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पप्पू यादव के खिलाफ दिल्ली में दर्ज हुई FIR, संसद में राम मंदिर चंदा चोरी को लेकर किया था गंदा नाटक: लोकसभा अध्यक्ष ने दी गरिमा बनाए रखने की चेतावनी

                             राम मंदिर प्रदर्शन पर पप्पू यादव FIR। (फोटो साभार - जागरण/एनडीटीवी)
संसद परिसर में विपक्षी दलों ने शुक्रवार (31 जुलाई) को राम मंदिर चंदा चोरी मामले को लेकर नाटक किया था। इस नाटक में पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव पुजारी बनकर चंदा लूटते हुए नजर आए थे। Video वायरल होने के बाद अब विवाद बढ़ गया है। नाटक कर रहे पप्पू यादव के खिलाफ FIR दर्ज हुई है।

पप्पू यादव ने संसद भवन में भगवा वस्त्र पहनकर और पुजारी का भेष धारण कर चंदा चोरी करने का नाटक किया। इसमें पप्पू यादव ये दर्शाने की कोशिश कर रहे थे, कि हिंदू पुजारी ही राम मंदिर से चंदा चोरी कर रहे हैं। इसके बाद देशभर से संतों ने इस नाटक पर विरोध जताया था। अब दिल्ली के जहाँगीरपुरी थाने में सूर्य मैथिल नामक व्यक्ति ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। 

संसद के बाहर किए गए नाटक में विपक्ष के अन्य सांसद और राहुल गाँधी भी श्रद्धालु बनकर दानपेटी में पैसे डालते दिखे और पप्पू यादव उन पैसों को उठाकर अपनी जेब में रखने का अभिनय कर रहे थे। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेताओं के खिलाफ FIR पर DCP काशी जोन गौरव बंसवाल ने बताया है कि संतों की तहरीर पर तीनों नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान धार्मिक प्रतीकों का गलत इस्तेमाल हुआ और भगवान रामलला की तस्वीर के अनादर से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है। इसी आधार पर पुलिस में मामला दर्ज कराया गया है।

संसद में इस तरह वेश बदलकर प्रदर्शन करने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने संसद में कहा कि कुछ सदस्य जिस तरह से भेष बदल-बदलकर आ रहे हैं, वह सदन की मर्यादा और परंपराओं के खिलाफ है। ओम बिरला ने चेतावनी देते हुए कहा कि संसद भवन परिसर की पवित्रता और गरिमा बनी रहनी चाहिए और इस तरह के प्रदर्शनों पर सख्त रुख अपनाया जाएगा।

राहुल गाँधी, डिंपल यादव समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी लिया नाटक में भाग

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी समेत कई विपक्षी सांसद भी इस सांकेतिक प्रदर्शन में शामिल हुए और दान पेटी में पैसे डालकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान चंदा चोर, गद्दी छोड़, जवाब तुमको देना होगा और अमित शाह, सदन में आओ जैसे नारे भी लगाए गए।
शिकायतकर्ता का यह भी दावा है कि इस प्रदर्शन को राहुल गाँधी, डिंपल यादव, अवधेश प्रसाद समेत INDIA गठबंधन के कई सांसदों का समर्थन प्राप्त था। शिकायत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत पप्पू यादव के खिलाफ FIR दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े वीडियो, शिकायत और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जाँच की जा रही है। जाँच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कड़ी नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और उसकी गरिमा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कुछ सांसद अलग-अलग भेष बदलकर संसद परिसर में आ रहे हैं, जो संसद की परंपराओं और मर्यादा के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि संसद परिसर की पवित्रता और गरिमा को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु बालक दास के नेतृत्व में संतों के प्रतिनिधिमंडल ने गौरव बंसवाल से मुलाकात की थी। जगद्गुरु बालक दास ने बताया कि संसद में जिस तरह से पप्पू यादव ने भगवान राम का और सनातन का अपमान किया वह अक्षम्य है। वहीं, महंत जगदीश्वरनाथ ने कहा, “संत समाज शांत है तो कुछ भी करोगे। हिम्मत है तो कभी सिर पर टोपी पहनकर कुछ करो तो जानें। सिर तन से जुदा न हो जाए तो कहना।”

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने भी पप्पू यादव के इस कृत्य की घोर निंदा की है। संतों ने उनसे सार्वजनिक रूप से माफी माँगने को कहा है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए साधु-संतों की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है और इसे संत-समाज कभी सफल नहीं होने देगा। उन्होंने कहा कि बिहार में उनके संसदीय क्षेत्र तक जाकर संत समाज लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएगा।

मथुरा में भी साधु-संतों ने एकजुट होकर पप्पू यादव का कड़ा विरोध किया है। संतों ने गोवर्धन क्षेत्र के ग्राम जुल्हेदी स्थित एक आश्रम पर यादव को ‘कंस’ का रूप बताते हुए उनके पोस्टर लगाए और पुतले का दहन किया और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की है। चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने कहा कि भगवा, सनातन धर्म और लोगों की आस्था का मजाक उड़ाने वाले जनप्रतिनिधियों को संसद में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। साथ ही, उनकी संसद सदस्यता रद्द करने की माँग की गई है। संतों ने उनकी तस्वीर पर चप्पलें तक बरसाईं हैं।

इसके अलावा दिल्ली में भी पप्पू यादव के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। दिल्ली के जहाँगीरपुरी थाने में सूर्य मैथिल नामक व्यक्ति ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान धार्मिक प्रतीकों का गलत इस्तेमाल हुआ और भगवान रामलला की तस्वीर के अनादर से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है। इसी आधार पर पुलिस में मामला दर्ज कराया गया है।

FATF की ‘आतंकिस्तान’ को चेतावनी : ‘दोबारा ग्रे लिस्ट में जाना है क्या, तुरंत बंद करो आतंकी फंडिंग’: अभी भी निगरानी में हो; अंधी FATF को शायद नहीं मालूम की आतंकियों को फंडिंग पाकिस्तान नहीं बल्कि आतंकवाद समर्थक मुल्क/लोग पाकिस्तान को फंडिंग कर रहे हैं

          FATF ने आतंकी संगठनों को फंडिंग करने वाले देशों को दी चेतावनी (साभार : Indiatv & aajtak)

पाकिस्तान की मुश्किलें फिर बढ़ सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स FATF ने साफ चेतावनी दी है कि ग्रे लिस्ट से बाहर आने का मतलब आतंकियों को फंड देने की छूट नहीं है। वहीं, संगठन का ये भी इशारा था कि पाकिस्तान अब भी आतंक फंडिंग के खतरे से पूरी तरह मुक्त नहीं हुआ है। अगर उसने सुधार नहीं किए तो उसे दोबारा ग्रे लिस्ट में डाला जा सकता है।

FATF ऐसी धमकी देकर आखिर क्या खेल खेल रहा है? विश्व में किसे नहीं मालूम कि पाकिस्तान आतंकवाद की जन्मभूमि है। जहां फौज आतंकवादियों के लाशों पर फातिया पढ़ती हो क्या वो मुल्क आतंकवाद छोड़ सकता है? दूसरे, आतंकियों को फंडिंग पाकिस्तान नहीं बल्कि आतंकवाद समर्थक मुल्क/लोग पाकिस्तान को फंडिंग कर रहे हैं। यही वजह है कि भूखा मरते मुल्क के नेताओं का विदेशों में तिजोरियों का अम्बार नहीं होता। यह धमकी अगर पाकिस्तान को समर्थन देने वालों को दी जाती तब लगता कि FATF आतंकवाद के खिलाफ है।     

FATF की सख्त चेतावनी

जानकारी के अनुसार, पेरिस में हुए FATF के अधिवेशन में 200 से ज़्यादा देशों ने हिस्सा लिया। बैठक में कई देशों को ग्रे लिस्ट से हटाया गया। बैठक के बाद FATF अध्यक्ष एलिसा डे अंडा माद्राजो ने कहा कि किसी भी देश के लिए ग्रे लिस्ट से बाहर आना सुरक्षा की गारंटी नहीं है। FATF अध्यक्ष ने कहा, “जो देश ग्रे लिस्ट में रहे हैं, वे अपराधियों या आतंकियों की फंडिंग से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।” FATF ने पाकिस्तान को याद दिलाया कि वह अभी भी एशिया पैसिफिक ग्रुप की निगरानी में है और उसे वित्तीय पारदर्शिता और आतंक फंडिंग पर सख्ती से नियंत्रण रखना होगा।

भारत में डिजिटल रास्तों से पहुँचा आतंक का पैसा

इस साल जुलाई 2025 में FATF ने खुलासा किया था कि भारत में हुए आतंकी हमलों में इस्तेमाल किए गए विस्फोटक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से खरीदे गए थे। यह खुलासा पुलवामा और गोरखनाथ मंदिर हमले की जाँच के दौरान हुआ। आतंकी संगठन सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स और क्राउडफंडिंग साइट्स का इस्तेमाल फंड जुटाने के लिए कर रहे हैं। इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए उन्हें पैसे, सामान और ट्रेनिंग की मदद मिल रही है।

2019 के पुलवामा हमले में जैश-ए-मोहम्मद ने बड़ी मात्रा में विस्फोटक जुटाए थे। जाँच में सामने आया कि हमले में इस्तेमाल हुए उपकरणों के पुर्जे ऑनलाइन खरीदे गए थे। इसी तरह, पहलगाम हमले में भी आतंकियों को बाहर से वित्तीय मदद और धन हस्तांतरण मिला था, जिसके बिना हमला संभव नहीं था। यही रिपोर्टें FATF के पास पहुँचीं और उसने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि अगर उसने कार्रवाई नहीं की तो उसे फिर से ग्रे लिस्ट में डाल दिया जाएगा।

पहले भी झेल चुका है अंतरराष्ट्रीय दबाव

पाकिस्तान को 2018 में FATF की ग्रे लिस्ट में डाला गया था, जब उस पर आतंकियों को फंड देने और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने में नाकाम रहने के आरोप लगे थे। करीब चार साल बाद 2022 में वह बाहर आया। लेकिन अब FATF की सख्त टिप्पणी से साफ है कि पाकिस्तान पर दुनिया का भरोसा फिर कमजोर पड़ रहा है।

अगर FATF किसी देश को हाई-रिस्क घोषित करता है, तो उस देश की अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग, निवेश और व्यापार पर बड़ा असर पड़ता है। पाकिस्तान की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था ऐसी सजा झेल नहीं पाएगी। इसलिए FATF की चेतावनी उसके लिए गंभीर आर्थिक खतरे का संकेत है।

पहलगाम हमले के बाद सरकार सख्त, सैन्य अभियान की लाइव कवरेज पर लगाई रोक: कारगिल युद्ध और मुंबई हमले के दौरान बरखा दत्त की कवरेज का आतंकियों ने उठाया था फायदा

                                                                                   प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: brecorder)
पाकिस्तान से लड़ाई में वर्तमान मोदी सरकार पिछली सरकारों की गलतियों से बचते हुए कदम उठा रही है। मीडिया को लाइव कवरेज पर रोक लगा कर उस मीडिया गैंग को भी बहुत बड़ा झटका दिया है। ये मीडिया गैंग लाइव कवरेज के जरिये गुप्त रुप से पाकिस्तान की मदद करते रहे हैं। सरकार के इस सख्त कदम से शोभा यात्राओं पर पेट्रोल बम और पत्थरबाज़ी करने और उनको समर्थन करने वालों को भी चेतावनी दे दी गयी है। 
पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के चार दिन बाद शनिवार (26 अप्रैल 2025) को भारत सरकार के सूचना एवँ प्रसारण मंत्रालय ने एक सख्त चेतावनी जारी की है। मंत्रालय ने सभी मीडिया चैनलों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी सैन्य अभियान या सुरक्षा बलों की गतिविधियों की लाइव कवरेज न करें। इस चेतावनी का मकसद देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना और शत्रुओं को किसी भी तरह का फायदा न पहुँचने देना है। मंत्रालय ने साफ कहा कि रक्षा और सुरक्षा से जुड़े अभियानों की रिपोर्टिंग में मौजूदा कानूनों और नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।

मंत्रालय ने अपने पत्र में कहा कि रियल-टाइम कवरेज, विजुअल्स का प्रसारण या सूत्रों के हवाले से खबरें चलाना पूरी तरह बंद करना होगा। ऐसा करना शत्रुओं की मदद कर सकता है और सैन्य अभियानों को नुकसान पहुँचा सकता है।

कारगिल युद्ध, 26/11 मुंबई हमले और कंधार हाईजैकिंग जैसी घटनाओं के दौरान मीडिया की लाइव कवरेज ने देश को भारी नुकसान पहुँचाया था। इन घटनाओं से सबक लेते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि किसी भी आतंक-विरोधी अभियान की लाइव कवरेज नहीं होनी चाहिए। खबरों को सिर्फ सरकारी प्रेस ब्रीफिंग तक सीमित रखने का निर्देश दिया गया है। ऐसा न करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

मंत्रालय ने कहा कि मीडिया एक जिम्मेदार भूमिका निभाए, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है। संवेदनशील जानकारियों को सार्वजनिक करना सैनिकों की जान को खतरे में डाल सकता है। मंत्रालय ने केबल टेलीविजन नेटवर्क्स (संशोधन) नियम, 2021 का हवाला देते हुए कहा कि सभी टीवी चैनलों को इन नियमों का पालन करना होगा। इसमें साफ लिखा है कि आतंक-विरोधी अभियानों की लाइव कवरेज नहीं होनी चाहिए और खबरें सिर्फ सरकारी ब्रीफिंग तक सीमित रहें। मंत्रालय ने सभी हितधारकों से सतर्कता और संवेदनशीलता बरतने की अपील की है।

याद ही होगा कि 26/11 मुंबई हमले के लाइव कवरेज ने आतंकियों को मदद पहुंचाई थी। 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने मुंबई को चार दिनों तक बंधक बनाए रखा। इस हमले में 166 लोग मारे गए, जिनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे। नौ आतंकी मारे गए, जबकि अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा गया। इस हमले की साजिश हाफिज सईद और जकीउर्रहमान लखवी ने रची थी, जो आज भी पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहे हैं। उस वक्त की मनमोहन सिंह सरकार ने पाकिस्तान को कई डोजियर सौंपे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इस हमले के दौरान मीडिया की भूमिका पर सवाल उठे थे। खासतौर पर पत्रकार बरखा दत्त की रिपोर्टिंग को लेकर काफी विवाद हुआ। उस समय बरखा एनडीटीवी के लिए काम करती थीं और उनकी लाइव कवरेज पर गंभीर सवाल खड़े हुए। 2012 में न्यूजलॉन्ड्री को दिए एक इंटरव्यू में बरखा ने खुद स्वीकार किया कि उनकी और अन्य पत्रकारों की रिपोर्टिंग की वजह से सैकड़ों लोगों की जान खतरे में पड़ गई थी। उन्होंने यह भी माना कि उनकी कवरेज से सुरक्षा बलों को भी नुकसान हुआ। न्यूजलॉन्ड्री की मधु त्रेहान ने इंटरव्यू में बरखा से इस बारे में सवाल किए थे।

मुंबई हमले के दौरान बरखा पर आरोप लगा कि उन्होंने एक फंसे हुए व्यक्ति के रिश्तेदार को फोन करके उसकी लोकेशन लाइव टीवी पर उजागर कर दी। इससे आतंकियों को उसकी जगह का पता चल गया और उसकी जान चली गई। ब्लॉगर चैतन्य कुंते ने बरखा से पत्रकारिता की नैतिकता पर सवाल उठाए, जिसके जवाब में बरखा ने उन्हें लीगल नोटिस भेज दिया। चैतन्य ने यह भी आरोप लगाया कि बरखा की वजह से हेमंत करकरे की मौत हुई, हालांकि बरखा ने इससे इनकार किया और कहा कि उस वक्त वे दिल्ली में थीं।

बरखा ने इंटरव्यू में यह भी बताया कि उन्हें और अन्य पत्रकारों को अपनी गलती का एहसास हुआ, जिसके बाद उन्होंने दूसरे दिन से लाइव विजुअल्स को 15 मिनट की देरी से दिखाना शुरू किया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता था कि आतंकी भी टीवी देख रहे हैं। एक अन्य घटना में बरखा पर आरोप लगा कि उन्होंने ओबेरॉय होटल के मैनेजर को कॉल किया, जिससे आतंकियों को पता चल गया कि वहाँ कई लोग बंधक हैं। इन सभी घटनाओं ने मीडिया की लाइव कवरेज के खतरों को उजागर किया।

इसी तरह, कारगिल युद्ध के दौरान भी मीडिया की लाइव रिपोर्टिंग ने सेना की रणनीति को प्रभावित किया था। 1999 में हुए इस युद्ध में पाकिस्तानी घुसपैठियों ने कारगिल की चोटियों पर कब्जा कर लिया था। भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय चलाकर उन्हें खदेड़ा, लेकिन इस दौरान मीडिया की पल-पल की कवरेज ने सेना की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। कंधार हाईजैकिंग की घटना में भी यही हुआ। 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 को हाईजैक कर लिया गया था। इस दौरान मीडिया की कवरेज ने हाईजैकर्स को यात्रियों की स्थिति और सरकारी रणनीति की जानकारी दी, जिससे बातचीत और ऑपरेशन में दिक्कत हुई।

इन सभी घटनाओं से सबक लेते हुए सरकार ने अब सख्त रुख अपनाया है। मंत्रालय ने कहा कि मीडिया को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखना होगा। यह कदम भविष्य में होने वाले किसी भी नुकसान को रोकने के लिए उठाया गया है।

खैबर-पख्तूनख्वा में क्यों उठी बगावत की चिंगारी? पाकिस्तान में सरकार को मुख्यमंत्री ही दे रहे धमकी :‘गोली का जवाब गोली से, गोले का जवाब गोले से’

                             खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर (फोटो साभार: Tribune.pk/X)
पाकिस्तान में उठापटक तेज हो गई है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर ने हाल ही में पाकिस्तान में एक बड़े राजनीतिक आंदोलन की घोषणा की। उनका कहना था कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि बिना इस आंदोलन के देश में कोई सुधार संभव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “अब सरकार की ओर से होने वाले किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा। अगर गोली चलाई गई, तो उसका जवाब गोली से दिया जाएगा, अगर किसी ने लाठी चलाई, तो लाठी से जवाब मिलेगा, और अगर गोले दागे गए, तो उसका जवाब भी गोले से ही दिया जाएगा।”

गंडापुर ने कहा कि अब अगर कोई चलाएगा तो उसके ऊपर गोली चलाई जाएगी। अगर तुम एक गोली मारोगे तो हम तो हम 10 गोली चलाएँगे। यह बयान तब आया जब गंडापुर रावलपिंडी में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके, क्योंकि उन्हें बुरहान इंटरचेंज पर रोक दिया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रावलपिंडी में PTI के समर्थक अपने नेता इमरान खान के आह्वान पर सड़कों पर उतरे थे। यह प्रदर्शन तब हुआ जब पार्टी के कई बड़े नेता देश में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने का आह्वान कर रहे थे। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य था सरकार की नीतियों का विरोध करना और PTI के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना। हालाँकि, इस प्रदर्शन में हिंसा भड़क उठी और PTI समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें हो गईं। पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और रबर की गोलियां चलाईं, जबकि प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी और लाठीचार्ज का सामना किया।

अली अमीन गंडापुर, जो कि इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जा रहे थे, उन्हें बुरहान इंटरचेंज पर कई घंटों तक रोका गया। प्रशासन ने PTI के विरोध को रोकने के लिए कई जगहों पर कंटेनर लगा दिए थे और सड़कों को बंद कर दिया था। इससे गंडापुर का काफिला भी कई घंटे तक इंटरचेंज पर फँसा रहा। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शनकारियों को संदेश भेजा कि उन्हें प्रदर्शन खत्म करना होगा और वापस लौटना होगा।

उन्होंने अपने समर्थकों से कहा, “हम अपने संवैधानिक अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार हमें हमारा अधिकार देने को तैयार नहीं है। जब हम वापस लौटेंगे, तो अपने साथ सभी संसाधन लाकर फिर से संघर्ष करेंगे।” उनके इस बयान से साफ था कि वह इस संघर्ष को और अधिक तीव्रता से जारी रखने के लिए तैयार हैं।

गंडापुर ने एक  वीडियो संदेश में दावा किया कि पुलिस ने उनके समर्थकों पर सीधे फायरिंग की और आंसँ गैस के गोले दागे। उनके मुताबिक, हर तीन किलोमीटर पर पंजाब पुलिस गोलियाँ और गोले दाग रही थी। इस दौरान तीन PTI कार्यकर्ताओं को गोली लगी और 50 से अधिक लोग घायल हुए। यह एक गंभीर आरोप था, जिसने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया।

गंडापुर ने यह भी दावा किया कि PTI कार्यकर्ताओं ने कुछ पुलिसकर्मियों को पकड़ लिया था, लेकिन उनके आदेश पर उन्हें रिहा कर दिया गया। इस बयान के साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह इसे कोई धमकी नहीं मानते, बल्कि इसे एक “अंतिम चेतावनी” के रूप में देखा जाना चाहिए। उनका संदेश था कि अगर सरकार और संस्थाएं जनता की आवाज नहीं सुन सकतीं, तो उन्हें पीछे हट जाना चाहिए और राजनीतिक निर्णयों को राजनीतिक नेताओं के हाथों में छोड़ देना चाहिए।

हालाँकि, जब गंडापुर ने प्रदर्शन को स्थगित करने का ऐलान किया, तो PTI के समर्थकों में भारी नाराजगी देखी गई। बुरहान इंटरचेंज पर प्रदर्शनकारियों ने गंडापुर के खिलाफ नारेबाजी की और उनके वाहन को घेर लिया। उन्होंने गंडापुर से इस्तीफा देने की मांग की, क्योंकि वे प्रदर्शन खत्म करने के उनके फैसले से सहमत नहीं थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्हें संघर्ष जारी रखना चाहिए था।

PTI नेता आज़म स्वाती ने इस स्थिति में हस्तक्षेप किया और प्रदर्शनकारियों को शांत किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय PTI के अध्यक्ष इमरान खान के निर्देशों पर लिया गया है और हमें उनके आदेश का पालन करना होगा। स्वाती के हस्तक्षेप से प्रदर्शनकारियों को शांत किया गया और अंततः प्रदर्शन खत्म हो गया।

इससे पहले, पंजाब सरकार ने रावलपिंडी में धारा 144 लागू कर दी थी, जिससे किसी भी प्रकार की राजनीतिक रैली, धरना या विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाई गई थी। इसके बावजूद PTI ने प्रदर्शन करने का फैसला किया था, जो बाद में हिंसक रूप में बदल गया। पुलिस ने शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे और शहर को “हाई अलर्ट” पर रखा गया था। रावलपिंडी के सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस के प्रवक्ता ने साफ कर दिया था कि शहर में किसी भी अवैध जनसभा की अनुमति नहीं दी जाएगी और अगर किसी ने कानून का उल्लंघन किया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रदर्शन के दौरान PTI के कुछ प्रमुख नेताओं को भी गिरफ्तार किया गया। PTI अध्यक्ष बैरिस्टर गोहर अली खान और सलमान अकरम राजा को रावलपिंडी के पास सेक्टर H-13 में हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया था, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। गोहर और सलमान ने बाद में बताया कि पुलिस ने उन्हें रावलपिंडी जाने से मना कर दिया था और वापस लौटने का निर्देश दिया था।

PTI ने पहले रावलपिंडी के लियाकत बाग में एक बड़ी जनसभा करने की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में इमरान खान के निर्देश पर इसे प्रदर्शन में बदल दिया गया। PTI ने लाहौर हाई कोर्ट की रावलपिंडी बेंच से रैली के लिए NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) माँगने की अर्जी भी वापस ले ली थी।

गंडापुर के नेतृत्व में यह आंदोलन सरकार के खिलाफ PTI के संघर्ष का एक हिस्सा है, जो लंबे समय से जारी है। PTI के समर्थकों का मानना है कि उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है और इस आंदोलन का उद्देश्य इन अधिकारों को पुनः प्राप्त करना है।

अली अमीन गंडापुर के नेतृत्व में PTI का यह नया आंदोलन पाकिस्तान की राजनीति में एक नया मोड़ ले सकता है। उनके नेतृत्व में पार्टी ने सरकार के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाई और प्रदर्शन किया, लेकिन पुलिस और प्रशासन के कड़े कदमों के कारण उन्हें अपने समर्थकों को वापस बुलाना पड़ा। इसके बावजूद, गंडापुर और PTI के अन्य नेता इस संघर्ष को जारी रखने का संकल्प ले चुके हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है और पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

MI5 ने किया अलर्ट : कहीं कैश तो कहीं सेक्स, औरतों को हथियार बना विदेशी नेताओं को फाँस रहा चीन: ब्रिटिश संसद में भी ‘चीनी घुसपैठ’

                                       अमेरिका के बाद अब ब्रिटेन में भी चीनी जासूस का खुलासा
दुनिया भर में ‘औरतों’ को हथियार बना कर जासूसी करने वाला चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। कुछ समय पहले अमेरिका की मीडिया रिपोर्ट्स ने खुलासा किया था कि वहाँ ‘चीनी जासूस’ नेताओं से रिश्ते बनाकर गोपनीय सूचनाएँ निकलवा रही है। अब ऐसी ही खबर ब्रिटेन से आई है। ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI5 ने हाल में चीन की घटिया करतूत से पर्दा उठाते हुए बताया कि कैसे लेबर पार्टी को करोड़ों का चंदा देने वाली चीनी महिला पर जासूसी के शक हैं।

 MI5 ने अलर्ट जारी कर कहा है कि चीन सरकार की एजेंट ब्रिटेन की संसद में एक्टिव है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस चीनी महिला का नाम क्रिस्टीन ली है। एजेंसी के दावे के मुताबिक कई ब्रिटिश सांसद इस चीनी जासूस के जाल में फँसे हैं और एक पूर्व सांसद से उसके नजदीकी संबंध भी रहे हैं। अलर्ट में कहा गया है,  “ली ने सीसीपी के यूनाइटिड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट के साथ समन्वय में गुप्त रूप से काम किया और उसके ब्रिटेन में राजनीतिक हस्तक्षेप गतिविधियों में शामिल होने का अनुमान लगाया गया है।”

ली ने कथिततौर पर कई बार में लेबर पार्टी को सैकड़ों हजारों पाउंड का दान दिया है। इसके अलावा उसके कंजर्वेटिव पार्टी से भी संबंध रहे हैं। वह डेविड कैमरन के पीएम रहते हुए उनसे मिली थी। मालूम हो कि ब्रिटिश खुफिया एजेंसी ने इस बात को भी साफ किया कि इस चीनी जासूस को अभी गिरफ्तार नहीं किया गया है और न ही उसे देश से निकाला गया है। लेकिन इस संबंध में ब्रिटिश संसद के स्पीकर की सुरक्षा टीम ने सभी सांसदों को संदेश भेज दिया है। ली के बारे में जानकारी है कि वो पेश से एक वकील है और लंदन में चीनी दूतावास की पूर्व मुख्य कानूनी सलाहकार भी। इसके अतिरिक्त वह इंटर पार्टी चाइना ग्रुप सचिव भी है।

अमेरिका और नेपाल में चीन का हनीट्रैप

उल्लेखनीय है कि साल 2020 में खबर आई थी कि चीनी जासूस क्रिस्टीन फेंग उर्फ फेंग फेंग (Fang Fang) ने अमेरिकी नेताओं से जिस्मानी रिश्ते बनाकर उनसे गोपनीय सूचनाएँ निकालने की कोशिश की। Axios डॉटकॉम ने खुलासा किया था कि चीन की जासूस मानी जाने वाली क्रिस्टीन फेंग ने कैलिर्फोनिया के नेताओं को निशाना बनाया था।

इनमें प्रतिष्ठित डेमोक्रेटिक सांसद और संसद की इंटेलीजेंस कमिटी के सदस्य एरिक स्वैलवेल (Eric Swalwell) भी थे। कथिततौर पर फेंग के 2015 में अमेरिका छोड़ने से पहले स्वैलवेल के साथ अंतरंग संबंध थे। हालाँकि स्वैलवेल लगातार इस सवाल से बचते रहे थे कि उन्होंने सेक्स के बदले उन्होंने फेंग के साथ ‘गोपनीय जानकारी’ साझा की थी या नहीं।

ब्रिटेन अमेरिका के अलावा चीन ने महिला के बूते नेपाल पर भी अपना दबदबा कायम करने का प्रयास किया था। नेपाल में चीन की राजदूत होऊ यांगी को लेकर खबरें आईं थी कि उन्होंने वहाँ की सरकार में जबर्दस्त प्रभाव बनाया था। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और आर्मी चीफ जनरल पूर्ण चंद्र थापा उनकी कठपुतली थे।

पंजशीर में नरसंहार कर रहे तालिबान-पाकिस्तान को ईरान की चेतावनी : लक्ष्मण रेखा पार न करें

इस्लाम के नाम पर आतंक को प्रोत्साहित और प्रशिक्षित करने में पाकिस्तान विश्व में मशहूर है। अगर पाकिस्तान ने आतंक पर खर्च करने की बजाए देश के विकास पर खर्च किया होता, इधर-उधर देशों के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता।  
तालिबान के खिलाफ लोहा ले रही अफगानिस्तान की पंजशीर घाटी में अब तालिबान पाकिस्तान के साथ मिलकर नरसंहार कर रहा है, जिसपर ईरान ने बुरी तरह खफा हो गया है, अफगानिस्तान के बेहद अहम पड़ोसी देश ईरान के विदेश मंत्रालय ने तालिबान को कड़ी चेतावनी देते हुए लक्ष्मण रेखा पार नहीं करने की चेतावनी दी है, ईरान ने कहा कि वह पंजशीर में पाकिस्तान के हस्तक्षेप की जांच कर रहा है। उन्होंने कहा कि पंजशीर के कमांडरों की शहादत बेहद निराशाजनक है और ईरान कल रात के हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करता है।

तेहरान टाइम्स ने ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद खतीब ज़ादेह के हवाले से कहा, “पंजशीर हमले के दौरान पाकिस्तानी हस्तक्षेप की जांच की जा रही है।” ईरान का मानना है कि अंतर-अफगान वार्ता ही अफगान समस्या का एकमात्र समाधान है। उन्होंने कहा- ‘मैं दृढ़ता से चेतावनी देता हूं कि सभी लक्ष्मण रेखा को पार न करें और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जिम्मेदारियों पर विचार किया जाना चाहिए।

 ईरानी प्रवक्ता ने कहा, “ईरान अफगानिस्तान के घटनाक्रम पर करीब से नजर रखे हुए है।” ईरान की चेतावनी ऐसे समय में आई है जब पंजशीर विद्रोहियों ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना ने तालिबान को जीतने के लिए हवाई सहायता प्रदान की। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि तालिबान ने पाकिस्तान की मदद से नरसंहार को अंजाम दिया।

तालिबान-पाकिस्तान के इस हमले में ताजिक मूल के विद्रोही नेता अहमद मसूद को बड़ा झटका लगा है, उनके प्रवक्ता फहीम दशती और शीर्ष कमांडर जनरल साहिब अब्दुल वदूद झोर मारे गए. मसूद के सुरक्षित स्थान पर चले जाने के बाद तालिबान ने सोमवार सुबह दावा किया कि उन्होंने पंजशीर पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है। इस बीच मसूद ने ट्वीट कर कहा कि तालिबान हमारे साथ युद्ध नहीं लड़ रहा है बल्कि उनका नेतृत्व पाकिस्तानी सेना और आईएसआई कर रही है। तालिबान हमारे साथ मुकाबला करने के लिए पर्याप्त मजबूत नहीं हैं लेकिन पाकिस्तानी सेना उनके साथ सहयोग कर रही है।