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तेल की सप्लाई बंद करो, इनके राजदूतों को बाहर निकालो: मुस्लिम देशों से बैन का किया ​आह्वान : OIC की बैठक में ईरान

गाजा के इसी अस्पताल पर हुए हमले में करीब 500 लोगों की हो गई थी मौत (फोटो साभार: अल जज़ीरा)
इस्लामिक देशों के संगठन OIC की बैठक में ईरान ने इजरायल के खिलाफ सदस्य देशों को खूब भड़काया। उसकी तेल सप्लाई रोकने को कहा। सदस्य देशों से इजरायली राजदूतों को अपने-अपने देशों से बाहर निकालने का आह्वान किया। उल्लेखनीय है कि इजरायल के साथ ईरान के राजनयिक रिश्ते नहीं हैं।

सऊदी अरब के जेद्दा में ओआईसी की बैठक में इजरायल पर प्रतिबंध की अपील करते हुए ईरान के विदेश मंत्री होसैन अमीर-अब्दुलाहियान ने सभी मुस्लिम मुल्कों से इस पर सहयोग माँगा। बता दें कि ओआईसी 57 देशों का समूह है, जिसमें 48 देश मुस्लिम बाहुल्य वाले हैं। यह बैठक गाजा के एक अस्पताल पर हमले के बाद 18 अक्टूबर 2023 को हुई थी। इस बैठक में इजरायल पर बैन लगाने को लेकर सहमति नहीं बनी, लेकिन ओआईसी ने गाजा पर हमलों को आतंकवाद और युद्ध अपराध बताया है।

इजरायल पर पूर्ण बैन की माँग

इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष पर चर्चा के लिए जेद्दा में ओआईसी की अर्जेंट मीटिंग बुलाई गई थी। इसी बैठक के दौरान ईरान ने बयान जारी कर सदस्य देशों से इजरायल पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया। ईरान के विदेश मंत्री अब्दुलाहियान ने कहा कि इजरायल का हमला ‘युद्ध अपराध’ और ‘अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन’ है। उन्होंने कहा कि ओआईसी के सदस्य देशों को इजरायल के खिलाफ प्रतिबंध लगाने चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी घटनाएँ दोबारा न हो।
ईरान के विदेश मंत्री होसैन अब्दुलाहियान ने कहा कि इजरायल का हमला ‘एक निर्दोष नागरिक आबादी के खिलाफ एक क्रूर और अमानवीय कार्रवाई’ थी। उन्होंने कहा कि हमले में मारे गए लोगों में महिलाएँ, बच्चे और बुजुर्ग शामिल थे। उन्होंने कहा कि इजरायल को इस हमले के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। ओआईसी के सदस्य देशों से इजरायल के खिलाफ प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया। इजरायल द्वारा कथित तौर पर किए जा रहे युद्ध अपराधों की जाँच के लिए एक टीम बनाने की भी बात कही।

ओआईसी ने इजरायल से हमलों को रोकने के लिए कहा

इस मामले में ओआईसी की ओर से साझा बयान जारी किया गया है। ओआईसी के महासचिव ने बैठक के बाद ये बयान जारी किया, जिसमें अस्पताल पर हमले के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहराया गया और ‘इजरायली आतंकवाद’ की निंदा की गई। गाजा में इजरायली हमलों को युद्ध अपराध करार देते हुए इजरायल को युद्ध अपराधों के लिए सजा देने की बात कही गई।

इजरायल ने कहा, उसने नहीं किया अस्पताल पर हमला

एक तरफ ईरान समेत तमाम मुस्लिम देश गाजा के अस्पताल पर हमले के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। वहीं इजरायल ने सबूतों के साथ बताया है कि ये हमला इस्लामिक जेहाद ने किया था। इजरायल ने इसके ऑडियो-वीडियो सबूत भी शेयर किए हैं। इनसे पता चलता है कि इजरायल को निशाना बनाकर दागा गया रॉकेट मिसफायर होकर अस्पताल पर गिर गया जिससे करीब 500 लोगों की मौत हो गई।

इजरायल ने गाजा में मानवीय सहायता के लिए भरी हामी

18 अक्टूबर को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन से मुलाकात के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने गाजा पट्टी में मानवीय सहायता पहुँचने को नहीं रोकने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि मिस्र से होकर ये सहायता पहुँच सकती है, लेकिन ये दक्षिणी गाजा तक ही सीमित रहनी चाहिए। अगर सहायता के नाम पर हमास को मदद पहुँचाने की कोशिश की गई, तो फिर वो चुप नहीं बैठेगा।
वहीं, अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक बार फिर से इजरायल के लिए कवच बन गया। अमेरिका ने बुधवार (18 अक्टूबर 2023) को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव को वीटो कर दिया, जिसमें गाजा पट्टी तक मानवीय सहायता की पहुँचाने की अनुमति देने के लिए इजरायल और फिलिस्तीनी आतंकवादियों हमास के बीच संघर्ष विराम का आह्वान किया गया था।

हमास के हमले में करीब 1400 इजरायलियों की मौत

हमास के हमलों में इजरायल के करीब 1400 लोगों की मौत हुई है। 3000 से ज्यादा घायल हैं। हमास ने इस हमले में करीब 250 इजरायली नागरिकों को बंधक भी बना लिया था। इजरायली बंधकों को छुड़ाने और हमास को मिटाने के लिए गाजा की घेराबंदी कर दी गई है। इजरायल के जवाबी कार्रवाई में करीब तीन हजार आतंकी मारे गए हैं। इजरायल वार टीम ने एक एक्स पोस्ट के जरिए बताया है कि इजरायल को टारगेट कर हमास के दागे रॉकेट में से 30 से 40% मिसफायर होकर गाजा पट्टी में ही गिरे हैं।

57 मुस्लिम देशों के संगठन OIC द्वारा ‘कश्मीर मुद्दे’ को शामिल न करने से पाकिस्तान फिर हुई बेइज्जती

कश्मीर को लेकर विश्व में भारत को बदनाम करने वाला पाकिस्तान आखिर कब अपनी नींद से जागेगा? पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान आज भी अपनी कट्टरवाद छवि को बदलने को तैयार नहीं, जबकि 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद से विश्व में भारत का जितनी ख्याति बढ़ी है, पाकिस्तान की उससे अधिक छवि ख़राब हुई है। ग्रे लिस्ट में पड़ा पाकिस्तान कब ब्लैकलिस्ट में शामिल हो जाए, कहना असंभव है। जितना धन भारत के विरुद्ध आतंकवाद पर खर्च कर रहा है, यदि उसी धन को पाकिस्तान के ही विकास के लिए खर्च करना शुरू कर दे, पाकिस्तान और वहां की जनता का कुछ भला हो। 

इमरान को नहीं मालूम की जितना खुश मुसलमान भारत में है, किसी मुस्लिम देश में भी नहीं। जितनी आज़ादी भारत में है, पाकिस्तान में भी नहीं, विपरीत इसके पाकिस्तान में हिन्दू कहीं अधिक मुसीबत में है और इस बात को समस्त मुस्लिम देश भलीभांति जानते हैं, जिस कारण अब कोई भारत के किसी भी मामले में हस्तक्षेप करने को तैयार नहीं। इमरान को मुसलमानों की इतनी ही ज्यादा चिंता है, तो पहले आतंकवादियों के अड्डे खुद ही ख़त्म करे, दूसरे चीन में रहने वाले मुसलमानों का भी वही इस्लाम है जो चीन से बाहर मुसलमानों का है, वहां उन पर कितने अत्याचार हो रहे हैं, पाकिस्तान क्यों नहीं बोलता? क्या चीन का मुसलमान मुसलमान नहीं? लेकिन कश्मीर पर गन्दी निगाह रखने के कारण पाकिस्तान को पाकिस्तान का ही होश नहीं।  
पाकिस्तान को आए दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फजीहत का सामना करना पड़ता है। आगामी 27 और 28 नवंबर को दुनिया के कई मुस्लिम आबादी वाले देशों के संगठन ‘आर्गेनाईजेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन’ (OIC) की बैठक होनी है। इन देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के पहले ही पाकिस्तान को बड़ा झटका देते हुए संगठन ने तय किया है कि वह ‘कश्मीर मुद्दे’ को अपने एजेंडे में शामिल नहीं करेंगे। पाकिस्तान भारत के अंदरूनी मसलों में दखल देकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय बनाने का प्रयास करता रहा है। इस बात को मद्देनज़र रखते हुए यह ख़बर पाकिस्तान के लिए काफी निराशाजनक है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी की इस दो दिवसीय बैठक में मौजूदगी को लेकर बुधवार (25 नवंबर 2020) को पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की तरफ से आधिकारिक बयान जारी किया गया था। 

बयान के मुताबिक़ पाकिस्तानी विदेश मंत्री की तरफ से उन तमाम चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी, जिनका सामना मुस्लिम समुदाय को करना पड़ता है, जिसमें से एक विवाद ‘जम्मू कश्मीर मुद्दा’ भी है। बयान के अगले हिस्से में लिखा था कि जब से भारत ने जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटाया है, तब से वहाँ मानवाधिकार हनन जारी है, शाह महमूद कुरैशी इस पहलू पर सबसे ज़्यादा जोर देंगे। 

एजेंडे में जम्मू-कश्मीर मुद्दे का नाम नहीं 

अफ़सोस पाकिस्तान की तरफ से जम्मू कश्मीर मुद्दे की चर्चा को लेकर किए गए दावे पूरी तरह झूठ हैं क्योंकि OIC की ओर से अंग्रेज़ी और अरबी में जारी किए गए आधिकारिक बयान में जम्मू कश्मीर मुद्दे पर कोई उल्लेख ही नहीं है। बयान में संगठन के सचिव (सेक्रेट्री जनरल) युसूफ अल ओथाईमीन का हवाला देते हुए कहा गया है कि बैठक की थीम, शांति और विकास के लिए आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट (United against terrorism for peace and development) होगी। इस बैठक के एजेंडे में उन चुनौतियों को शामिल किया गया है, जिनका सामना मुस्लिम समुदाय के लोग कर रहे हैं।

बयान के मुताबिक़, “फ़लीस्तीनी मुद्दा, हिंसा, कट्टरपंथ, आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई, मज़हबी दुष्प्रचार और इस्लामोफ़ोबिया को शामिल करते हुए काउंसिल अल्पसंख्यक मुस्लिमों, अन्य देशों में मौजूद मुस्लिमों और रोहिंग्या के लिए आर्थिक सहयोग (ICJ की मदद से) के मुद्दों पर चर्चा करेगी। इसके अलावा बैठक के दौरान संगठन का प्रयास होगा कि संस्कृतियों, धर्मों, सामाजिक विषयों और समुदायों के बीच संवाद की गुंजाइश बने।” जैसा कि इस पूरे बयान में पढ़ा जा सकता है कि कहीं भी जम्मू कश्मीर मुद्दे का उल्लेख तक नहीं है। अरबी भाषा में जारी किए गए बयान में भी जम्मू कश्मीर मुद्दे का कोई उल्लेख नहीं मौजूद है।

पाकिस्तान ने गैरकानूनी रूप से कश्मीर के कई क्षेत्रों पर कब्ज़ा किया है और पिछले काफी समय से प्रयास कर रहा था कि OIC की बैठक में जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर चर्चा हो। OIC के सदस्यों ने इस मुद्दे पर पाकिस्तान को नज़रअंदाज़ करते हुए इस पर कोई बात नहीं कही है। पाकिस्तान के संबंध सऊदी अरब और यूएई से तनावपूर्ण हैं और यह दोनों देश 57 सदस्यों वाले OIC में बेहद प्रभावशाली हैं। सऊदी अरब ने वर्चुअल वीटो का इस्तेमाल करते हुए 57 मुस्लिम देशों के इस ब्लॉक में इस्लामाबाद के इस कदम का समर्थन करने से इनकार कर दिया है।

सऊदी अरब से रिश्तों में बढ़ती खटास 

कुछ सालों पहले तक सऊदी अरब और पाकिस्तान एक दूसरे के करीबी देशों में गिने जाते थे लेकिन पाकिस्तान के रवैये की वजह से दोनों देशों के रिश्ते बदतर हुए हैं। पूर्व में लंबे समय तक एक दूसरे के सहयोगी रहे पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पहली बार दरार तब आई, जब सऊदी अरब ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करने से मना कर दिया। इसके बाद दोनों देशों के रिश्ते लगातार बदतर हुए हैं।

इसके बाद फरवरी 2020 में भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब सऊदी अरब ने पाकिस्तान के उस निवेदन को ठुकरा दिया था, जिसके तहत पाकिस्तान जम्मू कश्मीर मुद्दे पर भारत की कार्रवाई का प्रतिरोध करने के लिए OIC देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक करवाना चाहता था। जब से भारत ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 ख़त्म किया है, तब से पाकिस्तान इस प्रयास में है कि इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाए और OIC में इस मुद्दे पर चर्चा हो।

पाकिस्तान के उकसाने का भी असर नहीं 

पाकिस्तान ने सऊदी के सामने भारत के लिए जम कर जहर उगला लेकिन सऊदी अरब ने इस बात को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया। अपने स्तर से नीचे गिरते हुए पाकिस्तान ने सऊदी अरब को धमकी दी थी कि उसकी बात नहीं सुने जाने पर वह OIC में फूट डाल सकता है। ऐसी दोयम दर्जे की धमकियों के बाद सऊदी ने निर्णय लिया कि वह पाकिस्तान को दिए जाने वाले आर्थिक सहयोग पर भी रोक लगाएगा। 

इस साल अगस्त में सऊदी ने पाकिस्तान को दिया हुआ 3 बिलियन डॉलर का क़र्ज़ जल्द लौटाने की बात कही थी, जो उन्होंने साल 2018 के दौरान इमरान सरकार को दिया था। कश्मीर मुद्दे पर इतने तिरस्कार का सामना करने के बाद पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने तुर्की और मलेशिया जैसे मुस्लिम देशों को सऊदी के विरुद्ध एकजुट करने का असफल प्रयास किया था। इसके पहले सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ किए गए उस समझौते को ‘रिन्यू’ करने से मना कर दिया था, जिसके तहत पाकिस्तान को सऊदी से कच्चा तेल मिलना था। समझौते के मुताबिक़ हर साल लगातार भुगतान करने पर 3.2 बिलियन डॉलर के कच्चे तेल का प्रावधान था।   

सऊदी अरब का रवैया देखते हुए उसके पड़ोसी मुल्क यूएई ने भी पाकिस्तान के विरुद्ध कई बड़े कदम उठाए। हाल ही में यूएई ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पाकिस्तान और अफगानिस्तान के नागरिकों को वीज़ा देने से अस्थाई तौर पर मना कर दिया था। इसके अलावा यूएई ने भी कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को नज़रअंदाज़ ही किया है। उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार की सक्रिय कूटनीति और सकारात्मक छवि की वजह से भारत को काफी लाभ हुआ है। पिछले कुछ समय में भारत के संबंध पश्चिम एशियाई देशों से बेहतर हुए हैं जो कि अपने आप में ऊर्जा का बहुत बड़ा स्रोत हैं और वहाँ 90 लाख अप्रवासी भी मौजूद हैं।  

OIC में भारत पर इस्लामोफोबिया के आरोप का मालदीव ने दिया पाकिस्तान को करारा जवाब

भारत के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने से पाकिस्तान बाज नहीं आ रहा है।ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन की वर्चुअल मीटिंग में भारत पर इस्लामोफोबिया के पाकिस्तान के आरोपों का मालदीव ने करारा जवाब दिया है। मालदीव ने कहा कि सोशल मीडिया पर चंद लोग और अलग-थलग पड़े समूहों की हरकतों या बयानबाजी को 130 करोड़ भारतीयों की राय नहीं समझा जा सकता।
मालदीव ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में 20 करोड़ से ज्यादा मुस्लिम रहते हैं और भारत पर यह आरोप लगाना गलत होगा। बयान में कहा गया कि ऐसा कदम दक्षिण एशियाई क्षेत्र के धार्मिक सौह्रद के लिए नुकसानदायक होगा। यह भी साफ किया गया कि किसी मंशा से दिए गए कुछ लोगों के बयानों और गलत जानकारी के लिए सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे कैंपेन को 130 करोड़ लोगों की भावना नहीं समझना चाहिए।

मालदीव ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और बहु-सांस्कृतिक समाज है। यहां 20 करोड़ से अधिक मुसलमान रह रहे हैं। ऐसे में इस्लामोफोबिया का आरोप लगाना तथ्यात्मक रूप से गलत होगा। दक्षिण एशियाई क्षेत्र में धार्मिक सद्भाव के लिए ऐसा करना हानिकारक होगा। इस्लाम भारत में सदियों से मौजूद है और यह देश का 14.2 फीसद आबादी के साथ भारत में दूसरा सबसे बड़ा धर्म है।
मीटिंग में पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र के राजदूत मुनीर अकरम ने कहा था कि भारत सक्रिय रूप से इस्लामोफोबिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके बाद मालदीव की ओर से आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा गया कि दुनिया में नफरत की संस्कृति बढ़ती जा रही है और हिंसा को राजनीतिक और वैचारिक मंशाओं को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। मालदीव इस्लामोफोबिया समेत ऐसी सभी गतिविधियों के खिलाफ खड़ा है जो हिंसा को बढ़ावा देती हैं।