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अब CJP की ‘टूलकिट’ वाली ग्रेटा थनबर्ग हुईं मुरीद: SFI UK के मंच से की तारीफ, बोलीं- ‘प्रदर्शन करने पर ही मिलती हैं बड़ी चीजें’

किसान आंदोलन की 'टूलकिट' से चर्चित ग्रेटा थनबर्ग ने SFI UK कार्यक्रम में CJP के नेतृत्व वाले प्रदर्शन के प्रति जताई एकजुटता (फोटो साभार: SFI UK)
लंदन में SFI यूके द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में ग्रेटा थनबर्ग ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व वाले प्रदर्शन का समर्थन किया है। खुद को जलवायु कार्यकर्ता बताने वाली ग्रेटा थनबर्ग इससे पहले किसान आंदोलन की टूलकिट को लेकर भी चर्चा में रही थीं।

कार्यक्रम में बोलते हुए ग्रेटा थनबर्ग ने कहा कि भारत में छात्रों के प्रदर्शन ने पूरी दुनिया के लोगों को गर्व महसूस कराया है। उन्होंने आगे कहा कि इन प्रदर्शनों ने यह साबित कर दिया है कि जब आम लोग मिलकर विरोध करते हैं, तो बड़ी चीजें हासिल की जा सकती हैं।

उन्होंने कहा, “ये प्रदर्शन लोगों की ताकत का सही अर्थ बताते हैं। न्याय के लिए भारतीय छात्रों का संघर्ष और लोकतंत्र व आजादी के लिए व्यापक लड़ाई हमारी भी लड़ाई है।” इसके साथ ही उन्होंने समर्थकों से ‘भारत के साथ एकजुट होकर खड़े होने’ की अपील की।

सप्ताह के अंत में में आयोजित इस कार्यक्रम को SFI UK ने आंदोलन की ‘जीत का जश्न’ बताया। संगठन ने दावा किया कि इस आंदोलन के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। SFI UK ने यह भी आरोप लगाया कि NEET मामले को संभालने के दौरान 21 छात्रों की जान गई और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस ने ‘क्रूर दमन’ किया।

हालाँकि कार्यक्रम में उन घटनाओं का कोई उल्लेख नहीं किया गया, जिनमें छात्र प्रदर्शनकारियों के रूप में मौजूद उपद्रवियों पर पथराव करने, पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों के साथ धक्का-मुक्की और हमले करने के आरोप लगे थे।

इससे पहले SFI ने अपने एक बयान में कहा था कि ‘लड़ाई जारी रहेगी’, जिससे भविष्य में भी ऐसे प्रदर्शन होने के संकेत मिले थे।

यह कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ, जब CJP ने शनिवार (25 जुलाई 2026) को अपना 36 दिन लंबा आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया था। संगठन ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने उसकी बची हुई माँगें भी मान ली हैं। इनमें NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले बताए गए छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने जैसी माँगें शामिल थीं।

लंदन में आयोजित यह कार्यक्रम SFI UK की ओर से इस आंदोलन के समर्थन में किया गया पहला प्रयास नहीं था। इससे पहले Opindia ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि SFI UK की विभिन्न इकाइयों ने लंदन, लीड्स और एडिनबर्ग में पहले से तय कार्यक्रमों के जरिए समर्थकों को जुटाया था।

संगठन ने प्रदर्शन के स्थान और समय पहले ही तय किए, पोस्टर जारी किए और अपने नेटवर्क के माध्यम से इन कार्यक्रमों का समन्वय किया। हालाँकि कुछ मीडिया संस्थानों, जिनमें The Wire भी शामिल है, ने लंदन में हुए इस कार्यक्रम को भारतीय प्रवासी समुदाय की स्वतःस्फूर्त प्रतिक्रिया के रूप में पेश करने की कोशिश की।

ग्रेटा थनबर्ग इससे पहले 2021 के किसान आंदोलन के दौरान भी भारत के राजनीतिक विवाद का हिस्सा बनी थीं। उस समय उन्होंने सोशल मीडिया पर एक ऑनलाइन ‘टूलकिट’ साझा की थी, जिसका उद्देश्य किसान आंदोलन के समर्थन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियान को समन्वित करना बताया गया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उस टूलकिट के तैयार करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज किया था, हालाँकि उस FIR में ग्रेटा थनबर्ग का नाम शामिल नहीं था।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने दिया इस्तीफा: उत्तराधिकारी चुने जाने तक अंतरिम रूप से संभालते रहेंगे पद

                कीर स्टार्मर का इस्तीफा, लेबर पार्टी में कलह के बाद छोड़ा पद (फोटो साभार: X_Keir_Starmer)
ब्रिटेन की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार (22 जून 2026) को अपने पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी है। लेबर पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और आंतरिक कलह के बीच स्टार्मर को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा। डाउनिंग स्ट्रीट से जारी एक भावुक बयान में उन्होंने कहा कि उन्होंने किंग चार्ल्स को अपने फैसले की जानकारी दे दी है, लेकिन नया उत्तराधिकारी चुने जाने तक वह प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारियाँ संभालते रहेंगे।

स्टार्मर का यह इस्तीफा पिछले कई हफ्तों से चल रही राजनीतिक अटकलों के बाद आया है। हाल के दिनों में सरकार को कई राजनीतिक झटके लगे, जिससे जनता के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से घटी। इसके साथ ही लेबर पार्टी के भीतर से ही नेतृत्व परिवर्तन की माँग लगातार तेज हो रही थी, जिसने स्टार्मर को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया।

डाउनिंग स्ट्रीट से दिए अपने इस्तीफे के बयान में कीर स्टार्मर ने पूरी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “मैंने किंग (राजा) को अपने इस फैसले की जानकारी दे दी है। पार्टी के भीतर चल रहे घटनाक्रम को देखते हुए मेरा पद छोड़ना ही उचित है। हालाँकि देश में प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने के लिए मैं तब तक अपने पद पर बना रहूँगा, जब तक कि मेरे उत्तराधिकारी का चुनाव नहीं कर लिया जाता।”

जुलाई 2024 में कीर स्टार्मर के नेतृत्व में लेबर पार्टी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की थी, जिसने ब्रिटेन में कंजर्वेटिव पार्टी के 14 साल के शासन को खत्म किया था। शुरुआती दिनों में स्टार्मर सरकार को जनता का भारी समर्थन मिला, लेकिन जल्द ही देश की अर्थव्यवस्था, चरमराती सार्वजनिक सेवाओं और पार्टी के अंदरूनी मतभेदों ने उनके सामने बड़ी चुनौतियाँ खड़ी कर दीं।

ब्रिटेन के 58वें प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालते हुए 61 वर्षीय स्टार्मर ने देश में बड़े बदलाव और नतीजों को धरातल पर लाने का वादा किया था। अपने पहले ऐतिहासिक भाषण में उन्होंने अपने पूर्ववर्ती ऋषि सुनक की जमकर तारीफ की थी और सुनक के समर्पण व कड़ी मेहनत को सराहा था। हालाँकि उनका यह कार्यकाल भी हाल के वर्षों में ब्रिटेन के अन्य प्रधानमंत्रियों की तरह बेहद छोटा और उथल-पुथल भरा साबित हुआ।

भारत विरोधी बड़बोलेपन के कारण अपने ही देश की संसद में घिरे नेपाल के PM बालेन शाह, चीन प्रेम पर भी सांसदों ने लताड़ा


नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह अपने पहले संसदीय प्रश्नकाल के दौरान दिए गए बयानों को लेकर विवादों में घिर गए हैं। प्रतिनिधि सभा में सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि भारत के साथ सीमा विवाद के मुद्दों पर उन्होंने ब्रिटेन से मदद माँगी है। बालेन शाह ने यह भी दावा किया कि नेपाल ने भी भारत की जमीन पर कब्जा किया है।

शाह ने कहा, “हमने ना केवल भारत और चीन से बात की है बल्कि ब्रिटेन सरकार से भी संपर्क किया है। हमारा मानना है कि ब्रिटेन को इसमें दिलचस्पी लेनी चाहिए क्योंकि यह विवाद उस दौर का है, जब ब्रिटिश भारत ने इस इलाके को छोड़ा था।”

CPN-UPL की सांसद पद्मा अर्याल के सवाल का जवाब देते हुए बालेन शाह ने कहा, “प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे पता चला कि सिर्फ भारत ने नेपाल की जमीन पर कब्जा नहीं किया है। नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा जमा रखा है। इसका सही तरीका यही होगा कि दोनों पक्षों को बैठकर इस मामले को सुलझा लें।”

पीएम बालेन शाह के इस बयान पर उनके ही सांसद बसाना थापा ने आपत्ति जताई। उन्होंने तर्क दिया कि प्रधानमंत्री ने बिना किसी तथ्य या सबूत के इतना गंभीर बयान दिया है और यह बयान राष्ट्रीय अखंडता को ठेस पहुँचाएगा और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को नुकसान पहुँचाएगा।

चीन का उदाहरण देने पर भी बालेन शाह को सांसदों ने घेरा

इसके अलावा पीएम बालेन शाह को चीन का उदाहरण देने पर भी सांसदों ने घेरा। उन्होंने नेपाल के सबसे कम विकसित देश से विकासशील देश का दर्जा प्राप्त करने में दो साल की देरी के संबंध में सांसदों के प्रश्न का जवाब देते हुए कहा, “पड़ोसी देश चीन हाल ही में विकासशील से विकसित देश बन गया है।”

सांसदों ने इसे तथ्यों की गलती बताते हुए प्रधानमंत्री बालेन शाह की आलोचना की। सांसद खुशबू ओली ने काउंटर किया कि संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय निकाय अभी भी चीन को ‘विकासशील देश’ की श्रेणी में रखते हैं।

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने दी सफाई

प्रधानमंत्री बालेन शाह के भारत की भूमि पर कब्जा करने वाले बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर की मीडिया ने कवर किया। सोशल मीडिया पर भी इस बयान की कड़ी आलोचना की गई। इसके बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय से सफाई देते हुए बयान जारी किया गया।

                                                       फोटो साभार: Government of Nepal

बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री बालेन ‘क्रॉस-बॉर्डर होल्डिंग’ यानी सीमा पार जमीन पर स्वामित्व शब्द का इस्तेमाल करना चाहते थे, लेकिन उनकी ओर से गलती से ‘क्रॉस-बॉर्डर ऑक्युपेशन’ यानी सीमा पार कब्जा शब्द इस्तेमाल हो गया।

नेपाल के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि ‘क्रॉस-बॉर्डर होल्डिंग’ और ‘ऑक्युपेशन’ से उनका मतलब उन नागरिकों से था जो सीमा के दूसरी ओर जमीन की खेती करते हैं या वहाँ रह रहे हैं।

कांग्रेस और विपक्ष पर वज्रपात, मोदी कन्याकुमारी में “ध्यान” में बैठ गए, 100 टन सोना भारत आ गया और GDP उछाल मार गई

 सुभाष चन्द्र

चुनाव प्रचार समाप्त होते ही प्रधानमंत्री मोदी कन्याकुमारी जाकर “ध्यान” पर बैठ गए और कांग्रेस चीख पुकार करती रह गई जैसे लुट गए मर गए बर्बाद हो गए हो।  चुनाव आयोग में माथा फोड़ा और DMK कोर्ट में गिड़गिड़ाती रह गई। 

अभी मोदी जी “ध्यान” में मग्न थे कि कांग्रेस को सुलगाने के लिए एक खबर और आ गई कि भारत की GDP 2023-24 के लिए 8.2% हो गई है जिसमें मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन की 9.9% वृद्धि दर ने अहम योगदान दिया है। वर्ष 2023-24 की चार तिमाही में GDP दर रही।

-पहली तिमाही - 8.2%

-दूसरी तिमाही -  8.1%

-तीसरी तिमाही - 8.6%

-चौथी तिमाही  - 7.8%

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ये GDP देख कर चीन को सांप सूंघ जाएगा क्योंकि उसकी अपनी विकास दर 5% से ऊपर नहीं रही। ये GDP देख कर राहुल गांधी और उसका पप्पू आर्थिक गुरु पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन सन्नाटे में खो गए होंगे क्योंकि दोनों चीन के चमचे हैं। इस रघुराम राजन ने कहा था कि भारत किस्मत वाला होगा अगर उसकी GDP 2023-24 में 5% भी हो गई लेकिन वो 5% हो गई चीन की और भारत की हो गई 8.2%।

अमर्त्य सेन और रघुराम राजन दो एक भारत विरोधी खटमल हैं जो हमारे देश का खून चूसने में आगे रहे हैं और देश के खिलाफ बोलते हैं। रघुराम राजन ने यह भी कहा था कि “बेशक G20 देशों में Fastest Growing Economy है लेकिन भारत सबसे “गरीब” देश भी है जहां जवान लड़के Labour Force के लिए काम कर रहे हैं। Growth की Hype को लेकर भारत गलती कर रहा है और विकसित भारत का विज़न “नॉनसेंस” है। हमारा वर्कफोर्स बढ़ रहा है लेकिन यह तभी फायदेमंद होगा जब वे “अच्छी” नौकरियों में लगे हों”।

जिस Semiconductor chip manufacturing की वजह से चीन बड़े स्तर पर विकास करता रहा उसी Chip को भारत के लिए रघुराम राजन ने बेकार कहा था। उसने कहा था जब सभी देश Chip बना रहे हों तो वह भारत के लिए “बर्बादी” ला सकता है (Ruinous साबित होगा भारत के लिए”।

ऐसी बातें रघुराम राजन की सुनकर सोचने पर विवश होता हूं इस व्यक्ति ने RBI का गवर्नर रह कर कितना बड़ा नुकसान देश को दिया होगा।

इसके अलावा कांग्रेस काल में गिरवी रखा 47 टन सोने की जगह कल 100 टन सोना ब्रिटिश बैंक से भारत वापस लाया गया। ये बड़ी उपलब्धि है लेकिन कांग्रेस का घोटालेबाज “अनर्थशास्त्री” चिदंबरम कह रहा है कि सोना लाने से हमारी अर्थव्यवस्था’ कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसका मतलब यह है कि मनमोहन सरकार में गिरवी रखे गए सोने को वापस लाने के लिए कोई कोशिश नहीं की गई। 

चिदंबरम जब आप सरकार छोड़ कर गए थे तब भारत का सोने का भंडार 557 टन था जो अब बढ़ कर 10 साल में 822 टन हो गया है, मतलब 48% की बढ़ोतरी हुई है। इसका मतलब यह भी निकलता है कि 1947 से 2014 तक सोना 8 टन प्रति वर्ष बढ़ा जबकि पिछले 10 वर्ष में 26 टन प्रति वर्ष बढ़ा है।

कुछ दिन पहले चिदंबरम ने कहा था कि प्रधानमंत्री कोई भी हो मोदी या कोई और, भारत की इकॉनमी 3rd नंबर पर पहुंच ही जाएगी जबकि सच यह है कि कांग्रेस सत्ता में हो तो economy 5 से 15 नंबर पर पहुंचने में देर नहीं लगेगी। अरे निकम्मों कभी तो किसी काम को अच्छा कह दिया करो या मोदी से जल जल कर ही मर जाओगे।

लोकसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले ऐसी ख़ुशख़बरी संकेत देने के लिए काफी है कि भारत का भविष्य उज्जवल है और मोदी जी के हाथों में सुरक्षित है।