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शायद पहली बार सत्तारूढ़ पार्टी की हार के बाद दिल्ली सचिवालय सील, कोई भी फाइल-दस्तावेज-कंप्यूटर हार्डवयेर बाहर ले जाने पर रोक: डाटा सिक्योरिटी सुनिश्चित करने के लिए उठाए कदम

दिल्ली सचिवालय सील (फोटो साभार: shutterstock और दैनिक जागरण)
दिल्ली में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद दिल्ली सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने दिल्ली सचिवालय को सुरक्षा कारणों का हवाला देकर सील करवा दिया है। यह निर्णय ठीक उसी समय लिया गया जब राजधानी में भारतीय जनता पार्टी की जीत स्पष्ट हुई और AAP के बड़े-बड़े नेताओं को हार का सामना करना पड़ा।

                                                                          साभार ANI 

शायद इतिहास में पहली बार हुआ है कि सत्तारूढ़ पार्टी के हारने पर सचिवालय सील कर हर दस्तावेज को सुनिश्चित करने के आदेश किये गए हों। ऐसा साहसिक कदम शायद इसलिए उठाया गया है ताकि पिछली सरकार के मंत्री घोटाले के किसी भी सबूत को नष्ट न करने पाए। CAG रिपोर्ट्स, शराब घोटाला, ट्रांसपोर्ट घोटाला, स्कूल घोटाला, जल बोर्ड घोटाला, वक़्फ़ बोर्ड घोटाला और शीश महल घोटाला आदि के सबूत सुरक्षित रख केजरीवाल और घोटालों से सम्बंधित लोगों को सजा दिलवाई जा सके।      

दिल्ली सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी एक नोटिस में कहा गया है कि किसी भी फाइल, दस्तावेज़ या कंप्यूटर हार्डवेयर को सचिवालय परिसर से बाहर ले जाने की अनुमति तब तक नहीं है जब तक कि प्रशासनिक विभाग की अनुमति न हो। संयुक्त सचिव प्रदीप तायल ने इस आदेश को जारी करते हुए कहा कि यह कदम सरकारी दस्तावेजों और डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

इस आदेश में यह भी कहा गया है कि सभी संबंधित ब्रांच इन्चार्जों को अपने अनुभागों के अंतर्गत अभिलेखों और फाइलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए जाएँ। नोटिस में ये भी लिखा है कि ये आदेश न केवल सचिवालय कार्यालयों पर लागू होगा बल्कि मंत्रिपरिषद के कैंप ऑफिसों पर भी लागू होगा।

अवलोकन करें:-

 https://nigamrajendra.blogspot.com/.../aap-man-of-match.html

एक ओर दिल्ली की सरकार द्वारा सचिवालय को सील करने का मुख्य कारण सुरक्षा चिंताएँ बताई गई हैं। वहीं दूसरी ओर चुनाव परिणाम आने के बाद, अधिकारियों को तुरंत सचिवालय पहुँचने का निर्देश दिया गया ताकि वे सरकारी दस्तावेज़ और डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें। ऐसे में सोशल मीडिया पर लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि कहीं ये फैसला इसलिए तो नहीं लिया गया कि ताकि 10 साल में हुई गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार की फाइलें समय रहते छिपाई जा सकें।

मोदी को ‘जेबकतरा’ कहने के मामले में चुनाव आयोग को हाई कोर्ट का राहुल गाँधी पर कार्रवाई के लिए दिया 8 सप्ताह का समय


राहुल गाँधी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्होंने 22 नवंबर 2023 को राजस्थान के भरतपुर जिले में आने वाले नदबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और बिजनेसमैन गौतम अडाणी को लेकर टिप्पणी की थी। अब इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि वो 8 सप्ताह में इस संबंध में कार्रवाई को लेकर फैसला करें। हाई कोर्ट ने राहुल गाँधी की टिप्पणी को बेहद गलत बताया, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और गौतम अडाणी को ‘जेबकतरा’ कहा था।

चुनाव आयोग को 8 सप्ताह का समय

दिल्ली हाई कोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मिनी पुशकर्णा की दो सदस्यीय बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। इसमें चुनाव आयोग की तरफ से पेश हुईं अधिवक्ता सुरुचि सूरी ने बताया कि राहुल गाँधी को उनकी टिप्पणी को लेकर 23 नंवबर को ‘शो कॉज नोटिस’ जारी किया गया था। इसका जवाब उन्हें 25 नवंबर तक देना था, लेकिन राहुल गाँधी ने नोटिस का जवाब तक नहीं दिया। इसके बाद कोर्ट ने कहा कि वो चुनाव आयोग को इस मामले में कार्रवाई से संबंधित फैसला लेने के लिए 8 सप्ताह का समय देते हैं।
याचिका में कहा गया है, “राहुल गाँधी द्वारा बिना किसी सबूत के लगाए गए आरोप सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं और राहुल गाँधी को यह साबित करने के लिए कहा जाना चाहिए कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह और गौतम अडानी “पॉकेट मार” हैं।” हाई कोर्ट ने इस मामले में दाखिल पीआईएल को खारिज कर दिया और कहा कि वो इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगी। हाई कोर्ट ने कहा कि ये मामला चुनाव आयोग और सरकार से जुड़ा है, हम इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करते। वो खुद कदम उठाएंगे, हमने इसके लिए 8 सप्ताह का समय दिया है।

राहुल गाँधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की माँग

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में अधिवक्ता भरत नागर ने पीआईएल दाखिल की थी। उनकी तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता आदिश अगरवाल और कीर्ति उप्पल ने हाई कोर्ट में जिरह की। जिसमें उन्होंने राहुल गाँधी के खिलाफ आईपीसी की धारा 171(डी), 171(एफ), 171 (जी), 406, 419, 426 और 463 के साथ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के सेक्शन 123 के तहत मामला दर्ज करने की माँग की थी।
याचिका में कहा गया कि चुनाव आयोग के पास राहुल गाँधी के खिलाफ ‘शो कॉज नोटिस’ जारी करने के सीमित अधिकार हैं, जिसमें वो इसका जवाब देते हैं या नहीं, इसकी भी बाध्यता नहीं है। नागर ने अपनी याचिका में कहा है कि राहुल गाँधी के ऐसे बयानों का जनता पर व्यापक असर पड़ सकता है, और हो सकता है कि राहुल गाँधी ही उस ‘शो कॉज नोटिस’ का जवाब इतनी देरी से दें कि वहाँ पर वोटिंग हो चुकी हो।

चुनाव आयोग के पक्ष में दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला

इस मामले में अब कार्रवाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग के पक्ष में फैसला दिया है है। बता दें कि राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न सिर्फ ‘पॉकेटमार’ बोला गया था, बल्कि उन्हें ‘पनौती’ तक बोला गया था। वो भी सार्वजनिक मंचों से। ऐसे में नोटिस का जवाब न देने और लगातार गलत तरीके से टिप्पणियाँ करने पर चुनाव आयोग क्या कार्रवाई करता है, ये आने वाले समय में पता चल ही जाएगा।

केमिकल हमले के बाद तबाह हो जाता पूरा इजरायल; हमास आतंकियों की अलकायदा वाली साजिश, तैयार था सायनाइड से बम बनाने का पूरा खाका

                   हमास के आतंकी केमिकल हमला करना चाहते थे (साभार: Council on Foriegn Relations)
दक्षिणी इजरायल पर 7 अक्टूबर, 2023 को किए गए हमले में इस्लामी आतंकी संगठन हमास के आतंकी निर्दोष नागरिकों पर सायनाइड वाले केमिकल हथियारों का उपयोग करने वाले थे। यह खुलासा आतंकियों के पास मिली सामग्री में हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायली ख़ुफ़िया एजेंसियों को दक्षिणी इजरायल के किब्बुत्ज़ में मारे गए आतंकियों के पास से कुछ USB पेन ड्राइव बरामद हुई हैं। इन पेन ड्राइव में आतंकी संगठन अलकायदा की तरह सायनाइड वाले केमिकल हथियार बनाने की विधि बताई गई है।

इस यूएसबी डिवाइस में पूरी तरीके से समझाया गया था कि सायनाइड वाले केमिकल बम कैसे बनाए जाएँ और उन्हें लगा कर ज्यादा से ज्यादा तबाही मचाई जाए। इजरायली सुरक्षा बलों ने पता लगाया है कि हमास आतंकियों के पास मिली यह जानकारी असल में आतंकी संगठन अलकायदा द्वारा वर्ष 2003 में तैयार की गई थी।

इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर सबसे पहले दक्षिणी हिस्से में हमला किया था। इस इलाके में बसे गाँवों और मुहल्लों में आतंकियों ने घर-घर जाकर बच्चों, महिलाओं समेत एक-एक व्यक्ति को मार दिया था। इसी इलाके में आयोजित किए जा रहे एक म्यूजिक फेस्टिवल में 260 से अधिक लोगों को मार दिया था। इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हेर्जोग ने आतंकियों के पास से केमिकल बम की जानकारी मिलने पर कहा, “यह अलकायदा की सामग्री है। हम अल कायदा, ISIS और हमास का मुकाबला कर रहे हैं।”

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी लगातर यह कहते आए हैं कि हमास भी ISIS की तरह ही खतरनाक है और इसका खात्मा ISIS की तरह होना चाहिए। वह लगातार हमास का समर्थन करने वालों को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से निष्कासित करने की मांग भी करते रहे हैं।

इजरायल की सरकार ने विदेशों में स्थित अपने दूतावासों को भेजे गए केबल में भी इन केमिकल हथियारों के विषय में जानकारी दी है। उन्होंने अपने दूतावासों को बताया है कि हमास ISIS की तरह ही हमले करना चाहता था। इस्लामी आतंकी संगठन हमास के इजरायल पर आतंकी हमले में मरने वालों की संख्या अब बढ़ कर 1400 के पार हो चुकी है। इजरायल ने भी इस के जवाब में हवाई हमले किए हैं। इजरायल के हमलों में अब तक 4400 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की सूचना है।