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ओपिनियन पोल ने राहुल-तेजस्वी के उड़ाए होश, बिहार में बीजेपी की बढ़ेंगी सीटें और एनडीए की बनेगी सरकार! मोदी की माँ को दी गाली INDI गठबंधन को चारों खाने चित कर देगी

जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ को कांग्रेस के मंच से गाली दी गयी है उसके दुष्परिणाम कांग्रेस ही नहीं INDI गठबंधन को भी बहुत नुकसान होने वाला है। गौरतलब यह है कि जब सोनिया गाँधी ने गुजरात चुनावों में मोदी को "मौत का सौदागर" कहा था अंजाम यह हो रहा है कि गुजरात में आज तक सत्ता के पास तक नहीं पहुँच पा रही। जनता बराबर नकार रही है। राहुल गाँधी जो "मोहब्बत की दुकान" चला रहे हैं वह आज नफरत की दुकान बन चुकी है। इस कटु सत्य को कोई कांग्रेसी नहीं नकार सकता। LoP राहुल की भाषाशैली LoP की नहीं।  
राहुल फर्जी गांधी की नीच व घृणित मानसिकता आज जगजाहिर है, 2014 में जब माननीय मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने तो यह बार बार तुम्हारा पीएम कह कर जनता को संबोधित करता था, लेकिन इसकी पहली बड़ी गन्दी हरकत कि देश व मोदी जी के लिए नफरत तब पता चली जब एक चुनावी मीटिंग में इसने कहा कि देश के युवा 6 महीने में मोदी को डण्डे मारेंगे, तभी 2017 में चीन के साथ डोकलाम विवाद पर यह देशद्रोही चीनियों से छुप-छुप कर मिलता था और जिसे कांग्रेस नकार देती थी लेकिन जब पत्रकारों ने इसको चीनियों के टेंट से पकड़ा तब माना, तब इसने और इसके चमचों में ट्विटर पर हद कर दी और वह भारतीय सेना का मनोबल गिराने के लिए निरंतर पोस्ट करते थे, गलवान घाटी में चीन से हमारी भिड़ंत में जिसमें हमारे भी 20 वीर सैनिक बलिदान हुए थे और हमारी वीर सेना ने चीन के 45 से ज्यादा बोने सैनिकों की गर्दन तोड़कर मार दिया था तब भी इसने कहा कि हमारे वीर सैनिक चीनी सैनिकों से पिट गए, इस फर्जी गांधी खानदान को सिर्फ हराम की खाने की आदतें पड़ी हुई थी तो अब यह बिलबिला रहे हैं।
सनातनी भारतवर्ष, सनातन धर्म और भारत की सुरक्षा की दृष्टि से फिरोज जहांगीर का पोता राहुल खान (नकली गांधी) ही सबसे बड़ा खतरा है ये व्यक्ति और परिवार भारतवर्ष में धर्मांतरण से सनातन धर्म को नष्ट करना चाहता है, विदेशी मजहब के घुसपैठियों को भारतवर्ष में ला कर सनातनी परिवारों पर बंगलादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भी बड़ा कहर, मार-काट,और भारतवर्ष के अशांत करना चाहता है देशद्रोही कांग्रेस पार्टी ने पिछले 70 सालों में सनातन धर्म, संस्कृति और सभ्यता को बुरी तरह कुचला है सनातन धर्म से जुड़े भोले भाले ग्रामीण व आदिवासी जनजाति का धर्म परिवर्तन करा कर ईसाई मिशनरियों के हाथों की कठपुतली बनाकर कर सनातन धर्म के खिलाफ खड़ा कर रहा है, जब भी यह विदेश में जाता हैं हर भारत विरोधी इसके साथ होता है वहां से यह देश में अराजकता व अव्यवस्था फैलाने के षड्यंत्र रचता हैं।
भारतीय सेना, जनता, सनातनी उधोगपतियों, सनातन धर्म, संस्कृति और सभ्यता का बदलना इस नकली गांधी(खान) परिवार का लक्ष्य है
सभी भारतवासियों को इस राहुल खान व नकली गांधी परिवार का पूरे देश में बहिष्कार करना चाहिए।
बिहार में साल के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनावों में ना तो राहुल गांधी की मटन-बिरयानी और ना ही तेजस्वी की दाल गलने वाली है। वोट अधिकार यात्रा राहुल-तेजस्वी निकाल रहे हैं, लेकिन बिहार की जनता-जनार्दन तो एनडीए गठबंधन की वोटों से झोली भरने वाली है। आगामी बिहार विधानसभा चुनावों के लिए टाइम्स नाउ-जेवीसी जनमत सर्वेक्षण के अनुसार एनडीए 243 सदस्यीय विधानसभा में 136 सीटें जीतने की ओर अग्रसर है, जबकि राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व वाला महागठबंधन, जिसमें कांग्रेस और वामपंथी दल शामिल हैं, राज्य में 75 सीटों तक सीमित रह सकता है, जहां बहुमत का आंकड़ा 122 है। दरअसल, बिहार की जनता महागठबंधन में शामिल दलों का बिहार में जंगलराज देख चुकी है। इसलिए एक बार फिर पीएम मोदी की ताल में ताल मिलाते हुए राज्य में डबल इंजन सरकार ही चाहती है।
  
लेकिन नरेंद्र मोदी की स्वर्गीय माँ को गाली देने से संभव है NDA की बजाए BJP ही सूपड़ा साफ कर सकती है। क्यों ओपिनियन पोल मोदी की माँ को गाली देने से पहले का है। 2001 से लेकर 2025 तक 100 से ज्यादा गालियां देकर INDI गठबंधन ने अपनी नीचता दिखा चुकी है। नरेंद्र मोदी वह प्रधानमंत्री है जिसे अगर विश्व ने अपने सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया है तो उससे कहीं ज्यादा INDI गठबंधन ने गालियां देकर अपमानित किया है। फिर भी मोदी पहाड़ बन इन सबके सामने खड़ा है। 

बिहारियों का अपमान करने वाले नेताओं को बर्दाश्त नहीं करेगा वोटर
ओपिनियन पोल में महागठबंधन की करारी हार का संकेत इसलिए भी है कि बिहार में कांग्रेस और इंडी ब्लॉक के नेताओं का दोगलापन एक बार फिर एक्सपोज हो गया है। यह दुर्भाग्य है कि जो नेता अपने-अपने राज्यों में बिहार और यहां के लोगों का लगातार अपमान करते आ रहे हैं। जिनके राज्यों में बिहारियों से कहा जाता है कि वो ये राज्य छोड़कर चले जाएं। बिहारियों की इनके राज्यों में ना कोई जगह है और ना ही जरूरत। इंडी गठबंधन के जो नेता खुलेआम कहते हैं कि कि बिहारियों को नौकरियों पर मत रखिए। अजब तमाशा और दोमुहांपन देखिए कि जो नेता अपने राज्यों में गौरवशाली बिहार के लोगों को गालियां देते हैं, उनका अपमान करते हैं, वही नेता आजकल बिहार में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के साथ गाड़ी पर खड़े होकर वोट मांगने की हिमाकत कर रहे हैं। उन्हें इस बात की भी शर्म नहीं है कि अब वे जिन लोगों के बीच खड़े हैं, उनके लिए कभी कितने गंदे और गुंडे जैसे शब्द इस्तेमाल किए थे। बड़ा सवाल यह भी है कि जब ‘राहुल गांधी के दोस्त’ ये नेता बिहारियों का अपमान कर रहे थे, तब उन्हें बिहारी अस्मिता की याद क्यों नहीं आई थी? बिहार की जनता-जनार्दन के दिल में लगे वो शब्दों के जख्म फिर से हरे हो गए हैं और वह अब इनको माफ करने वाली नहीं है। इसलिए अब बिहारियों का अपमान करने वाले नेताओं को बिहार का मतदाता बर्दाश्त नहीं करेगा।

पांच साल पहले के चुनावों की तुलना में एनडीए की बड़ी जीत

टाइम्स नाउ-जेवीसी जनमत सर्वेक्षण के अनुसार भारतीय जनता पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड) और अन्य दलों का राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन एक और कार्यकाल के लिए सत्ता में आ सकता है। इस जनमत सर्वेक्षण में सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए पांच साल पहले के चुनावों की तुलना में बड़ी जीत की भविष्यवाणी की गई है। हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जद (यू) को हल्का झटका लग सकता है। क्योंकि जनमत सर्वेक्षण में 29 सीटों पर जीत और 2 पर बढ़त की भविष्यवाणी की गई है, जिससे इसकी अनुमानित संख्या अधिकतम 31 सीटों तक पहुंच सकती है।

बिहार में भाजपा की सीटों पर होगी उल्लेखीय बढ़ोतरी

सर्वेक्षण के नतीजे साफ-साफ इशारा करते हैं कि एनडीए के भीतर भाजपा को आगामी चुनावों में उल्लेखनीय बढ़त मिलने जा रही है। उनकी सीटें पिछले चुनावों के 74 से बढ़कर 81 हो जाने का अनुमान है। सर्वेक्षण के अनुसार, पार्टी को 64 सीटें जीतने का अनुमान है, जबकि 17 अन्य सीटों पर उसे बढ़त हासिल है। दूसरी ओर नीतीश की पार्टी ने 2020 के चुनावों में 43 सीटें हासिल कीं, जो कि उसके पहले के 71 सीटों से 28 सीटें कम थीं। यदि जनमत सर्वेक्षण की भविष्यवाणियां सही साबित होती हैं, तो 12 सीटों की और गिरावट के अनुमान के साथ, जेडी(यू) बहुत कमजोर स्थिति में रह सकती है।

महागठबंधन में तेजस्वी और लालू की राजद की हालत खस्ता

दूसरी ओर इस जनमत सर्वेक्षण महागठबंधन के भीतर तेजस्वी और लालू प्रसाद यादव की राजद की हालत खस्ता होने के संकेत मिल रहे हैं। तेजस्वी यादव भले ही शेखचिल्ली के सपने देखते हुए स्वयंभू सीएम बनने का ऐलान कर रहे हों। भले ही वे राहुल गांधी की चापलूसी में निचले स्तर तक आ गए हों, लेकिन बिहार की जनता इस बार भी उनको नकारने वाली है। राजद केवल 52 सीटें जीतने की ओर अग्रसर है। उसको 37 सीटों पर जीत और 15 पर बढ़त मिलने का अनुमान है। यह 2020 के चुनावों में जीती गई 75 सीटों की तुलना में इसकी संख्या में महत्वपूर्ण गिरावट होगी, जिससे यह सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी।

कांग्रेस का सबसे बुरा प्रदर्शन, आधी हो सकती हैं सीटें

टाइम्स नाउ-जेवीसी जनमत सर्वेक्षण के अनुसार चुनाव से सबसे बुरी हालत चुनाव से पहले सबसे ज्यादा उछलकूद मचा रहे राहुल गांधी और उनकी पार्टी की होने वाली है। वे हार के शतक के करीब अपनी पार्टी की एक और करारी हार का स्वाद चखेंगे। आगामी चुनाव में कांग्रेस का सबसे बुरा प्रदर्शन होने का अनुमान है। जनमत सर्वेक्षण के मुताबिक कांग्रेस की सीटें भी 2020 के चुनावों में 19 सीटों से घटकर करीब-करीब आधी 10 सीटों (8 सीटों पर जीत और 2 सीटों पर बढ़त) पर आ सकती हैं। बिहार के लिए टाइम्स नाउ-जेवीसी पोल पूर्वानुमानों के अनुसार, वाम दलों और अन्य को सर्वोत्तम स्थिति में कुल मिलाकर 13 से 15 सीटें जीतने का अनुमान है। 

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी का खुल सकता है खाता

एनडीए या महागठबंधन से गठबंधन न करने वाली अन्य पार्टियों में, एआईएमआईएम को 3 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी 2 सीटों के साथ शुरुआत कर सकती है। प्रशांत किशोर जिनको पीके के नाम के जाना जाता है, वे पहले राजनीतिक रणनीतिकार रहे हैं। पीके ने कई प्रमुख भारतीय राजनीतिक दलों के लिए सफलतापूर्वक रणनीतिकार के रूप में कार्य किया है, जिनमें बीजेपी, जेडीयू, बीजेपी, कांग्रेस, आप, वाईएसआर कांग्रेस, डीएमके और टीएमसी शामिल है। जनमत सर्वेक्षण के अनुमानों के अनुसार, बहुजन समाज पार्टी को एक सीट मिलने का अनुमान है, जबकि 26 सीटों पर कड़ा मुकाबला होने की संभावना है।

एनडीए तिरहुत क्षेत्र की 49 सीटों में से 35 पर आगे

सर्वेक्षण के निष्कर्षों का क्षेत्रवार ब्यौरा बताता है कि एनडीए तिरहुत क्षेत्र की 49 सीटों में से 35 पर आगे है, जबकि महागठबंधन 11 सीटें जीतने की ओर अग्रसर है और 3 सीटों पर कड़ी टक्कर होने की संभावना है। भाजपा मिथिला क्षेत्र में भारी जीत हासिल करने के लिए तैयार है। जनमत सर्वेक्षणों के अनुमानों के अनुसार, एनडीए को 42 में से 31 सीटों पर जीत मिलेगी, महागठबंधन को 7 सीटें, जन सुराज पार्टी को 1 सीट मिलेगी तथा 3 सीटों पर कड़ा मुकाबला होगा। अंग क्षेत्र की 23 सीटों में से एनडीए 15 पर आगे है, जबकि महागठबंधन को 3 सीटें मिलने का अनुमान है। 5 सीटें चुनावी मैदान के रूप में चिह्नित की गई हैं।

 सीमांचल क्षेत्र की 24 सीटों पर एनडीए-महागठबंधन में कड़ी टक्कर

इसके अलावा सीमांचल क्षेत्र की 24 सीटों में से एनडीए और महागठबंधन दोनों को 10-10 सीटें जीतने का अनुमान है, जबकि एआईएमआईएम को 3 सीटें मिल सकती हैं और एक सीट पर कड़ी टक्कर हो सकती है। मगध क्षेत्र की 50 सीटों में से महागठबंधन को 24 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि एनडीए 21 सीटों पर आगे चल सकता है, जबकि 5 सीटों पर कड़ी टक्कर हो सकती है। भोजपुर की 55 सीटों में से एनडीए और महागठबंधन को क्रमशः 24 और 20 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि जन सुराज पार्टी और बसपा को एक-एक सीट मिल सकती है। 9 सीटों पर कड़ा मुकाबला होने की संभावना है।

तमिलनाडु : अपने वेश्यालय को बचाने गए वकील पर मद्रास हाई कोर्ट ने लगाया 10000 रूपए का जुर्माना : जज ने कहा- इसके कागज चेक करो

            वकील पर 10000 रूपए का जुर्माना लगाया (चित्र प्रतीकात्मक , साभार: Livelaw & Leonardo AI)
मद्रास हाई कोर्ट में एक वकील ने अपने वेश्यालय के विरुद्ध कार्रवाई के खिलाफ याचिका दायर कर दी। वकील ने दावा किया कि वह लोगों को स्वेच्छा से सेक्स के लिए मिलाने का काम करता है। हाई कोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई करते हुए वकील की डिग्री जाँचने के आदेश दे दिए।

मद्रास हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई करते समय बिफर गया। हाई कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि कोई वकील वेश्यालय जैसी चीज को बचाने के लिए याचिका लेकर आया है। हाई कोर्ट ने इसे बड़े दुख की बात बताया और कहा कि यह वकील भी कन्याकुमारी से है जो 100% साक्षर है।

कोर्ट इस याचिका से उखड़ गया और वेश्यालय चलाने वाले वकील से उसकी डिग्री और उसका बार काउंसिल सर्टिफिकेट दिखाने का आदेश जारी कर दिया। कोर्ट ने बार काउंसिल से कहा कि अच्छे कॉलेज से पढ़े वकीलों को ही पंजीकृत करे और इधर उधर से डिग्री लेने वालों को मान्यता ना दे। कोर्ट ने बार काउंसिल को उसके कागज जाँचने के आदेश भी दे दिए हैं।

कोर्ट ने कहा कि वकालत एक इज्जतदार पेशा है और वकील सामाजिक बदलाव के इंजीनियर हैं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने एक गरीब लड़की की गरीबी का फायदा उठा कर उसको वेश्यावृत्ति में झोंका है। कोर्ट ने वकील की याचिका को खारिज कर दिया और उस पर 10,000 रूपए का जुर्माना भी लगाया।

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरई बेंच में एक वकील मुरुगन ने एक याचिका दायर की थी। याचिका में माँग की गई थी कि उसके ऊपर नागरकोइल शहर में वेश्यालय चलाने के कारण दर्ज की गई FIR को रद्द कर दिया जाए और उन पुलिस वालों पर कार्रवाई की जाए जो इस धंधे में खलल डाल रहे थे।

मुरुगन ने हाई कोर्ट में याचिका लगाकर कहा था कि देश में सहमति से किया गया सेक्स मान्य है और वह ऐसे ही लोगों को मिलवाता है। मुरुगन ने अपन वेश्यालय पर कार्रवाई के पीछे रिश्तेदारों की साजिश की भी बात कही थी। उसने हाई कोर्ट से उसके खिलाफ सभी मामले रद्द करने की माँग की थी।

इस मामले में फरवरी, 2024 में नागरकोइल के इस वेश्यालय पर मारे गए छापे में एक 17 वर्ष की लड़की को भी बचाया गया था। लड़की ने पुलिस को बताया था कि उसका यहाँ शोषण हो रहा था। इस कार्रवाई के बाद मुरुगन के विरुद्ध POCSO समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।

कब-कहाँ-कैसे करें सेक्स, चर्च में शादी के बाद थमाया नोट: महिला की आपबीती सुन हाई कोर्ट भी हैरान

2012 में केरल के एक चर्च में उसकी शादी हुई। पहली ही रात ससुरालवालों ने उसे एक नोट थमाया। इसमें बताया गया था कि वह कब, कहाँ और कैसे सेक्स करे, जिससे वह एक ‘संस्कारी बच्चा’ पैदा कर सके। इस महिला की आपबीती सुनकर केरल हाई कोर्ट के जस्टिस भी हैरान रह गए।

हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पीड़ित महिला ने ससुराल वालों पर कार्रवाई की माँग की है। उसका कहना है कि ससुराल के लोग उसे लड़का पैदा करने के लिए अलग-अलग तरीके बताते थे। इसके लिए नोट देते थे। एक पाउडर भी दिया गया था।

केरल का है मामला

39 वर्षीय पीड़ित महिला केरल के कोल्लम जिले की रहने वाली है। उसने न्याय पाने के लिए केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। महिला ने बताया है कि उसकी 12 अप्रैल 2012 को मुवात्तुपूजा के होली मैगी चर्च में शादी हुई थी। शादी की रात पति ने उसे एक नोट दिया। इस नोट में इस बात को लेकर जानकारी दी गई थी कि वह कैसे एक लड़के को जन्म देने के लिए गर्भधारण कर सकती है।
इस नोट में बताया गया था कि किस समय, किस जगह और किस तरीके से संभोग करने पर 95% संभावना एक अच्छे, गोरे और बुद्धिमान लड़के को पैदा करने की है। महिला ने बताया कि उसके ससुराल वालों ने दावा किया यही विधि अमेरिका में रहने वाले उनके एक रिश्तेदार भी आजमा चुके हैं।
महिला ने बताया कि उसकी सास ने उसे कुछ पाउडर खिलाए और कहा कि इससे गोरा लड़का पैदा होगा। जो नोट महिला को दिया गया था, उसमें उससे गर्भ के दौरान महान व्यक्तित्वों के विषय में सोचने को कहा गया था। जब महिला ने सास से इस विषय में पूछा तो उनका जवाब सन्न करने वाला था। महिला से उसकी सास ने कहा कि ‘लड़कियाँ आर्थिक बोझ’ होती हैं, इसलिए वह अपने घर में लड़की नहीं पैदा होते देखना चाहती। महिला का कहना था कि लड़कियाँ पैसे ले जाती हैं, जबकि लड़के पैसे लाते हैं। महिला ने कहा है कि यह बहुत ही अपमानजनक था।
महिला ने बताया कि वह 2014 में अपने पति के साथ ब्रिटेन चली गई थी। यहाँ जब वह गर्भवती हो गई तो उसके पति ने उसके साथ बदसलूकी की। उसके पति ने आरोप लगाया कि वह गलत समय पर गर्भवती हुई है। पति ने उसके साथ अत्याचार करते हुए तीन माह बाद उसे घर भेज दिया, जहाँ कुछ समय बाद उसने एक लड़की को जन्म दिया।
महिला ने बताया कि बेटी के पैदा होने के बाद पति उससे और भी खिन्न हो गया। वह बेटी और उससे मिलने भी नहीं आता था और ना ही बेटी के लालन-पालन में कोई रूचि दिखाता था। महिला ने बताया कि वह अपनी बेटी को लेकर इस दौरान एक माह के लिए ब्रिटेन भी गई। लेकिन एक माह तक उसका पति अपनी बच्ची को देखने भी नहीं आया।

तलाक के बाद भी पीड़ा

महिला ने बताया कि वह इन सब चीजों से परेशान हो गई थी। बीते कुछ समय से तलाक की कार्यवाही चल रही थी। इसके अंतर्गत 2022 में अदालत ने निर्णय दिया कि उसके पति को हर महीने भरण-पोषण की धनराशि देनी होगी। इसके विरुद्ध भी उसके पति ने एक याचिका डाल दी। महिला ने बताया कि इसके बाद उसने कानूनी बारीकियों के विषय में जानकारी इकट्ठा की और अपने पति तथा ससुराल पक्ष के विरुद्ध मुकदमा दायर करने का निर्णय लिया।
महिला ने गर्भधारण पूर्व और प्रसवपूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994 के तहत अपने ससुराल पक्ष के विरुद्ध मुकदमा दायर किया है। यह किसी महिला के गर्भधारण के दौरान बच्चे के लिंग की जाँच या निर्धारण सम्बन्धी कार्यों पर रोक लगाता है। यह क़ानून देश में बच्चियों को कोख में ही मार दिए जाने से रोकने के लिए लाया गया था। केरल हाई कोर्ट ने इस मामले में महिला के पति और उसके परिजनों से जवाब माँगा है। अगली सुनवाई 29 फरवरी को है।