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भरूच पाकिस्तान में आता है या भारत बन चुका है इस्लामिक देश? खुदा, रमजान, ईद नमाज… पेपर हिंदी का और सवाल इस्लामिक

                                                             नर्मदा विद्यालय का प्रश्न पत्र
गुजरात के भरूच के नर्मदा स्कूल में यूनिट टेस्ट में इस्लाम संबंधी प्रश्न पूछने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक प्रश्न पत्र वायरल हो रहा है जिसमें शुरुआत के चार के चार सवाल इस्लाम मजहब से जुड़े हैं। इस प्रश्न पत्र को देख लोग कह रहे हैं कि आखिर ये स्कूल भारत में आता है या फिर पाकिस्तान में। वहीं शिक्षा जिलाधिकारी का कहना है कि पेपर नियमानुसार ही छपा है।

जानकारी के मुताबिक, यह प्रश्न भरूच के जीएनएफसी नर्मदा विद्यालय में आठवीं कक्षा के छात्रों से पूछे गए। यूनिट टेस्ट 7 अगस्त को आयोजित हुआ था। पेपर की फोटो सोशल मीडिया पर खूब तेजी से वायरल हो रही है। इसमें पाँच MCQ नजर आ रहे हैं जिनमें से 4 इस्लाम संबंधित हैं।

पेपर में देख सकते हैं कि पहला प्रश्न हैं- ‘हम संसार में किसकी इच्छा से आए?’ विकल्पों में माता, पिता, परिवार को रखा गया और अंतिम विकल्प ‘खुदा’ दिया गया। दूसरा प्रश्न है – ‘यदि ईश्वर चाहे तो (रिक्त स्थान) से हर कोई बच सकता है। जिसमें किस्मत, मन्नत, दावत और आफत जैसे शब्द विकल्प दिए गए।

तीसरा सवाल रमजान को लेकर है जिसमें पूछा गया, रमजान पूरे तीस (खाली जगह) के बाद आता है। विकल्प में विघानों, दानों और फेरों और रोजा जैसे शब्द हैं। इसके बाद चौथा सवाल में पूछा गया। ईद की नमाज़ जगह का क्या नाम है? विकल्प हैं – ईदबाग, ईदमेदान, ईदघर और ईदगाह।

बताया जा रहा है कि जब बच्चों ने अपने घर पर जाकर इस प्रश्न पत्र को दिखाया तो अभिभावकों ने इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर दीं। साथ ही बच्चों से इस तरह के प्रश्न पूछे जाने का विरोध भी किया।

पाठ्यक्रम से पूछे सवाल, इरादा गलत नहीं: स्कूल प्रबंधन

जब ऑपइंडिया के संज्ञान में मामला आया तो हमने भी इस मामले में आगे जानकारी के लिए स्कूल से संपर्क किया। स्कूल प्रबंधन के मुताबिक, ” प्रश्न सरकारी पाठ्यपुस्तक से ही लिए गए हैं और कोई भी विषय से बाहर का प्रश्न नहीं पूछा गया है। विवाद इसलिए खड़ा हुआ क्योंकि सवाल लगातार थे, लेकिन इसके पीछे पीछे स्कूल या शिक्षकों का कोई और इरादा नहीं था। यही कहना है कि प्रश्न पाठ से ही पूछे गए थे।” आगे कहा कि इस मामले में उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर कार्यालय को जवाब भी सौंप दिया है।
वहीं इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी स्वातिबा रावल का भी बयान सामने आया है। उनका कहना है कि प्रश्न नियमानुसार पूछा गया था। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय को राई का पहाड़ बनाया जा रहा है।‘दिव्य भास्कर’ से बातचीत में उन्होंने कहा, ” सरकारी नियमों और पाठ्यपुस्तकों के अनुसार ही प्रश्न पूछे गए हैं और वे किसी पाठ्यक्रम के अध्याय से हैं। इस पूरी घटना को किसी ने तूल देने की कोशिश की है।”
ऑपइंडिया ने इस मामले में जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी सचिन शाह से भी संपर्क किया। हालाँकि, उन्होंने कहा कि यह मामला जिला शिक्षा अधिकारी के दायरे में आता है, लेकिन उन्हें मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले पर एक रिपोर्ट राज्य सरकार को भी सौंपी गई है और प्रश्न पाठ्यपुस्तक से ही लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि विवाद सुलझ गया है।

छात्र झारखंड के, राष्ट्रगान बांग्लादेश-पाकिस्तान का, जनजातीय लड़कियों से ‘लव जिहाद’, फिर ‘लैंड जिहाद’: HC चिंतित, मरांडी ने की NIA जाँच की माँग

              झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठियों की समस्या पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने उठाई आवाज़
झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठियों की समस्या पर पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने आवाज़ उठाई है। बांग्लादेशी घुसपैठ के राज्य में क्या दुष्परिणाम हो रहे हैं, ये बताने के लिए उन्होंने 4 साल पुरानी एक खबर भी साझा की है। बता दें कि तब घाटशिला के एक स्कूल में बच्चों को बांग्लादेश और पाकिस्तान का राष्ट्रगान याद करने का होमवर्क दिया गया था। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी का कहना है कि झारखंड को ‘मिनी बांग्लादेश’ बनाने की साजिश चरम पर है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर इस तब अख़बार में छपी खबर की तस्वीर शेयर की। साथ ही उन्होंने लिखा, “LKG और UKG कक्षा के बच्चों को बांग्लादेश और पाकिस्तान का राष्ट्रगान रटवा कर नन्ही उम्र में ही ब्रेनवॉश किया जा रहा है। यह संयोग नहीं, बल्कि झारखंड की आदिवासी मूलवासी पहचान को मिटाने का खतरनाक प्रयोग है। देश विरोधी गतिविधि में संलिप्त इस स्कूल का संचालन और फंडिंग करने वाले गिरोह की सघनता से जाँच करने की आवश्यकता है।”

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अपने संरक्षण में बांग्लादेशी घुसपैठियों के फ़र्जी कागजात तैयार कर उन्हें झारखंड में बसाने वाली झामुमो-कॉन्ग्रेस गठबंधन सरकार से ऐसे संवेदनशील विषयों में कार्रवाई की उम्मीद नहीं की जा सकती। इस कारण उन्होंने NIA से अनुरोध किया है कि वो मामले का संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करें। बता दें कि जुलाई 2020 में जब ये मामला सामने आया था, तब भी ये काफी तूल पकड़ा था। उस समय भी आरोप लगाया गया था कि झारखंड में शिक्षा का इस्लामीकरण शुरू हो गया है।

हाल ही में झारखंड उच्च न्यायालय ने भी इस समस्या पर चिंता जताई है, जिसके बाद ये मामला फिर से गर्म हो गया है। झारखंड हाईकोर्ट ने बुधवार (3 जुलाई, 2024) को कहा है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को चिह्नित कर उनके प्रत्यर्पण के लिए एक एक्शन प्लान बनाने के लिए कहा है। संथाल परगना क्षेत्र में ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ PIL पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने ऐसा कहा। राज्य सरकार को 2 हफ़्तों के भीतर एफिडेविट दायर करने के लिए कहा गया है।

झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठियों के प्रभाव बढ़ने का सबसे अधिक खामियाजा जनजातीय समाज को भुगतना पड़ता है। मशरूम की तरह अवैध मदरसे उग रहे हैं। कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ जा जनजातीय समाज की लड़कियों को फाँस कर शादी कर ली जाती है, फिर उन लड़कियों को पंचायत चुनाव में खड़ा कर दिया जाता है। जनप्रतिनिधि का पद परिवार में आ जाने के बाद ये लोग उसकी आड़ में ड्रग्स तक का धंधा भी करते हैं। साथ ही अन्य घुसपैठियों को सरकारी फायदे दिलाने के लिए उनके दस्तावेज भी बना दिए जाते हैं।

बाबूलाल मरांडी ने जो खबर शेयर की है, वो ये बताता है कि कैसे शिक्षा व्यवस्था पर इस्लामी प्रभाव पड़ने के कारण बच्चे अपने देश की संस्कृति भूलते चले जाते हैं। ‘नंदलाल स्मृति विद्या मंदिर’ नामक स्कूल में छात्रों को भारत नहीं बल्कि पाकिस्तान और बांग्लादेश का राष्ट्रगान याद करने का होमवर्क दिया गया था। अभिभावकों का कहना था कि वो अपने बच्चों को पाकिस्तान और बांग्लादेश का राष्ट्रगान नहीं पढ़ने देंगे। विद्यालय प्रबंधन को ये टास्क विरोध के बाद वापस लेना पड़ा था।

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क्यों अदालतें कह रहीं- धर्मांतरण रोको, घुसपैठियों को भगाओ?

हमने बिहार में भी इसका प्रभाव देखा है, जहाँ सीमांचल में मुस्लिम आबादी बढ़ने और घुसपैठियों को शरण मिलने के बाद रविवार की जगह शुक्रवार (जुमा) के दिन साप्ताहिक अवकाश दिया जाने लगा। बड़ी बात ये है कि झारखंड वाली समस्या पर भाजपा विरोधी राजनीतिक दल भी चुप रहते हैं, जबकि वो खुद को पिछड़ों का रहनुमा कहते नहीं थकते हैं। जनजातीय समाज की समस्याओं पर उनकी चुप्पी मुस्लिम तुष्टिकरण को लेकर उनके झुकाव को प्रदर्शित करती है।

IIT बॉम्बे : मंच से भगवान राम और माता सीता का मजाक उड़ाने वाले छात्र पर लगाया 1.2 लाख रुपए का जुर्माना, नाटक लिखने पर क्यों नहीं? जिन नेताओं ने सनातन का मजाक बनाया उन पर कब जुर्माना ?

हिंदू देवी-देवता का मजाक बनाने पर आईआईटी बॉम्बे ने छात्रों को दी सजा
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी/ ITT) बॉम्बे के छात्रों द्वारा इस साल मार्च में ‘राहोवन’ नाम का नाटक आयोजित करके भगवान राम और माता सीता का मजाक उड़ाया गया था। अब इसी मामले में एक्शन लेते हुए आईआईटी बॉम्बे ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। कॉलेज प्रशासन ने नाटक में शामिल एक छात्र पर 1.2 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।

जिस छात्र ने भगवान राम और सीता माता का मजाक उड़ाया उस पर तो जुर्माना लगा दिया, लेकिन जिसने नाटक लिखा और जिस अध्यापक ने नाटक की इजाजत दी उन पर क्यों नहीं लगाया? दूसरे, जब नेताओं ने खुलेआम सनातन का अपमान किया, उन पर क्यों नहीं की कार्यवाही? वो नेता है तो सनातन पर कुछ भी बकवास कर सकता है? वैसे तो ऐसे नेताओं और उनकी पार्टी को वोट देने वाले मतदाता ही हिन्दू के नाम पर कलंक हैं।  

जानकारी के मुताबिक, छात्र को ‘जुर्माने’ का नोटिस 4 जून को जारी किया गया था। इससे पहले नाटक के बारे में जो शिकायतें प्रशासन को मिली थी उसे लेकर उन्होंने 8 मई को अनुशासन समिति की बैठक बुलाई थी। इस दौरान बैठक में छात्रों ने भी भाग लिया था और बातचीत के बाद सजा तय हुई थी।

भगवान का मजाक उड़ाने वाले छात्र को जारी किए गए नोटिस में कहा गया है कि उसे 1.20 लाख रुपए का जुर्माना 20 जुलाई, 2024 को छात्र मामलों के डीन के कार्यालय में जमा किया जाना है।

इसके अलावा ये भी कहा गया कि अगर सजा का उल्लंघन किया तो आगे और भी सख्त प्रतिबंध लगाए जाएँगे। ये नोटिस फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल है। विवादित कार्यक्रम को देखने के बाद जिन लोगों ने आवाज उठाई थी कि छात्रों पर एक्शन लिया जाए, वही इस जानकारी को साझा कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि इस मामले में 8 छात्रों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है। इसमें जुलाई सेशन में स्नातक पूरा करने जा रहे छात्र भी शामिल हैं, उनके ऊपर इस तरह के नाटक में शामिल होने पर भारी जुर्माना लगाया गया है। वहीं कॉलेज में नियमित पढ़ाई कर रहे थे उन्हें छात्रावास से निलंबित कर दिया गया है।

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में स्थित IIT बॉम्बे में 31 मार्च को कल्चरल फेस्ट का आयोजन किया गया था। इसी दौरान ये रामायण पर आधारित नाटक ‘राहोवन’ दिखाकर भगवान राम की आलोचना की गई थी। इसके अलावा ‘राहोवन’ नाम के इस नाटक में नारीवादी मुद्दों के नाम पर भगवान राम के किरदार से ही छेड़छाड़ की गई थी और पात्रों के नामों में हल्का बदलाव किया गया था। मंच पर लोग भगवान का मजाक बना रहे थे और नीचे सीटी मारी जा रही थी।

वीडियो में क्या है राम-सीता का संवाद

इसमें सीता कहती है, “स्वामी, ऐसी अवस्था में ये अकेली सुहागन अपना हृदय संवाद किसके साथ करे?” इस पर सामने से राम के पात्र में दिखाया लड़का कहता है, “खोल”। ‘क्या’ का वो जवाब देता है – ‘संकोच’। एक अन्य दृश्य में राम से कहलवाया गया है, “तू किसी दूसरे कबीले में जा किसी दूसरे मर्द के यहाँ रह आई, इसीलिए ये कबीला तेरा स्वीकार वापस नहीं करेगा।”
इस पर सीता कहती है, “दूसरा मर्द, अरे बंदी थी मैं वहाँ?” इस पर राम आरोप लगाते हैं कि सीता ने कबीले की सीमा लाँघी, रेखा का उल्लंघन किया। राम से कहलवाया गया है, “तू कुछ नहीं कहेगी, सिर्फ मेरी सुनेगी।” फिर सीता कहती हैं, “मर्द होने निकला था तू, इंसान बनना भूल गया।” इस पर राम कहते हैं, “अब एक औरत समझाएगी मुझे कि मर्द बनना क्या होता है?” एक दृश्य में सीता कहती है, “एक अलग दुनिया है वहाँ। और अच्छा हुआ, अघोरा (रावण) मुझे वहाँ लेकर गया।”
सीता आगे कहती हैं, “वहाँ की औरतों को अच्छी प्रतिष्ठा मिलती है। उसने मुझसे खुद बोला कि मेरी अनुमति के बिना मुझे छुएगा भी नहीं। उसमें मुझे ऐसा मर्द दिखा जो मुझे इस कबीले में नहीं दिखा। तुमलोग जश्न मना रहे थे न कि दानव को मार दिया। असली दानव तो आपने आज तक मरा ही नहीं है।”

सरकारी स्कूल का प्रिंसिपल आफताब अहमद, बच्चों से पकड़वाता था अपना लिंग: अभिभावकों से बोला- जो उखाड़ना हो उखाड़ लो

बच्चों से लिंग पकड़वाता था प्रिंसिपल (प्रतीकात्मक तस्वीर, साभार: Bing AI)
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के एक सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल द्वारा छात्र-छात्राओं का यौन उत्पीड़न किए जाने का मामला सामने आया है। आरोपित प्रिंसिपल का नाम आफताब अहमद है। पुलिस को दी शिकायत में पीड़ित अभिभावकों ने बताया है कि वह बच्चों से अपना लिंग पकड़वाता था।

ताजा मामला 1 अक्टूबर 2023 का है। जब अभिभावकों ने इसके बारे में प्रिंसिपल से पूछा तो वह उनसे गाली गलौच पर उतर आया। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। मामला आजमगढ़ के सिधारी थाना क्षेत्र का है। यहाँ के कटघर गाँव के कम्पोजिट विद्यालय में 55 साल का आफताब अहमद प्रिंसिपल है।

पीड़ित छात्रों के परिजनों का आरोप है कि आफताब अहमद उनके बच्चों से स्कूल में अपना प्राइवेट पार्ट पकड़वाता था। कुछ साल पहले भी उसके द्वारा इस तरह की हरकत किए जाने का मामला सामने आया था। लेकिन उस समय आफताब ने माफी माँग कर मामला निपटा लिया था। कुछ समय बाद उसने दोबारा बच्चों का यौन उत्पीड़न शुरू कर दिया।

इसी क्रम में एक अक्टूबर को उसने 13 साल के एक अनुसूचित जाति के छात्र के साथ गंदी हरकत की। छात्र ने घर आ कर पूरी बात अपनी माँ को बताई। छात्र की माँ के स्कूल पहुँचने के बाद आफताब की हरकतों से पीड़ित अन्य बच्चों के अभिभावक भी वहाँ पहुँच गए। पीड़ित छात्रों और छात्राओं की संख्या करीब 1 दर्जन बताई गई है। इनकी उम्र 10 से 13 साल के बीच है।

स्कूल में अभिभावकों के पहुँचने पर आफताब नाराज हो गया। पीड़ित छात्र की माँ के अनुसार आफताब ने अपनी गलती मानने के बजाय झगड़ा शुरू कर दिया। उसने अभिभावकों को गंदी-गंदी गालियाँ दी। उनसे कहा, “जो उखाड़ना हो उखाड़ लो। तुम सब कुछ नहीं कर पाओगे।” सभी पीड़ित छात्र-छात्रों के परिजनों ने शिकायत पर गवाह के तौर पर दस्तखत किए हैं और आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने आफताब के खिलाफ IPC की धारा 354, 294 और 504 के साथ SC/ST व पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कर लिया है।

ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है। इस मामले में आजमगढ़ जिले के SP सिटी ने बताया कि शिकायत मिलने पर क्षेत्र के DSP को जाँच सौंपी गई थी। जाँच में आरोप सही पाए जाने पर आरोपित प्रिंसिपल के खिलाफ सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। आफ़ताब अहमद को हिरासत में ले लिया गया है।


सऊदी अरब : स्कूली छात्राओं ने हिजाब-बुर्का निकाल कर फेंका, पाँव तले कुचला

बुर्का उतारतीं छात्राएँ (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट)
सऊदी अरब के केंद्रीय क्षेत्र अल कासिम के एक स्कूल में “होराइजन्स” नामक स्टेज शो के दौरान स्कूली छात्राओं द्वारा अबाया (बुर्का) उतार कर फेंकने के बाद विवाद बढ़ गया है। विवाद को देखते हुए शिक्षा अधिकारियों ने इसकी जाँच करने का वादा किया है।

दरअसल, एक स्कूल के स्टेज शो के एक ऑनलाइन वीडियो में एक दृश्य दिखाया गया, जिसमें स्कूली छात्राओं का एक समूह अपने काले बुर्के को उतारता है और उन पर चलकर हाथों में रोशनी वाली एक गेंद पकड़े हुए अपने सहयोगी की ओर बढ़ती हैं।

विवाद बढ़ने के बाद सऊदी अरब के अधिकारियों ने इसकी जाँच का आदेश दिया है। इसके साथ ही स्कूल समारोहों के कार्यक्रमों की निगरानी करने और उनकी सामग्री को संशोधित करने के लिए एक समिति के गठन का भी आदेश दिया।

अल कासिम के शिक्षा अधिकारियों ने एक बयान में कहा कि इस कदम का उद्देश्य ‘इस्लामी मूल्यों और शिक्षाओं’ के अनुरूप शैक्षिक भूमिका को निर्देशित करना है। बता दें कि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह शो कब और कहाँ प्रदर्शित किया गया था।

हाल के वर्षों में इस्लामी मुल्क सऊदी अरब ने बाहरी दुनिया से कदम मिलाने के लिए मुल्क में थिएटर और संगीत सहित मनोरंजन के साधनों को मंजूरी दी थी। इसे एक बड़े सामाजिक परिवर्तन के तौर पर देखा गया।

फरवरी 2020 में सऊदी अरब के संस्कृति मंत्रालय से संबद्ध एक सरकारी एजेंसी के रूप में संगीत आयोग की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य संगीत क्षेत्र में विकास को देखना और संगीत शिक्षा तक सबकी पहुँच प्रदान करना था। पिछले सितंबर में एक सरकारी अधिकारी ने कहा था कि दो साल में संगीत शिक्षा किंडरगार्टन स्तर से पढ़ाया जाने लगेगा।

इतना ही नहीं, अप्रैल 2021 में भारत के दो प्रमुख धर्मग्रंथों- रामायण, महाभारत और आयुर्वेद को भी सऊदी अरब के स्कूलों में पढ़ाए जाने की मंजूरी दी गई थी। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने इन ग्रंथों को स्कूली पाठ्यक्रमों में शामिल करने का निर्देश दिया था। उम्मीद है कि जल्दी ही इसे पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाएगा।


‘कीड़े में विटामिन होता है, चुपचाप खा लो’: मिड-डे मील की शिकायत करने पर प्रिंसिपल ने छात्रा का हाथ तोड़ा

                              बिहार के एक स्कूल में मिड डे मील में कीड़े (फोटो साभार: डेक्कन हेराल्ड/आजतक)
बिहार के वैशाली (Vaishali, Bihar) जिले के लालगंज अततुल्लाहपुर स्थित एक मिडिल स्कूल में मिड-डे-मील में कीड़े निकलने का मामला सामने आया है। जब छात्रों ने इसकी जानकारी प्रिंसिपल मोहम्मद मिसवाउद्दीन को दी तो उन्होंने कहा कि चुपचाप खा लो। कीड़ों में विटामिन होता है।

जब विद्यार्थियों ने कीड़े वाला मिड-डे-मील खाने से मना किया तो प्रिंसिपल ने एक छात्रा का हाथ तोड़ दिया। इस घटना के बाद स्कूल में छात्रों और उनके अभिभावकों ने जमकर हंगामा किया। घटना की जानकारी मिलते ही शिक्षा विभाग ने इसकी जाँच शुरू कर दी है।

अततुल्लाहपुर के मिडिल स्कूल में शनिवार (12 नवंबर 2022) को बच्चों को मिड-डे-मील परोसा गया था। खाने में चावल था। जब छात्र खाना खाने लगे तो उन्होंने देखा कि चावल में कीड़े हैं। इसके बाद छात्रों ने इसकी शिकायत प्रिंसिपल मोहम्मद मिसवाउद्दीन से की।

प्रिंसिपल मोहम्मद मिसवाउद्दीन ने छात्रों से कहा कि कीड़े में विटामिन होता है। चुपचाप खा लो। हालाँकि, छात्रों ने खाना खाने से साफ मना कर दिया। इस बात पर प्रिंसिपल उनकी पिटाई करनी शुरू कर दी। एक छात्र को मिसवाउद्दीन ने इतना मारा कि एक छात्रा का हाथ टूट गया।

जब परिजनों को इसकी जानकारी मिली तो वे स्कूल आकर जमकर हंगामा किया। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत शिक्षा विभाग से की। शिकायत मिलने के बाद शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले की जाँच के लिए एक टीम स्कूल भेजी है।

शिक्षा पदाधिकारी परशुराम सिंह ने स्कूल पहुँचकर बच्चों से बात की और छात्रा के टूटे हाथ की मेडिकल रिपोर्ट देखी। उन्होंने कहा कि मामले की अभी जाँच चल रही है। छात्रा के साथ मारपीट का आरोप सही निकलता है कि तो प्रिंसिपल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बिहार में मिड-डे-मील को लेकर लगातार शिकायतें आती रहती हैं। हाल ही में भागलपुर में मिड-डे-मील का खाना खाने के बाद 200 से अधिक बच्चों की तबीयत खराब हो गई थी।

Pulwama Attack: टी-सीरीज ने पाकिस्तानी सिंगर्स के खिलाफ उठाया ये बड़ा कदम

एमएनएस चित्रपट सेना के हेड अमेय खोपकर ने कहा, ‘हमने इंडियन म्यूजिक कंपनी जैसे टी-सीरीज, सोनी म्यूजिक, वीनस, टिप्स म्यूजिक आदि कंपनी से बात की थी और उन्हें कहा था कि वो पाकिस्तानी सिंगर्स के साथ काम न करें। इन कंपनियों को उनके साथ काम करना जल्दी बंद करना होगा नहीं तो हम इनके खिलाफ अपने स्टाइल से एक्शन लेंगे।’
पुलवामा में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। पूरा देश इस घटना से गुस्से में है। फरवरी 16 को मुंबई में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की फिल्म विंग ने फरवरी 16को संगीत कंपनियों से पाकिस्तानी गायकों के साथ काम नहीं करने के लिए कहा है।
हाल ही में भूषण कुमार की टी सीरीज कंपनी पाकिस्तानी सिंगर राहत फतेह अली खान और आतिफ असलम के साथ 2 अलग-अलग गानों के लिए जुड़े थे। हालांकि खोपकर ने दावा किया है कि उन्होंने हमारी चेतावनी के बाद गानों को हटा दिया है।
इससे पहले 2016 में उरी हमले के बाद राज ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने भारत में काम करने वाले सभी पाकिस्तानी कलाकारों को देश छोड़ने के लिए कहा था।
पुलवामा आतंकी हमले के विरुद्ध छात्र भी सडकों पर 
पुलवामा में हुए आतंकी हमले के विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए। वहीं छात्र संगठनों ने भी रोष जाहिर किया। छात्र संगठनों ने अपने-अपने कॉलेजों में इसका विरोध किया। वहीं संगठनों ने कैंडल मार्च भी निकाला। आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए छात्र संगठनों ने हमला करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।  राजकीय पॉलिटेक्निक पित्थुवाला में पुलवामा में आतंकी में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी। कॉलेज प्राचार्य एके सक्सेना ने कहा कि पूरे देश के लिए शोक का विषय है। इसके खिलाफ पूरे देश को एक होना चाहिए। श्रद्धांजलि सभा में समस्त छात्र और शिक्षक मौजूद रहे। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान राज्यसचिव देवेंद्र रावल, जिला सचिव हिमांशु चौहान, नितेश खंतवाल, सुमन, सोनाली, सुप्रिया, आशु, शैलेंद्र , मनीष, मनोज, इंदु  मौजूद रहे। 
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पुलवामा आतंकी हमले के बाद बड़ा कदम उठाते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने मीरवाइज उमर फारुक समेत पांच अलगाववादी नेताओ.....

वहीं उत्तरांचल विश्वविद्यालय में सीआरपीएफ के जवानों को श्रद्धांजलि दी गई।  विवि के चांसलर जितेंद्र जोशी के नेतृत्व में कैंडल मार्च निकाला गया। लॉ कॉलेज के प्राचार्य डा. राजेश बहुगुणा ने छात्रों से आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार रहने की अपील की। छात्रों ने डीएवी कॉलेज से मार्च निकाला। वहीं एसजीआरआर पीजी कॉलेज छात्रसंघ ने कॉलेज गेट से कारगी चौक तक कैंडल मार्च निकाला। सीएमआई अस्पताल में डाक्टरों, कर्मचारियों एवं सीआईएमएस नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं ने दो मिनट का मौन रख श्रद्धांजलि दी।
अखिल गढ़वाल सभा ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि 
देहरादून। अखिल गढ़वाल सभा की ओर से भी शहीदों को श्रदांजलि दी। सभा के अध्यक्ष रोशन धस्माना, पूर्व सैनिक जगदीश प्रसाद रतूड़ी, कृष्ण मोहन बहुगुणा आदि मौजूद रहे।
राज्यपाल ने किए कार्यक्रम रद
राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने अपने सभी कार्यक्रम और मुलाकातों को रद कर दिया। राजभवन में चार बजे आयोजित शोकसभा में राजभवन अधिकारी और कर्मचारी एकत्र हुए। राज्यपाल ने आतंकी हमले को कायरतापूर्ण बताया।
भाजपा ने दी श्रद्धांजलि, भाजयुमो ने किया प्रदर्शन 
देहरादून। भाजपा युवा मोर्चा ने आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी। साथ ही पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन किया।भाजपा युवा मोर्चा से जुड़े कार्यकर्ता लैंसडौन चौक पर एकत्र हुए। यहां पाकिस्तान का पुतला फूंककर प्रदर्शन किया। उधर, शहीद जवानों को भाजपा प्रदेश कार्यालय में भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। वरिष्ठ उपाध्यक्ष ज्योति प्रसाद गैरोला की अध्यक्षता में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में विधायक हरबंस कपूर, महामंत्री नरेश बंसल डॉ. देवेंद्र भसीन आदि मौजूद रहे।
आराघर के कारोबारियों ने निकाला कैंडल मार्च
देहरादून। पुलवामा में आतंकवादी हमले में शहीद सैनिकों को आराघर व्यापार मंडल और क्षेत्र के लोगों ने शुक्रवार शाम कैंडल मार्च निकालकर श्रद्धांजलि दी। कारोबारियों ने लक्ष्मी नारायण मंदिर से आराघर चौक तक कैंडल मार्च निकाला और वीर शहीदों की आत्मशांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। इस मौके पर ऋषि नंदा, सौरभ शर्मा, अंकित वर्मा, महेश कौशल, जगमोहन मल्होत्रा, बलवंत नेगी, हाविंदर नेगी, सतीश कनौजिया, बिशाल नेगी, राकेश कुमार, गोपाल कनौजिया, रीना देवी मौजूद रहे।
पूर्व सैनिक संगठन ने दी शहीदों को श्रद्धाजंलि 
देहरादून। पुलवामा शहीद जवानों को पीबीओआर पूर्व सैनिक कार्यकारिणी ने श्रद्धांजलि दी। इस दौरान शोक सभा में पूर्व सैनिक संगठन के महसचिव कैप्टन आरडी शाही, संगठन मंत्री कैप्टन सुरेन्द्र सिंह बिष्ट, यूडी जोशी, वाईडी शर्मा, मेजर शंकर क्षेत्री, महिला अध्यक्ष राजकुमारी थापा, रमेश रावत, कैलाश चन्द, केबी गुरुंग, मेजर प्रेम सिंह रावत, विनोद बलूनी, महिला सचिव माधुरी राई, बीर बहादुर, जेबी राना, राजेश रावत मौजूद रहे।
पेंशनर्स एसोसिएशन ने जताया दुख
सेवानिवृत राजकीय पेंशनर्स संगठन से जुड़े सदस्यों की ओर से गांधी पार्क में शहीदों के सम्मान में दो मिनट का मौन रख श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान पीडी गुप्ता, गिरीश भट्ट, संतोष कुमार, नारायण सिंह राणा, एमएस गुसाईं, जेपी टुकेजा, वेद किशोर शर्मा, जेएन अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
दून न्यूज पेपर एजेंट एसोसिएशन ने जताया दुख
दून न्यूज पेपर एजेंट एसोसिएशन ने भी पुलवामा घटना पर गहरा दुख व्यक्त कर शहीदों की आत्मा की शांति की कामना की। इसमें राजवीर जागी, हरप्रीत, ललित जोशी, राजकुमार तिवारी, कैलाश,मनीष, विजेंद्र सेमवाल आदि मौजूद रहे। अजबपुर खुर्द में भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।

एक-आध परीक्षा में इधर-उधर होने से जिंदगी नहीं ठहरती, जिंदगी में कसौटी जरूरी: नरेन्द्र मोदी

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 29 को कहा कि एक-आध परीक्षा में कुछ इधर-उधर हो जाए तो जिंदगी ठहर नहीं जाती, जिंदगी में हर पल कसौटी जरूरी है, ऐसे में कसौटी के तराजू पर नहीं झोंकने पर जिंदगी में ठहराव आ जायेगा। प्रधानमंत्री ने छात्रों, शिक्षकों से, अभिभावकों, ‘परीक्षा पे चर्चा 2.0’ (Pariksha Pe Charcha) में अपने संवाद में यह बात कही।
दिल्ली में यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी कर रहे एक छात्र ने मोदी से पूछा था कि बच्चों से माता-पिता की अपेक्षाएं काफी होती है, वैसी ही स्थिति उनके (प्रधानमंत्री) समक्ष है जहां देशवासियों को उनसे कुछ ज्यादा ही अपेक्षाएं हैं, इस बारे में वह क्या कहेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक कविता में लिखा है कि, कुछ खिलौनों के टूटने से बचपन नहीं मरा करता है।” इसमें सबके लिए बहुत बड़ा संदेश छुपा है।
पीएम मोदी ने कहा, ‘एक-आध परीक्षा में कुछ इधर-उधर हो जाए, तो जिंदगी ठहर नहीं जाती है । लेकिन जीवन में हर पल कसौटी जरूरी है। अगर हम अपने आप को कसौटी पर नहीं कसेंगे तो आगे नहीं बढ़ेंगे।’ उन्होंने कहा कि अगर हम अपने आपको कसौटी के तराजू पर झोंकेंगे नहीं तो जिंदगी में ठहराव आ जायेगा। ज़िन्दगी का मतलब ही होता है गति, ज़िन्दगी का मतलब ही होता है सपने। ठहराव जिंदगी नहीं है।
दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों के साथ संवाद में प्रधानमंत्री ने कहा कि कसौटी बुरी नहीं होती, हम उसके साथ किस प्रकार से निपटते हैं उस पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, ‘मेरा तो सिद्धांत है कि कसौटी कसती है, कसौटी कोसने के लिए नहीं होती है । लक्ष्य हमारे सामर्थ्य के साथ जुड़ा होना चाहिए और अपने सपनों की ओर ले जाने वाला होना चाहिए।’
पीएम ने कहा कि लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जो पहुंच में तो हो, पर पकड़ में न हो। जब हमारा लक्ष्य पकड़ में आएगा तो उसी से हमें नए लक्ष्य की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि हम कई बार कुछ न करने के लिये बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी को ओलंपिक में जाना हो, लेकिन उसने गांव, तहसील, इंटर स्टेट, नेशनल नहीं खेला हो और फिर भी ओलंपिक जाने के सपने देखेगा तो कैसे चलेगा।
लक्ष्य के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि निशान चूक जाएं तो माफ हो सकता है लेकिन निशान नीचा हो तो कोई माफी नहीं, लक्ष्य ऐसा होना चाहिये जो पहुंच में हो लेकिन पकड़ में न हो। लक्ष्य हमारे सामर्थ्य के साथ जुड़ा होना चाहिए और अपने सपनों की ओर ले जाने वाला होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने परीक्षा पे चर्चा संवाद में कहा, ‘लोग कहते हैं मोदी ने बहुत आकांक्षाएं जगा दी हैं, मैं चाहता हूं कि सवा सौ करोड़ देशवासियों की सवा सौ करोड़ आकांक्षाएं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ”हमें आकांक्षाओं को उजागर करना चाहिए, देश तभी चलता है। अपेक्षाओं के बोझ में दबना नहीं चाहिए। हमें अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए अपने आपको सिद्ध करना चाहिए।’
मोदी ने कहा कि निराशा में डूबा समाज, परिवार या व्यक्ति किसी का भला नहीं कर सकता है, आशा और अपेक्षा उर्ध्व गति के लिए अनिवार्य होती है। उन्होंने कहा कि जो सफल लोग होते हैं, उन पर समय का दबाव नहीं होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने समय की कीमत समझी होती है।
प्रधानमंत्री ने सवा सौ करोड़ देशवासियों को अपना परिवार बताते हुए कहा कि जब मन में अपनेपन का भाव पैदा होता तो फिर शरीर में ऊर्जा अपने आप आती है और थकान कभी घर का दरवाजा नहीं देखती है। वे इसी भाव से सेवा कार्य में जुटे हैं। परीक्षा के समय में सकारात्मक माहौल के महत्व को रेखांकित करते हुए मोदी ने कहा कि अभिभावकों का सकारात्मक रवैया बच्चों की जिंदगी की बहुत बड़ी ताकत बन जाता है। उन्होंने कहा, ” परीक्षा को हम सिर्फ एक परीक्षा मानें तो इसमें मजा आएगा।
उन्होंने कहा कि मां बाप और शिक्षकों को बच्चों की तुलना नहीं करनी चाहिए। इससे बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। हमें हमेशा बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए। छात्र जीवन में अवसाद के संबंध में एक सवाल के जवाब में मोदी ने कहा कि आशा और अपेक्षा जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों के अवसाद को हल्के में नहीं लेना चाहिए। अवसाद या तनाव से बचने के लिए काउंसलिंग से भी संकोच नहीं करना चाहिए, बच्चों के साथ सही तरह से बात करने वाले विशेषज्ञों से संपर्क करना चाहिए।

छात्रों को दिल्ली सरकार का तोहफा

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
चुनावी वर्ष प्रारम्भ होने पर जनता को लुभाने के प्रयासों में मुख्यमन्त्री अरविन्द केजरीवाल ने छात्रों को आकर्षित करने दिल्ली परिवहन की वातानुकूलित बसों में रियायती पासों में सफर करने की अनुमति दे दी है। 
दिल्ली के छात्रों पर केजरीवाल सरकार खासी मेहरबान है और उसने छात्रों को बड़ा तोहफा दिया है। दिल्‍ली के छात्र अब स्‍टूडेंट पास पर डीटीसी की AC बसों में भी यात्रा कर पायेंगे इस बारे में नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। हालांकि दिल्ली के छात्रों को अभी भी रियायती डीटीसी बस पास जारी होता था लेकिन ये नॉन एसी बसो के लिए था।
सरकार के इस कदम से छात्र अब AC बसों का भी लुत्फ उठा पायेंगे, इसे स्टूडेट्स के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। पहले डीटीसी की एसी बसों में स्टूडेंट्स पास की नई कैटिगरी को डीटीसी बोर्ड ने मंजूरी दी थी और अब आने वाले समय में नॉन एसी बसों के साथ एसी बसों में भी स्टूडेंट्स के पास चलेंगे। एसी बसों में स्टूडेंट्स पास लागू होने से डीटीसी का जो खर्चा होगा, उसकी पूरी भरपाई दिल्ली सरकार करेगी।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने परिवहन मंत्री को निर्देश दिया था कि एसी बसों में स्टूडेंट पास लागू करने के प्रपोजल को जल्द लागू करने के लिए कदम उठाए जाएं।
दिल्‍ली सरकार के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि दिल्‍ली के छात्रों को बधाई, जैसा कि हमने वादा किया था कि अब आप सभी एसी बसों में भी स्‍टूडेंट पास का इस्‍तेमाल कर सकेंगे। पिछले काफी समय से एसी बसों में भी स्‍टूडेंट पास लागू किए जाने की मांग की जा रही थी।
अभी छात्रों को 100 रुपये में सिंगल रूट और 150 रुपये में सभी रूट की सिर्फ सामान्य बसों के लिए बस पास जारी किया जाता था। दिल्ली सरकार के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के छात्रों को रियायती बस पास का फायदा मिलेगा साथ ही एमसीडी स्कूलों के स्टूडेंटस को भी इस स्कीम से फायदा पहुंचेगा।
अभी छात्रों को 100 रुपये में सिंगल रूट और 150 रुपये में सभी रूट की सिर्फ सामान्य बसों के लिए बस पास जारी किया जाता था। बताया जा रहा है कि वित्त विभाग का मानना है कि इससे डीटीसी और सरकार पर करीब 4.32 करोड़ रुपये का भार बढ़ेगा। 

मेट्रो में सीनियर सिटीजन और छात्रों को राहत देने की तैयारी

मेट्रो में सीनियर सिटीजन और छात्रों को मिल सकती है राहत, किराए में छूट देने की तैयारी में सरकारएनसीआर में बढ़े हुए किराए के कारण मेट्रो के यात्रियों की संख्या में आई कमी को देखते हुए सरकार जल्द ही सीनियर सिटीजन और छात्रों को किराए में छूट दे सकती है। कहा जा रहा है कि शहरी विकास मंत्रालय इस छूट के लिए प्लान तैयार कर रहा है। अभी इसके लिए मंत्रालय को तकनीक आधारित सोल्युशन खोजने के लिए कहा गया है। जल्द ही सरकार इस मामले को किराया निर्धारित करने वाली समिति को भेजेगी इसके बाद मेट्रो में बुजुर्गों और छात्रों को मेट्रो किराए में छूट मिलेगी
सरकार के इस प्रयास से आभास हो गया है कि चुनाव की तैयारी शुरू हो गयी है। अब जनता को अपनी कारगुजारी पर पर्दा डालने के लिए, लॉलीपॉप बाँटने में सरकार व्यस्त हो गयी है। मेट्रो में यात्रियों की संख्या में कमी किराये में वृद्धि करते ही शुरू हो गयी थी, तब किसी को होश नहीं आया। परन्तु चुनाव सिर पर देख, छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों को छूट देने का प्रयास केवल जनता को भ्रमित करने वाला मायाजाल के समान है। जनता समझेगी, सरकार को जनता को होने वाली हर दिग्कत से अवगत है और उसका समाधान निकालने में दिन-रात व्यस्त रहती है।   
पिछले साल सितंबर माह में केंद्रीय शहरी और विकास मंत्रालय ने 5-12 किमी का किराया 20 रुपए से बढ़ाकर 30 रुपये और 12- 21 किमी के स्लैब का किराया 30 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपए किया था। सूत्रों का कहना है कि शहरी विकास मंत्रालय दोनों स्लैब में कटौती पर पुनर्विचार के लिए जल्द कह सकती है। इसके अलावा शहरी विकास मंत्रालय दिल्ली मेट्रो ट्रेन में वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों के लिए किराये के लिए नई स्कीम भी ला सकती है
मालूम हो कि दिल्ली मेट्रो के किराए में बढ़ोतरी के मामले में दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) बोर्ड ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद मेट्रो किराए में वृद्धि लागू हो गई थी। दिल्ली मेट्रो के किराए में एक साल के भीतर यह दूसरी बढ़ोतरी है। बढ़े हुए किराये का पहला फेज़ लागू होने से पहले मेट्रो का न्यूनतम किराया आठ रुपये था, जो अब 10 रुपये हो गया है. जबकि अधिकतम किराया 30 रुपये होता था, जो मई में 50 रुपये किया गया और अब तीन अक्टूबर के बाद 60 रुपये हो गया है