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FIR होने पर पवन खेड़ा ने बिना शर्त माँगी माफी… : असम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमाबोले- उम्मीद है अब असभ्य भाषा का प्रयोग नहीं करेंगे

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी माँग ली है। इस संबंध में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने जानकारी दी। इससे पहले खेड़ा को रायपुर जाते समय विमान से उतार कर गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी।

सीएम सरमा ने 24 फरवरी 2023 को ट्वीट कर कहा, “आरोपित (कांग्रेस नेता पवन खेड़ा) ने बिना शर्त माफी माँग ली है। हम आशा करते हैं कि सार्वजनिक स्थानों की शुचिता को बनाए रखते हुए अब से कोई भी राजनीतिक बयानबाजी में वे असभ्य भाषा का उपयोग नहीं करेंगे।”

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने ट्वीट में आगे कहा, “असम पुलिस इस मामले को उसके तार्किक अंत तक फॉलो करेंगे।” माना जाता है कि माफी माँगने के बाद भी पवन खेड़ा की मुश्किलें कम नहीं होंगी।

प्रधानमंत्री को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में तीन एफआईआर दर्ज की गई थी। एक एफआईआर लखनऊ में, दूसरा वाराणसी में और तीसरा असम के दीमा हसावो में दर्ज कराई गई थी। असम में दर्ज की गई एफआईआर के संदर्भ में असम पुलिस ने 23 फरवरी 2023 को दिल्ली पुलिस के सहयोग से पवन खेड़ा को गिरफ्तार कर लिया था।

उबलते हुए खून की रवानी हैं मोदी इस देश के युवा की जवानी हैं मोदी सोये हुए थे जो अब तक हिन्दुस्तानी उनके जाग उठने की कहानी हैं मोदी

जिस समय खेड़ा को गिरफ्तार किया, उस समय वे कांग्रेस के अधिवेशन में जाने के लिए रायपुर की फ्लाइट में सवार थे। उनके साथ कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और सुप्रिया श्रीनेत सहित कई वरिष्ठ नेता सवार थे। खेड़ा की गिरफ्तारी के बाद कॉन्ग्रेस के नेता ने एयरपोर्ट पर ही धरना देना शुरू कर दिया।

इसके बाद कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाकर अर्जेंट सुनवाई के लिए लिस्टिंग की। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अदालत ने मामले में सुनवाई की और पवन खेड़ा को गिरफ्तारी से राहत देते हुए अंतरिम जमानत दे दी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा को हिदायत देते हुए सार्वजनिक भाषा की मर्यादा को बनाए रखने की नसीहत दी।

इस दौरान पवन खेड़ा ने तीनों एफआईआर को क्लब करने का भी आग्रह किया। खेड़ा के इस आग्रह को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही कोर्ट को अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि पवन खेड़ा ने बिना शर्त अपने बयान के लिए माफी माँग ली है।

‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस(INC)’ के मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री के लिए नरेंद्र ‘गौतम दास’ मोदी नाम का प्रयोग किया। पीएम अपने नाम में अपने पिता दामोदर दास मोदी का नाम लगाते हैं, इसीलिए उनका नाम नरेंद्र दामोदर दास मोदी है। कांग्रेस प्रवक्ता ने नरेंद्र दामोदर दास मोदी की जगह कई बार नरेंद्र गौतम दास मोदी कहा था।

सिंपल गणित से आहत हुए अमेरिकी 'Woke', वुमेन्स मार्च को माँगनी पड़ी माफी, योगेंद्र यादव को भी लगा था ऐसा ही झटका

अमेरिकी वोक आहत हैं तो दूसरे वोक्स ने बाकी बचे वोक को ठेस पहुँचाने के लिए माफी माँगी है, वजह है चंदे का एक बहुत ही साधारण सा गणित।

नहीं समझ आया तो आइए बताते हैं कि मामला क्या है?

कहने को वुमेन्स मार्च एक विरोध प्रदर्शन है, जिसकी शुरुआत 21 जनवरी 2017 को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह के बाद शुरू हुआ था। अब बुधवार (24 नवंबर, 2021) को वुमेन्स मार्च ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर अपने एक मेल के लिए माफी माँगी है, जिसे उन्होंने सब्सक्राइबर को भेजा था।

दरअसल, वुमेन्स मार्च ने भेजे गए उस ईमेल के लिए माफ़ी माँगी है जिसमें उल्लेख किया गया था कि इस सप्ताह का औसत डोनेशन मात्र 14.92 अमेरीकी डालर था। उन्होंने कहा कि यह सब तब हुआ जब यह वर्ष नेटिव इंडिजिनस लोगों के लिए उपनिवेशवाद, विजय और नरसंहार को याद करने का है। यह विशेष रूप से थैंक्सगिविंग से पहले’ से लोगों से कनेक्शन नहीं बनाने की हमारी एक भूल थी।

जैसे ही ये बात औरों को पता चली, अमेरिका में लोग इस बात से परेशान हो गए कि विमेंस मार्च को औसतन 14.92 अमेरीकी डालर का डोनेशन मिला। क्योंकि 1492 वह वर्ष है जब इतालवी खोजकर्ता क्रिस्टोफर कोलंबस ने अमेरिका की खोज की थी जबकि वह भारत की तलाश में निकला था। वह पहली बार 12 अक्टूबर, 1492 को अमेरिका पहुँचा और बाद में उपनिवेशों की स्थापना की।

मामला यह है कि चूँकि वुमेन्स मार्च के वोक प्राप्त डोनेशन राशि को कोलंबस के अमेरिका पहुँचने के वर्ष से कनेक्ट नहीं कर पाए, इस बात ने दूसरे वोक को इतना आहत कर दिया कि बाकि वोक को माफी माँगनी पड़ी।

चीजों को ठीक ढंग से समझने के लिए, ऐसे समझते है कि अगर इच्छाधारी प्रदर्शनकारी से वर्तमान में ‘किसान’ बने योगेंद्र यादव अपने दम पर एक फण्डरेजर का आयोजन करते हैं और मान लेते हैं कि 125 लोग इसमें 2,480 रुपए का योगदान करते हैं, तो यह औसतन 19.84 रुपए प्रति व्यक्ति की डोनेशन राशि होगी। अगर योगेंद्र यादव को वूमेन मार्च से जोड़ते हुए देखें, तो वह इसे वर्ष 1984 से जोड़ते जब इंदिरा गाँधी सरकार द्वारा खालिस्तानी आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले को स्वर्ण मंदिर, अमृतसर में ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत मारा गया, विरोध में इंदिरा गाँधी की हत्या हुई और उसके बाद पूरे भारत में सिख विरोधी दंगे भड़के।

मौसम के अनुसार विभिन्न कारणों से तमाम तरह से विरोध-प्रदर्शन करने के बावजूद, आज भी योगेंद्र यादव की स्थिति यह है कि अपने दम पर 100 रुपए भी नहीं जुटा पाएँगे। यह तथ्य इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि कैसे उनका फण्डरेजर कैम्पेन, उनके विरोध-प्रदर्शनों की तरह ही एक बड़ा मजाक साबित हुआ है।

बात दरअसल, 2019 की है जब हरियाणा विधानसभा चुनावों से पहले, योगेंद्र यादव ने ‘पर्यावरणविद्’ तेजपाल यादव को अपनी पार्टी के उम्मीदवारों में से एक के रूप में समर्थन देते हुए खड़ा किया था। ट्विटर पर एक कैम्पेन को आगे बढ़ाते हुए हुए, उन्होंने अपने तमाम चहेते फॉलोवर्स से आर्थिक सहायता की गुहार लगाई। लेकिन, जब उन्हें अपनी कथित ‘ग्रीन राजनीति’ के लिए केवल ₹50 रुपया ही मिला तो उन्हें गहरा सदमा लगा था। जिसका जिक्र उन्होंने बड़े ही निराश मन से अपने एक ट्वीट में भी किया था।


सुशांत के फेक ट्वीट पर NBSA का आदेश : AajTak पर 1 लाख रुपए जुर्माना और बड़े-बड़े अक्षरों में लिख कर और बोल कर Live माफी माँगे

सुशांत सिंह राजपूत मामले में फेक न्यूज़ चलाने के लिए ‘न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (NBSA)’ ने ‘आज तक’ न्यूज़ चैनल को निर्देश दिया है कि वो मंगलवार (अक्टूबर 27, 2020) को रात 8 बजे माफ़ी माँगे, और साथ ही 1 लाख रुपए का जुर्माना भी भरे। दरअसल, ‘आज तक’ ने सुशांत सिंह राजपूत की अंतिम ट्वीट्स बता कर फेक सामग्रियाँ दिखाई थीं। जून 20, 2020 को नीलेश नवलखा द्वारा की गई शिकायत पर कार्रवाई करते हुए NBSA ने ये निर्णय लिया।

‘आज तक’ चैनल को निर्देश दिया गया है कि वो टेक्स्ट के माध्यम से माफीनामे का प्रसारण करे। ‘आज तक’ को NBSA ने कहा है कि माफीनामे का ये टेक्स्ट बड़े फॉन्ट्स में होने चाहिए और साथ ही बैकग्राउंड में वॉयस ओवर के द्वारा धीरे-धीरे इस माफीनामे को पढ़ा जाना चाहिए। इसके अलावा उसे 1 लाख रुपए का जुर्माना भी भरना पड़ेगा। चैनल को माफ़ी माँगते हुए लाइव प्रसारण के दौरान निम्नलिखित टेक्स्ट को दिखाना और पढ़ना पड़ेगा:

“सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या से सम्बंधित घटनाओं पर रिपोर्टिंग के दौरान ‘आज तक’ चैनल ने कुछ ट्वीट्स दिखाए थे और उन ट्वीट्स को गलत तरीके से सुशांत सिंह राजपूत की अंतिम ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट्स करार दिया था। हमने उन्हें वास्तविक ट्वीट्स बताया था। ऐसा कर के हमने एक्यूरेसी से सम्बंधित ‘स्पेसिफिक गाइडलाइन्स कवरिंग रिपोर्टेज’ के अनुच्छेद-1 का उल्लंघन किया है। इस अनुच्छेद में कहा गया है कि सूचनाओं की एक से ज्यादा सोर्सेज से पुष्टि की जानी चाहिए। अगर समाचार एजेंसियों से कोई सूचना मिल रही है तो इसका जिक्र किया जाना चाहिए और संभव हो तो उसकी पुष्टि भी की जानी चाहिए। आरोपों को एक्यूरेसी के साथ पेश किया जाना चाहिए और फैक्ट्स में हुई गलतियों को जल्द से जल्द सुधारा जाना चाहिए।”

इसके अलावा ‘इंडिया टीवी’, ‘ज़ी न्यूज़’ और ‘न्यूज़ 24’ को भी सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में रिपोर्टिंग करते समय पत्रकारिता के सिद्धांतों का उल्लंघन के लिए माफ़ी माँगने को कहा गया है। नीलेश की तरफ से अधिवक्ता द्वय राजेश इनामदार और शाश्वत आनंद ने प्रतिनिधित्व किया। जहाँ ‘ज़ी न्यूज़’ और ‘इंडिया टीवी’ अक्टूबर 27 को माफ़ी माँगेंगे, वहीं ‘न्यूज़ 24’ अक्टूबर 29 को अपना माफीनामा पेश करेगा।

‘ज़ी न्यूज़’ ने ‘सुशांत की मौत पर 7 सवाल’ और ‘पटना का सुशांत मुंबई में फेल क्यों?’ जैसे टाइटल और टैगलाइन चलाए थे, जिसके बारे में NBSA ने कहा है कि किसी भी खबर को लोगों में डर या घबराहट का माहौल पैदा करने के लिए सनसनीखेज नहीं बनाया जाना चाहिए। वहीं ‘इंडिया टीवी’ ने उस नियम का उल्लंघन किया है, जिसमें क्षत-विक्षत शव या फिर किसी अन्य शव का काफी करीब से लिए गए फोटो या वीडियो नहीं दिखाए जाने चाहिए और मृत्यु के मामलों में सम्मान के साथ रिपोर्टिंग होनी चाहिए।

वहीं ‘न्यूज़ 24’ ने ‘सुशांत, आपने अपनी ही फिल्म क्यों नहीं देखी?’ और ‘जिस चीज के लिए आपने फिल्म में आवाज़ उठाई, उसे अपनी वास्तविक ज़िंदगी में भूल गए’ जैसे टैगलाइन के साथ खबरें चलाई थीं। बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म ‘छिछोरे’ में आत्महत्या की समस्या को उठाया गया था। NBSA ने उस नियम का हवाला दिया है, जिसके अनुसार, क्राइम की खबरें दिखाने के लिए उसके साथ ग्लैमर नहीं मिलाया जा सकता।

वहीं ‘एबीपी न्यूज़’ को भी इसकी कवरेज से सम्बंधित कुछ वीडियो हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा ‘न्यूज़ नेशन’ व अन्य खबरिया चैनलों को भी निर्देश दिया गया है कि जिन वीडियोज में उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत के मृत शरीर की तस्वीर दिखाई है, उन्हें हटाया जाना चाहिए। इन सभी चैनलों को माफ़ी माँगने और वीडियोज हटाने के बाद इसके सबूत NBSA को भेजने होंगे। NBSA ने BARC द्वारा 12 सप्ताह के लिए टीवी रेटिंग्स पर रोक लगाए जाने का भी स्वागत किया था।

आजतक ने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के कथित आखिरी ‘ट्वीट्स’ पर उनकी मौत के दो दिन बाद 16 जून को ख़बर प्रकाशित की थी। ‘आज तक’ ने यह लेख अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी साझा किया था। आजतक ने जो लिंक साझा किया था उसके भीतर इस बात का दावा किया गया था कि सुशांत ने कथित तौर पर आत्महत्या के संकेत दिए थे। बाद में बिना किसी प्रकार का स्पष्टीकरण दिए यह ख़बर (ट्वीट) हटा ली गई थी।

मोदी सरकार की शिक्षा नीति की तारीफ करने पर कांग्रेस नेता खुशबू को राहुल से मांगनी पड़ी माफी

मोदी सरकार की नई शिक्षा नीति की देश भर में सराहना हो रही है। लेकिन मोदी सरकार की शिक्षा नीति की तारीफ करने पर कांग्रेस की एक महिला नेता खुशबू सुंदर को राहुल गांधी से माफी मांगनी पड़ी। खुशबू सुंदर ने नई शिक्षा नीति का तारीफ करते हुए कहा था कि यह एक स्वागत योग्य कदम है। 
खुशबू के यह कहते ही मोदी सरकार की हर बात पर विरोध जताने वाले कांग्रेसियों ने उन्हें ट्रोल करना पड़ा। उन्हें यह अच्छा नहीं लगा कि जिसका वो विरोध कर रहे हैं, पार्टी की ही कोई नेता उसके बारे में प्रशंसा की कोई बात करे। पार्टी कार्यकर्ता उन्हें सोशल मीडिया खरी-खोटी सुनाने लगे। इसके बाद खुशबू ने एक और ट्वीट कर कहा कि मैं सकारात्मक पहलुओं को देखना पसंद करती हूं और नकारात्मक चीजों पर काम करती हूं। हमें समस्याओं के समाधान की पेशकश करनी है न कि केवल आवाजें बुलंद करना। विपक्ष का मतलब देश के भविष्य के लिए काम करना भी है।



खुशबू सुंदर ने यह लिखकर भी लोगों का गुस्सा कम करने की कोशिश की कि राजनीति केवल शोर मचाने के लिए नहीं होती है। यहां सभी को एक साथ मिलकर जनता और देश की भलाई के लिए कार्य करना होता है। 
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केंद्र सरकार ने बीते दिन लगभग 34 साल बाद भारत की शिक्षा नीति में बदलाव किया। कई बदलाव ऐसे हैं, जिन्हें वाकई पढ़ा और सम...
लेकिन लोगों का गुस्सा कम नहीं हुआ और पार्टी लाइन से बाहर जाकर अपनी बात रखने के लिए खुशबू को राहुल गांधी से माफी मांगनी पड़ी। हालांकि खुशबू के ट्वीट से साफ लग रहा है कि वे भारी मन से विद्रोही तेवर से साथ माफी मांग रही हैं। खुशबू ने ट्वीट कर कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 पर मेरा विचार मेरी पार्टी से अलग है और मैं इसके लिए राहुल गांधी से माफी मांगती हूं। लेकिन मैं कठपुतली या रोबोट की तरह सिर हिलाने के बजाए तथ्यों पर बात करती हूं। अपने नेता से हम हर चीज पर सहमत नहीं हो सकते, लेकिन बतौर नागरिक बहादुरी से अपनी राय या विचार रख सकते हैं।

जाकिर नाइक द्वारा माफी माँगने पर मलेशिया के मंत्री बोले- मानहानि का मुकदमा करो

Zakir Naikमलेशियाई मानव संसाधन मंत्री एम. कुलसेगरन ने अगस्त 17 को विवादित धर्मगुरु जाकिर नाइक को उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने को कहा है। कुलसेगरन की टिप्पणी तब आई है, जब नाइक ने मलेशिया के मंत्री से उनके प्रति अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए माफी की मांग की थी। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि नाइक वर्तमान में जांच के घेरे में है और उसकी स्थायी निवासी की स्थिति को मलेशियाई सरकार द्वारा रद्द किया जा सकता है, यदि वह देश की भलाई के लिए हानिकारक साबित होती है।
इससे पहले अगस्त 16 को जाकिर नाईक ने एम कुलसेगरन की प्रेस रिलीज पर आपत्ति जताई थी, जिसका शीर्षक था 'जाकिर नाइक की उपस्थिति भारत में सभी मलेशियाई लोगों के लिए शर्मनाक है।' कुलसेगरन ने कहा था कि नाईक भगोड़ा है। भारत में उस पर गंभीर आरोप हैं। उसे मलेशिया के इतिहास के बारे में जानकारी नहीं है। उसे भारत को सौंप देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जाकिर जैसे लोग हमारे विविधता वाली संस्कृति में रहने के हकदार नहीं हैं। उसको स्थायी नागरिकता किसी भी शर्त पर नहीं दी जानी चाहिए।
 
वहीं मलेशिया की मीडिया का कहना है कि पुलिस ने उस शख्स को पकड़ा है जिसने जोहान का सिर कलम करने की धमकी दी थी, जो नागरिक स्वतंत्रता वकील और लिम किट सियांग के राजनीतिक सचिव हैं। जोहान ने मलेशियाई सरकार को जाकिर नाइक के मलेशियाई स्थायी निवासी दर्जा को वापस लेने का सुझाव दिया था।
 
तीन साल पहले जाकिर नाइक को मलेशिया में स्थाई निवासी का दर्जा मिला था लेकिन देश में अल्पसंख्यक जातीय चीनी और हिंदू आबादी को लेकर विवादित बयान देने के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
नाइक ने हाल ही में कहा था, 'भारत में मुसलमानों के मुकाबले हिंदुओं के पास 100 गुना ज्यादा अधिकार हैं, जो यहां अल्पसंख्यक श्रेणी में आते हैं। मलेशियाई हिंदू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करते हैं न कि मलेशिया के प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद का।'