जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ को कांग्रेस के मंच से गाली दी गयी है उसके दुष्परिणाम कांग्रेस ही नहीं INDI गठबंधन को भी बहुत नुकसान होने वाला है। गौरतलब यह है कि जब सोनिया गाँधी ने गुजरात चुनावों में मोदी को "मौत का सौदागर" कहा था अंजाम यह हो रहा है कि गुजरात में आज तक सत्ता के पास तक नहीं पहुँच पा रही। जनता बराबर नकार रही है। राहुल गाँधी जो "मोहब्बत की दुकान" चला रहे हैं वह आज नफरत की दुकान बन चुकी है। इस कटु सत्य को कोई कांग्रेसी नहीं नकार सकता। LoP राहुल की भाषाशैली LoP की नहीं।
बिहारियों का अपमान करने वाले नेताओं को बर्दाश्त नहीं करेगा वोटर
ओपिनियन पोल में महागठबंधन की करारी हार का संकेत इसलिए भी है कि बिहार में कांग्रेस और इंडी ब्लॉक के नेताओं का दोगलापन एक बार फिर एक्सपोज हो गया है। यह दुर्भाग्य है कि जो नेता अपने-अपने राज्यों में बिहार और यहां के लोगों का लगातार अपमान करते आ रहे हैं। जिनके राज्यों में बिहारियों से कहा जाता है कि वो ये राज्य छोड़कर चले जाएं। बिहारियों की इनके राज्यों में ना कोई जगह है और ना ही जरूरत। इंडी गठबंधन के जो नेता खुलेआम कहते हैं कि कि बिहारियों को नौकरियों पर मत रखिए। अजब तमाशा और दोमुहांपन देखिए कि जो नेता अपने राज्यों में गौरवशाली बिहार के लोगों को गालियां देते हैं, उनका अपमान करते हैं, वही नेता आजकल बिहार में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के साथ गाड़ी पर खड़े होकर वोट मांगने की हिमाकत कर रहे हैं। उन्हें इस बात की भी शर्म नहीं है कि अब वे जिन लोगों के बीच खड़े हैं, उनके लिए कभी कितने गंदे और गुंडे जैसे शब्द इस्तेमाल किए थे। बड़ा सवाल यह भी है कि जब ‘राहुल गांधी के दोस्त’ ये नेता बिहारियों का अपमान कर रहे थे, तब उन्हें बिहारी अस्मिता की याद क्यों नहीं आई थी? बिहार की जनता-जनार्दन के दिल में लगे वो शब्दों के जख्म फिर से हरे हो गए हैं और वह अब इनको माफ करने वाली नहीं है। इसलिए अब बिहारियों का अपमान करने वाले नेताओं को बिहार का मतदाता बर्दाश्त नहीं करेगा।
टाइम्स नाउ-जेवीसी जनमत सर्वेक्षण के अनुसार भारतीय जनता पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड) और अन्य दलों का राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन एक और कार्यकाल के लिए सत्ता में आ सकता है। इस जनमत सर्वेक्षण में सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए पांच साल पहले के चुनावों की तुलना में बड़ी जीत की भविष्यवाणी की गई है। हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जद (यू) को हल्का झटका लग सकता है। क्योंकि जनमत सर्वेक्षण में 29 सीटों पर जीत और 2 पर बढ़त की भविष्यवाणी की गई है, जिससे इसकी अनुमानित संख्या अधिकतम 31 सीटों तक पहुंच सकती है।
बिहार में भाजपा की सीटों पर होगी उल्लेखीय बढ़ोतरीसर्वेक्षण के नतीजे साफ-साफ इशारा करते हैं कि एनडीए के भीतर भाजपा को आगामी चुनावों में उल्लेखनीय बढ़त मिलने जा रही है। उनकी सीटें पिछले चुनावों के 74 से बढ़कर 81 हो जाने का अनुमान है। सर्वेक्षण के अनुसार, पार्टी को 64 सीटें जीतने का अनुमान है, जबकि 17 अन्य सीटों पर उसे बढ़त हासिल है। दूसरी ओर नीतीश की पार्टी ने 2020 के चुनावों में 43 सीटें हासिल कीं, जो कि उसके पहले के 71 सीटों से 28 सीटें कम थीं। यदि जनमत सर्वेक्षण की भविष्यवाणियां सही साबित होती हैं, तो 12 सीटों की और गिरावट के अनुमान के साथ, जेडी(यू) बहुत कमजोर स्थिति में रह सकती है।
महागठबंधन में तेजस्वी और लालू की राजद की हालत खस्तादूसरी ओर इस जनमत सर्वेक्षण महागठबंधन के भीतर तेजस्वी और लालू प्रसाद यादव की राजद की हालत खस्ता होने के संकेत मिल रहे हैं। तेजस्वी यादव भले ही शेखचिल्ली के सपने देखते हुए स्वयंभू सीएम बनने का ऐलान कर रहे हों। भले ही वे राहुल गांधी की चापलूसी में निचले स्तर तक आ गए हों, लेकिन बिहार की जनता इस बार भी उनको नकारने वाली है। राजद केवल 52 सीटें जीतने की ओर अग्रसर है। उसको 37 सीटों पर जीत और 15 पर बढ़त मिलने का अनुमान है। यह 2020 के चुनावों में जीती गई 75 सीटों की तुलना में इसकी संख्या में महत्वपूर्ण गिरावट होगी, जिससे यह सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी।
कांग्रेस का सबसे बुरा प्रदर्शन, आधी हो सकती हैं सीटेंटाइम्स नाउ-जेवीसी जनमत सर्वेक्षण के अनुसार चुनाव से सबसे बुरी हालत चुनाव से पहले सबसे ज्यादा उछलकूद मचा रहे राहुल गांधी और उनकी पार्टी की होने वाली है। वे हार के शतक के करीब अपनी पार्टी की एक और करारी हार का स्वाद चखेंगे। आगामी चुनाव में कांग्रेस का सबसे बुरा प्रदर्शन होने का अनुमान है। जनमत सर्वेक्षण के मुताबिक कांग्रेस की सीटें भी 2020 के चुनावों में 19 सीटों से घटकर करीब-करीब आधी 10 सीटों (8 सीटों पर जीत और 2 सीटों पर बढ़त) पर आ सकती हैं। बिहार के लिए टाइम्स नाउ-जेवीसी पोल पूर्वानुमानों के अनुसार, वाम दलों और अन्य को सर्वोत्तम स्थिति में कुल मिलाकर 13 से 15 सीटें जीतने का अनुमान है।
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी का खुल सकता है खाताएनडीए या महागठबंधन से गठबंधन न करने वाली अन्य पार्टियों में, एआईएमआईएम को 3 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी 2 सीटों के साथ शुरुआत कर सकती है। प्रशांत किशोर जिनको पीके के नाम के जाना जाता है, वे पहले राजनीतिक रणनीतिकार रहे हैं। पीके ने कई प्रमुख भारतीय राजनीतिक दलों के लिए सफलतापूर्वक रणनीतिकार के रूप में कार्य किया है, जिनमें बीजेपी, जेडीयू, बीजेपी, कांग्रेस, आप, वाईएसआर कांग्रेस, डीएमके और टीएमसी शामिल है। जनमत सर्वेक्षण के अनुमानों के अनुसार, बहुजन समाज पार्टी को एक सीट मिलने का अनुमान है, जबकि 26 सीटों पर कड़ा मुकाबला होने की संभावना है।
एनडीए तिरहुत क्षेत्र की 49 सीटों में से 35 पर आगेसर्वेक्षण के निष्कर्षों का क्षेत्रवार ब्यौरा बताता है कि एनडीए तिरहुत क्षेत्र की 49 सीटों में से 35 पर आगे है, जबकि महागठबंधन 11 सीटें जीतने की ओर अग्रसर है और 3 सीटों पर कड़ी टक्कर होने की संभावना है। भाजपा मिथिला क्षेत्र में भारी जीत हासिल करने के लिए तैयार है। जनमत सर्वेक्षणों के अनुमानों के अनुसार, एनडीए को 42 में से 31 सीटों पर जीत मिलेगी, महागठबंधन को 7 सीटें, जन सुराज पार्टी को 1 सीट मिलेगी तथा 3 सीटों पर कड़ा मुकाबला होगा। अंग क्षेत्र की 23 सीटों में से एनडीए 15 पर आगे है, जबकि महागठबंधन को 3 सीटें मिलने का अनुमान है। 5 सीटें चुनावी मैदान के रूप में चिह्नित की गई हैं।
सीमांचल क्षेत्र की 24 सीटों पर एनडीए-महागठबंधन में कड़ी टक्कर
इसके अलावा सीमांचल क्षेत्र की 24 सीटों में से एनडीए और महागठबंधन दोनों को 10-10 सीटें जीतने का अनुमान है, जबकि एआईएमआईएम को 3 सीटें मिल सकती हैं और एक सीट पर कड़ी टक्कर हो सकती है। मगध क्षेत्र की 50 सीटों में से महागठबंधन को 24 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि एनडीए 21 सीटों पर आगे चल सकता है, जबकि 5 सीटों पर कड़ी टक्कर हो सकती है। भोजपुर की 55 सीटों में से एनडीए और महागठबंधन को क्रमशः 24 और 20 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि जन सुराज पार्टी और बसपा को एक-एक सीट मिल सकती है। 9 सीटों पर कड़ा मुकाबला होने की संभावना है।
