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दिल्ली : कांग्रेस के आक्रामक रुख से क्यों घबराए केजरीवाल? कांग्रेस की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भ्रष्टाचारी बता जेल भेजने वाले आज अपने घोटालों के उजागर होने से क्यों डर रहे हैं? कांग्रेस की नैया डुबोने वाले केजरीवाल हैं बीजेपी नहीं


दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले INDI गठबंधन के साथी आम आदमी पार्टी(AAP) और कांग्रेस के बीच खींचतान बढ़ गई है। आम आदमी पार्टी ने कहा कि गठबंधन से कांग्रेस को हटाने के लिए वह इंडिया ब्लॉक के अन्य दलों से बातचीत करेगी। दरअसल, दिल्ली विधानसभा चुनावों में अलग-अलग मैदान में उतरी कांग्रेस ने AAP पर जनता को धोखा देने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। इतना ही नहीं, हाल ही में कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा अरविंद केजरीवाल को राष्ट्र विरोधी कह दिया। माकन ने कहा कि साल 2013 में AAP को समर्थन देने के कारण दिल्ली में पार्टी का पतन हुआ।

दिल्ली और पंजाब से कांग्रेस का सूपड़ा साफ करने कितने आरोप लगाए थे, केजरीवाल भूल गए क्या? कांग्रेस को जितना नुकसान आम आदमी पार्टी ने पहुँचाया है, बीजेपी ने नहीं। दरअसल, केजरीवाल को बौखलाहट इस बात से है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को जेल भेजने का वायदा कर सत्ता तो ले ली, शीला को जेल नहीं भेज नहीं पाए, कांग्रेस अगर सत्ता में आ गयी निश्चित रूप से आधी से ज्यादा केजरीवाल पार्टी जेल में होगी। दूसरे, कल तक कांग्रेस पर चलाए तीर जब उल्टे तुम्हारे पर चलने से बौखलाहट क्यों? इतना ही नहीं खुद कांग्रेस को बीजेपी की B Team बता रहे हो, कांग्रेस बीजेपी की लिखी स्क्रिप्ट पढ़ रही है। केजरीवाल यह आरोप मामूली नहीं है। बहुत गंभीर है।         

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने अरविंद केजरीवाल को राष्ट्र विरोधी कहने वाले अजय माकन के खिलाफ 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करने के लिए कांग्रेस को अल्टीमेटम दिया है। संजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस के अजय माकन भाजपा की स्क्रिप्ट पढ़ रहे हैं। दिल्ली का चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस अब भाजपा से मदद ले रही है।

वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा कि कांग्रेस के उम्मीदवारों की सूची भाजपा कार्यालय से तय हो रही है। आतिशी ने दावा किया कि संदीप दीक्षित सहित कांग्रेस उम्मीदवारों का चुनाव खर्च भाजपा द्वारा वहन किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने दिल्ली चुनाव के लिए भाजपा के साथ मिलीभगत की है। भाजपा कांग्रेस उम्मीदवारों को धन मुहैया करा रही है। संदीप दीक्षित को भाजपा से धन मिल रहा है।”

मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा, “अगर कांग्रेस सोचती है कि हम (AAP) राष्ट्र विरोधी हैं तो उन्होंने हमारे साथ गठबंधन करके लोकसभा चुनाव क्यों लड़ा? यह स्पष्ट है कि कांग्रेस नेताओं ने आम आदमी पार्टी (AAP) को हराने और दिल्ली में भाजपा को जिताने के लिए भाजपा के साथ कुछ आपसी समझौता किया है।” उन्होंने ऐसे कई सीटों के नाम लिए, जहाँ कांग्रेस नेताओं को बीजेपी द्वारा फंडिंग की गई।

मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा कि संदीप दीक्षित के अलावा जंगपुरा से पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ चुनाव लड़ रहे कांग्रेस प्रत्याशी फरहाद सूरी को भी भाजपा फंडिंग कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सूरी को करोड़ों रुपए का फंड दे रही है। उन्होंने कहा कि अगर अरविंद केजरीवाल देश विरोधी हैं तो लोकसभा चुनावों में अरविंद केजरीवाल से प्रचार क्यों करवाया?

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दिल्ली में कांग्रेस हमलावर, AAP और BJP पर कुप्रबंधन और अधूरे वादों का आरोप, 12 सूत्री श्वेत पत्र जारी;
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दिल्ली में कांग्रेस हमलावर, AAP और BJP पर कुप्रबंधन और अधूरे वादों का आरोप, 12 सूत्री श्वेत पत्र जारी;
नरेंद्र मोदी-योगी विरोध में राहुल गाँधी और परिवार जॉर्ज सोरोस के कदमों में गिर कांग्रेस को ही नुकसान पहुंचाते रहा,... 

दरअसल, AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री आतिशी के खिलाफ युवा कांग्रेस ने जनता को धोखा देने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। दरअसल, केजरीवाल ‘मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना’ और ‘संजीवनी योजना’ के प्रचार कर रहे थे। इसी दौरान दिल्ली सरकार के दो विभागों ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर कहा था कि ये दोनों योजनाएँ अस्तित्व में नहीं हैं। इसके बाद यह शिकायत दी गई।

दिल्ली में कांग्रेस हमलावर, AAP और BJP पर कुप्रबंधन और अधूरे वादों का आरोप, 12 सूत्री श्वेत पत्र जारी; अजय माकन में केजरीवाल पार्टी को धूल चटाने की क्षमता

नरेंद्र मोदी-योगी विरोध में राहुल गाँधी और परिवार जॉर्ज सोरोस के कदमों में गिर कांग्रेस को ही नुकसान पहुंचाते रहा, जबकि अजय माकन दिल्ली में कांग्रेस को मजबूत करने का प्रयास करते रहे। बीजेपी से कहीं अधिक आम आदमी पार्टी के घोटालों को उजागर अजय माकन और इनके सहयोगी करते रहे। माकन शुरू से अरविन्द केजरीवाल के साथ किसी भी स्तर पर कोई समझौता करने का विरोध करते रहे, लेकिन नगारे की आवाज़ में तूती शीर्ष नेतृत्व नज़रअंदाज़ होती रही। अगर कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व दिल्ली चुनावों में माकन के मार्गदर्शन में लड़ेगी, कांग्रेस दिल्ली में अगर सरकार नहीं बना पाएगी अपना पहचान और जनता के दिलों में जगह बना लेगी। 
देखा जाए तो कांग्रेस को बीजेपी ने नहीं आम आदमी पार्टी ने ही गड्डे में धकेला है। माकन तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के विकास कार्यों को जनता को याद करा रहे थे, लेकिन शीर्ष नेतृत्व बीजेपी बीजेपी रोता रहा। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को समझना होगा कि बीजेपी को टक्कर देने के लिए केजरीवाल को दरकिनार करना होगा। शराब घोटाले और अन्य घोटालों पर जितना अजय माकन केजरीवाल पार्टी को धूल चटाने की क्षमता रखते हैं, बीजेपी नहीं। दिल्ली में केजरीवाल की हार का मतलब होगा दिल्ली में कांग्रेस को जीवन, और आम आदमी पार्टी का पतन। 
इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि केजरीवाल पार्टी ही ऐसी पार्टी है जिसने दिल्ली और पंजाब से बाहर जमानत जब्त ही नहीं कई क्षेत्रों में NOTA से भी कम वोट लेने वाली अनोखी पार्टी है। अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए INDI गठबंधन में शामिल होने और रहने के लिए सिर पटकता रहा। जिसे गाँधी परिवार नहीं समझ सका।     
दिल्ली कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए एक 12-सूत्रीय श्वेत पत्र जारी किया है। इस श्वेत पत्र में प्रदूषण, नागरिक सुविधाओं और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर दोनों पार्टियों की आलोचना की गई है। कांग्रेस ने इसे मौका मौका, हर बार धोखा शीर्षक दिया है। जिसमें दिल्ली और केंद्र सरकार पर कुप्रबंधन और जनविरोधी नीतियों का आरोप लगाया गया है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एआईसीसी कोषाध्यक्ष अजय माकन ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को फर्जीवाल कहते हुए उन्हें धोखाधड़ी का राजा करार दिया। माकन ने आरोप लगाया कि जन लोकपाल आंदोलन से सत्ता हासिल करने वाले केजरीवाल भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल की स्थापना करने में असफल रहे।
उन्होंने कहा कि पंजाब में आप की पूर्ण सरकार है। फिर भी जन लोकपाल लागू क्यों नहीं किया गया। अगर दिल्ली में उपराज्यपाल इसे रोक रहे हैं तो केजरीवाल पंजाब में इसे लागू क्यों नहीं करते। माकन ने कहा कि आप ने दिल्ली को लंदन जैसा बनाने का वादा किया था। लेकिन इसके बजाय राजधानी आज प्रदूषण में नंबर एक बन गई है।
भाजपा पर भी निशाना
अजय माकन ने भाजपा सरकार की भी आलोचना की और केंद्र पर दिल्ली के मुद्दों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा और आप दोनों की नीतियों ने दिल्ली को एक संकटग्रस्त शहर बना दिया है।
आप-कांग्रेस गठबंधन पर सवाल
अजय माकन ने 2013 में आप को दिए गए कांग्रेस के समर्थन को एक गलती करार दिया। उन्होंने कहा कि आप के साथ गठबंधन से कांग्रेस कमजोर हुई और दिल्ली की वर्तमान समस्याओं में योगदान दिया। अब समय आ गया है कि इस गलती को सुधारा जाए। उन्होंने हाल के गठबंधनों पर भी पुनर्विचार की आवश्यकता जताई। यह स्वीकार करते हुए कि ये गठबंधन कांग्रेस के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के प्रमुख नेता शामिल थे। जिनमें एआईसीसी दिल्ली प्रभारी काजी मोहम्मद निजामुद्दीन, दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव, सह-प्रभारी दानिश अबरार और सुखविंदर सिंह डैनी शामिल थे।
राजनीतिक हलकों में हलचल
इस श्वेत पत्र ने दिल्ली की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस ने आप और भाजपा दोनों पर शासन और जनता के मुद्दों को हल करने में असफल रहने का आरोप लगाया है। हालांकि आप और भाजपा की ओर से इस पर कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई है।
जैसे-जैसे 2025 के चुनाव नज़दीक आ रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस का यह आक्रामक रुख उसे दिल्ली में पुनर्जीवित करने में कितना कारगर साबित होता है।

केजरीवाल को फंसा दिया सिंघवी ने ; मोदी जी की भ्रष्टाचार पर चोट से अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल के वारे न्यारे हो रहे हैं ; तर्क हों या कुतर्क मुकदमे चलते रहें

सुभाष चन्द्र

अप्रैल 9 को केजरीवाल की ED द्वारा उनकी की गई गिरफ़्तारी को अवैध कहने वाली याचिका दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दी और साफ़ कहा कि ED द्वारा गिरफ्तारी सबूतों और जांच के बाद की गई है जो गैर कानूनी नहीं है। 

गिरफ़्तारी को चुनौती देने की सलाह अभिषेक मनु सिंघवी ने क्या सोच कर दी जबकि ऐसी याचिका बेमानी थी जब स्वयं दिल्ली हाई कोर्ट ही पहले ED से सबूत मांग कर देखने के बाद गिरफ़्तारी पर रोक लगाने से इंकार कर चुका था उसी अदालत से सिंघवी कैसे उम्मीद कर सकते थे कि वह कोर्ट गिरफ़्तारी को अवैध कहेगा लेकिन फिर भी गिरफ़्तारी को चुनौती दी और नतीजा वही हुआ जो कोई भी सोच सकता था। 

लेखक 
अपने electronic devices का पासवर्ड नहीं देने के पीछे बहुत गहरा राज है। इसे डर है कि पूरे परिवार के तिहाड़ में आने के बाद, कोई बाहर नहीं आ पाएगा। पूरी पार्टी और समर्थक इससे दूरी बनाकर दूध में से मक्खी की तरह फेंक देंगे। कोई प्रदर्शन करने की सोंचे का भी नहीं। 

केजरीवाल कितना बड़ा बेपेंदी का लौटा है, इसके सार्वजनिक बयानों, जो सोशल मीडिया पर वायरल हैं, से समझा जा सकता है। अपने आपको और अपनी पार्टी को ईमानदार दिखाने के लिए दिया करता था, क्यों अब तिहाड़ से बाहर आने के तड़प रहा है? कोर्ट किसी को तिहाड़ कब भेजती केजरी को नहीं नहीं मालूम? केजरीवाल ने अपना विश्वास उस दिन ही खो दिया था जब इसने बच्चों की कसम खाकर कांग्रेस से समर्थन लेकर सरकार बना ली थी। दूसरे, कांग्रेस की जिस तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को जेल भेजने के लिए 370 सबूत लिए हर चुनावी रैली में दिखाया करता था, दीक्षित को तो जेल नहीं भेज पाया, लेकिन उसी कांग्रेस के अजय माकन की एक ही शिकायत ने केजरीवाल को ही जेल करवायी, बल्कि पूरी ही इसकी पार्टी को घोर संकट में डाल इसे किसी गहरे गंदे नाले में फेंकने की तैयारी कर दी है।   

  

इसके पहले केजरीवाल से सिंघवी द्वारा 8 summons पर ED के सामने पेश न होकर सभी 9 summons की वैधता को हाई कोर्ट में चुनौती दिलवाने का क्या औचित्य था क्योंकि उससे तो साफ़ जाहिर हो गया कि केजरीवाल जानबूझकर summons की अनदेखी कर रहा था फिर सिंघवी ने एक और औचित्यहीन तर्क दिया कि केजरीवाल पेश होगा लेकिन एक शर्त पर होगा  कि उसकी गिरफ़्तारी नहीं होगी दिल्ली हाई कोर्ट के जजों ने ED से केजरीवाल के खिलाफ सबूत मांगे जिन्हे देख कर जजों को खुद कहना पड़ा कि इसे अभी तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया हाई कोर्ट ने गिरफ़्तारी पर रोक न लगा कर एक तरह अनुमति दे दी कि ED गिरफ्तार कर सकती है

अब गिरफ़्तारी को चुनौती देकर उस पर बहस करते हुए वही पुराना राग अलापा कि कोई पैसा नहीं मिला और बिना जांच और सबूतों के केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया है वह भी चुनाव के समय जिससे उसे बदनाम किया जा सके और पार्टी को ख़त्म कर दिया जाए ऐसी बातें भला कानून की नज़र में कैसे सही मानी जा सकती हैं क्योंकि उनका गिरफ़्तारी के आधार से कोई लिंक नहीं है 

सिंघवी को शायद लग रहा था कि उनके अकेले के बस की बात नहीं है केस लड़ना और इसलिए बॉम्बे के वकील अमित देसाई को भी बुला लिया 

सिंघवी चुनाव का रोना रो रहे थे केजरीवाल के लिए जबकि उन्हें पता था कि यह भी एक कुतर्क है जो चलेगा नहीं क्योंकि सत्येंद्र जैन, सिसोदिया और संजय सिंह जब गिरफ्तार हुए थे तब तो कोई चुनाव नहीं थे केजरीवाल को जब पहला summon अक्टूबर, 2023 में दिया गया था तब तो लोकसभा चुनाव नहीं थे नवंबर में 3 राज्यों के चुनाव थे लेकिन उसके बाद भी केजरीवाल पेश नहीं हुआ सिंघवी केजरीवाल की तरफ से कोई कानूनी पैरवी नहीं कर रहे थे बल्कि एक Political Theory पर ज्ञान पेल रहे थे जिसका कोई औचित्य नहीं था

केजरीवाल और इसकी पार्टी को मालूम है कि शराब और पानी घोटाले से ज्यादा घोटाले तो सत्ता से बाहर होने पर कितने लोग जेल में निवास करने को विवश होंगे, कोई नहीं आएगा बचाने वाला। सिंघवी और कपिल जैसे पागल बनाकर इन सबको लूटते रहेंगे। 

हेमंत सोरेन की गिरफ़्तारी का मामला लेकर कपिल सिब्बल सीधा सुप्रीम कोर्ट चला गया था जबकि उसे पता था पहले हाई कोर्ट जाने की जरूरत थी जब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट जाने को कहा तो सिब्बल का बयान था कि अब हमें सीखना पड़ेगा किस मामले में हाई कोर्ट जाना होगा  और किसके लिए सुप्रीम कोर्ट अब 50 साल की प्रैक्टिस के बाद भी तुम्हे इतना नहीं पता तो तुम वकील केवल पैसा बनाने की मशीन हो

तमिलनाडु के 5 DMs की ED के सामने पेश न होने पर सुप्रीम कोर्ट बहुत खफा हुआ और उनके सामने सिब्बल ने कुतर्क दिया कि जो information ED उनसे मांग रही है वह कह चुके हैं कि उनके पास नहीं है, फिर पेशी का क्या मतलब कोर्ट ने कहा कि ED किसी को भी बुला सकती है और 25 अप्रैल को पेश हों वरना कार्रवाई होगी

सिब्बल अपने घर के कानून चलाना चाहते हैं उन्हें पता होना चाहिए कि अगर DMs के पास सूचना नहीं है तो वे यह उन्हें ED के सामने बयान दर्ज करा कर कहना होता है क्योंकि ED के सामने दिया बयान एक हलफनामा होता है जिससे कोई मुकर नहीं सकता

सील हो सकता है AAP का ऑफिस: 10 दिन में 164 करोड़ रूपए जमा करने का निर्देश; माकन जी मेहनत रंग लाई

जिस कांग्रेस पर भ्रष्टाचारी होने का आरोप लगा और तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के विरुद्ध 370 आरोप लेकर घूम जनता को भ्रमित कर सत्ता हथियाने वाले अरविन्द केजरीवाल को भाजपा नहीं कांग्रेस ठिकाने लगाएगी। कांग्रेस को भाजपा ने नहीं कांग्रेस पोषित केजरीवाल पार्टी ने ही नुकसान पहुँचाया है। कांग्रेस नेता अजय माकन एक चोट तो मारने में सफल हो गए हैं, बस कांग्रेस अध्यक्ष खड़के से समस्त पार्टी के लिए एक आदेश करवा दें, कोई कांग्रेस कार्यकर्ता एवं समर्थक किसी भी सूरत में आम आदमी पार्टी को वोट नहीं देगा। क्योकि जहाँ-जहाँ कांग्रेस कमजोर हुई है, केजरीवाल पार्टी हावी हुई। केजरीवाल पार्टी के औंधे मुंह गिरने से कांग्रेस मजबूत होगी। जो एक लोकतंत्र के लिए जरुरी है। 

माकन को दिल्ली शराब घोटाले पर भी पेनी नज़र रखनी होगी। पंजाब कांग्रेस को भी केजरीवाल सरकार को नज़रअंदाज नहीं करना होगा। माकन को इस चोट की गूंज समस्त भारत में पहुंचा कर क्रांति लानी होगी। 

दिल्ली में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी (AAP) के सामने दफ्तर सील होने का खतरा पैदा हो गया है। सूचना और प्रचार निदेशालय (DIP) ने करीब 164 रुपए जमा करने का निर्देश पार्टी को दिया है। सूत्रों के अनुसार इसके लिए आपको 10 दिनों का समय दिया गया है। ऐसा नहीं होने पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। यह मामला सरकारी पैसे से राजनीतिक प्रचार करने से जुड़ा है।

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिसंबर 2022 में 97 करोड़ रुपए आप से वसूलने के निर्देश दिए थे। इसे देखते हुए डीआईपी ने 163.62 करोड़ रुपए जमा करने का आदेश दिया है। बताया जा रहा है कि इसमें से 99.31 करोड़ रुपए मार्च 2017 तक का मूलधन है। 64.31 करोड़ रुपए इस पर ब्याज लगाया गया है।

रिपोर्ट्स की मानें तो यदि आम आदमी पार्टी ने तय वक्त पर राशि का भुगतान नहीं किया तो उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। कार्रवाई के तहत AAP की संपत्तियाँ कुर्क हो सकती हैं। यहाँ तक कि दिल्ली स्थित आम आदमी पार्टी का मुख्यालय भी सील किया जा सकता है।

सूचना और प्रचार निदेशालय ने 2017 में आम आदमी पार्टी को 42.26 करोड़ रुपए सरकारी खजाने को तुरंत जमा करने और 54.87 करोड़ रुपए की बकाया राशि विज्ञापन एजेंसियों या संबंधित प्रकाशनों को 30 दिनों के भीतर सीधे भुगतान करने का निर्देश दिया था। लेकिन, AAP ने आदेशों का पालन नहीं किया।

इसके बाद उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए थे कि वे सितंबर 2016 के बाद के सभी विज्ञापनों को कमेटी ऑन कंटेंट रेग्युलेशन इन गर्वनमेंट एडवरटाइजिंग (CCRGA) के पास जाँच के लिए भेजें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा था कि सभी विज्ञापन सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप हैं या नहीं।

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दिल्ली शराब घोटाला : केस लड़ने के लिए सरकारी खजाने से कांग्रेस वकीलों पर फूँक दिए 28 करोड़ रूपए

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दिल्ली शराब घोटाला : केस लड़ने के लिए सरकारी खजाने से कांग्रेस वकीलों पर फूँक दिए 28 करोड़ रूपए
अपने आपको सबसे ईमानदार का ढोल पीटने वाले अर

सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के बाद CCRGA का गठन हुआ था। उसने आम आदमी पार्टी को 97 करोड़ 14 लाख रुपए ब्याज के साथ सरकारी खजाने में जमा करने का आदेश दिया था। कमिटी ने अपने आदेश में कहा था कि राजनीतिक विज्ञापनों को सरकारी विज्ञापन के तौर पर प्रकाशित किया गया, जिससे एक राजनीतिक दल को लाभ मिला। यह सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों की अवमानना है।