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मलेशिया : 11 बच्चे, 22 नाती-पोते वाली 62 साल की महिला ने 27 साल के मुहम्मद से किया तीसरा निकाह, कहा- 40 जैसा फील करती हूँ…

                                                                                                            साभार: malaymail.com
मलेशिया की रोकैया समत (Rokiah Samat) 62 साल की हैं। 11 बच्चे हैं। 22 नाती-पोते भी। अब वे 27 साल के सबहान मुहम्‍मद अमीन जुमदैल (Sabahan Muhamad Amin Jumdail) से निकाह के कारण चर्चा में हैं। यह उनकी तीसरी निकाह है। रोकैया का कहना है कि इस उम्र में भी वे 40 के जैसा महसूस करती हैं। साथ ही उम्मीद जताई है कि यह उनकी आखिरी निकाह होगी।

रिपोर्ट के अनुसार 2021 में टिकटॉक (TikTok) के जरिए रोकैया और मुहम्मद संपर्क में आए। फिर मुलाकात हुई और दोनों एक-दूसरे के करीब आते गए। जून 2022 में दोनों ने सगाई की। इसके तीन महीने बाद सितंबर में निकाह हो गया। अब एक टिकटॉक वीडियो के ही कारण यह निकाह चर्चा का विषय बन गया है। कुछ रिपोर्टों में मुहम्मद की उम्र 28 साल और रोकैया के 10 बच्चे बताए गए हैं।

रोकैया का खुद का सबसे बड़ा बच्चा 45 साल का और सबसे छोटा 18 साल का है। मुहम्मद से निकाह को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने बताया, ‘वह बेहद नेक, जिम्मेदार, धैर्यवान और ख्याल रखने वाला इंसान है।’ रोकैया के अनुसार उन्हें अपने बच्चों के साथ रहना पसंद नहीं। अकेले में वह खुद को ज्यादा सहज पाती है। उन्हें एक जीवनसाथी की जरूरत महसूस हो रही थी, इसलिए उन्होंने एक और निकाह कर लिया है। वे कहती हैं, “यह अल्लाह की मर्जी। मेरे लिए उम्र मायने नहीं रखता। ईमानदार शौहर मिलना महत्वपूर्ण है।”

रोकैया का पहला निकाह 1977 में हुआ था जो 40 साल चला। पहले शौहर से अलग होने के बाद उन्होंने 2018 में म्यांमार के एक आदमी से दूसरी निकाह की। यह करीब दो साल ही चला। रोकैया के अनुसार उनके दूसरे शौहर चीन में काम करते थे। इसके कारण रिश्ते में गर्मजोशी नहीं थी और उन्होंने तलाक ले लिया।

कुछ दिन पहले ही रोकैया और मुहम्मद ने अपनी निकाह की जानकारी वाला वीडियो टिकटॉक पर पोस्ट किया है। इसे 24 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। इसमें दोनों ने उम्र के फासले के बारे में भी बताया है। रोकैया का कहना है, “हालाँकि वह (मुहम्मद) बहुत छोटे हैं, पर मुझे पूरा यकीन है कि मेरे शौहर आखिरी साँस तक मेरा ख्याल रखेंगे। मैं उम्मीद करती हूँ कि यह मेरी आखिरी निकाह होगी।” वहीं मुहम्मद का कहना है शुरुआत में वे रोकैया का दोस्त बनकर रहना चाहते, लेकिन बाद में वे उनसे जुड़ते गए। इसके बाद आखिरकार 2022 में अपने जन्मदिन पर 10 जनवरी को वे रोकैया से मिलने उनके घर पहुँचे। दोनों ने 9 सितंबर 2022 को निकाह किया था।

कर्ज न चुका पाने पर मलेशिया ने जब्त किया पाकिस्तान का विमान

मलेशिया ने पाकिस्तान के विमान को किया जब्त (प्रतीकात्मक तस्वीर)

भारत के खिलाफ हमेशा से नापाक इरादे रखने वाले पाकिस्तान के लिए ये बेहद ही शर्मिंदगी वाली बात है कि मलेशिया के क्‍वालालंपुर एयरपोर्ट पर विमान में बैठे यात्री और चालक दल दोनों को बेइज्‍जत करके उतार द‍िया गया। यह विमान कराची से मलेशिया पहुँचा था।

कंगाल पाकिस्तान को उसके ही दोस्त मलेशिया ने बड़ा झटका दे दिया है। मलेशिया ने पाकिस्तान को उसकी औकात दिखाते हुए PIA (पाकिस्‍तान इंटरनेशनल एयरलाइन्‍स) के एक बोईंग 777 यात्री विमान को जब्त कर लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान लीज पर लिया गया था और कर्ज की राशि न चुका पाने के कारण विमान को जब्त कर लिया गया है।

GEO न्यूज़ रिपोर्ट के अनुसार, पीआईए विमान को स्थानीय अदालत के आदेश के बाद जब्त किया गया। पीआईए ने 2015 में एक वियतनामी कंपनी से बोइंग -777 सहित दो विमानों को ड्राई लीज पर लिया है। विमान में 18 सदस्यीय स्टाफ मौजूद थे जोकि पाकिस्तान सरकार की हरकतों का खामियाजा भुगत रहे है और अब प्रोटोकॉल के अनुसार 14 दिनों के लिए सभी को क्वारंटीन किया जाएगा।

पाकिस्‍तान इंटरनैशनल एयरलाइन्‍स (PIA) ने ट्वीट कर पाकिस्तान की जनता को दूसरे देश में इस कदर हुई बेज्जती के बारे में जानकारी दी है। PIA ने लिखा, “पीआईए के एक विमान को मलेशिया में एक स्थानीय अदालत के आदेश पर जब्त कर लिया गया है, जोकि एक पक्षीय निर्णय PIA और ब्रिटेन की अदालत में लंबित एक अन्य पक्ष के बीच कानूनी विवाद से संबंधित है।” उन्होंने कहा कि यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था जल्द ही की जाएगी। 

हलाल घोटाला : दुनिया भर के मुस्लिमों को खिलाया घोड़े-कंगारू का मीट

                                                            हलाल के नाम पर दलाली!
बुजुर्गों का कहना था कि "कभी बाजार का पका मीट और कीमे से बनी चीजें नहीं खानी चाहिए।" जिसे 
मलेशिया में उजागर हुए हलाल घोटाले ने बुजुर्गों की शिक्षा को सार्थक सिद्ध कर दिया। अभी कोरोना कालखंड में तो कुत्ते का मीट बकरे के नाम पर 800 रूपए किलो बिक गया। मीट की दुकान पर बकरे का कटा सिर नहीं देखा, किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया कि जब लॉक डाउन में कत्लगाह बंद हैं, फिर ये मीट कहाँ से आ रहा है, और फिर कसाई के पास आखिर कितने बकरे हैं कि रोज मीट बेचा जा रहा है।  

मलेशिया को दुनिया का सबसे बड़ा हलाल एक्सपोर्टर बनना था। अब शायद दिक्कत आएगी! हलाल के नाम पर वहाँ के एक गैंग (कई कंपनियाँ भी हो सकती हैं शामिल) ने बहुत बड़ा घोटाला किया है। इससे दुनिया के न सिर्फ तमाम मुस्लिम देश बल्कि खुद मलेशिया की 60% मुस्लिम आबादी भी गुस्से में है।

न्यू स्ट्रेट टाइम्स के अनुसार मलेशिया यह गैंग पिछले 40 सालों से हलाल के नाम पर घोटाला करते आ रही थी। चीन, यूक्रेन और दक्षिण अमेरिका के गैर-हलाल बूचड़खानों से यह गैंग घोड़ों और कंगारूओं तक का मीट खरीदती थी। इसके बाद अधिकारियों को रिश्वत खिला कर उन्हें बीफ में मिला कर पूरी दुनिया के मुस्लिम देशों में सप्लाई करती थी।

मलेशिया की पुलिस ने इस मामले में अभी तक एक गिरफ्तारी की है। लेकिन कंपनी या किसी के नाम का खुलासा नहीं किया गया है। वहाँ की सरकार ने रॉयल कमिशन ऑफ इंक्वॉयरी का गठन करने पर भी विचार किया है, जिसे लेकर धार्मिक मामलों के मंत्री ने कहा कि यह इस तरह के अपराध की जड़ तक पहुँचने का सबसे जरूरी कदम होगा।

हलाल के नाम पर इस घोटाले के उजागर होने का मीट व्यापार पर इतना बड़ा असर पड़ा है कि कुआला लम्पुर के 6000 हॉकरों को बीफ संबंधी सामग्रियों को बेचने की मनाही की गई है। मलेशिया का यह गैंग इतना शातिर था कि जो कंपनियाँ सारे प्रोटोकॉल फॉलो करते हुए हलाल मीट प्रोसेस करती थी, उनमें भी यह मिलावट करते थे।

मिलावट का यह तरीका ही इनका यूनिक बिजनेस मॉडल था, जो 40 सालों तक चला। घोड़े-कंगारूओं के गैर-हलाल मीट को यह गैंग अकेले नहीं बेचता था। इससे पकड़े जाने का खतरा था। इसलिए ये गैर-हलाल मीट बंदरगाहों से अधिकारियों को रिश्वत देकर डायरेक्ट वेयरहाउस में लाया जाता था। यहाँ हलाल सर्टिफायड मीट और बीफ के साथ इन्हें मिक्स कर दिया जाता था। इसके बाद फेक हलाल लोगो वाले पैकेट में फिर से इन्हें पैक कर दुनिया भर के मुस्लिम देशों में भेजा जाता था।

हलाल का बिजनेस 2.3 ट्रिलियन डॉलर का है। मलेशिया फिलहाल अकेले 9 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट करता है।

हलाल मांस = जिहाद

किसी भी भोज्य पदार्थ, चाहे वे आलू के चिप्स क्यों न हों, को ‘हलाल’ तभी माना जा सकता है, जब उसकी कमाई में से एक हिस्सा ‘ज़कात’ में जाए- जिसे वे जिहादी आतंकवाद को पैसा देने के ही बराबर मानते हैं, क्योंकि हमारे पास यह जानने का कोई ज़रिया नहीं है कि ज़कात के नाम पर गया पैसा ज़कात में ही जा रहा है या जिहाद में। और जिहाद काफ़िर के खिलाफ ही होता है- जब तक यह इस्लाम स्वीकार न कर ले!

 यानी जब कोई गैर-मुस्लिम हलाल वाला भोजन खरीदता है, तो वह उसका एक हिस्सा अपने ही खिलाफ होने जा रहे जिहाद को आर्थिक सहायता देने में खर्च करता है। इसे ‘हलालो-नॉमिक्स’ यानी हलाल का अर्थशास्त्र कहते हैं। “हलालो-नॉमिक्स का अर्थ है आप अपनी सुपारी खुद दे रहे हैं।”

कपूर का वृक्ष

Image may contain: tree, sky, outdoor and natureआरती पूजा पाठ में कपूर का उपयोग वर्षो से होता आया है जो वातावरण को शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से युक्त बनाता है लेकिन कटते पेड़ो और अधिक लाभ की लालसा ने असली कपूर को दुर्लभ बना दिया हैIआज अधिकांश कपूर केमिकल्स युक्त है,कपूर एक विशालकाय,बहुवर्षायु लगभग सदावहार वृक्ष है,इसका वृक्ष एशिया के विभिन्न भागों में पाया जाता है, भारत, श्रीलंका,चीन,जापान,मलेशिया,कोरिया,ताइवान,इन्डोनेशिया आदि देशों में बहुतायत पाया जाता है,अन्य देशों में भी यहीं से ले जाया गया है,कपूर का वृक्ष 100 फीट से भी ऊँचे आकार का पाया जाता है,इसी तरह आयु में भी हजारों वर्ष पुराने वृक्ष पाये गये हैं,इसके पुष्प अति सुंदर सुगन्धित और मनमोहक फल तथा पत्तियाँ बरबस ही अपनी ओर आकृष्ट करते हैंI यही कारण है कि कहीं-कहीं इसे श्रृंगारिक वृक्ष के रुप में भी अपनाया गया है,पत्तियाँ बड़ी सुन्दर,चिकनी,मोमी, लालीमायुक्त हरापन लिए होती हैं,वसन्त ऋतु में छोटे-छोटे अति सुगन्धित फूल लगते हैं, इसके फल भी बड़े मोहक होते हैं। कपूर वृक्ष की लकड़ियाँ सुन्दर फर्नीचर के काम में भी लायी जाती हैं,जो काफी मजबूत और टिकाऊ होती हैं, प्रौढ़ पौधे से प्राप्त लकड़ियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट कर,तेज ताप पर उबाला जाता है....फिर वाष्पीकरण और शीतलीकरण विधि से रवादार कपूर का (crystalline substance )निर्माण होता हैI इसके अलावा अर्क और तेल भी बनाया जाता है जिसका प्रयोग प्रसाधन एवं औषधी कार्यों में बहुतायत होता है,आयुर्वेद में इसके अनेक औषधीय प्रयोगों का वर्णन है, अंग्रेजी और होमियोपैथी दवाइयों में भी कपूर का प्रयोग होता है, यह शीतवीर्य है,यानी ताशीर ठंढा है।भारतीय कर्मकांड और तन्त्र में तो कपूर रसाबसा है ही
कपूर की कज्जली और गौघृत से काजल भी बनाया जाता है जो बड़ा गुणकारी होता है।

Image may contain: flower, plant and nature, text that says 'कपूर के मोहक फल और अति सुगत्थित सफेद फूल'

मलेशिया और तुर्की को इस तरह से सबक सिखाने की तैयारी में है भारत!

Narendra Modi and Mahathir Mohamad
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  
मोदी सरकार से पूर्व भारत की सरकारें पाकिस्तान और उसके समर्थकों के विरुद्ध कोई कार्यवाही करने की बजाए डरती थी, कहीं उनका मुस्लिम वोटबैंक नाराज़ न हो जाए। पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित इस्लामिक आतंकवाद को "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" का नाम देकर उसे संरक्षण देते रहे, बेगुनाहों के खून से धरती लाल होती रही, लेकिन तुष्टिकरण पुजारी अपने वोटबैंक की सेवा में तल्लीन रहे। लेकिन सत्ता परिवर्तन की इच्छाशक्ति ने तुष्टिकरण पुजारियों को दरकिनार कर, देश की जनता को चैन से जीने का मार्ग सुगम किया। कल तक जो पाकिस्तान शेर बन भारतीय जनता को डरा रहा था, आज विश्व में अलग-थलग हो गया और भारत की सरकार ने पाकिस्तान का समर्थन कर रहे देशों के विरुद्ध अपनी कमर कस ली है।  
कश्मीर को लेकर नई दिल्ली की आलोचना करने वाले मलेशिया को भारत अब दूसरे तरीके से जवाब देने की तैयारी कर रहा है। समाचार एजेंसी रॉयटर के मुताबिक,भारत मलेशिया से पाम ऑयल (ताड़ के तेल) समेत कई उत्पादों के आयात पर रोक लगाने का फैसला कर सकता है।  भारत ताड़ के तेल के आयात को सीमित करने के उपायों की तलाश कर रहा है। एक उद्योग जगत के सूत्रों पाम ऑयल के अलाव कई अन्य उत्पादों के आयात पर भी रोक लग सकती है। सूत्रों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि इस प्रस्ताव पर अभी चर्चा चल रही है।
भारत ने इसी साल पांच अगस्त में कश्मीर के विशेष राज्य के प्रावधान वाले अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया था। मलेशियाई प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि भारत ने कश्मीर पर 'आक्रमण और कब्जा' किया है। उन्होंने नई दिल्ली को इस मुद्दे को हल करने के लिए पाकिस्तान के साथ काम करने को कहा था। मलेशिया के बयान पर भारत ने नाराजगी जताई थी।
भारत दुनिया में ताड़ के तेल का सबसे बड़ा आयातक देश है। ऐसे में यदि भारत मलेशिया से ताड़ के तेल (पाम ऑयल) का आयात  बंद करता है तो इससे मलेशिया के कारोबार पर बड़ा असर पड़ेगा। भारत इसके अलावा तुर्की से होने वाले आयातों पर भी रोक का फैसला हो सकता है।
भारत अब इंडोनेशिया, अर्जेंटीना और यूक्रेन जैसे देशों से खाद्य तेलों की आपूर्ति के साथ मलेशियाई पाम तेल का विकल्प तैयार करने की योजना बना रहा है। भारत में एडिबल ऑइल के कुल आयात में करीब दो तिहाई हिस्सा पाम ऑइल का है। इतना ही नहीं भारत सालाना 9 मिलियन टन से अधिक पाम ऑइल खरीदता है और इसका अधिकांश आयाता इंडोनेशिया और मलेशिया से होता है।
मलेशियाई पाम ऑयल बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, 2019 के पहले नौ महीनों में भारत मलेशियाई पाम ऑयल का सबसे बड़ा खरीदार था और उसने कुल 3.9 मिलियन टन पाम ऑयल का आयात किया था। वाणिज्य मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि मंत्रालय उन बातों पर टिप्पणी नहीं कर सकता है जो विचाराधीन हैं। वहीं मलेशिया के प्रधानमंत्री ने कहा है कि उन्हें अभी तक भारत से इस मामले पर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।

जाकिर नाइक द्वारा माफी माँगने पर मलेशिया के मंत्री बोले- मानहानि का मुकदमा करो

Zakir Naikमलेशियाई मानव संसाधन मंत्री एम. कुलसेगरन ने अगस्त 17 को विवादित धर्मगुरु जाकिर नाइक को उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने को कहा है। कुलसेगरन की टिप्पणी तब आई है, जब नाइक ने मलेशिया के मंत्री से उनके प्रति अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए माफी की मांग की थी। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि नाइक वर्तमान में जांच के घेरे में है और उसकी स्थायी निवासी की स्थिति को मलेशियाई सरकार द्वारा रद्द किया जा सकता है, यदि वह देश की भलाई के लिए हानिकारक साबित होती है।
इससे पहले अगस्त 16 को जाकिर नाईक ने एम कुलसेगरन की प्रेस रिलीज पर आपत्ति जताई थी, जिसका शीर्षक था 'जाकिर नाइक की उपस्थिति भारत में सभी मलेशियाई लोगों के लिए शर्मनाक है।' कुलसेगरन ने कहा था कि नाईक भगोड़ा है। भारत में उस पर गंभीर आरोप हैं। उसे मलेशिया के इतिहास के बारे में जानकारी नहीं है। उसे भारत को सौंप देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जाकिर जैसे लोग हमारे विविधता वाली संस्कृति में रहने के हकदार नहीं हैं। उसको स्थायी नागरिकता किसी भी शर्त पर नहीं दी जानी चाहिए।
 
वहीं मलेशिया की मीडिया का कहना है कि पुलिस ने उस शख्स को पकड़ा है जिसने जोहान का सिर कलम करने की धमकी दी थी, जो नागरिक स्वतंत्रता वकील और लिम किट सियांग के राजनीतिक सचिव हैं। जोहान ने मलेशियाई सरकार को जाकिर नाइक के मलेशियाई स्थायी निवासी दर्जा को वापस लेने का सुझाव दिया था।
 
तीन साल पहले जाकिर नाइक को मलेशिया में स्थाई निवासी का दर्जा मिला था लेकिन देश में अल्पसंख्यक जातीय चीनी और हिंदू आबादी को लेकर विवादित बयान देने के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
नाइक ने हाल ही में कहा था, 'भारत में मुसलमानों के मुकाबले हिंदुओं के पास 100 गुना ज्यादा अधिकार हैं, जो यहां अल्पसंख्यक श्रेणी में आते हैं। मलेशियाई हिंदू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करते हैं न कि मलेशिया के प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद का।'

मोदी सरकार का चीन सहित 4 देशों को बड़ा झटका

anti dumping duty-solar cell component- narendra modiभारत ने चीन सहित 4 देशों को एक साथ ऐसा झटका दिया है कि उन्हें 5 साल तक इसकी बड़ी कीमत चुकानी होगी। दरअसल भारत ने चीन, मलेशिया, सऊदी अरब और थाईलैंड से सोलर सेल बनाने में इस्तेमाल होने वाली एक खास शीट के आयात पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी (anti-dumping duty)  लगाई है। यह ड्यूटी प्रति टन 1,559 डॉलर तक लगाई गई है। इसका उद्देश्य घरेलू कंपनियों को सस्ते शिपमेंट की मार से राहत देना है। सरकार का यह फैसला 5 साल तक प्रभावी रहेगा। गौरतलब है कि चारों देशों में से चीन और सऊदी अरब को पाकिस्तान के मित्र देशों में गिना जाता है।
डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू ने जारी किया नोटिफिकेशन
डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू (Department of Revenue) ने एक नोटिफिकेशन में कहा कि कॉमर्स मिनिस्ट्री (commerce ministry) की जांच इकाई डीजीटीआर (DGTR) की सिफारिशों पर विचार के बाद इन चार देशों से ‘सोलर मॉड्यूल के लिए एथिलीन विनाइल एसिटेट शीट’ के आयात पर ड्यूटी लगाई जा रही है, जो 537 डॉलर से 1,559 डॉलर प्रति टन की रेंज में है।
चीन सहित 4 देश 5 साल तक चुकाएंगे कीमत
इसमें कहा गया, ‘एंटी-डंपिंग ड्यूटी 5 साल (या जब तक उसे खत्म नहीं किया जाता या उससे पहले संशोधन नहीं किया जाता) तक प्रभावी रहेगी।’ बीते साल अप्रैल में एक घरेलू कंपनी की शिकायत पर डायरेक्टोरेट ने इस मामले में जांच शुरू की थी। अपनी जांच में उसने पाया कि डम्पिंग के असर को कम करने के लिए ड्यूटी लगाया जाना जरूरी है। इससे चीन, मलेशिया, सऊदी अरब और थाईलैंड द्वारा की जा रही डम्पिंग का असर कम होगा। 
इस तरह बढ़ता जा रहा है आयात
यह प्रोडक्ट एक पॉलीमर बेस्ड कम्पोनेंट है, जिसे सोलर पीवी (फोटो वोल्टिक) मॉड्यूल्स की मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल किया जाता है। जांच की अवधि (अक्टूबर, 2016 से सितंबर, 2017 के बीच) के दौरान इन देशों से 6,376 टन शीट का आयात किया गया। वहीं वित्त वर्ष 2016-17 में यह आंकड़ा 4,674 टन, 2015-16 में 1,025 टन और 2014-15 में 594 टन रहा था।
भारतीय बाजार में है कई देशों की दिलचस्पी
भारत में वर्ष 2010 में जवाहरलाल नेहरु नेशनल सोलर मिशन के नाम से नेशनल सोलर पॉलिसी की लॉन्चिंग के बाद से सोलर इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले कम्पोनेंट का इम्पोर्ट तेजी से बढ़ा है। इसके अंतर्गत भारत का 2022 तक 20,000 मेगावाट सोलर पावर जेनरेशन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य है। भारत में तेजी से उभरते इस सेक्टर में सोलर इक्विपमेंट की सप्लाई करने में कई देशों की दिलचस्पी है।

सऊदी और मलेशिया छोड़ सकते हैं पाकिस्तान का साथ, निवेश से हट सकते हैं पीछे

Malaysia And Saudi Arabia May Step Back From Investing In Pakistan
भारतीय वायु सेना की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अब पाकिस्तान पर आर्थिक संकट गहराने वाला है। सऊदी अरब और मलेशिया पाकिस्तान में निवेश करने से पीछे हट सकते हैं। यह बात खुद इस्लामाबाद चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रेसिडेंट अहमद हसन मोघुल ने स्वीकारी है। उनके मुताबिक सऊदी, मलेशिया समेत कई देशों ने पाकिस्तान में निवेश करने की इच्छा जताई थी, लेकिन भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ रहे तनाव के चलते पाकिस्तान में इन देशों का निवेश रुक सकता है।

भारत ने लगाई थी 200 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी

पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से आने वाले सारे उत्पादों पर 200 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगाई थी। भारत ने पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा भी छीन लिया। इसके बाद से ही पाकिस्तानी बाजारों में हलचल मची हुई है। पाकिस्तान अब तक इसका कोई जवाब नहीं ढूंढ पाया है। पाकिस्तान के राजस्व मंत्री हम्माद अजहर ने कहा कि आगे क्या करना है इस बारे में सरकार सभी विकल्पों पर विचार कर रही है। 
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परेशानी में हैं व्यापारी

पाकिस्तानी व्यापारियों की परेशानी बढ़ती जा रही है। भारतीय व्यापारियों ने पाकिस्तान से सभी व्यापारिक संबंध खत्म करने का निर्णय ले लिया है। न तो पाकिस्तान से कुछ भारत आ रहा है और न भारत से कुछ वहां एक्सपोर्ट किया जा रहा है। ऐसे में पाकिस्तानी व्यापारियों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। इस्लामाबाद चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रेसिडेंट अहमद हसन मोघुल का कहना है कि, ‘दोनों देशों के बीच इस तनाव को भारत ही खत्म कर सकता है। भारत को ऐसी स्थितियां बनाने से बचना चाहिए जिससे दक्षिण एशिया में निवेश के मौके घटें और नौकरियों के अवसर कम हों।’