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नेताओं का दोगलापन : कोरोना वॉरियर्स पर पत्थरवर्षा के समय मौन, पुष्पवर्षा को बताया तमाशा

आर.बी.एल. निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
अपनी जान को जोखिम में डालकर स्वास्थ्यकर्मी कोरोना मरीजों की जान बचाने में रात-दिन लगे हुए हैं। यहां तक कि कोरोना मरीजों की जांच के लिए गई मेडिकल टीम पर पत्थरों की वर्षा की गई, जिसमें कई स्वास्थ्यकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अलावा लॉकडाउन का पालन कराने गए पुलिसकर्मियों को पत्थरवर्षा का सामना करना पड़ा। लेकिन दुख और हैरानी की बात है कि कुछ नेताओं को स्वास्थ्यकर्मियों और पुलिसकर्मियों पर हुई पत्थरवर्षा से कोई परेशानी नहीं हुई। हिंसक हमलों के बावजूद उन्होंने मौनव्रत धारण कर लिया। जब तीनों सेनाओं ने स्वास्थ्यकर्मियों और पुलिसकर्मियों के सम्मान में पुष्पवर्षा की, तो उन्हें परेशानी होने लगी और उनकी आवाज भी लौट आई। नेताओं ने संवेदनहीनता का परिचय देते हुए इस सम्मान समारोह को तमाशा, सर्कस और फिजूलखर्ची करार दिया। 
सीताराम येचुरी ने बताया सम्मान समारोह को तमाशा
कोरोना से लड़ने वाले सभी लोगों को कोरोना वॉरियर्स का नाम दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना वॉरियर्स को सम्मान में ताली और थाली बजाने के बाद दीपक जलाने की अपली की। जिसे लोगों का पूरा समर्थन मिला। इसी क्रम में तीनों सेनाओं ने कोरोना वॉरियर्स के सम्मान में फ्लाई पास्ट निकालने का फैसला किया और 3 मई को अस्पतालों और पुलिस मुख्यालय पर आसमान से पुष्पवर्षा की गई। लेकिन वामपंथी नेता सीताराम येचुरी ने इस सम्मान कार्यक्रमों को तमाशा बता दिया। उनके बयान से लगता है कि उन्हें गरीब मजदूरों की चिंता है, लेकिन स्वास्थ्यकर्मी और पुलिसकर्मियों की जान की परवाह नहीं है।


कोरोना वायरस के लिए चीन को दोषी ठहराने पर सीताराम येचुरी और उनकी पार्टी को परेशानी होती है, वे इसका खुलकर विरोध करते हैं। जब कोरोना फैलाने को लेकर तबलीगी जमात की आलोचना होने लगी तो वाम नेताओं ने मरकज का बचाव करने की पूरी कोशिश की। लेकिन कोरोना वॉरियर्स पर हो रहे हमलों पर उनकी आंखें नहीं खुली। जब मोदी सरकार कोरोना वॉरियर्स का सम्मान करती है, तो उन्हें तमाशा लगता है। येचुरी ने ट्वीट करते हुए मोदी सरकार पर लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने की जगह तमाशा को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।
ममता सरकार ने इजाजत नहीं दी
पश्चिम बंगाल में ममता सरकार ने वायुसेना को फ्लाई पास्ट की इजाजत नहीं दी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वायुसेना के अधिकारी ने कहा कि बंगाल के दो अस्पतालों में वायुसेना ने पुष्पवर्षा की योजना बनाई थी, लेकिन राज्य सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी। केंद्र और ममता सरकार के बीच कोरोना वायरस के संक्रमण के दौरान केंद्रीय टीम भेजने, मौतों की वजह स्पष्ट करने को लेकर तनाव चल रहा है। केंद्र ने राज्य में टेस्टिंग क्षमता को लेकर भी चिंता जाहिर की है।

समाजवादी पार्टी ने भी उठाया सवाल
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी कहा है कि यूपी में क्वारैंटाइन सेंटर्स में बदसलूकी की खबरें आ रही हैं। कहीं खाने-पीने की कमी की समस्या उठाने पर केवल आश्वासन दिया जा रहा है। ऐसे में फूल बरसाने का क्या मतलब है?

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आंकड़े छिपा रहा चीन : कोरोना से चीन में 1 करोड़ 50 लाख मौतें ?


ये है दिल्ली का जामा मस्जिद क्षेत्र 
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भारतीय राजनीतिक दलों और मीडिया को चीन से सीखना चाहिए, जहाँ कोरोना से इतनी अधिक मृत्यु हो गयी है, कोई विपक्ष शोर मचाने की बजाए इस संक्रामक बीमारी के लड़ने के लिए सरकार से कंधे से कन्धा मिलाकर चल रहे है। जबकि भारत में चैनलों पर सजती चौपालों में बैठ मोदी सरकार के प्रयासों पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। कोई कहता है कि "कोरोना कोई बीमारी नहीं, CAA और NRC से जनता का ध्यान हटाने का शोशा है।" किस तरह जनता को गुमराह करने में व्यस्त हैं। शर्म आती है, ऐसे भारतीय नेताओं पर। आज मार्च 22 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने "जनता के लिए, जनता द्वारा कर्फ्यू" का आव्हान किया, लेकिन दिल्ली के जामा मस्जिद क्षेत्र को छोड़ सब जगह सन्ना है। देखिए चित्र। दूध और परचून की एकाध दुकान को छोड़ सब दुकानें बंद जरूर हैं, लेकिन जनता सड़क पर है। 
विपरीत इसके हैदराबाद में पुलिस सड़क आये लोगों से हाथ जोड़ कर घर वापस जाने के लिए निवेदन कर रही है, शाबाश है हैदराबाद पुलिस।(नीचे देखिए 2 चित्र)   
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा "जनता कर्फ्यू" आव्हान पर विश्व चकित है, लेकिन भारत में मोदी विरोधी मोदी विरोध के चक्कर में जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। मोदी का विरोध करने को मुद्दे बहुत हैं, पहले इस बीमारी की गंभीरता को देखते हुए, जनता को गुमराह तो मत करो।  
सबसे पहले ये समझ लें की चीन में स्वतंत्र मीडिया जैसी कोई चीज नहीं है, वहां मीडिया पूरी तरह सरकारी कण्ट्रोल में है और चीन से इसी कारण आसानी से जानकारियां बाहर नहीं आती

वाह हैदराबाद पुलिस ! शाबाश है। 
वुहान शहर में कोरोना वायरस की शुरुवात हुई, जिसके बाद दुनिया भर में अब कोरोना का आतंक है, वहीँ चीन को लेकर गंभीर बातें सामने आ रही है, चीन इन दिनों बता रहा है की उसके यहाँ नए मामलों में बहुत कमी आई है और मरने वालो की संख्या भी बहुत कम है 
चीन के मुताबिक उसके यहाँ 4 हज़ार के आसपास ही मौतें हुई है, पर जो जानकारियां अब निकल कर सामने आ रही है वो बेहद खतरनाक है और चीन को लेकर कहा जा रहा है की चीन सही आंकड़े नहीं दे रहा, चीन झूठ बोल रहा है, आंकड़े छिपा रहा है 
जैसे भारत में कुछ प्रमुख मोबाइल कम्पनियाँ है उदाहरण के तौर पर जिओ, एयरटेल, आईडिया, वोडाफोन इत्यादि, वैसे चीन में मुख्यतः 3 प्रमुख मोबाइल कम्पनियां है 
इन मोबाइल कंपनियों को लेकर ये जानकारी सामने आई है की जनवरी 2020 से पहले हर महीने इसके ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही थी पर जनवरी से मार्च के बीच इसके 1 करोड़ 50 लाख लाख से ज्यादा एक्टिव ग्राहक गुम हो चुके है, 80 लाख से ज्यादा ऐसे लोग जो रोज इस मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे थे वो अब कहा हैं किसी को नहीं पता, वो एक्टिव यूजर थे पर उनके मोबाइल अब बंद है



इसके अलावा ये भी जानकारी सामने आई है की वुहान शहर और उसके आसपास अब कई घरों में रात को लाइट भी नहीं जलती, जबकि बिजली वितरण में कोई समस्या नहीं है और पहले यहाँ लाइट जला करती थी
At 8:00 pm today local time in #Wuhan. See how few lights there are? One can fake the numbers, but can’t fake the fact that only a few apartments are still lit up. Where have people gone? #CCPVirus #COVID19ON #coronavirus pic.twitter.com/VBevAqy0XC

जनवरी से पहले हर महीने चीनी मोबाइल कंपनियों के ग्राहक बढ़ रहे थे, पर जनवरी के बाद मार्च तक अब 15 मिलियन यानि 1 करोड़ 50 लाख ऐसे ग्राहक जो एक्टिव थे वो कम हो चुके है, उनके मोबाइल बंद हो चुके है, उन मोबाइल फ़ोन को कोई इस्तेमाल नहीं करता
इसके अलावा पहले जिन घरों में लाइट जला करती थी वहां अब लाइट नहीं जलती, मामला बहुत गंभीर है, ये भी सत्य है की कई लोग 1 से ज्यादा मोबाइल रखते है, पर अगर 1 करोड़ 50 लाख एक एक्टिव नंबर अब बंद हो चुके है तो भी मरने वालो की संख्या लाखों में ही है। अगर हर शख्स 2 मोबाइल इस्तेमाल कर रहा था तो कम हुए लोगो की संख्या 75 लाख होती है, और अगर हर शख्स 4 नंबर भी इस्तेमाल कर रहा था तब भी कम हुए लोगो की संख्या 37 लाख 50 हज़ार की है
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं "झुकती है दुनियां झुकाने वाला चाहिए", जिसे चरितार्थ कर रहे हैं भारत के प्रधान.....
मामला बहुत गंभीर है, लाखों करोडो लोग चीन में गायब है और घरों में लाइट नहीं जल रही है, चीन ऐसा देश है जहाँ मीडिया स्वतंत्र नहीं है इसलिए चीन से सही खबरें भी सामने नहीं आती

627 मौत इटली में सिर्फ एक दिन में, भारत द्वारा उठाए गए कदम की US ने की प्रशंसा

कोरोना वायरसचीन के वुहान शहर से निकला कोरोना वायरस का कहर पूरे विश्व में जारी है। हर देश इसकी रोकथाम के लिए अपने-अपने स्तर पर घोषणाएँ करने में लगा हुआ है। वहीं पिछले दिनों सार्क देशों के बीच कोरोना पर हुई वीडियो कॉन्फ्रेसिंग पर अमेरिकी रक्षा सचिव ने भारत के पहल की प्रशंसा की है।
दरअसल पेंटागन ने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क ओशो ने टेलीफोन पर बातचीत की और सार्क देशों के लिए भारत की COVID-19 के लिए उठाए गए पहल की प्रशंसा की है। उन्होंने बताया कि फोन कॉल के दौरान, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रक्षा प्राथमिकताओं पर भी चर्चा की, जिसमें रक्षा व्यापार को बढ़ाने के लिए चल रहे क्षेत्रीय सहयोग और पहल शामिल हैं। पेंटागन ने आगे कहा कि कोरोना महामारी के चलते दोनों ने संचार को बंद करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया, जो कि व्यापक वैश्विक साझेदारी को सुदृढ़ करता है।
पेंटागन ने यह भी बताया कि दक्षिण एशियाई देशों के बीच कोविड​​-19 से संबंधित राहत प्रयासों के समन्वय में भारत के नेतृत्व के लिए एरिज़ोना ने प्रशंसा व्यक्त की है और जल्द से जल्द अवसर पर भारत आने का अपना इरादा व्यक्त किया है। वहीं कोरोनो वायरस संकट के चलते एरिजोना ने इस महीने भारत में अपनी निर्धारित यात्रा को स्थगित कर दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस पर रविवार को सार्क देशों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा करते हुए कहा था कि कोरोना वायरस को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। इस चर्चा में श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी, मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम सोली, भूटान के प्रधानमंत्री, नेपाल के प्रधानमंत्री शामिल रहे थे। भारत की इस पहल की ही अमेरिकी रक्षा सचिव ने प्रशंसा की है।
वहीं कोरोना वायरस से मुकाबला करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कड़े कदम उठाए हैं। दरअसल अमेरिका में कोरोना की चपेट में आने से मरने वालों की संख्या 230, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 13000 के पार हो गई है। वहीं चीन के बाद कोरोना का इटली में तैजी से फैला है। शुक्रवार को इटली में एक दिन के अंदर कोरोना की वजह से 627 लोगों की जान चली गई, जबकि कोरोना वायरस के संक्रमण के 5986 नए मामले भी सामने आ गए। इसी के साथ इटली में मरने वालों की संख्या 4032 हो चुकी है। वहीं कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या भी बढ़कर 47021 हो गई है।
भारत में भी कोरोना से मरने वालों की संख्या 5 हो गई है, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 200 के पार हो गई है। इसी की रोकथाम के लिए भारत सरकार ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की अपील की है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की जनता से अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने की अपील की है।

कोरोना वायरस : मोदी सरकार पिता के साए जैसी: इटली से लौटी युवती के पिता

नरेंद्र मोदी
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कोरोना वायरस का प्रसार रोकने के लिए भारत की तैयारियों और प्रभावित देशों से अपने नागरिकों को लाने की केंद्र सरकार की कोशिशों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हो रही है। जबकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी भले इस वैश्विक महामारी को मोदी सरकार पर हमले के मौके की तरह तलाश कर रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया में सरकार की तारीफ करते हुए कुछ लोगों ने जो आपबीती शेयर की है वह बेहद मार्मिक है। इटली से लाई गई एक युवती के पिता ने अपनी भावना साझा करते हुए कहा है कि वो सालों से सरकार की आलोचना कर रहे थे। लेकिन, अब उन्हें एहसास हो रहा है कि मोदी सरकार पिता के साए (fatherly figure) जैसी है। विदेश से लाए गए एक युवक ने कहा है कि ऐसी व्यवस्था तो उसने जर्मनी जैसे यूरोपीय मुल्कों में भी नहीं देखी है।
टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार रोहन दुआ ने इटली से लौटी युवती के पिता का पत्र शेयर किया है। इस पत्र में उन्होंने इंडियन एंबेसी, भारत सरकार और विशेषत: नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया है। पिता के मुताबिक उनकी बेटी मास्टर की पढ़ाई करने इटली के मिलान गई थी। वहॉं हालात बिगड़ने पर उसे वापस लौटने को कहा। जब वह लौटने लगी तो उससे भारत वापस जाने का सर्टिफिकेट माँगा गया। उन्होंने खुद इंडियन एंबेसी को संपर्क करने की कोशिश की। मगर मिलान में एंबेसी का कार्यालय बंद होने के कारण ऐसा नहीं हो पाया। उन्होंने इंडियन एंबेसी के अन्य लोगों को मेल के जरिए संपर्क किया और रात के 10:30 बजे उनकी बेटी ने फोन पर बताया कि उसकी बात दूतावास में हो गई है और वह अगली फ्लाइट से भारत लौट रही है।
पिता के मुताबिक, वे सालों से भारतीय सरकार को कोस रहे थे। लेकिन मोदी सरकार में पिता का चेहरा है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी 15 मार्च को भारत आई और आईटीबीपी अस्पताल में उसकी स्वास्थ्य संबंधी, खान-पान संबंधी सभी जरूरतों का ख्याल रखा गया। गौरतलब है कि इटली उन देशों में शामिल है जो कोरोना संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित हैं।


भारत सरकार इन दिनों लगातार विदेशों से लौटने वाले अपने नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध करवाने में प्रयासरत है। सोशल मीडिया में वायरल हुए एक विडियो में विदेश से लौटा शख्स मिली सुविधाओं के बारे में बता रहा है। इस विडियो को रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी शेयर किया था। इसमें व्यक्ति बता रहा है कि सरकार ने करीब 70 किलोमीटर दूर सभी पैसेंजर को कोरोन्टाइन किया है। बिल्डिंग को लगातार सैनेटाइज किया जा रहा है। बड़े-बड़े अधिकारी मौक़े पर तैनात हैं। उन्हें 24 घंटे की देखरेख में रखा है। साथ ही जहाँ उन्हें रखा गया है वहाँ सरकार ने बहुत अच्छी व्यवस्था की है। सबको अलग से रूम मिले हैं। इसमें उन्हें पानी, चप्पल, बेड, खाना, नई तौलिया सब मुहैया कराया जा रहा है। इसलिए वे नरेंद्र मोदी, स्वास्थ्य मंत्री समेत पुलिस प्रशासन और डॉक्टरों का धन्यवाद करते हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कोरोना वायरस के संक्रमण से निबटने के लिए सरकार ने 400 बेड का कोरोन्टाइन वार्ड तैयार करवाया है। यहाँ विदेश से लौटने वालों को सीधे दिल्ली एयरपोर्ट से लेकर जाया जाएगा। यहाँ इन सभी लोगों की 14 तक की निगरानी होगी और अगर इनमें कोरोना के लक्षण मिलते हैं तो इन्हें आइसोलेट कर छोड़ा जाएगा। ये कोरोन्टाइन वार्ड नोयडा के सेक्टर 39 में स्थित जिला अस्पताल की नई बिल्डिंग में बना है। यहाँ पर्याप्त संख्या में पैरामेडिकल स्टॉफ तैनात हैं।
नरेंद्र मोदी, जम्मू कश्मीर, कोरोना वायरसमोदी ने वो कर दिखाया, जो हमारे लिए किसी ने नहीं किया : वुहान से लौटी कश्मीरी छात्रा  जम्मू-कश्मीर के कई छात्र चीन में फँसे हुए थे। इन्हें मोदी सरकार सकुशल देश वापस लाने में सफल रही। कोरोना वायरस से प्रभावित इलाक़ों से वापस लौटने के बाद कश्मीरी छात्रों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं है। वे सभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को धन्यवाद देते नहीं थक रहे। ऐसी ही एक छात्र ने मीडिया से बातचीत के दौरान अपने मन की बात साझा की। कश्मीरी छात्रा ने कहा कि बचपन से लेकर अब तक वो हिंसा की कई वारदातों को देख चुकी थीं, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है जब भारत सरकार ने उनके लिए इतना बड़ा क़दम उठाया।
चैनल ‘सीएनएन न्यूज़ 18’ से बातचीत करते हुए कश्मीरी छात्रा ने कहा कि चीन में फँसे भारतीय छात्रों को वापस लेकर आना कोई साधारण बात नहीं थी। ये बहुत बड़ी बात है। उसने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है जब बाहर फँसे कश्मीरियों के लिए भारत सरकार ने इतना बड़ा काम किया है। उसने कहा कि मोदी ने वो कर दिखाया है, जो आज तक किसी ने नहीं किया। जम्मू कश्मीर के कुछ अन्य छात्रों ने भी मोदी सरकार की तारीफ़ की, जिन्हें वहाँ से बचा कर लाया गया।

चीन के हुबेई प्रान्त की राजधानी वुहान में कोरोना वायरस का संक्रमण सबसे ज्यादा है। वहाँ कई भारतीय छात्र फँसे हुए थे, जिनमें से कई कश्मीरी भी थे। जनवरी के अंतिम हफ्ते में जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री अल्ताफ बुखारी ने पीएम मोदी से गुहार लगाई थी कि कश्मीरी छात्रों को वहाँ से वापस लाया जाए। इसके बाद मोदी सरकार ने उन्हें वापस लाने में सफलता प्राप्त की। जम्मू-कश्मीर से वापस लाए गए छात्र-छात्रों का दिल्ली एयरपोर्ट पर और फिर कश्मीर में चेक-अप किया गया। उनमें कोई संक्रमण नहीं दिखा।
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अब तक ईरान से 389 भारतीय नागरिकों को वापस लाया जा चुका है। सोमवार (मार्च 16, 2020) को 53 भारतीय नागरिकों का चौथा जत्था ईरान से भारत पहुँचा। केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट कर के इस सम्बन्ध में जानकारी दी। यह समाचार उन सभी नागरिक संशोधन बिल के विरोधियों पर इतने जोर का थप्पड़ है, जिसकी गूंज तक विरोधी सुन नहीं पा रहे कि जिस मोदी सरकार पर मुसलमानों को भारत से निकालने का दुष्प्रचार किया जा रहा है, वही मोदी सरकार अपने भारतीय मुस्लिम नागरिकों को वापस भारत ला रही है। क्या जरुरत है उन्हें वापस लाने की, लेकिन मोदी सरकार आसानी से किसी भी भारतीय को मरने नहीं देना चाहती।

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भारतीय मुसलमानों को विशेष विमान से ईरान से लाया जा रहा है आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारत में कुछ कट्टरपंथी कोरो....
जहाँ तक कोरोना वायरस की बात है, अब तक इससे चीन में 1868 लोगों की जान जा चुकी है। यूरोप के फ्रांस में भी कोरोना से पहली मौत की पुष्टि हुई है। स्थिति इतनी भयंकर है कि वुहान में एक हॉस्पिटल के डायरेक्टर की ही इस वायरस से मौत हो गई, जिसके अस्पताल में बड़े पैमाने पर कोरोना से पीड़ित मरीज भर्ती थे। अब तक इस खतरनाक वायरस से 72,436 लोगों के संक्रमित होने की ख़बर है। इस वायरस से प्रभावित हो चुके 12,522 मरीज ठीक भी हो चुके हैं। अब तक 25 देशों में इसके फैलने की रिपोर्ट आई है।

ईरान गए इस्लामिक यात्रा पर कई भारतीय नागरिक हुए कोरोना वायरस के शिकार

ईरान, कोरोना वायरस, भारत
भारतीय मुसलमानों को विशेष विमान से ईरान से लाया जा रहा है  
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भारत में कुछ कट्टरपंथी कोरोना को गंभीरता से नहीं ले रहे, जबकि कुछ स्थानों पर मस्जिदों में नमाज़ पढ़ने पर पाबन्दी लगाए जाने से लगता है, मुस्लिम विद्वान भी दो मतों में विभाजित हैं। जबकि भारत में कुछ मौलाना, इंडिया टीवी, मार्च 17 को दिखाए वीडियो के अनुसार, इस बात का दावा कर रहे हैं कि 'किसी मुसलमान को इस बीमारी से कोई खतरा नहीं, उन्हें अल्लाह बचा रहा है।' विपरीत इसके ईरान में अपनी इस्लामिक यात्रा पर गए कुछ भारतीय मुसलमान इस बीमारी के शिकार हो गए। 
इन कट्टरपंथियों ने ही भारतीय मुसलमानों को इतना भ्रमित एवं डरा कर रखा हुआ है, जिससे निजात दिलाने के लिए बुद्धिजीवियों को आगे होना होगा। 
दूसरे, अब तक ईरान से 389 भारतीय नागरिकों को वापस लाया जा चुका है। सोमवार (मार्च 16, 2020) को 53 भारतीय नागरिकों का चौथा जत्था ईरान से भारत पहुँचा। केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट कर के इस सम्बन्ध में जानकारी दी। यह समाचार उन सभी नागरिक संशोधन बिल के विरोधियों पर इतने जोर का थप्पड़ है, जिसकी गूंज तक विरोधी सुन नहीं पा रहे कि जिस मोदी सरकार पर मुसलमानों को भारत से निकालने का दुष्प्रचार किया जा रहा है, वही मोदी सरकार अपने भारतीय मुस्लिम नागरिकों को वापस भारत ला रही है। क्या जरुरत है उन्हें वापस लाने की, लेकिन मोदी सरकार आसानी से किसी भी भारतीय को मरने नहीं देना चाहती। 
ईरान में महजबी तीर्थयात्रा पर गए 234 भारतीय नागरिकों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की ख़बर आ रही है। अब उन्हें मेडिकल टेस्ट के बाद ईरान में ही रोका गया है और जब वो पूरी तरह ठीक हो जाएँगे, उसके बाद उन्हें वापस भारत लेकर आया जाएगा। बता दें कि ईरान में कोरोना वायरस के ख़तरे ने महामारी का रूप ले लिया है और वहाँ अब तक 724 लोग इससे संक्रमित होकर अपनी जान गँवा चुके हैं। वहाँ कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या 15 हजार के पार बताई जा रही है।
मीडिया में ईरान में फँसे भारतीय नागरिकों में कोरोना वायरस से पीड़ितों की संख्या 250 के पार बताई जा रही है। ऑपइंडिया फ़िलहाल इसकी पुष्टि नहीं करता। हालाँकि, अभी तक कोई आधिकारिक आँकड़ा जारी नहीं किया गया है लेकिन शीर्ष अधिकारियों से बातचीत के आधार पर ‘आईएएनएस’ ने दावा किया है कि इस्लामिक तीर्थयात्रा पर गए भारतीय नागरिकों में अधिकतर वरिष्ठ नागरिक थे, जिन्हें इस वायरस द्वारा ज्यादा नुकसान पहुँचाए जाने की संभावना रहती है। फ़िलहाल वो सभी ईरान में ही रहेंगे, जहाँ उनका इलाज किया जाएगा। कोरोना वायरस पीड़ितों के लिए ‘इंटरनेशनल स्टैण्डर्ड प्रोटोकॉल’ के हिसाब से इन सभी को ‘क्वारंटाइन सेंटर’ में रखा जाएगा।

ईरान में अभी भी 6000 के आसपास भारतीय नागरिक फँसे हुए हैं, जो वहाँ के विभिन्न प्रांतों में रह रहे थे। इनमें से अधिकतर इस्लामी तीर्थयात्रा पर गए थे और अधिकांश लद्दाख और जम्मू कश्मीर से हैं। कई छात्र भी फँसे हुए हैं। केरल, तमिलनाडु और गुजरात के 1000 मछुआरे भी वहाँ रह रहे थे। वो वहाँ रह कर कमाई करते हैं और साथ ही इस्लामिक अध्ययन भी करते हैं। भारतीय अधिकारी लगातार उन फँसे हुए नागरिकों से मुलाक़ात कर रहे हैं। इनमें से कइयों को वापस भी लाया गया है। जिनका मेडिकल रिपोर्ट नेगेटिव आ रहे है, उन्हें तुरंत निकालने की व्यवस्था की जा रही है। भारत ने इसके लिए प्रशिक्षित मेडिकल टीम को वहाँ भेजा है।
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कोरोना वायरस के प्रसार में चर्च का रोल सामने आने के बाद प्रार्थना करते चर्च के 88 वर्षीय संस्थापक ली मैन ही दक्षिण क.....
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