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कांग्रेस और विपक्ष पर वज्रपात, मोदी कन्याकुमारी में “ध्यान” में बैठ गए, 100 टन सोना भारत आ गया और GDP उछाल मार गई

 सुभाष चन्द्र

चुनाव प्रचार समाप्त होते ही प्रधानमंत्री मोदी कन्याकुमारी जाकर “ध्यान” पर बैठ गए और कांग्रेस चीख पुकार करती रह गई जैसे लुट गए मर गए बर्बाद हो गए हो।  चुनाव आयोग में माथा फोड़ा और DMK कोर्ट में गिड़गिड़ाती रह गई। 

अभी मोदी जी “ध्यान” में मग्न थे कि कांग्रेस को सुलगाने के लिए एक खबर और आ गई कि भारत की GDP 2023-24 के लिए 8.2% हो गई है जिसमें मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन की 9.9% वृद्धि दर ने अहम योगदान दिया है। वर्ष 2023-24 की चार तिमाही में GDP दर रही।

-पहली तिमाही - 8.2%

-दूसरी तिमाही -  8.1%

-तीसरी तिमाही - 8.6%

-चौथी तिमाही  - 7.8%

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ये GDP देख कर चीन को सांप सूंघ जाएगा क्योंकि उसकी अपनी विकास दर 5% से ऊपर नहीं रही। ये GDP देख कर राहुल गांधी और उसका पप्पू आर्थिक गुरु पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन सन्नाटे में खो गए होंगे क्योंकि दोनों चीन के चमचे हैं। इस रघुराम राजन ने कहा था कि भारत किस्मत वाला होगा अगर उसकी GDP 2023-24 में 5% भी हो गई लेकिन वो 5% हो गई चीन की और भारत की हो गई 8.2%।

अमर्त्य सेन और रघुराम राजन दो एक भारत विरोधी खटमल हैं जो हमारे देश का खून चूसने में आगे रहे हैं और देश के खिलाफ बोलते हैं। रघुराम राजन ने यह भी कहा था कि “बेशक G20 देशों में Fastest Growing Economy है लेकिन भारत सबसे “गरीब” देश भी है जहां जवान लड़के Labour Force के लिए काम कर रहे हैं। Growth की Hype को लेकर भारत गलती कर रहा है और विकसित भारत का विज़न “नॉनसेंस” है। हमारा वर्कफोर्स बढ़ रहा है लेकिन यह तभी फायदेमंद होगा जब वे “अच्छी” नौकरियों में लगे हों”।

जिस Semiconductor chip manufacturing की वजह से चीन बड़े स्तर पर विकास करता रहा उसी Chip को भारत के लिए रघुराम राजन ने बेकार कहा था। उसने कहा था जब सभी देश Chip बना रहे हों तो वह भारत के लिए “बर्बादी” ला सकता है (Ruinous साबित होगा भारत के लिए”।

ऐसी बातें रघुराम राजन की सुनकर सोचने पर विवश होता हूं इस व्यक्ति ने RBI का गवर्नर रह कर कितना बड़ा नुकसान देश को दिया होगा।

इसके अलावा कांग्रेस काल में गिरवी रखा 47 टन सोने की जगह कल 100 टन सोना ब्रिटिश बैंक से भारत वापस लाया गया। ये बड़ी उपलब्धि है लेकिन कांग्रेस का घोटालेबाज “अनर्थशास्त्री” चिदंबरम कह रहा है कि सोना लाने से हमारी अर्थव्यवस्था’ कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसका मतलब यह है कि मनमोहन सरकार में गिरवी रखे गए सोने को वापस लाने के लिए कोई कोशिश नहीं की गई। 

चिदंबरम जब आप सरकार छोड़ कर गए थे तब भारत का सोने का भंडार 557 टन था जो अब बढ़ कर 10 साल में 822 टन हो गया है, मतलब 48% की बढ़ोतरी हुई है। इसका मतलब यह भी निकलता है कि 1947 से 2014 तक सोना 8 टन प्रति वर्ष बढ़ा जबकि पिछले 10 वर्ष में 26 टन प्रति वर्ष बढ़ा है।

कुछ दिन पहले चिदंबरम ने कहा था कि प्रधानमंत्री कोई भी हो मोदी या कोई और, भारत की इकॉनमी 3rd नंबर पर पहुंच ही जाएगी जबकि सच यह है कि कांग्रेस सत्ता में हो तो economy 5 से 15 नंबर पर पहुंचने में देर नहीं लगेगी। अरे निकम्मों कभी तो किसी काम को अच्छा कह दिया करो या मोदी से जल जल कर ही मर जाओगे।

लोकसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले ऐसी ख़ुशख़बरी संकेत देने के लिए काफी है कि भारत का भविष्य उज्जवल है और मोदी जी के हाथों में सुरक्षित है।

गिरवी रखा भारत का 100 टन सोना घर लौटा, इंग्लैंड के बैंक से लेकर आई RBI

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपना 100 टन सोना इंग्लैंड से वापस मँगा कर भारत में रखवाया है। अब यह सोना इंग्लैंड की जगह भारत में रखा है। आने वाले कुछ दिनों और भी सोना भारत वापस आने वाला है। अब यह सोना RBI के पास रखा गया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, रिजर्व बैंक के पास वर्तमान में 822 टन सोना है। इसमें से 100.3 टन सोना भारत में रखा गया है जबकि 413.8 टन अभी विदेशों में रखा हुआ है। इसके अलावा 308 टन सोना भारत में नोट जारी करने के लिए रखा गया है।

 रिजर्व बैंक ने बीते कुछ सालों में में विदेशों में सोने के बढ़ते भारतीय स्टॉक के चलते इसे अपने देश वापस लाने का निर्णय किया है। रिजर्व बैंक आगे और भी सोना विदेशों से मँगा कर देश रखेगी। बताया गया है कि रिजर्व बैंक दोबारा से 100 टन सोना देश को वापस ला सकती है।

परम्परागत रूप से विश्व के अधिकांश देश लंदन में ही अपना सोना रखते आए हैं। भारत भी अपना सोना अब तक लंदन में रखता था लेकिन अब उसने निर्णय लिया है कि अपने सोने की बड़ी मात्रा देश के अंदर ही रखेगा। रिजर्व बैंक जहाँ विदेशों से सोना लेकर आ रही है, वहीं वह लगातार नया सोना खरीद भी रही है।

रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2022-23 में 34.3 टन जबकि 2023-24 में 27.7 टन नया सोना खरीदा है। भारत का लगातार सोना खरीदना यह दिखाता है कि उसकी अर्थव्यवस्था मजबूत है और वह अपने वित्तीय सुरक्षा प्रबन्धन को मजबूत कर रहा है। रिजर्व बैंक विश्व के उन चुनिंदा बैंकों में से एक है जो सोना खरीद रहे हैं।

भारत का यह सोना वापस देश में लाने के लिए रिजर्व बैंक को विशेष इंतजाम भी करने पड़े थे। रिजर्व बैन ने इसके लिए विशेष विमान की व्यवस्था की थी। इसके अलावा इस पर केंद्र सरकार ने कस्टम ड्यूटी भी माफ़ कर दी थी। हालाँकि, रिजर्व बैंक को इस सोने को देश में लाने के बाद GST देनी पड़ी है।

1991 में गिरवीं रख दिया गया था देश का सोना

जहाँ वर्तमान में रिजर्व बैंक विदेशों से अपना सोना वापस लाकर देश में रख रही है, वहीं लगभग 3 दशक पहले की कॉन्ग्रेस-तीसरे मोर्चे की सरकारों ने भारत का सोना गिरवीं रख दिया था। 1991 में अर्थव्यवस्था के कुप्रबन्धन की वजह से उपजे आर्थिक संकट के कारण भारत को अपना सोना विदेशों में भेज कर गिरवीं रखना पड़ा था।
जुलाई, 1991 में कॉन्ग्रेस की नरसिंह राव वाली सरकार ने डॉलर जुटाने के लिए सोना विदेशी बैंकों के पास गिरवीं रखा था। जुलाई 1991 में नरसिंह राव सरकार ने 46.91 टन सोना इंग्लैंड की बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान के पास गिरवीं रखा था ताकि 400 मिलियन डॉलर जुटाए जा सकें। सोना गिरवीं रखे जाने से पहले भारत ने सोना बेचा भी था।
मई 1991 में भारत ने स्विट्ज़रलैंड की UBS बैंक को सोना बेचा था, इसके जरिए सरकार ने 200 मिलियन डॉलर जुटाए थे। बताया गया कि यह वह सोना था जो कि तस्करों से पकड़ा गया था और देश की बैकों के पास जमा था। रिपोर्ट बताती हैं कि इस दौरान 20 टन सोना बेचा गया था।
अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने इस खबर को लेकर कहा है कि यह भारत के लिए बड़ा बदलाव है। उन्होंने एक (पहले ट्विटर) पर लिखा, “जबकि किसी की निगाह इस पर नहीं गई थी, तब RBI ने अपने सोने के रिजर्व को वापस भारत से भारत में स्थानांतरित कर दिया है। अधिकांश देश अपना सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड के वॉल्ट्स में या ऐसे कुछ स्थानों पर रखते हैं (और इसके लिए फीस भी देते हैं)। भारत अब अपना अधिकांश सोना अपने पास रखेगा। यह एक लंबा सफ़र है क्योंकि 1991 में देश का सोना रातोरात बाहर ले जाया गया था।”