Showing posts with label #Brampton. Show all posts
Showing posts with label #Brampton. Show all posts

कनाडा के मंदिर में पुजारी की ससम्मान वापसी, खालिस्तानी हमले के बाद हिंदू सभा ने हटाया था: ‘बटेंगे तो कटेंगे’ वाला वीडियो हुआ था वायरल


कनाडा के ब्रैम्पटन के हिन्दू सभा मंदिर के पुजारी राजिंदर प्रसाद की बर्खास्तगी को वापस ले लिया गया है। उन्हें मंदिर की प्रबन्धक हिन्दू सभा ने ससम्मान वापस पुजारी के तौर पर नियुक्त किया है। मंदिर सभा ने कहा है कि उसने पहले राजिंदर प्रसाद को हटाया था लेकिन अधिक जानकारी सामने आने के बाद वह उन्हें वापस नियुक्त कर रही है।

पंडित राजिंदर प्रसाद को 6 नवम्बर, 2024 को हिन्दू सभा ने यह कहते हुए हटाया था कि उन्होंने बिना अनुमति के एक प्रदर्शन में भाग लिया। इससे पहले उनका खालिस्तानियों के विरुद्ध एकजुट होने की बात करने वाला एक वीडियो भी वायरल हुआ था। उनके हटाए जाने के बाद बाद हिन्दुओं ने आपत्ति जताई थी।

अवलोकन करें:-

कनाडा : पाखंडी हिंदू सभा ने उस मंदिर के पुजारी राजेंद्र प्रसाद को क्यों हटाया जिसे खालिस्तानिय

पुजारी राजिंदर प्रसाद के वापस नियुक्त किए जाने पर कनाडा में हिन्दुओं के लिए काम करने वाले संगठन HCF ने प्रसन्नता जताई है।

कनाडा : पाखंडी हिंदू सभा ने उस मंदिर के पुजारी राजेंद्र प्रसाद को क्यों हटाया जिसे खालिस्तानियों ने बनाया था निशाना?: हमले के बाद वीडियो हुआ था वायरल, कहा था- बँटोगे तो कटोगे; ऐसे ही पाखंडियों के कारण हिन्दू बंटता भी है और कटता भी है

कनाडा के ब्रैम्पटन में हिंदू सभा मंदिर ने खालिस्तानी हमले के कुछ दिनों बाद पुजारी राजेन्द्र प्रसाद को हटा दिया है। हिन्दू सभा ने कहा है कि राजेन्द्र प्रसाद की एक विरोध में संलिप्तता थी और इस विरोध प्रदर्शन की इजाजत नहीं ली गई थी। हिंदू सभा मंदिर के अध्यक्ष मधुसूदन लामा ने एक पत्र लिखा कर कहा कि राजेन्द्र प्रसाद के खिलाफ तत्काल प्रभाव से यह कार्रवाई की जा रही है।
पाखंडी मंदिर प्रबंधकों यह समय की मांग थी, जिसे साहसिक पुजारी ने अंजाम दिया था। पाखंडियों इसी 'बँटोगे तो कटोगे' की गूंज से विश्व हिल गया। और तुमने राजेंद्र का साथ देने की बजाए उसी पर कार्यवाही अपनी नपुंसकता का उदाहरण प्रस्तुत कर दिया है। तुम्हारे जैसे ढोंगी हिन्दुओं को किसी मन्दिर प्रबंधन से कोसों दूर रखना ही नहीं चाहिए बल्कि तुम्हारे जैसे ढोंगी हिन्दुओं की हर गतिविधि पर हिन्दुओं को नज़र रख, सबको सचेत करना चाहिए। उन सभी पदाधिकारियों को प्रबंधन से बाहर करना चाहिए जो इस निर्णय में शामिल थे। पुजारी राजेंद्र ने कोई गलत काम नहीं किया था, पुजारी ने अपनी पंडताई धर्म का पालन किया। यही हमारे शास्त्र और उपदेश निर्देश देते हैं। तुम्हारे जैसों के कारण हिन्दू एकता में बाधा आती है और दोष सरकार को दिया जाता है। असली दोषी तुम जैसे पाखंडी हिन्दू हैं। मंदिर प्रबंधन कालनेमि है। विभीषण नहीं क्योकि विभीषण ने धर्म के लिए अपने भाई को छोड़ दिया था। लेकिन तुम्हारे जैसे लोग समाज में नाम कमाने मंदिरों के ट्रस्टी बन जाते हैं, चन्दों पर ऐश करते हैं। तुम्हारे जैसे जयचन्दों के कारण मुग़ल भारत में आये थे। हिन्दू सम्राट तो उनको मार रहे थे लेकिन तुम्हारे जैसे जयचन्द अंदरखाने मुगलों की मदद कर रहे थे।   

सोशल मीडिया पर कुछ हैंडल ने पोस्ट किया है कि हिंदू सभा मंदिर ने यह कार्रवाई एक वायरल वीडियो के सामने आने के बाद की है। इस वीडियो कथित तौर पर राजेन्द्र प्रसाद, मंदिर पर हमले का विरोध करने के लिए एकत्र हुए लोगों के एक समूह खालिस्तानियों के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान कर रहे हैं।

3 नवंबर, 2024 को खालिस्तानियों ने गोर रोड स्थित ब्रैम्पटन में हिंदू सभा मंदिर पर हमला किया था। यहाँ पर उस दौरान एक काउंसिलर कैम्प चल रहा था। ,इस घटना ने कनाडा में हिंदू भारतीयों के खिलाफ खालिस्तानी हिंसा को उजागर कर दिया था। इस हमले में पील पुलिस का एक अधिकारी हरिंदर सिंह सोढ़ी भी शामिल था।

कनाडा की सड़कों पर सनातनियों का सैलाब, लग रहे ‘जय श्रीराम’ के नारे: हिंदू मंदिर पर हमले को लेकर PM मोदी ने दिया सख्त संदेश, हिंसा में अब तक 3 गिरफ्तारी; पीड़ित हिन्दुओं को पीटते पुलिस वालों पर क्यों नहीं कार्यवाही की जा रही?

बांग्लादेश और कनाडा में उमड़े हिन्दू सैलाब को देख लगता है शायद 1555 में फ्रेंच महान ज्योतिष नॉस्त्रेदमस की हिन्दुत्व और अखंड भारत को लेकर मुखरित की गयी भविष्यवाणीं का शंखनाद हो चुका है, और सनातन विरोधियों के पतन का समय भी निकट आ रहा है। 

सनातन विरोधी भूल रहे हैं अरबों-खरबों वर्ष प्राचीन सनातन धर्म को कोई नहीं मिटा पाया। इन की क्या हैसियत? विपरीत इसके दुश्मनों का नाम लेवा भी नहीं बचा। गाज़ी जिन्हें मुग़ल बादशाह बताया जाता है, भारत में उनका नाम इसलिए जीवित है क्योकि यहाँ लालची लोगों के सहारे इन गाज़ियों का नाम लेने वालों की दुकानें चल रही है। वह भी बहुत जल्दी बंद होने के कगार की ओर बढ़नी शुरू हो चुकी हैं। भारत में मुस्लिम भी इस्लाम छोड़ एक्स मुस्लिम बन रहे हैं और जिस दिन इनकी संख्या 1+ लाख हो गयी, हिन्दू राष्ट्र उतनी सुगम होनी शुरू हो जाएगी। इनका वर्चस्व सोशल मीडिया पर देखने को मिल रहा है। जिसका श्रेय जाता है मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा नूपुर शर्मा विवाद को। इनके सवालों का जवाब वो मौलाना, मौलवी या इमाम देने से भागते देखा है जिन्हे आम मुसलमान बहुत पहुंचा हुआ बताते हैं।    

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मुखरित "बंटोगे तो कटोगे" सिर्फ एक नारा ही नहीं विश्व हिन्दुओं को जागृत करने का शंखनाद सिद्ध हो रहा है।     
कनाडा के ब्रैम्पटन में हिंदू मंदिर पर हमले के बाद जगह-जगह इस घटना के खिलाफ रोष जाहिर किया जा रहा है। पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है मगर इससे हिंदुओं की नाराजगी शांत नहीं है। जबकि खालिस्तानियों की बजाए पीड़ित हिन्दुओं को पुलिस प्रताड़ित करती वीडियो में साफ नज़र आ रही है, उन पर खालिस्तान समर्पित सरकार क्यों नहीं कार्यवाही करती? उन्होंने कनाडा में मार्च निकाल अपनी सुरक्षा के लिए चिंता जाहिर की। इस दौरान जोर-जोर से नारेबाजी हुई। वहीं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “मैं कनाडा में हिंदू मंदिर पर हुए जानबूझकर किए गए हमले की कड़ी निंदा करता हूँ। हमारे राजनयिकों को डराने की कायराना कोशिशें भी उतनी ही भयावह हैं। हिंसा के ऐसे कृत्य भारत के संकल्प को कभी कमजोर नहीं कर पाएँगे। हम उम्मीद करते हैं कि कनाडा सरकार न्याय सुनिश्चित करेगी और कानून के शासन को कायम रखेगी।”

हिंदू मंदिर में श्रद्धालुओं पर खालिस्तानी हमले के बाद कनाडा में हिंदू समुदाय के हजारों लोग भी सड़कों पर उतरे दिखे। इस दौरान उन्होंने मार्च निकालते हुए खुलेआम खालिस्तान मुर्दाबाद और जय श्रीराम के नारे लगाए। मार्च की वीडियो सोशल मीडिया पर हर जगह मौजूद है।

कनाडाई हिंदू संगठन ‘कोएलिशन ऑफ हिंदू ऑफ नॉर्थ अमेरिका’ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “हिंदू मंदिरों पर लगातार हो रहे हमलों के खिलाफ हजार से ज्यादा कनाडाई हिंदू ब्रैम्पटन में इकठ्ठा हुए हैं। कल (रविवार) को पवित्र दिवाली वीकेंड के दौरान इस तट से दूसरे तट तक कनाडा के हिंदू मंदिरों पर हमला किया गया। हम कनाडा से इस हिंदू फोबिया को तुरंत रोकने के लिए कहते हैं।”

अवलोकन करें:-

"बंटोगे तो कटोगे" नारा ही प्रभावी बना ; कनाडा में हिल गया पक्ष और विपक्ष ; हिंदू मंदिर के बाहर प्रद

हिंदू मंदिर पर हमला

3 नवंबर को हिंदू सभा मंदिर में भारतीय कांसुलर कैंप चल रहा था। इस बीच खालिस्तानियों की भीड़ आई और उनपर हमला बोल दिया। इस दौरान बच्चे और महिलाएँ भी निशाना बनाई गईं। घटना के बाद पुलिस ने इस मामले में अब तक तीन गिरफ्तारियाँ की है। वहीं एक पुलिसकर्मी को सस्पेंड किया गया है। हिंसा मामले में गिरफ़्तार किए गए लोगों की पहचान मिसिसॉगा के 43 वर्षीय दिलप्रीत सिंह बौंस, ब्रैम्पटन के 23 वर्षीय विकास और मिसिसॉगा के 31 वर्षीय अमृतपाल सिंह के तौर पर हुई है।

मंदिर में घुसे खालिस्तानी, हिंदुओं को दौड़ा-दौड़ा कर लाठी-डंडे से पीटा: कनाडा में हमले के बाद घिरे जस्टिन ट्रूडो, भारतवंशी MP बोले- कट्टरपंथियों ने पार की लक्ष्मण रेखा; कनाडा पुलिस ने खालिस्तानियों को करने दिया हमला: भारतीय उच्चायोग नाराज, गुरुद्वारा परिषद ने भी की निंदा

                                                          खालिस्तानियों ने कनाडा पर किया हमला
बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से होंगे। अगर समय रहते कनाडा की सरकार और विपक्ष ने इन उपद्रवी खालिस्तानियों के विरुद्ध जल्द कोई सख्त उठाकर इन्हें अपनी जमीन से नहीं खदेड़ा संपन्न कनाडा को बर्बाद होने से कोई नहीं बचा सकता। खालिस्तान और आतंकवाद ऐसे अंतरराष्ट्रीय गंभीर मुद्दे हैं, अगर इनको समर्थन देने वालों देशों ने इनके विरुद्ध कार्यवाही नहीं की निश्चितरूप से वो देश अपनी बर्बादी को अपनी आँखों से देख रहे हैं। भारत में खालिस्तान पनपा केवल पंजाब में, पंजाब कितना बर्बाद हुआ ये तो भारत सरकार ने पंजाब को पुनः खुशहाली प्रदान करा दी, लेकिन यहाँ तो खालिस्तान पूरे कनाडा पर हावी हो रहे हैं। पाकिस्तान, फिलिस्तीन, गाज़ा, इराक और ईरान जीवित उदाहरण है। इजराइल की किसी मुस्लिम या मुस्लिम देश से नहीं बल्कि आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई है। लेकिन आतंकवाद समर्थक इसे मुस्लिम विरोधी बताकर इजराइल को बदनाम कर रहे हैं।   

कनाडा के ब्रैम्पटन शहर में हिंदू मंदिर में श्रद्धालुओं पर खालिस्तानी समर्थकों की भीड़ द्वारा हमला किया गया। इस दौरान, मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं पर लाठी-डंडे बरसाए गए और महिलाओं व बच्चों को भी नहीं बख्शा गया। हमला तब हुआ जब सारे श्रद्धालु मंदिर में पूजा-अर्चना कर रहे थे।

घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। वीडियो में खालिस्तानी समर्थक लाठी-डंडे लेकर हिंदू श्रद्धालुओं को मारते और उन्हें दौड़ाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं दूसरी वीडियो में पुलिस इलाके को घेरकर स्थिति नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है।

हमले के बाद पील रीजनल पुलिस चीफ निशान दुरईप्पा ने लोगों से संयम बरतने को कहा है और कहा है कि हिंसा और अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि वे इस मामले की जाँच करेंगे और दोषियों को जवाबदेह ठहराने के लिए आवश्यक कदम उठाएँगे।

इसके अलावा कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि हर कनाडाई नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है और ऐसी हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता। कनाडा के एमपी चंद्र आर्या ने भी कहा कि खालिस्तानियों द्वारा आज सीमा पार कर दी गई। उनके द्वारा हिंदू-कनाडाई लोगों पर हिंदू सभा में हमला दिखाता है कि ये लोग कितने कट्टरपंथी होते जा रहे हैं।

वहीं ब्रैम्पटन के हिंदू सभा मंदिर में खालिस्तानियों के हमले की कड़ी निंदा कनाडा संसद में विपक्ष के नेता पियरे पोलीएवर ने भी की। उन्होंने इस घटना को ‘पूरी तरह अस्वीकार्य’ बताया। उन्होंने कहा कि सभी कनाडाई नागरिकों के लिए शांति से अपने धर्म का पालन करने का अधिकार जरूरी है।

कनाडा पुलिस ने खालिस्तानियों को करने दिया हमला: भारतीय उच्चायोग नाराज, गुरुद्वारा परिषद ने भी की निंदा

कनाडा के ब्रैम्पटन में हिंदुओं पर हुए हमले के बाद हर जगह खालिस्तानियों की निंदा हो रही है। कनाडाई सरकार के नेताओं ने जहाँ इस घटना के विरोध में खालिस्तानियों पर निशाना साधा है तो ओटावा में भारतीय उच्चायोग और ओंटारियो में सिख और गुरुद्वारा परिषद ने भी इस घटना पर प्रेस रिलीज करके अपनी चिंता जाहिर की है।

भारतीय उच्चायोग ने तो इस तरह के हमलों को बेहद निराशाजनक बताया। साथ ही कहा कि हिंदू सभा मंदिर के सहयोग से उन्होंने कांसुलर कैंप आयोजित किया था लेकिन वहाँ व्यवधान डाला गया। उच्चायोग ने कहा कि भारत विरोधी तत्वों ने जो भी किया वह उसे लेकर बहुत ज्यादा चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि आगे से कोई भी कार्यक्रम स्थानीय अधिकारियों की सुरक्षा के आधार पर आयोजित होगा। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के लिए भी पुलिस सुरक्षा माँगी गई थी।

वहीं OSGC ने जहाँ अपनी रिलीज में स्थानीय नागरिकों से इस मामले की गहन जाँच करने की माँग की। उन्होंने कहा कि प्रार्थना के स्थल को पवित्र रहने दिया जाना चाहिए। वहाँ हिंसा और अराजकता नहीं होती नहीं है। जो भी ब्रैम्पटन में हुआ वो बहुत परेशान करने वाला है। हमें एक दूसरे के धर्मों का सम्मान करना चाहिए।