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तेल की सप्लाई बंद करो, इनके राजदूतों को बाहर निकालो: मुस्लिम देशों से बैन का किया ​आह्वान : OIC की बैठक में ईरान

गाजा के इसी अस्पताल पर हुए हमले में करीब 500 लोगों की हो गई थी मौत (फोटो साभार: अल जज़ीरा)
इस्लामिक देशों के संगठन OIC की बैठक में ईरान ने इजरायल के खिलाफ सदस्य देशों को खूब भड़काया। उसकी तेल सप्लाई रोकने को कहा। सदस्य देशों से इजरायली राजदूतों को अपने-अपने देशों से बाहर निकालने का आह्वान किया। उल्लेखनीय है कि इजरायल के साथ ईरान के राजनयिक रिश्ते नहीं हैं।

सऊदी अरब के जेद्दा में ओआईसी की बैठक में इजरायल पर प्रतिबंध की अपील करते हुए ईरान के विदेश मंत्री होसैन अमीर-अब्दुलाहियान ने सभी मुस्लिम मुल्कों से इस पर सहयोग माँगा। बता दें कि ओआईसी 57 देशों का समूह है, जिसमें 48 देश मुस्लिम बाहुल्य वाले हैं। यह बैठक गाजा के एक अस्पताल पर हमले के बाद 18 अक्टूबर 2023 को हुई थी। इस बैठक में इजरायल पर बैन लगाने को लेकर सहमति नहीं बनी, लेकिन ओआईसी ने गाजा पर हमलों को आतंकवाद और युद्ध अपराध बताया है।

इजरायल पर पूर्ण बैन की माँग

इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष पर चर्चा के लिए जेद्दा में ओआईसी की अर्जेंट मीटिंग बुलाई गई थी। इसी बैठक के दौरान ईरान ने बयान जारी कर सदस्य देशों से इजरायल पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया। ईरान के विदेश मंत्री अब्दुलाहियान ने कहा कि इजरायल का हमला ‘युद्ध अपराध’ और ‘अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन’ है। उन्होंने कहा कि ओआईसी के सदस्य देशों को इजरायल के खिलाफ प्रतिबंध लगाने चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी घटनाएँ दोबारा न हो।
ईरान के विदेश मंत्री होसैन अब्दुलाहियान ने कहा कि इजरायल का हमला ‘एक निर्दोष नागरिक आबादी के खिलाफ एक क्रूर और अमानवीय कार्रवाई’ थी। उन्होंने कहा कि हमले में मारे गए लोगों में महिलाएँ, बच्चे और बुजुर्ग शामिल थे। उन्होंने कहा कि इजरायल को इस हमले के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। ओआईसी के सदस्य देशों से इजरायल के खिलाफ प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया। इजरायल द्वारा कथित तौर पर किए जा रहे युद्ध अपराधों की जाँच के लिए एक टीम बनाने की भी बात कही।

ओआईसी ने इजरायल से हमलों को रोकने के लिए कहा

इस मामले में ओआईसी की ओर से साझा बयान जारी किया गया है। ओआईसी के महासचिव ने बैठक के बाद ये बयान जारी किया, जिसमें अस्पताल पर हमले के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहराया गया और ‘इजरायली आतंकवाद’ की निंदा की गई। गाजा में इजरायली हमलों को युद्ध अपराध करार देते हुए इजरायल को युद्ध अपराधों के लिए सजा देने की बात कही गई।

इजरायल ने कहा, उसने नहीं किया अस्पताल पर हमला

एक तरफ ईरान समेत तमाम मुस्लिम देश गाजा के अस्पताल पर हमले के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। वहीं इजरायल ने सबूतों के साथ बताया है कि ये हमला इस्लामिक जेहाद ने किया था। इजरायल ने इसके ऑडियो-वीडियो सबूत भी शेयर किए हैं। इनसे पता चलता है कि इजरायल को निशाना बनाकर दागा गया रॉकेट मिसफायर होकर अस्पताल पर गिर गया जिससे करीब 500 लोगों की मौत हो गई।

इजरायल ने गाजा में मानवीय सहायता के लिए भरी हामी

18 अक्टूबर को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन से मुलाकात के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने गाजा पट्टी में मानवीय सहायता पहुँचने को नहीं रोकने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि मिस्र से होकर ये सहायता पहुँच सकती है, लेकिन ये दक्षिणी गाजा तक ही सीमित रहनी चाहिए। अगर सहायता के नाम पर हमास को मदद पहुँचाने की कोशिश की गई, तो फिर वो चुप नहीं बैठेगा।
वहीं, अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक बार फिर से इजरायल के लिए कवच बन गया। अमेरिका ने बुधवार (18 अक्टूबर 2023) को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव को वीटो कर दिया, जिसमें गाजा पट्टी तक मानवीय सहायता की पहुँचाने की अनुमति देने के लिए इजरायल और फिलिस्तीनी आतंकवादियों हमास के बीच संघर्ष विराम का आह्वान किया गया था।

हमास के हमले में करीब 1400 इजरायलियों की मौत

हमास के हमलों में इजरायल के करीब 1400 लोगों की मौत हुई है। 3000 से ज्यादा घायल हैं। हमास ने इस हमले में करीब 250 इजरायली नागरिकों को बंधक भी बना लिया था। इजरायली बंधकों को छुड़ाने और हमास को मिटाने के लिए गाजा की घेराबंदी कर दी गई है। इजरायल के जवाबी कार्रवाई में करीब तीन हजार आतंकी मारे गए हैं। इजरायल वार टीम ने एक एक्स पोस्ट के जरिए बताया है कि इजरायल को टारगेट कर हमास के दागे रॉकेट में से 30 से 40% मिसफायर होकर गाजा पट्टी में ही गिरे हैं।

ईरान में हिजाब पहनवाने के लिए फिर से एक्टिव हुई ‘मोरैलिटी पुलिस’, महिलाओं को निर्देश- सिर ढको, ढीले कपड़े पहनो : ‘…क्या तुम्हारे ऊपर बलात्कारी को छोड़ दें’

                                      ईरान में फिर से मोरैलटी पुलिस करेगी पेट्रोलिंग (तस्वीर साभार: BBC)
ईरान में हुए हिजाब विरोधी प्रदर्शन के महीनों बाद अब फिर से वहाँ ‘मोरैलिटी पुलिस (Morality Police)’ पैट्रोलिंग करने लगी है। ईरान के लॉ इन्फोर्समेंट फोर्स के प्रवक्ता सईद मोंटाजेरालमहदी ने रविवार (17 मार्च 2023) को जानकारी दी कि मोरैलिटी पुलिस अब फिर से काम करने लगी है। वो पैदल और गाड़ियों से उन लोगों को पकड़ेंगे जो इस्लामी देश में उस हिसाब से खुद को ढककर नहीं रखते।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवक्ता ने बताया कि मोरैलटी पुलिस पहले चेतावनी देगी और उसके बाद कानूनी कार्रवाई करेगी। इनसे बचने के लिए ड्रेस कोड का पालन करना जरूरी होगा। जैसे महिलाओं को हेडस्कार्फ के साथ ढीले कपड़े पहनने होंगे। अगर महिलाएँ ऐसे नियमों का उल्लंघन करती पाई जाती हैं तो उन्हें गिरफ्तार करके री-एड्यूकेशन फैसिलिटी में डाल दिया जाएगा।

10 माह पहले ईरान में मोरैलटी पुलिस द्वारा पिटाई किए जाने के बाद महसा अमीनी की मौत हो गई थी। घटना के चलते पूरे देश भर में प्रदर्शन हुए थे। जिसके कुछ महीनों तक कहीं कोई मौरैलटी पुलिस नहीं दिखाई दी। वहीं हिजाब नियमों का उल्लंघन करने वालों को पकड़ने के लिए कैमरे लगाए गए थे। उनके जरिए निगरानी करके लोगों को चेतावनी दी जा रही थी या फिर जुर्माना लगाया जा रहा था। इसके अलावा कुछ लोगों को कोर्ट में पेश होने के लिए भी कहा गया था।

ईरान में ड्रेस कोड फॉलो करने के लिए नियम इतने सख्त हैं कि अगर कोई कार में बैठे हुए भी इनका उल्लंघन किए दिखता है तो उसकी कार जब्त कर ली जाती है। इसके अलावा कैफे, रेस्टोरेंट, शॉपिंग सेंटर्स आदि पर भी सख्त नजर बनाकर रखी जाती है।

बताया जा रहा है कि इस हफ्ते हिजाब संबंधी कई हाई प्रोफाइल मामले सामने थे। ऐसे में प्रशासन ने एक वीडियो जारी की थी। इसमें पुलिस अधिकारियों के साथ उनकी कैमरा क्रू भी थी। वो महिलाओं के पास जा जाकर हिजाब ठीक करने को कह रहे थे। वीडियो में महिलाओं का चेहरा तक ब्लर नहीं किया गया था। बस एनिमेशन के जरिए बताया जा रहा था कि उनकी पहचान हो गई है और अब बात कानून तक जाएगी।

वीडियो में कहा जा रहा था- या तो अपना हिजाब ठीक करो, वरना वैन में घुसो। महिला से ये भी बोला जा रहा था- “तुम अगर आजादी पर विश्वास रखती हो तो हम तुम पर सारे चोर और बलात्कारियों को छोड़ देते हैं फिर तुम समझोगी की चीजें कैसे काम करती हैं।”

इसी तरह ईरान में हिजाब के खिलाफ बोलने पर एक्टर मोहम्मद सादेगेही को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने एक महिला के साथ बदसलूकी की तस्वीर पर प्रतिक्रिया दी थी, “अगर मैं ऐसे दृश्य देखूँ तो मैं तो मर्डर कर लूँ। देखते जाओ लोग तुम्हें मार देंगे…।” उनके इसी बयान पर ईरानी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। इससे पहले ईरान में एक एक्ट्रेस अजादेह समादी पर 6 महीने तक सोशल मीडिया न यूज करने के लिए बैन लगाया गया था। ऐसा सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि वो एक थिएटर डायरेक्टर के अंतिम शव यात्रा में बिन हेडस्कार्फ चली थी। 

रूस-यूक्रेन के बाद अब ईरान-तालिबान में जंग? ‘जिहाद का आदेश मिलते ही ईरान पर कर लेंगे कब्ज़ा’

                                    नदी के पानी को लेकर तालिबान और ईरान में जंग (फाइल फोटो)
जहाँ एक तरफ दुनिया रूस और यूक्रेन के युद्ध से परेशान है, वहीं अब ईरान और तालिबान में भी संघर्ष शुरू हो गया है। दोनों अब इस बात को लेकर भी बहस कर रहे हैं कि सच्चा मुस्लिम कौन है। अब रविवार (28 मई, 2023) को तालिबान ने धमकी दी है कि वो 24 घंटे में ईरान पर कब्ज़ा कर लेगा। साथ ही तालिबान के कमांडर अब्दुल्ला हामिद खुरासानी ने एक वीडियो सन्देश जारी करते हुए दावा किया कि उसके लड़ाके ईरान के साथ उसी जोश से लड़ेंगे, जैसे अमेरिका से लड़े थे।

यदि तालिबान ईरान पर कब्ज़ा कर लेता है, उस स्थिति में पाकिस्तान की भी बहुत मुश्किलें बढ़ सकती है। पाकिस्तान पर भी संकट के बादल मंडराने लगेंगे। ईरान से पाकिस्तान पर आसानी से कब्ज़ा किया जा सकता है। सम्भावना यह भी व्यक्त की जा रही है, महंगाई और विदेशी कर्ज से परेशान पाकिस्तानी तालिबान से हाथ मिलाकर अपनी ही सरकार के विरुद्ध लड़ सकते हैं। 

साथ ही उसने कहा कि जैसे ही जिहाद के लिए हरी झंडी तालिबान के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से मिलती है, वैसे ही ईरान पर कब्ज़ा करने की शुरुआत कर दी जाएगी। तालिबानियों ने ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी पर तंज कसते हुए भी वीडियो डाला है। इसमें एक तालिबानी कंटेनर में पानी डालता है और कहता है, “इब्राहिम रईसी, आकर ये वॉटर बैरल ले लो, लेकिन हमला मत करो। हम डर गए हैं।” ईरान की मीडिया ने संघर्ष का कारण नहीं बताया है, बस इतना कहा है कि ये ड्रग तस्करी को लेकर है।

ये भी दावा किया जा रहा है कि पहले तालिबान ने ईरान की फ़ौज पर सीमा पर गोलीबारी की। वहीं तालिबान की तरफ से इंगित किया गया है कि पानी को लेकर ये लड़ाई चल रही है। दोनों मुल्कों के बीच हेलमंद नदी बहती है, जिसे लेकर ईरान पहले ही अफगानिस्तान को चेतावनी दे चुका है। जब से तालिबान अफगानिस्तान की सत्ता में लौटा है, तब से ये तनाव बढ़ गया है। 1973 की एक संधि में तय हुआ था कि अफगानिस्तान को इस नदी की पानी का एक हिस्सा ईरान को देना होगा।

वहीं ईरान के गृह मंत्री ने कहा है कि तालिबान को पुख्ता जवाब दे दिया गया है और सीमा पर स्थिति नियंत्रण में है। ईरान सरकार ने कहा कि तालिबान की गोलीबारी में उसके दो फौजी मारे गए हैं। उन्होंने कहा कि अब सीमा पर शांति है, तालिबान ने भड़काऊ कार्रवाई की थी। ईरान की फ़ौज ने चेताया है कि अंतरराष्ट्रीय संधि का उल्लंघन करने पर तालिबान के खिलाफ ईरान अपना रुख बदल लेगा। बता दें कि अगस्त 2021 में तालिबान सत्ता में आया था।

ईरान : 4 महीने में 700 लड़कियों को दिया जा चुका है जहर : स्कूली लड़कियों पर केमिकल अटैक, 100 छात्राएँ अस्पताल में भर्ती

ईरान में स्कूल जाने वाली लड़कियों को दिया गया जहर (फोटो साभार: iranintl)
ईरान (Iran) में पिछले साल से हिजाब विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं। इस्लामिक देश में स्कूल जाने वाली कई लड़कियों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उन्हें स्कूल जाने से रोकने के लिए जहर दिया जा रहा है। हाल ही में ईरान के उप स्वास्थ्य मंत्री यूनुस पनाही ने इसका खुलासा किया। मंत्री ने बताया कि ईरान के शहर कोम समेत कई जगहों पर लड़कियों के स्कूलों को बंद कराने के लिए कुछ लोगों द्वारा सैकड़ों छात्राओं को जहर दिया गया। जहर केमिकल कंपाउंड के रूप में दिया गया और अभी तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। फिलहाल मामले की जाँच चल रही है।

1 मार्च 2023 को ईरान में स्‍कूली लड़कियों पर एक बार फिर घातक हमला हुआ है। राजधानी तेहरान और उत्तर-पश्चिमी शहर अर्दबील के कम से कम 10 स्कूलों को केमिकल-गैस अटैक से निशाना बनाया गया। इससे सैकड़ों छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई। 100 से ज्‍यादा छात्राओं को अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो और फोटोज सामने आ रहे हैं, जिसमें लड़कियों को अस्पताल में इलाज कराते हुए देखा जा सकता है।

अभिभावकों का दावा है कि स्कूली छात्राओं को हाल ही में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए टारगेट किया जा रहा है। दरअसल, पिछले तीन महीनों में पूरे ईरान में स्कूली छात्राओं पर इस तरह के हमले के कई मामले सामने आए हैं। लेकिन अभी तक किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है। इस्लामिक देश के आंतरिक मंत्री अहमद वाहिदी ने 1 मार्च 2023 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अब तक देश भर के स्कूलों में लड़कियों पर जहरीली गैस के हमले करने वाले किसी भी शख्स को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

24 फरवरी 2023 को जमीलेह कादिवार (Politician Jamileh Kadivar) ने कहा कि अब तक कम से कम 400 स्कूली छात्राओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि वे हमलों की जाँच करेंगे। तेहरान में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी (Ebrahim Raisi) ने अहमद वाहिदी को जितनी जल्दी हो सके इस तरह के हमलों का कारण पता लगाने का निर्देश दिया।

न्यूयॉर्क स्थित सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान (CHRI) ने आरोप लगाया है कि हाल के महीनों में कोम और तेहरान जैसे बड़े शहरों में सैकड़ों छात्रों, जिनमें अधिकांश लड़कियाँ हैं, पर जहरीली गैस के हमले के बाद ईरान में एक लड़की की मौत हो गई है। वहीं, वाशिंगटन स्थित ईरान इंटरनेशनल न्यूज चैनल के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने इन खबरों का खंडन किया है कि 11 वर्षीय फतेमेह रेज़ाई (Fatemeh Rezaei) की मौत जहरीली गैस के हमले के बाद हुई है।

ईरान में नवंबर महीने से अब तक सैकड़ों लड़कियों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। उन्हें साँस की समस्या, चक्कर आना और थकान का सामना करना पड़ा है। कुछ लोग लगातार ईरान में लड़कियों का स्कूल बंद करने की माँग कर रहे हैं। इसलिए संदेह जताया जा रहा है कि लड़कियों को स्कूल जाने से डराने के लिए ये साजिशन किया जा रहा है।

नवंबर से अब तक 700 लड़कियों को जहर

बीबीसी के मुताबिक, ईरान में नवंबर 2022 से स्कूल की लड़कियों को जहर देना शुरू किया गया। नवंबर से अब तक 700 लड़कियों को जहर दिया जा चुका है। पहला हमला 30 नवंबर को सामने आया था। जब कोम में नौर टेक्निकल स्कूल के 18 छात्रों को अस्पताल ले जाया गया था। कोम तेहरान से लगभग 160 किमी दक्षिण में है। यह बेहद रूढ़िवादी और धार्मिक तौर पर कट्टर शहर माना जाता है। देश के ज्यादातर नेताओं और राष्ट्रपतियों ने कोम शहर से ही मजहबी तालीम ली है।
पिछले एक हफ्ते में बोरुजेर्ड शहर के चार स्कूलों में कम से कम 194 लड़कियों को कथित तौर पर जहर दिया गया है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान के पास पारडीस के खय्याम गर्ल्स स्कूल में 28 फरवरी 2023 को और 37 छात्राओं को जहर दिया गया।
ईरान में पिछले साल सिंतबर में 22 साल की लड़की महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत होने के बाद यह विरोध प्रदर्शन भड़के थे। महसा को हिजाब ठीक से न पहनने के जुर्म में हिरासत में लिया गया था।

ईरान : उल्टी, बदन दर्द, तेज बुखार…: लड़कियाँ न जा पाएँ स्कूल इसलिए उन्हें दिया गया जहर, 4 महीने में 50+ छात्राएँ बीमार

ईरान में स्कूल जाने वाली कई लड़कियों को जहर देकर मार डालने की साजिश का खुलासा हुआ है। यह करतूत किसकी है इस बात का पता फ़िलहाल नहीं चल पाया है। इस मामले में अभी तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि भी नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि इस हरकत के पीछे कुछ कट्टरपंथी हैं जो ईरान के स्कूलों को बंद करवाना चाह रहे हैं। अभी तक सभी बीमार छात्र सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कोम शहर में इस बात का खुलासा तब हुआ जब स्कूल जाने वाली लड़कियाँ एक के बाद एक बीमार होने लगीं। कुछ ही समय बाद इन लड़कियों की सँख्या 50 पहुँच गई। पहली घटना नवम्बर 2022 की बताई जा रही। तब कोम शहर के ही एक स्कूल में एक साथ लगभग 18 लड़कियों के बीमार होने की घटना सामने आई। तब उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। यहाँ उन सभी लड़कियों को उलटी, पेट दर्द, हाथों-पैरों में तेज दर्ज के साथ साँस लेने में दिक्कत महसूस हुई थी।

अंतिम घटना 22 फरवरी 2023 (बुधवार) को कोम शहर के एक स्कूल में दर्ज की गई थी। यहाँ एक ही स्कूल की 15 लड़कियों की तबियत अचानक बिगड़ गई थी। सभी में एक जैसी बीमारी के लक्षण पाए गए थे। पहली और अंतिम घटना के बीच कई अन्य स्कूलों में इसी प्रकार की वारदात हुई। लगभग हर वारदात में पीड़ित छात्रों ने एक जैसी परेशानी महसूस की। हालाँकि बीमार होने वाले छात्रों में कुछ लड़के भी थे लेकिन लड़कियों की तादाद अधिक थी।

इन घटनाओं के बाद कुछ अभिभावकों ने लड़कियों को जहर दिए जाने की आशंका जताई। इस शक पर अधिकारियों ने जाँच शुरू की। शुरुआती जाँच में स्थानीय अधिकारियों द्वारा किसी प्रकार का जहर न मिलने की जानकारी दी गई। लड़कियों के माता-पिता इस जाँच से संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने अपने बच्चों को स्कूल भेजना ही बंद कर दिया। हालाँकि गनीमत से अभी तक इस हरकत से किसी छात्रा की मौत नहीं हुई लेकिन लोगों में काफी नाराजगी फ़ैल गई। लोगों की नाराजगी देखते हुए ईरान सरकार ने इस मामले की बड़े स्तर पर जाँच करवाई।

इस जाँच के बाद ईरान के उप शिक्षा मंत्री युनेस पनाही ने जानकारी देते हुए बताया कि कुछ लोगों द्वारा छात्रों को केमिकल के माध्यम से जहर दिया जा रहा था। उन्होने आगे बताया कि छात्रों को परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योकि घटना में प्रयोग हुआ केमिकल बहुत हानिकारक नहीं है। अभी तक किसी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

सीरिया की राजधानी में इजरायल ने दागी ताबड़तोड़ मिसाइलें

                                                सीरिया की राजधानी दमिश्क (साभार: गार्डियन)
इजरायल (Israel) ने रविवार (19 फरवरी 2023) को तड़के सीरिया की राजधानी दमिश्क (Damascus, Syria) में मिसाइल दागी। इस हमले में 15 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई लोग घायल हो गए हैं। इस इलाके में सीरिया की सिक्योरिटी एजेंसी इंटेलीजेंस हेडक्वॉर्टर स्थित है। इसके साथ ही यहाँ कई वरिष्ठ अधिकारियों के घर भी हैं।

सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के मुताबिक, इजरायल द्वारा दागी की गई मिसाइल काफर सोउसे में की गई, जो एक 10 मंजिला इमारत पर जाकर गिरी। सीरिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इजरायल ने गोलन हाइट्स की तरफ से हवाई हमला किया। मंत्रालय के अनुसार, यह हमला रिहायशी इलाके में की गई है। हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इजरायल यह हमला किसी खास व्यक्ति को निशाना बनाकर किया था या कोई अन्य कारण था।

इससे पहले सीरिया में शुक्रवार (17 फरवरी 2023) को एक और हमला हुआ था, जिसमें 53 लोग मारे गए थे। सीरिया की सरकारी मीडिया ने इसके लिए खूंखार आतंकी संगठन ISIS को जिम्मेदार बताया था। रविवार को किए गए हमले को लेकर इराजयल की तरफ से कोई बयान नहीं जारी किया गया है।

सीरिया में किसी भी एयर स्ट्राइक को लेकर आमतौर पर इजरायल बयान नहीं जारी करता है। इजराइल डिफेंस फोर्सेज के मुताबिक, वो उन जगहों पर हमला करती है, जहाँ इजरायल के खिलाफ काम करने वाले आतंकी गुट रहते हैं या फिर जहाँ बड़ी मात्रा में इन गुटों के हथियार रखे होते हैं।

इजरायल ईरान समर्थित लेबनान के हिज्बुल्लाह आतंकवादी संगठन को लगातार निशाना बनाता है। सीरिया में साल 2011 में शुरू हुए युद्ध के बाद इजरायल सीरिया पर सैकड़ों हमले कर चुका है। इजरायल इसमें आतंकियों और सीरियाई सैनिकों को निशाना बनाता है। इजरायल का कहना है कि वह अपनी सीमा पर ईरान के प्रभाव को स्वीकार नहीं करेगा। इस आतंकी संगठन से उसे लगातार खतरा बना रहता है।

इससे पहले इजरायल ने जनवरी में भी सीरिया पर हवाई हमला किया था। सीरियाई सेना ने इसकी जानकारी दी थी। इस हमले में दो सैनिक मारे गए थे, जबकि दो अन्य घायल हुए थे। पिछले साल अगस्त में भी इजरायल ने सीरिया के 2 हवाईअड्डों को निशाना बनाया था। इसमें 6 सीरियाई सैनिकों और 2 आतंकी मारे गए थे। ईरान समर्थक हिज़्बुल्लाह के शीर्ष कमांडर इमाद मोगनियाह को 2008 में काफ़र सूसा में ही एक बमबारी में मार दिया गया था।

लेबनान का हिजबुल्ला समूह शिया मुस्लिमों का आतंकवादी संगठन है। इसके साथ ही यह एक राजनीतिक पार्टी भी है। ईरान और सीरिया के शिया बहुल मुल्क होने के कारण इस आतंकी संगठन को दोनों देशों का समर्थन हासिल है। 1982 में ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने लेबनान में घुसे इजरायली लोगों को मारने के लिए हिजबुल्ला की स्थापना की थी।

‘मुस्लिमों के साथ मत खेलो… ’: खामनेई के कार्टून पर ईरान ने शार्ली एब्दो को धमकी - सलमान रुश्दी जैसा हाल होगा

                 खामनेई के कार्टून पर ईरान ने शाली एब्दो को दी धमकी (फोटो साभार: Times of Israel)
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख मेजर जनरल हुसैन सलामी ने फ्रांस और वहाँ की मशहूर व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्दो के संपादकों को धमकी दी है। कहा है कि उनका हश्र लेखक सलमान रुश्दी जैसा हो सकता है। दरअसल, शार्ली एब्दो पत्रिका में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई पर एक कार्टून पब्लिश किया था। इसी कार्टून को लेकर पत्रिका के संपादकों को धमकी दी जा रही है।

सलमान रुश्दी को साल 1988 में उपन्यास ‘द सैटेनिक वर्सेज’ के प्रकाशन के बाद से ही जान से मारने की धमकियाँ दी जा रही है। इसके कारण वे कई साल छिपकर रहने के लिए मजबूर हो गए थे। साल 1989 में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खुमैनी ने उनके खिलाफ फतवा तक जारी किया था। पिछले साल न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान उनपर हमला हुआ था और वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख मेजर जनरल हुसैन सलामी ने शार्ली एब्दो को धमकी देते हुए कहा है, “मैं फ्रांस और शार्ली एब्दो के डायरेक्टर्स को सलमान रुश्दी की हालत पर नजर डालने की सलाह दे रहा हूँ। मुसलमानों के साथ मत खेलो। सलमान रुश्दी ने 30 साल पहले कुरान और इस्लाम के पवित्र पैगंबर का अपमान किया और फिर छिप गए। देर-सवेर, मुसलमान बदला लेंगे और आप बदला लेने वालों को गिरफ्तार कर सकते हैं, लेकिन जो मर जाएगा वह फिर से नहीं उठेगा।”

शार्ली एब्दो पत्रिका के संपादक, लॉरेंट सॉरीसेउ ने इस धमकी का जवाब देते हुए कहा है कि वह ईरान के मौलवियों के कुछ और कार्टून प्रकाशित करेंगे। उन्होंने कहा है “मुल्ला खुश नहीं हैं। ऐसा नहीं लगता कि उनके सर्वोच्च नेता के कार्टून ने उन्हें हँसाया है। एक तरह से यह सम्मान की बात है, लेकिन इन सबसे ऊपर यह साबित होता है कि उन्हें लगता है कि उनका शासक बेहद कमजोर है।”

दरअसल, शार्ली एब्दो ने एक प्रतियोगिता आयोजित की थी। इस प्रतियोगिता में ईरान में चल रहे हिजाब विरोधी प्रदर्शन का समर्थन करने और ईरानी नेता का विरोध करने के लिए कार्टून बनाने के लिए कहा गया था। इस प्रतियोगिता के विजेता द्वारा बनाए गए कार्टून को शार्ली एब्दो ने जारी किया था।

कार्टून पब्लिश होने के बाद ईरान और फ्रांस के बीच तनाव बढ़ गया था। इस तनाव के बाद, फ्रेंच इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च को बंद कर दिया गया। इस इंस्टीट्यूट के बंद होने को ईरान के विदेश मंत्रालय ने कार्टूनों के जवाब में पहला कदम बताया था। साथ ही फ्रांस को सबक सिखाने के लिए कुछ अन्य कदम उठाने की धमकी दी थी।

इन धमकियों के जवाब में, व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्दो ने बीते सप्ताह ईरान का मज़ाक उड़ाते हुए एक और कार्टून तैयार किया। इस कार्टून को पत्रिका ने अपने कवर के रूप में जारी किया। 

कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि कार्टून पब्लिश होने के बाद शार्ली एब्दो पर साइबर हमला भी हुआ था। साइबर हमले के जवाब में पत्रिका के संपादक लॉरेंट सॉरीसेउ ने कहा था, “एक डिजिटल हमला किसी को मार नहीं सकता। लेकिन यह टोन सेट करता है। मुल्ला हुकूमत इस कदर खतरा महसूस करती है कि वह अपने वजूद के लिए एक फ्रांसीसी अखबार की वेबसाइट को हैक करना जरूरी समझती है।”

पंजशीर में नरसंहार कर रहे तालिबान-पाकिस्तान को ईरान की चेतावनी : लक्ष्मण रेखा पार न करें

इस्लाम के नाम पर आतंक को प्रोत्साहित और प्रशिक्षित करने में पाकिस्तान विश्व में मशहूर है। अगर पाकिस्तान ने आतंक पर खर्च करने की बजाए देश के विकास पर खर्च किया होता, इधर-उधर देशों के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता।  
तालिबान के खिलाफ लोहा ले रही अफगानिस्तान की पंजशीर घाटी में अब तालिबान पाकिस्तान के साथ मिलकर नरसंहार कर रहा है, जिसपर ईरान ने बुरी तरह खफा हो गया है, अफगानिस्तान के बेहद अहम पड़ोसी देश ईरान के विदेश मंत्रालय ने तालिबान को कड़ी चेतावनी देते हुए लक्ष्मण रेखा पार नहीं करने की चेतावनी दी है, ईरान ने कहा कि वह पंजशीर में पाकिस्तान के हस्तक्षेप की जांच कर रहा है। उन्होंने कहा कि पंजशीर के कमांडरों की शहादत बेहद निराशाजनक है और ईरान कल रात के हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करता है।

तेहरान टाइम्स ने ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद खतीब ज़ादेह के हवाले से कहा, “पंजशीर हमले के दौरान पाकिस्तानी हस्तक्षेप की जांच की जा रही है।” ईरान का मानना है कि अंतर-अफगान वार्ता ही अफगान समस्या का एकमात्र समाधान है। उन्होंने कहा- ‘मैं दृढ़ता से चेतावनी देता हूं कि सभी लक्ष्मण रेखा को पार न करें और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जिम्मेदारियों पर विचार किया जाना चाहिए।

 ईरानी प्रवक्ता ने कहा, “ईरान अफगानिस्तान के घटनाक्रम पर करीब से नजर रखे हुए है।” ईरान की चेतावनी ऐसे समय में आई है जब पंजशीर विद्रोहियों ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना ने तालिबान को जीतने के लिए हवाई सहायता प्रदान की। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि तालिबान ने पाकिस्तान की मदद से नरसंहार को अंजाम दिया।

तालिबान-पाकिस्तान के इस हमले में ताजिक मूल के विद्रोही नेता अहमद मसूद को बड़ा झटका लगा है, उनके प्रवक्ता फहीम दशती और शीर्ष कमांडर जनरल साहिब अब्दुल वदूद झोर मारे गए. मसूद के सुरक्षित स्थान पर चले जाने के बाद तालिबान ने सोमवार सुबह दावा किया कि उन्होंने पंजशीर पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है। इस बीच मसूद ने ट्वीट कर कहा कि तालिबान हमारे साथ युद्ध नहीं लड़ रहा है बल्कि उनका नेतृत्व पाकिस्तानी सेना और आईएसआई कर रही है। तालिबान हमारे साथ मुकाबला करने के लिए पर्याप्त मजबूत नहीं हैं लेकिन पाकिस्तानी सेना उनके साथ सहयोग कर रही है।

‘ये ट्रेलर था… तुम्हारी जिंदगी कभी भी, कहीं भी खत्म कर सकते हैं’ – इजरायली राजदूत को लेटर-धमकी

इजरायल दूतावास के नजदीक हुए विस्फोट के बाद शक की सुइयाँ ईरान पर टिकी हुई हैं। छानबीन की जा रही है कि आखिर पिछले 1 माह में कौन-कौन ईरानी नागरिक भारत आया। इस बीच पत्रकार आदित्य राज कौल ने अपने ट्विटर पर उस आतंकी की चिट्ठी को शेयर किया है, जिसने भारत में इजरायल दूतावास के बाहर हमला बोला।

यह पत्र भारत में इजरायल दूतावास में राजदूत डॉ रॉन मलका के नाम है। इसमें कहा गया है, “हम तुम्हारी जिंदगी कभी भी, कहीं भी खत्म कर सकते हैं।” आतंकी ने लिखा कि दूतावास के बाहर हुआ हमला सिर्फ एक ट्रेलर दिखाया गया है कि हम तुम पर कैसे निगरानी बनाए हुए हैं।

आतंकी का पत्र में कहना है कि इजरायल उनके निशाने पर है। कोई उन्हें नहीं रोक सकता। इजयराली चाहे जितनी भी कोशिश कर लें, लेकिन वे (आतंकी) उनकी जिंदगी कभी भी, कहीं भी खत्म कर देंगे। इसमें यह भी लिखा है कि वह इजरायल के आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करना चाहते हैं। मासूमों का खून नहीं बहाना चाहते।

धमकियाने अंदाज में लिखा कहा गया, “याद रखना, इजरायली आतंकी विचारधारा के हर प्रतिभागी और सहायक को अस्तित्व में नहीं रहने दिया जाएगा। हमारे जाबाँजों (हीरो) द्वारा बड़े और बढ़िया बदले के लिए तैयार हो जाओ।” 

इस पत्र के अंत में ईरानी सेना के अधिकारी कासिम सुलेमानी, ईरानी नेता अबु महदी अल-मुहनदीस और ईरानी वैज्ञानिक डॉ मोहसिन फकरेजादेह को शहीद बताकर इनके नामों का उल्लेख किया गया है। आखिर में इजरायली लोगों को कहा गया है कि वे बस अब अपने दिन गिनने शुरू करें।

गौरतलब हो कि दिल्ली में इजरायली दूतावास के पास बम ब्लास्ट की सुरक्षा एजेसियाँ हर एंगल से जाँच कर रही हैं। इसी कड़ी में दिल्ली पुलिस ने विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) से पिछले एक महीने में दिल्ली आए सभी ईरानी नागरिकों के बारे में जानकारी माँगी है। साथ ही उन ईरानी नागरिकों की लिस्ट भी माँगी है, जो पिछले काफी दिनों से भारत मे रह रहे हैं।

मालूम हो कि इजरायल दूतावास के पास कम तीव्रता के विस्फोट के बाद से ही देश की सुरक्षा एजेंसियाँ हाई अलर्ट पर हैं। ब्लास्ट की घटना के बाद दिल्ली पुलिस शहर में रह रहे ईरानियों की तलाश रही और कुछ से पूछताछ भी की जा रही है। जिन ईरानी नागरिकों के वीजा एक्सपायर हो गए हैं और फिर भी रुके हैं, उनको लेकर FRRO से डेटा लिया गया है।

अब तक कि जाँच से पता चला है कि जब धमाका हुआ था, तो उस इलाके में लगभग 45000 मोबाइल नंबर एक्टिव थे। स्पेशल सेल की टीम घटना से जुड़े सबूतों को बरामद करने के लिए लगातार मौके पर पड़ताल कर रही हैं।

मीडिया सूत्रों का कहना है कि घटनास्थल से मिले पत्र में लिखी धमकी की लिखावट काफी साफ-सुथरी है, जिसे किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में नहीं लिखा गया है। यह इस बात का संकेत देती है कि धमाका पहले से की गई योजना के तहत किया गया है।

कहाँ है ‘पत्रकार’ सैयद मोहम्मद अहमद काजमी, क्या कर रहा है? 2012 बम धमाके में हुआ था गिरफ्तार

                                  दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के साथ सैयद मोहम्मद अहमद काज़मी
दिल्ली स्थित इजरायली दूतावास के नज़दीक शुक्रवार (29 जनवरी 2021) को बम धमाका हुआ था। फॉरेंसिक जाँच में पता चला कि इजरायली दूतावास पर हमले के लिए ब्लैक पाउडर का इस्तेमाल किया गया था।

दिल्ली स्थित इजरायली दूतावास पर बम धमाका

दिल्ली स्थित इजरायली दूतावास के पास शुक्रवार (जनवरी 29, 2021) शाम धमाका हुआ था। कम तीव्रता वाले इस धमाके में कोई हताहत नहीं हुआ था लेकिन कुछ गाड़ियों के शीशे टूट गए थे। इसके बाद पूरी राजधानी को अलर्ट पर रखा गया था। एयरपोर्ट, सरकारी इमारतों और अहम जगहों की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।

जाँच के दौरान एक लिफ़ाफ़े में पत्र बरामद किया गया जो ‘इजरायली दूतावास के दूत’ के लिए लिखा गया था। पत्र में धमकी दी गई थी कि ये धमाका तो सिर्फ ‘ट्रेलर’ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इस धमकी भरे ख़त में मारे गए ईरानी क़ुद्स फ़ोर्स (Quds Force) के मुखिया जनरल कासिम सुलेमानी और परमाणु वैज्ञानिक (nuclear scientist) डॉ. मोहसिन फकरीज़देह का संदर्भ दिया हुआ था।  

कासिम सुलेमानी IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स) या क़ुद्स फ़ोर्स का ईरानी कमांडर था और बग़दाद में जनवरी 2020 के दौरान अमेरिकी सेना के अभियान में मारा गया था। वहीं ईरानी परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन की हत्या तेहरान के बाहरी इलाके में 62 मेंबर स्क्वाड ने की थी। यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं जब भारत में इजरायली दूतावास पर हमला हुआ है। 

13 फरवरी 2012 को दिल्ली में इजरायली राजनयिक की कार में धमाका किया गया था। दो बाइक सवार हमलावरों ने इजरायली राजनयिक की पत्नी (Tal Yehoshua Koren) की गाड़ी में बम चिपका दिया था। इस हमले में भी क़ुद्स फ़ोर्स जिसे IRGC के नाम से जाना जाता है, उसका नाम सामने आया था। इजरायली राजनयिक की कार में हुए बम धमाकों की घटना में 4 लोग घायल हुए थे।

ईरानी वैज्ञानिक की हत्या के ठीक बाद इजरायली राजनयिक की हत्या का प्रयास हुआ था। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को इस धमाके के लिए जिम्मेदार ठहराया था। संयोग से यह हमला ईरान समर्थित शिया लेबनानी समूह और हिजबुल्ला नेता इमद मुगनियेह (Imad Mughniyeh) की हत्या की तिथि से भी मेल खाता था। 

भारतीय पत्रकार की हमले में अहम भूमिका?

इजरायली राजनयिक पर हुए हमले की जाँच में दिल्ली पुलिस ने पाया कि यह IRGC का काम है। दिल्ली पुलिस की जाँच में यह बात भी सामने आई थी कि IRGC के सदस्यों ने इस हमले की योजना पर भारतीय पत्रकार सैयद मोहम्मद अहमद काज़मी के साथ चर्चा की थी। खुलासे के मुताबिक़ अहमद काज़मी पिछले 10 सालों से IRGC सदस्यों के संपर्क में था।

एक लंबी जाँच के बाद दिल्ली पुलिस ने ‘पत्रकार’ अहमद काज़मी को बाइक सवार हमलावरों की मदद करने के लिए गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अहमद काज़मी को साज़िश में शामिल होने के आरोप में गैर क़ानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के अंतर्गत गिरफ्तार किया। इतना ही नहीं वह इजरायली राजनयिकों को निशाना बनाने के लिए साज़िश के तहत ख़ुफ़िया तरीके से काम कर रहा था।

पूरे मामले में एक और रोचक बात ये है कि विवादित एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया की मुखिया सीमा मुस्तफ़ा काज़मी के समर्थन में उतर आई थीं। इनके मुताबिक़ इजरायली राजनयिक पर हुए हमले के मामले में अहमद काज़मी निर्दोष था। 

कौन है सैयद मोहम्मद अहमद काज़मी

उत्तर प्रदेश स्थित मेरठ के निवासी सैयद मोहम्मद अहमद काज़मी ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 1983 में ईरानी ब्रॉडकास्टर के अंतर्गत ईरान रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी (IRNA)  के दिल्ली कार्यालय से की थी। काज़मी की अरबी और फारसी भाषा पर मज़बूत पकड़ थी। नतीजतन उसे खाड़ी के देशों की ख़बरों का अनुवाद करने में कोई परेशानी नहीं होती थी। 
कुछ सालों बाद काज़मी की रूचि पश्चिमी एशिया में बढ़ी। ख़ासकर ईरान, ईराक और इजरायल। ईरानी मीडिया समूह में 7 साल लगातार काम करने के बाद ‘मीडिया स्टार’ नाम से अपना मीडिया समूह शुरू किया जो कि पश्चिमी एशिया की ख़बरों पर केन्द्रित था। एक छोटे कार्यकाल के बाद उसने 1993 दूरदर्शन में बतौर प्रस्तोता काम शुरू किया और वहाँ उर्दू ख़बरें पढ़ता था।
दूरदर्शन के कार्यकाल के दौरान काज़मी ‘वर्ल्ड व्यू इंडिया’ (World View India) नाम के साप्ताहिक विदेश मामलों से जुड़े कार्यक्रम का हिस्सा था। सबा नकवी के पिता और पत्रकार सईद नकवी के मुताबिक़ काज़मी को उस क्षेत्र के बारे में अद्भुत जानकारी थी और उसके संपर्क भी काफी ज़्यादा थे। नकवी ने काज़मी के साथ मिल कर दूरदर्शन के इस कार्यक्रम को प्रोड्यूस किया था और दोनों साथ में कई विदेशी असाइनमेंट पर भी गए थे। 
पुलिस के मुताबिक़ काज़मी का ईरान में गहरा नेटवर्क था। तत्कालीन दिल्ली पुलिस कमिश्नर बीके गुप्ता ने इस मामले में एक बड़ा खुलासा किया था। उनका कहना था कि पूछताछ में काज़मी ने खुलासा किया था कि उसने इजरायली दूतावास की रेकी के लिए ईरानियों की भरपूर मदद की थी। काज़मी ईरानी मूल के सैयद अली सदर मेहँदी की मदद से हौशन अफशर से मिला था, जिसने इजरायली दूतावास के आस-पास रेकी की थी। इसके लिए इन लोगों ने स्कूटी का इस्तेमाल किया था। इस रेकी के दौरान उसने इजरायली राजनयिकों को निशाना बनाने का फैसला लिया था। हैरानी की बात है कि काज़मी के परिवार वालों ने भी उसके ईरान समर्थक स्टैंड को खारिज नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में अहमद काज़मी को जमानत पर रिहा कर दिया था, लेकिन विदेश जाने पर रोक लगाई थी। वह अभी तक जमानत पर आज़ाद घूम रहा है। फ़िलहाल ‘मीडिया स्टार वर्ल्ड‘ नाम का यूट्यूब चैनल चलाता है, जिसमें वह पश्चिमी एशिया के मुद्दों पर बात करता है। उसकी लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक़ वह ‘कौमी सलामती’ नाम के उर्दू अखबार का सम्पादक भी है। अक्टूबर 2012 में जमानत मिलने के बाद वह अखबार का सम्पादक बना था। कॉन्ग्रेस की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. शीला दीक्षित भी अखबार के लॉन्च पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थीं।

इजरायल के सीक्रेट दस्ते ने ईरान में घुसकर अलकायदा के नंबर-2 और लादेन की बहू को मार गिराया

                                             इजराइली जवानों ने अलकायदा के सरगना अबू मोहम्मद अल मस्त्री को मार गिराया 

                                                                                        (फाइल फोटो/ साभार: Newyork Times)
केन्या और तंजानिया में अमेरिकी दूतावास पर 1998 में हुए आतंकी हमले के मास्टरमाइंड अबू मोहम्‍मद अल मस्‍त्री के मारे जाने की खबर आ रही है। इन हमलों को आतंकी संगठन अलकायदा ने अंजाम दिया था। हमलों के 22 साल बाद इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के जवानों ने ईरान की राजधानी तेहरान में छिपे अलकायदा के नंबर दो सरगना अबू मोहम्‍मद अल मस्‍त्री (58) को मार ग‍िराया। हमले में अलकायदा सरगना ओसामा बिना लादेन की बहू भी मारी गई। 

हमले में मारे गए थे 224 लोग 

अमेरिकी दूतावास पर अलकायदा के आतंकी हमले में 224 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए। इस हमले का मास्टरमाइंड अबू मोहम्मद को माना जाता है। न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक अलकायदा के दूसरे नंबर के नेता अबू मोहम्‍मद ऊर्फ अब्‍दुल्‍ला अहमद अब्‍दुल्‍ला को उसकी बेटी के साथ गत 7 अगस्‍त को तेहरान की सड़कों पर गोली मार दिया गया।

अबू मोहम्मद पर था पर था 1 करोड़ डॉलर का इनाम 

जानकारी के मुताबिक इस हमले को इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के सीक्रेट दस्‍ते ने अंजाम दिया है। अफ्रीकी देश केन्‍या और तंजानिया में अमेरिकी दूतावास पर 9 अगस्‍त 1998 को हुए भीषण हमले में 224 लोग मारे गए थे और हजारों लोग घायल हो गए थे। अबू मोहम्मद पर एफबीआई की ओर से एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित किया गया था। 

न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स ने कहा कि अबू मोहम्‍मद की हत्‍या अभी तक सीक्रेट थी। रोचक बात यह थी कि ईरान के सरकारी मीडिया ने इस घटना की खबर दी थी और मारे जाने वाले व्‍यक्ति का नाम हबीब दाउद और उसकी 27 साल की बेटी मरियम बताया था। ईरानी मीडिया ने कहा कि हबीब दाउद लेबनान का इतिहास का प्रोफेसर था। न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स ने कहा कि दाउद नाम का कोई व्‍यक्ति मौजूद नहीं था और इस फर्जी नाम का इस्‍तेमाल ईरान की खुफिया एजेंसी के अधिकारी करते थे। ईरान के एजेंटों ने उसे शरण दे रखी थी।

मरियम का निकाह लादेन के बेटे हमजा से हुआ था 

बताया जा रहा है कि अलकायदा सरगना गत 7 अगस्‍त को अपनी कार से रात को 9 बजे जा रहा था। इस दौरान दो लोगों ने कार रुकवाई और अबू मोहम्‍मद और उसकी बेटी मरियम को गोली मार दी। मरियम की शादी ओसामा बिन लादेन के बेटे हमजा बिन लादेन से हुई थी। हमजा पहले ही मारा जा चुका है। सीक्रेट दस्ते ने साइलेंसर लगी बंदूक का इस्‍तेमाल किया जिससे किसी को हमले का अहसास नहीं हुआ। अभी तक इस हमले की किसी भी देश ने जिम्‍मेदारी नहीं ली है। अलकायदा ने भी अभी अबू मोहम्‍मद की मौत का ऐलान नहीं किया है।

इजरायल ने बर्बाद किया ईरानी परमाणु ठिकाना

इजरायल ईरानी परमाणु ठिकाना
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू
इजरायल और उसके धुर व‍िरोधी ईरान के बीच साइबर अटैक चरम पर है। ताजा घटना में इजरायल ने जोरदार साइबर हमला करके ईरान के परमाणु ठिकानों में दो विस्‍फोट करा दिए। इनमें से एक यूरेनियम संवर्धन केंद्र है और दूसरा मिसाइल निर्माण केंद्र। यही नहीं इजरायल ने अपने घातक F-35 फाइटर जेट की मदद से ईरान के पर्चिन इलाके में मिसाइल न‍िर्माण स्‍थल पर धावा बोला और उसे बर्बाद कर दिया।
Cyber Strike By Foreign Force Caused Iran Explosion: Israeli ...
Israel Attack Iran | Israel Hit Missile in Iran | Israel Cyber ...ये भी जानना जरूरी है कि एक कुवैती अखबार जिसका नाम अल जरीदा है उसकी रिपोर्ट के अनुसार ये दावा किया गया है कि ये अटैक पिछले हफ्ते हुआ। साथ ही अखबार ने ये भी जानकारी दी है कि इजरायल की ओर से बमबारी के बाद ईरान के अंडरग्राउंड नतांज परमाणु संवर्धन केंद्र में आग लग गई और जोरदार विस्‍फोट हुआ। माना जा रहा है कि इससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को धक्‍का लगा है और वह करीब दो महीने पीछे चला गया है।
नतांज ईरान की राजधानी तेहरान से करीब 250 किलोमीटर दूर है, जहाँ एयरस्‍ट्राइक से बचाव के लिए भूमिगत यूरेनियम संवर्धन केंद्र बनाए गए हैं। यह घटना 26 जून की बताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने F-35 स्‍टील्‍थ फाइटर जेट की मदद से ईरान के पर्चिन इलाके में बम गिराए, जिसे मिसाइल उत्‍पादन का केंद्र समझा जाता है।


कुवैती अखबार अल जरीदा ने इस बात का भी दावा किया है कि पिछले शुक्रवार को फाइटर जेट F-16 स्‍टील्‍थ ने ईरान के पर्चिन इलाके में मौजूद एक ठिकाने पर हमला किया था और बमबारी की थी। कहा जा रहा है कि यही मिसाइल उत्‍पादन केंद्र था।
इजरायल ये आरोप लगाता रहा है कि अपने हथियार और मिसाइलों को ईरान लगातार यहूदियों के विरोधी हिज्‍बुल्‍ला को मुहैया करा रहा है, ऐसे में अचानक इस अटैक से ईरान को गहरा सदमा लगा है।
हालाँकि, रिपोर्ट लिखे जाने तक इजरायल ने इन दोनों ही अटैक को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इससे पहले ऐसी रिपोर्ट्स आई थीं कि ईरान ने अप्रैल महीने में इजरायल के पानी के सप्‍लाइ को हैक करने की कोशिश की थी। ईरान के इस हमले को इजरायल के साइबर डिफेंस ने असफल कर दिया था। अगर ईरान अपने इस प्रयास में सफल हो जाता तो पानी के अंदर क्‍लोरीन की मात्रा खतरनाक स्‍तर तक बढ़ जाती। पूरे देश में पानी का संकट भी खड़ा हो जाता।

पाकिस्तान : देशद्रोही शियाओं ने जान-बूझकर कोरोना वायरस फैलाया; आपस में ही सिर-फुटव्वल

कोरोना वायरस की महामारी के समय ...
पाकिस्तान में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या 1500 के पार पहुँच गई है। 12 लोगों की मौत भी हो चुकी है। स्थिति भयावह है, क्योंकि अस्पतालों में समुचित व्यवस्था नहीं है। लोगों की स्क्रीनिंग की भी सुविधा काफ़ी कम है। वहाँ की सरकार ने अर्थव्यवस्था के गिरने के डर से लॉकडाउन जैसे बचाव के उपायों की घोषणा करने में भी कोताही दिखाई है। मीडिया के अनुसार, पाकिस्तान में कोरोना वायरस के शुरुआती मामले ईरान से लौटे उन मजहबी तीर्थयात्रियों के हैं, जो तफ्तान सीमा से होकर देश में घुसे। ये सभी शिया मुस्लिम थे, जो ईरान गए थे।
इन इस्लामी तीर्थयात्रियों में से अधिकतर 15 मार्च को वापस लौटे और उसके बाद से ही पाकिस्तान में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफा होना शुरू हो गया। इसके बाद कुछ पाकिस्तानी तुरंत ट्विटर पर गए और उन्होंने शिया मुस्लिमों को खरी-खोटी सुनानी शुरू कर दी। प्रोफेसर खालिद शेख ने लिखा कि कोरोना वायरस का प्रकोप ख़त्म होने तक देश भर में शिया समुदाय को किसी भी कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। उन्होंने इसे शर्म की बात बताते हुए दावा किया कि शिया समुदाय ही ईरान से कोरोना वायरस पाकिस्तान लाया है।

कुछ पाकिस्तानियों ने तो चीन को क्लीनचिट देते हुए दावा किया कि उससे ज्यादा तो कोरोना को फैलाने के लिए शिया मुस्लिम जिम्मेदार हैं। सैयद अज़ीम ने लिखा कि इसे ‘चाइनीज वायरस’ कहने की बजाय ‘शिया वायरस’ कहना चाहिए।


कुछ पाकिस्तानियों ने तो यहाँ तक आरोप लगाया कि शिया मुसलमानों ने जान-बूझकर कोरोना वायरस को फैलाया है। उन्होंने दावा किया कि शियाओं ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए ईरान से वायरस लाकर यहाँ फैलाया। अन्य पाकिस्तानियों ने ईरान से लौटे शिया मुस्लिमों को देशद्रोही करार दिया। एक अन्य व्यक्ति ने माँग करते हुए कहा कि सभी शिया मुस्लिमों को गिरफ़्तार कर सज़ा देनी चाहिए और उन्हें क्वारंटाइन किया जाना चाहिए।
पाकिस्तान कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए कुछ नहीं कर रहा है, इसीलिए वह पूरे दक्षिण एशिया के लिए ख़तरा बन गया है। वहाँ मुल्ले-मौलवी अभी भी मजहबी कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं और उन्हें खुली छूट मिली हुई है। इसके उलट भारत में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा की गई है। यहाँ सभी प्रकार के धार्मिक व मजहबी कार्यक्रमों पर रोक लगी हुई है, ताकि भीड़ न जुटे।

ईरान से सटे पाकिस्तान में कोरोना बनी आफत: अब तक 300 पॉजिटिव, 2 की मौत

इमरान खान
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भारत में कोरोना से 186 के लोगों के प्रभावित होने से पूर्व ही मोदी सरकार युद्ध स्तर पर काम कर रही है, जबकि पडोसी देश पाकिस्तान में भारत से कहीं अधिक फैली बीमारी पर वहां की सरकार को जनता के हित चिन्ता नहीं। वर्ल्ड बैंक और IMF से कर्जा माफ़ और भारत के विरुद्ध कश्मीर का राग अलाप रहा है।  
ईरान के पड़ोसी होने के कारण पाकिस्तान में भी कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ना शुरू हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान में अब तक कोरोना से संक्रमित लोगों की गिनती 301 पार कर चुकी है, जिसमें दो मरीजों की मौत भी हो चुकी है। ये दोनों मौतें पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में होने की खबर है। पाकिस्तान का सिंध प्रान्त इस घातक वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित है। ऐसे में यहाँ सरकार ने 30 मई 2020 तक सभी शिक्षा संस्थानों को बंद करने की घोषणा की है। जहाँ 200 से ज्यादा व्यक्तियों के इस वायरस से संक्रमित होने की खबरें आ रहीं हैं। वहीं बलूचिस्तान सूबे से 23 लोगों के कोरोना पीड़ित होने की खबर आई है। जानकार ईरान से सटे होने के कारण पाकिस्तान में कोरोना से संक्रमण के मामले और बढ़ने की आशंका जता रहे हैं।
पाकिस्तान में कोरोना के मामले बढ़ते जाने के साथ-साथ वहाँ जाँच और जरूरी चिकित्सा उपकरणों की होती कमी ने इस समस्या को और भयावह बना दिया है। जहाँ डॉक्टरों ने मास्क, आदि बचाव उपकरणों के अलावा जाँच किट की कमी के चलते काम बंद करने की धमकी दी है। लाहौर में आम लोगों ने शिकायतें की हैं कि निजी अस्पताल कोरोना की जाँच के लिए उनसे 9000 रूपए तक वसूल कर रहे हैं, जिस पर सरकार का कहना है कि कोरोना जाँच मुफ्त कराने का इंतजाम किया गया है।
एक तरफ पाकिस्तान में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है, निजी अस्पताल लोगों से कोरोना जाँच के लिए अवैध वसूली कर रहे हैं, सेनेटाइजर और मास्क आदि की भी बेहद कमी है वहाँ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का यह दावा कि वे कोरोना को लेकर उठाये गए कदमों की समीक्षा करेंगे जनता को भरमाने वाला और खोखली बयानबाजी ही कही जाएगी।
इमरान ख़ान ने ये कह कर अपने ही देशवासियों को सकते में डाल दिया है कि अगर ज्यादा लोग कोरोना का शिकार हुए तो देश की स्वास्थ्य व चिकित्सा व्यवस्था धड़ाम हो जाएगी। इमरान ने कहा कि जो वृद्ध लोग हैं, सिर्फ उन्हें ही तुरंत मेडिकल अटेंशन देने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि जो भी कोरोना वायरस के शिकार हुए हैं, उनमें से 97% पूरी तरह ठीक हो जाएँगे और 90% लोगों को नार्मल फ्लू की तरह ही बीमारी होगी, जिन्हें डरने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी चीजें बंद हो गई तो लोग भूखे मरेंगे।
उन्होंने पाकिस्तान को सम्बोधित करते हुए कहा था कि अगर 4-5% मरीज भी बाहर निकले तो हज़ारों संक्रमित होकर बीमार पड़ जाएँगे। उन्होंने लोगों को सलाह दी थी कि वो दौड़ कर मेडिकल टेस्ट कराने हॉस्पिटल न जाएँ। अमेरिका का उदाहरण देते हुए ख़ान ने दावा किया कि किसी भी देश के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि सर्दी-जुकाम के शिकार सभी लोगों का मेडिकल टेस्ट कराया जा सके। अपने ही पीएम की ऐसी सलाह से पाकिस्तानी हैरान हैं।
इस सबके बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोरोना से प्रभावित देशों की संख्या 166 तक पहुँच चुकी है जिनमें कोरोना से जुड़े दो लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। वहीं कोरोना संक्रमण के चलते मरने वालों की कुल संख्या दुनिया में 8600 से ज्यादा हो चुकी है।

ईरान गए इस्लामिक यात्रा पर कई भारतीय नागरिक हुए कोरोना वायरस के शिकार

ईरान, कोरोना वायरस, भारत
भारतीय मुसलमानों को विशेष विमान से ईरान से लाया जा रहा है  
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भारत में कुछ कट्टरपंथी कोरोना को गंभीरता से नहीं ले रहे, जबकि कुछ स्थानों पर मस्जिदों में नमाज़ पढ़ने पर पाबन्दी लगाए जाने से लगता है, मुस्लिम विद्वान भी दो मतों में विभाजित हैं। जबकि भारत में कुछ मौलाना, इंडिया टीवी, मार्च 17 को दिखाए वीडियो के अनुसार, इस बात का दावा कर रहे हैं कि 'किसी मुसलमान को इस बीमारी से कोई खतरा नहीं, उन्हें अल्लाह बचा रहा है।' विपरीत इसके ईरान में अपनी इस्लामिक यात्रा पर गए कुछ भारतीय मुसलमान इस बीमारी के शिकार हो गए। 
इन कट्टरपंथियों ने ही भारतीय मुसलमानों को इतना भ्रमित एवं डरा कर रखा हुआ है, जिससे निजात दिलाने के लिए बुद्धिजीवियों को आगे होना होगा। 
दूसरे, अब तक ईरान से 389 भारतीय नागरिकों को वापस लाया जा चुका है। सोमवार (मार्च 16, 2020) को 53 भारतीय नागरिकों का चौथा जत्था ईरान से भारत पहुँचा। केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट कर के इस सम्बन्ध में जानकारी दी। यह समाचार उन सभी नागरिक संशोधन बिल के विरोधियों पर इतने जोर का थप्पड़ है, जिसकी गूंज तक विरोधी सुन नहीं पा रहे कि जिस मोदी सरकार पर मुसलमानों को भारत से निकालने का दुष्प्रचार किया जा रहा है, वही मोदी सरकार अपने भारतीय मुस्लिम नागरिकों को वापस भारत ला रही है। क्या जरुरत है उन्हें वापस लाने की, लेकिन मोदी सरकार आसानी से किसी भी भारतीय को मरने नहीं देना चाहती। 
ईरान में महजबी तीर्थयात्रा पर गए 234 भारतीय नागरिकों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की ख़बर आ रही है। अब उन्हें मेडिकल टेस्ट के बाद ईरान में ही रोका गया है और जब वो पूरी तरह ठीक हो जाएँगे, उसके बाद उन्हें वापस भारत लेकर आया जाएगा। बता दें कि ईरान में कोरोना वायरस के ख़तरे ने महामारी का रूप ले लिया है और वहाँ अब तक 724 लोग इससे संक्रमित होकर अपनी जान गँवा चुके हैं। वहाँ कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या 15 हजार के पार बताई जा रही है।
मीडिया में ईरान में फँसे भारतीय नागरिकों में कोरोना वायरस से पीड़ितों की संख्या 250 के पार बताई जा रही है। ऑपइंडिया फ़िलहाल इसकी पुष्टि नहीं करता। हालाँकि, अभी तक कोई आधिकारिक आँकड़ा जारी नहीं किया गया है लेकिन शीर्ष अधिकारियों से बातचीत के आधार पर ‘आईएएनएस’ ने दावा किया है कि इस्लामिक तीर्थयात्रा पर गए भारतीय नागरिकों में अधिकतर वरिष्ठ नागरिक थे, जिन्हें इस वायरस द्वारा ज्यादा नुकसान पहुँचाए जाने की संभावना रहती है। फ़िलहाल वो सभी ईरान में ही रहेंगे, जहाँ उनका इलाज किया जाएगा। कोरोना वायरस पीड़ितों के लिए ‘इंटरनेशनल स्टैण्डर्ड प्रोटोकॉल’ के हिसाब से इन सभी को ‘क्वारंटाइन सेंटर’ में रखा जाएगा।

ईरान में अभी भी 6000 के आसपास भारतीय नागरिक फँसे हुए हैं, जो वहाँ के विभिन्न प्रांतों में रह रहे थे। इनमें से अधिकतर इस्लामी तीर्थयात्रा पर गए थे और अधिकांश लद्दाख और जम्मू कश्मीर से हैं। कई छात्र भी फँसे हुए हैं। केरल, तमिलनाडु और गुजरात के 1000 मछुआरे भी वहाँ रह रहे थे। वो वहाँ रह कर कमाई करते हैं और साथ ही इस्लामिक अध्ययन भी करते हैं। भारतीय अधिकारी लगातार उन फँसे हुए नागरिकों से मुलाक़ात कर रहे हैं। इनमें से कइयों को वापस भी लाया गया है। जिनका मेडिकल रिपोर्ट नेगेटिव आ रहे है, उन्हें तुरंत निकालने की व्यवस्था की जा रही है। भारत ने इसके लिए प्रशिक्षित मेडिकल टीम को वहाँ भेजा है।
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ईरान के हिंसक प्रदर्शनों में 700 बैंक तबाह, सेना के भी 50 बेस हुए नष्ट

ईरान के प्रदर्शन में नष्ट हुई ईमारत (फोटो साभार- आयरिश टाइम्स)ईरान में हिंसक प्रदर्शन के चलते पूरे देश की शांति व्यवस्था पर खतरा मंडरा रहा है। इस हिंसक और उपद्रवी प्रदर्शन के दौरान कई बैंकों और सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाया गया। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस सम्बन्ध में ईरान के एक मंत्री अब्दुल रज़ा रहमानी फ़ज़ली ने जानकारी दी कि अभी तक की इस हिंसा में करीब 731 बैंकों और 140 सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुँचा है। उन्होंने कहा कि इन्हें जला कर राख कर दिया गया।
फ़ज़ली के मुताबिक प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षाबालों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 50 से भी ज्यादा बेस नष्ट कर दिए गए। उन्होंने बताया कि यह प्रदर्शन 15 नवम्बर को तब शुरू हुए जब दामों की बढ़ोतरी का ऐलान किया गया। इन प्रदर्शनों में तकरीबन दो-लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। इस भीड़ ने 70 गैस स्टेशनों को भी आग के हवाले कर दिया।
लन्दन के एक मानवाधिकार संगठन – एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 25 नवम्बर को इस सम्बन्ध में कहा कि इस प्रदर्शन की हिंसा में अभी तक करीब 143 लोग मारे जा चुके हैं। संस्था ने दावा किया कि सरकार के खिलाफ यह सबसे भीषण क्रांति है। इससे पहले सन् 2009 में भी ऐसी एक क्रांति हुई थी जब ईरान के प्रशासन ने ‘ग्रीन रेवोल्यूशन’ पर प्रदर्शनों को कुचलने की कोशिश की थी।
हालाँकि, ईरान सरकार ने इस संस्था द्वारा पेश किए मौत के आँकड़े से पूरी तरह इनकार किया है। उनका पक्ष है कि इस दौरान सुरक्षाबलों के लोग भी मारे गए और हज़ार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जबकि न्यूयॉर्क की एक मानवाधिकार एजेंसी सेण्टर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान ने दावा किया है कि गिरफ्त में लिए गए लोगों की तादाद 4000 के करीब है।
प्रदर्शनकारियों द्वारा सभी शीर्ष नेताओं के इस्तीफे की माँग के बाद ये प्रदर्शन सियासी हो गए। जबकि स्थानीय सरकार ने इस उग्र प्रदर्शन को भड़काने के लिए अमेरिका, इजराइल तथा सऊदी अरब पर आरोप लगाए हैं। बता दें कि अमेरिका ने ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए थे, उसके बाद से ही ईरान के तेल निर्यात करने में काफी गिरावट आई है। इसके बाद से ही ईरान तथा लिबनान में कई हथियारबंद गुटों ने सरकार के खिलाफ महँगाई को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिए।

अमेरिका को सबक सिखाने के लिए अब सऊदी अरब पर नए हमले की तैयारी में ईरान

अमेरिका को सबक सिखाने के लिए अब सऊदी अरब पर नए हमले की तैयारी में ईरान, जनरल ने कहा- तलवारें खींच लो- रिपोर्टतेहरान. ईरान और अमेरिका के बीच तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है. इस साल सितंबर में सऊदी के तेल संयंत्र पर हुए हमले के बाद माहौल और बिगड़ गया है. हमले की जिम्मेदारी ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने ली थी. हालांकि अमेरिका और सऊदी अरब ने इस हमले के पीछे ईरान का हाथ बताया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक ईरान अब अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई का मन बना रहा है.
तेहरान में बदला लेने की बातकहा जा रहा है कि इस घटना के करीब चार महीने बाद ईरान के सुरक्षा अधिकारी तेहरान में जमा हुए. यहां इन सबने अमेरिका को 'सबक सिखाने' पर चर्चा की. अमेरिका के खिलाफ नाराज़गी दो चीज़ों को लेकर है पहला न्यूक्लियर ट्रीटी खत्म करना और दूसरा ईरान पर भारी-भरकम पाबंदी लगाना. बता दें कि अमेरिका के इशारों पर दूसरे देशों ने ईरान से तेल खरीद में भारी कटौती कर दी है.
'उठा लो तलवार'
ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख मेजर जनरल हौसियन सलामी ने इशारा किया है कि अब अमेरिका से बदला लिया जाए. उन्होंन कहा, 'वक्त आ गया है कि हम अपनी तलवारें निकाल लें और उन्हें सबक सिखाया जाए.'
निशाने पर सैनिक ठिकानेमीटिंग में अमेरिका के बड़े टारगेट को निशाना बनाने की बात कही गई है, जिसमें अमेरिका की मिलिट्री बेस भी शामिल है. ये मिलिट्री बेस साऊदी अरब में हैं.
दरअसल कुछ अधिकारी अमेरिका पर सीधे हमले के पक्ष में नहीं हैं. उन्हें इस बात का डर लग रहा है कि अमेरिका कहीं खतरनाक तरीके से बदले की कार्रवाई न कर दे. लिहाजा इस साल मई में ईरान के सैन्य अधिकारियों ने तेल संयंत्र पर हमले की योजना बनाई और इसे चार महीने के अंदर ही अंजाम दिया गया. वहीं रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान एक बार फिर इसी तरह सऊदी अरब में अमेरिकी ठिकानों पर हमले की प्लानिंग कर रहा है.
हमले में ईरानी नेताओं का हाथसमाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि तेल संयंत्र पर हुए हमले में ईरान के कई नेताओं का भी हाथ था. इनके मुताबिक ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली ख़ामेनई ने इस हमले की इजाजत दी थी. साथ उन्होंने कहा था कि हमले में किसी अमेरिकी या आम नागरिक की मौत नहीं होनी चाहिए. हालांकि ईरान ने इन हमलों से साफ-साफ इनकार किया है.

क्यों तेहरान से खफा है अमेरिका?

Iran America relationईरान और अमेरिका के बीच पिछले कुछ समय से जारी तनाव से दुनिया के देश फिक्रमंद हैं। युद्ध के मुहाने पर आ चुके दोनों देशों के बीच यदि टकराव हुआ तो इसकी आंच हर जगह महूसस की जाएगी। अमेरिका आए दिन ईरान पर नए प्रतिबंधों की घोषणा कर रहा है लेकिन ईरान उसके दबावों के आगे झुकने के लिए तैयार नहीं है, वह भी जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है। ईरान ने कहा है कि 2015 के परमाणु समझौते में संवर्धित यूरेनियम के उत्पादन को लेकर तय की गई सीमा का उसने उल्लंघन किया है। ईरान की इस घोषणा के बाद अमेरिका भड़क सकता है और उसके खिलाफ दंडात्मक एवं सैन्य कार्रवाई की तरफ बढ़ सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर खाड़ी में पहले ही अमेरिकी सैनिक एवं बमवर्षक विमान तैनात हैं। शांति एवं मानवता में विश्वास करने वाले देश कभी नहीं चाहेंगे कि खाड़ी का क्षेत्र एक बार फिर रणक्षेत्र में तब्दील हो। 
नई नहीं है अमेरिका-ईरान की अदावत
अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश है तो मध्य एशिया में ईरान एक मजबूत देश है। यह दीगर बात है कि आर्थिक प्रतिबंधों के लगने के बाद उसकी तरक्की प्रभावित हुई और आर्थिक मोर्चे पर उसे नुकसान उठाना पड़ा है। अमेरिका और ईरान के बीच अदावत नई नहीं है। दोनों देशों के बीच टकराव और तनातनी का पुराना इतिहास है। विगत दशकों में वाशिंगटन और तेहरान के संबंधों में उतार-चढ़ाव आते रहे हैं लेकिन 1995 में अमेरिका ने ईरान के साथ कारोबार पर आर्थिक प्रतिबंध लगाया जिसके बाद से दोनों देशों के संबंध कभी सामान्य नहीं रहे। मध्य एशिया में अमेरिका के सहयोगी देशों सऊदी अरब और इजरायल यह आरोप लगाते रहे हैं कि ईरान उनके यहां आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देता है और इसके लिए वे अमेरिका से उस पर सैन्य कार्रवाई करने की मांग करते रहे हैं।

2015 में हुआ था परमाणु करार
साल 2015 में ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर दुनिया के छह  शक्तिशाली देशों (पी5+1) अमेरिका, फ्रांस, चीन, रूस और जर्मनी के साथ करार किया। ईरान पर आरोप थे कि वह गुपचुप तरीके से यूरेनियम का भंडार कर अपने परमाणु हथियारों को विकसित कर रहा है लेकिन ईरान इससे इंकार करता रहा। तेहरान ने कहा कि वह यूरेनियम का संवर्धन परमाणु हथियारों के लिए नहीं बल्कि अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कर रहा है। ईरान की इस दलील को अमेरिका सहित उसके सहयोगी देशों ने नहीं माना फिर बाद में ईरान और पी5+1 देशों के बीच करार हुआ। 

क्या है जेसीपीओए?
इस करार के तहत ईरान अपनी परमाणु हथियार से जुड़ी गतिविधियों को सीमित करने और अपने परमाणु संयंत्रों की निगरानी अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों के जरिए कराने के लिए तैयार हुआ। इसके बदले ईरान पर से आर्थिक प्रतिबंध हटाए गए। बता दें कि संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु संयंत्रों के ईंधन के रूप में और परमाणु हथियारों को विकसित करने में होता है। पी5+1 और ईरान के बीच जो करार हुआ उसे ज्वाइंट कम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए) के रूप में जाना जाता है। 

बराक ओबामा के समय हुआ था करार
जुलाई 2015 तक ईरान के पास करीब 20,000 संयंत्र थे लेकिन करार में इनकी संख्या कम करने की बात कही गई। करार का अनुपालन करते हुए ईरान 2016 तक अपने संयंत्रों की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाया और अपने कम संवर्धित यूरेनियम को रूस भेजा। करार के समय अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उम्मीद जताई थी कि जेसीपीओए ईरान को गोपनीय तरीके से परमाणु कार्यक्रम पर आगे बढ़ने से रोकेगा। करार के बाद अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निरीक्षक समय-समय पर ईरान के परमाणु स्थलों एवं संयंत्रों का दौरा एवं उनकी निगरानी करते रहे हैं। ईरान आईएईए के प्रोटोकॉल एवं नियमों को भी लागू करने पर सहमत हुआ।

डोनाल्ड ट्रंप ने करार तोड़ा
पिछले साल मई में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए परमाणु करार को तोड़ दिया। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने करार की शर्तों का पालन नहीं किया और वह यूरेनियम का संवर्धन करता रहा है। उन्होंने तेहरान के साथ करार को ओबामा प्रशासन की 'बड़ी भूल' करार दिया। करार से पीछे हटते हुए ट्रंप प्रशासन ने तेहरान पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। इसके अलावा ट्रंप ने ईरान के साथ कारोबारी संबंध रखने वाले देशों को तेहरान के साथ अपना कारोबार बंद करने के लिए कहा। ट्रंप के इस कदम की रूस और चीन ने आलोचना की। रूस ने खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि खाड़ी क्षेत्र में यदि युद्ध भड़कता है तो इससे भीषण तबाही होगी। 

सऊदी अरब और इजरायल चाहते हैं कार्रवाई
मध्य एशिया में सऊदी अरब और ईरान के बीच वर्चस्व की लड़ाई भी है। सऊदी अरब सुन्नी देश है जबकि ईरान शिया बहुल देश है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से शत्रुता चली आ रही है। इसके अलावा ईरान और इजरायल के बीच तनातनी चली आ रही है। सऊदी अरब और इजरायल दोनों का आरोप है कि ईरान आतंकवादियों को देकर उनके यहां आतंकी हमले कराता है। सऊदी अरब का कहना है कि ईरान यमन में सक्रिय होउदी संगठन की मदद करता है जो उसके यहां आतंकी हमलों के दोषी हैं जबकि इजरायल अपने यहां आतंकवादी वारदातों के लिए ईरान समर्थित हेजबुल्ला को जिम्मेदार ठहराता रहा है। सऊदी अरब और इजरायल दोनों अमेरिकी करीबी सहयोगी देश हैं। ये दोनों देश ईरान पर कार्रवाई के लिए अमेरिका पर दबाव बनाते रहे हैं।