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क्या ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान को शामिल करेगा FATF? पहलगाम में इस्लामी आतंकियों के हमले पर 55 दिन बाद होश आने पर कहा- बिना फंडिंग के नहीं हो सकता है ऐसा अटैक

                                                                                                                                      साभार 
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए नरसंहार पर प्रहार करने भारत ने  Operation Sindoor चलाकर पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर हमला बोल दुनिया को हैरान कर दिया, उसके बावजूद IMF से अनुदान भी मिल जाता है जो नहीं मिलना था। अब 55 दिनों या कहे कि दो महीने बाद FATF नींद से जगा है। क्या FATF को नहीं मालूम भारत ने क्यों पाकिस्तान में पल रहे आतंकियों पर गोले बरसाए? जो इतनी जिम्मेदार संस्था इतने दिनों के बाद होश में आए उस संस्थान से क्या दुनिया कोई उम्मीद कर सकती है? FATF अगर गंभीर होती तो बिना किसी देरी के पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट डाल देती। कोई बात नहीं जाने दो बेगुनाह मासूमों की जानें, क्या फर्क पड़ता है FATF को। FATF ही नहीं World Bank और IMF को भी सिर्फ आतंकवाद को पालने वाले देश ही नहीं बल्कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों को भी ग्रे लिस्ट में डालना चाहिए। क्यों हाथ में कटोरा लेकर घूमने वाले पाकिस्तान के हुक्ममारों से कभी पूछा कि विदेशों में तुम्हारे और फ़ौज अधिकारीयों के खातों में मोटा धन कहाँ से आ रहा है? क्यों नहीं उसे पाकिस्तान हस्तांतरित किया जाता?         

फाइनेंसियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) ने पहलगाम में 22 अप्रैल, 2025 को हुए आतंकी हमले की निंदा की है। FATF ने कहा है कि पहलगाम जैसा हमला बिना किसी फंडिंग के नहीं हो सकता। FATF ने इस संबंध में एक बयान जारी किया है।

FATF ने सोमवार (16 जून, 2025) को यह आधिकारिक बयान जारी किया है। FATF ने कहा, “आतंकवादी हमले दुनिया भर में लोगों की जान लेते हैं, उन्हें अपंग बनाते हैं और भय पैदा करते हैं। FATF ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए क्रूर आतंकवादी हमले पर गहरी चिंता जताई है और इसकी निंदा की है।”

FATF ने कहा, “यह और हाल ही में हुए अन्य हमले, बिना पैसे और आतंकवादी समर्थकों के बीच पैसे के लेन-देन के साधनों के बिना नहीं हो सकते थे।” FATF ने कहा है कि आतंक की फंडिंग रोकने के लिए वह 200 से अधिक जगह नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है।

अवलोकन करें:-

आधिकारिक बयान में FATF ने कहा है कि वह मामले में एक्शन लेते हुए जल्द ही आतंकी फंडिंग पर एक विश्लेषण भी जारी करेगा। FATF ने कहा कि आतंकवादियों को अपना मकसद पूरा करने में केवल एक बार सफल होने की आवश्यकता होती है, जबकि इसे रोकने के लिए हर बार सफल होना होगा।

पहलगाम आतंकी हमले के लगभग 2 महीने बाद यह बयान जारी करने पर FATF पर प्रश्न भी उठ रहे हैं। पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डालने के लिए FATF से माँग भी की थी। पाकिस्तान का दावा है कि FATF ने यह माँग नहीं मानी। हालाँकि, FATF का इस पर क्या रुख है, यह स्पष्ट नहीं हुआ है।

FATF के पहलगाम हमले के बयान के बाद उसके पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन का आधार और मजबूत हो गया है। आतंकी फंडिंग के चलते पाकिस्तान इससे पहले तीन बार FATF की ग्रे लिस्ट में डाला जा चुका है। आखिरी बार उसे 2018 में ग्रे लिस्ट में डाला गया था। इससे वह 2022 में निकला था।

FATF की ग्रे अथवा ब्लैक लिस्ट में जाने वाले देशों को विदेशी व्यापार और कर्ज जुटाना मुश्किल हो जाता है। उन पर कई प्रकार के प्रतिबन्ध भी लग जाते हैं। FATF को वर्ष 1989 में मनी लांड्रिंग पर नजर रखने के लिए बनाया गया था, बाद में इसके अंतर्गत आतंकी फंडिंग देने वाले देशों पर एक्शन का काम भी आ गया। 

हिन्दुओं को जातियों में बांटने वाले नेताओं और उनकी पार्टियों का सामाजिक बहिष्कार हो; मुस्लिम आतंकियों ने धर्म पूछकर हिंदुओं को चुन-चुनकर मारा; ‘बर्बर हमला, निर्ममता से छीन लीं ज़िंदगियाँ’: पहलगाम हमले पर सुप्रीम कोर्ट के जजों-वकीलों ने रखा 2 मिनट का मौन, कश्मीर को बताया भारत का मुकुट मणि

दिल्ली हो, बंगाल हो या कश्मीर हिन्दुओं का कत्लेआम धर्म के आधार पर हो रही है जाति के आधार पर नहीं। कथावाचक पूजनीय देवकी नंदन ठाकुर ने ठीक ही कहा कि पहलगाम में हत्या जाति पूछकर नहीं धर्म पूछ कर की गयी है। समस्त सनातनियों को एकजुट हो सेकुलरिज्म और हिन्दुओं को जातियों में बांटने से दूरी बनाने का समय आ गया है।  
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में 27 लोग मारे गए हैं। ये आतंकी नहीं, मुस्लिम आतंकी हमला था, क्योंकि इन्होंने धर्म पूछ कर गैर-मुस्लिमों की चुन-चुनकर हत्या की। जो मुस्लिम नहीं था, उन्हें ये गोली मारते गए। इन इस्लामी आतंकियों ने पैंट खोलकर खतना चेक किए। जिन लोगों का खतना नहीं हुआ था, उन्हें गोली मार दी। इन मुस्लिम आतंकियों ने पर्यटकों से कलमा पढ़ने को कहा। जो कलमा नहीं सुना पाए, उन्हें गोली मार दी। हिंदुओं के इस कत्लेआम को लेकर लोगों में काफी गुस्सा हैं। ये मुस्लिम तु्ष्टिकरण करने वाले और उन लोगों पर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं जो कहते हैं कि आतंक को कोई धर्म नहीं होता। लोग उन कथित सेकुलर-लिबरल लोगों पर भी अपना भड़ास निकाल रहे हैं जिनका भाईचारे का ज्ञान सिर्फ हिंदुओं के लिए निकलता है और मुस्लिमों के मामले में चु्प्पी साध लेते हैं। इसको लेकर लोग सोशल मीडिया पर किस तरह से अपना गुस्सा निकाल रहे हैं आप भी देखिए…

पहलगाम हमले पर सुप्रीम कोर्ट के जजों-वकीलों ने रखा 2 मिनट का मौन

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर के पहलगाम के बैसरन घाटी में आतंकी गोलीबारी में 28 लोगों की मौतों की निंदा की है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट पिछले कुछ दिनों से वक़्फ़ क़ानून की स्क्रूटनी और राष्ट्रपति के लिए राज्यों के बिल को लेकर डेडलाइन तय करने के कारण जनता में सुप्रीम कोर्ट के प्रति आजकल आक्रोश वाला माहौल है। मुर्शिदाबाद में हिन्दुओं के पलायन को लेकर पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की याचिका भी सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दी थी। अब पहलगाम में 28 पर्यटकों की निर्मम हत्या के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बयान जारी किया है।

हमले के एक दिन बाद बुधवार (23 अप्रैल, 2025) को जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में गहरा दुःख और क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि इस पाशविक व अंधाधुंध गोलीबारी ने पूरे समाज की अंतरात्मा को झकझोरकर रख दिया है। इस नृशंस कृत्य को आतंकवाद करार देते हुए देश की सर्वोच्च न्यायालय ने पारित किए गए प्रस्ताव में कहा कि ये आतंकवाद की क्रूरता और अमानवीयता की भयावहता की याद दिलाता है। सुप्रीम कोर्ट ने उन 28 मृतकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की, जिनकी ज़िंदगियाँ इस बर्बर हमले में असमय ही बड़ी निर्ममता से छीन ली गईं।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने बयान में कहा, “हम शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करते हैं। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्माओं को शांति मिले और घायल लोग शीघ्र स्वस्थ हों। यह देश पीड़ितों और उनके परिजनों के साथ इस असीम वेदना की घड़ी में पूरी मजबूती से खड़ा है। भारत की मुकुटमणि कश्मीर की सुंदरता का आनंद ले रहे पर्यटकों पर किया गया यह हमला मानवता के मूल्यों और जीवन की पवित्रता पर एक गहरा प्रहार है, और सुप्रीम कोर्ट इसकी कड़ी भर्त्सना करता है।"

साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने सभी न्यायधीशों, अधिवक्ताओं, अदालती कर्मचारियों और रजिस्ट्री के सभी सदस्यों ने मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए और पीड़ित परिजनों के प्रति एकजुटता दर्शाते हुए 2 मिनट का मौन भी रखा। बता दें कि लश्कर-ए-तैय्यबा (LeT) के सीनियर कमांडर सैफुल्लाह खालिद को हमले के पीछे का साजिशकर्ता बताया है। NIA ने 3 आतंकियों का स्केच भी जारी किया है। मृतकों में सेना के लेफ्टिनेंट समेत IB के अधिकारी तक शामिल हैं।


मंदिर में घुसे खालिस्तानी, हिंदुओं को दौड़ा-दौड़ा कर लाठी-डंडे से पीटा: कनाडा में हमले के बाद घिरे जस्टिन ट्रूडो, भारतवंशी MP बोले- कट्टरपंथियों ने पार की लक्ष्मण रेखा; कनाडा पुलिस ने खालिस्तानियों को करने दिया हमला: भारतीय उच्चायोग नाराज, गुरुद्वारा परिषद ने भी की निंदा

                                                          खालिस्तानियों ने कनाडा पर किया हमला
बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से होंगे। अगर समय रहते कनाडा की सरकार और विपक्ष ने इन उपद्रवी खालिस्तानियों के विरुद्ध जल्द कोई सख्त उठाकर इन्हें अपनी जमीन से नहीं खदेड़ा संपन्न कनाडा को बर्बाद होने से कोई नहीं बचा सकता। खालिस्तान और आतंकवाद ऐसे अंतरराष्ट्रीय गंभीर मुद्दे हैं, अगर इनको समर्थन देने वालों देशों ने इनके विरुद्ध कार्यवाही नहीं की निश्चितरूप से वो देश अपनी बर्बादी को अपनी आँखों से देख रहे हैं। भारत में खालिस्तान पनपा केवल पंजाब में, पंजाब कितना बर्बाद हुआ ये तो भारत सरकार ने पंजाब को पुनः खुशहाली प्रदान करा दी, लेकिन यहाँ तो खालिस्तान पूरे कनाडा पर हावी हो रहे हैं। पाकिस्तान, फिलिस्तीन, गाज़ा, इराक और ईरान जीवित उदाहरण है। इजराइल की किसी मुस्लिम या मुस्लिम देश से नहीं बल्कि आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई है। लेकिन आतंकवाद समर्थक इसे मुस्लिम विरोधी बताकर इजराइल को बदनाम कर रहे हैं।   

कनाडा के ब्रैम्पटन शहर में हिंदू मंदिर में श्रद्धालुओं पर खालिस्तानी समर्थकों की भीड़ द्वारा हमला किया गया। इस दौरान, मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं पर लाठी-डंडे बरसाए गए और महिलाओं व बच्चों को भी नहीं बख्शा गया। हमला तब हुआ जब सारे श्रद्धालु मंदिर में पूजा-अर्चना कर रहे थे।

घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। वीडियो में खालिस्तानी समर्थक लाठी-डंडे लेकर हिंदू श्रद्धालुओं को मारते और उन्हें दौड़ाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं दूसरी वीडियो में पुलिस इलाके को घेरकर स्थिति नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है।

हमले के बाद पील रीजनल पुलिस चीफ निशान दुरईप्पा ने लोगों से संयम बरतने को कहा है और कहा है कि हिंसा और अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि वे इस मामले की जाँच करेंगे और दोषियों को जवाबदेह ठहराने के लिए आवश्यक कदम उठाएँगे।

इसके अलावा कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि हर कनाडाई नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है और ऐसी हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता। कनाडा के एमपी चंद्र आर्या ने भी कहा कि खालिस्तानियों द्वारा आज सीमा पार कर दी गई। उनके द्वारा हिंदू-कनाडाई लोगों पर हिंदू सभा में हमला दिखाता है कि ये लोग कितने कट्टरपंथी होते जा रहे हैं।

वहीं ब्रैम्पटन के हिंदू सभा मंदिर में खालिस्तानियों के हमले की कड़ी निंदा कनाडा संसद में विपक्ष के नेता पियरे पोलीएवर ने भी की। उन्होंने इस घटना को ‘पूरी तरह अस्वीकार्य’ बताया। उन्होंने कहा कि सभी कनाडाई नागरिकों के लिए शांति से अपने धर्म का पालन करने का अधिकार जरूरी है।

कनाडा पुलिस ने खालिस्तानियों को करने दिया हमला: भारतीय उच्चायोग नाराज, गुरुद्वारा परिषद ने भी की निंदा

कनाडा के ब्रैम्पटन में हिंदुओं पर हुए हमले के बाद हर जगह खालिस्तानियों की निंदा हो रही है। कनाडाई सरकार के नेताओं ने जहाँ इस घटना के विरोध में खालिस्तानियों पर निशाना साधा है तो ओटावा में भारतीय उच्चायोग और ओंटारियो में सिख और गुरुद्वारा परिषद ने भी इस घटना पर प्रेस रिलीज करके अपनी चिंता जाहिर की है।

भारतीय उच्चायोग ने तो इस तरह के हमलों को बेहद निराशाजनक बताया। साथ ही कहा कि हिंदू सभा मंदिर के सहयोग से उन्होंने कांसुलर कैंप आयोजित किया था लेकिन वहाँ व्यवधान डाला गया। उच्चायोग ने कहा कि भारत विरोधी तत्वों ने जो भी किया वह उसे लेकर बहुत ज्यादा चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि आगे से कोई भी कार्यक्रम स्थानीय अधिकारियों की सुरक्षा के आधार पर आयोजित होगा। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के लिए भी पुलिस सुरक्षा माँगी गई थी।

वहीं OSGC ने जहाँ अपनी रिलीज में स्थानीय नागरिकों से इस मामले की गहन जाँच करने की माँग की। उन्होंने कहा कि प्रार्थना के स्थल को पवित्र रहने दिया जाना चाहिए। वहाँ हिंसा और अराजकता नहीं होती नहीं है। जो भी ब्रैम्पटन में हुआ वो बहुत परेशान करने वाला है। हमें एक दूसरे के धर्मों का सम्मान करना चाहिए।

विपक्ष के हाथ कठपुतली बनी 56 इंच वाले मोदी की भाजपा ; नूपुर शर्मा की तरह कंगना रनौत का भाजपा में ही विरोध क्यों ? जनता के सामने सच्चाई लाने से क्यों डर रही भाजपा? वीडियो

                                    'किसान आंदोलन' पर कंगना रनौत के बयान से भाजपा ने झाड़ा पल्ला
नूपुर शर्मा के बाद कंगना रनौत से क्यों किनारा कर रही भाजपा? 
कंगना ने क्या गलत बोला है? क्यों कंगना द्वारा सच्चाई सामने लाने से 56 इंच वाले नरेंद्र मोदी की पार्टी और सरकार किनारा कर रही है? अगर नूपुर शर्मा के मामले में मोदी सरकार ने मुस्लिम कट्टरपंथियों और विपक्ष को प्रेस कांफ्रेंस कर छेड़छाड़ वाली और असली वीडियो बशर्ते डंडा हाथ में लेकर यह आदेश देकर कि प्रेस कांफ्रेंस को लाइव नहीं दिखाने चैनल को 6 महीने के बैन कर दिया जाएगा कहकर दिखाई होती, किसी कन्हैया की जान नहीं जाती। हैदराबाद में टी राजा सिंह के मामले में भी बीजेपी ने मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक दिए थे। राजा सिंह को पार्टी से निकाल दिया, क्यों? जिसका जब किया सनातन का अपमान करता रहता है, मोदी सरकार चुप रहती है,क्यों? कितनों के विरुद्ध मोदी सरकार ने सनातन का अपमान करने पर कार्यवाही की? आखिर कब भारत विरोधियों और सनातन विरोधियों के मंसूबों पर कुठाराघात किया जाएगा? जब देश ही सुरक्षित नहीं रहेगा, कौन करवाएगा चुनाव?          

भाजपा ने अपने सांसद कंगना रनौत के बयान से पल्ला झाड़ लिया है। हिमाचल प्रदेश के मंडी से सांसद कंगना रनौत ने ‘किसान आंदोलन’ के संबंध में कहा था कि उस दौरान बलात्कार और हत्या की घटनाएँ हुई थीं। अब भाजपा ने आधिकारिक बयान जारी कर के खुद को इससे अलग कर लिया है। भाजपा ने कहा है कि सांसद कंगना रनौत द्वारा ‘किसान परिप्रेक्ष्य’ में दिया गया बयान पार्टी का मत नहीं है। साथ ही पार्टी ने कंगना रनौत के बयान से असहमति भी व्यक्त की है।

भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि पार्टी की ओर से नीतिगत विषयों पर बोलने के लिए न तो कंगना रनौत को अनुमति है और न ही वो बयान देने के लिए अधिकृत हैं। साथ ही BJP ने कंगना रनौत को ये भी निर्देश दिया है कि भविष्य में वो इस प्रकार का बयान न दें। पार्टी ने दोहराया कि भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ तथा सामाजिक समरसता के सिद्धांतों पर चलने के लिए कृतसंकल्पत है। कॉन्ग्रेस लगातार कंगना रनौत के बयान का विरोध कर रही थी।

कंगना रनौत ने इस दौरान ये भी कहा था कि फ़िल्मी लोगों को पता होना चाहिए कि देश नहीं रहेगा तो वो भी नहीं बचेंगे। अब कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा है कि भाजपा को कंगना रनौत को पार्टी से निकालना चाहिए। बता दें कि इन्हीं सुप्रिया श्रीनेत ने कंगना रनौत के लिए लोकसभा चुनाव के समय अश्लील शब्द का प्रयोग किया था। इसके बाद उन्हें इंस्टाग्राम पोस्ट डिलीट करना पड़ा था। अब वही कॉन्ग्रेस पार्टी कंगना रनौत के नाम पर भाजपा को घेर रही है।

बॉलीवुड अभिनेत्री और हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा सीट से भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा कि अगर देश का शीर्ष नेतृत्व को बेहद मजबूत बताया है। उन्होंने कहा कि अगर नेतृत्व मजबूत नहीं होता तो किसान आंदोलन के दौरान पंजाब को भी बांग्लादेश बना दिया जाता। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के नाम पर उपद्रवी हिंसा फैला रहे थे। प्रदर्शन स्थल पर रेप और हत्याएँ हो रही थीं।

 कंगना ने एक मीडिया हाउस दो दिए इंटरव्यू में कहा, “आज हमारा शीर्ष नेतृत्व कमजोर होता तो भारत में बांग्लादेश जैसी स्थिति हो सकती थी। यहाँ किसान आंदोलन के दौरान क्या हुआ, उसे सबने देखा। प्रोटेस्ट के नाम पर वायलेंस फैलाया गया। वहाँ रेप हो रहे थे। मारकर लाशों को लटकाया जा रहा था।” उन्होंने कहा कि उपद्रवियों ने बहुत लंबी योजना बना रखी थी।

अभिनेत्री ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के सरकार के फैसले को सही ठहराया और कहा, “जब उस बिल को वापस लिया गया तो ये उपद्रवी चौंक गए, क्योंकि उनकी प्लानिंग तो बहुत लंबी थी। उन पर समय रहते कंट्रोल पा लिया गया, वरना वे कुछ भी कर सकते थे।” उन्होंने पंजाब का उदाहरण दिया, जहाँ ड्रग्स रैकेट और धर्मांतरण रैकेट सक्रिय हैं।

दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा, “पंजाब में क्या हो रहा है, यह सारी दुनिया देख रही है। ‘उड़ता पंजाब’ फिल्म में वहाँ की रियलिटी भी दिखाई गई है। इस समय पंजाब में ड्रग्स माफिया, धर्म परिवर्तन गैंग और अलगाववादी खालिस्तान समर्थक खूब फल-फूल रहे हैं। वहाँ पर कुछ लोग हर वक्त कानून अपने हाथ में ले रहे हैं।”

महिला सुरक्षा के सवाल पर उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा महिलाओं के सपोर्ट में आवाज बुलंद की है। आज से 10 साल पहले आमिर खान जी के शो सत्यमेव जयते में मैंने फिल्मों में आइटम नंबर्स का खुला विरोध किया था। आइटम सॉन्ग में महिला को ऑब्जेक्टिफाई किया जाता है। एक महिला का शरीर सिर्फ मनोरंजन के लिए है? इससे समाज में गलत मैसेज जाता है।”

उन्होंने कहा कि संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘रामलीला’ में आइटम सॉन्ग करने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इसी तरह, फराह खान ने भी अपनी फिल्म के लिए उन्हें कॉल किया था, लेकिन कंगना ने उन्हें भी मना कर दिया। उन्होंने कहा, “मेरा वजूद मुझे यह सब करने की इजाजत नहीं देता, क्योंकि इसे मैं महिला के अपमान के तौर पर देखती हूँ।”

फिल्म इंडस्ट्री के लोगों का उनसे खफा रहने के सवाल पर कंगना ने कहा, “लोगों को लगता है कि कंगना कुछ ज्यादा ही सच बोल देती है। मैंने इंडस्ट्री में फैले सेक्सिज्म, नेपोटिज्म और आइटम नंबर्स के खिलाफ हमेशा से ही बोला है। मीटू मूवमेंट के वक्त भी मैंने काफी लोगों के पोल खोले थे। सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड के वक्त भी मैंने काफी खुलासे किए, जिसकी वजह से काफी लोगों को मिर्ची लगी थी।”

किसान आंदोलन और पंजाब को लेकर कंगना रनौत द्वारा दिए गए बयान पर पंजाब के कॉन्ग्रेस नेता राजकुमार वेरका ने निशाना साधा है। वेरका ने कहा, “कंगना लगातार किसानों पर ऐसे बयान दे रही हैं। उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाए और उन पर NSA लगाया जाए।” राजकुमार वेरका 2 बार कांग्रेस विधायक रह चुके हैं। 2017 से 2022 तक पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। 


स्वीडन : ‘मस्जिदों को कर दो ध्वस्त, इस्लाम से लड़ने का यही उपाय’: घुसपैठियों पर भी बरसे जिम्मी अकेस्सन, सत्ताधारी नेता

                                   एक टूटी मस्जिद और जिम्मी अक्केसन (चित्र साभार: India TV & SVT)
स्वीडन के दक्षिणपंथी नेता जिम्मी अकेस्सन ने कहा है कि पुलिस को उन मस्जिदों में खोज अभियान चलाना चाहिए और उन मस्जिदों को ध्वस्त कर देना चाहिए जहाँ लोकतंत्र विरोधी बातें की जा रही है। उनके इस बयान का देश के प्रधानमंत्री उल्फ़ क्रिस्टरसन ने विरोध किया है।

जिम्मी अकेस्सन का कहना है कि मस्जिदों को तोड़ना और उनमें खोज अभियान के जरिए ही बढ़ते इस्लामीकरण से लड़ा जा सकता है। जिम्मी अकेस्सन का कहना है कि नई मस्जिदों को बनाने की अनुमति बिल्कुल भी नहीं दी जानी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि देश में बाहर से आने वाले अवैध घुसपैठियों को मस्जिदें बनाने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए।

अकेस्सन ने कहा, “हमारे लिए यह आवश्यक है कि हम न मस्जिदों को तोड़ना और सीज करना चालू करें जहाँ से सर्वाधिक लोकतंत्र-विरोधी, स्वीडन-विरोधी, सेमेटिक विरोधी, होमोफोबिक-विरोधी और स्वीडिश समाज विरोधी प्रोपेगंडा निकलता है।”

जिम्मी अकेस्सन स्वीडन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी स्वीडन डेमोक्रेट के नेता हैं। वह सरकार के साथ गठबंधन में भी शामिल हैं। उनकी पार्टी के पास स्वीडन की संसद रिक्स्दाग में 72 सीटें हैं। उनके बयान का स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ़ क्रिस्टरसन ने विरोध किया है।

प्रधानमंत्री उल्फ़ क्रिस्टरसन ने कहा है कि अकेस्सन का ‘असम्माननीय’ है। उल्फ़ क्रिस्टरसन ने कहा है कि स्वीडन के अंदर हम इबादतगाहों को गिराते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जो अकेस्सन ने कहा है वह स्वीडिश मूल्यों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। उन्होंने कहा है कि हमें कट्टरपंथ से लड़ना चाहिए लेकिन लोकतांत्रिक फ्रेमवर्क में रहकर लड़ना चाहिए।

प्रधानमंत्री अकेस्सन ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि ये हमारे NATO में शामिल होने के मौके भी कम करता है। गौरतलब है कि स्वीडन NATO में शामिल होना चाहता है लेकिन तुर्की उसे समर्थन नहीं दे रहा है। तुर्की का कहना है कि स्वीडन में इस्लामोफोबिया बढ़ रहा है इसलिए हम उसका समर्थन नहीं करेंगे। स्वीडन में इससे पहले कुरान जलाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

स्वीडन के बाद नीदरलैंड में भी जली कुरान : पन्ने फाड़े, पैरों से रौंदा, फिर लगा दी आग…

                                    नीदरलैंड में कुरान जलाए जाने से भड़के इस्लामी देश (साभार: @EWagensveld)
नीदरलैंड में कुरान जलाने के मामले पर मुस्लिम मुल्कों ने नाराजगी जताई है। सऊदी अरब और यूएई के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर इसकी निंदा की है। कतर, कुवैत, जॉर्डन, मिस्र और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने भी डच सरकार से अपना विरोध दर्ज कराया है। इससे पहले स्वीडन में भी कुरान जलाई गई थी।

नीदरलैंड में यह घटना संसद भवन के सामने अंजाम दी गई। इस्लाम विरोधी समूह पेगिडा (Pegida) के नेता एडविन वैगन्सफेल्ड ने डेन हैग में पहले कुरान के पन्नों को फाड़ा। फिर पैरों से उसे रौंद कर कुरान में आग लगा दी थी। 22 जनवरी 2023 को उन्होंने ट्विटर पर इसका वीडियो भी साझा किया था।

एडविन वैगन्सफेल्ड ने जब इस घटना को अंजाम दिया उस समय कुछ पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद दिख रहे हैं। उनकी अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। इसको लेकर बड़े मुस्लिम देशों के साथ इस्लामिक देशों के संगठन OIC ने भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कुरान को फाड़ने और उसे जलाने को इस्लामोफोबिया करार दिया है।

वैगन्सफेल्ड का वीडियो वायरल होने के बाद पाकिस्तान के लाहौर में सैकड़ों मुस्लिमों ने मंगलवार (24 जनवरी 2023) को विरोध रैली निकाली। पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग नाम के एक राजनीतिक दल के समर्थकों ने डच नेता के खिलाफ नारेबाजी की। इसी तरह स्वीडन में 21 जनवरी को कुरान जलाने की घटना का विरोध करते हुए कराची में मुस्लिमों ने एक रैली निकाली थी। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने स्वीडन में कुरान जलाने की घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा था कि इस तरह के कृत्य दुनिया भर के मुस्लिमों की भावनाओं को आहत करते हैं।

21 जनवरी 2023 को स्टॉहोम में तुर्की दूतावास के सामने स्वीडन की धुर दक्षिणपंथी पार्टी ‘हार्ड लाइन’ के नेता रासमस पलुदान (Hard Line Leader Rasmus Paludan) ने कुरान को सार्वजनिक तौर पर जला दिया था। इस दौरान पलुदान ने इस्लाम और आव्रजन को लेकर एक घंटे तक भाषण भी दिया। लगभग 100 लोगों की भीड़ को संबोधित करते हुए पलुदान ने कहा था, “अगर आपको (मुस्लिमों को) लगता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं होनी चाहिए तो आप रहने के लिए कोई और जगह देखिए।”

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स्वीडन : रहने के लिए कोई और जगह देखें मुस्लिम… तुर्की दूतावास के सामने खुलेआम जलाया गया कुरान

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स्वीडन : रहने के लिए कोई और जगह देखें मुस्लिम… तुर्की दूतावास के सामने खुलेआम जलाया गया कुरान

स्वीडन में कुरान जलाए जाने के विरोध में यमन, इराक, जॉर्डन और तुर्की सहित कई मिडिल ईस्ट देशों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की खबर सामने आई थी। इसको लेकर तुर्की और यमन में स्वीडिश दूतावास के बाहर प्रदर्शनकारियों ने स्वीडन के राष्ट्रीय ध्वज को जलाया और कुरान जलाने की घटना की कड़ी निंदा की थी।

स्वीडन : रहने के लिए कोई और जगह देखें मुस्लिम… तुर्की दूतावास के सामने खुलेआम जलाया गया कुरान

                                    स्वीडन के दक्षिणपंथी नेता पलुदान (साभार: EPA/Guardian)
एक दूसरे के धूर विरोधी तुर्की और स्वीडन के बीच इस बार कुरान को लेकर विवाद गहरा गया है। NATO में स्वीडन को शामिल करने के बीच तुर्की बाधा बना हुआ है। इस बीच स्वीडन में कुरान जलाने के बाद तुर्की और स्वीडन के रिश्ते में और कड़वाहट आ गई है। तुर्की ने स्वीडन के रक्षा मंत्री की यात्रा को रद्द कर दिया है।

स्वीडन के धुर दक्षिणपंथी पार्टी ‘हार्ड लाइन’ के नेता रासमस पलुदान (Hard Line Leader Rasmus Paludan) ने  21 जनवरी 2023 तो स्टॉहोम में तुर्की के दूतावास के सामने मुस्लिमों की दीनी किताब कुरान को सार्वजनिक तौर पर जलाया। इतना ही नहीं, इस दौरान पलुदान ने इस्लाम और आव्रजन को लेकर एक घंटे तक भाषण भी दिया।

लगभग 100 लोगों की भीड़ को संबोधित करते हुए पलुदान ने कहा, “अगर आपको (मुस्लिमों को) लगता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं होनी चाहिए तो आप रहने के लिए कोई और जगह देखिए।” उन्होंने इस्लाम से स्थानीय लोगों को होने वाली दिक्कत के बारे में बात की।

दरअसल, तुर्की के दूतावास के सामने इस प्रदर्शन के लिए पलुदान ने बकायदा पुलिस से परमीशन ली थी। पुलिस ने ना सिर्फ अनुमति दी, बल्कि प्रदर्शन स्थल पर पलुदान और अन्य प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा भी दी थी। प्रदर्शन के दौरान पलुदान ने लाइटर से कुरान को जलाया।

प्रदर्शन से एक दिन पहले पुलिस द्वारा अनुमति देने के कारण तुर्की बिफर गया था। उसने स्वीडन के राजदूत को समन भेज कर तलब कर लिया था। तुर्की ने राजदूत से कहा कि पलुदान को प्रदर्शन की अनुमति क्यों दी गई। इस महीने में तुर्की ने दो बार तलब किया। इसके पहले 12 जनवरी को स्वीडन में तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयब आर्दोआन का पुतला जलाने पर स्वीडन के राजदूत को समन भेजा गया था।

बता दें कि पलुदान पिछले साल मई में कुरान जलाओ यात्रा शुरू की थी। इस दौरान उन्होंने स्वीडिश लोगों से इसे जलाने का आग्रह किया था। इसके बाद पूरे स्वीडन में दंगे फैल गए थे। इस दंगे में कई लोगों की मौत हो गई थी। इतना ही नहीं तुर्की और पाकिस्तान स्वीडन से नाराज हो गए थे।

21 जनवरी को पलुदान द्वारा तुर्की के दूतावास के सामने कुरान जलाने के बाद तुर्की ने स्वीडन के रक्षा मंत्री की प्रस्तावित तुर्की यात्रा को रद्द कर दिया। स्वीडन के रक्षामंत्री पाल जॉनसन 27 जनवरी 2023 को तुर्की आने वाले थे।

इस यात्रा के दौरान जॉनसन स्वीडन के NATO में प्रवेश पर तुर्की द्वारा रोक लगाने को लेकर चर्चा करने वाले थे। दरअसल, स्वीडन अमेरिका और पश्चिमी देशों के सैन्य संगठन NATO में शामिल होना चाहता है, लेकिन तुर्की बार-बार इसमें बाधा डाल देता है। NATO का नियम है कि इसमें कोई भी नया सदस्य तभी शामिल किया जा सकता है, जब उसमें सभी सदस्य देशों की सहमति शामिल हो।

कुरान जलाने की हालिया घटना के बाद तुर्की के रक्षामंत्री हुलुसी अकार ने कहा कि इस बैठक को इसलिए रद्द कर दिया गया, क्योंकि इसने अपना महत्व और अर्थ खो दिया था। तुर्की ने इसे हेट क्राइम और इस्लामोफोबिया बताया। तुर्की के अलावा कुरान जलाने की घटना की पाकिस्तान, सऊदी अरब, जॉर्डन और कुवैत ने भी निंदा की।

वहीं, स्वीडन की सरकार ने इस प्रदर्शन से खुद को अलग रखा है। स्वीडिश सरकार का कहना है कि देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का विशेष महत्व है। स्वीडन के रक्षामंत्री जॉनसन ने उम्मीद जताई है कि दोनों देशों के बीच फिर से एक बार बातचीत होगी दोनों देश सामरिक मसले पर चर्चा कर सकेंगे।

तुर्की ना सिर्फ स्वीडन को NATO सदस्य बनने से रोक रहा है, बल्कि फिनलैंड को भी वह संगठन की सदस्यता नहीं लेने दे रहा है। 30 सदस्यों वाले NATO के 28 सदस्यों का इन्हें समर्थन मिल चुका है। सिर्फ हंगारी और तुर्की ही दोनों देशों को समर्थन नहीं दे रहे हैं। हालाँकि, हंगरी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह दोनों को समर्थन देगा। हालाँकि, तुर्की ऐसा कोई वादा नहीं कर रहा है।

दरअसल, तुर्की स्वीडन पर कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) से संबंध होने का आरोप लगाता है। इसके साथ ही वह स्वीडन से इस संगठन के नेता मौलवी फतुल्लाह गुलेन के प्रत्यर्पण की माँग कर रहा है। कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी तुर्की से अलग कुर्दों के लिए मुल्क की माँग करती है।

अलग देश के लिए कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी के सशस्त्र आंदोलन को तुर्की आतंकवादी गतिविधि कहता है। तुर्की ने इस संगठन को आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया है। तुर्की के अलावा, यूरोपीय संघ और अमेरिका ने भी उसे आतंकी संगठन घोषित कर रखा है।

तुर्की का कहना है कि PKK के खिलाफ स्वीडन संतोषजनक कार्रवाई नहीं कर रहा है। वहीं, स्वीडन में कुर्द और PKK के समर्थन में लोग सड़कों पर निकल आए, जबकि तुर्की में लोग स्वीडन में कुरान जलाने की घटना के बाद सड़कों पर हैं।

जब सलमान रुश्दी को गलत बताना था तो ‘नास्तिक’ थे जावेद अख्तर, हमले के बाद मजहबी कट्टरपंथ का जिक्र भी भूले

 

                                      जावेद अख्तर ने रुश्दी पर हमले की बचते-बचाते निंदा की
बॉलीवुड वाले पब्लिसिटी के इतने भूखे होते हैं, इस्लाम के खिलाफ कुछ होते ही ऐसे निकल आते हैं, जैसे गोश्त उछालने पर चील कौआ। लेकिन जब हिन्दू देवी-देवताओं के विरुद्ध कुछ होता है, बिल में घुस जाते हैं। न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान लेखक सलमान रुश्दी पर चाकुओं से हुए हमले के बाद संगीतकार जावेद अख्तर ने बहुत बचते-बचाते इस हमले की निंदा की है। उन्होंने अपने ट्वीट में न तो उस इस्लामी कट्टरपंथी का नाम लिखा है जिसने भरे मंच पर रुश्दी की गर्दन में चाकू घोंपा और न ही उन धमकियों या फतवों का जिक्र किया है जो रुश्दी के खिलाफ पिछले 30 साल से जारी हो रहे हैं।

जावेद ने बस लिखा, “मैं सलमान रुश्दी पर हुए हमले की निंदा करता हूँ जो कि किसी चरमपंथी द्वारा किया गया। उम्मीद है कि न्यूयॉर्क पुलिस हमलावर के खिलाफ कड़ा एक्शन लेगी।”

2012 में रुश्दी की किताब की निंदा

जावेद का यह रवैया कोई हैरानी वाला नहीं है। साल 2012 में एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू के दौरान वह सलमान की किताब ‘द सैटैनिक वर्सेज’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लेखक को गलत कह चुके हैं।

उन्होंने कहा था, “रुश्दी ने जो किया वह अच्छा नहीं है। मैं नास्तिक हूँ लेकिन जीवन में कुछ मर्यादा और बुनियादी शऊर है। वह इस्लाम के बारे में अपमानजनक बात नहीं कह सकते। उन्होंने एक नोवेल लिखी। कल्पना आधारित। उसमें उन्होंने ऐसे ऐतिहासिक लोगों को लिया जिन्हें अरबों लोगों द्वारा सम्मान दिया जाता है। आपने उनके बारे में अपमानजनक बातें कहीं। आखिर इससे आपको क्या मिलेगा? आप ऐसा क्यों कर रहे हैं। इससे आप उन्हें अधिक मजहबी और कट्टरपंथी बना देंगे।”

जावेद ने कहा, “मैं किसी मजहब को नहीं मानता है फिर भी मुझे लगता है कि वो किताब बेहद अपमानजनक है। आप ऐसा नहीं कर सकते हैं।” ‘राइट टू ऑफेंड’ की बात आने पर वह बोले, “क्या मैं अपने पड़ोसियों के बारे में कुछ भी कह सकता हूँ? क्या मैं कह सकता हूँ वो दलाल है, उसका घर वेश्यालय?”

इस्लाम के खिलाफ बोलने वालों पर गुस्सा जाहिर करने के बाद अपनी सेकुलर व नास्तिक छवि को बनाए रखने के लिए अख्तर ने ये भी कहा था कि उन्हें उनके मजहब की आलोचना से दिक्कत नहीं है, लेकिन वो विद्वत्तापूर्ण किया जाना चाहिए।

सलमान रुश्दी पर हुए हमले के बाद जावेद अख्तर के आए अब के ट्वीट और उनकी पुरानी बयानबाजी जोड़कर देखें तो पता चलता है कि कैसे खुद को नास्तिक और वामपंथी कहने वाले लोग ऐसी घटनाओं के समय आरोपित का नाम छिपाने में आगे रहते हैं और सिर्फ मगरमच्छ के आँसू बहाकर ऐसा दिखाते हैं कि उन्हें हमले का दुख है। जबकि, हकीकत ये होती है कि वो उन घटनाओं को रोकने का कोई प्रयास नहीं करते, बल्कि उसे और बढ़ावा देते हैं।

कन्हैया लाल की हत्या के बाद ओवैसी ने फिर की नूपुर शर्मा की गिरफ़्तारी की माँग, मजहब पर हुआ सवाल तो भड़के

राजस्थान के उदयपुर में हिन्दू टेलर कन्हैया लाल की बेरहमी से इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा हत्या कर वीडियो बनाने को आतंक करार दिया गया है। हालाँकि, इसके साथ ही असदुद्दीन ओवैसी ने कन्हैया लाल (Kanhaiya lal murder ) के हत्यारों को नौजवान करार दिया है। ओवैसी ने हिन्दुओं को बाँटने की कोशिश करते हुए कहा कि वो आरएसएस की विचारधारा का विरोध करते हैं, हिन्दू विचारधारा का नहीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, एमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी मध्य प्रदेश के नगरीय चुनाव में अपनी पार्टी का प्रचार करने के लिए भोपाल आए हुए थे। श्यामला हिल्स स्थित एक होटल में ओवैसी ने मुस्लिमों को संबोधित करते हुए कहा कि डरना है तो केवल अल्लाह से डरना। याद रखो केवल रब्बोलालमीन से ही डरना। कन्हैया लाल की हत्या पर ओवैसी ने कहा, “उदयपुर में दो नौजवानों के एक हिन्दू टेलर का कत्ल कर दिया। मैं उसका खुला खंडन करता हूँ। कानून में किसी को भी कत्ल करने की इजाजत नहीं है।”

लेकिन जब प्रदर्शन और धरनों में 'सर तन से जुदा' के नारे लग रहे थे, तब किसी ने इनकी पहचान कर गिरफ़्तारी की मांग नहीं की, जो इस बात को साबित करता है कि सेकुलरिज्म और संविधान का सम्मान करने की आड़ में समर्थन था, चिंता मत करो पकडे गए तो victim card खेलेंगे। तुम्हे गरीब, बेरोजगार, मजलूम और मासूम कहकर बचाव करेंगे। कट्टरपंथी भूल रहे हैं कि बर्दाश्त की भी एक सीमा होती है, अभी सिर्फ नूपुर के प्रक्रिया करने से इतना उबाल आया है, सोंचिये। बैरिस्टर हो अगर पुलिस नूपुर को गिरफ्तार नहीं कर रही, सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह क्यों नहीं देते? जहां इस्लामिक किताबें खुलने पर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। आखिर कब तक मासूमियत का ढोंग रच रहोगे? कब तक शिवलिंग और हिन्दू देवी-देवताओं का उपहास उड़ाया जाता रहेगा?  

इसके साथ ही ओवैसी ने तर्क दिया कि अगर राजस्थान पुलिस चौकस होती तो ये घटना नहीं होती। उदयपुर की घटना को आतंकी घटना करार देने के सवाल पर ओवैसी ने कहा कि पहलू खान और अखलाक की हत्या भी आतंकी घटना है। उन्होंने कहा कि रूल ऑफ लॉ सभी के लिए समान होना चाहिए।

हालाँकि, आतंकवाद के धर्म के नाम पर भड़के ओवैसी ने सवाल को गोलमोल घुमाते हुए कहा कि आखिर महात्मा गाँधी को मारने वाले का क्या धर्म था। बैरिस्टर हो, कम से कम महात्मा गाँधी को मारने वाले नाथूराम गोडसे के कोर्ट में दर्ज 150 बयान ही पढ़ लेते, तो उसका धर्म नहीं देखते। दरअसल, गोडसे ने दूसरा पाकिस्तान बनने के मंसूबों को मिट्टी में मिला दिया था।  

नूपुर शर्मा पर उगला जहर

ओवैसी ने भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी की माँग करते हुए केंद्र सरकार पर शर्मा के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया। वहीं मध्य प्रदेश के खरगौन में पत्थरबाजों पर सरकार की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित करार दिया।
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नूपुर शर्मा के पैगंबर मुहम्मद को लेकर दिए गए कथित बयान के समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट को आगे बढ़ाने के कारण 28 जून को इस्लामिक कट्टरपंथी रियाज अंसारी और गौस मोहम्मद ने उनकी हत्या कर दी थी। घटना के बाद से पूरे राजस्थान में उबाल है। वहीं केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मामले की जाँच अब एनआईए को सौंप दी है।