सूर्या की हत्या में शामिल नवाब, फरहान, आतिफ और शारिक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद से असद फरार था, जिस पर 50 हजार रुपए इनाम की घोषणा की गई थी। पुलिस ने सूचना मिलने पर उसे इंदिरापुरम में ढेर कर दिया। इससे पहले इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस लगातार सतर्क है। बकरीद के दिन सूर्या चौहान की घर से बुला कर हत्या कर दी गई। उसे ‘आओ कुर्बानी कैसे दी जाती है, तुम्हें दिखाते हैं…’ कह कर घर से बुलाकर सूर्या को ले जाने और उसकी चाकूओं से निर्मम हत्या करने पर लिबरल वामपंथी गैंग का मुँह नहीं खुला।
घटना की निंदा करना तो दूर प्रोपेगेंडाबाजों ने घटना की जानकारी देना भी जरूरी नहीं समझा। देता भी कैसे? इस खबर से उनकी पोल खुल जाती, जो हमेशा देश में मुस्लिमों पर तथाकथित ‘अत्याचार’ की दुहाई देते-देते नहीं थकते। ट्वीट करते हैं, रिट्वीट करते हैं, लंबी-लंबी पोस्ट लिखते हैं, सरकार की आलोचना करते हैं। लेकिन, 17 साल के हिन्दू युवक की इस तरह हत्या राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद के खोड़ा में हो जाती है, ये कुछ नहीं बोलते।
Republic Bharat पर अपने शो महाभारत पर एंकर राम मोहन शर्मा जब इस दुर्घटना की ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे थे तब एक महिला ने कहा कि सरकार को इन लोगों को मिलने वाली हर सुविधा वापस ले लेनी चाहिए। यह सच भी है। जब तक सरकार ऐसे ठोस कदम नहीं उठाएगी इस तरह की हरकतों, दंगों और हिन्दू त्यौहारों पर होने वाली पत्थरबाज़ी बंद नहीं होगी। दूसरे, इन कट्टरपंथी और इनके समर्थकों को मालूम है कि मोदी सरकार सिर्फ पाकिस्तान के लिए सख्त हो सकती है, किसी और के लिए नहीं। बांग्लादेश में हिन्दुओं का नरसंहार होने के बावजूद मानवीय आधार पर आर्थिक मदद बंद नहीं की जबकि पाकिस्तान का पानी बंद कर दिया।
प्रोपेगेंडाबाजों की पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग
हत्या की हर हाल में आलोचना की जानी चाहिए। यहाँ नाबालिग युवक को बुला कर हत्या कर दी जाती है। चूँकि सभी आरोपित मुस्लिम हैं, इसलिए चुप रह जाओ। आरफा खानम को ही देख लो, मुख्यमंत्री योगी के आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल करने की उसने आलोचना नहीं की, लेकिन ऐसा बोलने वाले मुस्लिम को जब पुलिस उठा कर ले गई, तो सामने आ गई अत्याचार की कहानी लेकर।
हिन्दू नाबालिग लड़के की बेरहम हत्या पर बात करना, तो वैसे भी उसके सिलेबस से बाहर का विषय है। द वायर, द क्विंट, द प्रिंट में तो खबर छापी, लेकिन हत्या को नाबालिगों द्वारा की गई वारदात कहा। द प्रिंट ने कहा, “सूर्या को पास के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार को चोटों के कारण उनकी मृत्यु हो गई, जिससे खोड़ा कॉलोनी में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे। शनिवार को स्थानीय बाजार बंद रहा, जबकि पुलिस ने फ्लैग मार्च किया।”
Surya was admitted a nearby hospital. He succumbed to his injuries on Friday, sparking protests in Khoda Colony. Local market remained closed on Saturday as police conducted flag march. https://t.co/pgu2EycJsP
— ThePrintIndia (@ThePrintIndia) May 30, 2026
वहीँ द क्विंट ने मुख्य आरोपित असद के पुलिस एनकाउंटर में मौत पर जोर देते हुए बताया कि 31 मई 2026 को, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में बकरीद के दौरान 17 साल के एक हिंदू छात्र की हत्या के मुख्य आरोपी असद को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया। पीड़ित, सूर्य चौहान को बकरीद के दिन एक कहासुनी के दौरान चाकू मार दिया गया था, और 29 मई 2026 को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने असद की तलाश शुरू कर दी थी, जो घटना के बाद से कथित तौर पर फरार था।
क्यों की गई सूर्या की हत्या
सूर्या और असद पड़ोसी हैं। खोड़ा की गली में दोनों का मकान है। बताया जाता है कि सात आठ महीने पहले एक छोटा सा विवाद हुआ था। दोनों के माता-पिता ने अपने-अपने बच्चे को समझाया और मामला शांत हो गया। लेकिन बातचीत दोनों परिवारों में लगभग नहीं होती थी। बकरीद के दिन सूर्यो चौहान का बाइक चलाने को लेकर असद और उसके दोस्तों से विवाद हुआ। इनलोगों ने उसे चाकूओं से गोद कर हत्या कर दी।
चश्मदीदों के मुताबिक, असद और उसके साथियों ने सूर्या से कहा, “क्या तुमने कभी बकरे की कुर्बानी देखी है?” जब सूर्या ने मना किया, तो उन्होंने कथित तौर पर कहा, “आज तुझे दिखाते हैं।” इसके बाद आरोपियों ने उस पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिए। हमले में सूर्या बुरी तरह घायल हो गया और अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया।
सूर्या का भाई मानसिक रूप से विक्षिप्त है। वह अपने माँ-बाप का एकमात्र सहारा था। इस मामले में असद, नवाब, फरहान, आतिफ और शारिक सहित कई लोगों के नाम सामने आए। सभी आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य आरोपित असद फरार चल रहा था, जिसे इंदिरापुरम में एक मुठभेड़ में पुलिस ने मार गिराया।
पड़ोसी घटना को लेकर जता रहे अनभिज्ञता
घर से कुछ दूर पर 17 साल के युवक सूर्या चौहान की हत्या हो जाती है। उसके आस पड़ोस में ज्यादातर मुस्लिम परिवार रहते हैं। ये लोग मुँह खोलने को तैयार नहीं हैं। ये ऐसे जता रहे हैं, जैसे कुछ हुआ ही नहीं। भीडभाड़ पूरी है, लेकिन कोई ये नहीं बता रहा कि उसे घटना की जानकारी है।
इन हरामियों को गाजा फिलिस्तीन ईरान तक कि खबर रहती है, बस इतना नहीं पता होता है कि इनके पडोस में एक 17 वर्षीय हिंदू युवा सूर्या चौहान की हत्या मुस्लिम लड़को ने कर दी । pic.twitter.com/kj2HdaAcfT
— Janardan Mishra (@janardanmis) May 31, 2026
सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो आए हैं, जिससे पता चलता है कि हिन्दू युवक की बेरहमी से कत्ल किए जाने पर लोगों को कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा। ये लोग कैमरा देख कर चुपचाप बचते नजर आ रहे हैं।
सूर्या केस पर सवाल पूछते मुंह छुपाकर भागे मुस्लिम
— Amrendra Bahubali 🇮🇳 (@TheBahubali_IND) May 30, 2026
इनको अपने इलाके में क्या होता नहीं पता लेकिन
गाजा में कोई मर गया तो पूरी खबर रहती हे
इन सबका इलाज इजरायल तरीके से करना चाहिए pic.twitter.com/rdq4bR6IE6
सूर्या की मौत के बाद पड़ोसी मुस्लिम घर के बाहर एक किलो से ज्यादा बकरे का मांस नीचे रखा मिला। जब कुछ लोगों ने बोला, तो बच्चों को भेजकर उसे नाली में डाल दिया गया। इससे भी हिन्दुओं में गुस्सा है।
सूर्या की माँ ने असद के एनकाउंटर पर संतोष जताया
मुख्य आरोपित असद की मुठभेड़ में मौत के बाद सूर्या की माँ का बयान सामने आया। सूर्या की माँ सरोज का कहना है कि उसने सिर्फ एक का एनकाउंटर देखा है। वह चाहती है कि असद की तस्वीर उसे दिखाई जाए। तस्वीर देखने के बाद ही उसे विश्वास होगा कि वह मारा जा चुका है। सरोज का कहना है कि बाकी आरोपितों को भी इसी तरह से मौत के घाट उतारा जाना चाहिए। इतना ही नहीं उनके घरों पर बुलडोजर भी चलना चाहिए।
इस मामले में 5 नामजद आरोपितों को पुलिस ने 30 मई 2026 को गिरफ्तार किया। असद के बारे में पुलिस को जानकारी मिली कि वह इंदिरापुरम में छिपा हुआ है। उसे पुलिस ने घेर लिया, उसने पुलिस पर फायरिंग की। इस दौरान असद को पुलिस ने बुरी तरह घायल कर दिया और अस्पताल ले जाते वक्त उसकी मौत हो गई। बाकी आरोपित भी पहले से ही पुलिस की गिरफ्त में हैं।
No comments:
Post a Comment