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कर्नाटक : उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने महाकुंभ में लगाई आस्था की डुबकी; आयोजन के लिए योगी आदित्यनाथ की तारीफ की

प्रयाग महाकुंभ के अब केवल 16 दिन और सिर्फ एक अमृत स्नान बाकी है। 26 फरवरी को महाशिवरात्रि अमृत स्नान के साथ ही महाकुंभ सम्पन्न हो जाएगा। देश-दुनिया के 43 करोड़ लोगों के साथ तमाम बड़े लोग भी त्रिवेणी संगम में डुबकी लगा चुके हैं, लेकिन कांग्रेस नेता अभी तक महाकुंभ से दूरी बनाए हुए हैं। यहां तक की कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने महाकुंभ पर तंज कसते हुए कहा था कि गंगा में स्नान करने से गरीबी और बेरोजगारी दूर नहीं होती। जो (खड़गे) सनातन का विरोध करता रहा हो, ऐसे विरोधी से और क्या अपेक्षा की जा सकती है? वैसे भी अब तो उनकी स्क्रिप्ट ही उनके आकाओं द्वारा लिखवाई जाती है।    

खरगे के इस बयान के बाद तो, जो कांग्रेस नेता महाकुंभ में जाना भी चाहते थे, उन्होंने जाना रद्द कर दिया। ऐसे में कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने महाकुंभ में आस्था की डुबकी लगा कांग्रेस नेतृत्व को एक तरह से चुनौती दे दी है। 

चर्चा है कि राहुल गाँधी भी महाकुम्भ में आस्था की डुबकी लगाने का मन बना रहे हैं। अखिलेश यादव पहले ही लगा चुके हैं। वास्तव में अब सभी ने समझना शुरू कर दिया है कि तुष्टिकरण कर मुस्लिम वोट तो मिल सकता है, लेकिन उससे ज्यादा हिन्दू कटना शुरू हो चुका है। मोदी रहे या न रहे सनातन को कोई नहीं रोक सकता। वैसे भी इतिहास साक्षी है कि सनातन मिटाने वालों का दुनिया में कोई नाम लेने वाला नहीं। बस एक भारत है जहाँ उनके नाम पर सियासत की दुकाने चल रही हैं।  

राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच डीके शिवकुमार के इस स्नान से सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। हैरानी की बात यह भी है कि कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार ने सिर्फ महाकुंभ में स्नान ही नहीं किया, बल्कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ भी की और कहा कि इतना बड़ा आयोजन करना कोई मजाक नहीं है। ऐसे में लोग कांग्रेस नेतृत्व पर तंज कसते हुए कह रहे हैं कि यह सनातन विरोधियों के मुंह पर करारा तमाचा है। लोगों का कहना है कि डीके शिवकुमार ने प्रयागराज महाकुंभ में पवित्र स्नान किया और इस ऐतिहासिक आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए आयोजकों का आभार भी जताया। 

लेकिन कुछ दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने महाकुंभ जाने को पैसे की बर्बादी बताया था और कहा था कि स्नान करने से गरीबी नहीं मिटती। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि यह वही मानसिकता है जो सनातन संस्कृति और आस्था का अपमान करती है, लेकिन जब चुनाव आते हैं तो यही लोग मंदिर-मंदिर घूमकर आशीर्वाद लेने का ढोंग करते हैं! यह स्पष्ट संदेश है कि सनातन धर्म हमारी संस्कृति और परंपरा की रीढ़ है, और इसे निशाना बनाना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। आप भी देखिए लोग डीके शिवकुमार की डुबकी को लेकर क्या कह रहे हैं…

महाकुंभ पर समाजवादी पार्टी सांसद जया बच्चन ने उगला जहर : संगम सबसे अधिक गंदा, लाशों को उठाकर पानी में डाला: कहा- झूठ बोल रहे हैं इतने लोग प्रयागराज आ ही नहीं सकते; क्या योगी सरकार इस गंभीर आरोप का संज्ञान लेगी?

प्रयाग में चल रहे महाकुम्भ से सनातन विरोधियों की नींद, रोटी और पानी हराम हो गया है। महाकुम्भ जैसे पावन पर्व को केवल राक्षस प्रवित्ति के लोग ही अपमानित कर सकते हैं। इस पवित्र नहान का सनातन में कितना महत्व है सनातन विरोधी नहीं जानते। सनातन विरोधी अपनी कुर्सी और तिजोरी को भरने कितने निचले स्तर तक कहना मुश्किल है और सनातन विरोधी लाख कहे हम भी हिन्दू है शंका होती है। हिन्दू तो कालनेमि राक्षस भी था। प्रतिदिन करोड़ों श्रद्धालु प्रयाग जाकर डुबकी लगा रहे, उसके बावजूद विरोधियों द्वारा जहर उगलना उनके संस्कार और पालन-पोषण को जगजाहिर करता है। 

जिन मुस्लिम वोटों की खातिर सनातन विरोधी हिन्दू सनातन का विरोध करते रहते हैं उन्हें मुसलमानों के पैरों में गिर धर्म सीखना चाहिए। मुसलमानों में इतनी जातियां और प्रजातियां है लेकिन इस्लाम के नाम पर सब एक रहते हैं। यकीन न हो तो इन सनातन विरोधी हिन्दुओं को अनवर शेख और अली सीना की किताबों को पढ़ना ही नहीं बल्कि जितने भी सनातन विरोधी है उनमे बांटनी चाहिए। लेकिन जब कालनेमि हिन्दू हो तो उनका पवनपुत्र हनुमान का प्रकोप ही बेड़ापार करेगा।     

समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने महाकुंभ को लेकर विवादित टिप्पणी की है। जया बच्चन ने कहा है कि इस समय दुनिया में सबसे ज्यादा प्रदूषित पानी कुंभ में है। वहाँ शवों को उठा कर फेंक दिया गया है। उसकी वजह से पानी प्रदूषित हो गया है। इन सब मुद्दों पर कोई सफाई नहीं दी जा रही है। मीडिया को इस पर आवाज उठानी चाहिए।

दरअसल बजट पर बोलने के लिए समाजवादी पार्टी को जब कुछ नहीं मिल रहा तो कुछ भी अनाप-शनाप बोल दो। जया को नहीं मालूम कि भारत ही नहीं विदेशी मीडिया भी प्रयाग में मौजूद है। डुबकी लगा चुके श्रद्धालुओं से उनका अनुभव पूछते हैं। जब किसी मीडिया ने गन्दा पानी और लाशों को उठाकर पानी में फेंकते नहीं देखा फिर जया ने कहाँ से देख लिया? क्या योगी सरकार को इस गंभीर आरोप का संज्ञान लेगी? क्योकि जब तक इन सनातन विरोधियों पर कुठाराघात नहीं होगा ये इस तरह जहर उगलते रहेंगे। 

जया बच्चन ने कहा कि कुंभ में आम लोगों को कोई स्पेशल ट्वीटमेंट नहीं मिल रहा। उनके लिए कोई सुविधा नहीं है। और दूसरी बात सरकार झूठ बोल रही है कि कुंभ में करोड़ों लोग पहुँचे हैं। बताइए, ऐसे कैसे हो सकता है कि इतने करोड़ लोग वहाँ आएँगे कैसे?

सपा सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार जो जलशक्ति की बातें कर रही है वो सब बेकार की बातें हैं। कुंभ पर जो जाँच की बात की जा रही है वो बेकार की बात है, हिंदुस्तान में न जाने कितनी जाँच की बातें चल रही हैं। उन्होंने कहा कि डेड बॉडीज का पोस्टमॉर्टम तो छोड़िए, शवों को उठाकर पानी में फेंक दिया गया है। 

उत्तर प्रदेश : बीती रात महाकुंभ प्रयाग में हुई दुर्घटना पर मोदी ने जताया दुःख ; प्रयागराज से चल रही 360 ट्रेन

जैसाकि सनातन में हर महीने आने वाली अमावस पर अपने पितरों के नाम पर दान-पुण्य करने और नदी में नहाने की परम्परा है, फिर महाकुम्भ जैसे महापर्व पर मौनी अमावस(जनवरी 29) पर पहले ही करोड़ों के प्रयाग जाने की सम्भावना व्यक्त की जा रही थी। लेकिन नागा साधुओं के आने से पहले संगम घाट पर रात 2 बजे ही डुबकी लगाने की होड़ में हादसा हो गया। कुशल प्रबंधन और सतर्कता ने हादसे को गंभीर होने से बचा लिया। यही कारण है कि इतनी भीड़ के चलते स्थिति को नियंत्रित होने के कारण साधु समाज द्वारा आज का नहान स्थगित करने के बावजूद 10 बजे से साधु समाज नहान करने लगा। 

प्रशासन की कुशलता एवं सतर्कता के चलते कुछ दिन पहले लगी आग पर तुरंत काबू पा लिया गया था। श्रद्धालुओं में किसी भी तरह का कोतुहल नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मौके पर पहुँचने से प्रशासन और सतर्क हो गया। जबकि 14 वर्ष पहले अखिलेश यादव के कार्यकाल में हुए हादसे को तत्कालीन उत्तर प्रदेश ने गंभीरता से नहीं लेने की वजह से कई लोगो को जान खोनी पड़ी थी।  
प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के आयोजन में बीती रात एक बहुत ही दुखद हादसे की वजह से 14 से अधिक लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग इस घटना में घायल भी बताये जा रहे है, ऐसे में बड़े बड़े नेता और राजनेता इस हादसे पर शौक जताते हुए दिखाई दिए, वहीं अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे को लेकर दुःख जताते हुए ट्विटर (X) पर पोस्ट शेयर की है।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बोला है कि ''प्रयागराज महाकुंभ में हुआ हादसा अत्यंत दुखद है। इसमें जिन श्रद्धालुओं ने अपने परिजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। इसके साथ ही मैं सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। स्थानीय प्रशासन पीड़ितों की हरसंभव मदद में जुटा हुआ है। इस सिलसिले में मैंने मुख्यमंत्री योगी जी से बातचीत की है और मैं लगातार राज्य सरकार के संपर्क में हूं।''

खबरों का कहना है कि दिल्ली में पीएम आवास पर हो रही केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री  मोदी ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ भी वार्ता की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ में मची भगदड़ के पश्चात श्रद्धालुओं को सुरक्षित प्रयागराज से निकालने पर रेलवे की तैयारी के बारें में जायजा लिया। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रयागराज में रेलवे के द्वारा की गई व्यवस्था के बारे में भी सूचना दी है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बोला है कि ''आज 360 से ज्यादा ट्रेन प्रयागराज से चलाई जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रेल मंत्री ने जानकारी दी है कि प्रयागराज के कई रेलवे स्टेशन पर हर 4 मिनट में एक ट्रेन आ और जा रही है। प्रयागराज के सभी रेलवे स्टेशन पर RPF और जीआरपी के जवान को भीड़ नियंत्रण के लिए तैनात कर दिया गया है। कलर कोड के हिसाब से यात्रियों को स्टेशन पर एंट्री दी जा रही है।''

महाकुंभ में हुई भगदड़ को लेकर अशोक गहलोत ने कह डाली ये बात

बीती रात महाकुंभ में भगदड़ मचने की वजह से हादसा हो गया, लेकिन इस दर्दनाक हादसे में 14 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. लेकिन जख्मियों का आंकड़ा कितना है इस बारें में अब भी कुछ नहीं कहा जा सकता, ऐसे में प्रशासन पर कई तरह के सवाल भी उठ रहे है और कई लोग इस हादसे की खबर सुन दुःख जाता रहे है. 

हादसे पर अशोक गहलोत ने कह डाली ये बात: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस हादसे के बारें में पोस्ट शेयर करते हुए कहा है कि - ''प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान भगदड़ से 10 से अधिक श्रद्धालुओं की मृत्यु एवं कई श्रद्धालुओं के घायल होने का समाचार बेहद कष्ट देने वाला है।  अपनी बात को जारी रखते हुए उन्होंने लिखा है कि ''मैं ईश्वर से दिवंगतजनों को श्रीचरणों में स्थान एवं घायलों को जल्द स्वास्थ्य लाभ देने की प्रार्थना करता हूं।''

कांग्रेस ने घटना को बताया बहुत ही पीड़ादायक: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने महाकुंभ में हुए दुर्घटना को लेकर एक बयान भी जारी कर दिया है। कांग्रेस ने इस बारें में बोला है कि ''महाकुंभ में हुए हादसे में कई श्रद्धालुओं की जान जाने की खबर बहुत ही पीड़ादायक है। इस दुख की घड़ी में ईश्वर शोकाकुल परिवारों को संबल प्रदान करें व जख्मियों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करना होगा। कांग्रेस परिवार की संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ ही है। गवर्नमेंट जख्मी श्रद्धालुओं का उचित और बेहतर उपचार करवाएं। मृतकों का पार्थिव शरीर उनके परिजनों को सौंपकर, उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की जाने वाली है। महाकुंभ की व्यवस्था बेहतर की जाए, जिससे आगे कभी ऐसे दुर्घटना न हों। श्रद्धालुओं के सुलभ और सुरक्षित स्नान का प्रबंध हो। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से अनुरोध है कि वे पीड़ितों को हर संभव सहायता करने का प्रयास करें।

दुर्घटना के पश्चात शासन-प्रशासन और मीडिया का भी दिखाई दिया रुख: मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि दुर्घटना के पश्चात शासन-प्रशासन, मीडिया और मेला प्रशासन मृतकों की वास्तविक आंकड़ा बताने और जख्मियों का उचित उपचार करवाने के बजाए महाकुंभ में भारी आंकड़े में आने वालों के बखान में ही लगा हुआ है। प्रशासन और मीडिया का दावा है कि 13 जनवरी से शुरू हुए महाकुंभ में अब तक तकरीबन 15 करोड़ लोग गंगा में भी डुबकी लगा चुके है। आज यानी बुधवार को मौनी अमावस्या पर ही 10 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान बह लगाया जा रहा है। लेकिन रात में ही अनुमान से अधिक लोग पहुंच चुके है। इस पूरी प्रक्रिया में कहीं भी मेला प्रशासन और यूपी गवर्नमेंट की लापरवाही को नहीं कहा जा रहा है।

हादसे को लेकर किया जा रहा है अलग तरीके का दावा: मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि शासन-प्रशासन ने इस बारें में बोला है कि आज यानी मौनी अमावस्या पर महाकुंभ का दूसरा शाही स्नान होने वाला था, लेकिन एक दिन पूर्व ही प्रयागराज में अनुमान से अधिक भीड़ पहुंची। आंकड़ों की मानें तो बीते मंगलवार को ही तकरीबन 5 करोड़ लोग प्रयागराज पहुंचे थे।

वहीं प्रत्यक्षदर्शियों ने बोला है कि पुलिसवालों ने शाही स्नान की तैयारी करने के लिए संगम पर लेटे लोगों को तुरंत ही उठाने का काम शुरू कर दिया, इससे भगदड़ की अफवाह फैली और दुर्घटा भी हुई तो किसी ने कहा है कि भीड़ बहुत अधिक थी तो कुछ लोगों का दम घुटने लगा और वे बेहोश होने लग गए थे, इस कारण से भगदड़ के आसार बन गए। किसी ने यह भी बोला है कि लोगों को संगम तट पर जाने से रोकने का भी काम किया जा रहा है, उन्हें दूसरे तटों पर स्नान के लिए भेजा जा रहा था, लेकिन भीड़ संगम पर ही स्नान के लिए ही अड़े हुए थे। ऐसे में बैरियर टूटा और भगदड़ का माहौल पैदा हो गया। प्रशासनिक अधिकारी का बयान भी भी था। कुंभ मेला की OSD आकांक्षा राणा ने इस बारें में बोला है कि संगम नोज पर भीड़ के कारण बैरियर टूटने  के पश्चात भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हुई।

प्रयागराज महाकुंभ आध्यात्मिक ही नहीं, कारोबार को भी कर रहा मजबूत; फ्लाइट बुकिंग में 162% का उछाल, होटल कारोबार 3 गुना बढ़ा: 4 लाख रूपए करोड़ के बिजनेस का अनुमान

                                              प्रयागराज महाकुंभ (साभार: Leonardo AI)
प्रयागराज महाकुंभ 2025 को लेकर मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे अपनी दुकान चलाने की खातिर माथा टेक चुकी पार्टियों की चीखा-चिल्ली स्वाभाविक है। ऑप इंडिया की निम्न रपट इन सभी पर बहुत जबरदस्त प्रहार है। सरकार और दूसरे व्यवसायिक संस्थानों की आय में हो रहे उछाल ने इन सभी सनातन विरोधियों की नींद और रोटी-पानी तक हराम हो चुकी है। इस कटु सच्चाई सनातन विरोधियों की गुलाम मीडिया भी सच्चाई बताने की हिम्मत नहीं कर पा रही। हिन्दुओं को नहीं भूलना चाहिए कि अयोध्या में राममन्दिर का कितने सालों तक विरोध हुआ। लेकिन राममन्दिर बनने के बाद जितनी जनता पुरुषोत्तम श्रीराम के दर्शन करने जाती है, ताज महल घूमने जाने वालों की संख्या में बहुत गिरावट आ चुकी है। काशी विश्वनाथ और उज्जैन में महाकाल धामों के विकास होने से श्रद्धालुओं की जो वृद्धि हुई है उससे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश राज्यों की आमदनी में भी इजाफा हुआ है। और यह इजाफा राज्य सरकारों का ही नहीं होटल और अन्य व्यवसायिक में भी हुआ है। इन सभी को देखते हुए इन मुस्लिम तुष्टिकरण करने वालों का चीखना-चिल्लाने से परेशान नहीं होना चाहिए। जितना ज्यादा ये सनातन विरोधी चीखे-चिल्लाने से हिन्दू एकजुट होकर अपनी वोट से इन्हे धूल चटा रहा है। 

इन मुस्लिम तुष्टिकरण करने वालों को नहीं भूलना चाहिए कि समय कालचक्र घूम रहा है। अब जितना ज्यादा सनातन विरोध होगा उतना ही इन सनातन विरोधियों को नुकसान हो रहा है। याद रखिए वह दिन भी ज्यादा दूर नहीं जब इन सनातन विरोधियों को इनका परिवार ही अलग-थलग कर देखा, क्योकि हिन्दुओं में एक बात अच्छी तरह घर करने लगी है कि जब मुस्लिम सनातन को पराजित करने एकजुट हो सकता है तो सनातन को बचाने हिन्दू क्यों नहीं। उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोई गलत नहीं कहा कि "बटोगे तो कटोगे"। देखिए ऑप इंडिया की रपट:- 

प्रयागराज महाकुंभ 2025 में प्रशंसा हर तरफ हो रही है। कुंभ ना सिर्फ सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह अर्थव्यवस्था को भी निखारने का काम कर रहा है। महाकुंभ के आयोजन के दौरान भारत के कई व्यवसायिक क्षेत्रों में भारी उछाल देखने को मिला है। इनमें सबसे अधिक उछाल होटल इंडस्ट्री में देखने को मिल रहा है। इससे प्रयागराज के व्यवसायी काफी खुश हैं।

महाकुंभ मेले के कारण प्रयागराज के कारोबार में दो से तीन गुना तक की बढ़ोतरी हो गई है। होटलों में अगले कई दिनों तक कमरे खाली नहीं हैं। होटल के साथ-साथ खान-पान के सामान, स्थानीय उत्पाद, कंबल, ऊनी कपड़ों और इलेक्ट्रॉनिक सामानों की बिक्री में वृद्धि देखी जा रही है। प्रयागराज में फ्लाइट्स की बुकिंग में 162 प्रतिशत का उछाल देखने को मिल रहा है।

फ्लाइट्स के अलावा रेलवे, बसों, टैक्सियों आदि की कमाई में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। ट्रेनों से लेकर बसों एवं टैक्सियों तक में लोग खचाखच भर करके कुंभ नहाने के लिए प्रयागराज पहुँच रहे हैं। छोटे-छोटे व्यवसाय करने वाले लोगों से लेकर होटल-रेस्टोरेंट और ऑनलाइन बुकिंग का काम करने वाली कंपनियाँ भी इस बूम से काफी खुश हैं। कुंभ खत्म होने तक यानी 45 दिनों में उन्हें भारी मुनाफा होने की उम्मीद है।

प्रयागराज होटल एंड रेस्टोरेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह ने अमर उजाला को बताया कि श्रद्धालु और पर्यटकों द्वारा बुकिंग कराने के कारण होटल इंडस्ट्री को 30 से 40 फीसदी तक का मुनाफा हो रहा है। उनका मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुनाफा बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुँचने की उम्मीद है। थोक और खुदरा व्यापारी भी कुछ ऐसी ही उम्मीद कर रहे हैं।

कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल का मानना है कि महाकुंभ के अवसर पर सिर्फ होटल और टेंट सिटी का कारोबार 2,500 से लेकर 3,000 करोड़ रुपए तक का हो सकता है। केंद्रीय व्यापार मंडल के महामंत्री शिवशंकर सिंह का मानना है कि एफएमसीजी उत्पाद, ऑटोमोबाइल, सीसीटीवी कैमरा, केबल और खाने-पीने के सामान की बिक्री में भारी वृद्धि हुई है।

शिवशंकर सिंह का कहना है कि मकर संक्रांति के स्नान तक खुदरा व्यापार में भी 20 से 25 प्रतिशत वृद्धि देखने को मिली है। व्यापारियों को उम्मीद है कि कुंभ स्नान में विशेष स्थान रखने वाले मौनी अमावस्या पर यह बिक्री और भी अधिक बढ़ने की उम्मीद है। हस्तशिल्पी इस बार 35 करोड़ रुपए तक का कारोबार कर सकते हैं। व्यापार मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहम्मद कादिर का भी ऐसा ही मानना है।

मोहम्मद कादिर का कहना है कि महाकुंभ मेले के कारण प्रयागराज में खाद्य सामग्री, अनाज, पूजा सामग्री, कपड़े, कंबल, गद्दे, इलेक्ट्रॉनिक सामान, टेंट के कपड़े आदि के व्यापार में दोगुना की बढ़ोतरी हुई है। मोहम्मद कादिर का कहना है कि मेले में जैसे श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी वैसे-वैसे वृद्धि में और भी अधिक वृद्धि होगी और व्यापारियों को फायदा होगा।

कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुमान के मुताबिक, सिर्फ होटलों, धर्मशालाओं और टेंट से ही 40,000 करोड़ रुपए के व्यापार की संभावना है। पैक खाद्य सामग्री, पानी, बिस्किट, जूस, और भोजन से जुड़ा 20,000 करोड़ रुपया का कारोबार होगा। वहीं तेल, दीपक, गंगाजल, मूर्तियाँ, अगरबत्ती, धार्मिक पुस्तकों आदि की बिक्री से 20,000 करोड़ रुपए का व्यापार होगा।

इसी तरह परिवहन यानी रेलवे-टैक्सी आदि से 10,000 करोड़ रुपए का व्यवसाय होने का अनुमान है। टूर गाइड, ट्रैवल पैकेज और पर्यटक सेवाओं से 10,000 करोड़ रुपए का व्यापार अनुमानित है। वहीं, विज्ञापन और प्रचार गतिविधियों से 10,000 करोड़ रुपए के व्यापार का अनुमान है। स्थानीय उत्पादों, कपड़ों, गहनों और स्मृति चिन्हों से 5,000 करोड़ रुपए का व्यापार हो सकता है।

CAIT ने अनुमान लगाया है कि अस्थायी मेडिकल कैंप, आयुर्वेदिक उत्पाद और दवाइयों से 3,000 करोड़ रुपए का व्यापार होगा। इसी तरह डिजिटल भुगतान सेवा, वाई-फाई सेवा और ऑनलाइन टिकटिंग बुकिंग यानी ई-टिकटिंग से 1,000 करोड़ का व्यापार होने का अनुमान लगाया गया है। बता दें कि इस महाकुंभ में डाबर, मदर डेयरी और आईटीसी जैसे बड़े ब्रांडों ने 3,000 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

इस तरह 26 फरवरी तक चलने वाले 45 दिनों के इस महाकुंभ मेले में 2 लाख करोड़ रुपए का बिजनेस होने का अनुमान लगाया गया है। हालाँकि, इंडस्ट्री के जानकार इस व्यापार को 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा बता रहे हैं। वहीं, सरकार का अनुमान है कि मेले से उसे 25,000 करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार ने कुंभ मेले में करीब 6,900 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। 

दरअसल, कुंभ मेले में दुनिया भर से 40 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने का अनुमान है। अगर हर पर्यटक औसतन 5000 रुपए खर्च करता है तो महाकुंभ से 2 लाख करोड़ रुपए का व्यापार हो सकता है। वहीं, इंडस्ट्री का अनुमान है कि मेले में औसतन प्रति व्यक्ति खर्च 10,000 रुपए हो तो यह आँकड़ा 4 लाख करोड़ रुपए को पार सकता है। इससे देश की जीडीपी एक फीसदी से भी अधिक बढ़ सकती है। 

भारत स्वतंत्र हुआ, पर कैद ही रह गया था पुराणों का अक्षयवट: अकबर का लगाया प्रतिबंध मोदी राज में हटा ; पहली बार प्रयागराज महाकुंभ में हिंदू कर सकेंगे दर्शन

                                प्रयागराज स्थित अक्षयवट (साभार: X/NarendraModi)
जब जब सनातन पताका लहरायी है सनातन विरोधी असुर शक्तियों ने व्यवधान डालने का दुस्साहस किया है। 1947 में भारत स्वतंत्र जरूर हुआ लेकिन मुस्लिम तुष्टिकरण करने वालों ने सनातन को प्रकाशमय नहीं होने दिया। 2014 में सत्ता परिवर्तन होने से जो सनातन के प्रकाशमय होने का शंखनाद हुआ उसने समस्त सनातन विरोधियों की नींद, रोटी और पानी पीना तक कठिन कर दिया है। 1947 से लेकर 2014 चुनावों से पूर्व इतने प्रधानमंत्री आये और गए लेकिन किसी ने सनातन की तरफ लेशमात्र भी ध्यान नहीं दिया। सभी ने अपनी कुर्सी की खातिर सनातन को साम्प्रदायिक/फिरकापरस्त या फिर संविधान विरोधी करार करते रहे। 
      

गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर बसे प्रयागराज में इस बार 144 साल बाद महाकुंभ का आयोजन होने जा रहा है। साधु-संत कुंभ क्षेत्र में पहुँच चुके हैं। शास्त्रों में महाकुंभ की महिमा अपार बताई जाती है। यही कारण है कि हर सनातनी अपने जीवन में कम-से-कम एक बार प्रयागराज कुंभ में स्नान ज़रूर करना चाहता है। त्रिवेणी पर सिर्फ स्नान का ही महात्म्य नहीं है, बल्कि अक्षयवट आदि के दर्शन भी महत्वपूर्ण हैं।

कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक एवं सांस्कृतिक समागम है, जो पूर्णत: वैज्ञानिक अवधारणाओं पर आधारित है। खगोल विज्ञान के अनुसार, ग्रह-नक्षत्रों के विशेष सिद्ध में आने के बाद अर्ध कुंभ, पूर्ण कुंभ और महाकुंभ का आयोजन होता है। वैसे कुंभ के आयोजन के बारे में सबसे पुरानी लिखित जानकारी चीनी यात्री ह्वेन त्सांग के यात्रा विवरणों से मिलती है, लेकिन धार्मिक ग्रंथों में इसके बारे में सृष्टि के प्रारंभ को माना गया है।

अथर्ववेद में कुंभ मेले के वर्णन की बात कही जाती है। अथर्ववेद में ‘चतुर्था ददामि’ और ‘पूर्णा: कुंभोषधिकाल आहितस्तं’ का जिक्र है। हालाँकि, 14वीं-15वीं शताब्दी के विद्वान सायण और 17वीं शताब्दी के विद्वान उद्गीथ बताते हैं कि पहला श्लोक विश्तारी यज्ञ की महिमा में एक भजन से संबंधित है और दूसरा ‘ईश्वरीय समय’ से संबंधित है। यहाँ, कुंभ का अर्थ है ‘पानी का घड़ा’, न कि त्योहार।

पुराणों में कुंभ का विस्तार से वर्णन

जो भी हो, लेकिन कुंभ का वर्णन पुराणों में है। मत्स्य पुराण में इसकी कहानी है। जब समुद्र मंथन हुआ तो उसमें से एक रत्न के रूप में अमृत कलश भी निकला। अमृत असुर ना पी जाएँ, इसलिए देवता इसे लेकर भागने लगे और असुर उनका पीछा करने लगे। इस दौरान अमृत की बूँदे प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिर गईं। जहाँ-जहाँ अमृत की बूँदे गिरीं, वहाँ-वहाँ आज कुंभ मेले का आयोजन होता है।
ऐसा ही वर्णन स्कंद पुराण एवं पद्म पुराण में है। पद्म पुराण में कहा गया है, “पृथिव्यां कुम्भयोगस्य चतुर्धा भेद उच्चते। चतु:स्थले नितनात् सुधा कुम्भस्थ भूतले।। चन्द्र प्रस्रवणा रक्षां सूर्यों विस्फोटनात् दधौ। दैत्येभ्यश्च गुरु रक्षां सौरिदेवेंद्रजात् भयात्।।” इसका अर्थ हुआ कि पृथ्वी पर कुम्भयोग के चार प्रकार होते हैं। चार स्थानों पर हर समय अमृत (सुधा) का प्रवाह होता है। यहाँ सूर्य और चंद्रमा के माध्यम से रक्षा का प्रवाह होता है।
कुंभ को लेकर स्कंद पुराण में कहा गया है, “माघे मासे गंगे स्नानं यः कुरुते नरः। युगकोटिसहस्राणि तिष्ठंति पितृदेवताः।।” अर्थात, माघ महीने में गंगा में स्नान करने वाले व्यक्ति के पितर स्वर्ग में वास करते हैं। वहीं, पद्म पुराण में कहा गया है, “त्रिषु स्थलेषु यः स्नायात् प्रयागे च पुष्करे। कुरुक्षेत्रे च धर्मात्मा स याति परमं पदम्।।” अर्थात, जो धर्मात्मा प्रयाग, पुष्कर और कुरुक्षेत्र में स्नान करता है वह परम धाम जाता है।
गरुण पुराण में कहा गया है, “अग्निष्टोमसहस्राणि वाजपेयशतानि च। कुंभस्नानस्य कलां नार्हंते षोडशीमपि।।” (हजारों अग्निष्टोम और सैकड़ों वाजपेय यज्ञ भी कुंभ स्नान के सोलहवें भाग के बराबर नहीं हैं।) ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, “प्रयागे माघमासे तु स्नात्वा पार्थिवमर्दनः। सर्वपापैः प्रमुच्येत पितृभिः सह मोदते।।” अर्थात, माघ मास में प्रयाग में स्नान करने से सभी पापों से मुक्त हो जाता है और उसके पितर प्रसन्न होते हैं।
अग्नि पुराण के अनुसार, “कुंभे कुंभोद्भवः स्नात्वा प्रायच्छति हि मानवान्। ततः परं न पापानि तिष्ठन्ति शुभकर्मणाम्।।” अर्थात, कुंभ में स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और वह शुभ कर्मों की ओर अग्रसर होता है। विष्णु पुराण के अनुसार, “अयं कुंभः परं पुण्यं स्नानं येन कृतं शुभम्। सर्वपापक्षयं याति गच्छते विष्णुसन्निधिम्।।” अर्थात, कुंभ में स्नान अत्यंत पुण्यदायक है और आदमी विष्णु लोक जाता है।
श्रीमदभागवत पुराण के अनुसार, “तत्रापि यः स्नानकृत् पुण्यकाले। गंगा जलं तीर्थमथाधिवासम्।। पुण्यं लभेत् कृतकृत्यः स गत्वा। वैकुण्ठलोकं परमं समेति।।” अर्थात, पवित्र समय में गंगा में स्नान करने वाला व्यक्ति पुण्य प्राप्त कर वैकुण्ठ धाम जाता है। महाभारत के वन पर्व में कहा गया है, “त्रिपुरं दहते यज्ञः स्नानं तीर्थे तु दहते। सर्वपापं च तीर्थे स्नात्वा सर्वं भवति शुद्धये।।”
अर्थात, यज्ञ तीनों लोकों को शुद्ध करता है, लेकिन तीर्थ में स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति पूरी तरह शुद्ध हो जाता है। कूर्म पुराण में कहा गया है कि कहता है कि कुंभ स्नान से सारे पाप नष्ट होते हैं। कुंभ में पापों को नष्ट करने और स्नान को फलदायी बनाने के लिए पाप नहीं करने का भी संकल्प लेना चाहिए।

सम्राट हर्ष के समय चीनी यात्री ने किया जिक्र

मस्त्य पुराण एवं पद्म पुराण के अलावा कुंभ का वर्णन स्कंद पुराण, अग्नि पुराण, भविष्य पुराण, ब्रह्म पुराण, कूर्म पुराण, पद्म पुराण, भागवत पुराण, विष्णु पुराण, गरुड़ पुराण और वाल्मीकि रामायण आदि में भी है। मान्यताओं के अनुसार, कुंभ का आयोजन अनादि काल से होता है। वहीं, कुछ इसे सिंधु सभ्यता से भी पुराना बताते हैं। कहा जाता है कि यह हड़प्पा और मोहनजोदड़ो सभ्यता से 1,000 साल पुरानी है।
ईसा के जन्म से 500 पूर्व हुए परमार वंश के सम्राट विक्रमादित्य के नवरत्नों में शामिल रहे कालिदास ने अपनी अमर कृति रघुवंशम में भी इसका जिक्र किया है। सम्राट हर्षवर्धन बैंस, जिन्हें इतिहास में सम्राट हर्ष के नाम भी जानते हैं, के शासनकाल में 629-645 ईस्वी तक भारत में रहे चीनी यात्री ह्वेन त्सांग (या Xuanzang) ने भी कुंभ का वर्णन किया है। मुगल काल में इसको लेकर कई जगह वर्णन है।
यह माना जाता है कि अधिकतर पुराण बाद के काल में लिखे गए हैं। कई तो 15-16वीं सदी में भी लिखे गए। कुछ धर्मग्रंथों में कहा गया है कि सबसे पहले कुंभ मेले का आरंभ सम्राट हर्षवर्धन ने किया था। ह्वेन त्सांग अपनी यात्रा के दौरान प्रयागराज आया था और उसने अपनी यात्रा वृतांत में लिखा है कि सम्राट हर्षवर्धन हर पाँच साल पर नदियों के संगम पर आयोजन करते थे और वहाँ गरीबों को दान देते थे।

अक्षयवट का महात्म्य, सीएम योगी ने मुगलकाल के प्रतिबंध हटाए

कहा जाता है कि प्रयागराज कुंभ में स्नान का फल तभी मिलता है, जब वहाँ स्थित अक्षयवट का दर्शन किया जाए। संगम तट पर एक प्राचीन किला है, जिसमें यह अक्षय वट स्थित है। अक्षयवट का जिक्र पुराणों में भी वर्णन है। कहा जाता है कि यह वट सृष्टि के विकास और प्रलय का साक्षी रहा है। इसका कभी नाश नहीं होता है। अकबर ने अक्षयवट के दर्शन-पूजन पर रोक लगा दी थी।
इसके बाद दिवंगत सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने यहाँ आकर पातालपुरी मंदिर का दर्शन किया था और बाद में उनके प्रयास से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साल 2018 में यहाँ आम लोगों के दर्शन पर से प्रतिबंध हटा दिया था। बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यहाँ आए और इस अनादि अक्षयवट का दर्शन किया था।
इस वट को बारे में कहा जाता है कि इस वृक्ष को माता सीता ने आशीर्वाद दिया था कि प्रलय काल में जब धरती जलमग्न हो जाएगी और सब कुछ नष्ट हो जाएगा तब भी वह हरा-भरा रहेगा। इसके अलावा, एक मान्यता यह भी है कि बाल रूप में भगवान कृष्ण इसी वट वृक्ष पर विराजमान हुए थे। तब से श्रीहरि इसके पत्ते पर शयन करते हैं। पद्म पुराण में अक्षयवट को तीर्थराज प्रयाग का छत्र कहा गया है।
ह्वेन त्सांग ने अक्षयवट के बारे में लिखा है कि नगर में एक मंदिर है और उसमें एक विशाल वट है। इसकी शाखाएँ और पत्तियाँ दूर दूर तक फैली हुई हैं। इस वट का वर्णन वाल्मीकि रामायण में भी मिलता है। कहा जाता है कि भारद्वाज मुनि ने भगवान श्रीराम से कहा था कि वे दोनों भाई गंगा-यमुना के संगम पर जाएँ और वहाँ बहुत बड़ा वट वृक्ष मिलेगा। वहीं, से दोनों भाई यमुना को पार कर जाएँ।
भारद्वाज मुनि अक्षयवट के बारे में भगवान राम से कहते हैं कि वह चारों तरफ से दूसरे वृक्षों से घिरा होगा। उसकी छाया में बहुत से सिद्ध पुरुष रहते होंगे। वहाँ पहुँचकर वटवृक्ष से आशीर्वाद की कामना करनी चाहिए। कहा जाता है माता सीता ने ऐसा ही किया और साथ ही अक्षयवट को आशीर्वाद दिया कि संगम स्नान करने के बाद जो कोई अक्षयवट का पूजन-दर्शन करेगा, उसे ही स्नान का फल मिलेगा।
कहा जाता है कि ब्रह्मा ने सृष्टि के आरंभ में प्रयागराज के संगम पर यज्ञ आरंभ किया था। इसमें भगवान विष्णु यजमान बने थे और भगवान शिव देवता बने थे। यज्ञ के अंत में तीन देवों ने अपनी शक्तिपुँज से एक वृक्ष उत्पन्न किया, जिसे आज अक्षयवट कहा जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस वटवृक्ष की उम्र 5270 वर्ष बताई जाती है। कहा जाता है कि इस अक्षयवट की जड़े पाताल लोक में स्थित हैं।
कहा जाता है कि अक्षयवट को मुगलकाल में इसे खत्म करने के प्रयास किए गए। इसके अलावा भी कई मुस्लिम आक्रमणकारियों ने इसे काट एवं जलाकर नष्ट करने की कोशिश की, लेकिन वे नाकाम रहे। माना जाता है कि इस तरह के वट वृक्ष पृथ्वी पाँच हैं। पहला प्रयागराज में अक्षयवट, दूसरा उज्जैन में सिद्धवट, तीसरा वृंदावन में वंशीवट, चौथा गया में मोक्षवट और पाँचवाँ पंचवटी में पंचवट।

कब आयोजित होता है महाकुंभ, कुंभ और अर्धकुंभ

इस बार प्रयागराज में 144 साल बाद लगने वाला कुंभ लग रहा है। दरअसल, कुंभ पाँच प्रकार का होता है- महाकुंभ, पूर्ण कुंभ, अर्ध कुंभ, कुंभ और माघ कुंभ, जिसे माघ मेला भी कहते हैं। 144 बाद लगने वाले महाकुंभ का आयोजन सिर्फ प्रयागराज के संगम पर ही होता है। शास्त्रों के अनुसार, जब बृहस्पति वृषभ राशि में और सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब कुंभ मेले का आयोजन प्रयागराज में किया जाता है।
पूर्ण कुंभ 12 वर्षों में आयोजित किया जाता है। पूर्ण कुंभ का आयोजन 4 तीर्थस्थलों- हरिद्वार, उज्जैन, नासिक और प्रयागराज में होता है। हरिद्वार गंगा नदी, उज्जैन शिप्रा नदी, नासिक गोदावरी नदी और प्रयागराज गंगा, यमुना एवं सरस्वती नदियों के संगम पर बसा है। जब सूर्य मेष राशि और बृहस्पति कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं, तब कुंभ मेले का आयोजन हरिद्वार में किया जाता है। .
वहीं, अर्ध कुंभ का आयोजन हर 6 साल पर होता है। इसका आयोजन केवल दो स्थानों- प्रयागराज और हरिद्वार में होता है। माघ कुंभ हर साल सिर्फ प्रयागराज में आयोजित किया जाता है। जब सूर्य सिंह राशि में प्रवेश करते हैं तो उज्जैन में जो कुंभ मनाया जाता है उसे सिंहस्थ कुंभ कहते हैं। जब सूर्य और बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करते हैं, तब यह कुंभ मेला नासिक में मनाया जाता है