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कर्नाटक में कांग्रेस की जीत से नीतीश कुमार और ममता बनर्जी को झटका?

भारत में कुछ प्रदेश ऐसे हैं, जहां हर चुनाव में सत्ता परिवर्तन होता रहता है, लेकिन जनता और पार्टियां समझती हैं, मानो कोई किला जीत लिया हो। ठीक वही स्थिति कर्नाटक की है। परन्तु कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस की जीत से कुछ भाजपा विरोधी पार्टियों को ही बेचैनी हो रही है।  
हिमाचल प्रदेश के बाद अब कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। इस जीत को लेकर पूर्व सांसद राहुल गाँधी समेत पार्टी के कई नेता खुश नजर आए। वहीं, अखिलेश यादव और उद्धव ठाकरे जैसे नेता 
कांग्रेस की जीत में अपनी खुशी ढूँढ़ने की कोशिश करते दिखाई दिए। निश्चित तौर पर इस जीत से कांग्रेस नेताओं ने अपना खोया हुआ आत्मविश्वास हासिल कर लिया होगा। लेकिन कांग्रेस की इस सफलता से पीएम पद का ख्वाब देख रहे नीतीश कुमार और ममता बनर्जी के सपनों को गहरा धक्का लगा है।

नीतीश-ममता देख रहे पीएम बनने का ख्वाब

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि बिहार सीएम नीतीश कुमार और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पीएम बनने का ख्वाब सँजोए हुए हैं। अपने इस ख्वाब को पूरा करने के लिए नीतीश कुमार तो पूरे विपक्ष को एकजुट करने में लगे हुए हैं। वह कांग्रेस ‘अध्यक्ष’ मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गाँधी, तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव, बंगाल सीएम ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, झारखंड सीएम हेमंत सोरेन, अखिलेश यादव, सीताराम येचुरी, उद्धव ठाकरे से लेकर ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक तक से मुलाकात करते दिखाई दिए हैं।
भले ही इस मुलाकात के बाद नवीन पटनायक ने खुद को विपक्षी दलों की तथाकथित एकता से अलग करने का ऐलान करते हुए लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने की बात कही हो और तमाम नेताओं से मुलाकात का परिणाम सिफर ही रहा हो लेकिन नीतीश कुमार किसी भी नेता से मुलाकात करने में कभी भी पीछे नहीं दिखाई दिए। वहीं, ममता बनर्जी भी नीतीश कुमार, अरविंद केजरीवाल समेत अन्य नेताओं से मुलाकात कर चुकी हैं। साथ ही खुले मंच से विपक्षी एकता की वकालत करती देखी गईं हैं। ऐसे में इस बात में कोई दो राय नहीं है कि नीतीश और ममता सीएम की कुर्सी में बैठकर प्रधानमंत्री बनने का रास्ता खोज रहे हैं।
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणाम सामने आने से पहले तक राहुल गाँधी की विपक्ष में भूमिका प्रश्नचिन्ह के घेरे में थी। यहाँ तक कि हिमाचल प्रदेश में जीत के बाद भी राहुल गाँधी पार्टी के चेहरे की तरह नहीं दिख रहे थे। हालाँकि इस बात में कोई दो राय नहीं है कि राहुल की सांसदी जाने के बाद विपक्ष ने एकजुटता दिखाई थी। लेकिन वह एकजुटता राहुल गाँधी के लिए कम बल्कि भाजपा और पीएम मोदी के खिलाफ अधिक थी। कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस तो राहुल गाँधी का कद बढ़ा-चढ़ा कर प्रचारित करेगी, ये तो तय है।
यह बढ़ोतरी विपक्ष के नजरिए से अच्छी हो सकती है। विपक्ष इस बात से संतोष कर सकता है कि लोकसभा चुनाव में सिर्फ मोदी लहर का कहर नहीं झेलना पड़ेगा। बल्कि कांग्रेस भी बीजेपी का मुकाबला करने के लिए जमीनी स्तर पर मजबूत होती दिख रही है। लेकिन ममता और नीतीश के लिए कर्नाटक में कांग्रेस की जीत किसी सदमे से कम नहीं होगी। दोनों ही नेताओं को यह पता है कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री पद के लिए प्रोजेक्ट करने को तैयार है। वहीं, यह भी साफ है कि राहुल गाँधी के नाम पर विपक्ष को एकजुट करने में किसी के भी दाँत खट्टे हो जाएँगे। ऐसे में, नीतीश और ममता को विपक्ष को एक कर पीएम बनने का सपना टूटता हुआ दिख रहा होगा।
हालाँकि विपक्ष एकजुट होगा या नहीं और यदि एकजुट होता है तो क्या नीतीश कुमार या ममता बनर्जी के नाम पर एकजुट हो पाता है या नहीं यह सब तो भविष्य के गर्त में छिपा हुआ है। लेकिन एक बात साफ है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले हुए विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन इसके बाद आम चुनाव में जिस तरह मोदी लहर चली उससे हर कोई वाकिफ है। ऐसे में यदि एक बार फिर मोदी लहर चलती है तो विपक्ष का एक होना और न होना एक बराबर ही है।

6 राज्यों में विधानसभा उपचुनावों में यूपी में योगी-योगी, मोकामा में फिर से अनंत सिंह की ‘सरकार’, ओडिशा में BJP ने बढ़ाया दबदबा

बिहार के मोकामा में फिर से 'छोटे सरकार' की ही जीत (फाइल फोटो)
विभिन्न राज्यों में हुए उपचुनावों में जहाँ भाजपा गठबंधन के लिए अच्छी ख़बरें आई हैं, वहीं बिहार के मोकामा में अनंत सिंह ने अपना दबदबा बरकरार रखा है। राजद के टिकट पर यहाँ से उतरीं अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को 54% वोट मिले। उनके खिलाफ एक अन्य ‘बाहुबली’ ललन सिंह की पत्नी सोनम देवी को भाजपा ने टिकट दिया था और सूरजभान सिंह भी उधर से गोलबंदी करने में लगे हुए थे, लेकिन फिर भी अनंत सिंह जीत में कामयाब रहे।

हालाँकि, बिहार की गोलपगंज की सीट पर हुए विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की जीत हुई है। भाजपा की कुसुम देवी काफी कम अंतर से जीतने में सफल रहीं। हरियाणा से भी भाजपा के लिए अच्छी खबर आई है, जहाँ की आदमपुर सीट पर दिग्गज नेता कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। कुलदीप बिश्नोई कॉन्ग्रेस छोड़ कर भाजपा में आए थे। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के लिए अच्छी खबर है। उनकी नई पार्टी ‘शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे)’ के उम्मीदवार ऋतुजा रमेश लटके की जीत हुई।

बात करते हैं ओडिशा की, जहाँ की धामनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ था। यहाँ भाजपा की जीत बड़ी मायने रखती है, क्योंकि राज्य में नवीन पटनायक के नेतृत्व में बीजद की सरकार है। धामनगर में भाजपा के सूर्यवंशी सूरज कम अंतर से ही सही, लेकिन जीत दर्ज करने में सफल रहे। दक्षिण भारत में तेलंगाना के मुनगोडे में भाजपा ने सत्ताधारी TRS को लगभग पानी पिला दिया, लेकिन काफी कम अंतर से वो पीछे चल रहे हैं।

चौथे राउंड के बाद TRS की लीड मात्र 714 वोट थी। उत्तर प्रदेश में जनता ने एक बार फिर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पर तगड़ा भरोसा जताया है, तभी लखीमपुर खीरी में स्थित गोला गोरखनाथ में अमन गिरी ने एकतरफा जीत दर्ज की। उन्हें सवा एक लाख के आसपास वोट मिले। 56% से अधिक मत पाकर वो जीत दर्ज करने में सफल रहे। उनके प्रतिद्वंद्वी सपा के विनय तिवारी को 40% वोटों से संतोष करना पड़ा।