भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह (फोटो साभार - एक्स/@Ani) एक समय था जब भारत पाकिस्तान से गलबहियां करता था, लेकिन बदलते परिवेश में आज उसी पाकिस्तान को उसी भारत के हाथों नीचा देखना पड़ता है। अब भारत की नीति है कि जब तक पाकिस्तान आतंकियों को अपना दामाद बनाकर पालता रहेगा कोई समझौता नहीं होगा।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में एक बार फिर भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। सिंधु जल संधि मुद्दे को लेकर बढ़ी बहस में भारत ने पाकिस्तान के आरोपों का जवाब देते हुए साफ कहा कि जो देश आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति की तरह इस्तेमाल करता है, वह सहयोग और सद्भावना पर आधारित समझौतों का फायदा लेने की उम्मीद नहीं कर सकता।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की सचिव अनुपमा सिंह ने कहा कि 1960 में हुई सिंधु जल संधि आज के समय में पुरानी पड़ चुकी है। उन्होंने कहा कि दुनिया बदल रही है और छह दशक पुराने समझौते को मौजूदा परिस्थितियों से अलग नहीं देखा जा सकता। भारत ने यह भी कहा कि एक तरफ पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता है और दूसरी तरफ भारत से सहयोग की उम्मीद करता है, जो तर्कसंगत नहीं है।
पूरा कश्मीर है भारत का हिस्सा
भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के बयानों को भी सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।
#WATCH | First Secretary at the Permanent Mission of India to the United Nations, Anupama Singh says, "Jammu and Kashmir was, is and will always remain an integral and inalienable part of India. The only unresolved issue is Pakistan's illegal occupation of Indian territories and… pic.twitter.com/Kjr0mq1STZ
भारत ने दोहराया कि अब केवल एक ही मुद्दा बचा है, वह है पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्रों को मुक्त कराना। भारत ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दुष्प्रचार फैलाकर अपनी घरेलू नाकामियों को छिपाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसकी पुरानी रणनीतियाँ अब काम नहीं आएँगी।
भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि 26 लोगों की मौत के बाद सिंधु जल संधि को तब तक के लिए स्थगित कर दिया गया है, जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाता। भारत ने पाकिस्तान को अपने आंतरिक मामलों पर ध्यान देने की सलाह देते हुए उसे ‘फ्रेंकेंस्टीन स्टेट’ तक करार दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती से आगे बढ़ रही है। वैश्विक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद भारत ने विकास के पथ पर मजबूती से कदम बढ़ाए हैं। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत की रूस से तेल खरीद को लेकर की गई आलोचना और “Dead Economy” वाले बयान पर विश्व बैंक ने करारा जवाब दिया है। ट्रंप के इन बयानों की हवा अमेरिका की अपनी ही एजेंसी विश्व बैंक ने निकाल दी है। प्रेसिडेंट ट्रंप के 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने और भारत की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने के दावे को नकारते हुए विश्व बैंक ने 7 अक्टूबर को जारी रिपोर्ट में भारत की चालू वित्त वर्ष 2025-26 की वृद्धि दर का अनुमान 6.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपभोक्ता खर्च, कृषि उत्पादन और सरकार द्वारा किए गए टैक्स सुधारों की वजह से भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
देश की अर्थव्यवस्था और विकास पर विभिन्न संस्थानों और रेटिंग एजेंसियों का क्या कहना है…
6.9% की रफ्तार से दौड़ेगी इंडिया की इकोनॉमी- Fitch
अमेरिकी रेटिंग एजेंसी Fitch Ratings ने भी अपनी ताजा रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि इससे भारत की ग्रोथ न तो रुकने वाली है और न ही धीमी पड़ने वाली। उल्टा, एजेंसी ने वित्तवर्ष 26 के लिए भारत की ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया है, जो अमेरिका की इस टॉप क्रेडिट रेटिंग एजेंसी के इसी साल जून में 6.5 प्रतिशत ग्रोथ अनुमान से 40 बेसिस प्वाइंट ज्यादा है। इसके साथ ही फिच ने अगले वित्त वर्ष 2027 को लेकर कहा है कि इकोनॉमी की ग्रोथ रेट 6.3 प्रतिशत और वित्त वर्ष 28 में 6.2 प्रतिशत रह सकता है। फिच का अनुमान है कि भारत की ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन घरेलू मांग होगी। फिच ने कहा है कि भारत की बाहरी मांग पर कम निर्भरता और पर्याप्त आत्म-निर्भरता के कारण अर्थव्यवस्था इसके व्यापक असर से बची रहेगी।
विश्व की सर्वाधिक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा भारत- फिच
फिच ने हाल ही में यह भी कहा है कि अगले कुछ सालों तक भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बनी रहेगी। फिच ने इसके पहले भारत की संप्रभु रेटिंग के परिदृश्य को स्थिर बताते हुए कहा कि देश का विकास मजबूत दिख रहा है। फिच रेटिंग्स ने भारत की दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा जारीकर्ता डिफॉल्ट रेटिंग को स्थिर परिदृश्य के साथ ‘बीबीबी’ के स्तर पर रखा है। फिच ने कहा कि भारत की रेटिंग अन्य देशों की तुलना में मजबूत ग्रोथ और बाहरी वित्तीय लचीलापन दर्शा रही है, जिससे अर्थव्यवस्था को पिछले साल के बड़े बाहरी झटकों से पार पाने में मदद मिली है।
ट्रंप की टैरिफ का भारत की ग्रोथ पर नहीं पड़ेगा कोई असर- S&P
इतना ही नहीं इसके पहले हाल ही में अमेरिकी रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भी कहा कि भारत पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ का देश पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। अमेरिकी रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एसएंडपी- S&P) ने साफ कहा कि अमेरिकी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के सामान पर जो 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कही है, उसका इंडिया की ग्रोथ पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
भारत का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा ट्रंप का टैरिफ
S&P ग्लोबल रेटिंग्स की डायरेक्टर यीफार्न फुआ ने साफ-साफ कहा कि भारत एक एक्सपोर्ट-केंद्रित इकोनॉमी नहीं है। मतलब ये कि भारत की पूरी अर्थव्यवस्था अमेरिका को सामान बेचने पर निर्भर नहीं करती। उन्होंने बताया कि भारत का अमेरिका को होने वाला निर्यात जीडीपी का सिर्फ 2 प्रतिशत है– यानी बहुत ही कम।
भारत की ग्रोथ की असली ताकतबड़ा घरेलू बाजार
इतना ही नहीं, फार्मास्यूटिकल्स और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे भारत के बड़े और अहम निर्यात सेक्टर, इस टैरिफ के दायरे से बाहर रखे गए हैं। इसका मतलब है कि भारत के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले प्रोडक्ट्स को ट्रंप के इस फैसले से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसके अलावा, भारत की ग्रोथ की असली ताकत है उसका बड़ा घरेलू बाजार और तेजी से बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर- न कि सिर्फ एक्सपोर्ट।
भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत- S&P
पिछले साल एजेंसी ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को ‘BBB-’ से बढ़ाकर पॉजिटिव आउटलुक में कर दिया था। अब एजेंसी का कहना है कि इस टैरिफ के चलते रेटिंग में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा, क्योंकि भारत की इकोनॉमिक फंडामेंटल्स मजबूत हैं और लॉन्ग टर्म में टैरिफ जैसे कदमों का कोई बड़ा असर नहीं होगा।
S&P ने जताया भरोसा- 2025 में 6.5 प्रतिशत रहेगी GDP ग्रोथ इतना ही नहीं एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स (S&P Global Ratings) ने भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताते हुए वृद्धि दर का अनुमान 6.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया है। एजेंसी ने अपनी ताजा एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा कि भारत में घरेलू मांग में मजबूती और मॉनसून सामान्य रहने की उम्मीद के कारण अर्थव्यवस्था को वैश्विक चुनौतियों के बावजूद गति मिल रही है। इसके पहले अमेरिका की शुल्क नीति पर अनिश्चितता को लेकर एसएंडपी ने मई 2025 में भारत की वृद्धि का अनुमान कम कर 6.3 प्रतिशत कर दिया था।
अमेरिकी रेटिंग एजेंसियों ने भारतीय इकोनॉमी को बताया सबसे सशक्त
हैरानी की बात यह भी है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस इकोनॉमी को डेड बता रहे हैं, उसी भारत की इकोनॉमी को उनके देश की एजेंसियां ही सबसे तेज और सशक्त बता रही हैं। एसएंडपी ग्लोबल के साथ ही हाल ही में टॉप 2 अन्य शीर्ष अमेरिकी रेटिंग एजेंसियों गोल्डमैन सेक व मॉर्गन स्टेनली ने भी भारत की अर्थव्यवस्था को सबसे सशक्त बताया है। हाल में आईएमएफ ने भी कहा है कि भारतीय इकोनॉमी सबसे तेजी से बढ़ रही है और 2025-26 में 6.4% दर से बढ़ेगी। जबकि अमेरिकी ग्रोथ रेट 2.9% है।
भारत की अर्थव्यवस्था घरेलू मांग पर टिकी होने से असर सीमित रहेगा
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की आर्थिक विकास दर, निर्यात और कंपनियों की कमाई पर टैरिफ का ज्यादा असर पड़ने वाला नहीं है। अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैश, नोमुरा और बार्कलेज ने भी अपनी रिपोर्ट में ट्रंप टैरिफ से भारत की जीडीपी में 0.3 प्रतिशत की मामूली गिरावट आने का अनुमान लगाया है। नोमुरा का मानना है कि टैरिफ का भारत पर कम असर होगा और इससे विकास दर में सिर्फ 0.2 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। बार्कलेज और गोल्डमैन सैश का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था का घरेलू मांग पर टिकी होने से असर सीमित रहेगा।
2030 तक बनेगा दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था- एसएंडपी
इसके पहले रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल (S&P Global) ने कहा कि भारत साल 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। एसएंडपी ने ‘ग्लोबल क्रेडिट आउटलुक 2024: न्यू रिस्क, न्यू प्लेबुक’ रिपोर्ट में कहा कि भारत 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है और यह अगले तीन सालों में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2022-23 के आखिर तक भारत के सकल घरेलू उत्पाद का आकार 3,730 अरब अमेरिकी डॉलर रहा है जो भारत 2027-28 तक 5,000 अरब डॉलर के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा।
चीन नहीं, भारत बनेगा एशिया-प्रशांत का विकास इंजन हाल ही में एसएंडपी ने ‘चाइना स्लोज इंडिया ग्रोथ’ नाम से जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि चीन नहीं, बल्कि भारत एशिया-प्रशांत का विकास इंजन बनेगा। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने अपनी रिपोर्ट में उम्मीद जताई है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र का वृद्धि इंजन चीन से हटकर दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया की तरफ स्थानांतरित हो जाएगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर वर्ष 2026 तक बढ़कर सात प्रतिशत तक पहुंच जाएगी, जबकि चीन के लिए इसके सुस्त पड़कर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
2031 तक डबल होकर 6.7 ट्रिलियन डॉलर की होगी हमारी इकोनॉमी एसएंडपी ने हाल ही में यह भी कहा है कि भारतीय इकोनॉमी साल 2031 तक बढ़कर डबल हो जाएगी। इसका आकार 3.4 लाख करोड़ डॉलर से बढ़कर 6.7 लाख करोड़ डॉलर हो जाएगा। रेटिंग एजेंसी ने अगस्त वॉल्यूम रिपोर्ट ‘लुक फॉरवर्ड इंडिया मोमेंट’ में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर यह जानकारी साझा की है। एजेंसी ने कहा है कि विनिर्माण और सेवाओं के निर्यात और उपभोक्ता मांग के कारण यह तेजी बनी रहेगी। एसएंडपी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि अर्थव्यवस्था लगभग दोगुनी होने से प्रति व्यक्ति आय भी बढ़ जाएगी। 2031 तक भारत पर कैपिटा जीडीपी 2500 से बढ़कर 4500 डॉलर तक हो जाएगी।
IMF ने जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर किया 6.4 प्रतिशत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और दुनिया भर में छाई अनिश्चितताओं के बाद भी भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने यह कहते हुए इस साल 2025 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले अप्रैल 2025 में जारी अपनी रिपोर्ट में IMF ने भारत की विकास दर 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। IMF ने अपनी जुलाई 2025 की विश्व आर्थिक परिदृश्य (World Economic Outlook) अपडेट में कहा है कि भारत की इस बढ़ी हुई वृद्धि दर से यह साफ है कि देश वैश्विक और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश बना रहेगा। इस वृद्धि से भारत के समक्ष आने वाले वर्षों में निवेश, निजी उपभोग और सार्वजनिक निवेश को समर्थन मिलने की उम्मीद है। इस रिपोर्ट से यह भी संकेत मिलता है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत बनी हुई है और जल्द ही विश्व की प्रमुख आर्थिक ताकतों में अपनी स्थिति और भी मजबूत करेगा।
ग्लोबल ग्रोथ में 20% होगी भारत की हिस्सेदारी- WEF वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ( डब्ल्यूईएफ- WEF) के प्रमुख और सीईओ बोर्गे ब्रेंडे ने कहा है कि आर्थिक सुधारों के बल पर भारत की विकास दर सात से आठ प्रतिशत तक पहुंच सकती है। स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक से पहले उन्होंने एनडीटीवी से कहा कि भारत में अपार संभावनाएं हैं और अगले कुछ वर्षों में ग्लोबल ग्रोथ में भारत की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत होगी।
#WEF के प्रेसिडेंट और CEO बोर्गे ब्रेंडे ने #NDTV से बात करते हुए कहा कि हमें उम्मीद है कि कुछ वर्षों में भारत कुल ग्लोबल ग्रोथ का 20% हिस्सा होगा.#Davos2025
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस साल भारत 6 प्रतिशत की दर से काफी अच्छी ग्रोथ कर रहा है। भारत फिर से रफ्तार पकड़ेगा और सात से आठ प्रतिशत की दर से ग्रोथ कर पाएगा। इसके साथ ही बोर्गे ब्रेंडे ने यह भी कहा कि उम्मीद है कि अगले कुछ वर्षों में कुल वैश्विक वृद्धि में भारत की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत होगी। यह काफी अविश्वसनीय है। लेकिन भारत के लिए एक और बात कारगर है कि यहां स्टार्टअप्स की अपार ताकत है। भारत में 1,20,000 से अधिक स्टार्टअप्स हैं। 120 से अधिक यूनिकॉर्न हैं। इसलिए ये इकोसिस्टम भविष्य की ग्रोथ का आधार भी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत जल्द ही 10 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बन जाएगा।
अमेरिकी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ और Dead Economy वाले बयान की हवा अमेरिका की अपनी ही एजेंसी ने निकाल दी है। ट्रंप ने भारत की रूस से तेल की खरीद पर नाराजगी जताते हुए टैरिफ को दोगुना कर 50 प्रतिशत कर दिया और दावा किया था कि इससे इंडिया की अर्थव्यवस्था पर ब्रेक लग जाएगा। लेकिन अमेरिकी रेटिंग एजेंसी Fitch Ratings ने अपनी ताजा रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि इससे भारत की ग्रोथ न तो रुकने वाली है और न ही धीमी पड़ने वाली। उल्टा, एजेंसी ने वित्तवर्ष 26 के लिए भारत की ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया है, जो अमेरिका की इस टॉप क्रेडिट रेटिंग एजेंसी के इसी साल जून में 6.5 प्रतिशत ग्रोथ अनुमान से 40 बेसिस प्वाइंट ज्यादा है। इसके साथ ही फिच ने अगले वित्त वर्ष 2027 को लेकर कहा है कि इकोनॉमी की ग्रोथ रेट 6.3 प्रतिशत और वित्त वर्ष 28 में 6.2 प्रतिशत रह सकता है। फिच का अनुमान है कि भारत की ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन घरेलू मांग होगी। फिच ने कहा है कि भारत की बाहरी मांग पर कम निर्भरता और पर्याप्त आत्म-निर्भरता के कारण अर्थव्यवस्था इसके व्यापक असर से बची रहेगी।विश्व की सर्वाधिक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा भारत- फिच
फिच ने हाल ही में यह भी कहा है कि अगले कुछ सालों तक भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बनी रहेगी। फिच ने इसके पहले भारत की संप्रभु रेटिंग के परिदृश्य को स्थिर बताते हुए कहा कि देश का विकास मजबूत दिख रहा है। फिच रेटिंग्स ने भारत की दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा जारीकर्ता डिफॉल्ट रेटिंग को स्थिर परिदृश्य के साथ ‘बीबीबी’ के स्तर पर रखा है। फिच ने कहा कि भारत की रेटिंग अन्य देशों की तुलना में मजबूत ग्रोथ और बाहरी वित्तीय लचीलापन दर्शा रही है, जिससे अर्थव्यवस्था को पिछले साल के बड़े बाहरी झटकों से पार पाने में मदद मिली है।
ट्रंप की टैरिफ का भारत की ग्रोथ पर नहीं पड़ेगा कोई असर- S&P
इतना ही नहीं इसके पहले हाल ही में अमेरिकी रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भी कहा कि भारत पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ का देश पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। अमेरिकी रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एसएंडपी- S&P) ने साफ कहा कि अमेरिकी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के सामान पर जो 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कही है, उसका इंडिया की ग्रोथ पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
भारत का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा ट्रंप का टैरिफ
S&P ग्लोबल रेटिंग्स की डायरेक्टर यीफार्न फुआ ने साफ-साफ कहा कि भारत एक एक्सपोर्ट-केंद्रित इकोनॉमी नहीं है। मतलब ये कि भारत की पूरी अर्थव्यवस्था अमेरिका को सामान बेचने पर निर्भर नहीं करती। उन्होंने बताया कि भारत का अमेरिका को होने वाला निर्यात जीडीपी का सिर्फ 2 प्रतिशत है– यानी बहुत ही कम।
S&P ने जताया भरोसा- 2025 में 6.5 प्रतिशत रहेगी GDP ग्रोथ इतना ही नहीं एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स (S&P Global Ratings) ने भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताते हुए वृद्धि दर का अनुमान 6.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया है। एजेंसी ने अपनी ताजा एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा कि भारत में घरेलू मांग में मजबूती और मॉनसून सामान्य रहने की उम्मीद के कारण अर्थव्यवस्था को वैश्विक चुनौतियों के बावजूद गति मिल रही है। इसके पहले अमेरिका की शुल्क नीति पर अनिश्चितता को लेकर एसएंडपी ने मई 2025 में भारत की वृद्धि का अनुमान कम कर 6.3 प्रतिशत कर दिया था।
2030 तक बनेगा दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था- एसएंडपी इसके पहले रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल (S&P Global) ने कहा कि भारत साल 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। एसएंडपी ने ‘ग्लोबल क्रेडिट आउटलुक 2024: न्यू रिस्क, न्यू प्लेबुक’ रिपोर्ट में कहा कि भारत 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है और यह अगले तीन सालों में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2022-23 के आखिर तक भारत के सकल घरेलू उत्पाद का आकार 3,730 अरब अमेरिकी डॉलर रहा है जो भारत 2027-28 तक 5,000 अरब डॉलर के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा।
IMF ने जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर किया 6.4 प्रतिशत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और दुनिया भर में छाई अनिश्चितताओं के बाद भी भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने यह कहते हुए इस साल 2025 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले अप्रैल 2025 में जारी अपनी रिपोर्ट में IMF ने भारत की विकास दर 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। IMF ने अपनी जुलाई 2025 की विश्व आर्थिक परिदृश्य (World Economic Outlook) अपडेट में कहा है कि भारत की इस बढ़ी हुई वृद्धि दर से यह साफ है कि देश वैश्विक और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश बना रहेगा। इस वृद्धि से भारत के समक्ष आने वाले वर्षों में निवेश, निजी उपभोग और सार्वजनिक निवेश को समर्थन मिलने की उम्मीद है। इस रिपोर्ट से यह भी संकेत मिलता है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत बनी हुई है और जल्द ही विश्व की प्रमुख आर्थिक ताकतों में अपनी स्थिति और भी मजबूत करेगा।
2027-28 तक विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा-आईएमएफ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने हाल ही में एक रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर जो अनुमान व्यक्त किया, उसके मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2027-28 तक 5 ट्रिलियन डॉलर को पार कर जाएगी। भारत 5.2 ट्रिलियन डॉलर के साथ विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इसकी वैश्विक अर्थव्यवस्था में 4 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। इस दौरान अमेरिकी अर्थव्यवस्था 31 ट्रिलियन डॉलर के साथ शीर्ष पर रहेगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसकी हिस्सेदारी 24 प्रतिशत होगी। इसके बाद चीन 25.7 ट्रिलियन डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर रहेगा और वैश्विक जीडीपी में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।
भारत की ग्रोथ की असली ताकतबड़ा घरेलू बाजार
इतना ही नहीं, फार्मास्यूटिकल्स और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे भारत के बड़े और अहम निर्यात सेक्टर, इस टैरिफ के दायरे से बाहर रखे गए हैं। इसका मतलब है कि भारत के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले प्रोडक्ट्स को ट्रंप के इस फैसले से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसके अलावा, भारत की ग्रोथ की असली ताकत है उसका बड़ा घरेलू बाजार और तेजी से बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर- न कि सिर्फ एक्सपोर्ट।
भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत- S&P
पिछले साल एजेंसी ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को ‘BBB-’ से बढ़ाकर पॉजिटिव आउटलुक में कर दिया था। अब एजेंसी का कहना है कि इस टैरिफ के चलते रेटिंग में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा, क्योंकि भारत की इकोनॉमिक फंडामेंटल्स मजबूत हैं और लॉन्ग टर्म में टैरिफ जैसे कदमों का कोई बड़ा असर नहीं होगा।
अमेरिकी रेटिंग एजेंसियों ने भारतीय इकोनॉमी को बताया सबसे सशक्त
हैरानी की बात यह भी है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस इकोनॉमी को डेड बता रहे हैं, उसी भारत की इकोनॉमी को उनके देश की एजेंसियां ही सबसे तेज और सशक्त बता रही हैं। एसएंडपी ग्लोबल के साथ ही हाल ही में टॉप 2 अन्य शीर्ष अमेरिकी रेटिंग एजेंसियों गोल्डमैन सेक व मॉर्गन स्टेनली ने भी भारत की अर्थव्यवस्था को सबसे सशक्त बताया है। हाल में आईएमएफ ने भी कहा है कि भारतीय इकोनॉमी सबसे तेजी से बढ़ रही है और 2025-26 में 6.4% दर से बढ़ेगी। जबकि अमेरिकी ग्रोथ रेट 2.9% है।
2031 तक डबल होकर 6.7 ट्रिलियन डॉलर की होगी हमारी इकोनॉमी एसएंडपी ने हाल ही में यह भी कहा है कि भारतीय इकोनॉमी साल 2031 तक बढ़कर डबल हो जाएगी। इसका आकार 3.4 लाख करोड़ डॉलर से बढ़कर 6.7 लाख करोड़ डॉलर हो जाएगा। रेटिंग एजेंसी ने अगस्त वॉल्यूम रिपोर्ट ‘लुक फॉरवर्ड इंडिया मोमेंट’ में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर यह जानकारी साझा की है। एजेंसी ने कहा है कि विनिर्माण और सेवाओं के निर्यात और उपभोक्ता मांग के कारण यह तेजी बनी रहेगी। एसएंडपी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि अर्थव्यवस्था लगभग दोगुनी होने से प्रति व्यक्ति आय भी बढ़ जाएगी। 2031 तक भारत पर कैपिटा जीडीपी 2500 से बढ़कर 4500 डॉलर तक हो जाएगी।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग के लोगों ने यूएई से धमकी भरा फोन किया है। सांसद पप्पू यादव को धमकी मिलने के बाद पुलिस महकमें में हड़कंप मच गया है। पप्पू यादव ने पिछले दिनों लॉरेंस बिश्नोई को दो टके का गुंडा बताया था और 24 घंटे में पूरे गैंग को खत्म करने का दावा किया था।
अपने बड़बोलेपन से मजबूर पप्पू यादव ने मीडिया के सामने आकर खुलेआम लॉरेंस बिश्नोई गैंग को खत्म करने का दावा तो कर दिया लेकिन बाद में उन्हें समझ में आ गया था कि उन्होंने बड़ा पंगा ले लिया है। इसी का नतीजा था कि पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेस को संबोधित करने के दौरान जब मीडियाकर्मियों ने उनसे लॉरेंस बिश्नोई से जुड़ा सवाल पूछा तो वे हत्थे से भड़क गए और पत्रकारों को ही हिदायत दे दी कि वे लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े सवाल न पूछे।
बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद 24 घंटे में लॉरेंस बिश्नोई का नेटवर्क खत्म करने का दावा करने वाला पप्पू यादव ने केंद्र सरकार से जेड श्रेणी की सुरक्षा माँगी है। उन्होंने इस संबंध में गृह मंत्रालय को पत्र लिखा है। कथित तौर पर उन्हें लॉरेंस बिश्नोई के नाम से धमकी मिली है और उनकी जान को खतरा है। पप्पू यादव ने इस मामले की सूचना बिहार के डीजीपी को भी दी है ताकि उचित कार्रवाई की जा सके।
MP Pappu Yadav has requested increased security from the Indian government, citing threats from the Lawrence Bishnoi gang, and warned that both the central and Bihar governments would be responsible for his safety pic.twitter.com/NU1e5faGlw
इससे पहले पप्पू यादव ने लॉरेंस बिश्नोई को चैलेंज देते हुए कहा था कि वो ’24 घंटों’ में लॉरेंस बिश्नोई और उसके पूरे गैंग को खत्म कर देंगे।
दरअसल, मूल रूप से गोपालगंज के रहने वाले बाबा सिद्दीकी की पिछले दिनों मुंबई में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के करीबी बाबा सिद्दीकी की हत्या की जिम्मेवारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली थी। इस हत्याकांड को लेकर राजनीति भी खूब हुई थी। पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने तो लॉरेंस बिश्नोई को दो टके का गुंडा तक कह दिया था और कहा था कि अगर उन्हें खुली छूट मिल जाए तो 24 घंटे के भीतर पूरे गैंग को खत्म कर देंगे।
मीडिया में भारी फजीहत के बाद पप्पू यादव खुद का चेहरा बचाने के लिए मुंबई जा पहुंचे और वहां जाकर बाबा सिद्दीकी के बेटे से मुलाकात की। मुंबई पहुंचने के बाद पप्पू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर अपनी फोटो पोस्ट करते हुए लिखा कि था कि 'आ गया मुंबई!... मुंबई में पप्पू यादव ने दिवंगत बाबा सिद्दीक़ी के बेटे जिशान से मिलकर घटना पर दुख जताया और यह आश्वस्त किया कि हर परिस्थिति में वो उनके और पूरे परिवार के साथ हैं।
बाबा सिद्दीकी के बेटे जिशान से मिलने के बाद पप्पू यादव ने बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान से भी मिलने की कोशिश की थी लेकिन शूटिंग में व्यस्त रहने के कारण सलमान से उनकी मुलाकात नहीं हो पाई हालांकि, सलमान खान से उनकी लंबी बातचीत हुई थी। पप्पू यादव ने सलमान खान से कहा था कि हर परिस्थिति में मैं आपके साथ हूं। अब संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के फोन नंबर से पप्पू यादव को हत्या की धमकी दी गई है। धमकी में लॉरेंस बिश्नोई का नाम लिया गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि पप्पू यादव का बड़बोलापन उनपर भारी पड़ गया है।
गाजियाबाद और बेंगलुरु से 3-3 गिरफ्तार (फोटो साभार: आजतक/इंडिया टीवी) उत्तर प्रदेश और कर्नाटक की दो अलग-अलग घटनाओं ने एक बार फिर अवैध प्रवासियों और मजहबी पहचान छिपाकर भारत में रहने वालों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रामलीला के मंच पर हिंदू पहचान लेकर काम कर रहे मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया गया, तो दूसरी ओर कर्नाटक में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मुस्लिमों के एक ग्रुप को भी गिरफ्तार किया गया जो हिंदू नाम और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत में रह रहे थे।
गाजियाबाद में गलत पहचान बताकर रामलीला, हिंदू नामों से आधार कार्ड
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाजियाबाद में पुलिस ने तीन मुस्लिमों वजीर खान, राहुल (जिसका असली नाम सामने नहीं आया), और नानक को देवी मंदिर में प्रवेश करते समय गिरफ्तार किया। इन तीनों पर आरोप है कि ये अपनी असल पहचान छिपाकर रामलीला में हिंदू पात्रों का अभिनय कर रहे थे और मंदिर में घुसने की कोशिश कर रहे थे। यह गिरफ्तारी उस समय हुई, जब तीनों आरोपित गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे, जहाँ महंत नरसिंहा नंद गिरी ने धर्म विशेष के लोगों के प्रवेश पर रोक लगा रखी है। पुलिस ने इनके पास से हिंदू नाम और पहचान के आधार कार्ड बरामद किए, जो इनके वास्तविक नाम से मेल नहीं खाते थे।
पुलिस जाँच के दौरान इन युवकों ने बताया कि उनका परिवार पुश्तैनी रूप से रामलीला मंचन से जुड़ा हुआ है। ये लोग रामलीला में कैकई, मंथरा जैसे किरदार निभाते हैं और ढोलक बजाने तथा नृत्य का भी कार्य करते हैं। गिरफ्तार युवकों का दावा है कि वे मथुरा के रहने वाले हैं और रामलीला मंचन करना उनकी आजीविका का हिस्सा है। हालाँकि, पुलिस ने यह साफ किया कि मामले की जाँच जारी है और तब तक कुछ ठोस कहा नहीं जा सकता।
डासना देवी मंदिर का यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहाँ हमेशा पुलिस बल तैनात रहता है, खासकर महंत नरसिंहानंद गिरी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए। महंत का कहना है कि धर्म विशेष के लोगों के मंदिर में प्रवेश को रोकने के पीछे उनका धार्मिक और सुरक्षा से जुड़ा कारण है।
कर्नाटक में हिंदू पहचान के साथ पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिक
दूसरी घटना कर्नाटक के पीन्या इलाके की है, जहाँ तीन और पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें सैयद तारिक और उसकी पत्नी अनीला शामिल हैं, जबकि उनकी 17 वर्षीय बेटी को हिरासत में लिया गया है। पुलिस के अनुसार, यह परिवार पिछले आठ साल से भारत में गैरकानूनी तरीके से रह रहा था और हिंदू नामों का इस्तेमाल कर अपनी असली पहचान छिपा रहा था। तारिक अपने यूट्यूब चैनल पर इस्लामिक उपदेश देता था, जबकि उसकी पत्नी घरेलू महिला है। इन लोगों के पास से पुलिस ने आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और पासपोर्ट बरामद किए हैं, जो सभी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए थे।
इस परिवार के बारे में जानकारी तब मिली जब पहले गिरफ्तार किए गए अन्य पाकिस्तानी नागरिकों ने इनके बारे में पुलिस को बताया। पुलिस ने शंकर शर्मा के नाम से रह रहे राशिद अली सिद्दिकी को भी हाल ही में गिरफ्तार किया था, जो अपनी बांग्लादेशी पत्नी और ससुरालवालों के साथ फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारत में रह रहा था। राशिद का मामला भी तारिक से जुड़ा हुआ पाया गया है। अकेले कर्नाटक में ही कुल 11 पाकिस्तानी-बांग्लादेशियों को फर्जी हिंदू पहचान के साथ गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुलिस की शुरुआती जाँच से पता चला है कि यह परिवार पहले कोच्चि में रह रहा था और चार साल पहले बेंगलुरु आया था। तारिक को हर महीने 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद मेहदी फाउंडेशन इंटरनेशनल के माध्यम से मिलती थी, जिसका मुख्य उद्देश्य इस्लामी तकरीरें करनी थी। पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि इन अवैध पाकिस्तानी नागरिकों को पैसा कैसे और कहाँ से मिल रहा था, और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।
कर्नाटक पुलिस अब इस बात की भी जाँच कर रही है कि राज्य में और कितने पाकिस्तानी फर्जी दस्तावेजों के सहारे रह रहे हैं। हाल ही में बेंगलुरु के बाहरी इलाके जिगानी में भी चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जो इसी प्रकार फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि कर्नाटक और देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसे कई लोग हो सकते हैं जो अवैध रूप से रह रहे हों और अपनी मजहबी और राष्ट्रीय पहचान छिपाकर काम कर रहे हों।
सावधान करने वाली हैं दोनों घटनाएँ
इन दोनों घटनाओं में एक चीज समान है: आरोपितों द्वारा अपनी मजहबी पहचान को छिपाना। गाजियाबाद में गिरफ्तार आरोपित मुस्लिम युवक हिंदू नामों के साथ रामलीला में काम कर रहे थे और मंदिर में घुसने की कोशिश कर रहे थे, जबकि कर्नाटक में पकड़े गए पाकिस्तानी नागरिक हिंदू नाम और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर भारत में अवैध रूप से रह रहे थे। दोनों ही मामलों में मजहबी पहचान को छिपाकर अवैध कार्यों को अंजाम देने का प्रयास किया गया।