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उत्तर प्रदेश : बीती रात महाकुंभ प्रयाग में हुई दुर्घटना पर मोदी ने जताया दुःख ; प्रयागराज से चल रही 360 ट्रेन

जैसाकि सनातन में हर महीने आने वाली अमावस पर अपने पितरों के नाम पर दान-पुण्य करने और नदी में नहाने की परम्परा है, फिर महाकुम्भ जैसे महापर्व पर मौनी अमावस(जनवरी 29) पर पहले ही करोड़ों के प्रयाग जाने की सम्भावना व्यक्त की जा रही थी। लेकिन नागा साधुओं के आने से पहले संगम घाट पर रात 2 बजे ही डुबकी लगाने की होड़ में हादसा हो गया। कुशल प्रबंधन और सतर्कता ने हादसे को गंभीर होने से बचा लिया। यही कारण है कि इतनी भीड़ के चलते स्थिति को नियंत्रित होने के कारण साधु समाज द्वारा आज का नहान स्थगित करने के बावजूद 10 बजे से साधु समाज नहान करने लगा। 

प्रशासन की कुशलता एवं सतर्कता के चलते कुछ दिन पहले लगी आग पर तुरंत काबू पा लिया गया था। श्रद्धालुओं में किसी भी तरह का कोतुहल नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मौके पर पहुँचने से प्रशासन और सतर्क हो गया। जबकि 14 वर्ष पहले अखिलेश यादव के कार्यकाल में हुए हादसे को तत्कालीन उत्तर प्रदेश ने गंभीरता से नहीं लेने की वजह से कई लोगो को जान खोनी पड़ी थी।  
प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के आयोजन में बीती रात एक बहुत ही दुखद हादसे की वजह से 14 से अधिक लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग इस घटना में घायल भी बताये जा रहे है, ऐसे में बड़े बड़े नेता और राजनेता इस हादसे पर शौक जताते हुए दिखाई दिए, वहीं अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे को लेकर दुःख जताते हुए ट्विटर (X) पर पोस्ट शेयर की है।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बोला है कि ''प्रयागराज महाकुंभ में हुआ हादसा अत्यंत दुखद है। इसमें जिन श्रद्धालुओं ने अपने परिजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। इसके साथ ही मैं सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। स्थानीय प्रशासन पीड़ितों की हरसंभव मदद में जुटा हुआ है। इस सिलसिले में मैंने मुख्यमंत्री योगी जी से बातचीत की है और मैं लगातार राज्य सरकार के संपर्क में हूं।''

खबरों का कहना है कि दिल्ली में पीएम आवास पर हो रही केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री  मोदी ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ भी वार्ता की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ में मची भगदड़ के पश्चात श्रद्धालुओं को सुरक्षित प्रयागराज से निकालने पर रेलवे की तैयारी के बारें में जायजा लिया। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रयागराज में रेलवे के द्वारा की गई व्यवस्था के बारे में भी सूचना दी है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बोला है कि ''आज 360 से ज्यादा ट्रेन प्रयागराज से चलाई जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रेल मंत्री ने जानकारी दी है कि प्रयागराज के कई रेलवे स्टेशन पर हर 4 मिनट में एक ट्रेन आ और जा रही है। प्रयागराज के सभी रेलवे स्टेशन पर RPF और जीआरपी के जवान को भीड़ नियंत्रण के लिए तैनात कर दिया गया है। कलर कोड के हिसाब से यात्रियों को स्टेशन पर एंट्री दी जा रही है।''

महाकुंभ में हुई भगदड़ को लेकर अशोक गहलोत ने कह डाली ये बात

बीती रात महाकुंभ में भगदड़ मचने की वजह से हादसा हो गया, लेकिन इस दर्दनाक हादसे में 14 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. लेकिन जख्मियों का आंकड़ा कितना है इस बारें में अब भी कुछ नहीं कहा जा सकता, ऐसे में प्रशासन पर कई तरह के सवाल भी उठ रहे है और कई लोग इस हादसे की खबर सुन दुःख जाता रहे है. 

हादसे पर अशोक गहलोत ने कह डाली ये बात: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस हादसे के बारें में पोस्ट शेयर करते हुए कहा है कि - ''प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान भगदड़ से 10 से अधिक श्रद्धालुओं की मृत्यु एवं कई श्रद्धालुओं के घायल होने का समाचार बेहद कष्ट देने वाला है।  अपनी बात को जारी रखते हुए उन्होंने लिखा है कि ''मैं ईश्वर से दिवंगतजनों को श्रीचरणों में स्थान एवं घायलों को जल्द स्वास्थ्य लाभ देने की प्रार्थना करता हूं।''

कांग्रेस ने घटना को बताया बहुत ही पीड़ादायक: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने महाकुंभ में हुए दुर्घटना को लेकर एक बयान भी जारी कर दिया है। कांग्रेस ने इस बारें में बोला है कि ''महाकुंभ में हुए हादसे में कई श्रद्धालुओं की जान जाने की खबर बहुत ही पीड़ादायक है। इस दुख की घड़ी में ईश्वर शोकाकुल परिवारों को संबल प्रदान करें व जख्मियों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करना होगा। कांग्रेस परिवार की संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ ही है। गवर्नमेंट जख्मी श्रद्धालुओं का उचित और बेहतर उपचार करवाएं। मृतकों का पार्थिव शरीर उनके परिजनों को सौंपकर, उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की जाने वाली है। महाकुंभ की व्यवस्था बेहतर की जाए, जिससे आगे कभी ऐसे दुर्घटना न हों। श्रद्धालुओं के सुलभ और सुरक्षित स्नान का प्रबंध हो। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से अनुरोध है कि वे पीड़ितों को हर संभव सहायता करने का प्रयास करें।

दुर्घटना के पश्चात शासन-प्रशासन और मीडिया का भी दिखाई दिया रुख: मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि दुर्घटना के पश्चात शासन-प्रशासन, मीडिया और मेला प्रशासन मृतकों की वास्तविक आंकड़ा बताने और जख्मियों का उचित उपचार करवाने के बजाए महाकुंभ में भारी आंकड़े में आने वालों के बखान में ही लगा हुआ है। प्रशासन और मीडिया का दावा है कि 13 जनवरी से शुरू हुए महाकुंभ में अब तक तकरीबन 15 करोड़ लोग गंगा में भी डुबकी लगा चुके है। आज यानी बुधवार को मौनी अमावस्या पर ही 10 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान बह लगाया जा रहा है। लेकिन रात में ही अनुमान से अधिक लोग पहुंच चुके है। इस पूरी प्रक्रिया में कहीं भी मेला प्रशासन और यूपी गवर्नमेंट की लापरवाही को नहीं कहा जा रहा है।

हादसे को लेकर किया जा रहा है अलग तरीके का दावा: मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि शासन-प्रशासन ने इस बारें में बोला है कि आज यानी मौनी अमावस्या पर महाकुंभ का दूसरा शाही स्नान होने वाला था, लेकिन एक दिन पूर्व ही प्रयागराज में अनुमान से अधिक भीड़ पहुंची। आंकड़ों की मानें तो बीते मंगलवार को ही तकरीबन 5 करोड़ लोग प्रयागराज पहुंचे थे।

वहीं प्रत्यक्षदर्शियों ने बोला है कि पुलिसवालों ने शाही स्नान की तैयारी करने के लिए संगम पर लेटे लोगों को तुरंत ही उठाने का काम शुरू कर दिया, इससे भगदड़ की अफवाह फैली और दुर्घटा भी हुई तो किसी ने कहा है कि भीड़ बहुत अधिक थी तो कुछ लोगों का दम घुटने लगा और वे बेहोश होने लग गए थे, इस कारण से भगदड़ के आसार बन गए। किसी ने यह भी बोला है कि लोगों को संगम तट पर जाने से रोकने का भी काम किया जा रहा है, उन्हें दूसरे तटों पर स्नान के लिए भेजा जा रहा था, लेकिन भीड़ संगम पर ही स्नान के लिए ही अड़े हुए थे। ऐसे में बैरियर टूटा और भगदड़ का माहौल पैदा हो गया। प्रशासनिक अधिकारी का बयान भी भी था। कुंभ मेला की OSD आकांक्षा राणा ने इस बारें में बोला है कि संगम नोज पर भीड़ के कारण बैरियर टूटने  के पश्चात भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हुई।

साध्वी को दिखाए पोर्न, कर्नल को नंगा कर पीटा, मेजर को बेटी से रेप की धमकी… क्या सुशील शिंदे के कबूलनामे से भरेंगे वो जख्म जो कांग्रेस ने 'हिन्दू आतंकवाद' और ‘भगवा आतंकवाद’ साबित करने हिन्दू समाज को दिए?

एक कहावत है कि सच परेशान हो सकता है पराजित नहीं। ये प्याज के छिलके तो अब उतरने शुरू हुए हैं। आगे-आगे देखिए क्योकि अभी बहुत कुछ खुलने को हैं। और इन षड्यंत्रों का पर्दाफाश भी इन्ही पार्टियों द्वारा होगा। पूर्व ग्रह मंत्री सुशील कुमार शिंदे को यह भी बताना चाहिए कि Lt Col पुरोहित को किस अपराध में गिरफ्तार किया गया था? ताकि यूपीए कांग्रेस समर्थित समस्त सियासतखोरों को जनता पानी पी-पीकर इनकी पीढ़ियों को कोसे।   

लेकिन चुनावों के दौरान साध्वी प्रज्ञा द्वारा ATS प्रमुख करकरे की मौत पर अपनी ख़ुशी व्यक्त पर हंगामा करने कांग्रेसियों वालों को भी शर्म से डूब मरना चाहिए। बेशर्म चुनाव आयोग तक पहुँच गए थे। साध्वी पीड़ित थी, बेकसूर होते जुल्मो की पराकाष्ठा साध्वी ही नहीं पुरोहित और असीमानंद ने झेली थी। जब इनकी सात्विकता दूषित की जा रही थी तब क्यों गुलामों की तरह चुप रहे। सही कहा है गुलाम को लाख राजशाही चोला पहना दो गुलाम गुलाम ही रहेगा। जिस तरह इनकी सात्विकता नष्ट की गयी थी अगर वही आतंकी कसाब के साथ हुआ होता चील-कौओं की तरह चीख-चीखकर आसमान सिर पर उठा लिया होता ऐसे मातम कर रहे होते जैसे इनके घरों में शोक हो रहा हो। हिन्दुओं को भी अब अपनी ऑंखें और दिमाग दोनों खोलकर यूपीए में शामिल कांग्रेस समेत जितनी भी पार्टियां थी, सबका तिरस्कार करना चाहिए। इतिहास साक्षी जिस-जिसने भी युगों-युगों अति प्राचीन सनातन का अपमान किया है, सभी धूल में मिल गए। वर्तमान समय में भी कुछ मिल गए और कुछ लाइन में हैं।       

‘भगवा आतंकवाद’…. ये एक ऐसा शब्द था जिसने भारतीय राजनीति की रूख को मोड़ दिया। बलिदान, त्याग और भारतीय परंपरा से संबंधित केसरिया रंग को बदनाम करने के कारण कांग्रेस  बर्बादी के कगार पर पहुँच गई। राजनीति में इस शब्द के इस्तेमाल का परिणाम ये हुआ कि पिछले 10 सालों से कॉन्ग्रेस सत्ता में लौटने के लिए संघर्ष कर रही है, लेकिन नजदीकी भविष्य में इसकी संभावना नहीं दिख रही है।

कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए-2 सरकार में केंद्रीय गृहमंत्री रहे सुशील कुमार शिंदे ने भी इस बात को मान लिया है कि इस शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। उन्होंने माना कि उनकी पार्टी कांग्रेस ने इस शब्द का इस्तेमाल करने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि आतंकवाद भगवा या रेड या सफेद नहीं होता। आतंकवाद… आतंकवाद होता है।

कर्नल श्रीकांत पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा  

सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि उस वक्त रिकॉर्ड पर जो आया था, उन्होंने वही कहा था। ये उनकी पार्टी कांग्रेस ने बताया था कि भगवा आतंकवाद हो रहा है। उन्होंने कहा कि उस वक्त पूछा गया था तो उस बारे में उन्होंने बोल दिया था भगवा आतंकवाद। बस इतना ही है। दरअसल, शिंदे से पहले गृहमंत्री रहने के दौरान कॉन्ग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने भगवा आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल किया था।

राजनीति से रिटायरमेंट ले चुके सुशील कुमार शिंदे ने कहा, “आतंकवाद शब्द लगाया, लेकिन सही बोले तो क्यों आतंकवाद शब्द लगाया मुझे पता नहीं है। लगाना नहीं चाहिए। ये गलत था। भगवा टेररिस्ट… ऐसा नहीं बोलना चाहिए। ये उस पार्टी की विचारधारा होती है। ये चाहे भगवा हो या रेड हो या सफेद हो। ऐसा कोई आतंकवाद नहीं होता है।”

दरअसल, भारत के गृहमंत्री रहते हुए सुशील कुमार शिंदे ने 20 जनवरी 2013 को जयपुर में आयोजित कांग्रेस के चिंतन शिविर के दौरान कहा था कि भाजपा और आरएसएस के कैंपों में ‘हिंदू आंतकवादियों’ को प्रशिक्षण दिया जाता है। आलोचना के बाद शिंदे ने कहा था, “ये सब इतनी बार अख़बार में आ गया है। ये कोई नई चीज़ नहीं है जो मैंने आज कही है। ये भगवा आतंकवाद की ही बात मैंने की है।”

कांग्रेस ने तुष्टिकरण के लिए अपनाया ‘भगवा आतंकवाद’

दरअसल, अपने बयान के पीछे शिंदे एक कथित रिपोर्ट का हवाला दिया था। उन्होंने कहा था, “हमारे पास रिपोर्ट आ गई है। जाँच में भाजपा हो या आरएसएस के ट्रेनिंग कैंप, हिंदू आतंकवाद बढ़ाने का काम देख रहे हैं। समझौता एक्सप्रेस रेलगाड़ी का धमाका हो, मक्का मस्जिद ब्लास्ट हो या फिर मालेगाँव, हिंदू चरमपंथियों ने वहाँ जाकर बम धमाके करवाए और फिर कह दिया कि ये धमाके अल्पसंख्यकों ने करवाए।”

सुशील कुमार शिंदे ने कहा था कि ऐसी कोशिशों से देश को सतर्क रहना चाहिए। शिंदे के इस बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने उन्हें मुबारकवाद दी थी। इससे पहले गृहमंत्री रहते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने साल 2010 में सबसे पहले भगवा आतंकवाद शब्द का प्रयोग किया था।
केंद्रीय गृहमंत्री के रूप में 25 अगस्त 2010 को डीजीपी और आईजी के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा था, “मैं आपको सावधान करना चाहता हूँ कि भारत में युवा पुरुषों एवं महिलाओं को कट्टरपंथी बनाने के प्रयासों में कोई कमी नहीं आयी है। इसके अलावा हाल में ‘भगवा आतंकवाद’ सामने आया है, जो अतीत में कई बम विस्फोटों में पाया गया है..।”

भगवा आतंक शब्द का सबसे पहले उपयोग

Saffron Terrorism जिसे हिंदी में भगवा आतंकवाद कहा जाता है, का सबसे पहले उपयोग कांग्रेस के प्रति हमदर्दी रखने वाले अंग्रेजी के पत्रकार प्रवीण स्वामी ने किया था। साल 2002 के गुजरात दंगों के दौरान रिपोर्टिंग करते हुए प्रवीण स्वामी ने ‘Saffron Terror’ नाम के हेडलाइन से एक रिपोर्ट लिखी थी। इसमें स्वामी ने बताया था कि हिंदुओं ने मुस्लिमों पर अत्याचार किए थे।
स्वामी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था, “स्कूल शिक्षक नजीर खान पठान 28 फरवरी (2002) को सुबह 9 बजे नरौरा में स्टेट ट्रांसपोर्ट वर्कशॉप के पीछे अपने घर से टहलने के लिए निकले थे। वे याद करते हैं कि नटराज होटल के सामने मुख्य चौक पर पहले से ही भीड़ जमा थी। वे सभी भगवा दुपट्टा और खाकी शॉर्ट्स पहने हुए थे। उनमें से ज़्यादातर के हाथों में तलवारें थीं।”

अपनी रिपोर्ट में उन्होंने आगे लिखा, “वहाँ दो पुलिस जीप खड़ी थीं और दो सफ़ेद एंबेसडर कारें थीं, जिन पर लाल बत्ती लगी हुई थी। मैं वहाँ से लगभग 100 मीटर दूर था। वहाँ खड़े लोगों में से एक विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़िया थे। थोड़ी देर बाद वे चले गए और भीड़ ने गाली-गलौज वाले नारे लगाने शुरू कर दिए। हमलावरों ने हम पर पत्थर फेंके और हमने भी उसी तरह जवाब दिया।”
अपनी रिपोर्ट उन्होंने आगे लिखा, “गोलीबारी में चार मुस्लिम लोग मारे गए, जिससे पड़ोस की रक्षा करने वालों को पीछे हटना पड़ा। स्थानीय नूरानी मस्जिद को आग लगा दी गई और उसके गुंबद पर भगवा झंडा फहराया गया। फातिमा बी उन सैकड़ों लोगों में से एक थीं जिन्होंने राज्य परिवहन कर्मचारी कॉलोनी में छिपने की कोशिश की थी।…”

कांग्रेस ने लपक लिया मौका

कांग्रेस गुजरात दंगों को लेकर भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमलावर रही है। उन्हें फँसाने के लिए तरह-तरह के जतन किए गए, लेकिन आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया और कहा कि इसमें तत्कालीन गुजरात सरकार एवं वहाँ के मुख्यमंत्री नरेेंद्र मोदी की इसमें कोई भूमिका नहीं है। भाजपा नेता का कहना था कि इसके बावजूद कांग्रेस उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित करती रही।
कांग्रेस ने अपने वोटबैंक मुस्लिमों को साधने के लिए इस शब्द को अपना लिया और इसका जमकर प्रचार किया। परिणाम ये हुआ कि कांग्रेस के खिलाफ आक्रोश बढ़ता गया। पी. चिदंबरम ने इसे खूब उछाला। उस समय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे और यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गाँधी थी। सत्ता के गलियारे में कहा जाता था कि सोनिया गाँधी ही अप्रत्यक्ष रूप से सत्ता चलाती थी।
उस समय कांग्रेस में जनार्दन द्विवेदी, सीपी जोशी, मणिशंकर अय्यर, अहमद पटेल जैसे नेता सोनिया गाँधी के सबसे करीबी नेताओं में शामिल थे। कहा जाता है कि सोनिया गाँधी से इन नेताओं से सलाह लिए बिना कोई कदम नहीं उठाती थी। जिस समय भगवा आतंकवाद शब्द को राष्ट्रीय मीडिया में कांग्रेस में हवा दी गई, उस समय केंद्रीय गृहमंत्री आरके सिंह थे।
इन नेताओं ने भगवा आतंकवाद शब्द को मजबूत करने के लिए अंतिम समय तक प्रयास किया। समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट, मक्का मस्जिद ब्लास्ट, मालेगाँव ब्लास्ट जैसे कई आतंकवादी हमलों में हिंदुओं के नामों को आगे किया गया। मालेगाँव धमाका साल 2008 में हुआ था, लेकिन इससे काफी पहले ही कांग्रेस सरकार देश की बहुसंख्यक आबादी को विलेन बनाने के लिए काम पर लग चुकी थी।
महाराष्ट्र के मालेगाँव में 29 सितम्बर 2008 को एक मोटरसाइकिल में धमाका हुआ, जिसमें 6 लोग मारे गए। इसी मालेगाँव धमाका मामले के बाद कांग्रेस ने हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी को आगे बढ़ाना चालू कर दिया। इस मामले में कई ऐसे लोगों को पकड़ा गया जो कि हिन्दू संगठनों से जुड़े हुए थे। कई ऐसे गवाह लाए गए, जिनसे जबरदस्ती बयान दिलवाए गए।
महाराष्ट्र के मालेगाँव में 29 सितम्बर 2008 को एक मोटरसाइकिल में धमाका हुआ, जिसमें 6 लोग मारे गए। इसी मालेगाँव धमाका मामले के बाद कांग्रेस ने हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी को आगे बढ़ाना चालू कर दिया। इस मामले में कई ऐसे लोगों को पकड़ा गया जो कि हिन्दू संगठनों से जुड़े हुए थे। कई ऐसे गवाह लाए गए, जिनसे जबरदस्ती बयान दिलवाए गए।
RSS और VHP नेताओं को इस मामले में फँसाने की साजिश भी रची गई। यह अब काम तब की महाराष्ट्र ATS ने किया। मालेगाँव धमाके में साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित, स्वामी असीमानंद समेत कई हिन्दू व्यक्ति आरोपित बनाए गए। कर्नल पुरोहित को इस मामले में RDX देने का आरोपित बताया गया। साध्वी प्रज्ञा पर धमाके के लिए बाइक देने का आरोप लगा। जो उन्होंने 2 साल पहले ही बेच दी थी। 
इस धमाके में आरोपित बनाए गए कई लोगों को समझौता एक्सप्रेस और मक्का मस्जिद ब्लास्ट मामले में भी आरोपित बनाया गया था। इसी के बाद पूरा नैरेटिव बुना जाने लगा कि देश में हिन्दू आंतकवाद भी है। इन लोगों से मनवाफिक बयान दिलवाने के लिए इन लोगों को तरह-तरह से प्रताड़ित किया गया। इन पर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया गया।
कर्नल पुरोहित को नंगा करके पीटा गया। उनकी टाँग तोड़ी दी गई। उनसे कहा गया कि मालेगाँव मामले में तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ और RSS और VHP के नेताओं का नाम लें और यह बात स्वीकार कर लें कि धमाका उन्हीं ने किया था। इसके अलावा साध्वी प्रज्ञा को इतना मारा गया कि उनकी रीढ़ की हड्डी में तक समस्या आ गई और उन्हें वेंटीलेटर पर भर्ती होना पड़ा। उन्हें पोर्न दिखाया गया।
इतना ही नहीं, साल 2013 में भगवा आतंकवाद को स्थापित करने के लिए 10 हिंदुओं का नाम जारी किया। NIA द्वारा जारी लिस्ट में उन लोगों के नाम जारी किए गए, जिनके तार संघ या अन्य हिंदुत्ववादी संगठनों से जुड़े थे। इनमें सुनील जोशी, लोकेश शर्मा, संदीप डांगे, स्वामी असीमानंद, देवेंद्र गुप्ता, राजेंद्र, चंद्रशेखर लेवे, रामजी कालसांगरा, कमल चौहान, मुकेश वासानी के नाम थे।
ये सभी समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट, मक्का मस्जिद ब्लास्ट, अजमेर ब्लास्ट में वांछित बताए गए थे। हालाँकि, बाद में कोर्ट ने असीमानंद को बरी कर दिया। कर्नल पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा को बेल दे दिया। इसके अलावा भी अधिकांश आरोपित बरी हो गए। इन मामलों में गवाह बनाए गए 17 लोग अपने बयान से मुकर गए और कहा कि उनसे जबरन गवाही दिलवाई गई थी।
इस तरह कांग्रेस ने एक नैरेटिव बुना था। इसमें सोनिया गाँधी और उनके सलाहकारों की महती भूमिका बताई जाती है। हालाँकि, धीरे-धीरे यह नैरेटिव ध्वस्त हो गया और इसका खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा। भगवा आतंकवाद शब्द कांग्रेस की ताबूत में एक मजबूत कील साबित हुआ। इसके बाद संसाधनों पर पहला अधिकार मुस्लिमों का और विवादास्पद सांप्रदायिक बिल जैसे कारनामों ने कांग्रेस को गर्त में पहुँचा दिया।
इसका ये परिणाम हुआ कि साल 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की भारी जीत हुई और वे प्रधानमंत्री बने। इसके बाद साल 2019 और साल 2024 में भी भाजपा अपनी जीत को लगातार दोहरा कर एक इतिहास रच दिया। कांग्रेस को जब तक इसका अहसास होता, तब तक उसकी नैया डूब चुकी थी। इस तरह कांग्रेस ने अपनी अस्तित्व को मिटाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया।
आखिरकार यह कदम कितना घातक सिद्ध हुआ, यह सुशील कुमार शिंदे के बयान से सिद्ध हो गया। उनकी आवाज में इस बात का स्पष्ट दर्द है कि कांग्रेस को भगवा के साथ आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। भगवा सिर्फ शब्द नहीं है, यह भारतीय संस्कृति का रंग है। यह बलिदान और गर्व का प्रतीक है।
कांग्रेस के दरबारी नेताओं ने इसे कलंकित करके भारतीय संस्कृति को बदनाम करने का जो खेल रचा, उसमें सोनिया गाँधी जैसी असली भारत से अनजान नेत्री फँस गईं और लगभग 140 साल अपनी पुरानी पार्टी को इस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया, जहाँ अस्तित्व की लड़ाई लड़नी पड़ रही है। 
अब जिस तरह राहुल गाँधी द्वारा भारत विरोधी ताकतों के संपर्क आकर जो बोल रहे हैं उससे LoP पद भी कलंकित ही नहीं हो रहा बल्कि संविधान की भी खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही है। जिसे I.N.D.I. गठबंधन में शामिल कोई गंभीरता से नहीं ले रहा विपरीत इसके राहुल की चापलूसी में लगे हुए है। उनका भी वही हाल होने वाला जो आज कांग्रेस का हो रहा है। 99 सीट आने पर कांग्रेस इसे अपनी जीत न समझे, बल्कि बुझता दीया हमेशा ज्यादा टिमटिमाता है।  

उत्तर प्रदेश : राहुल और अखिलेश ने 1लाख रूपए का लॉलीपॉप दे मुसलमानों को किया ब्लैकमेल ; लिख दी अपने पतन की पटकथा ; बीजेपी क्या करती रही? चुनाव आयोग को संज्ञान लेते हुए कार्यवाही करनी चाहिए!



आखिर मुसलमान कांग्रेस के हाथों कब तक ब्लैकमेल होता रहेगा? ये वही कांग्रेस है जिसने मुसलमानों को मुख्यधारा से जोड़ने की बजाए दोयम दर्जे का बना दिया है। लेकिन मुसलमान आज तक इस कटु सच्चाई को नहीं समझ पा रहा। जिस कारण हिन्दू -जिन्हे कट्टरपंथी, साम्प्रदायिक और फिरकापरस्त कहकर बदनाम करते हैं-इन्हे शक की निगाह से देखता है। इस आरोप के लिए मुसलमान खुद जिम्मेदार हैं। बीजेपी अपने कामों के कारण 400 पार करने में सक्षम थी, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कार्यकर्ता से लेकर मंडल और जिला अधिकारी मोदी-योगी और अमित शाह पर ही निर्भर रहते हैं। यह बात सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं लगभग सभी राज्यों 
में है। कांग्रेस द्वारा जो गारंटी कार्ड वितरित किये हैं, जाँच करनी चाहिए कि किस प्रेस से प्रकाशित हुए और कितने प्रकाशित हुए हैं। 
कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर जिस तरह मुसलमानों को ब्लैकमेल किया, सारे मौलाना, मौलवी और मुस्लिम बुद्धिजीवी मुसलमानों की इतनी बड़ी बेइज्जती पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? अगर यही काम बीजेपी ने किया होता अब तक चील कौओं की तरह चीख-चीखकर आसमान सिर पर उठा लिया होता।  
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रोकने के लिए कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने क्या-क्या प्रपंच नहीं किए। ग्लोबल पावर्स की मदद से लेकर, संविधान और आरक्षण के खिलाफ अफवाह फैलाने तक हर हथकंडा अपनाया। यहां तक कि देश के भोलेभाले मतदाताओं को हर महीने 8500 रुपये के हिसाब से साल के 1 लाख रुपये देने का लालच दिया। कांग्रेस के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी ने तो अपनी हर जनसभा में मंच से हर महीने 8500 और साल के 1 लाख रुपये देने की गारंटी देते नहीं थकते थे। उन्होंने तो अपने भाषण में महीने और तारीख तक बता दिए थे कि अमुक तारीख से रुपये बैंक खातों में खटाखट जादू की तरह गिरना शुरू हो जाएगा। यहां तक कि कांग्रेस के कार्यकर्ता गरीब लोगों को गारंटी कार्ड तक बांट दिए जिसमें एक फार्म भी छपा है और नाम-पता भरने का कॉलम है। राहुल गांधी ने अपने भाषण में गारंटी क्या दी, कांग्रेस के नेताओं ने यह कह कर घर-घर में फर्जी गारंटी कार्ड बांट दिए कि 5 जून को इसे पार्टी ऑफिस में जमा करा देना और खटाखट पैसे मिलने लगेंगे।

ये कोई आरोप नहीं कटु सच्चाई है 
वोटर खरीदे गए, गुमराह किए गए
वोटर खरीदे गए, गुमराह किए गए, धोखाधड़ी की गई, लोकतंत्र की सामूहिक हत्या हुई लेकिन कोई मीडिया इसको मुद्दा नहीं बनाएगा, कोर्ट भी संज्ञान नहीं लेगा। चुनाव आयोग को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए। कांग्रेस की इस गारंटी कार्ड पर 420 का मुकदमा होना चाहिए। पीएम मोदी को सत्ता में आने से रोकने के लिए और भारत को कमजोर देश बनाने के लिए विदेश से अरबों रुपए फंडिंग की गई। सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाए गए। सोशल मीडिया इन्फूएंशर खरीदे गए। इतना सब करने के बाद भी वे मोदी को रोक नहीं पाए।
उत्तर प्रदेश में इतने बड़े उलटफेर की सबसे  बड़ी वजह 1लाख का लॉलीपॉप था, इस बारे में उत्तर प्रदेश के कांग्रेस उपाध्यक्ष कहते है की उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले 43 लाख गारंटी कार्ड बांटे गए थे। और उनमे से अधिकतर भर कर कांग्रेस कार्यालय पर जमा भी किया जा चुका था। अगर 43 लाख परिवारों को कार्ड मिला और 1 परिवार पर 4  वोट भी जोड़ लो तो 1.5 करोड़ मतदाताओं को उत्तरप्रदेश में प्रभावित किया क्या, और यही एक लाख रूपया देने की गारंटी ही थी इतने बड़े उलटफेर की मुख्य वजह वो वाराणसी हो या फैजाबाद। इसलिए सारे विश्लेषण बेकार है ये नेरेगा और कर्ज माफी के बाद मतदाताओं को दिया गया सबसे बड़ा लॉलीपॉप है। जिसको मतदाताओं ने चुपचाप पकड़ लिए और किसी को हवा भी नही आने दी और जमीनी हवा किसी को समझ नही आई। इस पर चुनाव आयोग को संज्ञान लेते हुए कार्यवाही करनी चाहिए!

यह कांग्रेस का गारंटी कार्ड है, जो करोड़ों की संख्या में यह कह कर भरवाया गया कि यह गारंटी कार्ड भर दो तुम्हें 100000 रूपए मिलेगा।

इस गारंटी कार्ड में कहीं नहीं लिखा है कि सरकार बनने पर ही 100000 रूपए दिए जाएंगे।

इस गारंटी कार्ड के अनुसार कानूनन कांग्रेस 100000 रूपए देने के लिए बाध्य है। अब वह मुकर नहीं सकती। बीजेपी को भी चाहिए कि इस मुद्दे को सड़कों तक लाकर बड़ा आंदोलन करे। 

मुंगेरी लाल के सपने देखने पर कोई रोक नहीं। राहुल और प्रियंका को परिवारभक्त प्रधानमंत्री बनाने का सपना देख रहे हैं, वह भी जानते हैं कि परिवार को कोई सदस्य प्रधानमंत्री नहीं बन सकता। अगर बनना होता 2004 में सोनिया गाँधी बन गयी होती। सबसे अधिक मूल्यवान होता है विशेषकर राष्ट्र के महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए, बच्चा बच्चा जानता है कि ग़ज़वाये हिन्द में उतनी ही देरी है जितनी भारत के विकसित होने में। 

अब ऐसे में पहले क्या ज़रूरी था और है विकास या किराएदारों जिहादियो को बाहर निकालना या उनका सामूहिक सनातनी करण करना। 

दशकों के कांग्रेस के फिरकापरस्त शासन के बाद 1998 में अटल सरकार आई। हम सनातनियो में आस जगी की अब जायेगे वापिस किरायेदार पाकिस्तान भारत बनेगा हिन्दुराष्ट्र। मगर गठबंधन की बैसाखियों के बहाने के कारण उन्होंने कुछ न किया। 

फिर दस साल शून्य में रहने के बाद सबसे पहले हम भक्तो की छाती 56" हुई कि अब तो निश्चित ही खाली होगा हिंदुस्तान घुसपैठियों से(2014) मगर नेता जी तो उन्ही का विश्वास जीतने में लग गए। पूर्ण बहुमत के दृष्टिगत कई कट्टर हिन्दू संगठन मैदान में आये(आरएसएस,विहिप नही) खूब धरने बड़े आंदोलन किये जनसंख्या कानून तुरंत बनवाने को लेकर। जिसकी नितांत,शीघ्रतम आवश्यकता भी थी। 2018 में हमारे मोदी जी ने लाल किले से इसके बनने की समय की मांग भी बताई थी मगर किया क्या कुछ नही। 2019 में तो ताकत बढ़ी कट्टर हिंदूवादियों में आशा उत्साह बढ़ी फिर प्रयास हुए। सोशल मीडिया से भी खूब आवाज उठाई गयी। 

अवलोकन करें:-

उत्तर प्रदेश : कांग्रेस दफ्तर के बाहर लगी मुस्लिम महिलाओं की लंबी लाइन, हाथ में ‘गारंटी कार्ड’ ल

मगर सभी जिम्मेदार कानो में रुई डाल,निगाहें दूसरे ग्रह पे गाढ़ समय को पास करते रहे। हिंदूवादियों में अब भी आस थी। राष्ट्रभक्त,अंधभक्त दोनों को पूरी उम्मीद थी उनपर दवाब भी था कि कुछ तो सोचेंगे करेंगे। डूबते सनातन को उभार ग़ज़वाये हिन्द को चीर करेंगे। 

अधिकतम धर्म प्रेमी तो 2024 बाद इस संविधान को ही खत्म करने की भीषण आस लगाए थे। जिसपे ये नेता निगाहे तो गड़ाए थे मगर व्यस्त होने का नाटक दिखाए थे। तभी ये नारा दिए थे अबकी बार 400 पार। 

मगर दुखद हृदय -पूर्ण बहुमत का स्वर्णिम अध्याय खत्म हो चुका है नेताओ को  गठबंधन का बहाना अटल जी की तरह मिल चुका है। 

अब क्या अध्यादेश का उपयोग कर बनेगा सख्त जनसंख्या कानून,बनेगा भारत हिन्दु राष्ट्र या nrc लागू कर देश से बीस करोड़ घुसपैठियों को बाहर किया जाएगा। घुसपैठियों के निकल जाने के बाद भारतीय मुसलमानों की स्थिति में बड़ी तेजी से बदलाव आएगा। 

विचारणीय है अगर इस इलेक्शन में सरकार पलट जाती तो इन हिन्दू नेताओ की बातें बदल जाती फिर ये कहते भारत बनाओ हिन्दु राष्ट्र।

निराश होने की जरूरत नही है भाजपा अकेली 241 सीट जब इंडी ठगबंधन ने दुनियाभर के भ्रम फैलाकर भी 233 सीट हासिल की है।

प्रधानमंत्री मोदी की सरकार फिर से बन रही हैकुछ पॉज़िटिव बातों को ध्यान में लेकर चुनावों के परिणाम का आनंद ले।

370  के विरोधी महबूबा मुफ्ती और ओमर अब्दुल्ला हार गये है अब उधर भाजपा का मजबूत ग्राउंड तैयार हो गया है।

आंध्र राज्य में लोकसभा की अतिरिक्त राज्य सरकार चंद्र बाबू के साथ बन गई है।

ओडिशा में इतिहास में पहली बार भाजपा की सरकार बन गई है। अरुणाचल और सिक्किम में राज्य सरकार बन गई है।

पंजाब में 18 से 19 प्रतिशत वोट पाकर आनेवाले समय मे पंजाब में भी अच्छा होने की उम्मीद हो गई हैं

केरल में 1 सीट खोलकर और वोट प्रतिशत बढ़ाकर आने वाले अक्टूबर में  केरल राज्य के चुनाव में एक आशा का निर्माण किया है

तमिलनाडु में वोट प्रतिशत बढ़ गया है तमिलनाडु राज्य के चुनावों में अनहोनी के अनुमान लगा सकते हैं

कुल मिलाकर केंद्र में तीसरी बार सरकार बनाने के अलावा चार राज्यो में सरकार बना दी है

हिमाचल में 4 में से 4

उत्तराखंड में 5 में से 5

दिल्ही में 7 में से 7

अंडमान निकोबार द्वीप समूह में 1

अरुणाचल प्रदेश में 2 में से 2

छत्तीसगढ़ में 11 में से 10

ओडिसा में 21 में से 19

यह आंकड़े भी उत्साह वर्धक ही है

न प्रधानमंत्री की महेनत में कमी थीं ना कार्यकर्ताओं के जोश और उत्साह में कमी थी स्वामी विवेकानंद जी का यह अजर अमर वाक्य था उठो जागो ध्येय प्राप्त न हो तब तक लगे रहो

चुनावों में थोड़ा बहुत उलट फेर होता ही है विपक्षी दल भाजपा NDA हार गई है मोदी लहर खत्म हो गई है की नैरेटिव गढ़ने की कोशिशें कर रहा है। देश की जनता रुकने वाली नही है न देश रुकने वाला है देश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

पिछले दस साल में जो काम हुवा है वो काबिले दाद है ही पर जो काम नही हुवा है वो अब होगा वैसे यह बात प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्यों में बार बार की है जो पूरी होगी।

प्रधानमंत्री कृत निश्चयी है आप ने जो भरोसा जताया है वो पूरी करने में कल् से लग जाएंगे आंकड़ों की बात करके भ्रम फैलाने वाले ठगबंधन की बात न सुनते हुवे काम पर लग जाना है।

तेलंगाना : राहुल गाँधी जिसे बताते हैं ‘मोदी का यार’, उस ओवैसी के खिलाफ कैंडिडेट नहीं देगी कांग्रेस

लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस पार्टी हैदराबाद में अपना उम्मीदवार नहीं देगी। यह बात तेलंगाना कांग्रेस के महासचिव ने कही है। उन्होंने कहा है कि वोटों का बँटवारा रोकने के लिए कांग्रेस पार्टी एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी का समर्थन करेगी।

कांग्रेस के इस फैसले से यह साफ हो गया है कि कांग्रेस सत्ता हथियाने के सनातन को गालियां देने वालों के तलवे तक चाट सकती है। कुछ समय पूर्व संपन्न हुए तेलंगाना विधान सभा चुनावों में एक बात सामने आयी कि बीजेपी को कांग्रेस और AIMIM का सूपड़ा साफ करने के लिए तेलंगाना को योगी आदित्यनाथ और टी राजा सिंह जैसे दबंग हिन्दू नेताओं की जरुरत है। अकबरुद्दीन ओवैसी द्वारा अपने अपने मुस्लिम बहुल क्षेत्र में हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित करने पर ईंट का जवाब पत्थर देने पर 'सर तन से जुदा' गैंग के सक्रीय होने पर अगर बीजेपी सिंह के पीछे खड़ी होती तेलंगाना में कांग्रेस सरकार नहीं बनती। ओवैसी जो मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में मुस्लिम हितों की बात करता है, लेकिन मुस्लिम क्षेत्र से बाहर दलित आदि कार्ड खेलकर हिन्दुओं को विभाजित करने की बात करता है। ये तो मीडिया अपनी TRP के चक्कर में डिबेट्स में उस AIMIM को बुलाते हैं, जिसमे तेलंगाना में अपने उम्मीदवार उतारने की हिम्मत नहीं। यानि क्षेत्रीय पार्टी भी नहीं। तेलंगाना में उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाद सबसे ज्यादा दबदबा टी राजा सिंह है। 

कांग्रेस नेता फिरोज खान ने यह बात ऐसे समय में कही है, जब इस बार हैदराबाद लोकसभा सीट से AIMIM के मुखिया की राह मुश्किल बताई जा रही है। बीजेपी ने यहाँ से माधवी लता को उम्मीदवार बनाया है, जिन्हें उनके समर्थक ‘हिंदू शेरनी’ कहते हैं। गौर करने वाली बात यह भी है कि आज ओवैसी के खिलाफ कैंडिडेट नहीं देने की बात करने वाली कांग्रेस उन्हें ‘बीजेपी का बी-टीम’ बताती रही है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ओवैसी को ‘मोदी का यार’ कहते रहे हैं।

कांग्रेस ने किया ओवैसी को समर्थन देने का ऐलान

टाइम्स नाउ से बातचीत में तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव और हैदाराबाद लोकसभा सीट से साल 2019 में लोकसभा चुनाव हार चुके कांग्रेस नेता मोहम्मद फिरोज खान ने इस बात का ऐलान किया। उन्होंने कहा, “हैदराबाद में दो लोकसभा सीटें हैं, सिकंदराबाद और हैदराबाद लोकसभा। मेरा निर्वाचन क्षेत्र सिकंदराबाद में है, हैदराबाद में नहीं। हैदराबाद में ओवैसी जीतेंगे, क्योंकि AIMIM और कांग्रेस पार्टी के बीच ‘कॉम्प्रोमाइज’ हो गया है, असदुद्दीन निश्चित तौर पर हैदराबाद जीतेंगे।” बता दें कि तेलंगाना में कांग्रेस ने 17 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान किया है, लेकिन हैदराबाद सीट को लेकर चुप्पी साध रखी है।

बीजेपी प्रत्याशी माधवी लता की प्रतिक्रिया

कांग्रेस द्वारा असदुद्दीन ओवैसी को समर्थन देने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए हैदराबाद से बीजेपी उम्मीदवार कोम्पेला माधवी लता ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “कांग्रेस AIMIM के साथ गठबंधन, लेकिन दावा यह कि वो बीजेपी की बी टीम है। सीपीआई बंगाल में INDI गठबंधन का हिस्सा है, लेकिन केरल में नहीं। AAP दिल्ली में गठबंधन है, लेकिन पंजाब में नहीं। कांग्रेस के साथ समस्या यह है कि उसे यह स्पष्ट नहीं है कि क्या करना है। कांग्रेस मुक्त भारत = प्रगति युक्त भारत।”

कांग्रेस के तहसीन पूनावाला ने जताई नाराजगी

हैदराबाद लोकसभा सीट पर असदुद्दीन ओवैसी को समर्थन देने पर कांग्रेस के भीतर ही नाराजगी दिख रही है। महत्वपूर्ण मुद्दों पर कई बार पार्टी से अलग लाइन लेने वाले राजनीतिक विश्लेषक एवं कांग्रेस समर्थक तहसीन पूनावाला ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “अभी तक कांग्रेस पार्टी की तरफ से आधिकारिक बयान नहीं आया है कि वो जनाब असदुद्दीन ओवैसी को हैदराबाद लोकसभा सीट पर ‘फ्री रन’ देगी। हालाँकि कांग्रेस अगर ओवैसी साहब के खिलाफ उम्मीदवार न उतारने का फैसला लेती है, तो ये अपराध करने जैसा होगा। ऐसा करना कांग्रेस के लिए बड़ी भूल साबित होगी, जो अंतत: कांग्रेस की ताकत खत्म कर देगी।”
उन्होंने आगे लिखा, “असदुद्दीन ओवैसी पर कभी विश्वास नहीं किया जा सकता। उनका मिशन है कांग्रेस को बर्बाद करना। उन्होंने हमेशा राहुल गाँधी जी का मजाक उड़ाया है और बेईज्जती की है। अगर कांग्रेस पार्टी ओवैसी को समर्थन देती है, तो मैं इसके बिल्कुल खिलाफ हूँ। अगर कांग्रेस पार्टी नफरत के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है, तो फिर लड़ाई लड़कर ही अंतर पैदा किया जा सकता है। असदुद्दीन ओवैसी और उनकी जहरीली राजनीति वापस लोकसभा में नहीं पहुँचनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी की असदुद्दीन ओवैसी जैसे सांसद को हराना एक जिम्मेदारी भी है।”

राहुल ने ओवैसी को कहा था ‘मोदी का यार’

कुछ माह पहले ही हुए तेलंगाना के विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस ने भारी बहुमत से जीत हासिल की थी। उस चुनाव के दौरान राहुल गाँधी ने असदुद्दीन ओवैसी और तेलंगाना के तत्कालीन मुख्यमंत्री केसीआर को पीएम मोदी का यार कहा था। तेलंगाना में केसीआर की बीआरएस और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM का गठबंधन है।
हैदराबाद सीट पर असदुद्दीन ओवैसी का सीधा मुकाबला बीजेपी की प्रत्याशी माधवी लता से है। हैदराबाद की हिंदू शेरनी कही जाने वाली माधवी लता पहली बार चुनाव लड़ रही हैं, लेकिन राजनीतिक हलकों में ये बात उठ रही है कि वो असदुद्दीन ओवैसी पर सीधे मुकाबले में भारी पड़ रही हैं। माधवी लता हैदराबाद की जानी-मानी समाज सेविका हैं और उनके नाम की अब पूरे देश में चर्चा हो रही है। बहरहाल, तेलंगाना कांग्रेस ने ओवैसी के समर्थन की जो घोषणा की है, उस पर अभी कांग्रेस के हाई कमान की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। हैदराबाद लोकसभा सीट पर कांग्रेस अगर ओवैसी को समर्थन देती है, तो इसका असर पूरे देश की राजनीति पर देखने को मिल सकता है।

1992 में लिया संकल्प 32 साल बाद पूरा होने पर जटाओं से रामरथ खींचकर अयोध्या ला रहे रामभक्त बद्री, 22 जनवरी को लगाएँगे प्रभु की शरण में हाजिरी

                                                                                                               साभार: amarujala.com
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में होने जा रहा है। इसी के साथ राम लला के भक्तों के अनोखे संकल्प भी पूरे होंगे। इन्हीं भक्तों में एक मध्य प्रदेश के दमोह के बद्री विश्वकर्मा भी हैं, जिन्होंने राम मंदिर बनने पर रामरथ को अपनी जटा से खींचकर अयोध्या तक लाने का संकल्प लिया था।

कुर्सी के लालची सनातन विरोधियों को रामभक्तों के इस कठोर संकल्प को पूरा होते देख शर्म आनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकल्प लिया था कि 'जब मंदिर बनेगा, तब अयोध्या आऊंगा' कोई 1992 से राममंदिर बनने तक मौन धारण किये हुए थे, जो 22 जनवरी 2024 को अपना मौन व्रत तोड़ेंगे। एक लम्बी सूची है। सनातन विरोधियों ऐसे ही समस्त विश्व राममय हो रहा है। भारत ही नहीं, समूचा विश्व एक नयी करवट लेने जा रहा है। वह समय भी अधिक दूर नहीं, जब इन सनातन विरोधियों को अपनी रक्षा के लिए प्रभु राम की ही शरण में 

अब बद्री विश्वकर्मा का यह संकल्प पूरा करने में लगे हैं। वह 11 जनवरी, 2024 को दमोह के बटियागढ़ से अयोध्या के लिए निकले हैं। वह 14 जनवरी को महोबा के संकटमोचन मंदिर पहुँचे तो वहाँ उनका स्वागत हुआ।

इस दौरान उन्होंने मीडिया से कहा, “अभी तक हमें 566 किलोमीटर चलना है। 300 से 350 किलोमीटर और बचा है। हमने 1992 में संकल्प लिया था। हमारा संकल्प था कि भव्य राम मंदिर बने और हमारे राम मंदिर में श्री राम प्रभु जी विराजमान हो जाएँ तो हम अपनी जटा से रथ बाँधकर पैदल यात्रा करेंगे। अब मुझे 22 तारीख को वहाँ पहुँचना है श्री राम चंद्र जी के चरणों में हाजिरी लगाना है।”

उन्होंने आगे कहा, “जो कोई नहीं करवा सका वो काम हमारे मोदी जी और योगी जी ने करवा दिया है। वो ऐसे संत हैं। मैं उन्हें संत मानता हूँ और मैं सबसे ज्यादा उन्हें धन्यवाद देता हूँ।” वो कहते हैं कि रामभक्तों को इतना प्रेम कभी नहीं मिला।

वो बताते हैं कि 11 दिन में पूरी होने वाली इस यात्रा में हर दिन वो 50 से 60 किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं। उनका रथ छतरपुर जिले के बागेश्वर धाम पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से आशीर्वाद लेने के लिए भी जाएगा। इस यात्रा में उनके साथ प्रेरणा देने वाले मनोज देवलिया भी हैं।

उनकी यात्रा गुरुवार को दोपहर 12:30 बजे बटियागढ़ श्रीराम के मंदिर से अयोध्या के लिए निकली थी। यात्रा के रवाना होने से पहले महंत श्री भगवान वेदांताचार्य ने सवा लाख मानस पाठ किया।

बद्री विश्वकर्मा खली के नाम से भी दमोह में मशहूर हैं। वो अपनी छाती पर पत्थर रखवाकर उसे हथौड़े से फुड़वाते हैं। हनुमान के उपासक बद्री इंडिया गॉट टैलेंट और खतरों वाले रियलिटी शोज में भी गए है। उनके स्टंट को बॉलीवुड हस्तियों किरण खेर, करण जौहर, मिथुन चक्रवर्ती समेत कई फिल्मी सितारें देख चुके हैं।

उत्तर प्रदेश : अब हरिगढ़ के नाम से जाना जाएगा अलीगढ़! सर्वसम्मति से पारित हुआ नाम बदलने वाला प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले का नाम बदल कर हरिगढ़ करने की कवायद शुरू हो चुकी है। जिले के सभी पार्षदों ने इस बदलाव के लिए अपनी सहमति दे दी है। महापौर के माध्यम से अब यह प्रस्ताव शासन को अंतिम निर्णय के लिए भेजा जाएगा। अलीगढ़ के जनप्रतिनिधियों ने इसे सनातन परम्परा को आगे बढ़ाने का प्रयास बताया है। यह निर्णय सोमवार (6 नवम्बर, 2023) को लिया गया है।

अलीगढ़ के महापौर प्रशांत सिंघल ने ANI से इस बावत बात की है। उन्होंने बताया कि इस माँग को सोमवार को हुई मीटिंग में पार्षद संजय पंडित ने उठाया था। संजय ने इसका एक प्रस्ताव भी बैठक में पेश किया। अलीगढ़ को हरिगढ़ करने की माँग वाले इस प्रस्ताव को सभी पार्षदों ने सर्वसम्मति से स्वीकार भी कर लिया। महापौर के मुताबिक, अब इस प्रस्ताव पर शासन के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा है। साथ ही उन्होंने सकारात्मकता से आशा जताई कि शासन इस माँग को स्वीकार कर के अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ रखेगा।

अलीगढ़ के महापौर प्रशांत सिंघल ने आगे कहा, “हमारी पुरानी सभ्यता, संस्कृति और सनातन धर्म की परम्परा रही है उसको ही आगे बढ़ाते हुए हम सब जनप्रतिनधियों ने यह माँग उठाई है।” बताते चलें कि अगस्त माह 2023 में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पुण्यतिथि के कार्यक्रम में शामिल हुए उत्तर प्रदेश के डिप्टी CM केशव प्रसद मौर्य ने भी अलीगढ़ को हरिगढ़ कह कर सम्बोधित किया था। तब उन्होंने लोगों से नारे लगवाने के दौरान कहा था, “आप दोनों हाथ उठाकर बोलिए जय श्री राम, अरे हरिगढ़ वालों और जोर से बोलिए जय श्री राम।”

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इस से पहले भी कई महत्वपूर्ण स्थानों का नामकरण उनके प्राचीन वैदिक नामों से कर चुकी है। इसमें इलाहाबाद को प्रयागराज और फैज़ाबाद को अयोध्या का दिया गया नाम प्रमुख है। हिन्दू संगठन लम्बे समय से अलीगढ़ नाम नाम बदल कर हरिगढ़ करने की माँग उठाते रहे हैं।

बिहार : चारा चोर लालू की बेटी रोहिणी के संस्कार, शेयर की मुख्यमंत्री आदित्य नाथ योगी की एडिटेड फोटो: ‘मार देंगे दो मुक्का, नाच के गिरेगा थाईलैंड’

रोहिणी आचार्य और लालू प्रसाद यादव (फोटो साभार : X_RohiniAcharya2)
लालू प्रसाद यादव को किडनी देने वाली दूसरे नंबर की बेटी रोहिणी आचार्य ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एडिडेट तस्वीर साझा की है, जिसमें उन्हें लालू प्रसाद यादव डाँटते दिख रहे हैं। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर किए गए इस तस्वीर पर लोगों ने उन्हें योगी आदित्यनाथ को नीचा दिखाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है और उन्हें जमकर ट्रोल भी किया है। इस मामले में उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत उमराव ने उनकी पुलिस से शिकायत भी की है। प्रशांत के साथ ही महंत गणेश दास ने भी उन पर यूपी पुलिस से कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

अब चर्चा यह भी है कि यदि यही हरकत किसी अन्य ने होती, मुख्यमंत्री योगी और उनकी सरकार चुप रहती? साइबर क्राइम पुलिस भी हरकत में आ चुकी होती, लेकिन रोहिणी लालू की बेटी है, इसलिए कार्यवाही नहीं हो रही या देरी की जा रही है? 

रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में लिखा, ” अरे बुड़बक रिबन पकड़ ठीक से, नहीं तो मार देंगे दो मुक्का, नाच के गिरेगा थाईलैण्ड में”। रोहिणी आचार्य ने इस पोस्ट में जो तस्वीर साझा की है, वो एडिटेड है।

रोहिणी आचार्य के इस पोस्ट के बाद लोगों ने उनकी जमकर खबर ली। डॉ श्वेता शर्मा ने रोहिणी आचार्य से शायद कोई अप्रिय जानकारी लेनी चाही। उन्होंने लिखा, “रोहिणी.. अभिषेक की मौत कैसे हुई थी ..? वो केस बंद क्यों हुआ, अपने चारा चोर बाप से पूछकर जवाब दो।”

अभिषेक नाम के छात्र की झारखंड की राजधानी राँची से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित दशम फाल्स में डूबने से मौत हो गई थी। आरोप लगाए जाते हैं कि वो लालू यादव की एक बेटी के साथ प्रेम संबंध में थे। शायद श्वेता शर्मा ने उनसे इसी मामले में सवाल पूछा था। इस मामले में लालू परिवार पर अभिषेक की हत्या का आरोप लगा था।

वहीं मनीष शर्मा नाम के यूजर ने लिखा, “इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है। जैसा संस्कार चारा चोर से मिला है उसके संतान वैसा ही भाषा का उपयोग रहे है।”

शाश्वत नाम के यूजर ने लिखा, “बाप बिहार बेचकर हांगकांग पहुँचा दिया लेकिन संस्कार कहाँ से देता। अब बाल बच्चा का भाषा भी वैसा ही सड़क छाप वाला है। ये वही रोहिणी आचार्य है, जिसके शादी में चारा चोर लल्लू लाल सबके दुकान में डाका मरवाया था। आज इसको नीतीश का पैर चाटते देख के मजा आ जाता है।”

वहीं बिहार भाजपा की नेता अमृता राठौर ने लिखा, “उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री के लिए अभद्र भाषा और मारने की बात करने वाले इस ट्वीट पर कृपया संज्ञान लें।”

यूपी भाजपा के प्रवक्ता प्रशांत उमराव ने यूपी पुलिस से कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने यूपी पुलिस को मेंशन करते हुए लिखा है कि इस अकाउंट से यूपी के सीएम योगी जी के लिए गलत भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने लखनऊ पुलिस और यूपी के डीजीपी को भी मेंशन किया है।

इस मामले में रोहिणी आचार्य को लोग तमाम बातें याद दिला रहे हैं। कुछ लोग उनके पिता लालू यादव को कथित तौर पर चारा चोर लिख रहे हैं, तो कुछ लोग उनके संस्कारों पर उंगली उठा रहे हैं।