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उत्तर प्रदेश : राहुल और अखिलेश ने 1लाख रूपए का लॉलीपॉप दे मुसलमानों को किया ब्लैकमेल ; लिख दी अपने पतन की पटकथा ; बीजेपी क्या करती रही? चुनाव आयोग को संज्ञान लेते हुए कार्यवाही करनी चाहिए!



आखिर मुसलमान कांग्रेस के हाथों कब तक ब्लैकमेल होता रहेगा? ये वही कांग्रेस है जिसने मुसलमानों को मुख्यधारा से जोड़ने की बजाए दोयम दर्जे का बना दिया है। लेकिन मुसलमान आज तक इस कटु सच्चाई को नहीं समझ पा रहा। जिस कारण हिन्दू -जिन्हे कट्टरपंथी, साम्प्रदायिक और फिरकापरस्त कहकर बदनाम करते हैं-इन्हे शक की निगाह से देखता है। इस आरोप के लिए मुसलमान खुद जिम्मेदार हैं। बीजेपी अपने कामों के कारण 400 पार करने में सक्षम थी, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कार्यकर्ता से लेकर मंडल और जिला अधिकारी मोदी-योगी और अमित शाह पर ही निर्भर रहते हैं। यह बात सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं लगभग सभी राज्यों 
में है। कांग्रेस द्वारा जो गारंटी कार्ड वितरित किये हैं, जाँच करनी चाहिए कि किस प्रेस से प्रकाशित हुए और कितने प्रकाशित हुए हैं। 
कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर जिस तरह मुसलमानों को ब्लैकमेल किया, सारे मौलाना, मौलवी और मुस्लिम बुद्धिजीवी मुसलमानों की इतनी बड़ी बेइज्जती पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? अगर यही काम बीजेपी ने किया होता अब तक चील कौओं की तरह चीख-चीखकर आसमान सिर पर उठा लिया होता।  
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रोकने के लिए कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने क्या-क्या प्रपंच नहीं किए। ग्लोबल पावर्स की मदद से लेकर, संविधान और आरक्षण के खिलाफ अफवाह फैलाने तक हर हथकंडा अपनाया। यहां तक कि देश के भोलेभाले मतदाताओं को हर महीने 8500 रुपये के हिसाब से साल के 1 लाख रुपये देने का लालच दिया। कांग्रेस के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी ने तो अपनी हर जनसभा में मंच से हर महीने 8500 और साल के 1 लाख रुपये देने की गारंटी देते नहीं थकते थे। उन्होंने तो अपने भाषण में महीने और तारीख तक बता दिए थे कि अमुक तारीख से रुपये बैंक खातों में खटाखट जादू की तरह गिरना शुरू हो जाएगा। यहां तक कि कांग्रेस के कार्यकर्ता गरीब लोगों को गारंटी कार्ड तक बांट दिए जिसमें एक फार्म भी छपा है और नाम-पता भरने का कॉलम है। राहुल गांधी ने अपने भाषण में गारंटी क्या दी, कांग्रेस के नेताओं ने यह कह कर घर-घर में फर्जी गारंटी कार्ड बांट दिए कि 5 जून को इसे पार्टी ऑफिस में जमा करा देना और खटाखट पैसे मिलने लगेंगे।

ये कोई आरोप नहीं कटु सच्चाई है 
वोटर खरीदे गए, गुमराह किए गए
वोटर खरीदे गए, गुमराह किए गए, धोखाधड़ी की गई, लोकतंत्र की सामूहिक हत्या हुई लेकिन कोई मीडिया इसको मुद्दा नहीं बनाएगा, कोर्ट भी संज्ञान नहीं लेगा। चुनाव आयोग को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए। कांग्रेस की इस गारंटी कार्ड पर 420 का मुकदमा होना चाहिए। पीएम मोदी को सत्ता में आने से रोकने के लिए और भारत को कमजोर देश बनाने के लिए विदेश से अरबों रुपए फंडिंग की गई। सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाए गए। सोशल मीडिया इन्फूएंशर खरीदे गए। इतना सब करने के बाद भी वे मोदी को रोक नहीं पाए।
उत्तर प्रदेश में इतने बड़े उलटफेर की सबसे  बड़ी वजह 1लाख का लॉलीपॉप था, इस बारे में उत्तर प्रदेश के कांग्रेस उपाध्यक्ष कहते है की उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले 43 लाख गारंटी कार्ड बांटे गए थे। और उनमे से अधिकतर भर कर कांग्रेस कार्यालय पर जमा भी किया जा चुका था। अगर 43 लाख परिवारों को कार्ड मिला और 1 परिवार पर 4  वोट भी जोड़ लो तो 1.5 करोड़ मतदाताओं को उत्तरप्रदेश में प्रभावित किया क्या, और यही एक लाख रूपया देने की गारंटी ही थी इतने बड़े उलटफेर की मुख्य वजह वो वाराणसी हो या फैजाबाद। इसलिए सारे विश्लेषण बेकार है ये नेरेगा और कर्ज माफी के बाद मतदाताओं को दिया गया सबसे बड़ा लॉलीपॉप है। जिसको मतदाताओं ने चुपचाप पकड़ लिए और किसी को हवा भी नही आने दी और जमीनी हवा किसी को समझ नही आई। इस पर चुनाव आयोग को संज्ञान लेते हुए कार्यवाही करनी चाहिए!

यह कांग्रेस का गारंटी कार्ड है, जो करोड़ों की संख्या में यह कह कर भरवाया गया कि यह गारंटी कार्ड भर दो तुम्हें 100000 रूपए मिलेगा।

इस गारंटी कार्ड में कहीं नहीं लिखा है कि सरकार बनने पर ही 100000 रूपए दिए जाएंगे।

इस गारंटी कार्ड के अनुसार कानूनन कांग्रेस 100000 रूपए देने के लिए बाध्य है। अब वह मुकर नहीं सकती। बीजेपी को भी चाहिए कि इस मुद्दे को सड़कों तक लाकर बड़ा आंदोलन करे। 

मुंगेरी लाल के सपने देखने पर कोई रोक नहीं। राहुल और प्रियंका को परिवारभक्त प्रधानमंत्री बनाने का सपना देख रहे हैं, वह भी जानते हैं कि परिवार को कोई सदस्य प्रधानमंत्री नहीं बन सकता। अगर बनना होता 2004 में सोनिया गाँधी बन गयी होती। सबसे अधिक मूल्यवान होता है विशेषकर राष्ट्र के महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए, बच्चा बच्चा जानता है कि ग़ज़वाये हिन्द में उतनी ही देरी है जितनी भारत के विकसित होने में। 

अब ऐसे में पहले क्या ज़रूरी था और है विकास या किराएदारों जिहादियो को बाहर निकालना या उनका सामूहिक सनातनी करण करना। 

दशकों के कांग्रेस के फिरकापरस्त शासन के बाद 1998 में अटल सरकार आई। हम सनातनियो में आस जगी की अब जायेगे वापिस किरायेदार पाकिस्तान भारत बनेगा हिन्दुराष्ट्र। मगर गठबंधन की बैसाखियों के बहाने के कारण उन्होंने कुछ न किया। 

फिर दस साल शून्य में रहने के बाद सबसे पहले हम भक्तो की छाती 56" हुई कि अब तो निश्चित ही खाली होगा हिंदुस्तान घुसपैठियों से(2014) मगर नेता जी तो उन्ही का विश्वास जीतने में लग गए। पूर्ण बहुमत के दृष्टिगत कई कट्टर हिन्दू संगठन मैदान में आये(आरएसएस,विहिप नही) खूब धरने बड़े आंदोलन किये जनसंख्या कानून तुरंत बनवाने को लेकर। जिसकी नितांत,शीघ्रतम आवश्यकता भी थी। 2018 में हमारे मोदी जी ने लाल किले से इसके बनने की समय की मांग भी बताई थी मगर किया क्या कुछ नही। 2019 में तो ताकत बढ़ी कट्टर हिंदूवादियों में आशा उत्साह बढ़ी फिर प्रयास हुए। सोशल मीडिया से भी खूब आवाज उठाई गयी। 

अवलोकन करें:-

उत्तर प्रदेश : कांग्रेस दफ्तर के बाहर लगी मुस्लिम महिलाओं की लंबी लाइन, हाथ में ‘गारंटी कार्ड’ ल

मगर सभी जिम्मेदार कानो में रुई डाल,निगाहें दूसरे ग्रह पे गाढ़ समय को पास करते रहे। हिंदूवादियों में अब भी आस थी। राष्ट्रभक्त,अंधभक्त दोनों को पूरी उम्मीद थी उनपर दवाब भी था कि कुछ तो सोचेंगे करेंगे। डूबते सनातन को उभार ग़ज़वाये हिन्द को चीर करेंगे। 

अधिकतम धर्म प्रेमी तो 2024 बाद इस संविधान को ही खत्म करने की भीषण आस लगाए थे। जिसपे ये नेता निगाहे तो गड़ाए थे मगर व्यस्त होने का नाटक दिखाए थे। तभी ये नारा दिए थे अबकी बार 400 पार। 

मगर दुखद हृदय -पूर्ण बहुमत का स्वर्णिम अध्याय खत्म हो चुका है नेताओ को  गठबंधन का बहाना अटल जी की तरह मिल चुका है। 

अब क्या अध्यादेश का उपयोग कर बनेगा सख्त जनसंख्या कानून,बनेगा भारत हिन्दु राष्ट्र या nrc लागू कर देश से बीस करोड़ घुसपैठियों को बाहर किया जाएगा। घुसपैठियों के निकल जाने के बाद भारतीय मुसलमानों की स्थिति में बड़ी तेजी से बदलाव आएगा। 

विचारणीय है अगर इस इलेक्शन में सरकार पलट जाती तो इन हिन्दू नेताओ की बातें बदल जाती फिर ये कहते भारत बनाओ हिन्दु राष्ट्र।

निराश होने की जरूरत नही है भाजपा अकेली 241 सीट जब इंडी ठगबंधन ने दुनियाभर के भ्रम फैलाकर भी 233 सीट हासिल की है।

प्रधानमंत्री मोदी की सरकार फिर से बन रही हैकुछ पॉज़िटिव बातों को ध्यान में लेकर चुनावों के परिणाम का आनंद ले।

370  के विरोधी महबूबा मुफ्ती और ओमर अब्दुल्ला हार गये है अब उधर भाजपा का मजबूत ग्राउंड तैयार हो गया है।

आंध्र राज्य में लोकसभा की अतिरिक्त राज्य सरकार चंद्र बाबू के साथ बन गई है।

ओडिशा में इतिहास में पहली बार भाजपा की सरकार बन गई है। अरुणाचल और सिक्किम में राज्य सरकार बन गई है।

पंजाब में 18 से 19 प्रतिशत वोट पाकर आनेवाले समय मे पंजाब में भी अच्छा होने की उम्मीद हो गई हैं

केरल में 1 सीट खोलकर और वोट प्रतिशत बढ़ाकर आने वाले अक्टूबर में  केरल राज्य के चुनाव में एक आशा का निर्माण किया है

तमिलनाडु में वोट प्रतिशत बढ़ गया है तमिलनाडु राज्य के चुनावों में अनहोनी के अनुमान लगा सकते हैं

कुल मिलाकर केंद्र में तीसरी बार सरकार बनाने के अलावा चार राज्यो में सरकार बना दी है

हिमाचल में 4 में से 4

उत्तराखंड में 5 में से 5

दिल्ही में 7 में से 7

अंडमान निकोबार द्वीप समूह में 1

अरुणाचल प्रदेश में 2 में से 2

छत्तीसगढ़ में 11 में से 10

ओडिसा में 21 में से 19

यह आंकड़े भी उत्साह वर्धक ही है

न प्रधानमंत्री की महेनत में कमी थीं ना कार्यकर्ताओं के जोश और उत्साह में कमी थी स्वामी विवेकानंद जी का यह अजर अमर वाक्य था उठो जागो ध्येय प्राप्त न हो तब तक लगे रहो

चुनावों में थोड़ा बहुत उलट फेर होता ही है विपक्षी दल भाजपा NDA हार गई है मोदी लहर खत्म हो गई है की नैरेटिव गढ़ने की कोशिशें कर रहा है। देश की जनता रुकने वाली नही है न देश रुकने वाला है देश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

पिछले दस साल में जो काम हुवा है वो काबिले दाद है ही पर जो काम नही हुवा है वो अब होगा वैसे यह बात प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्यों में बार बार की है जो पूरी होगी।

प्रधानमंत्री कृत निश्चयी है आप ने जो भरोसा जताया है वो पूरी करने में कल् से लग जाएंगे आंकड़ों की बात करके भ्रम फैलाने वाले ठगबंधन की बात न सुनते हुवे काम पर लग जाना है।

G20 समिट के बाद बौखलाया चीन, कहा – भारत ने अपने एजेंडे को आगे बढ़ा दिया, हमारे हितों को पहुँचा दिया नुकसान

                                      G20 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों से पस्त हुआ चीन,
भारत द्वारा जी20 के शिखर सम्मेलन की सफलतापूर्वक मेजबानी की तारीफ पूरी दुनिया में हो रही है। लेकिन, चीन के एक थिंक-टैंक ने भारत पर G20 शिखर सम्मेलन का इस्तेमाल अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए करने का आरोप लगाया है। थिंक-टैंक ने कहा कि भारत ने शिखर सम्मेलन में अपने हितों के मुद्दों को उठाकर और चीन विरोधी कामों को अंजाम देकर चीन के साथ धोखा किया है।

इस थिंक-टैंक का कहना है कि भारत ने विवादित क्षेत्रों (कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश) में जी-20 की बैठकों का आयोजन करके उन क्षेत्रों पर अपने कब्जे की मान्यता लेने की कोशिश की है।

चीन को हुई तकलीफ की मुख्य वजह

G-20 सम्मेलन के पहले दिन भारत ने इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर का ऐलान किया। इस प्रोजेक्ट में मध्य पूर्व और यूरोपीय देशों के अलावा अमेरिका भी अहम साझीदार है। इस कॉरिडोर को चीन के BRI (बेल्ट एन्ड रोड) के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले समय में भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच आर्थिक एकीकरण का प्रभावी माध्यम होगा। यह पूरे विश्व में कनेक्टिविटी और विकास को सस्टेनेबल दिशा प्रदान करेगा।
इस बात से चीन को इतनी मिर्ची लगी है कि वो बौखला गया है। चीनी सरकार भले ही सीधे तौर पर कुछ नहीं बोल रही हो, लेकिन वो अपने कथित थिंक-टैंक्स के माध्यम से भारत को धमकाने की कोशिश कर रही है।

अपना एजेंडा बढ़ा रहा भारत : चीनी थिंक-टैंक

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ कंटेम्परेरी इंटरनेशनल रिलेशंस नाम के एक थिंक-टैंक ने अपने लेख में कहा कि भारत ने “जी20 के मंच का इस्तेमाल अपने स्वयं के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया है, जो वैश्विक मुद्दों पर सहयोग की बजाय विभाजन को बढ़ावा देने के लिए है।” थिंक-टैंक ने कहा कि चीन विरोधी मुद्दों को उठाकर भारत ने “जी20 की एकता को तोड़ा और चीन के हितों को नुकसान पहुँचाया।”

अपने मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा चीन!

थिंक-टैंक का लेख स्पष्ट रूप से राजनीतिक विचारों से प्रेरित है। चीन अपने मानवाधिकार रिकॉर्ड और दक्षिण चीन सागर में आक्रामक व्यवहार के लिए बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है। भारत पर G20 को कमजोर करने का आरोप लगाकर, चीनी सरकार अपने स्वयं के मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।
वैसे, लेख तथ्यात्मक रूप से भी गलत है। उदाहरण के लिए, यह दावा करता है कि भारत “चीन की कीमत पर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।” हालाँकि, उसने अपने इन दावों के समर्थन में कोई सबूत नहीं रखा है।

इस चीनी थिंक टैंक के दावों के उलट भारत ने जी20 शिखर सम्मेलन में निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया:

1-जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैश्विक कार्रवाई को बढ़ावा देना
2-वैश्विक आर्थिक विकास को बढ़ावा देना
3-आतंकवाद और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों के खिलाफ वैश्विक सहयोग को मजबूत करना
4-अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना
5-स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सामाजिक सेवाओं में निवेश को बढ़ावा देना

भारत जी-20 का जिम्मेदार सदस्य

G20 शिखर सम्मेलन ने भारत की वैश्विक नेतृत्व की स्थिति को मजबूत किया है। भारत हमेशा से जी20 का एक जिम्मेदार सदस्य रहा है और उसने हमेशा वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने का प्रयास किया है। भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और वह चीनी आक्रामकता का विरोध करेगा।