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कांग्रेस की जिस सैयदा हमीद को भारत में बसाने हैं ‘घुसपैठिए’, उन्हीं के आगे जोर-जोर से लगे ‘बांग्लादेशी बाहर निकालो’ के नारे: ‘जय श्रीराम’ सुन मुँह बनाती दिखीं

        हिंदू सेना का विरोध तस्वीर (बाएँ), सैयदा हमीद नारे देख मुँह बनाती हुई (दाएँ), (फोटो साभार : X_@ANI)
दिल्ली के संसद मार्ग स्थित कॉन्स्टिट्यूशनल क्लब में आयोजित ‘असम नागरिक सम्मेलन’ के कार्यक्रम के दौरान उस वक्त माहौल गरमा गया, जब हिंदू सेना के सदस्यों ने सैयदा हामिद के खिलाफ बांग्लादेशी घुसपैठियों को समर्थन में बयान देने के लिए जमकर नारेबाजी की। इस दौरान ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम’, ‘जय श्री राम’, ‘बांग्लादेशियों को बाहर निकालो’ जैसे नारे लगे। ये हंगामा कांग्रेस सरकार की योजना आयोग की पूर्व सदस्य सैयदा हमीद की उपस्थिति में हुआ, जिनके हालिया बयान में उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठियों के भारत में रहने का समर्थन किया था। नारेबाजी के दौरान सैयदा हमीद मुँह बनाती हुई देखी गई।

बीजेपी नेताओं की कड़ी प्रतिक्रिया

सैयदा हमीद के बयान पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा, “सैयदा हमीद जैसे लोग, जो गाँधी परिवार के करीबी माने जाते हैं, अवैध घुसपैठियों को वैध ठहराते हैं, जैसे वे जिन्ना का सपना पूरा करना चाहते हों-असम को पाकिस्तान का हिस्सा बनाना।” उन्होंने इस बयान को असम की पहचान को खत्म करने की सोची-समझी साजिश बताया।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और अन्य बीजेपी नेताओं ने भी सैयदा हमीद की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह बयान घुसपैठियों को बढ़ावा देने और देश की सुरक्षा को खतरे में डालने जैसा है। वहीं, भाजपा नेता और लेखक राकेश सिन्हा ने कहा कि ‘इससे बड़ा देश विरोधी बयान नहीं हो सकता। अगर सैयदा हमीद को इतना ही प्यार है तो 7 दिन बांग्लादेश में रहकर देखें।’

सैयदा हमीद का विवादित बयान

यह पूरा मामला सैयदा हमीद के असम दौरे से शुरू हुआ, जहाँ उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठियों के पक्ष में बयान दिया था। सैयदा हमीद ने कहा था कि बांग्लादेशी भी इंसान हैं और उन्हें भारत में रहने का पूरा हक है। सैयदा ने यह भी कहा कि असम में मु्स्लिमों पर जुल्म हो रहा है और सरकार बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ गलत तरीके से कार्रवाई कर रही है।

सैयदा हमीद के अनुसार, “अगर वे (घुसपैठिए) बांग्लादेशी भी हैं तो इसमें गलत क्या है? बांग्लादेशी भी इंसान हैं। धरती इतनी बड़ी है, बांग्लादेशी यहाँ भी रह सकते हैं।” सैयदा हमीद ने यह भी दावा किया कि अवैध घुसपैठियों के कारण नागरिकों के अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ता, क्योंकि यह बात ‘भ्रामक’ है।

अवलोकन करें:-

हिम्मत है तो सैयदा घुसपैठिया बन बांग्लादेश में रहकर दिखाए ; ‘यहाँ रह सकते हैं बांग्लादेशी’: कां
हिम्मत है तो सैयदा घुसपैठिया बन बांग्लादेश में रहकर दिखाए ; ‘यहाँ रह सकते हैं बांग्लादेशी’: कां
 

सैयदा हमीद ने यह बयान ‘असम नागरिक सम्मेलन’ नामक एक मंच के निमंत्रण पर दिए थे, जिसमें उनके साथ जाने-माने वामपंथी नेता प्रशांत भूषण, हर्ष मंदर और जवाहर सरकार भी शामिल थे।

कनाडा की सड़कों पर सनातनियों का सैलाब, लग रहे ‘जय श्रीराम’ के नारे: हिंदू मंदिर पर हमले को लेकर PM मोदी ने दिया सख्त संदेश, हिंसा में अब तक 3 गिरफ्तारी; पीड़ित हिन्दुओं को पीटते पुलिस वालों पर क्यों नहीं कार्यवाही की जा रही?

बांग्लादेश और कनाडा में उमड़े हिन्दू सैलाब को देख लगता है शायद 1555 में फ्रेंच महान ज्योतिष नॉस्त्रेदमस की हिन्दुत्व और अखंड भारत को लेकर मुखरित की गयी भविष्यवाणीं का शंखनाद हो चुका है, और सनातन विरोधियों के पतन का समय भी निकट आ रहा है। 

सनातन विरोधी भूल रहे हैं अरबों-खरबों वर्ष प्राचीन सनातन धर्म को कोई नहीं मिटा पाया। इन की क्या हैसियत? विपरीत इसके दुश्मनों का नाम लेवा भी नहीं बचा। गाज़ी जिन्हें मुग़ल बादशाह बताया जाता है, भारत में उनका नाम इसलिए जीवित है क्योकि यहाँ लालची लोगों के सहारे इन गाज़ियों का नाम लेने वालों की दुकानें चल रही है। वह भी बहुत जल्दी बंद होने के कगार की ओर बढ़नी शुरू हो चुकी हैं। भारत में मुस्लिम भी इस्लाम छोड़ एक्स मुस्लिम बन रहे हैं और जिस दिन इनकी संख्या 1+ लाख हो गयी, हिन्दू राष्ट्र उतनी सुगम होनी शुरू हो जाएगी। इनका वर्चस्व सोशल मीडिया पर देखने को मिल रहा है। जिसका श्रेय जाता है मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा नूपुर शर्मा विवाद को। इनके सवालों का जवाब वो मौलाना, मौलवी या इमाम देने से भागते देखा है जिन्हे आम मुसलमान बहुत पहुंचा हुआ बताते हैं।    

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मुखरित "बंटोगे तो कटोगे" सिर्फ एक नारा ही नहीं विश्व हिन्दुओं को जागृत करने का शंखनाद सिद्ध हो रहा है।     
कनाडा के ब्रैम्पटन में हिंदू मंदिर पर हमले के बाद जगह-जगह इस घटना के खिलाफ रोष जाहिर किया जा रहा है। पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है मगर इससे हिंदुओं की नाराजगी शांत नहीं है। जबकि खालिस्तानियों की बजाए पीड़ित हिन्दुओं को पुलिस प्रताड़ित करती वीडियो में साफ नज़र आ रही है, उन पर खालिस्तान समर्पित सरकार क्यों नहीं कार्यवाही करती? उन्होंने कनाडा में मार्च निकाल अपनी सुरक्षा के लिए चिंता जाहिर की। इस दौरान जोर-जोर से नारेबाजी हुई। वहीं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “मैं कनाडा में हिंदू मंदिर पर हुए जानबूझकर किए गए हमले की कड़ी निंदा करता हूँ। हमारे राजनयिकों को डराने की कायराना कोशिशें भी उतनी ही भयावह हैं। हिंसा के ऐसे कृत्य भारत के संकल्प को कभी कमजोर नहीं कर पाएँगे। हम उम्मीद करते हैं कि कनाडा सरकार न्याय सुनिश्चित करेगी और कानून के शासन को कायम रखेगी।”

हिंदू मंदिर में श्रद्धालुओं पर खालिस्तानी हमले के बाद कनाडा में हिंदू समुदाय के हजारों लोग भी सड़कों पर उतरे दिखे। इस दौरान उन्होंने मार्च निकालते हुए खुलेआम खालिस्तान मुर्दाबाद और जय श्रीराम के नारे लगाए। मार्च की वीडियो सोशल मीडिया पर हर जगह मौजूद है।

कनाडाई हिंदू संगठन ‘कोएलिशन ऑफ हिंदू ऑफ नॉर्थ अमेरिका’ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “हिंदू मंदिरों पर लगातार हो रहे हमलों के खिलाफ हजार से ज्यादा कनाडाई हिंदू ब्रैम्पटन में इकठ्ठा हुए हैं। कल (रविवार) को पवित्र दिवाली वीकेंड के दौरान इस तट से दूसरे तट तक कनाडा के हिंदू मंदिरों पर हमला किया गया। हम कनाडा से इस हिंदू फोबिया को तुरंत रोकने के लिए कहते हैं।”

अवलोकन करें:-

"बंटोगे तो कटोगे" नारा ही प्रभावी बना ; कनाडा में हिल गया पक्ष और विपक्ष ; हिंदू मंदिर के बाहर प्रद

हिंदू मंदिर पर हमला

3 नवंबर को हिंदू सभा मंदिर में भारतीय कांसुलर कैंप चल रहा था। इस बीच खालिस्तानियों की भीड़ आई और उनपर हमला बोल दिया। इस दौरान बच्चे और महिलाएँ भी निशाना बनाई गईं। घटना के बाद पुलिस ने इस मामले में अब तक तीन गिरफ्तारियाँ की है। वहीं एक पुलिसकर्मी को सस्पेंड किया गया है। हिंसा मामले में गिरफ़्तार किए गए लोगों की पहचान मिसिसॉगा के 43 वर्षीय दिलप्रीत सिंह बौंस, ब्रैम्पटन के 23 वर्षीय विकास और मिसिसॉगा के 31 वर्षीय अमृतपाल सिंह के तौर पर हुई है।

कर्नाटक : मस्जिद में ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने से आहत नहीं होती मजहबी भावनाएँ: हाई कोर्ट ने हिंदुओं के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई रद्द की


कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि मस्जिद के अंदर ‘जय श्रीराम’ कहने से किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं की ठेस नहीं पहुँचती। इसके बाद हाई कोर्ट के जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने पिछले महीने धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने के दो आरोपितों- कीर्तन कुमार और सचिन कुमार के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

दरअसल, दक्षिण कन्नड़ जिले की पुलिस ने कीर्तन कुमार और सचिन कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295A, 447 और 506 सहित कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। शिकायत में कहा गया था कि पिछले साल सितंबर (सितंबर 2023) में एक रात दोनों स्थानीय मस्जिद में घुसे और ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए।

अपने फैसले में हाई कोर्ट ने कहा, “धारा 295A किसी भी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य करने से संबंधित है। यह समझ से परे है कि अगर कोई ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाता है तो इससे किसी वर्ग की धार्मिक भावना कैसे आहत होगी।”

हाई कोर्ट ने कहा कि जब शिकायतकर्ता खुद कहता है कि इलाके में हिंदू-मुस्लिम सौहार्द्र के साथ रह रहे हैं तो इस घटना का किसी भी तरह से कोई मतलब नहीं निकाला जा सकता है। दोनों याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि मस्जिद एक सार्वजनिक स्थान है। इसलिए इसमें आपराधिक अतिक्रमण का कोई मामला नहीं बनता। ‘जय श्रीराम’ का नारा IPC की धारा 295A के तहत परिभाषित अपराध भी नहीं है।

वहीं, राज्य सरकार की ओर पेश से वकील सौम्या आर ने इस याचिका का विरोध किया और कहा कि मामले में आगे की जाँच की आवश्यकता है। हालाँकि, अदालत ने माना कि वर्तमान मामले में कथित अपराध का सार्वजनिक व्यवस्था पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। इस हाई कोर्ट ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का मानना ​​है कि हर कार्य IPC की धारा 295A के तहत अपराध नहीं बनता है।

महेंद्र सिंह धोनी बनाम येरागुंटला श्यामसुंदर (2017) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने कहा, “जिन कार्यों का शांति या सार्वजनिक व्यवस्था को नष्ट करने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, उन्हें आईपीसी की धारा 295A के तहत अपराध नहीं माना जाएगा। इन कथित अपराधों में से किसी भी अपराध के कोई तत्व नहीं पाए जाने पर याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आगे की कार्यवाही की अनुमति देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग और न्याय की विफलता होगी।”

दिल्ली : चल रही थी रामलीला, सीने में उठा दर्द तो मंच पर बैठ गए ‘कुंभकर्ण’ और शाहदरा में लाइव परफॉर्मेंस के दौरान ही ‘राम’ की भी हार्ट अटैक से हुई मौत

   मंच पर राम (बाएँ) का किरदार निभाते हुई थी मौत, अब कुंभकर्ण (दाएँ) की मौत (फोटो साभार: वायरल वीडियो/पंजाब      केसरी)
अनेक बार जीवन में ऐसे घटनाक्रम सामने आते है, वर्षों पूर्व घटित घटनाएं भी मुखरित हो जाती है। घटना उस समय की जब प्राइमरी में पढ़ते थे, जब रामलीला मैदान में दिल्ली की बहुचर्चित रामलीला में दशहरा के पावन दिवस पर राम-रावण युद्ध के दौरान जब राम ने रावण को अमृतकुंड पर तीर मारा, रावण को स्वाभाविक है मरने का ड्रामा करना ही था, लेकिन वह मरने का ड्रामा नहीं, वास्तव में रावण का अभिनव करने वाले ने अपने जीवन की अंतिम साँस ले ली। मुझसे बड़े बताते थे कि रावण की शव-यात्रा में लीला में निकलने वाले सारे बैंड सम्मिलित हुए थे। 
रामायण केवल एक धार्मिक ग्रन्थ नहीं, बल्कि मानव को जीवन का मार्ग दर्शन करवाने वाला ग्रन्थ है। लेकिन किया जाता है केवल राम का गुणगान और रावण को एक अपवाद। जबकि रावण जैसा महान पंडित, ज्ञानी, तपस्वी और पराक्रमी न कोई इस धरती पर आया और शायद नहीं आएगा। जिस पर प्रकाश डाला रामानंद सागर के सीरियल रामायण में। जब कुंभकर्ण को जगाया जाता है और अपने बड़े भाई के पास जाने पर पीढ़ियों पूर्व ब्रह्मा, विष्णु और महेश(शिव) एवं ऋषियों की भविष्यवाणियों का स्मरण करवाया। रावण कितना महान था कि अपना वचन पूरा करने विष्णु को राम रूप में धरती पर आना पड़ा, क्योकि रावण का अंत विष्णु के हाथों ही होना था। खर और दूशण की मृत्यु का समाचार मिलते ही रावण को अपनी जीवनलीला के अंत होने का आभास हो गया था। क्योकि इनका अंत भी विष्णु के हाथों होना निश्चित था। कहते है कि रावण पुराण में लिखा है कि रावण ने सीता माता का अपहरण करते समय सीता माता को 'माता' कहा था कि ''माता' क्या अपने इस पुत्र को मोक्ष नहीं दिलवाएगी?' लेकिन हिन्दू ग्रंथों में दिए संदेशों को मनोरंजन बनाकर रख दिया, जिसमे इन ग्रंथों में दिए जीवन सन्देश और धार्मिक वास्तविक उपदेश लुप्त हो गए। यही कारण है कि सनातन विरोधी रामायण पर कीजड़ फेंकने का दुस्साहस कर रहे है और हिन्दू मूर्कदर्शक बना हुआ है। खैर।             
दिल्ली के चिराग इलाके में चल रही रामलीला के दौरान एक दुखद घटना घटी, जब कुंभकर्ण का किरदार निभा रहे अभिनेता की मंच पर ही मौत हो गई। यह हादसा तब हुआ जब पश्चिम विहार के रहने वाले विक्रम तनेजा, जो मालवीय नगर में रामलीला के मंच पर कुंभकर्ण की भूमिका निभा रहे थे। उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द महसूस हुआ, और वह मंच पर ही बैठ गए। घटना के तुरंत बाद उन्हें आकाश अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें पीएसआरआई अस्पताल रेफर कर दिया गया।

पुलिस के अनुसार, इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों का अनुमान है कि उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई। पुलिस ने तनेजा के परिवार वालों के बयान दर्ज कर लिए हैं और मौत की वजह की जाँच जारी है। यह घटना शारदीय नवरात्रि के दौरान दूसरी बार हुई है, जब रामलीला में भूमिका निभाते समय किसी कलाकार की जान चली गई। विक्रम तनेजा की मौत से रामलीला समिति और उनके परिवार में शोक का माहौल है।

भगवान राम का किरदार निभाते हुए शाहदरा में हुई थी कलाकार की मौत

इससे पहले, नवरात्रि के दौरान दिल्ली के शाहदरा स्थित विश्वकर्मा नगर में जय श्री रामलीला समिति द्वारा आयोजित रामलीला के दौरान भगवान राम की भूमिका निभाते समय एक अन्य दुखद हादसा हुआ था। शाहदरा में भगवान राम का किरदार निभाने वाले सुनील कौशिक (59 वर्ष), जो पेशे से प्रॉपर्टी डीलर थे और रामलीला समिति के संस्थापक सदस्यों में से एक थे, मंच पर दिल का दौरा पड़ने से गिर पड़े।
यह घटना तब हुई जब सुनील रामलीला के सीता स्वयंवर के दृश्य में धनुष तोड़ने का प्रदर्शन कर रहे थे। गाना गाते समय अचानक उन्हें सीने में दर्द हुआ, और वह मंच के पीछे चले गए। वहां उपस्थित उनके परिवार के सदस्यों ने तुरंत उन्हें पास के अस्पताल पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर रखा। हालाँकि, एक घंटे बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सुनील के भतीजे राहुल कौशिक के अनुसार, सुनील 1987 से राम की भूमिका निभा रहे थे और उनका यह अंतिम प्रदर्शन था।

IIT बॉम्बे : मंच से भगवान राम और माता सीता का मजाक उड़ाने वाले छात्र पर लगाया 1.2 लाख रुपए का जुर्माना, नाटक लिखने पर क्यों नहीं? जिन नेताओं ने सनातन का मजाक बनाया उन पर कब जुर्माना ?

हिंदू देवी-देवता का मजाक बनाने पर आईआईटी बॉम्बे ने छात्रों को दी सजा
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी/ ITT) बॉम्बे के छात्रों द्वारा इस साल मार्च में ‘राहोवन’ नाम का नाटक आयोजित करके भगवान राम और माता सीता का मजाक उड़ाया गया था। अब इसी मामले में एक्शन लेते हुए आईआईटी बॉम्बे ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। कॉलेज प्रशासन ने नाटक में शामिल एक छात्र पर 1.2 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।

जिस छात्र ने भगवान राम और सीता माता का मजाक उड़ाया उस पर तो जुर्माना लगा दिया, लेकिन जिसने नाटक लिखा और जिस अध्यापक ने नाटक की इजाजत दी उन पर क्यों नहीं लगाया? दूसरे, जब नेताओं ने खुलेआम सनातन का अपमान किया, उन पर क्यों नहीं की कार्यवाही? वो नेता है तो सनातन पर कुछ भी बकवास कर सकता है? वैसे तो ऐसे नेताओं और उनकी पार्टी को वोट देने वाले मतदाता ही हिन्दू के नाम पर कलंक हैं।  

जानकारी के मुताबिक, छात्र को ‘जुर्माने’ का नोटिस 4 जून को जारी किया गया था। इससे पहले नाटक के बारे में जो शिकायतें प्रशासन को मिली थी उसे लेकर उन्होंने 8 मई को अनुशासन समिति की बैठक बुलाई थी। इस दौरान बैठक में छात्रों ने भी भाग लिया था और बातचीत के बाद सजा तय हुई थी।

भगवान का मजाक उड़ाने वाले छात्र को जारी किए गए नोटिस में कहा गया है कि उसे 1.20 लाख रुपए का जुर्माना 20 जुलाई, 2024 को छात्र मामलों के डीन के कार्यालय में जमा किया जाना है।

इसके अलावा ये भी कहा गया कि अगर सजा का उल्लंघन किया तो आगे और भी सख्त प्रतिबंध लगाए जाएँगे। ये नोटिस फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल है। विवादित कार्यक्रम को देखने के बाद जिन लोगों ने आवाज उठाई थी कि छात्रों पर एक्शन लिया जाए, वही इस जानकारी को साझा कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि इस मामले में 8 छात्रों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है। इसमें जुलाई सेशन में स्नातक पूरा करने जा रहे छात्र भी शामिल हैं, उनके ऊपर इस तरह के नाटक में शामिल होने पर भारी जुर्माना लगाया गया है। वहीं कॉलेज में नियमित पढ़ाई कर रहे थे उन्हें छात्रावास से निलंबित कर दिया गया है।

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में स्थित IIT बॉम्बे में 31 मार्च को कल्चरल फेस्ट का आयोजन किया गया था। इसी दौरान ये रामायण पर आधारित नाटक ‘राहोवन’ दिखाकर भगवान राम की आलोचना की गई थी। इसके अलावा ‘राहोवन’ नाम के इस नाटक में नारीवादी मुद्दों के नाम पर भगवान राम के किरदार से ही छेड़छाड़ की गई थी और पात्रों के नामों में हल्का बदलाव किया गया था। मंच पर लोग भगवान का मजाक बना रहे थे और नीचे सीटी मारी जा रही थी।

वीडियो में क्या है राम-सीता का संवाद

इसमें सीता कहती है, “स्वामी, ऐसी अवस्था में ये अकेली सुहागन अपना हृदय संवाद किसके साथ करे?” इस पर सामने से राम के पात्र में दिखाया लड़का कहता है, “खोल”। ‘क्या’ का वो जवाब देता है – ‘संकोच’। एक अन्य दृश्य में राम से कहलवाया गया है, “तू किसी दूसरे कबीले में जा किसी दूसरे मर्द के यहाँ रह आई, इसीलिए ये कबीला तेरा स्वीकार वापस नहीं करेगा।”
इस पर सीता कहती है, “दूसरा मर्द, अरे बंदी थी मैं वहाँ?” इस पर राम आरोप लगाते हैं कि सीता ने कबीले की सीमा लाँघी, रेखा का उल्लंघन किया। राम से कहलवाया गया है, “तू कुछ नहीं कहेगी, सिर्फ मेरी सुनेगी।” फिर सीता कहती हैं, “मर्द होने निकला था तू, इंसान बनना भूल गया।” इस पर राम कहते हैं, “अब एक औरत समझाएगी मुझे कि मर्द बनना क्या होता है?” एक दृश्य में सीता कहती है, “एक अलग दुनिया है वहाँ। और अच्छा हुआ, अघोरा (रावण) मुझे वहाँ लेकर गया।”
सीता आगे कहती हैं, “वहाँ की औरतों को अच्छी प्रतिष्ठा मिलती है। उसने मुझसे खुद बोला कि मेरी अनुमति के बिना मुझे छुएगा भी नहीं। उसमें मुझे ऐसा मर्द दिखा जो मुझे इस कबीले में नहीं दिखा। तुमलोग जश्न मना रहे थे न कि दानव को मार दिया। असली दानव तो आपने आज तक मरा ही नहीं है।”

क़ुरबानी वाले बकरे पर लिख दिया ‘राम’: वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने दुकान पर जड़ा ताला, आरोपित गिरफ्तार

मुस्लिमों का त्यौहार बकरीद इस सप्ताह देश और दुनिया भर में मनाया जाएगा। शासन और प्रशसन की तरफ से लोगों को बिना दूसरों को तकलीफ दिए अपनी आस्था का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। इन तमाम नसीहतों के बावजूद मुंबई से हिन्दू भावनाओं को आहत करने वाला मामला सामने आया है।

यहाँ कुर्बानी के लिए तैयार किए गए एक बकरे की पीठ पर राम लिख दिया गया था। इसे बकरीद पर बेचने के लिए मटन शॉप के बाहर रखा गया था। आरोपित के खिलाफ FIR दर्ज करके मटन शॉप में प्रशासन ने ताला जड़ दिया है। वही, मटन शॉप के मालिक को भी मुंबई पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

यह घटना नवी मुंबई इलाके की है। यहाँ के सीबीडी बेलापुर इलाके में गुडलक मटन शॉप है। इस मटन शॉप के मालिक का नाम बोर्ड पर मोहम्मद शफी लिखा हुआ है। शनिवार (15 जून 2024) को यहाँ हिन्दू संगठन के कुछ लोग पहुँचे।

उन्होंने एक सफेद रंग के बकरे को वीडियो बनाकर दिखाया, जिसकी पीठ पर राम लिखा हुआ था। राम शब्द पीले रंग से लिखा हुआ था। हिन्दू संगठन से जुड़े लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने बकरे को अपने कब्ज़े में ले लिया। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वीडियो में दुकानदार को हिन्दू संगठन के सदस्यों से बहस करते देखा जा सकता है। दुकान के मालिक पर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। आरोपित की दुकान को प्रशासन ने अगले आदेश तक सील कर दिया है। हिन्दू संगठनों के साथ सोशल मीडिया पर नेटीजेंस ने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई है।

प्राण-प्रतिष्ठा से पहले रामलला ने दिया पहला दर्शन, कृष्णशिला से गए हैं गढ़े : देखत रूप चराचर मोहा… नयनाभिराम, बाल मुख पर दिव्य मुस्कान

अयोध्या मंदिर में श्री रामलला विराज मान (फोटो साभार : इंडिया टीवी)
अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर में रामलला की जिस मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जा रही है, उनकी पहली तस्वीर सामने आ चुकी है। रामलला की इस भव्य, मनमोहक और सुंदर छवि का आप भी दर्शन कीजिए। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर अनुष्ठान 16 जनवरी से शुरू हो चुका है और 22 जनवरी को रामलला की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी।

प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य कार्यक्रम से पहले रामलला की पहली भव्य तस्वीर सामने आ गई है। तस्वीर में श्रीराम के चेहरे पर मधुर मुस्कान है और माथे पर तिलक है। मौजूदा समय की बात करें तो अभी रामलला की मूर्ति गर्भगृह में है और आचार्यों के मार्गदर्शन में तमाम अनुष्ठान चल रहे हैं। रामलला की ये तस्वीर किसी भी कार्यक्रम के शुरू होने से मूल रूप में है। अब सबको इंतजार है 22 जनवरी है, जब ये प्रतिमा प्राण-प्रतिष्ठित होगी।

रामलला की मूर्ति का निर्माण मूर्तिकार अरुण योगीराज ने किया है। कृष्णशिला पर बनाई गई इस मूर्ति का वजन करीब 150 से 200 किलो है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो जाएगी, अगले दिन 23 जनवरी से सभी भक्त रामलला के दर्शन कर सकेंगे।

अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

अयोध्या में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर अयोध्या धाम, उत्तर प्रदेश और पूरे देश में जश्न का माहौल है। मैं यहाँ तैयारियों का निरीक्षण करने आया हूँ।” सीएम योगी ने कहा कि 22 जनवरी के ऐतिहासिक कार्यक्रम के लिए अधिकारियों और राज्य सरकार के मंत्रियों ने अपनी योजना पहले ही पूरी कर ली है।
इससे पहले, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या पहुँचे। उन्होंने हनुमानगढ़ी में पूजा अर्चना की, इसके बाद वो प्राण प्रतिष्ठा समारोह स्थल पर भी गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह की अन्य तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने भगवान राम के भव्य मंदिर के सामने तस्वीर खिंचवाई और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या में सुबह 11.10 बजे राम कथा पार्क पहुँचे। यहाँ से वो सीधे हनुमानगढ़ी गए और दर्शन-पूजन के उपरांत जन्मभूमि परिसर गए। वो 12 बजे रामलला की आरती में शामिल हुए, फिर हनुमान गुफा पर टेंट सिटी का अवलोकन किया। इसके बाद सीएम योगी ने साकेत पेट्रोल पंप के पास नगर निगम द्वारा बनाए गए टेंट सिटी का भी निरीक्षण किया। फिर वो सरयू तट पहुँचे, जहाँ उन्होंने सोलर बोट का शुभारंभ किया। अयोध्या में अपनी 5 घंटे की मौजूदगी में सीएम योगी ने संतों से भी मुलाकात की और प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर समीक्षा बैठक भी की।

उत्तर प्रदेश : ‘जब भैया (अखिलेश यादव) आएँगे तो तेरा क्या होगा’: एक डरे हुए मुस्लिम से मिलिए

                         रैली में जय श्रीराम के नारे लगाने के बाद अहसान राव को मिल रही गाली और धमकी
‘डरा हुआ मुस्लिम’ नैरेटिव वाली कई खबरें आपने पढ़ी होंगी। लेकिन डरा हुआ मुस्लिम असल में कैसा होता है? वह किससे डरा होता है? यह जानना है तो अहसान राव (Ahsan Rao) से मिलिए। देवबंद (Deoband) में रहने वाले इस युवा के अनुसार उसे सु@र, कुत्ता, ह#म का बच्चा… जैसी गालियाँ दी जा रही है। पूछा जा रहा- 10 मार्च के बाद तेरा क्या होगा? 10 मार्च को जब योगी मठ में जाएँगे और भैया (अखिलेश यादव) आएँगे तो तेरा क्या होगा?

10 मार्च 2022 को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आने हैं। उत्तर प्रदेश (UP Election 2022) में 11 जिलों की 58 सीटों पर पहले चरण में 10 फरवरी को वोट डाले जाएँगे। इन सीटों में सहारनपुर जिले की देवबंद सीट भी शामिल है। करीब साढ़े तीन लाख मतदाताओं वाले इस सीट पर सवा लाख तक मुस्लिम वोटर बताए जाते हैं।

अहसान राव को धमकी देने वाले कौन

अहसान राव के अनुसार उन्हें अपनी गली-गाँव से लेकर विदेश तक से धमकी मिल रही है। घर से निकलना हो या सोशल मीडिया पर पोस्ट करना, अहसान को गाली ही मिल रही। वजह, उन्होंने दिसंबर 2021 में सहारनपुर की एक रैली में ‘जय श्रीराम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए थे। इस रैली को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबोधित किया था।
अहसान ने ऑपइंडिया को बताया, “नारे लगाने का वीडियो वायरल होने के बाद मेरे पास फोन आने शुरू हो गए। पाकिस्तान से कॉल आए। दुबई से कॉल आए। कतर से कॉल आए। कहने लगे आप वसीम रिजवी बन जाइए या माफी माँग लीजिए। किस बात की माफी माँग लूँ।” वे आगे बताते हैं, “मेरे गाँव में भी कुछ लोगों ने विरोध करना शुरू किया। अब मुझे सुरक्षा मिल गई है। फिर भी घर से निकलते ही लोग कहने लगते हैं- ये वही है सु@र, कुत्ता, ह#म का बच्चा… जिसने जय श्रीराम के नारे लगाए।” यह पूछे जाने पर कि गाली देने वाले लोग कौन हैं, “अहसान कहते हैं, हमारे समाज के ही लोग हैं। जहाँ भी मैं जाता हूँ, वे गाली धमकी देते हैं। सब लोग इस इंतजार में हैं कि भैया (अखिलेश यादव) आएँगे, सरकार बदलेगी तो बदला लेंगे। मेरे पिता को, घरवालों को, रिश्तेदारों को, सबको बरगलाने का काम कर रहे। जिस मुल्क में रहता हूँ, उसका जय जयकार करना कौन सा गुनाह है?”

दो तरह के मुस्लिम: एक कलाम को मानने वाले, दूसरे कसाब को

उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “मैंने भी दारूल उलूम से इस्लाम और कुरान शरीफ की पढ़ाई की है। इन लोगों ने पता नहीं कौन सा इस्लाम पढ़ा है। इस्लाम कहता है कि आप जिस मुल्क में रहते हैं, उससे मुहब्बत करें। उसके लिए जान कुर्बान होने पर जन्नत मिलती है। आज दो तरह के मुस्लिम हैं। एक कलाम को फॉलो करने वाले मेरे जैसे लोग। दूसरे कसाब को मानने वाले लोग। कलाम साहब ने देश को बुलंदियों पर पहुँचाया। उन पर सभी हिन्दुस्तानी गर्व करते हैं। लेकिन कुछ लोग कसाब पर भी खुश होते हैं। यही लोग हमारे सीडीएस की मौत पर मजाक उड़ा रहे थे। यही लोग अहसान का विरोध करते हैं। मैं कहता हूँ हम जिस देश में रहते हैं, हमें उस देश की वफादारी करनी चाहिए। यही इस्लाम कहता है। मैं अपने देश के लिए जान कुर्बान करने को तैयार हूँ।”
देवबंद के ही उलेमा मुफ़्ती असद कासमी ने अहसान को इस्लाम से खारिज करने की धमकी दी थी। इसके बारे में पूछे जाने पर वे कहते हैं, “क्या मुुफ्ती साहब ने उन पर भी कभी कोई फतवा लगाया जो ‘जय भीम’ बोलते हैं। केवल अहसान पर ही सारा इस्लाम जाग रहा।” अहसान ने बताया कि धमकी मिलने के बाद से स्थानीय प्रशासन और भाजपा नेताओं का उन्हें सहयोग मिल रहा है। देवबंद से बीजेपी उम्मीदवार और निवर्तमान विधायक बृजेश सिंह ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से धमकी देने वाले लोगों को चेताया था। इसी तरह का आश्वासन अन्य दलों, दारूल उलूम अथवा यहॉं मुस्लिमों के बीच खासा प्रभाव रखने वाले मदनी परिवार से मिलने से अहसान इनकार करते हैं। उनका दावा है, “मदनी साहब कभी किसी मैटर में खुद सामने नहीं आते। उनके जैसे और भी बहुत सारे लोग हैं जो खुलकर सामने नहीं आ रहे। लेकिन अपने लोगों को बरगलाकर, भड़काकर काम करवाते हैं। ओवैसी को दारूल उलूम आने की इजाजत नहीं दी गई। लेकिन मदनी साहब के भतीजे ओवैसी की पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं। उस पार्टी से एहसान या कोई और मुसलमान लड़ता को उसका विरोध होता। जब उनके परिवार का लड़का लड़ रहा है तो सही है, जायज है। इस्लाम में कहाँ लिखा है कि दूसरे पर 

जब तक हूँ जय श्रीराम कहता रहूँगा

अहसान का कहना है कि उनका विरोध कर रहे लोग वे हैं जो अफ्रीका होते हुए पाकिस्तान जाते हैं। जिन्हें विदेशों से पैसा मिलता है। जो 70 साल से कॉन्ग्रेस के तलवे चाट रहे हैं। उसके इशारे पर काम करते हैं। वे कहते हैं, “यदि ऐसा नहीं होता तो बसपा में रहने वाले मुस्लिम का जय भीम कहना ठीक, आएलडी के मुस्लिम नेता का चौधरी चरण सिंह की जयंती और पुण्यतिथि मनाना ठीक और बीजेपी-संघ से जुड़े मुस्लिमों का जय श्रीराम कहने पर विरोध क्यों होता?” वे बताते हैं, “जो मुस्लिम पढ़ा-लिखा है, युवा है, अपने राष्ट्र के प्रति जागरूक है, आज भाजपा के साथ है।” यह पूछे जाने पर कि जिस तरह से धमकी दी जा रही है, नाते-रिश्तेदारों ने जैसे उनसे दूरी बना ली है, क्या उन्हें ये नारे लगाने पर अफसोस है, अहसान जवाब देते हैं, “मुझे ऐसा कोई भी अफसोस नहीं है। मैं जब तक रहूँगा जय श्रीराम और भारत माता की जय-जयकार करता रहूँगा।”
फतवा जारी हो सकता है, आप पर नहीं हो सकता है।”(साभार)