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ISI से जुड़ी संस्था के कार्यक्रम में हामिद अंसारी ने कहा- लोकतन्त्र खतरे में

देश के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने हिंदू राष्ट्रवाद पर विवादित बयान दिया है। इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदू राष्ट्रवाद चिंता का विषय है। देश में धार्मिक आधार पर लोगों को बाँटा जा रहा है। लोगों में राष्ट्रीयता को लेकर विवाद पैदा किया जा रहा है। खासकर एक धर्म विशेष के लोगों को उकसाया जा रहा है। देश में असहिष्णुता को हवा दी जा रही है और असुरक्षा का माहौल बनाया जा रहा है। 

हामिद ने कोई नई या हैरान करने वाली बात नहीं कही है। ईरान में भारत का राजदूत रहते भी भारत के विरुद्ध काम कर पाकिस्तान का साथ देते थे, हैरानी इस बात पर होती है कि ऐसे देशद्रोहियों को जेल में क्यों नहीं डाला जा रहा? हामिद की देशद्रोही हरकतों को जानने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें जो फरवरी 3, 2019 को लिखा गया था। कई बार रॉ अधिकारियों ने भी अंसारी की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया है। पूर्व उपराष्ट्रपति के इस बयान पर भाजपा ने पलटवार जरूर किया है, लेकिन अब तक इनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही क्यों नहीं की गयी? कब तक ऐसे लोगों को खुला घूमने दिया जाता रहेगा?

रॉ अधिकारी यादव का बड़ा खुलासा
आर के यादव ने अपनी पुस्तक में उस घटना का उल्लेख किया है, जब 1990 में ईरान में भारत के राजदूत थे। उन्होंने लिखा है कि कैसे ईरान में हामिद के राजदूत रहते वहां पर काम कर रहे रॉ जासूसों और खबरियों की शामत आ गयी थी। यादव ने अपनी पुस्तक में एक "कपूर" नाम के एक जासूस का जिक्र किया है, जिसको ईरान की ख़ुफ़िया एजेंसी ने अगवा कर लिया था। उसको कहाँ ले जाया गया, इस बारे में भारतीय दूतावास को कोई जानकारी नहीं दी गयी। तीन दिनों तक ईरान ख़ुफ़िया एजेंसी ने कपूर को अमानवीय यातनाएं दीं और फिर मरने के लिए एक खाली जगह पर फेंक दिया था। एक राजदूत के तौर पर हामिद की जिम्मेदारी थी कि वो ईरान सरकार से इस घटना की औपचारिक शिकायत दर्ज करवाते। जो उन्होंने नहीं किया, जिस कारण राजदूत अधिकारियों में हामिद के प्रति काफी रोष था। इसी दौरान एक और जासूस "माथुर" को अगवा कर लिया गया। वह भी दो दिन तक गायब रहा, लेकिन अन्सारी ने तब भी चुप्पी साधे रखी।

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला का पलटवार

पूर्व उपराष्ट्रपति के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने गुरुवार (27 जनवरी 2022) को कहा कि कुछ लोग ऐसे होते हैं जो व्यक्ति विरोध करते-करते देश विरोध करने में भी संकोच नहीं करते हैं। उन्होंने राजनीति से प्रेरित होकर बयान दिया है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि अंसारी जैसे लोगों को देश में हिंदुओं पर होने वाले हमले नहीं दिखाई देते।

विदेशी मंच पर भारत की छवि धूमिल करते हैं लोग- बीजेपी प्रवक्ता नलिन कोहली

वहीं बीजेपी के प्रवक्ता नलिन कोहली ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भारत के सभी लोगों के हित में काम कर रही है। बिना किसी भेदभाव के सभी को फायदा पहुँचाने का काम हो रहा है। इस सरकार का ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं है, जिसमें देखा जाता है कि कौन हिंदू है और कौन मुसलमान है, बौद्ध है, ईसाई है। चाहे वो फिर महिला हो, किसान हो या फिर युवा हों। लेकिन कुछ ऐसे लोग विदेशी मंच पर जाकर हिंदुस्तान को बदनाम करने की कोशिश करते हैं। प्रधानमंत्री विदेश जाकर देश की छवि सुधारते हैं और कुछ लोग भारत की छवि धूमिल करने विदेश जाते हैं।

हामिद अंसारी ने क्या कहा था?

बता दें कि हामिद अंसारी ने 26 जनवरी के मौके पर एक अमेरिकी संस्था के वर्चुअल कार्यक्रम में विवादित बातें कहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में असहिष्णुता बढ़ रही है। उन्होंने भारत के लोकतंत्र की आलोचना की और चेतावनी दी कि देश अपने संवैधानिक मूल्‍यों से दूर जा रहा है।

हामिद अंसारी के इस बयान पर बीजेपी नेता और अल्‍पसंख्‍यक मामलों के मंत्री मुख्‍तार अब्‍बास नकवी ने पलटवार किया है। नकवी ने कहा कि मोदी की आलोचना करने का पागलपन अब भारत की आलोचना करने की साजिश में बदल गया है। उन्‍होंने कहा, “जो लोग अल्‍पसंख्‍यकों के वोट का शोषण करते थे, वे अब देश के सकारात्‍मक माहौल से चिंतित हैं।”

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पूर्व रॉ अधिकारी यादव ने हामिद अंसारी को किया बेनकाब

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पूर्व रॉ अधिकारी यादव ने हामिद अंसारी को किया बेनकाब
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर रॉ के एक पूर्व

भारत से डिजिटल तरीके से इस चर्चा में भाग लेते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति अंसारी ने हिंदू राष्ट्रवाद की बढ़ती प्रवृत्ति पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया, ‘‘हाल के वर्षों में हमने उन प्रवृत्तियों और प्रथाओं के उद्भव का अनुभव किया है, जो नागरिक राष्ट्रवाद के सुस्थापित सिद्धांत को लेकर विवाद खड़ा करती हैं और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की एक नई एवं काल्पनिक प्रवृति को बढ़ावा देती हैं। वह नागरिकों को उनके धर्म के आधार पर अलग करना चाहती हैं, असहिष्णुता को हवा देती हैं और अशांति और असुरक्षा को बढ़ावा देती हैं।’’

भारत के ‘बहुलतावादी संविधान का संरक्षण’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में हामिद अंसारी एवं अन्य लोगों ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ हेट स्पीच, गैर कानूनी गतिविधि निवारक कानून के दुरुपयोग और कश्मीरी कार्यकर्ता खुर्रम परवेज की गिरफ्तारी को लेकर चर्चा की। हालाँकि ऐसे तमाम दावों को भारत सरकार खारिज करती रही है। सरकार की ओर से अपने लोकतांत्रिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा गया है कि उसकी संसदीय प्रणाली और कानून पूरी तरह से पारदर्शी हैं। देश में नियमित और पारदर्शी चुनावों को भी भारत सरकार दुनिया के आगे लोकतंत्र की सफलता के तौर पर पेश करती रही है।

हामिद अंसारी के बयान पर VHP ने भी जताई नाराजगी

वीएचपी के प्रवक्ता बिनोद बंसल ने कहा, “हामिद अंसारी जैसे लोग संवैधानिक पदों से उतरते ही सीधे नीचे क्यों गिर जाते हैं? PFI और IAMC जैसे कट्टरपंथी संगठनों में पहुँचते ही इनके अंदर का जिहादी इस्लाम इन पर क्यों हावी हो जाता है? राष्ट्र व राष्ट्रवाद पर छुप-छुप कर वार करने से अच्छा हो ये खुलकर मैदान में आएँ।”

कार्यक्रम की आयोजक संस्था ‘इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल’ (IAMC) है। यह संस्था पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई व भारत में दंगे कराने की साजिश से जुड़ी बताई जाती है। अंसारी ने इस संस्था के मंच से केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा।

संस्था पर त्रिपुरा दंगे में लिप्त होने का आरोप

वॉशिंगटन में हुए इस वर्चुअल कार्यक्रम की आयोजक संस्था पर पाक खुफिया एजेंसी से जुड़े होने का आरोप है। यह कार्यक्रम 17 अमेरिकी संगठनों के एक समूह ने रखा था।आयोजक संस्थाओं में से एक इंडियन-अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल भी है। इसे त्रिपुरा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में हाल ही में राज्य में हुए दंगों के लिए जिम्मेदार ठहराया है। इन 17 संस्थाओं में एमनेस्टी इंटरनेशनल यूएसए, जीनोसाइड वॉच, हिंदूज फॉर ह्यमन राइट्स, इंडियन अमेरिकी मुस्लिम काउंसिल शामिल हैं।

‘डरे हुए’ हामिद अंसारी ने राष्ट्रवाद को बताया बीमारी, कहा- कोरोना से पहले ही देश ‘दो महामारी’ का हो चुका है शिकार

उपराष्ट्रपति पद से विदा होने के बाद से हामिद अंसारी ‘बेहद डरे हुए’ हैं। वे पहले ही कह चुके हैं कि भारत के गणतंत्र की संस्थाएँ बहुत खतरे में हैं। एक बार फिर उनका यह ‘डर’ सामने आया है। अब उन्होंने राष्ट्रवाद के साथ आक्रामकता को जोड़ा है और इसे बीमारी बताया है। वे पूर्व में राष्ट्रवाद को ‘जहर’ भी बता चुके हैं।

20 नवंबर 2020 को अंसारी ने कहा कि देश कोरोना से पहले ही दो महामारी का शिकार हो चुका है। ये हैं- धार्मिक कट्टरता और आक्रामक राष्ट्रवाद। बकौल अंसारी, इनके मुकाबले देशप्रेम अधिक सकारात्मक अवधारणा है, क्योंकि यह सैन्य और सांस्कृतिक रूप से रक्षात्मक है।

वे कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर की किताब ‘The Battle of Belonging’ के आभासी विमोचन के मौके पर बोल रहे थे। उन्होंने देश के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देश ऐसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष विचारधाराओं की वजह से ख़तरे में नज़र आ रहा है जो उसे ‘हम और वह’ की श्रेणी में विभाजित करने का प्रयास कर रही हैं। 

महामारी को केंद्र में रखते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा, “कोरोना से पहले ही हमारा देश दो बड़ी महामारियों को झेल चुका है, धार्मिक कट्टरता और आक्रामक राष्ट्रवाद। धार्मिक कट्टरता और आक्रामक राष्ट्रवाद की तुलना में देशभक्ति कहीं अधिक सकारात्मक अवधारणा है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि यह सांस्कृतिक और सैन्य दृष्टिकोण से रक्षात्मक है।” 

अंसारी ने कहा, “4 वर्षों की छोटी अवधि में भारत ने उदार राष्ट्रवाद के बुनियादी दृष्टिकोण से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की राजनीतिक छवि निर्मित करने तक एक लंबी यात्रा तय की है, जो सार्वजनिक क्षेत्र में पूर्णतः स्थापित हो चुकी है।” उन्होंने कहा कि अभी तक हमारे व्यावहारिक मूल्य एक बहुआयामी समाज की अस्तित्वगत वास्तविकता, लोकतांत्रिक राजनीति और धर्मनिरपेक्ष राज्य की तरह प्रस्तुत किए जाते थे। इन सारी बातों को स्वतंत्रता आंदोलन तक स्वीकार किया जाता था, यह बातें संविधान के समानांतर थीं और संविधान की प्रस्तावना (Preamble) में निहित थीं। भारतीय समाज का बहुआयामी पहलू इसमें मौजूद 4635 समुदायों से ही स्पष्ट होता है। 

महामारी को उल्लेख करते हुए हामिद अंसारी ने कहा, “कोविड 19 एक भयावह महामारी है लेकिन इसके पहले हमारा समाज दो महामारियों का शिकार हो चुका है, धार्मिक कट्टरता और आक्रामक राष्ट्रवाद। धार्मिक अवधारणा को धर्म के आधार पर किए जाने वाले ढोंग के रूप में परिभाषित किया जा रहा है और आक्रामक राष्ट्रवाद के बारे में पहले ही बहुत कुछ लिखा जा चुका है। यह विचारधारा के लिहाज़ से जहर जैसा है जो किसी संकोच के बिना लोगों के व्यक्तिगत अधिकारों पर अतिक्रमण करता है और अधिकारों को क्षीण करता है।”

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पूर्व रॉ अधिकारी यादव ने हामिद अंसारी को किया बेनकाब
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर रॉ के एक पूर्व अ

पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा कि रिकॉर्ड्स बताते हैं कि यह कई बार नफ़रत का रूप ले लेता है और एक ऐसी घुट्टी के रूप में काम करता है जो प्रतिशोध के लिए उकसाता है। तमाम लोगों ने इसके उदाहरण कहीं और नहीं बल्कि अपनी ही ज़मीन पर देखे होंगे। देशभक्ति स्वभाव के लिहाज़ से बेहद सकारात्मक अवधारणा है चाहे वह सांस्कृतिक रूप में हो या सैन्य रूप में। यह आम लोगों की भावनाओं को सही दिशा देती है। 

बहुत मुश्किल समय है, भारत के गणतंत्र की संस्थाएँ बहुत खतरे में हैं: हामिद अंसारी

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
समय-समय पर देश की संस्थाओं के प्रति कुछ भी गैरजिम्मेदाराना बयान देना पूर्व उप-राष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी की फितरत बन चुकी है। वैसे भी आप इसे उनकी मजबूरी भी कह सकते हैं, क्योंकि जिस गाँधी परिवार का अपने निजी हितों को साधने के लिए जिंदगी भर ढोल बजाया और पेट भरकर खाया हो, उसको पचाने के लिए यह सब भी जरूरी है, खैर एक बार फिर हामिद अंसारी ने अपनी वही भूमिका दोहराते हुए कहा है कि भारत में बहुत ही खतरनाक प्रक्रिया चल रही है, आज देश की प्रमुख संस्थाएँ खतरे में हैं।
यह बातें दो बार देश के उप-राष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी ने नई दिल्ली में मार्च 17 को राज्यसभा सदस्य रहे भालचंद्र मुंगेकर की किताब के विमोचन के अवसर पर कहीं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जिन सिद्धांतों पर संविधान की प्रस्तावना की गई आज उनकी अवहेलना की जा रही है। अंसारी ने आगे कहा कि लोग मुश्किल समय में जी रहे हैं और प्रतिक्रिया करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यदि यह जारी रहा तो बहुत देर हो जाएगी। हालाँकि, अंसारी को शायद अपने ऊपर चिदंबरम जैसी कार्रवाई होने का डर था, इसीलिए वह अपने पूरे संबोधन में खुलकर कुछ नहीं बोल सके और चारों ओर नजरें धुमाते हुए बस एक ही बात को दोहराते रहे, “हम बहुत मुश्किल समय में जी रहे हैं। मुझे इसके विस्तार में जाने की जरूरत नहीं है, लेकिन सच्चाई यह है कि भारत के गणतंत्र की संस्थाएँ बहुत खतरे में हैं।”
क्या तुष्टिकरण पुजारी और लिबरल गैंग यह बताने का कष्ट करेंगे कि जब तक हामिद मियां उपराष्ट्रपति रहे, तब तक इस आदमी को कोई डर नहीं था; दूसरे, जब ये आदमी ईरान में राष्ट्रदूत रहा, ईरान में रॉ अधिकारियों के बारे में पाकिस्तान को सूचित कर भारत सुरक्षा को संकट में डाल दिया था। यानि जिम्मेदारी पद पर रहते भारतीय सुरक्षा की गोपनीयता को जगजाहिर कर रॉ अधिकारियों के जीवन को खतरे में डाल दिया था। मुसलमान होने पर देश से गद्दारी कर पाकिस्तान के टुकड़ों पर मालपुए खाते रहे। क्या हामिद अंसारी के ये काम संविधान और शपथ के विरुद्ध नहीं थे? (विस्तार से पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।) 
उन्होंने आगे कहा, “इस प्रक्रिया में काफी कुतर्क शामिल है इसलिए अधिकतर नागरिकों द्वारा इसे समझ पाना आसान नहीं है। हालाँकि, सच्चाई यह है कि बहुत खतरनाक प्रक्रिया चल रही है। यह हमारे लिए, देश के नागरिकों के लिए खतरनाक है।” अंसारी ने कहा कि भारत के मित्र देश स्थिति को खतरे की स्थिति के तौर पर देख रहे हैं जबकि देश के दुश्मन खुश हैं। हालाँकि, अंसारी ने यह नहीं बताया कि देश की कौन सी स्थिति खतरे वाली है, जिसे वह पड़ोसी देश तो देख पा रहे हैं, लेकिन वह नहीं बोल पा रहे। उन्होंने यह तो कह दिया कि देश के दुश्मन इस स्थिति से खुश हैं, लेकिन यह नहीं बताया कि देश के दुश्मन कौन हैं। उन्होंने आगे कहा, “इसलिए कुछ ऐसा(अंसारी ने कुछ का मतलब नहीं बताया) है, जिस पर गौर किया जाना चाहिए, मैं डा. मुंगेकर के शब्दों को जगाने वाला और यह याद दिलाने वाला मानता हूँ कि हमें भ्रमित किया जा रहा है और यदि हम इस प्रक्रिया को जारी रहने देंगे तो जगने में बहुत देर हो जाएगी।”
उन्होंने यह टिप्पणी शिक्षाशास्त्री और राज्यसभा सदस्य रहे भालचंद्र मुंगेकर की पुस्तक ‘माय एनकाउंटर्स इन पार्लियामेंट’ के विमोचन के मौके पर की। इस मौके पर राकांपा प्रमुख शरद पवार, भाकपा महासचिव डी. राजा और माकपा महासचिव सीताराम येचुरी भी उपस्थित थे।
वैसे हामिद अंसारी से देशहित में बयान देने की उम्मीद करना बेमानी होगी, क्योंकि जिस गाँधी परिवार ने देश पर 60 वर्षों तक राज किया उस पर अंसारी आज तक कुछ बोल नहीं सके, लेकिन जैसे ही मोदी सरकार केन्द्र की सत्ता में आई ऐसे ही देश में संविधान की अवहेलना होने लगी। गौर हो कि मोदी सरकार के बनने के बाद अपने कार्यकाल के आखिरी दिन हामिद अंसारी ने कहा था कि देश के मुस्लिम समुदाय में आज असुरक्षा का माहौल है, अपने आखिरी इंटरव्यू के जरिए हामिद अंसारी ने मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा था कि भारत का समाज सदियों से बहुलतावादी रहा है, लेकिन सबके लिए ये स्वीकार्यता का माहौल अब खतरे में है, लोगों की भारतीयता पर सवाल खड़े करने की प्रवृत्ति भी बेहद चिंताजनक है। कानून व्यवस्था को लागू करने की सरकारी अधिकारियों की क्षमता भी अलग-अलग स्तर पर खत्म हो रही है।
हामिद अंसारी का विवादों से गहरा नाता रहा है। बंगाल में जन्मे और एएमयू जैसे शिक्षण संस्थान में अपनी पढ़ाई करने वाले वह हामिद अंसारी ही थे, जिन्होंने भारत में यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा की उपस्थिति में गणतंत्र दिवस तो मनाया था, लेकिन हामिद अंसारी ने भारत के राष्ट्रध्वज को सलामी नहीं दी थी। इसके बाद यह तस्वीर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई थी। अंसारी ने वर्ष 2018 में देश के बंटवारे को लेकर विवादित बयान दिया था, उन्‍होंने कहा कि देश के विभाजन के लिए सिर्फ पाकिस्तान ही जिम्मेदार नहीं था, बल्‍क‍ि हिंदुस्तान भी जिम्मेदार था। इतना ही नहीं अंसारी ने कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर के उस बयान को भी सही ठहराया था, जिसमें थरूर ने कहा था कि अगर साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी जीती, तो हिंदुस्तान का संविधान खतरे में पड़ जाएगा और भारत हिंदू पाकिस्तान बन जाएगा।
अब अंसारी की विचारधारा जिन्ना वाली है या गाँधी वाली इस बात का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि 21 जून 2015, भारत के अलावा दुनिया के 190 देश पहली बार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रहे थे। राजपथ पर हुए कार्यक्रम में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूरा मंत्रिमंडल मौजूद था, लेकन बड़े संवैधानिक पद पर रहते हुए भी कार्यक्रम में हामिद अंसारी मौजूद नहीं हुए। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी तबियत खराब होने का हवाला दिया था। इतना ही नहीं मोदी सरकार द्वारा पाकिस्तान पर की गई बालाकोट स्ट्राईक के बाद जो लोग सेना पर सवाल उठा रहे थे, उस पर बोलते हुए अंसारी ने कहा था कि बालाकोट पर सवाल उठाना देशद्रोह नहीं बल्कि लोगों का अधिकार है। 
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10 साल उपराष्ट्रपति रहे, लेकिन कभी मुसलमानों की कोई फ़िक्र नहीं कोई ज़िक्र नहीं, लेकिन हामिद अंसारी रिटायर होते ही '.....
वहीं पिछले वर्ष रॉ के एक पूर्व अधिकारी ने पिछले वर्ष एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा था कि पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने 1990-92 के बीच ईरान में भारतीय राजदूत रहते तेहरान में रॉ के सेटअप को उजागर कर वहाँ काम कर रहे अधिकारियों की जिन्दगी को खतरे में डाल दिया था।