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‘वोट जिहाद’ के 100+ करोड़ रूपए वाले केस में ED ने मारे छापे, गुजरात-महाराष्ट्र में हुई तलाशी: सिराज अहमद पर है गड़बड़ी का आरोप; मुसलमान वोट के सौदागरों पर पर्दाफाश

         आरोपित सिराज अहमद (बाएँ) के ठिकानों पर ED ने छापा मारा है (फोटो साभार: Kirit Somaiya/X)
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने महाराष्ट्र और गुजरात में ‘वोट जिहाद’ के आरोपों के बाद छापेमारी की है। यह छापेमारी महाराष्ट्र के मुस्लिम व्यापारी के खिलाफ 125 करोड़ रूपए के गड़बड़ी के आरोपों के बाद हुई है। इस व्यापारी ने कई लोगों के खाते लेकर उनमें यह लेनदेन किया था। भाजपा ने इस पैसे का इस्तेमाल महाराष्ट्र चुनाव में वोट जिहाद के लिए करने का आरोप लगाया था।

ED ने इस मामले में महाराष्ट्र और गुजरात में गुरुवार (14 नवंबर, 2024) को छापेमारी की है। ED की यह छापेमारी महाराष्ट्र के मुंबई और मालेगाँव में हुई है। इसके अलावा गुजरात के अहमदाबाद में ED ने छापे मारे हैं। ED को शक है कि मालेगाँव के व्यापारी सिराज अहमद ने जो 100 करोड़ से अधिक की गड़बड़ी की, उसमें कुछ हवाला व्यवसाय के लोग भी जुड़े हैं।

ED ने अपनी जाँच का दायरा महाराष्ट्र के मालेगाँव से बढ़ा कर उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, ओडिशा और पश्चिम बंगाल समेत देश के बाकी हिस्सों तक फैला दिया है। ED अब 2500 से अधिक लेनदेन की जाँच कर रही है। वह देश की 170 शाखाओं में हुए लेनदेन पर छानबीन कर रही है।

एजेंसी को शक है कि जिन लोगों के खाते सिराज अहमद ने लिए थे, उनमें आया यह पैसा हवाला का था और इसका मनी लाँड्रिंग से लिंक है। वह इस पैसे का इस्तेमाल महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में होने के एंगल पर जाँच कर रही है। भाजपा ने इसी को लेकर वोट जिहाद का आरोप लगाया है।

क्या है मामला?

महाराष्ट्र के मालेगाँव में एक व्यापारी सिराज अहमद पर 12 लोगों के खाते लेकर उनमें करोड़ों की गड़बड़ी की। उसने लोगों को बताया कि वह कृषि के संबंध में व्यापार चालू करना चाहता है और इसके लिए खाते चाहिए। लोगों ने जब उसके खाते दिए तो वह गड़बड़ी करने लगा।
उसने खाते हासिल करने के लोगों को नौकरी का झांसा भी दिया। उसके इस झाँसे में राहुल काले, मनोज मिसाल, प्रतीक जाधव, पवन जाधव, ललित मोरे, राजेंद्र गिरी, धनराज बच्छव, भावेश घुमरे, दिवाकर घुमरे और दत्तात्रेय कैलास जैसे 12 लोग फंस गए और अपने खाते दिए। इसके बाद उन्हें पता चला कि सिराज ने करोड़ों की गड़बड़ी की है।
मालेगाँव में छावनी पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर दीपक जाधव ने मीडिया को बताया था सिराज मालेगाँव में चाय और कोल्ड ड्रिंक्स की एजेंसी चलाता है। उसने कुछ दिन पहले अपने ड्राइवर को बताया था कि उसे किसानों को भुगतान देने के लिए अन्य लोगों के नाम से बैंक खाते चाहिए।
यह खाते मक्के के व्यापार के लिए जरूरी होने की बात उसने कही थी। उसने वादा किया था कि जो भी उसे खाते देगा, उन्हें मंडी समिति में नौकरी मिलेगी। इसके बाद ड्राइवर ने अपने समेत 11 अन्य लोगों के मालेगाँव में एक सहकारी बैंक में खाते खुलवाए। इन सभी ने अपने कागज उसे दिए थे।
ये खाते 27 सितंबर को खोले गए थे। ऑपइंडिया को मिली FIR कॉपी के अनुसार, खाताधारकों में से एक ने अपने खाते की जाँच की तो पता चला कि उसके खाते से करोड़ों रुपए का लेन-देन हुआ है। इसके बाद उसने बाकी लोगों से संपर्क किया।
यह सभी जब बैंक पहुँचे तो उन्हें पता चला कि उनके 12 खातों में कुल ₹90 करोड़ का लेनदेन हुआ है। उन्हें चिंता हुई कि उनके खातों का अवैध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, इसलिए उन्होंने व्यापारी के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करवा दी। अब जानकारी सामने आई है कि यह गड़बड़ी 125 करोड़ रूपए की है।
भाजपा ने इस पैसे का इस्तेमाल वोट जिहाद के लिए किए जाने का शक जताया है। भाजपा नेता किरीट सोमैया ने इस मामले में को लेकर चुनाव आयोग को एक पत्र भी लिखा था। किरीट सोमैया ने बताया है कि सिराज अहमद को पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया है। उसके साथ एक और शख्स की गिरफ्तारी हुई है।
किरीट सोमैया मालेगाँव जाकर उन लोगों से भी मिले हैं, जिनके खातों में गड़बड़ी की बात कही गई है, इन लोगों ने किरीट सोमैया से माँग की है कि उन्हें न्याय मिले। किरीट सोमैया इनके साथ शुक्रवार (15 नवम्बर, 2024) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करने जा रहे हैं।
ऑल इंडिया मुस्लिम उलेमा बोर्ड और कांग्रेस शरद पवार उद्धव ठाकरे के बीच में एक समझौता हुआ है
 जिसके तहत 
1:-आतंकवाद के केस में महाराष्ट्र की जेल में बंद सभी मुस्लिम लोगों से केस  वापस लिए जाएंगे
2:-  वक्फ बोर्ड को MVA की सरकार 1000 करोड रुपए देगी 
3:- महाराष्ट्र में सर्वे करवारकर वक्फ बोर्ड को 500 एकड़ जमीन दिया जाएगा 
4:- महाराष्ट्र में किसानों के कब्जे में जो 400 एकड़ खेत है उसे किसानों से लेकर वक्फ बोर्ड को दिया जाएगा
5:- महाराष्ट्र पुलिस में 30% मुसलमानों को भर्ती किया जाएगा 
6:-महाराष्ट्र में मुसलमान को 10% आरक्षण दिया जाएगा
7:-  महाराष्ट्र में सभी मुस्लिम मौलवी और उलेमा और मुफ्ती को 15000 रूपए सरकारी खजाने से सैलरी दी जाएगी
 8:-मोदी सरकार जो वक्फ बोर्ड  पर नया कानून ला रहे हैं उस कानून का विरोध कांग्रेस उद्धव ठाकरे और शरद पवार विरोध करेंगे और उसे महाराष्ट्र में लागू नहीं होने देंगे
9:- महाराष्ट्र के सभी जिलों में दरगाह मस्जिद बनवाने के लिए सरकार फंड  देगी
10:-  रामगिरी जी महाराज और नीतेश राणे  को जेल में बंद किया जाएगा
11:-  पैगंबर मोहम्मद के बारे में कुछ भी बोलने वाले को फांसी की सजा दिया जाएगा
12:-  महाराष्ट्र राज्य वक्फ बोर्ड में 500 मुस्लिम को महाराष्ट्र सरकार के तरफ से भर्ती किया जाएगा जिन्हें पूरी सैलरी और पेंशन महाराष्ट्र सरकार देगी
13:-  महाराष्ट्र में कांग्रेस उद्धव ठाकरे और शरद पवार की सरकार बनने पर आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा लेकिन किसी भी मुस्लिम आतंकी संगठन पर कोई रोक नहीं लगेगी 
14:- महाराष्ट्र में 50 मुस्लिम को टिकट दिया जाएगा और उपमुख्यमंत्री एक मुस्लिम होगा
15:-2012 से 2024 के बीच में जितने भी मुसलमान किसी भी जुर्म में चाहे हत्या हो बलात्कार या आतंकवादी हो उन पर सारे मुकदमे वापस लेकर उन्हें जेल से रिहा किया जाएगा 
महाराष्ट्र के हिंदुओं अभी भी सोच लो 
अगर उद्धव  ठाकरे शरद पवार और कांग्रेस की सरकार बन गई तो महाराष्ट्र में एक भी हिंदू नहीं बचेगा हिंदुओं का जीना दुभर हो जाएगा

नंगा कर प्राइवेट पार्ट पर वार, बाल पकड़ खींचे… कैप्टन अभिनंदन के साथ जो करने की हिम्मत न जुटा सका पाकिस्तान, वह बर्बरता अपने ही देश में एक कर्नल के साथ कांग्रेस ने करवाई

सेना में जाकर देशसेवा करने वाले एक कर्नल को कांग्रेस सरकार ने आतंकवादी सिद्ध करने की कोशिश की। उसे धमाके के एक मामले में आरोपित बनाया गया। कर्नल के साथ पाकिस्तान में विमान दुर्घटना के बाद पहुँचे विंग कमांडर अभिनन्दन वर्धमान से भी बुरा बर्ताव किया गया। यहाँ तक कि कर्नल का पैर तोड़ा गया, उसके वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस वालों ने उसे मारा। अवैध रूप से उसे बंद रखा। सालों तक जेल में रखा। उसकी सैन्य सेवा को भी प्रभावित किया गया। 

यह कहानी किसी तानाशाही वाले देश की नहीं बल्कि भारत की है जहाँ कांग्रेस शासन में ‘भगवा आतंकवाद’ का नैरेटिव गढ़ने के लिए साधुओं, सैन्यकर्मियों और हिन्दू हितों के लिए काम करने वालों को निशाने पर लिया गया। 2008 में हुए मालेगाँव धमाका मामले में मुकदमे में आरोपी बनाए गए लेफ्टिनेंट श्रीकांत प्रसाद पुरोहित की कहानी पीड़ाजनक और गुस्से से भरने वाली है। कर्नल पुरोहित ने बुधवार (8 मई, 2024) को मुंबई के एक कोर्ट में अपनी पीड़ा बताई।

उन्होंने बताया, “मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया गया जो किसी जानवर के साथ भी नहीं किया जाता। मेरे साथ युद्ध बंदी से भी बदतर व्यवहार किया गया। हेमंत करकरे, परमबीर सिंह और कर्नल श्रीवास्तव लगातार इस बात पर जोर देते रहे कि मैं मालेगाँव बम धमाके के लिए खुद को जिम्मेदार बता दूँ। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं RSS, VHP के वरिष्ठ नेताओं और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ का नाम लूँ। उन्होंने मुझे 3 नवम्बर, 2008 तक यातनाएँ दी।”

उन्होंने कोर्ट को बताया कि मालेगाँव में धमाके के बाद उन्हें पंचमढ़ी से गिरफ्तार किए जाने के बाद जबरदस्ती एक जगह अवैध रूप से रखा गया। कर्नल पुरोहित ने बताया कि उन्हें खंडाला के बंगले में रखा गया जहाँ उन्हें प्रताड़ित किया गया। उनको 29 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें 3 नवम्बर तक प्रताड़ित किया गया था। इस दौरान ATS अधिकारी परमबीर सिंह, हेमंत करकरे और अन्य अधिकारियों ने मारा और उनका घुटना तोड़ दिया। इसकी वजह से उन्हें चलने में परेशानी होती है।

कर्नल पुरोहित को जब पकड़ा गया तब वह इंटेलिजेंस के लिए काम कर चुके थे और SIMI, ISI समेत तमाम देश विरोधी गतिविधि को रोकने में काफी हद तक सफल रहे थे। मालेगाँव मामले की जाँच के नाम पर उनसे इन आतंकी संगठनों पर की गई कार्रवाई और उनके मुखबिरों के बारे में बताने को कहा गया। कर्नल पुरोहित ने आरोप लगाया कि उनके साथ यह ज्यादती इसलिए हुई क्योंकि तब की केंद्र और महाराष्ट्र की कॉन्ग्रेस सरकार ऐसा चाहती थीं। यह सब उनकी शह पर हो रहा था।

कर्नल पुरोहित को मारने तक की योजना बनाई गई थी। उनका एनकाउंटर करने का प्लान था। 2018 में लिखे गए एक पत्र में कर्नल पुरोहित ने बताया था कि पूछताछ के दौरान उनके कपड़े उतारे गए, उनके प्राइवेट पार्ट पर वार किया गया और उनके बाल पकड़ कर खींचा गया। उन्हें शारीरिक यातनाएँ देकर दबाव डाला गया कि वह मालेगाँव धमाके में जिम्मेदारी स्वीकार कर लें। उन पर दबाव डाला गया कि वह RSS-VHP नेताओं का नाम लें और योगी आदित्यनाथ को भी आतंक के मामले में फँसाएँ।

कर्नल पुरोहित ने जिन हेमंत करकरे पर यातना देने का आरोप लगाया है, उनकी 26/11 हमले में आतंकियों ने हत्या कर दी थी। परमबीर सिंह बाद में मुंबई के पुलिस कमिश्नर बने थे लेकिन उनके ऊपर उगाही के गंभीर आरोप लगे थे। वह भगोड़े भी घोषित किए गए थे। कर्नल पुरोहित ने मुंबई के कोर्ट को बताया है कि उनको यह यातनाएँ हिन्दू आतंकवाद का नैरेटिव गढ़ने के लिए दी जा रहीं थी। इसके लिए पहले से ही प्लान बनाया गया था।

इसी समय पर एनसीपी नेता शरद पवार हिन्दू आतंकवाद की बातें कर रहे थे। कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम यह सिद्ध करने में लगा था कि देश में सिर्फ इस्लामी आतंकवाद नहीं है बल्कि हिन्दू आतंकवाद नाम का भी कुछ होता है। यहाँ तक कि 26/11 हमले को तक हिन्दू आंतकवाद से जोड़ने की साजिश हुई थी। यह सब वोटबैंक और कॉन्ग्रेस की हिन्दू घृणा के कारण फल फूल रहा था। वामपंथी पत्रकार इस बात को और हवा दे रहे थे।

कर्नल पुरोहित को दी प्रताड़नाओं की तुलना अगर 2019 बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान में विमान क्रैश होने के कारण गिरे विंग कमांडर अभिनन्दन वर्धमान से की जाए तो पाकिस्तान का बर्ताव कॉन्ग्रेस सरकार से अच्छा दिखेगा। अभिनन्दन वर्धमान को जहाँ कुछ घंटों के लिए ही पाकिस्तान रख पाया था, वहीं कर्नल पुरोहित को मात्र इसलिए सालों तक जेल में रखा गया ताकि हिन्दू आतंकवाद का फर्जी नैरेटिव गढ़ा जा सके और बहुसंख्यक आबादी को आतातायी घोषित किया जाए।

विंग कमांडर अभिनन्दन वर्धमान को मोदी सरकार 48 घंटों के भीतर पाकिस्तान से वापस ले आई थी। पाकिस्तान खुद ही विंग कमांडर वर्धमान को सौंपने को मजबूर हो गया था क्योंकि उसे पता था कि मोदी सरकार अपने सैनिक के लिए कोई भी बड़ा कदम उठा सकती है। दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस का रवैया था कि देश की करोड़ों जनता का दशकों का सेना में विश्वास टूट जाए, इसलिए एक सैनिक को ही आतंकी घोषित करने का प्रयास करो। उसे हिन्दू आतंकवादी बताओ।

मालेगाँव ब्लास्ट में एक और गवाह अपने बयान से मुकरा, कहा- महाराष्ट्र ATS ने बंधक बनाकर जबरदस्ती RSS नेताओं का नाम लेने पर किया मजबूर

                                                                                                      मालेगाँव ब्लास्ट  (फाइल फोटो)
2008 के मालेगाँव ब्लास्ट केस (Malegaon Blast Case 2008) में एक और गवाह कोर्ट में अपने बयान से मुकर गया। इतना ही नहीं इस गवाह ने महाराष्ट्र एटीएस (Maharashtra ATS) पर गंभीर आरोप भी लगाते हुए कहा कि संघ के नेताओं के नाम लेने के लिए उसे प्रताड़ित किया गया। इस तरह इस मामले में अब तक 17 गवाह अपना बयान बदल चुके हैं।

गवाह ने आरोप लगाया कि एटीएस ने उसे बंधक बनाकर तीन-चार दिनों तक अवैध हिरासत में रखा था। इस दौरान ATS ने उसे प्रताड़ित किया और RSS के नेताओं का नाम लेने का उस पर दबाव बनाया। इससे पहले 16 गवाह अपने बयान से मुकर चुके हैं। एक गवाह ने तो अपने बयान से पलटते हुए कोर्ट में एटीएस पर आरोप लगाते हुए कहा था कि एटीएस ने उस पर दबाव बनाया था कि वो योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) का नाम इस मामले में ले। इसके अलावा आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार और स्वामी असीमानंद का नाम लिए जाने का दबाव डालने का आरोप लगाया था।

इसके बाद इंद्रेश कुमार ने तत्कालीन संयुक्त प्रगितशील गठबंधन (UPA) सरकार पर भगवा के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए ने ‘भगवा’ के खिलाफ साजिश रची। इसे आतंकवाद से जोड़ा। धार्मिक नेताओं को बदनाम करने और लोगों को गिरफ्तार करने के लिए एजेंसी का दुरुपयोग करने का प्रयास किया। लेकिन वे बुरी तरह विफल रहे।”

साल 2008 में 29 सितंबर की रात नौ बजकर 35 मिनट पर मालेगाँव में शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट कंपनी के ठीक सामने एक बम धमाका हुआ था। यह धमाका एलएमएल मोटरसाइकिल में हुआ था। इस धमाके में छह लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे। मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल में बाँधे गए विस्फोटक से धमाके को अंजाम दिया गया था। 

चूँकि यह मामला आतंक से जुड़ा हुआ था, इसलिए इसकी जाँच की जिम्मेदारी महाराष्ट्र एटीएस को दी गई। बता दें कि मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह उस वक्त एटीएस के एडिशनल कमिश्नर थे। एटीएस ने इस मामले में शुरुआती जाँच की थी। तीन साल बाद 2011 में इस केस को एनआईए के पास ट्रांसफर किया गया था। मालेगाँव धमाका मामले में अब एनआईए की स्पेशल कोर्ट सुनवाई कर रही है।