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सुशांत केस : गलत रिपोर्टिंग के लिए आजतक, ज़ी न्यूज़, इंडिया टीवी, न्यूज़ 24 ने NBSA की लताड़ के बाद सार्वजनिक तौर पर माँगी माफी

न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी (NBSA) ने इंडिया टुडे समूह के हिंदी भाषा समाचार चैनल आजतक, ज़ी न्यूज़, न्यूज़ 24 और इंडिया टीवी को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की असंवेदनशील और सनसनीखेज रिपोर्टिंग के लिए माफी माँगने का आदेश दिया था जिसका अब चैनलों ने अनुपालन किया है।

इस माफीनामा ने इन चैनलों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह जरूर लगा दिया है। वैसे पहले भी ज़ी न्यूज़ और आजतक बेनकाब हो चुके हैं, आजतक प्रसून वाजपेयी द्वारा अरविन्द केजरीवाल के सेटिंग वाले साक्षात्कार की वीडियो लीक और ज़ी न्यूज़ के सुधीर चौधरी द्वारा एक अध्यापिका के फेक स्टिंग चर्चा में रह चुके हैं। 

ब्रॉडकास्टिंग अथॉरिटी ने आजतक को 27 अक्टूबर को रात 8 बजे लाइव माफी माँगने का आदेश दिया था। हिंदी समाचार चैनल ने 28 अक्टूबर को रात 9 बजे के बाद अपनी माफी को प्रसारित किया। चैनल ने विशेष रूप से “ऐसे कैसे हिट विकेट हो गए सुशांत?” और “सुशांत जिंदगी की पिच पर हिट विकेट कैसे हो गए” जैसे टैगलाइन का उपयोग करने के लिए माफी माँगी।

चैनल ने कहा इन टैगलाइन से रिपोर्टिंग गाइडलाइन “किसी भी मृत व्यक्ति का सम्मान किया जाना चाहिए और उनकी मौत को सनसनीखेज नहीं बनाया जाना चाहिए” का उल्लंघन हुआ था। हालाँकि, उन्होंने ट्विट्स के लिए कोई माफ़ी नहीं माँगी, जो एनबीएसए के आदेश का हिस्सा था।

आजतक को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के खिलाफ फर्जी ट्वीट्स के लिए भी लताड़ा गया था। चैनल को तीन माफी माँगने और 1 लाख रुपए का जुर्माना देने का निर्देश दिया गया था।

अथॉरिटी ने कहा था,”ब्राडकॉस्टर को अपनी अनुमानित मेहनत और सत्यापन टेलकास्ट या ट्वीट अपलोड करने से पहले करनी चाहिए था, यह अनुमानित मेहनत पत्राकरिता की नैतिकता का मूल सिद्धांत व जरूरत है, वहीं बिना सत्यापन के ट्वीट को जनता के बीच टेलीकास्ट करना झूठी खबर फैलाने की प्रवृति है।”

इंडिया टुडे नेटवर्क के हिंदी न्यूज आउटलेट आजतक ने सुशांत सिंह राजपूत से जुड़ी कई ऐसी फर्जी खबरों को हवा दी थी। इसने 16 जून को दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के ‘अंतिम ट्वीट’ पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जब अभिनेता मुंबई में अपने घर में मृत पाए गए थे।

आजतक ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से एक आर्टिकल भी ट्वीट किया था। रिपोर्ट में आजतक ने दावा किया था कि अभिनेता ने अपनी जान लेने पहले तीन बार ट्वीट किया था।

समाचार चैनल ने कुछ भावनात्मक ‘ट्वीट’ साझा किए थे, जिनमें दिवंगत अभिनेता को कथित तौर पर अपनी खुद की जान लेने की ओर इशारा किया गया था। लेकिन उन फर्जी ट्वीट्स को उनकी मृत्यु से पहले अभिनेता द्वारा पोस्ट नहीं किया गया था। आजतक ने बाद में बिना स्पष्टीकरण के अपनी रिपोर्ट को वापस ले लिया था।

ज़ी न्यूज़ ने माँगी माफ़ी

एनबीएसए कोड के अन्य उल्लंघनों के बीच ज़ी न्यूज़ को भी असंवेदनशील टैग लाइन जैसे: ‘पटना का सुशांत, मुंबई में फेल क्यों?’ चलाने के लिए लताड़ा गया था। एनबीएसए ने चैनल को 27 अक्टूबर को माफी माँगने के लिए कहा था।

ज़ी न्यूज़ ने स्वीकार किया था कि उन्होंने अभिनेता की मृत्यु पर अपनी रिपोर्ट को सनसनीखेज बनाकर विशिष्ट दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया। माफ़ीनामे में कहा गया कि ‘दर्शकों के बीच घबराहट, संकट, या अनुचित भय’ पैदा हुआ है। माफी एनबीएसए के निर्देशों के अनुसार रात 9 बजे प्रसारित की गई थी।

ज़ी न्यूज़ की माफी का वीडियो शिकायतकर्ताओं में से एक सौरव दास ने अपने ट्विटर एकाउंट पर पोस्ट किया।

इन मीडिया हाउसेस के माफ़ी मांगने पर लोगों की प्रक्रियाएं:- 

इंडिया टीवी का माफीनामा

इसके अलावा इंडिया टीवी से कहा गया था कि वह राजपूत के नश्वर अवशेषों के चित्रों को बार-बार प्रसारित करने के लिए माफी माँगे और विस्तार से इसका वर्णन करें। यहाँ यह नोट करना उचित है कि ऑपइंडिया ने तब रिपोर्ट की थी कि कैसे इन वायरल छवियों को आत्महत्या के सिद्धांत को आगे बढ़ाने के लिए प्रसारित किया जा रहा है।

चैनल ने निर्धारित दिन 9 बजे यह स्वीकार करते हुए माफी माँगी कि उन्होंने विशिष्ट दिशानिर्देश कवरेज के खंड 3.6 का उल्लंघन किया है, जो बताते हैं कि,मृत का सम्मान के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए और मृत व्यक्ति के शव का
क्लोज़-अप या क्षत- विक्षत शव नहीं दिखाया जाना चाहिए।

न्यूज़ 24 को भी अथॉरिटी ने लताड़ा

इस बीच ऑथोरिटी ने न्यूज 24 को भी अभिनेता की मौत के असंवेदनशील और सनसनीखेज कवरेज के लिए 29 अक्टूबर को माफी माँगने का आदेश दिया है। अथॉरिटी ने कहा कि न्यूज 24 द्वारा चलाए गए टैगलाइन में यह संकेत देकर कि राजपूत ने अपनी फिल्म छिछोरे में उन्हीं के द्वारा दिए गए आत्महत्या विरोधी संदेश को भुला दिया, ‘आपत्तिजनक हैं और मृतक की गरिमा को प्रभावित करते हैं’

ऑथोरिटी ने अपने दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए किए गए कवरेज को लेकर चैनलों को दर्शकों से माफी माँगने के लिए कहा था। एनबीएसए ने 6 अक्टूबर को कहा था कि प्रसारणकर्ताओं को माफी का टेक्स्ट, तारीख और समय दिया जाएगा।

सुशांत के फेक ट्वीट पर NBSA का आदेश : AajTak पर 1 लाख रुपए जुर्माना और बड़े-बड़े अक्षरों में लिख कर और बोल कर Live माफी माँगे

सुशांत सिंह राजपूत मामले में फेक न्यूज़ चलाने के लिए ‘न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (NBSA)’ ने ‘आज तक’ न्यूज़ चैनल को निर्देश दिया है कि वो मंगलवार (अक्टूबर 27, 2020) को रात 8 बजे माफ़ी माँगे, और साथ ही 1 लाख रुपए का जुर्माना भी भरे। दरअसल, ‘आज तक’ ने सुशांत सिंह राजपूत की अंतिम ट्वीट्स बता कर फेक सामग्रियाँ दिखाई थीं। जून 20, 2020 को नीलेश नवलखा द्वारा की गई शिकायत पर कार्रवाई करते हुए NBSA ने ये निर्णय लिया।

‘आज तक’ चैनल को निर्देश दिया गया है कि वो टेक्स्ट के माध्यम से माफीनामे का प्रसारण करे। ‘आज तक’ को NBSA ने कहा है कि माफीनामे का ये टेक्स्ट बड़े फॉन्ट्स में होने चाहिए और साथ ही बैकग्राउंड में वॉयस ओवर के द्वारा धीरे-धीरे इस माफीनामे को पढ़ा जाना चाहिए। इसके अलावा उसे 1 लाख रुपए का जुर्माना भी भरना पड़ेगा। चैनल को माफ़ी माँगते हुए लाइव प्रसारण के दौरान निम्नलिखित टेक्स्ट को दिखाना और पढ़ना पड़ेगा:

“सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या से सम्बंधित घटनाओं पर रिपोर्टिंग के दौरान ‘आज तक’ चैनल ने कुछ ट्वीट्स दिखाए थे और उन ट्वीट्स को गलत तरीके से सुशांत सिंह राजपूत की अंतिम ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट्स करार दिया था। हमने उन्हें वास्तविक ट्वीट्स बताया था। ऐसा कर के हमने एक्यूरेसी से सम्बंधित ‘स्पेसिफिक गाइडलाइन्स कवरिंग रिपोर्टेज’ के अनुच्छेद-1 का उल्लंघन किया है। इस अनुच्छेद में कहा गया है कि सूचनाओं की एक से ज्यादा सोर्सेज से पुष्टि की जानी चाहिए। अगर समाचार एजेंसियों से कोई सूचना मिल रही है तो इसका जिक्र किया जाना चाहिए और संभव हो तो उसकी पुष्टि भी की जानी चाहिए। आरोपों को एक्यूरेसी के साथ पेश किया जाना चाहिए और फैक्ट्स में हुई गलतियों को जल्द से जल्द सुधारा जाना चाहिए।”

इसके अलावा ‘इंडिया टीवी’, ‘ज़ी न्यूज़’ और ‘न्यूज़ 24’ को भी सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में रिपोर्टिंग करते समय पत्रकारिता के सिद्धांतों का उल्लंघन के लिए माफ़ी माँगने को कहा गया है। नीलेश की तरफ से अधिवक्ता द्वय राजेश इनामदार और शाश्वत आनंद ने प्रतिनिधित्व किया। जहाँ ‘ज़ी न्यूज़’ और ‘इंडिया टीवी’ अक्टूबर 27 को माफ़ी माँगेंगे, वहीं ‘न्यूज़ 24’ अक्टूबर 29 को अपना माफीनामा पेश करेगा।

‘ज़ी न्यूज़’ ने ‘सुशांत की मौत पर 7 सवाल’ और ‘पटना का सुशांत मुंबई में फेल क्यों?’ जैसे टाइटल और टैगलाइन चलाए थे, जिसके बारे में NBSA ने कहा है कि किसी भी खबर को लोगों में डर या घबराहट का माहौल पैदा करने के लिए सनसनीखेज नहीं बनाया जाना चाहिए। वहीं ‘इंडिया टीवी’ ने उस नियम का उल्लंघन किया है, जिसमें क्षत-विक्षत शव या फिर किसी अन्य शव का काफी करीब से लिए गए फोटो या वीडियो नहीं दिखाए जाने चाहिए और मृत्यु के मामलों में सम्मान के साथ रिपोर्टिंग होनी चाहिए।

वहीं ‘न्यूज़ 24’ ने ‘सुशांत, आपने अपनी ही फिल्म क्यों नहीं देखी?’ और ‘जिस चीज के लिए आपने फिल्म में आवाज़ उठाई, उसे अपनी वास्तविक ज़िंदगी में भूल गए’ जैसे टैगलाइन के साथ खबरें चलाई थीं। बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म ‘छिछोरे’ में आत्महत्या की समस्या को उठाया गया था। NBSA ने उस नियम का हवाला दिया है, जिसके अनुसार, क्राइम की खबरें दिखाने के लिए उसके साथ ग्लैमर नहीं मिलाया जा सकता।

वहीं ‘एबीपी न्यूज़’ को भी इसकी कवरेज से सम्बंधित कुछ वीडियो हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा ‘न्यूज़ नेशन’ व अन्य खबरिया चैनलों को भी निर्देश दिया गया है कि जिन वीडियोज में उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत के मृत शरीर की तस्वीर दिखाई है, उन्हें हटाया जाना चाहिए। इन सभी चैनलों को माफ़ी माँगने और वीडियोज हटाने के बाद इसके सबूत NBSA को भेजने होंगे। NBSA ने BARC द्वारा 12 सप्ताह के लिए टीवी रेटिंग्स पर रोक लगाए जाने का भी स्वागत किया था।

आजतक ने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के कथित आखिरी ‘ट्वीट्स’ पर उनकी मौत के दो दिन बाद 16 जून को ख़बर प्रकाशित की थी। ‘आज तक’ ने यह लेख अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी साझा किया था। आजतक ने जो लिंक साझा किया था उसके भीतर इस बात का दावा किया गया था कि सुशांत ने कथित तौर पर आत्महत्या के संकेत दिए थे। बाद में बिना किसी प्रकार का स्पष्टीकरण दिए यह ख़बर (ट्वीट) हटा ली गई थी।

महाराष्ट्र : गृहमंत्री से सवाल पूछने पर रिपब्लिक के पत्रकार सोहेल को पीटकर मुंह से निकाला खून

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जिस तरह पालघर में साधुओं की हत्या, बॉलीवुड में ड्रग माफिया और सुशांत सिंह राजपूत की हत्या आदि को रिपब्लिक टीवी उछाल रहा है, उससे महाराष्ट्र सरकार इतनी बौखला कर उन कामों को अंजाम से रही है, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने संघ के अंग्रेजी दैनिक Motherland, Organiser Weekly और इन दोनों प्रकाशनों के मुख्य संपादक केवल रतन मलकानी के साथ भी नहीं किया। मुझसे वरिष्ठ पत्रकार और नेता इस बात से भलीभांति परिचित होंगे। आपातकाल को छोड़, इंदिरा गाँधी ने भी कभी अपनी घोर विरोधी प्रेस पर इतने प्रहार नहीं किए, जो आज महाराष्ट्र में एनसीपी और कांग्रेस की बैसाखियों पर चलने वाली उद्धव सरकार रिपब्लिक टीवी के साथ कर रही है। 

हैरानी इस बात पर होती है, कि Freedom of expression पर शोर मचाने वाला गैंग भी खामोश है, मानो उनके कानों में सीसा डाला हुआ है। क्या एनसीपी और कांग्रेस की बैसाखियों पर चलने वाली उद्धव सरकार और Freedom of expression पर शोर मचाने वाला गैंग देश से ड्रग्स माफिया को समाप्त करना नहीं चाहता? क्या इन्हीं लोगों की छत्रसाया में ड्रग माफिया फलफूल रहा है?

महाराष्ट्र में पूरी तरह आपातकाल की स्थिति है। उद्धव सरकार और पुलिस कानून की धज्जियां उड़ा रही हैं। जहां रिपब्लिक टीवी को परेशान करने के लिए मुंबई पुलिस तरह तरह के आदेश जारी कर रही है और हथकंडे अपना रही है, वहीं रिपब्लिक टीवी के कर्मचारियों पर हमले भी हो रहे हैं। महाराष्ट्र के गृहमंत्री से सवाल पूछने पर रिपब्लिक टीवी के पत्रकार सोहेल पर हमला किया गया। उनके साथ मारपीट की गई, जिससे उनके मुंह से खून निकलने लगा। किस कारण पत्रकार को पीटा गया? क्या पत्रकार चोर, डाकू अथवा कोई लुटेरा था, जो उसे इतनी बेदर्दी से पीटा गया? क्या महाराष्ट्र गृहमंत्री अपने साथ गुंडों की फौज लेकर चलती है, यदि नहीं तो फिर किस कारण इतना पीटा की खून निकलने लगे? अपने विरोधी प्रेस पर इतना अत्याचार तो इंदिरा गाँधी ने भी नहीं किया। 

महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख का काफिला जब निकल रहा था, उस समय रिपब्लिक टीवी के पत्रकार सोहेल अनिल देशमुख का बयान लेने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन पुलिस और अन्य लोग उन्हें रोकने की कोशिश कर रहे थे। आप वीडियो में देख सकते हैं कि किस तरह सोहेल को रोका जा रहा है। इस दौरान सोहेल के साथ मारपीट की गई, जिससे वे घायल हो गए।

TRP स्कैम में ‘Republic TV’ का नाम लेने के लिए गवाहों पर दबाव बना रही मुंबई पुलिस

TRP स्कैम का मुद्दा गर्माने के बाद से मुंबई पुलिस की भूमिका लगातार शक के घेरे में है। पहले इस बात का खुलासा हुआ कि मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में निराधार ही Republic TV का नाम पूरे घोटाले में लिया, जबकि दर्ज शिकायत में समाचार चैनल ‘इंडिया टुडे’ का नाम था, और अब ताजा खुलासे में यह पता चला है कि कैसे मुंबई पुलिस अपनी मनमर्जी से गवाह के बयान को तोड़-मरोड़ कर ‘Republic TV’ को इस पूरे घोटाले का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रही है।

‘ऑपइंडिया’ के पास आई एक कॉल रिकॉर्डिंग इस बात की पुष्टि करती है कि रिपब्लिक टीवी को फँसाने के लिए मुंबई पुलिस गवाहों पर भी दबाव बना रही है। जिस गवाह ने यह खुलासा आपने पड़ोसी के सामने किया है, उसके घर में एक बार-ओ-मीटर लगाया गया है।

ये रिकॉर्डिंग दो लोगों के बीच की है। पहला – जिसके घर ‘बार-ओ-मीटर’ लगाए और दूसरा- उसका पड़ोसी! गौरतलब है कि भारत में ब्रॉडकास्ट ऑडिएंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) 45 हजार से अधिक घरों में एक उपकरण लगाकर प्वाइंट की गिनती करता है। इस उपकरण को ‘बार ओ मीटर’ कहा जाता है।

ऑडियो में क्या है?

इसकी जानकारी देने से पहले बता दें कि ऑपइंडिया के पास यह रिकॉर्डिंग बेहद विश्वसनीय स्रोत्र के जरिए आई है। इससे मालूम पड़ रहा है कि व्यक्ति अपने परिवार व अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता में है क्योंकि कॉल रिकॉर्डिंग के अनुसार, मुंबई पुलिस उसके घर में रात 3:00 -3:30 बजे घुस गई। दोनों के बीच की बातचीत से स्पष्ट होता है कि मुंबई पुलिस ‘रिपब्लिक टीवी’ के खिलाफ बयान देने के लिए दबाव बना रही है, जिसके कारण गवाह अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर काफी डरा हुआ है। 

ऑडियो में पहला व्यक्ति अपने पड़ोसी को बताता है कि मुंबई पुलिस उनके घर में मशीन (बार ओ मीटर) की जानकारी जुटाने आई थी और उनसे कहा कि उन्होंने किसी को अरेस्ट किया है जिसने पूछताछ में उन लोगों का नाम लिया है। इसके बाद उन्होंने मशीन के बारे में पूछा। साथ ही ये भी जानना चाहा कि उन्हें पैसे कैसे मिलते हैं, उन्हें कौन पैसे देता है, और कहाँ से उन्हें पैसे मिलते हैं।

कॉल पर पड़ोसी से बात करते हुए व्यक्ति बेहद घबराया हुआ प्रतीत होता है और बार-बार कहता है कि 10-12 पुलिस वाले आए थे, अगर ऐसे ही आते रहे तो उसके आस पड़ोस के लोग क्या बोलेंगे। वह कहता है कि पुलिस ने उन्हें बताया कि गिरफ्तार हुए शख्स ने उसके परिवार का नाम लेकर कहा है कि उसने यहाँ 500 रुपए दिए हैं और 200 रुपए अकॉउंट में भेजे हैं। पड़ोसी को व्यक्ति ने यह भी बताया कि जब उसके घर में पुलिस आई तब वह ड्यूटी पर था और पुलिस उसके घरवालों से उससे जुड़ी सारी जानकारी लिख कर ले गई।

यहाँ पड़ोसी ने व्यक्ति को झूठ बोलने की सलाह दी कि वह बता दे कि वह कोई चैनल नहीं देखता उसे ढाई सौ रुपए भाड़े के मिलते हैं। हालाँकि घबराए व्यक्ति ने झूठ बोलने से साफ मना कर दिया और कहा कि जब गिरफ्तार हुआ युवक कह चुका है कि उसने पैसे दिए तो झूठ बोलने का कोई मतलब नहीं है।

इसके बाद, पड़ोसी ने पूछा कि क्या पुलिस ने उनसे यह भी पूछा कि वह कौन सा चैनल देखते हैं। इस पर पहले व्यक्ति ने कहा कि उसके घरवालों ने पुलिस को बताया कि ‘न्यूज नेशन’ पर स्कीम आई थी और उन्होंने उस स्कीम से खुद को जोड़ा, बाद में उन्हें सुविधा मिलने लगी।

इस पर पुलिस ने उन्हें कहा कि इस केस का ‘न्यूज नेशन’ से लेना देना नहीं है। इसमें इंडिया टुडे और रिपब्लिक भारत हैं। जिसे सुनकर व्यक्ति के बेटे ने कहा कि वो दोनों में से कोई चैनल नहीं देखते। जब उनके पिता घर पर होते हैं तो ही वह न्यूज नेशन देखते हैं।

फोन पर घबराई आवाज में व्यक्ति साफ कहता है कि पुलिस ने ‘रिपब्लिक भारत’ का नाम लिख लिया है। इस पर दूसरा व्यक्ति कहता है कि पुलिस ये सब उन्हें (अनुमान के मुताबिक रिपब्लिक टीवी) फँसाने के लिए कर रही है। इस पर व्यक्ति और ज्यादा चिंता में पड़ जाता है और कहता है कि पुलिस उसके ख़िलाफ़ भी झूठे आरोप लगा देगी।

ऑडियो में एक जगह पड़ोसी घबराए व्यक्ति को यह भी सलाह देता है कि अगर उनके घर 20 पुलिसकर्मी भी आए होते तो उन्हें बताना चाहिए था कि रिपब्लिक भारत उन्हें पैसे नहीं देता। आगे पड़ोसी बताता है कि महाराष्ट्र सरकार रिपब्लिक भारत के ख़िलाफ़ है और उसी के लिए कुछ सबूत ढूँढने का प्रयास कर रही है। वह लोग (बार ओर मीटर वाले घर के लोग) तो बस ग्राहक हैं। उसने कहा कि अगर कोई उन्हें पैसे देगा तो उन्हें उनके चैनल को देखने में भी दिक्कत नहीं होगी। 

ध्यान देने वाली बात है कि अभी तक की बातचीत से साफ पता चल रहा है कि ‘न्यूज नेशन’ व्यक्ति के घरवालों को पैसे देता था, रिपब्लिक भारत नहीं। इसके अलावा, व्यक्ति यह भी कहता है कि जरूर पुलिस ने गिरफ्तार हुए आदमी को पीटा होगा।

व्यक्ति बताता है कि 10-12 पुलिसकर्मी उसके घर में आए थे और 5-6 बाहर खड़े थे। उन लोगों ने पहले ही अपने कागज पर ‘आर भारत’ का नाम लिखा था। वह चिंता व्यक्त करता है कि आज पुलिस का एक विभाग आया है कल को दूसरा विभाग दरवाजे पर आएगा। ऐसे तो आस पास के लोग उसे जगह खाली करने को कह देंगे।

सारी बात सुनकर पड़ोसी कहता है कि महाराष्ट्र पुलिस केवल रिपब्लिक भारत के ख़िलाफ़ केस बनाना चाह रही है। वहीं, व्यक्ति किसी भी प्रकार के ‘लफड़े’ को लेकर, कोर्ट कचहरी को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करता है। साथ ही कहता है कि उसकी पत्नी घर में अकेले रहती है वो क्या बात कर पाएगी पुलिस वालों से?

गौरतलब है कि इस ऑडिया रिकॉर्डिंग में जिस शख्स की गिरफ्तारी की बात हो रही है और जिसके बयान के आधार पर पुलिस व्यक्ति के घर पहुँची, उसका नाम उमेश हैं। ऑपइंडिया ने यह मामला सामने आने के बाद उमेश के वकील गिरी को सम्पर्क किया। वकील ने बताया कि उमेश का संबंध कॉल वाले व्यक्ति से है। हालाँकि, जब हमने ऑडियो की प्रमाणिकता और उसमें हो रही बातचीत पर सवाल किए तो उन्होंने कहा कि ये मामला अभी उपन्यायिक है इसलिए इसकी प्रमाणिकता पर कुछ कहना उचित नहीं है। (एजेंसीज इनपुट्स सहित)