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जिस पाकिस्तानी पत्रकार ने की भारत की जासूसी, उसे नहीं बुलाने पर भड़क गए थे हामिद अंसारी: आयोजक का दावा, कहा- झूठ बोल रहे पूर्व उपराष्ट्रपति, सरकार करे जाँच

                           हामिद अंसारी और नुसरत मिर्जा (लाल घेरे में) (फोटो साभार: @adishcaggarwala)
पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा (Nusrat Mirza) द्वारा भारत आकर जासूसी करने के मामले में नया खुलासा हुआ है। ऑल इंडिया बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आदिश अग्रवाल ने एक विस्तृत बयान जारी कर पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर जानकारी छिपाने और झूठ बोलने का आरोप लगाया है। सरकार से इसकी जाँच की माँग की है। डॉ. अग्रवाल इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ ज्यूरिस्ट्स के अध्यक्ष भी हैं।

बयान में बताया गया है कि अंसारी का कार्यालय चाहता था कि मिर्जा को सम्मेलन में बुलाया जाए। इसे स्वीकार नहीं किए जाने पर वे नाराज भी हो गए थे। डॉ. अग्रवाल ने जिस सम्मेलन को लेकर यह दावा किया है ​वह दिल्ली के विज्ञान भवन में 11 और 12 दिसंबर 2010 को आयोजित हुआ ​था।

उन्होंने आतंकवाद के मसले पर जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम द्वारा 27 अक्टूबर 2009 को दिल्ली के ओबेरॉय होटल में आयोजित एक सम्मेलन की तस्वीर भी शेयर की है। इसमें अंसारी और मिर्जा को एक साथ मंच साझा करते हुए दिखाया है। बताया है कि इस सम्मेलन में हामिद अंसारी, दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला और अन्य मुस्लिम नेताओं ने भाग लिया था। डॉ अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि हामिद अंसारी और उनके दोस्त जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम के सम्मेलन में पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा के साथ दोस्ती कर रहे थे।

बयान में कहा गया है कि कि ऐसा लगता है कि हामिद अंसारी और कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकारी एजेंसियों और जनता को गुमराह करने के लिए जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम के सम्मेलन के बारे में खुलासा नहीं किया है। ऐसे में सरकार से अनुरोध है कि वह इस मामले की जाँच करे, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और जासूसी से संबंधित है।

बयान में कहा गया है कि अंसारी और रमेश ने केवल 11 और 12 दिसंबर 2010 को विज्ञान भवन में आयोजित न्यायविदों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का ही उल्लेख किया है। इस सम्मेलन में अंसारी ने हिस्सा लिया था। लेकिन नुसरत मिर्जा इसमें आमंत्रित नहीं थे। यहाँ तक ​​कि नुसरत मिर्जा ने भी अपने साक्षात्कार में इस सम्मेलन का उल्लेख नहीं किया है।

डॉ. अग्रवाल का दावा है कि जब इस सम्मेलन का आयोजन हो रहा था तो तत्कालीन हामिद अंसारी को इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था। अशोक दीवान उस समय उपराष्ट्रपति सचिवालय के निदेशक थे। बयान में कहा गया है, “दीवान ने मुझे बताया था कि उपराष्ट्रपति (हामिद अंसारी) चाहते हैं कि पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा को सम्मेलन में आमंत्रित किया जाए। लेकिन हम इस अनुरोध को स्वीकार नहीं कर सके क्योंकि मिर्जा पाकिस्तानी मीडिया से थे और हमने पाकिस्तान से जजों या वकीलों को आमंत्रित नहीं किया था।”

डॉ अग्रवाल के अनुसार जब दीवान को यह बात पता चली कि हमने मिर्जा को आमंत्रित नहीं किया है, तो उन्होंने सम्मेलन से एक दिन मुझे फोन कर नाराजगी जताई। यह भी बताया कि हामिद अंसारी को यह बुरा लगा है और अब वे केवल बीस मिनट के लिए समारोह में शामिल होंगे। अग्रवाल के अनुसार शुरुआत में अंसारी ने एक घंटे के लिए कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सहमति दी थी।

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भारत के 15 राज्यों में घूम कर ISI के लिए जुटाई सूचनाएँ’: भारत के 56 मुस्लिम सांसद थे मददगार-- लेखक का खु
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भारत के 15 राज्यों में घूम कर ISI के लिए जुटाई सूचनाएँ’: भारत के 56 मुस्लिम सांसद थे मददगार-- लेखक का खु

नुसरत मिर्जा (Nusrat Mirza) ने 10 जुलाई, 2022 को एक इंटरव्‍यू में कई हैरान करने वाले खुलासे किए थे। पाकिस्तानी पत्रकार और YouTuber शकील चौधरी (Shakil Chaudhary) को दिए इंटरव्यू में नुरसत मिर्जा ने दावा किया था कि उन्होंने 2005 से 2011 के बीच भारत दौरे के दौरान पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के लिए कई जानकारियाँ एकत्र की थीं। उन्हें पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और ‘मिल्‍ली गैजेट’ अखबार के मालिक जफरुल इस्लाम खान ने भारत में आमंत्रित किया था।

‘डरे हुए’ हामिद अंसारी ने राष्ट्रवाद को बताया बीमारी, कहा- कोरोना से पहले ही देश ‘दो महामारी’ का हो चुका है शिकार

उपराष्ट्रपति पद से विदा होने के बाद से हामिद अंसारी ‘बेहद डरे हुए’ हैं। वे पहले ही कह चुके हैं कि भारत के गणतंत्र की संस्थाएँ बहुत खतरे में हैं। एक बार फिर उनका यह ‘डर’ सामने आया है। अब उन्होंने राष्ट्रवाद के साथ आक्रामकता को जोड़ा है और इसे बीमारी बताया है। वे पूर्व में राष्ट्रवाद को ‘जहर’ भी बता चुके हैं।

20 नवंबर 2020 को अंसारी ने कहा कि देश कोरोना से पहले ही दो महामारी का शिकार हो चुका है। ये हैं- धार्मिक कट्टरता और आक्रामक राष्ट्रवाद। बकौल अंसारी, इनके मुकाबले देशप्रेम अधिक सकारात्मक अवधारणा है, क्योंकि यह सैन्य और सांस्कृतिक रूप से रक्षात्मक है।

वे कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर की किताब ‘The Battle of Belonging’ के आभासी विमोचन के मौके पर बोल रहे थे। उन्होंने देश के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देश ऐसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष विचारधाराओं की वजह से ख़तरे में नज़र आ रहा है जो उसे ‘हम और वह’ की श्रेणी में विभाजित करने का प्रयास कर रही हैं। 

महामारी को केंद्र में रखते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा, “कोरोना से पहले ही हमारा देश दो बड़ी महामारियों को झेल चुका है, धार्मिक कट्टरता और आक्रामक राष्ट्रवाद। धार्मिक कट्टरता और आक्रामक राष्ट्रवाद की तुलना में देशभक्ति कहीं अधिक सकारात्मक अवधारणा है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि यह सांस्कृतिक और सैन्य दृष्टिकोण से रक्षात्मक है।” 

अंसारी ने कहा, “4 वर्षों की छोटी अवधि में भारत ने उदार राष्ट्रवाद के बुनियादी दृष्टिकोण से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की राजनीतिक छवि निर्मित करने तक एक लंबी यात्रा तय की है, जो सार्वजनिक क्षेत्र में पूर्णतः स्थापित हो चुकी है।” उन्होंने कहा कि अभी तक हमारे व्यावहारिक मूल्य एक बहुआयामी समाज की अस्तित्वगत वास्तविकता, लोकतांत्रिक राजनीति और धर्मनिरपेक्ष राज्य की तरह प्रस्तुत किए जाते थे। इन सारी बातों को स्वतंत्रता आंदोलन तक स्वीकार किया जाता था, यह बातें संविधान के समानांतर थीं और संविधान की प्रस्तावना (Preamble) में निहित थीं। भारतीय समाज का बहुआयामी पहलू इसमें मौजूद 4635 समुदायों से ही स्पष्ट होता है। 

महामारी को उल्लेख करते हुए हामिद अंसारी ने कहा, “कोविड 19 एक भयावह महामारी है लेकिन इसके पहले हमारा समाज दो महामारियों का शिकार हो चुका है, धार्मिक कट्टरता और आक्रामक राष्ट्रवाद। धार्मिक अवधारणा को धर्म के आधार पर किए जाने वाले ढोंग के रूप में परिभाषित किया जा रहा है और आक्रामक राष्ट्रवाद के बारे में पहले ही बहुत कुछ लिखा जा चुका है। यह विचारधारा के लिहाज़ से जहर जैसा है जो किसी संकोच के बिना लोगों के व्यक्तिगत अधिकारों पर अतिक्रमण करता है और अधिकारों को क्षीण करता है।”

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पूर्व रॉ अधिकारी यादव ने हामिद अंसारी को किया बेनकाब
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पूर्व रॉ अधिकारी यादव ने हामिद अंसारी को किया बेनकाब
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर रॉ के एक पूर्व अ

पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा कि रिकॉर्ड्स बताते हैं कि यह कई बार नफ़रत का रूप ले लेता है और एक ऐसी घुट्टी के रूप में काम करता है जो प्रतिशोध के लिए उकसाता है। तमाम लोगों ने इसके उदाहरण कहीं और नहीं बल्कि अपनी ही ज़मीन पर देखे होंगे। देशभक्ति स्वभाव के लिहाज़ से बेहद सकारात्मक अवधारणा है चाहे वह सांस्कृतिक रूप में हो या सैन्य रूप में। यह आम लोगों की भावनाओं को सही दिशा देती है। 

बहुत मुश्किल समय है, भारत के गणतंत्र की संस्थाएँ बहुत खतरे में हैं: हामिद अंसारी

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
समय-समय पर देश की संस्थाओं के प्रति कुछ भी गैरजिम्मेदाराना बयान देना पूर्व उप-राष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी की फितरत बन चुकी है। वैसे भी आप इसे उनकी मजबूरी भी कह सकते हैं, क्योंकि जिस गाँधी परिवार का अपने निजी हितों को साधने के लिए जिंदगी भर ढोल बजाया और पेट भरकर खाया हो, उसको पचाने के लिए यह सब भी जरूरी है, खैर एक बार फिर हामिद अंसारी ने अपनी वही भूमिका दोहराते हुए कहा है कि भारत में बहुत ही खतरनाक प्रक्रिया चल रही है, आज देश की प्रमुख संस्थाएँ खतरे में हैं।
यह बातें दो बार देश के उप-राष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी ने नई दिल्ली में मार्च 17 को राज्यसभा सदस्य रहे भालचंद्र मुंगेकर की किताब के विमोचन के अवसर पर कहीं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जिन सिद्धांतों पर संविधान की प्रस्तावना की गई आज उनकी अवहेलना की जा रही है। अंसारी ने आगे कहा कि लोग मुश्किल समय में जी रहे हैं और प्रतिक्रिया करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यदि यह जारी रहा तो बहुत देर हो जाएगी। हालाँकि, अंसारी को शायद अपने ऊपर चिदंबरम जैसी कार्रवाई होने का डर था, इसीलिए वह अपने पूरे संबोधन में खुलकर कुछ नहीं बोल सके और चारों ओर नजरें धुमाते हुए बस एक ही बात को दोहराते रहे, “हम बहुत मुश्किल समय में जी रहे हैं। मुझे इसके विस्तार में जाने की जरूरत नहीं है, लेकिन सच्चाई यह है कि भारत के गणतंत्र की संस्थाएँ बहुत खतरे में हैं।”
क्या तुष्टिकरण पुजारी और लिबरल गैंग यह बताने का कष्ट करेंगे कि जब तक हामिद मियां उपराष्ट्रपति रहे, तब तक इस आदमी को कोई डर नहीं था; दूसरे, जब ये आदमी ईरान में राष्ट्रदूत रहा, ईरान में रॉ अधिकारियों के बारे में पाकिस्तान को सूचित कर भारत सुरक्षा को संकट में डाल दिया था। यानि जिम्मेदारी पद पर रहते भारतीय सुरक्षा की गोपनीयता को जगजाहिर कर रॉ अधिकारियों के जीवन को खतरे में डाल दिया था। मुसलमान होने पर देश से गद्दारी कर पाकिस्तान के टुकड़ों पर मालपुए खाते रहे। क्या हामिद अंसारी के ये काम संविधान और शपथ के विरुद्ध नहीं थे? (विस्तार से पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।) 
उन्होंने आगे कहा, “इस प्रक्रिया में काफी कुतर्क शामिल है इसलिए अधिकतर नागरिकों द्वारा इसे समझ पाना आसान नहीं है। हालाँकि, सच्चाई यह है कि बहुत खतरनाक प्रक्रिया चल रही है। यह हमारे लिए, देश के नागरिकों के लिए खतरनाक है।” अंसारी ने कहा कि भारत के मित्र देश स्थिति को खतरे की स्थिति के तौर पर देख रहे हैं जबकि देश के दुश्मन खुश हैं। हालाँकि, अंसारी ने यह नहीं बताया कि देश की कौन सी स्थिति खतरे वाली है, जिसे वह पड़ोसी देश तो देख पा रहे हैं, लेकिन वह नहीं बोल पा रहे। उन्होंने यह तो कह दिया कि देश के दुश्मन इस स्थिति से खुश हैं, लेकिन यह नहीं बताया कि देश के दुश्मन कौन हैं। उन्होंने आगे कहा, “इसलिए कुछ ऐसा(अंसारी ने कुछ का मतलब नहीं बताया) है, जिस पर गौर किया जाना चाहिए, मैं डा. मुंगेकर के शब्दों को जगाने वाला और यह याद दिलाने वाला मानता हूँ कि हमें भ्रमित किया जा रहा है और यदि हम इस प्रक्रिया को जारी रहने देंगे तो जगने में बहुत देर हो जाएगी।”
उन्होंने यह टिप्पणी शिक्षाशास्त्री और राज्यसभा सदस्य रहे भालचंद्र मुंगेकर की पुस्तक ‘माय एनकाउंटर्स इन पार्लियामेंट’ के विमोचन के मौके पर की। इस मौके पर राकांपा प्रमुख शरद पवार, भाकपा महासचिव डी. राजा और माकपा महासचिव सीताराम येचुरी भी उपस्थित थे।
वैसे हामिद अंसारी से देशहित में बयान देने की उम्मीद करना बेमानी होगी, क्योंकि जिस गाँधी परिवार ने देश पर 60 वर्षों तक राज किया उस पर अंसारी आज तक कुछ बोल नहीं सके, लेकिन जैसे ही मोदी सरकार केन्द्र की सत्ता में आई ऐसे ही देश में संविधान की अवहेलना होने लगी। गौर हो कि मोदी सरकार के बनने के बाद अपने कार्यकाल के आखिरी दिन हामिद अंसारी ने कहा था कि देश के मुस्लिम समुदाय में आज असुरक्षा का माहौल है, अपने आखिरी इंटरव्यू के जरिए हामिद अंसारी ने मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा था कि भारत का समाज सदियों से बहुलतावादी रहा है, लेकिन सबके लिए ये स्वीकार्यता का माहौल अब खतरे में है, लोगों की भारतीयता पर सवाल खड़े करने की प्रवृत्ति भी बेहद चिंताजनक है। कानून व्यवस्था को लागू करने की सरकारी अधिकारियों की क्षमता भी अलग-अलग स्तर पर खत्म हो रही है।
हामिद अंसारी का विवादों से गहरा नाता रहा है। बंगाल में जन्मे और एएमयू जैसे शिक्षण संस्थान में अपनी पढ़ाई करने वाले वह हामिद अंसारी ही थे, जिन्होंने भारत में यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा की उपस्थिति में गणतंत्र दिवस तो मनाया था, लेकिन हामिद अंसारी ने भारत के राष्ट्रध्वज को सलामी नहीं दी थी। इसके बाद यह तस्वीर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई थी। अंसारी ने वर्ष 2018 में देश के बंटवारे को लेकर विवादित बयान दिया था, उन्‍होंने कहा कि देश के विभाजन के लिए सिर्फ पाकिस्तान ही जिम्मेदार नहीं था, बल्‍क‍ि हिंदुस्तान भी जिम्मेदार था। इतना ही नहीं अंसारी ने कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर के उस बयान को भी सही ठहराया था, जिसमें थरूर ने कहा था कि अगर साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी जीती, तो हिंदुस्तान का संविधान खतरे में पड़ जाएगा और भारत हिंदू पाकिस्तान बन जाएगा।
अब अंसारी की विचारधारा जिन्ना वाली है या गाँधी वाली इस बात का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि 21 जून 2015, भारत के अलावा दुनिया के 190 देश पहली बार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रहे थे। राजपथ पर हुए कार्यक्रम में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूरा मंत्रिमंडल मौजूद था, लेकन बड़े संवैधानिक पद पर रहते हुए भी कार्यक्रम में हामिद अंसारी मौजूद नहीं हुए। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी तबियत खराब होने का हवाला दिया था। इतना ही नहीं मोदी सरकार द्वारा पाकिस्तान पर की गई बालाकोट स्ट्राईक के बाद जो लोग सेना पर सवाल उठा रहे थे, उस पर बोलते हुए अंसारी ने कहा था कि बालाकोट पर सवाल उठाना देशद्रोह नहीं बल्कि लोगों का अधिकार है। 
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10 साल उपराष्ट्रपति रहे, लेकिन कभी मुसलमानों की कोई फ़िक्र नहीं कोई ज़िक्र नहीं, लेकिन हामिद अंसारी रिटायर होते ही '.....
वहीं पिछले वर्ष रॉ के एक पूर्व अधिकारी ने पिछले वर्ष एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा था कि पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने 1990-92 के बीच ईरान में भारतीय राजदूत रहते तेहरान में रॉ के सेटअप को उजागर कर वहाँ काम कर रहे अधिकारियों की जिन्दगी को खतरे में डाल दिया था।

पूर्व रॉ अधिकारी यादव ने हामिद अंसारी को किया बेनकाब

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर रॉ के एक पूर्व अधिकारी आर.के. यादव ने कुछ ऐसे हैरान करने वाले खुलासे किए हैं, जिनसे पता चलता है कि भारत में उच्च पदों पर बैठ चुका यह व्यक्ति केवल एक कट्टरपंथी ही नहीं, बल्कि एक देशद्रोह भी है। यादव ने अपनी पुस्तक "मिशन आर एन्ड डब्लू(Mission R&AW) " में कुछ ऐसी घटनाओं का उल्लेख किया है, जो हामिद की निष्ठां पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं।
हैरानी की बात यह है कि इस सबके बावजूद 2007 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी की पसंद पर उन्हें भारत का उपराष्ट्रपति बना दिया गया। इस पद पर वह 10 वर्ष तक आसीन रहे। हाल ही में, हामिद अन्सारी ने मुसलमानों के लिए अलग शरिया अदालतों का समर्थन कर सबको चौंका दिया था। तब यह सवाल उठा कि देश की एक संवैधानिक पद पर रहा आदमी कैसे इस्लामिक कोर्ट की वकालत कर सकता है? हामिद अन्सारी पहले भी अपनी कट्टरपंथी सोंच के कई संकेत दे चुके हैं। कुछ समय पूर्व वह केरल के कट्टरपंथी संगठन पीएफआई की बैठक में गए थे।
रॉ के लिए काम कर चुके आर के यादव ने Mission R&AW के नाम से एक किताब भी लिखी हैयादव का बड़ा खुलासा
आर के यादव ने अपनी पुस्तक में उस घटना का उल्लेख किया है, जब 1990 में ईरान में भारत के राजदूत थे। उन्होंने लिखा है कि कैसे ईरान में हामिद के राजदूत रहते वहां पर काम कर रहे रॉ जासूसों और खबरियों की शामत आ गयी थी। यादव ने अपनी पुस्तक में एक "कपूर" नाम के एक जासूस का जिक्र किया है, जिसको   ईरान की ख़ुफ़िया एजेंसी ने अगवा कर लिया था। उसको कहाँ ले जाया गया, इस बारे में भारतीय दूतावास को कोई जानकारी नहीं दी गयी। तीन दिनों तक ईरान ख़ुफ़िया एजेंसी ने कपूर को अमानवीय यातनाएं दीं और फिर मरने के लिए एक खाली जगह पर फेंक दिया था। एक राजदूत के तौर पर हामिद की जिम्मेदारी थी कि वो ईरान सरकार से इस घटना की औपचारिक शिकायत दर्ज करवाते। जो उन्होंने नहीं किया, जिस कारण राजदूत अधिकारियों में हामिद के प्रति काफी रोष था। इसी दौरान एक और जासूस "माथुर" को अगवा कर लिया गया। वह भी दो दिन तक गायब रहा, लेकिन अन्सारी ने तब भी चुप्पी साधे रखी।
दूतावास कर्मचारियों की बगावत
हामिद अन्सारी के रहस्यमय रवैये से दूतावास कर्मचारियों का सब्र टूट गया। माथुर की पत्नी और दूतावास कर्मचारियों की पत्नियों ने राजदूत हामिद अंसारी से मिलने का समय माँगा। लेकिन हामिद अंसारी ने मिलने से मना कर दिया। हामिद के मना करने के बाद लगभग 30 महिलाओं ने हमीद अंसारी के कक्ष में हमला बोल, उन्हें घेराव किया। उनका केवल इतना ही कहना था कि आखिर किस कारण भारतीयों को अगवा किए जाने पर क्यों चुप्पी साधे हो? क्यों नहीं ईरानी अधिकारियों से विरोध दर्ज करवाया जा रहा? मामले की गम्भीरता को देखते हुए और राजदूत हामिद अंसारी के रवैये को देखते हुए, ईरान में सक्रीय अन्य रॉ अधिकारीयों ने तुरन्त नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय को अतिशीघ्र संज्ञान लेने को कहा। उस समय विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी से भी हस्ताक्षेप करने का अनुरोध किया। इसके बाद विदेश मंत्रालय के तुरंत हरकत में आने पर माथुर को रिहा कर दिया। पता चला कि माथुर को दो दिन हिरासत में थर्ड डिग्री की यातनाएँ दी थीं। राजदूत हामिद के इस रवैये ने ईरान में भारतीय खुफ़ियों को बुरी तरह से हिला कर रख दिया था। कपूर और माथुर दोनों ही भारतीय दूतावास में बतौर कर्मचारी सक्रीय थे।
हमीद अंसारी की नियत
हामिद अंसारी भारतीय विदेश सेवा(आई एफ एस ) के अधिकारी थे और इस हैसियत से वह ईरान के अलावा सऊदी अरब और कई दूसरे खाड़ी देशों में भारतीय राजदूत रहे। ईरान में घटित इन घटनाओं ने हामिद अंसारी की निष्ठां पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया था। कहते हैं, रॉ एवं अन्य सूचना एजेन्सियां हामिद पर संदेह करने लगी थीं। ईरान में रॉ के जासूस इसलिए भेजे जाते थे, ताकि वहां रहकर पाकिस्तान पर निगाह रखी जा सके, क्योकि पाकिस्तान और ईरान की सीमाएँ आपस में लगी हुई हैं। जिस माथुर को पकड़ा गया था, वह तेहरान में कश्मीरी आतंकवादियों के नेटवर्क का भांडा भोड़ने को ही था कि उसे अगवा कर लिया गया। वह अपने ख़ुफ़िया इनपुट नियमित समय पर भारत भेजता था और इसकी जानकारी राजदूत अंसारी को भी रहती थी। आर के यादव की पुस्तक के अनुसार राजदूत हामिद अंसारी को माथुर की इन इनपुट्स पर ऐतराज था। जिस दिन माथुर को अगवा किया गया था, उस दिन राजदूत हामिद अंसारी ने अपनी रोटिन रपट भेजी कि वह गायब है, लेकिन इस मुद्दे पर कोई कार्यवाही नहीं की।
हामिद अंसारी के विरुद्ध रिपोर्ट
आर के यादव ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि तेहरान से रॉ अधिकारी एन के सूद ने दिल्ली में उनके पास फोन किया और पुरे घटनाक्रम की जानकारी दी। अगले ही दिन यादव ने विपक्षी नेता अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाकात की। वाजपेयी ने प्रधानमन्त्री नरसिम्हा राव से मिलकर घटनाक्रम पर गम्भीरता से चर्चा की। इस पर प्रधानमंत्री राव ने, विषय की गम्भीरता को देखते हुए, तुरन्त कार्यवाही की। परिमाणस्वरुप, ईरानी अफसरों ने माथुर को छोड़ दिया। जिसके बाद माथुर को दिल्ली बुला लिया गया। दोनों जासूसों के इनपुट्स के आधार पर रॉ के वरिष्ठ अधिकारी को जाँच के लिए तेहरान भेजा गया। जिसने रॉ के सचिव को दी रिपोर्ट में हामिद अंसारी के रवैये को संदेहस्पद बताया।
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बायीं तस्वीर कांग्रेस सांसद अहमद पटेल की और दायीं तस्वीर रॉ के पूर्व अधिकारी आरके यादव की है। आर.बी.एल.निगम कांग्र.....

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बात 1990 के दशक के आखिरी वर्षों का है जब, H. Ansari ईरान मे भारत के Ambassador हुआ करते थे । उस समय तेहरान मे पोस्टेड RAW के जासूस Mr. Kapo...
एक और अफसर हुआ अगवा
मामला शांत होने के कुछ ही दिन बाद तेहरान में भारतीय दूतावास के सिक्योरिटी अफसर मोहम्मद उमर से ईरान की खुफ़िआ एजेंसी ने सम्पर्क किया। और अपने(ईरान) के लिए काम करने का ऑफर दिया। उमर ने ऐसा करने से मना कर दिया, और इसके बारे में राजदूत हामिद अंसारी को औपचारिक रूप से जानकारी दी गयी।लेकिन कुछ ही दिनों के अंदर उसे भी अगवा कर लिया गया। उसे बुरी तरह से मारा-पीटा गया। और बाद में तेहरान के बाहरी इलाके में फेंक दिया गया। इस बार भी राजदूत हामिद ने ईरान सरकार से विरोध दर्ज नहीं करवाया। इतना ही नहीं, कर्मचारियों को हिदायत दी कि इस मसले पर अपना मुँह बन्द रखें। जब बुरी तरह घायल मोहम्मद उमर को दूतावास लाया गया, तो हामिद अंसारी ने उसे दिल्ली भेजने की कवायत शुरू कर दी। इस पर रॉ के बाकि ऑपरेटिव्स ने विरोध दर्ज कराया। जिस पर वहां के रॉ के स्टेशन चीफ वेणुगोपाल ने राजदूत हामिद का आदेश मानने से साफ मना कर दिया।
क्या अंसारी गद्दारी कर रहे थे?
इस बारे में पुस्तक में बताया गया है कि ईरान के साथ हामिद अंसारी के साथ बहुत अच्छे सम्बन्ध थे। हैरानी है कि इसके बावजूद उन्होंने कभी अपने कर्मचारियों के अगवा और टार्चर किये जाने का विरोध तक नहीं किया। रॉ अधिकारी यादव ने अपनी पुस्तक में इन घटनाओं का केवल उल्लेख किया है, लेकिन इन घटनाक्रमों पर किसी राजदूत द्वारा चुप्पी साधना बहुत कुछ व्यक्त कर रही हैं। हामिद राजदूत के तौर पर ईरान में क्या कर रहे थे? यह भी सम्भावनाएं व्यक्त की जा रहीं है कि रॉ जासूसों को पकड़वाने में हामिद अंसारी की ही गुप्त भूमिका रही हो? क्योकि राजदूत को सब जानकारी होती है कि कौन क्या है और क्या कर रहा है? ईरान में सक्रिय जासूसों की ईरान में कोई दिलचस्पी नहीं, बल्कि पाकिस्तान पर निगाह रखना है। अगर उन्हें रोकना चाहते थे तो यह भी समझना मुश्किल नहीं कि वो भारत के राजदूत होते हुए पाकिस्तान की सहायता कर रहे हो? इससे पूर्व आर के यादव कांग्रेस के दिग्गज नेता अहमद पटेल की सच्चाई भी उजागर कर चुके हैं।        
हामिद अंसारी की सोंच शुरू से ही राष्ट्र विरोधी 
10 अगस्त 2017 को उपराष्ट्रपति का पद छोड़ने के बाद से हामिद अंसारी लगातार अपने बयानों के कारण विवादों में बने हुए हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में जिन्ना की तस्वीर का मामला हो, तीन तलाक के कानून का विरोध हो या देश के हर जिले में शरिया अदालतें स्थापित करने का ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड का प्रस्ताव हो, सभी का हामिद अंसारी ने समर्थन किया है। हामिद अंसारी लगातार कह रहे हैं कि देश के मुसलमानों के मन में भय पैदा हो रहा है। हामिद अंसारी की इस देश विरोधी सोच की कुछ और परतों को रॉ के पूर्व अधिकारी आर के यादव ने Mission R&AW में  उजागर किया है।
हामिद अंसारी के चरित्र के बारे में रॉ के अधिकारी आर के यादव ने यह बात लंबी जांच पड़ताल और अनुभव के आधार पर कही है। अपने अनुभवों के आधार पर लिखी गई किताब Mission R&AW में हामिद अंसारी के दोहरे चरित्र पर एक पूरा अध्याय- Bizarre R&AW Incidents- ही लिखा है।
हामिद अंसारी ने ईरान में कश्मीर आंदोलनकारियों  का साथ दिया
आर के यादव –Bizarre R&AW Incidents में लिखते हैं कि रॉ के अधिकारी डी बी माथुर, तेहरान के करीब कौम में कश्मीर के युवकों के लिए चल रहे ट्रेनिंग कैंप पर नियमित रुप से दिल्ली को रिपोर्ट भेजते रहते थे। ये सभी रिपोर्ट्स राजदूत हामिद अंसारी के पास से होकर गुजरती थीं, इनमें से कई रिपोर्ट्स को लेकर हामिद अंसारी काफी विरोध में रहते थे। इसी दौरान, एक सुबह डी बी माथुर को ईरान की गुप्तचर संस्था ने अगवा कर लिया, लेकिन हामिद अंसारी ने ईरान की सरकार से इस बारे में कोई बात नहीं की और बहुत ही साधारण रिपोर्ट दिल्ली भेज कर शांत हो गए। दो दिनों तक डी बी माथुर के बारे में कोई जानकारी न मिलने पर भारतीय दूतावास के करीब 30 अधिकारियों की पत्नियों ने हामिद अंसारी के चैम्बर में जबरदस्ती घुसकर विरोध भी दर्ज कराया था।
कांग्रेस ने ऐसे व्यक्ति को उपराष्ट्रपति बनाया
विभिन्न देशों में भारत के राजदूत रह चुके हामिद अंसारी ने ऐसे काम किए हैं, जिससे भारत की सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों की पहचान दूसरे देशों के सामने आ गई। हामिद अंसारी ने ऐसा एक बार नहीं कई बार किया, जिससे स्पष्ट होता है कि हामिद अंसारी की सोच ही भारत विरोधी है। ऐसे भारत विरोधी चेहरे को कांग्रेस ने देश का उपराष्ट्रपति बनाया। आजकल हामिद अंसारी कांग्रेस की तरफ से मुसलमानों के पैरोकार बन कर सामने आ रहे हैं।