एक ही दिन में गुजरात से 500+ अवैध बांग्लादेशी हिरासत में (फोटो साभार : X_@ANI Video SS) बंगाल विधानसभा चुनाव केवल चुनाव नहीं था बल्कि देश की आंख, नाक और कान खोलने वाला चुनाव था। किस कदर घुसपैठियों ने बंगाल में बबाल मचाया हुआ था किसी तथाकथित सेक्युलरिस्ट और INDI गठबंधन में से किसी की आवाज़ नहीं निकली। बीजेपी शासित राज्य में छोटी से घटना होने पर चील-कौओं की तरह चिल्लाते हैं। सिर्फ अपने मुस्लिम वोट बैंक को सुरक्षित रखने के लिए। लेकिन ये गैंग भूल रहा है कि जिस दिन मुसलमान सच्चाई जान जाएगा कोई मुस्लिम कट्टरपंथी गैंग भी तुम्हारे साथ खड़ा नहीं मिलेगा। क्या कोई अपने बच्चों का नाम मीर ज़फर या जय चंद रखता है? इतिहास से कुछ सीखो वरना इतिहास ही तुम्हारी हस्ती मिटा देगा। बंगाल में सत्ता बदलते ही घुसपैठियों ने भागना शुरू कर दिया। आखिर ये तथाकथित सेक्युलरिस्ट्स और INDI गठबंधन इन्हे दामादों की तरह क्यों संरक्षण दे रहा है?
जितने भी घुसपैठियों के हिमायती है बताएं क्या वह घुसपैठी बन दुनिया के किसी भी देश में रह सकते हैं? यदि नहीं, फिर क्यों अपनी कुर्सी और तिजोरियों की खातिर भारत में इनको संरक्षण देते हो?
गुजरात में घुसपैठियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई हुई है। पुलिस ने ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’ के तहत एक ही दिन में 501 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। राज्य के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि हर घुसपैठिए को ढूँढकर वापस बांग्लादेश भेजा जाएगा।
हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने 6200 से अधिक संदिग्ध लोगों का डेटाबेस तैयार किया है। इसी जानकारी के आधार पर यह राज्यव्यापी अभियान चलाया गया। पकड़े गए लोगों में से कई ने फर्जी तरीके से भारतीय पहचान पत्र भी बनवा लिए थे। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और पुलिस की 30 टीमें इस मामले की गहराई से जाँच कर रही हैं।
शुरुआती जाँच में पता चला है कि ये लोग कोलकाता के बिचौलियों और मोबाइल ऐप के जरिए बांग्लादेश पैसा भेज रहे थे। सरकार ने साफ किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। अब घुसपैठियों के साथ-साथ उन्हें पनाह और नौकरी देने वालों पर भी सख्त मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
साभार : ZEENews जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में सुरक्षा एजेंसियों ने एयरपोर्ट पर दो अमेरिकी नागरिकों को रविवार (19 अप्रैल 2026) को सैटेलाइट फोन रखने के आरोप में हिरासत में लिया है। पकड़े गए लोगों की पहचान जेफ्री स्कॉट और हालदार कौशिक के रूप में हुई है।
अधिकारियों के मुताबिक, नियमित जाँच के दौरान उनके पास सैटेलाइट फोन पाए गए जो जम्मू-कश्मीर में बिना अनुमति रखना और इस्तेमाल करना प्रतिबंधित है। एयरपोर्ट सिक्योरिटी ने दोनों से पूछताछ की और बाद में उन्हें आगे की जाँच के लिए पुलिस के हवाले कर दिया।
2 US nationals detained at Srinagar Airport over keeping Sat Phones:
सुरक्षा एजेंसियों ने दोनों से पूछताछ शुरू कर दी है और यह जानने की कोशिश की जा रही है कि वे इन का इस्तेमाल किस उद्देश्य से कर रहे थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दोनों श्रीनगर से बाहर जाने की तैयारी में थे। इस मामले में उनके साथ मौजूद कोलकाता के हलदर कौशिक को भी पकड़ गया है। फिलहाल मामले की जाँच जारी है और संबंधित एजेंसियाँ सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई कर रही हैं।
तेलंगाना में दो पत्रकार गिरफ्तार तेलंगाना में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ अपमानजनक सामग्री पोस्ट करने के आरोप में हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने दो महिला पत्रकारों को गिरफ्तार किया है। पत्रकारों में एक पोगदादंडा रेवती हैं, जो ‘पल्स न्यूज‘ की प्रबंध निदेशक हैं, और दूसरी उनकी सहकर्मी संध्या उर्फ तन्वी यादव हैं।
राहुल गाँधी की 'मोहब्बत की दुकान' पर कैसी मोहब्बत का सामान बिकता है बराबर सामने आता रहा है। 'मोहब्बत की दुकान' अब देश में इमरजेंसी के समय लगी Press Censorship की याद ताज़ा कर रही है। जिस तरह इमरजेंसी में कांग्रेस के खिलाफ समाचार प्रकाशित करना घोर अपराध था, ठीक उसी तरह तेलंगाना मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने तरोताज़ा कर दी है। रेड्डी के Press Censorship पर राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा सब खामोश है, क्यों? क्या अब संविधान खतरे में नहीं?
ये गिरफ्तारी 10 मार्च 2025 को सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक वीडियो को लेकर है। इस वीडियो में एक किसान ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ टिप्पणियाँ की थीं। अब चूँकि इस इंटरव्यू को ‘पल्स न्यूज’ द्वारा रिकॉर्ड किया गया था, इसीलिए माना गया कि ये सब ‘पल्स न्यूज’ ने मुख्यमंत्री की छवि को खराब करने के उद्देश्य से किया है।
#Telangana: "I woke up about 30 mins ago, the time is about 5.15 now. The police showed up half an hour ago," journalist @revathitweets stated in a self-recorded video at her residence.
"The police might pick me and take me. So I thought I should tell everybody. One thing is… pic.twitter.com/MMT5lFWR7H
इसके बाद इस मामले में कॉन्ग्रेस पार्टी के सोशल मीडिया सेल के प्रदेश सचिव द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई। माना गया कि वीडियो को प्रसारित करने से कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा था, और इसलिए दोनों पत्रकारों को हिरासत में लिया गया। साथ ही उनके पास से कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी जब्त किए गए।
DON’T SHARE THIS VIDEO PLEASE!!! CASES WILL BE FILED 🙏🏼🙏🏼🙏🏼
Here is a video of my team @pulsenewsbreak speaking to an old man. He expresses his frustration about various issues, in his own language.
रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों पत्रकारों के घर कुछ लोग सादे कपड़े में आए और उन्हें हिरासत में लिया। रेवती की एक वीडियो से तो पता चलता है कि पुलिस सुबह 5:30 बजे ही उनके यहाँ पहुँच गई थी। पत्रकार ने वीडियो जारी कर बताया कि उन्हें सोकर उठे आधा घंटा भी नहीं हुआ कि पुलिस उन्हें पकड़ने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम रेड्डी उन पर चुप रहने का दबाव बना रहे हैं। वहीं उनके पति और घरवालों के फोन-लैपटॉप जब्त कर लिए गए हैं।
Is this democracy or dictatorship?@revanth_anumula government responds to questions with arrests.
The illegal arrest of senior journalist @revathitweets garu at 5 AM today exposes how insecure and cowardly this government has become.
दोनों पत्रकारों की गिरफ्तारी के बाद तेलंगाना सरकार को काफी निंदा झेलनी पड़ रही है। सवाल किया जा रहा है कि क्या यही है कॉन्ग्रेस की मोहब्बत की दुकान। तेलंगाना के भाजपा प्रवक्ता एनवी सुभाष ने भी आावाज उठाई है। उन्होंने कहा कि ये देर रात पुलिस की कार्रवाई प्रेस की आजादी पर हमला है। भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी इसकी निंदा की है। वहीं सिद्धिपेट से बीआरएस विधायक हरीश राओ थानीरू ने भी कॉन्ग्रेस सरकार को डरपोक बताया।
गोशमहल से भाजपा विधायक के घर की रेकी के आरोप में मोहम्मद खाजा और शेख इस्माइल हिरासत में हैदराबाद की गोशामहल विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक टी राजा सिंह के घर की रेकी किए जाने का मामला सामने आया है। रेकी 4 संदिग्धों द्वारा की जा रही थी। स्थानीय लोगों ने रेकी कर रहे 2 लोगों को पकड़ लिया जबकि बाकी संदिग्ध फरार हो गए। पकड़े गए संदिग्धों के नाम मोहम्मद खाजा और शेख इस्माइल हैं। ये संदिग्ध राजा सिंह के घर के फोटो और वीडियो बना कर मुंबई में किसी को भेज रहे थे। इनके मोबाइल से भी राजा सिंह की तस्वीरें मिली हैं। घटना 27-28 सितंबर रात की है। ऑपइंडिया से बात करते हुए भाजपा MLA ने बताया कि पुलिस दोनों संदिग्धों की जाँच कर रही है।
राजा सिंह द्वारा ऑपइंडिया से साझा किए गए एक वीडियो संदेश के मुताबिक 27 सितंबर की रात लगभग डेढ़ से 2 बजे के बीच उनके घर के आसपास 4 संदिग्ध घूमते दिखे। कुछ स्थानीय युवाओं को शक हुआ तो उन्होंने इन चारों को पकड़ने की कोशिश की। इस दौरान 2 लोगों को दौड़ा कर पकड़ लिया गया जबकि 2 अन्य फरार होने में कामयाब रहे। पकड़े गए दोनों संदिग्धों का फ़ोन चेक किया गया तो उसमें राजा सिंह सहित उनके घर की फोटो और वीडियो मिलीं।
राजा सिंह का दावा है कि इन वीडियो और फोटो को मुंबई में किसी व्यक्ति के पास व्हाट्सएप के जरिए भेजा जा रहा था। एक तस्वीर पिस्टल और करतूत की भी है। पूछताछ के दौरान पकड़े गए पहले व्यक्ति ने अपना नाम मोहम्मद खाजा बताया। लगभग 24 वर्षीय मोहम्मद खाजा मूलतः कर्नाटक के बीदर जिले का निवासी है। वह 15 साल पहले हैदराबाद आया था। आने की वजह खाजा हैदराबाद में काम-धंधा की तलाश बताया है। हैदराबाद में वह अल्लापुर बोराबांदा में रह रहा था। खाजा के अब्बू का नाम नबी साब है।
वहीं पकड़े गए दूसरे संदिग्ध का नाम शेख इस्माइल है। वह मूलतः हैदराबाद के ही अल्लापुर बोराबांदा इलाके में रहता है। लगभग 30 वर्षीय शेख इस्माइल के अब्बा का नाम चाँद पाशा है। हैदराबाद में शेख इस्माइल ड्राइवर की नौकरी करता है। मामले की सूचना फ़ौरन ही स्थानीय मंगलहाट पुलिस स्टेशन को दी गई। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँच कर दोनों संदिग्धों को हिरासत में ले लिया। राजा सिंह को अपने घर के आसपास हुई इस संदिग्ध हरकत का पता अगले दिन स्थानीय मीडिया चैनलों की खबरों को देख कर चला।
राजा सिंह आगे बताते हैं कि 29 सितंबर को उन्होंने पुलिस से पकड़े गए संदिग्धों के बारे में बात की। तब इंस्पेक्टर ने उन्हें बताया कि दोनों से उच्चस्तरीय पूछताछ की जा रही है। पूछताछ में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की भी टीमें शामिल हैं। 24 घंटे बीत जाने के बाद भी अभी तक पुलिस ने राजा सिंह को आरोपितों के बारे में कोई भी सूचना नहीं दी है। राजा सिंह ने आगे बताया कि साल 2010 और 2011 में भी उनके घर की रेकी ISIS से जुड़े आतंकियों द्वारा की गई थी।
अनिल यादव ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ दी शिकायत (शिकायतकर्ता दाएँ, जिन पर शिकायत उनका चेहरा नहीं लगा सकते)
उत्तर प्रदेश के बदायूँ में रमजान के दिनों में साजिद द्वारा दो मासूम बच्चों का गला रेतकर की गई हत्या से पूरा देश सन्न है। ऐसे में डासना के शिव शक्ति धाम से जुड़े अनिल यादव ने आहत होकर माँग की है कि इस्लाम के संस्थापक पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो। यादव ने शिकायत में कहा है कि कुरान के कारण दुनिया में जघन्य अपराध हो रहे हैं। यादव ने अपनी इस शिकायत को गाजियाबाद के थाना वेब सिटी में दिया है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में मौजूद जानकारी के अनुसार, अनिल यादव ने कहा है, “पिछले 1400 सालों से हिंदू महिलाओं से बलात्कार लूटपाट, बच्चों की नृशंस हत्या की वजह कुछ और नहीं बल्कि कुरान है। हजरत पैगंबर मुहम्मद द्वारा दी गई तालीम व कुरान में जो कानून लिखा है आज तक वही दोहराया जा रहा है। बदायूँ में बच्चों की हत्या ने गजवा-ए-हिंद की घंटी बजा दी है जो कि हजरत मुहम्मद का सपना है। इससे मेरी भावना आहत हुई है। हजारों हिंदुओं को गजवा-ए-हिंद से बचाने के लिए ये FIR होना जरूरी है।”
बता दें कि जिस गजवा-ए-हिंद का मुद्दा अनिल यादव ने अपनी शिकायत में उठाया है, उसी के संबंध में महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद बात करने जामा मस्जिद जा रहे थे, मगर बताया जा रहा है कि उन्हें रास्ते में ही हिरासत में ले लिया गया।
इस्लाम के विरुद्ध आवाज़ उठना कोई नई बात नहीं। 1985 से चल रही है। जब Calcutta High Court में कुरान की 124 आयतों के विरुद्ध चाँदमल चोपड़ा और शीतल सिंह ने मुकदमा दर्ज किया था। इतना ही नहीं, 31 जुलाई 1986 को दिल्ली की तीस हज़ारी कोर्ट ने 24 आयतों के विरुद्ध फैसला दिया था।(देखिए नीचे लिंक) अनवर शेख ने अपनी पुस्तकों में खुलकर इसका विरोध किया, लेकिन आज तक शेख के विरुद्ध किसी ने फतवा जारी करने का साहस नहीं किया। दूसरे, नूपुर शर्मा के कही बात का गलत वीडियो दिखाने पर कट्टरपंथियों ने सर तन से जुदा का फरमान दे दिया, लेकिन नवभारत चैनल के एंकर सुशांत सिन्हा के अलावा किसी भी चैनल में सच्चाई दिखाने की हिम्मत नहीं की, सब की खोजबीन पत्रकारिता अँधेरी गलियों में खो गयी। लेकिन Jaipur Dialogue, Sach और NewsNation(इस्लाम क्या कहता है) चैनलों ने इस्लाम की सच्चाई सामने ला दी। इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ex-muslim वर्ग ने। जिनके तीखे प्रश्नों का उन मौलानाओं को-जिन्हे आम मुसलमान बहुत इज्जत बख्शता है-वातानुकूलित कमरों में पसीने पोंछते देखा। इतने मुद्दों पर गर्मागर्म बहस देखी, काश किसी हिन्दू ने एक भी बोल दी होती, सर तन से जुदा की आवाज़ बुलंद हो गयी होगी, और सारा मीडिया उस हिन्दू को ही अपमानित कर रहा होता।
Complaint against Prophet Muhammad in Ghaziabad Police | पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ गाजियाबाद पुलिस में शिकायत: डासना मंदिर से जुड़े अनिल यादव बोले- कुरान की वजह से हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार – Ghaziabad News ------ अधिक जानकारी 👇 https://t.co/qR2vD15T0R
डासना का शिव शक्ति धाम यति नरसिंहानंद के कारण ही 2021 में खूब चर्चा में रहा था। अब उसी जगह अनिल यादव (जिन्हें छोटा नरसिंहानंद कहा जाता है) ने ऐसी शिकायत दी है। यादव की शिकायत पर आगे क्या कार्रवाई हुई इसका पता अभी नहीं चला है लेकिन संभावना है कि इस मामले को आगे न सुना जाए या अगर मामला कोर्ट तक पहुँचे तो वहाँ से खारिज हो जाए। ऐसा क्यों कहा जा सकता है इसके लिए 36 साल पहले दर्ज केस और उसकी डिटेल जानने की जरूरत है जब इस्लाम की ‘पवित्र पुस्तक’ पर सवाल उठते ही न्यायपालिका के भी हाथ-पाँव फूल गए थे।
कलकत्ता कुरान याचिका
36 साल पहले 1985 में कुरान को प्रतिबंधित करने की माँग लेकर वकील चाँदमल चोपड़ा और शीतल सिंह कलकत्ता हाईकोर्ट पहुँचे थे। 29 मार्च, 1985 को उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत एक आवेदन दायर किया था, जिसमें कलकत्ता उच्च न्यायालय से सरकार को ‘पवित्र पुस्तक’ की प्रत्येक प्रति को ‘जब्त’ करने का निर्देश देने की अपील की गई थी।
याचिका में तर्क दिया गया था कि भारतीय दंड संहिता (IPC) धारा 153A और 295A के आधार पर कुरान की प्रत्येक प्रति दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 95 के तहत ज़ब्त किए जाने के लिए उत्तरदायी है। इसमें चाँदमल चोपड़ा और शीतल सिंह ने ‘काफिरों’ के खिलाफ हिंसा को लेकर आवाज उठाई थी। उन्होंने कुरान के एक आयत को उद्धृत किया, जिसमें कहा गया था, “जब पवित्र महीने समाप्त हो जाते हैं तो जहाँ भी मूर्ति-पूजा करने वाले मिले, उसे मार डालो।”
जिस जज के पास पहुँची कुरान से जुड़ी याचिका उसका भी हुआ बहिष्कार
यह मामला शुरू में कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति खस्तगीर जे के समक्ष आया था जिसके बाद 70 से अधिक अधिवक्ताओं द्वारा ‘खस्तगीर जे’ की अदालत का बहिष्कार करने का आग्रह अन्य वकीलों से किया। वहीं वरिष्ठ वकील सीएफ अली ने कहा था, “यह बेतुका है। पृथ्वी पर कोई भी नश्वर पवित्र धर्मग्रंथ को चुनौती नहीं दे सकता है और दुनिया की किसी भी अदालत को इस पर कोई अधिकार नहीं है।”
बंगाल से लेकर बांग्लादेश में सड़कों पर थी इस्लामी भीड़
इसके बाद तमाम इस्लामवादी विरोध में आ उतरे। नतीजतन बताया जाता है कि भारत से लेकर बांग्लादेश तक में दंगे होने लगे। विकीपीडिया पर मौजूद जानकारी बताती है कि दंगों में हिंदुओं को निशाना बनाया गया था। हजारों की भीड़ ने सड़क पर उतरकर बांग्लादेश में भारतीय उच्च आयोग के सामने हल्ला की थी। बांग्लादेश के सीमाई इलाके में स्थित शहर में 12 लोग मारे गए थे जबकि 100 घायल हुए थे ये सारे हिंदू थे। इसी तरह 20000 मुस्लिमों की भीड़ ढाका में निकलकर आई थी। वहीं अन्य दंगे कश्मीर और बिहार समेत कई जगह देखे गए थे।
बंगाल सरकार ने कहा था- नहीं बदला जा सकता एक शब्द
वहीं सीपीआई (एम) शासित पश्चिम बंगाल सरकार ने याचिका और कलकत्ता उच्च न्यायालय में इसके प्रवेश के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। अपने हलफनामे में सरकार ने कहा था कि यह, “अदालत को दुनिया भर के मुसलमानों के पवित्र धर्मग्रंथ कुरान पर फैसला सुनाने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है, जिसका प्रत्येक शब्द, इस्लामी मान्यता के अनुसार, अपरिवर्तनीय है।” सरकार का कहना था कि यह याचिका दुर्भावनापूर्ण इरादे से दायर की गई थी और भारतीय इतिहास में ऐसी याचिका कभी दायर नहीं की गई है।
Some Articles Of The Quran Are Harmful-Delhi Magistrate Z.s. Lohat
SOME ARTICLES OF THE QURAN ARE HARMFUL-DELHI MAGISTRATE Z.S. LOHAT by Sarita Nair on Tuesday, 15 March 2011 at 11:23 SOME ARTICLES OF THE QURAN ARE HARMFUL,TEACH HATRED AND CREATE DIFFERENCES BETWEEN MOHAMMEDANS AND OTHER COMMUNITIES – DELHI MAGISTRATE Z.S. LOHAT I am enclosing herewith a copy of....
याचिका पर सुनवाई तक नहीं, पुस्तक प्रकाशित करने पर गिरफ्तारी
एक याचिका से मामला इतना गरमा गया था कि राजनीतिक दबाव के कारण, न्यायमूर्ति खास्तगीर ने इसे अपनी सूची से हटा दिया और इसे न्यायमूर्ति सतीश चंद्रा की अदालत को भेज दिया। उसके बाद राज्य के महाधिवक्ता एसके आचार्य की सलाह पर, मामला न्यायमूर्ति बिमल चंद्र बसाक की पीठ को स्थानांतरित कर दिया गया, जिन्होंने 17 मई, 1985 को याचिका खारिज कर दी। 18 जून को फिर चंद्रमल चोपड़ा ने रिव्यू याचिका डाली जिसे बाद में 21 जून को ही खारिज कर दिया गया। इसके बाद इस याचिका को लेकर चंद्राल चोपड़ा ने सीता राम गोयल के साथ मिलकर 1986 में ‘द कलकत्ता कुरान याचिका’ नाम की पुस्तक प्रकाशित की थी, जिसके लिए उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। वहीं गोयल को गिरफ्तारी से बचने के लिए भागना पड़ा था।
बीजेपी-जेडीएस कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन (फोटो साभार : X_ANI)
कर्नाटक विधान सभा चुनाव में चुनावी हिन्दू बने उपमुख्यमंत्री शिव कुमार जो बड़ा हनुमान मन्दिर बनाने की बात करते थे, उन्हीं के शासन में हनुमान ध्वज उतारा जा रहा है। क्या उनका हिन्दुत्व केवल चुनाव तक ही सीमित था? जो अब मुस्लिम कट्टरपंथियों से किये वायदों को पूरा करने सनातन का विरोध किया जा रहा है? जैसे-जैसे यह समाचार कर्नाटक राज्य से बाहर फैलना शुरू हो रहा है, हिन्दू कांग्रेस से दूरी बनाने को विवश हो रहे हैं। चर्चा हो रही है कि कांग्रेस में शामिल समस्त हिन्दुओं में अगर लेशमात्र भी सनातन है, तुरंत पार्टी छोड़ देनी चाहिए। क्योकि अब कांग्रेस मुस्लिम कट्टरपंथियों के हाथ कठपुतली बन चुकी है, जो सनातन ही नहीं समस्त हिन्दू समाज के लिए बहुत घातक है।
कर्नाटक में 108 फुट ऊँचे खंबे से हनुमान जी का झंडा उतारने के विरोध में ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया है। उनका साथ बीजेपी और जेडीएस कार्यकर्ता भी दे रहे हैं, जिसके बाद प्रशासन ने उनके खिलाफ कार्रवाई की है। बीजेपी-जेडीएस कार्यकर्ताओं को पुलिस-प्रशासन ने हिरासत में भी लिया है। ये मामला कर्नाटक के मंड्या जिले का है। जहाँ केरागोडू गाँव में हनुमान जी की ध्वजा 108 फुट ऊँचे खंबे पर लहराया गया था।
हनुमान जी की इस ध्वजा को लहराने की अनुमति मंड्या जिले के केरागोडू ग्राम पंचायत बोर्ड ने ही दी थी। इसके बावजूद जिला प्रशासन के अधिकारियों ने झंडे को नीचे उतारा। प्रशासन के इस काम का स्थानीय लोगों ने तीखा विरोध किया है, जिनका साथ बीजेपी और जेडीएस के कार्यकर्ता भी दे रहे हैं। इस बीच, बीजेपी और जेडीएस कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में भी लिया है। वहीं, स्थानीय महिलाओं पर भी पुलिस बल ने कार्रवाई की है और उन्हें झंडे के नीचे से बलपूर्वक हटा दिया है। इस दौरान स्थानीय लोगों द्वारा बुलाए गए बंद को प्रशासन से निर्दयता से कुचला है।
#WATCH | Mandya: Karnataka Police force detained BJP-JDS workers protesting after the Hanuman flag hoisted by the Gram Panchayat Board of Mandya district on a 108-foot flagpole in the village of Keragodu was brought down by the district administration. pic.twitter.com/2JslLJS4Tj
जानकारी के अनुसार, मंड्या जिले के केरागोडू गाँव में ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा करके एक 108 फीट लंबा पोल स्थापित किया था। इस पर भगवा ध्वज लगा था और आंजनेय (हनुमान जी को यहाँ आंजनेय कहा जाता है) की छवि थी। इसे गाँव के रंगमंदिर के पास लगाया गया था। बताया जा रहा है कि इसके लिए ग्राम पंचायत की भी अनुमति ले ली गई थी।
हालाँकि, गाँव के कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आया और उन्होंने इसके विरुद्ध शिकायत कर दी। इस शिकायत के आधार पर मंड्या के प्रशासन ने 27 जनवरी, 2024 को यहाँ पहुँच कर पोल से ध्वज हटा दिया था। यहाँ ध्वज हटाने के लिए प्रशासन भारी संख्या में पुलिस बल लाया था। इस दौरान गाँव के लोग प्रदर्शन करते रहे और प्रशासन से अपील करते रहे कि यह ध्वज उन्होंने आपसी सहमति से लगाया है, इसके बाद भी प्रशासन नहीं माना। अजब ग्रामीणों ने अधिक प्रदर्शन किया तो उनको यहाँ से हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज तक कर दिया।
एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ध्वज हटाने के लिए रात का समय चुना गया। ध्वज 27 जनवरी रात को हटाया गया। यहाँ हिन्दू रात से ही इकट्ठा होने लगे थे और 28 जनवरी, 2024 की सुबह को यहाँ माहौल और तनावपूर्ण हो गया। प्रशासन के इस निर्णय से गुस्साए ग्रामीणों ने केरागोडू को बंद रखने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने विरोध में स्थानीय कांग्रेस विधायक रविंद्रकुमार के पोस्टर भी फाड़ दिए। कुछ लोगों ने उनके इस पूरे मामले के पीछे होने का आरोप लगाया। मौके पर मौजूद बजरंग दल, भाजपा और जेडीएस कार्यकर्ता भगवा ध्वज को दोबारा लगाए जाने की माँग कर रहे हैं।
नाइजीरियाइयों को दिल्ली पुलिस पर हमला (साभार: मनी कंट्रोल) दिल्ली में रहने वाले 100 से अधिक अफ्रीकी नागरिकों ने 7 जनवरी 2023 को दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर हमला कर दिया। दिल्ली पुलिस की नारकोटिक्स सेल की एक टीम अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को पकड़कर निर्वासित करने के लिए नेबसराय के राजू पार्क गई थी। दोपहर तक अधिकारियों ने तीन अफ्रीकी नागरिकों को पकड़ा लिया। इनकी वीसा अवधि खत्म हो चुकी थी, फिर भी वे अवैध रूप से देश में रह रहे थे।
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, “टीम पकड़े गए तीनों विदेशियों को पुलिस स्टेशन लाने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान अचानक 100 से अधिक अफ्रीकी नागरिक वहाँ एकत्र हो गए और पुलिस टीम को रोक दिया। हिरासत में लिए गए तीनों अफ्रीकी मौका पाकर भाग गए। बाद में फिलिप नाम के एक अफ्रीकी को पकड़ लिया गया, लेकिन दो भागने में सफल रहे।”
कहा जा रहा है कि नाइजीरिया नागरिकों ने पुलिस को रोक कर उनके साथ बदसलूकी और मारपीट भी की। इस घटना के बाद पुलिस बल सतर्क हो गई। इस घटना के बाद पुलिस अधिकारी कई थानों की पुलिस बल को इकट्ठा करके 6:30 बजे नारकोटिक्स स्क्वॉड के साथ वहाँ पहुँची। इस दौरान पुलिस ने एक महिला सहित चार अफ्रीकी नागरिकों को हिरासत में ले लिया।
हिरासत में लिए गए लोगों के नाम केने चुक्वु डेविड विलियम्स, इग्वे इमैनुएल चिमेज़ी, अज़ीगबे जॉन, क्वीन गॉडविन है। इनमें पकड़ी गई महिला क्वीन गॉडविन पुलिस के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट में शामिल थी। इस कारण उसके साथ भागने में सफल रहे थे।
पुलिस की कार्रवाई देखकर एक बार फिर से करीब 200 अफ्रीकी नागरिक वहाँ जमा हो गए। वे हिरासत में लिए गए अफ्रीकी नागरिकों को भगाने की कोशिश करने लगे। हालाँकि, पुलिस उन्हें नेबसराय थाना लाने में सफल रही। अधिकारी ने बताया कि निर्धारित अवधि से अधिक समय तक रहने वाले विदेशी नागरिकों को पकड़ने के लिए निर्वासन की कार्यवाही की जा रही है।
आरोपितों के खिलाफ क्राइम ब्रांच में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420/120B और फॉरेनर्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। इसके साथ ही इन लोगों के पासपोर्ट भी जब्त कर लिया गए हैं। गिरफ्तार किए आरोपित अफ्रीकी देश नाइजारिया के बताए जा रहे हैं।
पत्रकार ग्रांट वहल (फोटो साभार: ABC7 शिकागो) इस्लामी मुल्क कतर (Islamic Country Qatar) में हो रहे FIFA विश्व कप 2022 शुरू से ही विवादों में रहा है। आतंकियों से संबंधों वाला भगोड़ा कट्टरपंथी जाकिर नाइक को इस्लाम पर तकरीर देने के लिए बुलाने से लेकर मानवाधिकारों के दमन तक के कारण यह खेल आयोजन सुर्खियों में रहा। वहीं, खेल के दौरान समलैंगिक समुदाय का समर्थन करने पर जिस अंतरराष्ट्रीय पत्रकार को हिरासत में लिया गया था, उनकी अचानक मौत हो गई है।
कतर इस्लामी शरिया कानून पर आधारित है और यहाँ समलैंगिकता को लेकर सख्त कानून है। कतर में आयोजित FIFA वर्ल्ड विश्व कप के दौरान अमेरिकी पत्रकार ग्रांट वहल ने समलैंगिक समुदाय का समर्थन करने वाली शर्ट पहनी थी। इसके बाद कतर की पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। लगभग 30 मिनट तक हिरासत में रखने के बाद पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया था। इस घटना के कुछ दिन बाद उनकी मौत हो गई है।
ग्रांट शनिवार (10 दिसंबर 2022) को तड़के अर्जेंटीना और नीदरलैंड के बीच विश्व कप मैच को कवर कर रहे थे। वे लुसैल आइकॉनिक स्टेडियम में मीडिया ट्रिब्यून में अपनी सीट पर बैठे थे। अचानक वहाँ गिर गए। इसके बाद आपातकालीन सेवा को फोन किया गया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यूएस शॉकर फेडरेशन ने उनकी मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
सोमवार को ग्रांट को कुछ तकलीफ हुई थी, जिसका जिक्र उन्होंने अपने आर्टिकल में किया था और कहा था कि काम, नींद की कमी और तनाव के कारण उनका शरीर टूट रहा है। उन्होंने बताया कि यूएस-नीदरलैंड मैच दौरान उनकी छाती में दबाव और एक अलग तरह की बेचैनी महसूस हो रही थी। इसके बाद वे मेन मीडिया सेंटर की क्लिनिक में दिखाने गए। वहाँ उनकी कोविड रिपोर्ट निगेटिव मिली। उन्होंने कहा कि संभवत: उन्हें ब्रोनकाइटिस है। इसलिए कुछ ऐंटीबयोटिक और हेवी ड्रग दिए गए। अब वे थोड़ा बेहतर महसूस कर रहे हैं।
अमेरिका के फुटबॉल पत्रकार ग्रांट की मौत पर कई तरह की आशंकाएँ व्यक्त की जा रही हैं। स्नैपबैक स्पोर्ट्स के सीईओ जैक सेटलमैन ने ट्वीट किया, “भयावह! फ़ुटबॉल पत्रकार ग्रांट वहल, जिन्हें इस शर्ट के लिए क़तर के एक स्टेडियम से बाहर निकाल दिया गया था, आज अर्जेंटीना के खेल के दौरान वे कथित तौर पर गिर गए और उनका निधन हो गया। उनके भाई ने इंस्टाग्राम पर कहा कि ग्रांट पूरी तरह से स्वस्थ थे और उनका मानना है कि इसमें कुछ गड़बड़ है।”
Absolutely bone chilling stuff
Soccer journalist Grant Wahl who was kicked out of a stadium in QATAR for this shirt has reportedly collapsed and passed away during the Argentina game today
His brother says on Instagram that Grant was fully healthy & believes there’s foul play pic.twitter.com/t47C2XfuVl
ग्रांट की पत्नी का कहना है कि इस घटना से उन्हें बहुत बड़ा झटका लगा है और अभी तक यह खुलासा नहीं हुआ है कि ग्रांट की मौत कैसे हुई है। बता दें कि इंग्लैंड के स्टार खिलाड़ी डेविड बेकहम के अमेरिका में स्टार बनने पर ग्रांट ने एक किताब लिखी थी। ‘द बेकहम एक्सपेरिमेंट’ नाम की यह किताब काफी लोकप्रिय हुई थी।