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उत्तर प्रदेश : ‘इंशाअल्लाह, राम मंदिर को गिराना हमारी जिम्मेदारी बन चुकी है’: 2005 में भी जैश ने बोला था हमला

अयोध्या स्थित राम मंदिर को बम से उड़ाने की आतंकी धमकी
बीजेपी को वोट न देने वाले हिन्दुओं आंखे खोलो, हमेशा लालची मत बनो। संघ के इंद्रेश कुमार को अपना राष्ट्रीय मुस्लिम मंच तुरन्त बंद कर देना चाहिए। इंद्रेश बताये कि आम मुसलमानों को छोड़ो तुम्हारे मुस्लिम मंच ने वोट क्यों नहीं दिया? इंद्रेश न पागल बनो और न बनाने की कोशिश करो। इतने वृद्ध होने पर भी मुस्लिम मानसिकता नहीं समझे तो अपने आपको नेता कहलाने का कोई अधिकार नहीं। इतने सालों से मुस्लिम मंच चला रहे हो, उन्हें मुख्यधारा से नहीं जोड़ नहीं पाए, तो क्या फायदा इस मंच का? जवाब दो जब सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद से मुस्लिमों ने बीजेपी के विरुद्ध मन बना चुके थे, मुस्लिम मंच के सरगना होने पर भी सोते रहे, शर्म करों। अगर राममंदिर पर किसी भी रूप में क्षति पहुँचती है, इंद्रेश कौन जिम्मेदार होगा, बताओ? इंद्रेश कुमार के इस मुस्लिम मंच को वित्तीय सहायता देने वालों को भी तुरंत इस पाखंडी मंच को एक पैसा नहीं देना चाहिए।  

आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी है। अयोध्या का राम मंदिर का हाल ही में निर्माण हुआ है और अभी भी इसमें कई कार्य जारी हैं। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहाँ दर्शन करते हैं। इससे संबंधित एक ऑडियो जारी होने के बाद उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अलर्ट जारी किया है। अयोध्या में तैनात सुरक्षाकर्मियों को अतिरिक्त सुरक्षा बरतने के लिए कहा गया है।

अयोध्या में रामकोट के सभी बैरियरों पर सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, पुलिस जाँच में जुट गई है। जिस मार्ग से रामलला का दर्शन करने के लिए श्रद्धालु जाते हैं, वहाँ भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सामने आए ऑडियो में जैश-ए-मुहम्मद का आतंकी कहता है, “बाबरी मस्जिद की जगह तुम्हारा मंदिर बना हुआ है और वहाँ हमारे 3 साथी शहीद हुए हैं। इंशाअल्लाह, इस मंदिर को गिराना हमारी जिम्मेदारी बन गई है।” जैश-ए-मुहम्मद का गढ़ पाकिस्तान में है।

पाकिस्तान से ही इसे पोषण मिलता रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को इस ऑडियो की जाँच के लिए लगाया गया है। केंद्र और प्रदेश सरकार की सुरक्षा एजेंसियाँ मिल कर काम कर रही हैं। जैश-ए-मुहम्मद 2005 में राम मंदिर पर हमला भी कर चुका है। तब रामलला टेंट में विराजमान थे और मंदिर बना नहीं था। बस अड्डों पर भी संदिग्ध वस्तुओं की जाँच चल रही है। अयोध्या में NSG (राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड्स) का हब भी बनाया जा रहा है। ये देश का छठा ऐसा हब होगा।

अयोध्या देश के सबसे संवेदनशील और व्यस्त स्थलों में से एक बन गया है, ऐसे में NSG का हब यहाँ की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने का काम करेगा। 5 जुलाई, 2005 को जैश के 5 आतंकियों ने यहाँ हमला बोला था, CRPF ने इन सभी को मार गिराया था। 2023 में भी राम मंदिर पर हमले की धमकी दी गई थी, जो फर्जी निकली थी। भारत के कट्टर मुस्लिम भी अक्सर ‘बाबरी ज़िंदा है’ का नारा लगाते हैं, जिसे असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेता भी हवा देते रहे हैं।

‘बेंगलुरु : गुलाम बनो या फिर इस्लाम अपना लो…’: 48 स्कूलों को बम से उड़ाने की मिली धमकी, पुलिस ने परिसर कराए खाली

बेंगलुरु के स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी (साभार: आउटलुक हिंदी)

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के स्कूलों को एक बार फिर से बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। करीब 48 स्कूलों (कुछ रिपोर्ट में 15-16 तो कुछ 28 और 48 स्कूल) को शुक्रवार (1 दिसंबर 2023) को सुबह एक ईमेल मिला, जिसमें धमकी दी गई कि स्कूल परिसर में बम रखा गया है। इसके बारे में पुलिस को सूचित किया गया। आनन-फानन में पुलिस ने सभी स्कूलों को खाली कराकर तलाशी शुरू कर दी।

पुलिस की तलाशी अभियान में अभी तक कुछ नहीं मिला है। हालाँकि, पुलिस का तलाश अभियान जारी है। साथ में बम निरोधक दस्ते और तोड़फोड़ रोधी जाँच दल भी है। माना जा रहा है कि पिछली बार की तरह ये धमकी भी फर्जी हो सकती है। बता दें कि पिछले साल बेंगलुरु के कई स्कूलों को ईमेल भेजकर बम विस्फोट की धमकी दी गई थी। बाद में यह धमकी फर्जी निकली थी।

घटना के बाद स्कूल ने अभिभावकों को बुलाकर बच्चों को घर भेज दिया। एक स्कूल ने बताया, “आज स्‍कूल प्रशासन एक अप्रत्याशित परिस्थिति का सामना कर रहा है। स्‍कूल में बम होने की धमकी मिली है। छात्रों की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है। इसलिए हमने निर्णय लिया है कि छात्रों को तुरंत स्‍कूल से बाहर निकाला जाए। सुरक्षाबलों की सलाह पर छात्रों को घर भेजा जा रहा है।”

वहीं, शहर के पुलिस कमिश्नर ने कहा, “बेंगलुरु शहर के कुछ स्कूलों को आज सुबह ‘बम की धमकी’ का संकेत देने वाले ईमेल मिले हैं। सत्यापन और पता लगाने के लिए तोड़फोड़ रोधी और बम खोजी दस्तों को सेवा में लगाया गया है। ये हॉक्स कॉल लगती है, फिर भी दोषियों का पता लगाने का पूरा प्रयास किया जाएगा।”

कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा, “हम ईमेल के सोर्स की पुष्टि कर रहे हैं। हम इसे गंभीरता से ले रहे हैं। मैंने प्राथमिकता के आधार पर इसकी जाँच करने के लिए पुलिस को सूचित कर दिया है।” वहीं, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने पुलिस को जाँच करने का निर्देश दिया है। सुरक्षा उपाय भी किए गए हैं। माता-पिता को घबराने की जरूरत नहीं है।

इन स्कूलों को भेजे गए ईमेल में कहा गया है, “26 नवंबर को अल्लाह की राह में शहीद होने वालों ने सैकड़ों मूर्तिपूजकों को मार डाला। हाथ में चाकू लेकर काफिरों पर रखना वाकई पावरफुल अनुभव है। अल्लाह की राह में शहीद होने के लिए सैकड़ों मुजाहीद्दीन युद्ध क्षेत्र में जा रहे हैं। तुम अल्लाह के दुश्मन हो और हम तुम्हें और तुम्हारे बच्चों को मार देंगे।”

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, इस ईमेल में आगे लिखा है, “तुम लोगों के पास हमारा गुलाम बनने या अल्लाह के असली दीन को अपनाने का विकल्प है। बिस्मिल्लाह हम अल्लाह के सच्चे दीन को पूरे भारत में फैलाएँगे। इस्लाम अपनाओ या इस्लाम की तलवार से अपनी गर्दन कटवाओ। जब हम काफिरों से मिलेंगे तो उनके सिर काट देंगे। उनकी अंगुलियों को काट देंगे।”

साल 2022 में बेंगलुरु के 15 स्कूलों को इसी तरह का एक ईमेल प्राप्त हुआ था। उस ईमेल का धमकी दी गई थी कि स्कूल के परिसर में विस्फोटक लगाए गए है। इसके बाद पुलिस की टीम ने इन स्कूलों की गहन तलाशी ली थी, लेकिन कहीं कुछ नहीं मिला था। बाद में पता चला कि यह किसी सिरफिरे की शरारत है।


केमिकल हमले के बाद तबाह हो जाता पूरा इजरायल; हमास आतंकियों की अलकायदा वाली साजिश, तैयार था सायनाइड से बम बनाने का पूरा खाका

                   हमास के आतंकी केमिकल हमला करना चाहते थे (साभार: Council on Foriegn Relations)
दक्षिणी इजरायल पर 7 अक्टूबर, 2023 को किए गए हमले में इस्लामी आतंकी संगठन हमास के आतंकी निर्दोष नागरिकों पर सायनाइड वाले केमिकल हथियारों का उपयोग करने वाले थे। यह खुलासा आतंकियों के पास मिली सामग्री में हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायली ख़ुफ़िया एजेंसियों को दक्षिणी इजरायल के किब्बुत्ज़ में मारे गए आतंकियों के पास से कुछ USB पेन ड्राइव बरामद हुई हैं। इन पेन ड्राइव में आतंकी संगठन अलकायदा की तरह सायनाइड वाले केमिकल हथियार बनाने की विधि बताई गई है।

इस यूएसबी डिवाइस में पूरी तरीके से समझाया गया था कि सायनाइड वाले केमिकल बम कैसे बनाए जाएँ और उन्हें लगा कर ज्यादा से ज्यादा तबाही मचाई जाए। इजरायली सुरक्षा बलों ने पता लगाया है कि हमास आतंकियों के पास मिली यह जानकारी असल में आतंकी संगठन अलकायदा द्वारा वर्ष 2003 में तैयार की गई थी।

इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर सबसे पहले दक्षिणी हिस्से में हमला किया था। इस इलाके में बसे गाँवों और मुहल्लों में आतंकियों ने घर-घर जाकर बच्चों, महिलाओं समेत एक-एक व्यक्ति को मार दिया था। इसी इलाके में आयोजित किए जा रहे एक म्यूजिक फेस्टिवल में 260 से अधिक लोगों को मार दिया था। इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हेर्जोग ने आतंकियों के पास से केमिकल बम की जानकारी मिलने पर कहा, “यह अलकायदा की सामग्री है। हम अल कायदा, ISIS और हमास का मुकाबला कर रहे हैं।”

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी लगातर यह कहते आए हैं कि हमास भी ISIS की तरह ही खतरनाक है और इसका खात्मा ISIS की तरह होना चाहिए। वह लगातार हमास का समर्थन करने वालों को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से निष्कासित करने की मांग भी करते रहे हैं।

इजरायल की सरकार ने विदेशों में स्थित अपने दूतावासों को भेजे गए केबल में भी इन केमिकल हथियारों के विषय में जानकारी दी है। उन्होंने अपने दूतावासों को बताया है कि हमास ISIS की तरह ही हमले करना चाहता था। इस्लामी आतंकी संगठन हमास के इजरायल पर आतंकी हमले में मरने वालों की संख्या अब बढ़ कर 1400 के पार हो चुकी है। इजरायल ने भी इस के जवाब में हवाई हमले किए हैं। इजरायल के हमलों में अब तक 4400 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की सूचना है।

पाकिस्तान : मंच पर से कोई नेता नारा-ए-तकबीर, अल्ला-हू-अकबर चिल्लाया हो गया धमाका

                                           पाकिस्तान में भीषण बम धमाका (फोटो साभार: DC)
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में भीषण बम ब्लास्ट हुआ है। इस हादसे में अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 200 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में कुछ लोगों की हालत गंभीर है। ऐसे में मौत का आँकड़ा बढ़ सकता है। यह धमाका रविवार (30 जुलाई, 2023) को जमीयत उलेमा इस्लाम-फजल (JUI-F) की रैली में हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बम ब्लास्ट ख़ैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बाजौर जिले की खार तहसील में हुआ। इस घटना पर खैबर पख्तूनख्वा के कार्यवाहक सूचना मंत्री फिरोज शाह जमाल ने कहा है कि आसपास के इलाकों के हॉस्पिटल को हाई अलर्ट पर रखा गया है। गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को इलाज के लिए हेलीकॉप्टर से पेशावर व अन्य हॉस्पिटल में ले जाने की कोशिश की जा रही है। ब्लास्ट के बाद पुलिस और सुरक्षाबल मौके पर पहुँच गए हैं। राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

खैबर पख्तूनख्वा के आईजीपी अख्तर हयात ने कहा है कि शुरुआती जाँच में सामने आया है कि यह एक आत्मघाती हमला था। फिलहाल आगे की जाँच कर सबूत जुटाए जा रहे हैं।

जमीयत उलेमा इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रवक्ता अब्दुल जलील खान ने पाकिस्तानी मीडिया जियो न्यूज से कहा है कि धमाका शाम करीब 4 बजे हुआ। उस समय मौलाना लईक रैली को संबोधित कर रहे थे। रैली में हुए इस धमाके में JUI-F के प्रमुख नेता मौलाना जियाउल्लाह जान की भी मौत हो गई।

इस बम ब्लास्ट का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो के आखिरी सेकंडों में धमाका होते देखा जा सकता है। मंच पर से कोई नेता नारा-ए-तकबीर, अल्ला-हू-अकबर चिल्ला रहा था। इसके तुरंत बाद बम फटा और राजनीतिक रैली मातम में बदल गई। वहीं, ब्लास्ट के बाद के वीडियो में एंबुलेंस की आवाज के बीच अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दे रहा है। हर तरफ बिखरी हुई लाशें और खून नजर आ रहा है।

पाकिस्तानी अखबार DAWN ने एक प्रत्यक्षदर्शी के हवाले से कहा है कि रैली में 500 से अधिक लोग शामिल हुए थे। लोग भाषण सुन रहे थे। तभी एक भीषण विस्फोट हुआ, जिससे वह बेहोश हो गया। जब उसे होश आया तो हर तरफ खून ही खून था। लोग चिल्ला रहे थे। यहाँ गोलियाँ भी चली हैं।

राजस्थान : घर में रखे बारूद के धमाके से छत तोड़कर उड़ी जावेद की बीवी: लाश के टुकड़े पड़ोस की छत पर बिखरे

                                                                                       राजस्थान में विस्फोट (साभार: पत्रिका/भास्कर)
राजस्थान के झुंझनूं में विस्फोटक बनाते समय बुधवार (12 जुलाई 2023) को धमाका हो गया। धमाके में विस्फोटक बनाने वाली महिला छत तोड़ते हुए 25 फीट दूर दूसरे मकान की छत पर जाकर गिरी। इस घटना में उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उसके शरीर के टुकड़े इधर-उधर बिखर गए।

विस्फोट इतना तेज था कि महिला के शरीर के चिथड़े उड़ गए। महिला के शरीर से उड़े एक हाथ और एक पैर अलग होकर कहीं दूर जा चुके। शरीर से अलग हुए एक हाथ और पैर को पुलिस ने घंटों तक तलाश किया। इनमें से पैर करीब 30 फीट दूरी पर एक बाड़े में मिल गया, जबकि हाथ फिलहाल नहीं मिल पाया है।

घटना झुंझनूं के उदयपुरवाटी का है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस्लामिया मदरसा के पास सुबह करीब 8 बजे इतना तेज ब्लास्ट हुआ कि पूरे उदयपुरवाटी में इसकी आवाज सुनाई दी। तेज आवाज सुनकर इलाके के लोग घटनास्थल पर जमा हो गए। जिस घर में विस्फोट हुआ, वह मुस्लिम परिवार का है।

यह मुस्लिम परिवार पटाखा बनाने का काम करता है। घटना के वक्त सभी लोग अपने-अपने काम में लगे हुए थे। जावेद की 27 साल की बीवी आफरीन भी पटाखों में केमिकल भरने का काम कर रही थी। इसी दौरान जबरदस्त विस्फोट हो गया और आफरीन उछलकर दूसरे के मकान पर जा गिरी।

जिस घर में पटाखा बनाने का काम होता था, उसी मकान में मुस्लिम के परिवार के सभी 6-7 सदस्य रहते थे। मृतका अफरीन का पति जावेद साँप पकड़ने का काम करता है। परिवार मजदूरी भी करता है और शादी विवाह के मौके पर पटाखों की दुकान भी लगा लेता है। आफरीन के ससुर लाल मोहम्मद के पास पटाखे बनाने का लाइसेंस था। लाल मोहम्मद की साल 2022 में मौत हो गई।

पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है और मामले की जाँच शुरू कर दी है। एएसआई राम सिंह ने बताया कि मदरसा के नजदीक जावेद के घर में हादसा हुआ है। महिला का क्षत-विक्षत शव पड़ोसी के घर की छत पर मिला है। विस्फोटक सामग्री के ब्लास्ट होने की सूचना है, लेकिन अभी इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता।

जिस घर में यह हादसा हुआ है, उस घर में करीब 20 साल पहले भी भयानक हादसा हुआ था। उस समय दशहरा के मौके पर परिवार को रावण बनाने का ठेका मिला था। रावण बनाने का काम चल रहा था, उसी दौरान विस्फोट हो गया था। विस्फोट में मकान ढह गया और परिवार के 5 सदस्यों की मौत हो गई थी।

मालेगाँव ब्लास्ट में एक और गवाह अपने बयान से मुकरा, कहा- महाराष्ट्र ATS ने बंधक बनाकर जबरदस्ती RSS नेताओं का नाम लेने पर किया मजबूर

                                                                                                      मालेगाँव ब्लास्ट  (फाइल फोटो)
2008 के मालेगाँव ब्लास्ट केस (Malegaon Blast Case 2008) में एक और गवाह कोर्ट में अपने बयान से मुकर गया। इतना ही नहीं इस गवाह ने महाराष्ट्र एटीएस (Maharashtra ATS) पर गंभीर आरोप भी लगाते हुए कहा कि संघ के नेताओं के नाम लेने के लिए उसे प्रताड़ित किया गया। इस तरह इस मामले में अब तक 17 गवाह अपना बयान बदल चुके हैं।

गवाह ने आरोप लगाया कि एटीएस ने उसे बंधक बनाकर तीन-चार दिनों तक अवैध हिरासत में रखा था। इस दौरान ATS ने उसे प्रताड़ित किया और RSS के नेताओं का नाम लेने का उस पर दबाव बनाया। इससे पहले 16 गवाह अपने बयान से मुकर चुके हैं। एक गवाह ने तो अपने बयान से पलटते हुए कोर्ट में एटीएस पर आरोप लगाते हुए कहा था कि एटीएस ने उस पर दबाव बनाया था कि वो योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) का नाम इस मामले में ले। इसके अलावा आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार और स्वामी असीमानंद का नाम लिए जाने का दबाव डालने का आरोप लगाया था।

इसके बाद इंद्रेश कुमार ने तत्कालीन संयुक्त प्रगितशील गठबंधन (UPA) सरकार पर भगवा के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए ने ‘भगवा’ के खिलाफ साजिश रची। इसे आतंकवाद से जोड़ा। धार्मिक नेताओं को बदनाम करने और लोगों को गिरफ्तार करने के लिए एजेंसी का दुरुपयोग करने का प्रयास किया। लेकिन वे बुरी तरह विफल रहे।”

साल 2008 में 29 सितंबर की रात नौ बजकर 35 मिनट पर मालेगाँव में शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट कंपनी के ठीक सामने एक बम धमाका हुआ था। यह धमाका एलएमएल मोटरसाइकिल में हुआ था। इस धमाके में छह लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे। मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल में बाँधे गए विस्फोटक से धमाके को अंजाम दिया गया था। 

चूँकि यह मामला आतंक से जुड़ा हुआ था, इसलिए इसकी जाँच की जिम्मेदारी महाराष्ट्र एटीएस को दी गई। बता दें कि मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह उस वक्त एटीएस के एडिशनल कमिश्नर थे। एटीएस ने इस मामले में शुरुआती जाँच की थी। तीन साल बाद 2011 में इस केस को एनआईए के पास ट्रांसफर किया गया था। मालेगाँव धमाका मामले में अब एनआईए की स्पेशल कोर्ट सुनवाई कर रही है।

ISI ने रची दरभंगा में बम ब्लास्ट की साजिश, करोड़ों की फंडिंग: जिस कैराना से हुआ था हिन्दुओं का पलायन, वहाँ से 2 आतंकी गिरफ्तार

                       दरभंगा में हुए बम ब्लास्ट के तार पाकिस्तान से जुड़े (फोटो साभार; लाइव हिंदुस्तान)
बिहार के दरभंगा में हुए बम ब्लास्ट के तार पाकिस्तान से जुड़ रहे हैं और इसके पीछे वहाँ की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI की साजिश भी सामने आ रही है। इस मामले में STF ने उत्तर प्रदेश के शामली स्थित कैराना से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ जारी है। बिहार में हुए इस बम ब्लास्ट में पश्चिमी यूपी के सलीम और कासिम की भूमिका बताई जा रही है। इस ब्लास्ट के लिए करोड़ों रुपयों की फंडिंग हुई है।

ऐसे प्रश्न यह हो रहा है कि एक तरफ केंद्र सरकार आतंकवादी गतिविधियों पर पैनी नज़र रखने का दावा किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ बम धमाकों के तार पाकिस्तान से क्यों जुड़ रहे हैं? कौन हैं इनके संरक्षक? क्यों नहीं उनको दण्डित किया जाता?

तेलंगाना के एक आतंकी को इस बम ब्लास्ट का ठेका दिया गया था। NIA (राष्ट्रीय जाँच एजेंसी) और ATS (आतंकरोधी दस्ता) इस मामले की जाँच कर रही है। कफील के पिता ने मीडिया के सामने आकर कहा है कि उनके बेटे को बेवजह फँसाया जा रहा है। सलीम ने एक पाकिस्तानी युवक की मदद से ISI से संपर्क किया था। ISI एजेंट ने पश्चिमी यूपी में धमाके के लिए उससे बात की। सलीम ने अपने दोस्त कासिम उर्फ़ कफील को इस वारदात में शामिल किया।

फिर दोनों ने तेलंगाना के सिकंदराबाद के कुछ युवकों के साथ मिल कर धमाके की साजिश रची। सुरक्षा एजेंसियाँ दोनों का पुराना रिकॉर्ड खँगाल रही है। ISI की फंडिंग के नेटवर्क की तह तक जाने के लिए कई बैंक खातों के भी डिटेल्स खँगाले जा रहे हैं। ISI की आगे भी ऐसी कोई साजिश हो सकती है। कैराना से हिन्दुओं के पलायन की बात भी सामने आई थी, वहीं अब वहाँ ISI कनेक्शन की खबर मिली है।

पश्चिमी यूपी में धमाके की साजिश दरभंगा कैसे पहुँच गई, इसका भी पता लगाया जा रहा है। जून 17, 2021 को दरभंगा रेलवे जंक्शन पर हुए ब्लास्ट का बम एक कपड़े की गठरी में रखा हुआ था। पार्सल भेजने वाले का नाम-पता ‘सूफियाना, निवासी सिकंदराबाद’ लिखा हुआ था। उस पर लिखा मोबाइल नंबर कैराना के ही एक व्यक्ति का था। NIA की लखनऊ यूनिट ने इस ब्लास्ट को लेकर FIR दर्ज की है।

NIA की 6 सदस्यीय टीम मामले की जाँच के लिए बिहार पहुँची है। कपड़े की गाँठ में ही रह जाने के कारण इस केमिकल बम का उतना बड़ा असर नहीं हुआ था। पार्सल बुक करने वाले नंबर से जिस नंबर की बात हो रही थी, वो भी दरभंगा रेलवे स्टेशन पर सक्रिय था। फ़िलहाल ये नंबर नेपाल से सटे इलाकों में सक्रिय आ रहा है। जल्द ही इस मामले में कई अन्य आतंकियों की गिरफ्तारी हो सकती है, जिससे सारे राज़ खुल सकेंगे।

बिहार : मस्जिद के पास बम बलास्ट, मदरसे की इमारत पूरी तरह हुई ध्वस्त: मौलवी समेत पाँच घायल घटना के बाद से फरार

                                 मस्जिद के पास बम बलास्ट, मदरसे की इमारत पूरी तरह ध्वस्त हुई (फोटो: हिंदुस्तान)
बिहार के बाँका से मंगलवार (8 जून 2021) को दिल दहलाने वाली खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाँका टाउन थाना क्षेत्र के नवटोलिया में नूरी मस्जिद इस्लामपुर परिसर के आगे एक मदरसे में आज सुबह 8 बजे बम विस्फोट होने से आसपास का इलाका थर्रा उठा। बम विस्फोट से मदरसा पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, मदरसे के मौलवी मोहम्मद मोमिद सहित चार से पाँच लोगों के घायल होने की खबर है। सभी घायल ऑटो पर सवार होकर किसी गुप्त स्थान पर इलाज के बाद झारखंड चले गए।

मौलवी झारखंड के गोड्डा का निवासी

घटना के बाद से स्थानीय घरों के पुरुष भी फरार हैं। वहीं, यहाँ कि महिलाएँ भी कुछ भी बोलने से इनकार रही हैं। मौलवी झारखंड के गोड्डा का निवासी बताया जा रहा है। पत्रिका की रिपोर्ट अनुसार, इस घटना में एक बच्चे समेत 6 ग्रामीणों के भी जख्मी होने की सूचना है।

जागरण की रिपोर्ट में आगे यह भी बताया गया है कि मदरसा के अंदर दर्जनों की संख्या में बम रखे हुए थे। ऐसे में कुछ लोगों का कहना है कि हो सकता है कि गर्मी के कारण विस्फोट हो गया हो। वहीं, अन्य लोगों का कहना है कि मदरसा के अंदर बम बनाने के क्रम में विस्फोट हुआ होगा। बम काफी शक्तिशाली थे, क्योंकि मलवे का कई भाग सड़क के दूसरे किनारे पर जाकर गिरा है। हालाँकि, कोरोना के कारण मदरसा के बंद होने के चलते यहाँ एक भी बच्चा नहीं था। नहीं तो बड़ी घटना हो सकती थी। बम विस्फोट की जाँच के लिए फॉरेंसिक टीम को भागलपुर से बुलाया गया है।

एसडीपीओ डीसी श्रीवास्तव, अभियान एएसपी अयोध्या सिंह, थानाध्यक्ष शंभू यादव सहित अन्य पुलिस बलों ने घटना के बारे में पूछताछ की, लेकिन स्थानीय लोग कुछ भी बताने से इनकार कर रहे हैं। डीआईजी सुजीत कुमार ने बताया कि विस्फोट में घायल किसी भी व्यक्ति का अभी पता नहीं चल पाया है। एसपी को घायलों का पता लगाने का निर्देश दिया गया है। घटनास्थल पर फॉरेंसिक जाँच दल को भी भेजा गया है, ताकि विस्फोट के कारणों और विस्फोटक के प्रकार का पता लगाया जा सके।

वहीं, बांका के एसपी अरविंद कुमार गुप्ता का कहना है कि मस्जिद के आगे बने मरदसे में बम विस्फोट मामले की जाँच वैज्ञानिक तरीके से की जा रही है। इसमें अभी तक दो लोगों के जख्मी होने की सूचना मिली है। पुलिस विस्फोट किस उद्देश्य से किया गया इसको लेकर जाँच कर रही है। साथ ही मौलवी को लेकर भी जाँच जारी है। विस्फोट के कारणों का पता लगाने के लिए बांका पुलिस के अलावा बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वायड और आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) घटनास्थल पर हैं।

कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि 5 किलो के एलपीजी सिलेंडर के फटने से भी विस्फोट हो सकता है, लेकिन विस्फोट के बाद भी सिलेंडर अपने स्थान पर पाया गया। बिहार के गृह विभाग ने जहाँ इस मामले की गहन जाँच के आदेश दिए हैं, वहीं अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं और विस्फोटक अधिनियम की धारा-5 के तहत आपराधिक साजिश, विस्फोटक पदार्थ के संबंध में लापरवाही बरतने का मामला भी दर्ज किया गया है।

बता दें कि नवटोलिया व मजलिशपुर के बीच कई बार खूनी संघर्ष की घटना घटी है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि नवटोलिया के लोगों द्वारा मदरसे में बम व हथियार रखने की चर्चा है। 

कहाँ है ‘पत्रकार’ सैयद मोहम्मद अहमद काजमी, क्या कर रहा है? 2012 बम धमाके में हुआ था गिरफ्तार

                                  दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के साथ सैयद मोहम्मद अहमद काज़मी
दिल्ली स्थित इजरायली दूतावास के नज़दीक शुक्रवार (29 जनवरी 2021) को बम धमाका हुआ था। फॉरेंसिक जाँच में पता चला कि इजरायली दूतावास पर हमले के लिए ब्लैक पाउडर का इस्तेमाल किया गया था।

दिल्ली स्थित इजरायली दूतावास पर बम धमाका

दिल्ली स्थित इजरायली दूतावास के पास शुक्रवार (जनवरी 29, 2021) शाम धमाका हुआ था। कम तीव्रता वाले इस धमाके में कोई हताहत नहीं हुआ था लेकिन कुछ गाड़ियों के शीशे टूट गए थे। इसके बाद पूरी राजधानी को अलर्ट पर रखा गया था। एयरपोर्ट, सरकारी इमारतों और अहम जगहों की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।

जाँच के दौरान एक लिफ़ाफ़े में पत्र बरामद किया गया जो ‘इजरायली दूतावास के दूत’ के लिए लिखा गया था। पत्र में धमकी दी गई थी कि ये धमाका तो सिर्फ ‘ट्रेलर’ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इस धमकी भरे ख़त में मारे गए ईरानी क़ुद्स फ़ोर्स (Quds Force) के मुखिया जनरल कासिम सुलेमानी और परमाणु वैज्ञानिक (nuclear scientist) डॉ. मोहसिन फकरीज़देह का संदर्भ दिया हुआ था।  

कासिम सुलेमानी IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स) या क़ुद्स फ़ोर्स का ईरानी कमांडर था और बग़दाद में जनवरी 2020 के दौरान अमेरिकी सेना के अभियान में मारा गया था। वहीं ईरानी परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन की हत्या तेहरान के बाहरी इलाके में 62 मेंबर स्क्वाड ने की थी। यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं जब भारत में इजरायली दूतावास पर हमला हुआ है। 

13 फरवरी 2012 को दिल्ली में इजरायली राजनयिक की कार में धमाका किया गया था। दो बाइक सवार हमलावरों ने इजरायली राजनयिक की पत्नी (Tal Yehoshua Koren) की गाड़ी में बम चिपका दिया था। इस हमले में भी क़ुद्स फ़ोर्स जिसे IRGC के नाम से जाना जाता है, उसका नाम सामने आया था। इजरायली राजनयिक की कार में हुए बम धमाकों की घटना में 4 लोग घायल हुए थे।

ईरानी वैज्ञानिक की हत्या के ठीक बाद इजरायली राजनयिक की हत्या का प्रयास हुआ था। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को इस धमाके के लिए जिम्मेदार ठहराया था। संयोग से यह हमला ईरान समर्थित शिया लेबनानी समूह और हिजबुल्ला नेता इमद मुगनियेह (Imad Mughniyeh) की हत्या की तिथि से भी मेल खाता था। 

भारतीय पत्रकार की हमले में अहम भूमिका?

इजरायली राजनयिक पर हुए हमले की जाँच में दिल्ली पुलिस ने पाया कि यह IRGC का काम है। दिल्ली पुलिस की जाँच में यह बात भी सामने आई थी कि IRGC के सदस्यों ने इस हमले की योजना पर भारतीय पत्रकार सैयद मोहम्मद अहमद काज़मी के साथ चर्चा की थी। खुलासे के मुताबिक़ अहमद काज़मी पिछले 10 सालों से IRGC सदस्यों के संपर्क में था।

एक लंबी जाँच के बाद दिल्ली पुलिस ने ‘पत्रकार’ अहमद काज़मी को बाइक सवार हमलावरों की मदद करने के लिए गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अहमद काज़मी को साज़िश में शामिल होने के आरोप में गैर क़ानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के अंतर्गत गिरफ्तार किया। इतना ही नहीं वह इजरायली राजनयिकों को निशाना बनाने के लिए साज़िश के तहत ख़ुफ़िया तरीके से काम कर रहा था।

पूरे मामले में एक और रोचक बात ये है कि विवादित एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया की मुखिया सीमा मुस्तफ़ा काज़मी के समर्थन में उतर आई थीं। इनके मुताबिक़ इजरायली राजनयिक पर हुए हमले के मामले में अहमद काज़मी निर्दोष था। 

कौन है सैयद मोहम्मद अहमद काज़मी

उत्तर प्रदेश स्थित मेरठ के निवासी सैयद मोहम्मद अहमद काज़मी ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 1983 में ईरानी ब्रॉडकास्टर के अंतर्गत ईरान रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी (IRNA)  के दिल्ली कार्यालय से की थी। काज़मी की अरबी और फारसी भाषा पर मज़बूत पकड़ थी। नतीजतन उसे खाड़ी के देशों की ख़बरों का अनुवाद करने में कोई परेशानी नहीं होती थी। 
कुछ सालों बाद काज़मी की रूचि पश्चिमी एशिया में बढ़ी। ख़ासकर ईरान, ईराक और इजरायल। ईरानी मीडिया समूह में 7 साल लगातार काम करने के बाद ‘मीडिया स्टार’ नाम से अपना मीडिया समूह शुरू किया जो कि पश्चिमी एशिया की ख़बरों पर केन्द्रित था। एक छोटे कार्यकाल के बाद उसने 1993 दूरदर्शन में बतौर प्रस्तोता काम शुरू किया और वहाँ उर्दू ख़बरें पढ़ता था।
दूरदर्शन के कार्यकाल के दौरान काज़मी ‘वर्ल्ड व्यू इंडिया’ (World View India) नाम के साप्ताहिक विदेश मामलों से जुड़े कार्यक्रम का हिस्सा था। सबा नकवी के पिता और पत्रकार सईद नकवी के मुताबिक़ काज़मी को उस क्षेत्र के बारे में अद्भुत जानकारी थी और उसके संपर्क भी काफी ज़्यादा थे। नकवी ने काज़मी के साथ मिल कर दूरदर्शन के इस कार्यक्रम को प्रोड्यूस किया था और दोनों साथ में कई विदेशी असाइनमेंट पर भी गए थे। 
पुलिस के मुताबिक़ काज़मी का ईरान में गहरा नेटवर्क था। तत्कालीन दिल्ली पुलिस कमिश्नर बीके गुप्ता ने इस मामले में एक बड़ा खुलासा किया था। उनका कहना था कि पूछताछ में काज़मी ने खुलासा किया था कि उसने इजरायली दूतावास की रेकी के लिए ईरानियों की भरपूर मदद की थी। काज़मी ईरानी मूल के सैयद अली सदर मेहँदी की मदद से हौशन अफशर से मिला था, जिसने इजरायली दूतावास के आस-पास रेकी की थी। इसके लिए इन लोगों ने स्कूटी का इस्तेमाल किया था। इस रेकी के दौरान उसने इजरायली राजनयिकों को निशाना बनाने का फैसला लिया था। हैरानी की बात है कि काज़मी के परिवार वालों ने भी उसके ईरान समर्थक स्टैंड को खारिज नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में अहमद काज़मी को जमानत पर रिहा कर दिया था, लेकिन विदेश जाने पर रोक लगाई थी। वह अभी तक जमानत पर आज़ाद घूम रहा है। फ़िलहाल ‘मीडिया स्टार वर्ल्ड‘ नाम का यूट्यूब चैनल चलाता है, जिसमें वह पश्चिमी एशिया के मुद्दों पर बात करता है। उसकी लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक़ वह ‘कौमी सलामती’ नाम के उर्दू अखबार का सम्पादक भी है। अक्टूबर 2012 में जमानत मिलने के बाद वह अखबार का सम्पादक बना था। कॉन्ग्रेस की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. शीला दीक्षित भी अखबार के लॉन्च पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थीं।

दिल्ली: इजरायली दूतावास के पास धमाका, कुछ ही दूरी पर बीटिंग रिट्रीट

                                               इजरायली दूतावास के बाहर धमाका

पहले गणतंत्र दिवस पर परेड के समय किसान आंदोलन के नाम पर चल रहे आंदोलनकारियों द्वारा हुड़दंग और अब बीटिंग रिट्रीट के समय दिल्ली के एपीजे अब्दुल कलाम रोड पर स्थित इजरायली दूतावास से करीब धमाका हुआ है। ब्लास्ट जिंदल हाउस के बाहर शुक्रवार (जनवरी 29, 2021) को शाम 5:05 पर हुआ। धमाके के कारण आसपास के इलाके में खड़ी कई गाड़ियों के शीशे टूट गए हैं। किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। 

फॉरेंसिक टीम का कहना है कि इसमें ब्लैक पाउडर का इस्तेमाल हुआ, जिसे फुटपाथ के पास छिपाया गया था। घटनास्थल पर दिल्ली पुलिस पहुँच गई है। फिलहाल धमाके के कारणों का पता नहीं चल पाया है।

अभी तक इस धमाके की प्रकृति का पता नहीं चल पाया है। जाँच चल रही है। धमाके में किसी के घायल होने की जानकारी नहीं है। स्पेशल सेल मौके पर पहुँच कर पड़ताल कर रही है। पुलिस का कहना है कि अभी पुख्ता तौर पर यह नहीं कहा जा सकता है कि धमाके की प्रकृति किस तरह की है।

26 जनवरी को दिल्ली में उपद्रव के बाद इस तरह का धमाका बेहद चिंताजनक है। खबर के अनुसार, विजय चौक से 2 किमी से भी कम दूरी पर ये धमाका हुआ है, जहाँ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार के अन्य वरिष्ठ सदस्य बीटिंग द रिट्रीट में मौजूद थे।

पत्रकार राजशेखर झा ने ट्वीट कर बताया है कि 9 साल पहले 13 फरवरी 2012 को ऐसा ही एक धमाका इजरायली दूतावास के पास हुआ था। आतंकियों ने दूतावास अधिकारी को निशाना बनाने के लिए उनकी कार में विस्फोटक फिट किए थे। हालाँकि, वह किसी तरह इस हमले में बच गई थीं।

अफगानिस्तान: काबुल में शादी समारोह के दौरान बड़ा बम ब्लास्ट, 40 की मौत, 100 से ज्यादा घायल

Kabul Blast
काबुल में बम धमाका  |  तस्वीर साभार: AP
आतंकवाद से जूझ रहे अफगानिस्तान में एक बार फिर बड़ा ब्लास्ट हुआ है। राजधानी काबुल में आयोजित एक शादी समारोह के दौरान हुए इस धमाके में कम से कम 40 लोगों के मारे जाने की खबर है जबकि 100 से अधिक घायल बताए जा रहे हैं। अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता नुसरत रहीमी के मुताबिक, घायलों को अस्पतालों में ले जाया गया है। मारे गए लोगों की फिलहाल पहचान नहीं हो सकी है।
यह धमाका शनिवार(अगस्त 17) रात 11 बजकर 40 मिनट पर पश्चिमी काबुल के बारातघर (वेडिंग हॉल) में हुआ जिसमें बड़ी संख्या में मेहमान उपस्थित थे। अचानक हुए इस धमाके के बाद अफरातफरी मच गई और आस पास लाशें दिख रही थीं। घायलों में कई की हालत गंभीर बताई जा रही है जिससे मौत का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है।

फिलहाल किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। जिस इलाके में यह धमाका हुआ है वहां अल्पसंख्यक शिया समुदाय के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। जिस दौरान शादी समारोह चल रहा था उसी दौरान हमलावर ने लोगों के बीच धमाका कर दिया। जैसे ही धमाका हुआ तो चीख-पुकार मच गई और लोग बदहवास होकर इधर-उधर भागने लगे। तुरंत ही पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा और घायलों को अस्पताल ले जाया गया।  
यह पहला मौका नहीं है जब अफगानिस्तान में इस तरह का धमाका हुआ हो। कुछ दिन पहले ही 8 अगस्त को काबुल में हुए धमाके में 14 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 140 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। पश्चिमी काबुल का इलाका तालिबान के आतंकियों के निशाने पर हमेशा से ही रहा है। 14 अगस्त को धमाका करने के लिए आतंकियों ने कार का इस्तेमाल किया था। 
पिछले साल दिसंबर माह के दौरान भी काबुल में आतंकी हमला हुआ था जिसमें 43 लोग मारे गए थे। तब आतंकियों ने सबसे पहले सरकारी कार्यालय के बाहर एक बम विस्फोट किया था और उसके बाद दो बंदूकधारी इमारत के अंदर घुसे और वहां उपस्थित लोगों तथा सुरक्षाकर्मियों पर गोली बरसाने लगे। 

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में जुमे की नमाज के दौरान मस्जिद में बम धमाका, 5 लोगों की मौत

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में जुमे की नमाज के दौरान मस्जिद में बम धमाका, 5 लोगों की मौतपाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में जुमे की नमाज के दौरान मस्जिद में हुए बम धमाके में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई और 15 लोग घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी है. ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ खबर के अनुसार धमाका क्वेटा के कुचलाक इलाके में एक मस्जिद में हुआ।
खबर के मुताबिक अधिकारियों का मानना है कि धमाका मस्जिद में लगे आईईडी से किया गया, जिसमें करीब 8 से 10 किलोग्राम विस्फोटक भरा हुआ था। पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि हमले में पांच लोगों की मौत हो गई और 15 लोग घायल हो गए। सुरक्षा बल इलाके की घेराबंदी कर बचाव अभियान में जुटे हैं। पुलिस ने कहा कि घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है जबकि क्वेटा के सिविल अस्पताल में आपात घोषित किया गया है

एक महीने में बलोचिस्तान में हुआ चौथा धमाका
किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है लेकिन ऐसे हमलों को अकसर तालिबान के आतंकवादी और बलूच राष्ट्रवादी अंजाम देते हैं
। यह धमाका एक महीने से भी कम समय में बलोचिस्तान में हुआ चौथा धमाका है। (इनपुट एजेंसी)

श्रीलंका में आज फिर बम ब्लास्ट!, कोलंबो से 40 किलोमीटर दूर पुगोडा शहर में सुने गए धमाके

श्रीलंका में एक बार फिर बम ब्लास्ट हुआ। राजधानी  कोलंबो से 40 किलोमीटर दूर आज (25 अप्रैल 2019) पुगोडा शहर में धमाके सुने गए। समाचार एजेंसी रॉयटर के अनुसार श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से 40 किलोमीटर पूर्व स्थित पुगोडा शहर में धमाके सुने गए हैं। इस धमाके में हताहत की अभी कोई जानकारी नहीं मिली है। 
श्रीलंका में अप्रैल 21 को ईस्टर के मौके पर हुए फिदायीन हमलों और सीरियल बम धमाकों में मरने वालों की संख्या 359 हो गई है। उसके बाद बड़े पैमाने पर तलाश अभियान चलाया गया और इस संबंध में अप्रैल 23 को कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। आतंकी संगठन आईएसआईएस ने श्रीलंका में हुए इन आठ घातक हमलों की जिम्मेदारी ली और हमलों को अंजाम देने वाले फिदायीनों की पहचान भी की गई है। ईस्टर के मौके पर गिरजाघरों और होटलों को निशाना बनाकर किए गए हमलों को सात फिदायीन हमलावरों ने अंजाम दिया था।
Reuters: Blast heard in Pugoda town, 40 km east of Sri Lankan capital Colombo
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श्रीलंका सीरीयल ब्लास्ट में मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहे हैं. तस्वीर साभार: रायटर कोलंबो: श्रीलंका में गिरजाघरों औ...

कोलंबो के सेंट एंथनी गिरजाघर, पश्चिमी तटीय शहर नेगोंबो के सेंट सेबेस्टियन गिरजाघर और बट्टिकलोवा के जियोन गिरजाघर में हमले हुए। हमले में फाइव स्टार होटलों-शांगरी ला, सिनामोन ग्रैंड और किंग्सबरी को भी निशाना बनाया गया। अब इस हमले के तीन देन के बाद एक सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है जो काफी हैरान करने वाला है। श्रीलंका के सांगरी-ला होटल के इस सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध आतंकवादी को देखा जा सकता है।