ञानिक ने 21 जनवरी 2023 को कहा कि अगले तीन महीनों में चीन में दोबारा कोविड बढ़ने की संभावना कम है। वैज्ञानिक ने कहा कि इसके पीछे वजह यह है कि यहाँ के 80% लोग संक्रमित हो चुके हैं।

चाईना सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुख्य महामारी वैज्ञानिक ने कहा कि ल्यूनर नव वर्ष की छुट्टियों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने सफर किया। इसके कारण महामारी फैल सकती है और कुछ क्षेत्रों में संक्रमण बढ़ सकता है। हालाँकि, कोविड की नई लहर की आशंका से उन्होंने इनकार किया।

बता में जीरो कोविड पॉलिसी को लेकर वहाँ के लोगों ने भारी विरोध किया था। इसके कारण चीन ने कोविड प्रतिबंधों में ढील थी और बाद में लगभग सारे प्रतिबंध हटा लिए थे। सीमा को एक बार फिर खोल दिया गया। इसके बाद भारी संख्या में लोग मिले।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के एक अधिकारी ने था कि चीन ने क्लीनिक, आपातकालीन कक्ष और गंभीर स्थिति में कोविड मरीजों की संख्या की चरम सीमा को पार कर लिया है। लगातार यहाँ पर मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।

उधर, एक वीडियो सामने आया है, जिसमें कोविड कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे है। मामला दक्षिण-पश्चिमी चीन के चोंगकिंग शहर का है। यहाँ कार्यकर्ताओं ने रैपिड एंटीजन टेस्ट के बॉक्स को लात मारकर जमीन पर फेंक दिया, जिससे हजारों टेस्ट फैल गए।

चीन ने कहा था कि इस लहर में 60 हजार लोगों की मौत हुई है। हालाँकि, विशेषज्ञ इन सरकारी आँकड़ों को सही नहीं मान रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह आँकड़ा केवल अस्पताल में मरने वालों का है। लोग लोग कोविड से संक्रमित होकर घर में मर जाते हैं, उनकी गिनती नहीं की जाती है।

दिल्ली की सल्तनत मांग रही नए किस्म का ऑड-ईवन


दिल्ली सल्तनत इसलिए कहा जा रहा है कि लगता है की अरविन्द केजरीवाल की सरकार अकबर के दीन-ए-इलाही पर काम रही है, जिसे हिन्दू की मौत नज़र नहीं आती, लेकिन इनके गरीब, मजलूम, शांतिप्रिय की मौत होने पर दिल्ली से बाहर कहीं भी पहुँच जाते हैं, वोट और समर्थन हिन्दू का चाहिए। हिन्दू होने के नाते इनको मालूम है कि इसे मुफ्त की रेवड़ियां दे दो, पिटने के बावजूद जी-हजूरी करता रहेगा। दिल्ली में लाल कुआँ और पश्चिम दिल्ली में हिन्दू विरोधी दंगे होने पर दंगाइयों को बचाने में लगे हैं। आरोपियों पर देशद्रोही मुकदमा चलाने के लिए दिल्ली पुलिस को इजाजत देने में आनाकानी कर रहे हैं। मुस्लिम वोट बैंक का सवाल है भाई, कैसे जाने दूँ, कांग्रेस या किसी और के हाथ में।  
दिल्ली के विवादित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सुर्खियों में बने रहने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। देश में कोरोना महामारी का प्रकोप जारी है, ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से तमाम तरह की सावधानियां बरती जा रही हैं। लेकिन केजरीवाल और उनकी सरकार इसमें भी मसखरी करने से बाज नहीं आ रही है। आपने देखा होगा कि दिल्ली में प्रदूषण खत्म करने को लेकर इन्हीं केजरीवाल साहब ने ऑड-ईवन का फॉर्मूला लागू किया था। लगता है अब कोरोना की रियायतों को लेकर भी वे ऑड-ईवन फार्मूले पर ही चल रहे हैं।
23 अगस्त यानि ऑड डे पर केजरीवाल ने केंद्र सरकार से दिल्ली में मेट्रो चलाने की मांग कर डाली। उन्होंने कहा कि दिल्ली में चरणबद्ध तरीके से मेट्रो चलाई जाए।
26 अगस्त यानि ईवन डे पर दिल्ली सरकार में डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने मांग की कोविड को देखते हुए NEET/JEE की परीक्षा स्थगति कर दी जाए। और किसी अन्य तरीके से परीक्षा ली जाए।
देखिए जब मेट्रो चलाने की मांग करते हैं तो कोरोना का खौफ खत्म हो जाता है, लेकिन जब परीक्षा स्थगित करने की मांग करते हैं, इन्हें कोरोना वायरस का डर सताता है। यह वो दोगलापन है केजरीवाल की सरकार जो दिल्लीवालों को कदम-कदम पर देखने को मिल रहा है।

जमीन पर सो रहे गरीब मरीज, लेकिन लालू यादव RIMS में ‘स्पेशल 18 कमरे में

Lalu who is being treated at RIMS will be threatened by window ...
राँची में यूँ तो लालू यादव कहने के लिए बिरसा मुंडा कारागार में कैद हैं लेकिन पिछले कई महीनों से बीमारी के कारण वो RIMS में ही डेरा डाले हुए हैं। झारखण्ड में जब हेमंत सोरेन ने विधानसभा चुनाव जीता था तो उन्होंने RIMS जाकर लालू यादव का आशीर्वाद लिया था। ऐसे में RIMS में लालू यादव की खातिरदारी के लिए झारखण्ड सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं, ऐसा विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है।
RIMS में पहले 100 बेड्स का कोविड वार्ड बनाया गया था। चूँकि मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और वो जैसे ही 135 तक पहुँची, RIMS ने अपने मेडिसिन वार्ड को भी कोविड केयर में बदल दिया। इस तरह गंभीर कोरोना मरीजों के लिए 172 बेड्स रखे गए हैं। लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि लालू यादव के वार्ड में एक भी मरीज नहीं है। इस पर राज्य के विपक्षी नेता खफा हैं।
यहाँ तक कि पेइंग वार्ड में भी मरीज है लेकिन लालू यादव का वार्ड खाली है। झारखण्ड के पूर्व-मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिख कर इस सम्बन्ध में सवाल खड़ा किया है। मरांडी ने कहा कि जहाँ एक तरफ मरीजों को RIMS में बेड्स नहीं मिल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लालू यादव की सुरक्षा का बहाना बना कर 18 कमरों को बंद कर दिया गया है। उन्होंने पूछा कि किसकी शह पर ऐसा किया जा रहा है?


उन्होंने पूछा कि 18 कमरों को बेवजह क्यों बंद रखा गया है? झारखण्ड में भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जिस राज्य में कोरोना महामारी का संक्रमण इतनी तेज़ी से फ़ैल रहा हो, वहाँ इस तरह की चीजें सही नहीं हैं। उन्होंने ध्यान दिलाया कि अगर एक कमरे में 2 मरीज भी होते तो इन कमरों में लगभग 40 मरीजों का इलाज किया जा सकता है लेकिन लालू यादव पूरी जगह खाली रखी गई है।
मरांडी ने आरोप लगाया कि प्रशासन और सरकार में कुछ लोग लालू यादव की सुरक्षा के नाम पर ये मनमानी कर रहे हैं। हालाँकि, बाबूलाल ने ये भी अंदेशा जताया कि ये सब कुछ लालू यादव को बिना बताए किया गया हो और हो सकता है कि उन्हें इसका पता चले तो वो इसका विरोध करें। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ध्यान में भी ये बात नहीं है तो उन्हें संज्ञान लेते हुए तुरंत सभी कमरों को खाली कराना चाहिए।
RIMS में भर्ती बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव का कोरोना टेस्ट भी किया गया है, जिसके रिजल्ट्स रविवार (जुलाई 26, 2020) को आने की सम्भावना है। कोरोना वायरस संक्रमण के लिए उनका नमूना लेकर जाँच के लिए भेजा गया है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि लालू यादव में कोरोना के कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं लेकिन एहतियात के रूप में उनका कोरोना टेस्ट कराया जा रहा है।

जो भी जमाती कोरोना पॉजिटिव होंगे, उनके ख़िलाफ़ दर्ज होगा केस : हेमंत विश्व शर्मा, असम मंत्री

हेमंत विश्व शर्मा, कोरोना वायरस, असम
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
कोरोना वायरस से असम अभी तक काफ़ी हद तक बचा हुआ था लेकिन तबलीगी जमात वालों के कारण अब उत्तर-पूर्वी राज्यों में भी स्थिति बिगड़ रही है। असम के मंत्री हेमंत विश्व शर्मा ने इस सम्बन्ध में जानकारी दी है। केंद्र सरकार द्वारा दी गई सूचनाओं और राज्य सरकार के डेटा का मिलान करने के बाद पता चला है कि असम के 831 मुसलमानों ने दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ बिल्डिंग में आयोजित तबलीगी जमात के मजहबी कार्यक्रमों में शिरकत की थी। इसके बाद राज्य में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, ताकि उन सभी का पता लगाया जा सके।
असम सरकार ने अब तक 491 सैम्पलों को एकत्रित कर लिया है, अर्थात इतने लोगों की पहचान हो चुकी है। बाकी बचे लोगों की पहचान के लिए राज्य सरकार विभिन्न मस्जिद कमिटियों से संपर्क साध रही है। शर्मा ने बताया कि सभी के सैम्पल एकत्रित करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही उन्होंने बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि आगे से जो भी ऐसे कोरोना मरीज मिलेंगे, जिन्होंने तबलीगी जमात के मजहबी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया होगा, उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया जाएगा।
चर्चा है कि असम सरकार ने छिपे हुए तब्लीग़ियों को अप्रैल 7 की सुबह 8 बजे तक सामने आने को कहा है, अन्यथा सरकार को उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही करनी होगी। असम सरकार की तर्ज पर हरियाणा सरकार ने मस्जिद और मदरसों में छिपे तब्लीग़ियों के बाहर आकर आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी है। ऐसे में एक प्रश्न और होता है कि जिस प्रकार तब्लीग़ियों द्वारा कोरोना फैलाकर लोगों की जान खतरे में डालने का काम कर रहे हैं, मानवाधिकार क्यों नहीं सामने आता? क्या यह मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं?
From now onwards, we will file a case against all those who attended the Tablighi Jamaat event in Delhi and who test positive for : Assam Minister Himanta Biswa Sarma https://twitter.com/ANI/status/1247092612584157186 
असम में अब तक कोरोना वायरस से संक्रमण के 26 मामले सामने आ चुके हैं। राहत की बात ये है कि वहाँ किसी की भी इस संक्रमण से मृत्यु नहीं हुई है। पूरे भारत की बात करें तो अब तक कोरोना के 4375 मरीज सामने आए हैं। इनमें से 329 ठीक होकर घर जा चुके हैं, जबकि 122 लोगों की मृत्यु हुई है। इस हिसाब से कोरोना वायरस के अभी फ़िलहाल 3924 सक्रिय मामले हैं। महाराष्ट्र में सर्वाधिक 781 तो तमिलनाडु में 571 मामले आए हैं। दिल्ली 503 मामलों के साथ तीसरे नंबर पर है। तबलीगी जमात वाली घटना के बाद से अचानक से कोरोना के संक्रमण के आँकड़ों में उछाल आया है।
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मौलाना महफूज उर रहमान आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार नियम-कानूनों को ताक पर रख दिल्ली के निजामुद्दीन में मजहबी सम्म.....
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लगता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अध्यात्म द्वारा कोरोना वैश्विक बीमारी से मुक्ति मार्ग पसंद नहीं आ रहा। ...
असम सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए सभी पुलिस के जवानों, सरकारी कर्मचारियों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए 50 लाख के बीमा कवर की घोषणा की है। पीएम मोदी पहले ही देश भर में ऐसे इंश्योरेंस कवर की घोषणा की है लेकिन सर्वानंद सोनोवाल की सरकार ने पुलिसकर्मियों को भी इसके दायरे में लिया है क्योंकि कोरोना से निपटने वालों में वो भी पहली पंक्ति पर ही खड़े हैं। मुख्यमंत्री सोनोवाल ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने जनता के विश्वास को जीतने में सफलता प्राप्त की है, जिसके कारण कोरोना से निपटने में आसानी हो रही है।

क्वारंटाइन में भेजे गए इटली से लाए गए 263 भारतीय

भारतीय छात्र
इटली से लाए गए भारतीय छात्र (साभार: बिजनेस स्टैंडर्ड )
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को बताया कि देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 327 हो चुकी है।दिल्ली में ही कोरोना वायरस के मामले बढ़कर 27 तक पहुँच गए हैं। इस लड़ाई में आज प्रधानमंत्री द्वारा बुलाया गया ‘जनता कर्फ्यू’ एक अहम पड़ाव साबित हो सकता है। इन सबके बीच कोरोना की मार से बेहाल इटली से आज 263 भारतीय छात्रों को लेकर एयर इंडिया का एक विशेष जहाज भारत पहुँच चुका है।
इटली से भारतीय छात्रों को ला रही फ्लाइट रविवार सुबह दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरी। थर्मल स्क्रीनिंग और इमिग्रेशन के बाद इन सभी छात्रों को आईटीबीपी छावला कैंप में क्वारेंटाइन फैसिलिटी में भेज दिया गया है। स्वास्थ्य सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि अब तक दूसरे देशों से 1600 भारतीयों की देश वापसी हो चुकी है। इन्हें हम अपने क्वारंटाइन सेंटर में सेवाएँ दे चुके हैं। आज रोम से आने वाले 263 यात्रियों को भी हम क्वारंटाइन सेंटर में रखेंगे। इनमें से अधिकतर छात्र हैं।

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में केंद्र व राज्य सरकारें कोई भी कसर बाकी नहीं छोड़ रहीं। उड़ीसा और महाराष्ट्र द्वारा कुछ शहरों को लॉक डाउन किए जाने और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस तरह के कदम उठाने के संकेत के मध्य राजस्थान और पंजाब ने 31 मार्च तक टोटल लॉकडाउन का निर्णय लिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने राज्य की जनता से कोरोना वायरस से लड़ने में प्रशासन की मदद करने की भी अपील की है।



पंजाब को पूरी तरह लॉक डाउन करने का निर्णय लेने के पहले अमरिंदर सरकार ने राज्य के कुछ जिलों जालंधर, संगरूर आदि को बंद करने का फैसला लिया था। लेकिन कोरोना संक्रमण के फैलते जाने के बाद राज्य सरकार ने 31 मार्च तक के लिए पूरे राज्य को लॉकडाउन करने का फैसला लिया है। खबरों के अनुसार इस दौरान सब्जी, दूध की दुकानों के साथ-साथ मेडिकल स्टोर आदि दैनिक जरूरतों की दुकानें खुली रहेंगी।
पंजाब में अब तक कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या 13 हो चुकी है, जिसमें से एक मरीज की मौत भी हो चुकी है। शनिवार को नवांशहर के पहले कोरोना पॉजिटिव मरीज की मौत होने के साथ ही उसके परिवार के छह लोगों का टेस्ट भी पॉजिटिव आया है। सभी मरीजों को नवांशहर के सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करवाया गया है।
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ये है दिल्ली का जामा मस्जिद क्षेत्र आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारतीय राजनीतिक दलों और मीडिया को चीन से सीखना चा....
पंजाब के साथ साथ राजस्थान की गहलोत सरकार ने भी कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए रविवार से 31 मार्च तक टोटल लॉकडाउन का ऐलान कर दिया है। इस लॉकडाउन के दौरान सभी सरकारी और निजी दफ्तर, मॉल, फैक्ट्री, पब्लिक ट्रांसपोर्ट आदि बंद रहेंगे जबकि सब्जी, दूध जैसी रोज की जरूरत की दुकानें और मेडिकल स्टोर खुले रहेंगे।