Showing posts with label drug mafia. Show all posts
Showing posts with label drug mafia. Show all posts

महाराष्ट्र : गृहमंत्री से सवाल पूछने पर रिपब्लिक के पत्रकार सोहेल को पीटकर मुंह से निकाला खून

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जिस तरह पालघर में साधुओं की हत्या, बॉलीवुड में ड्रग माफिया और सुशांत सिंह राजपूत की हत्या आदि को रिपब्लिक टीवी उछाल रहा है, उससे महाराष्ट्र सरकार इतनी बौखला कर उन कामों को अंजाम से रही है, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने संघ के अंग्रेजी दैनिक Motherland, Organiser Weekly और इन दोनों प्रकाशनों के मुख्य संपादक केवल रतन मलकानी के साथ भी नहीं किया। मुझसे वरिष्ठ पत्रकार और नेता इस बात से भलीभांति परिचित होंगे। आपातकाल को छोड़, इंदिरा गाँधी ने भी कभी अपनी घोर विरोधी प्रेस पर इतने प्रहार नहीं किए, जो आज महाराष्ट्र में एनसीपी और कांग्रेस की बैसाखियों पर चलने वाली उद्धव सरकार रिपब्लिक टीवी के साथ कर रही है। 

हैरानी इस बात पर होती है, कि Freedom of expression पर शोर मचाने वाला गैंग भी खामोश है, मानो उनके कानों में सीसा डाला हुआ है। क्या एनसीपी और कांग्रेस की बैसाखियों पर चलने वाली उद्धव सरकार और Freedom of expression पर शोर मचाने वाला गैंग देश से ड्रग्स माफिया को समाप्त करना नहीं चाहता? क्या इन्हीं लोगों की छत्रसाया में ड्रग माफिया फलफूल रहा है?

महाराष्ट्र में पूरी तरह आपातकाल की स्थिति है। उद्धव सरकार और पुलिस कानून की धज्जियां उड़ा रही हैं। जहां रिपब्लिक टीवी को परेशान करने के लिए मुंबई पुलिस तरह तरह के आदेश जारी कर रही है और हथकंडे अपना रही है, वहीं रिपब्लिक टीवी के कर्मचारियों पर हमले भी हो रहे हैं। महाराष्ट्र के गृहमंत्री से सवाल पूछने पर रिपब्लिक टीवी के पत्रकार सोहेल पर हमला किया गया। उनके साथ मारपीट की गई, जिससे उनके मुंह से खून निकलने लगा। किस कारण पत्रकार को पीटा गया? क्या पत्रकार चोर, डाकू अथवा कोई लुटेरा था, जो उसे इतनी बेदर्दी से पीटा गया? क्या महाराष्ट्र गृहमंत्री अपने साथ गुंडों की फौज लेकर चलती है, यदि नहीं तो फिर किस कारण इतना पीटा की खून निकलने लगे? अपने विरोधी प्रेस पर इतना अत्याचार तो इंदिरा गाँधी ने भी नहीं किया। 

महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख का काफिला जब निकल रहा था, उस समय रिपब्लिक टीवी के पत्रकार सोहेल अनिल देशमुख का बयान लेने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन पुलिस और अन्य लोग उन्हें रोकने की कोशिश कर रहे थे। आप वीडियो में देख सकते हैं कि किस तरह सोहेल को रोका जा रहा है। इस दौरान सोहेल के साथ मारपीट की गई, जिससे वे घायल हो गए।

TRP स्कैम में ‘Republic TV’ का नाम लेने के लिए गवाहों पर दबाव बना रही मुंबई पुलिस

TRP स्कैम का मुद्दा गर्माने के बाद से मुंबई पुलिस की भूमिका लगातार शक के घेरे में है। पहले इस बात का खुलासा हुआ कि मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में निराधार ही Republic TV का नाम पूरे घोटाले में लिया, जबकि दर्ज शिकायत में समाचार चैनल ‘इंडिया टुडे’ का नाम था, और अब ताजा खुलासे में यह पता चला है कि कैसे मुंबई पुलिस अपनी मनमर्जी से गवाह के बयान को तोड़-मरोड़ कर ‘Republic TV’ को इस पूरे घोटाले का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रही है।

‘ऑपइंडिया’ के पास आई एक कॉल रिकॉर्डिंग इस बात की पुष्टि करती है कि रिपब्लिक टीवी को फँसाने के लिए मुंबई पुलिस गवाहों पर भी दबाव बना रही है। जिस गवाह ने यह खुलासा आपने पड़ोसी के सामने किया है, उसके घर में एक बार-ओ-मीटर लगाया गया है।

ये रिकॉर्डिंग दो लोगों के बीच की है। पहला – जिसके घर ‘बार-ओ-मीटर’ लगाए और दूसरा- उसका पड़ोसी! गौरतलब है कि भारत में ब्रॉडकास्ट ऑडिएंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) 45 हजार से अधिक घरों में एक उपकरण लगाकर प्वाइंट की गिनती करता है। इस उपकरण को ‘बार ओ मीटर’ कहा जाता है।

ऑडियो में क्या है?

इसकी जानकारी देने से पहले बता दें कि ऑपइंडिया के पास यह रिकॉर्डिंग बेहद विश्वसनीय स्रोत्र के जरिए आई है। इससे मालूम पड़ रहा है कि व्यक्ति अपने परिवार व अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता में है क्योंकि कॉल रिकॉर्डिंग के अनुसार, मुंबई पुलिस उसके घर में रात 3:00 -3:30 बजे घुस गई। दोनों के बीच की बातचीत से स्पष्ट होता है कि मुंबई पुलिस ‘रिपब्लिक टीवी’ के खिलाफ बयान देने के लिए दबाव बना रही है, जिसके कारण गवाह अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर काफी डरा हुआ है। 

ऑडियो में पहला व्यक्ति अपने पड़ोसी को बताता है कि मुंबई पुलिस उनके घर में मशीन (बार ओ मीटर) की जानकारी जुटाने आई थी और उनसे कहा कि उन्होंने किसी को अरेस्ट किया है जिसने पूछताछ में उन लोगों का नाम लिया है। इसके बाद उन्होंने मशीन के बारे में पूछा। साथ ही ये भी जानना चाहा कि उन्हें पैसे कैसे मिलते हैं, उन्हें कौन पैसे देता है, और कहाँ से उन्हें पैसे मिलते हैं।

कॉल पर पड़ोसी से बात करते हुए व्यक्ति बेहद घबराया हुआ प्रतीत होता है और बार-बार कहता है कि 10-12 पुलिस वाले आए थे, अगर ऐसे ही आते रहे तो उसके आस पड़ोस के लोग क्या बोलेंगे। वह कहता है कि पुलिस ने उन्हें बताया कि गिरफ्तार हुए शख्स ने उसके परिवार का नाम लेकर कहा है कि उसने यहाँ 500 रुपए दिए हैं और 200 रुपए अकॉउंट में भेजे हैं। पड़ोसी को व्यक्ति ने यह भी बताया कि जब उसके घर में पुलिस आई तब वह ड्यूटी पर था और पुलिस उसके घरवालों से उससे जुड़ी सारी जानकारी लिख कर ले गई।

यहाँ पड़ोसी ने व्यक्ति को झूठ बोलने की सलाह दी कि वह बता दे कि वह कोई चैनल नहीं देखता उसे ढाई सौ रुपए भाड़े के मिलते हैं। हालाँकि घबराए व्यक्ति ने झूठ बोलने से साफ मना कर दिया और कहा कि जब गिरफ्तार हुआ युवक कह चुका है कि उसने पैसे दिए तो झूठ बोलने का कोई मतलब नहीं है।

इसके बाद, पड़ोसी ने पूछा कि क्या पुलिस ने उनसे यह भी पूछा कि वह कौन सा चैनल देखते हैं। इस पर पहले व्यक्ति ने कहा कि उसके घरवालों ने पुलिस को बताया कि ‘न्यूज नेशन’ पर स्कीम आई थी और उन्होंने उस स्कीम से खुद को जोड़ा, बाद में उन्हें सुविधा मिलने लगी।

इस पर पुलिस ने उन्हें कहा कि इस केस का ‘न्यूज नेशन’ से लेना देना नहीं है। इसमें इंडिया टुडे और रिपब्लिक भारत हैं। जिसे सुनकर व्यक्ति के बेटे ने कहा कि वो दोनों में से कोई चैनल नहीं देखते। जब उनके पिता घर पर होते हैं तो ही वह न्यूज नेशन देखते हैं।

फोन पर घबराई आवाज में व्यक्ति साफ कहता है कि पुलिस ने ‘रिपब्लिक भारत’ का नाम लिख लिया है। इस पर दूसरा व्यक्ति कहता है कि पुलिस ये सब उन्हें (अनुमान के मुताबिक रिपब्लिक टीवी) फँसाने के लिए कर रही है। इस पर व्यक्ति और ज्यादा चिंता में पड़ जाता है और कहता है कि पुलिस उसके ख़िलाफ़ भी झूठे आरोप लगा देगी।

ऑडियो में एक जगह पड़ोसी घबराए व्यक्ति को यह भी सलाह देता है कि अगर उनके घर 20 पुलिसकर्मी भी आए होते तो उन्हें बताना चाहिए था कि रिपब्लिक भारत उन्हें पैसे नहीं देता। आगे पड़ोसी बताता है कि महाराष्ट्र सरकार रिपब्लिक भारत के ख़िलाफ़ है और उसी के लिए कुछ सबूत ढूँढने का प्रयास कर रही है। वह लोग (बार ओर मीटर वाले घर के लोग) तो बस ग्राहक हैं। उसने कहा कि अगर कोई उन्हें पैसे देगा तो उन्हें उनके चैनल को देखने में भी दिक्कत नहीं होगी। 

ध्यान देने वाली बात है कि अभी तक की बातचीत से साफ पता चल रहा है कि ‘न्यूज नेशन’ व्यक्ति के घरवालों को पैसे देता था, रिपब्लिक भारत नहीं। इसके अलावा, व्यक्ति यह भी कहता है कि जरूर पुलिस ने गिरफ्तार हुए आदमी को पीटा होगा।

व्यक्ति बताता है कि 10-12 पुलिसकर्मी उसके घर में आए थे और 5-6 बाहर खड़े थे। उन लोगों ने पहले ही अपने कागज पर ‘आर भारत’ का नाम लिखा था। वह चिंता व्यक्त करता है कि आज पुलिस का एक विभाग आया है कल को दूसरा विभाग दरवाजे पर आएगा। ऐसे तो आस पास के लोग उसे जगह खाली करने को कह देंगे।

सारी बात सुनकर पड़ोसी कहता है कि महाराष्ट्र पुलिस केवल रिपब्लिक भारत के ख़िलाफ़ केस बनाना चाह रही है। वहीं, व्यक्ति किसी भी प्रकार के ‘लफड़े’ को लेकर, कोर्ट कचहरी को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करता है। साथ ही कहता है कि उसकी पत्नी घर में अकेले रहती है वो क्या बात कर पाएगी पुलिस वालों से?

गौरतलब है कि इस ऑडिया रिकॉर्डिंग में जिस शख्स की गिरफ्तारी की बात हो रही है और जिसके बयान के आधार पर पुलिस व्यक्ति के घर पहुँची, उसका नाम उमेश हैं। ऑपइंडिया ने यह मामला सामने आने के बाद उमेश के वकील गिरी को सम्पर्क किया। वकील ने बताया कि उमेश का संबंध कॉल वाले व्यक्ति से है। हालाँकि, जब हमने ऑडियो की प्रमाणिकता और उसमें हो रही बातचीत पर सवाल किए तो उन्होंने कहा कि ये मामला अभी उपन्यायिक है इसलिए इसकी प्रमाणिकता पर कुछ कहना उचित नहीं है। (एजेंसीज इनपुट्स सहित)

क्या एडिटर्स गिल्ड के चीफ शेखर गुप्ता पत्रकार बिरादरी के खिलाफ काम कर रहे हैं?

क्या एडिटर्स गिल्ड के चीफ शेखर गुप्ता पत्रकार बिरादरी के खिलाफ काम कर रहे हैं? यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि क्योंकि आज जब कुछ लोग पत्रकारों की अभिव्यक्ति की आजादी पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहे हैं, तब शेखर गुप्ता पत्रकारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने के बजाय विरोधी पक्ष के साथ खड़े हैं।

अक्टूबर 5 को बॉलीवुड के प्रमुख निर्माताओं ने फिल्म जगत की छवि बिगाड़ने का आरोप लगाकर रिपब्लिक टीवी और टाइम्स नाउ न्यूज चैनल और चार पत्रकारों के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर किया। चार पत्रकारों में रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी और पत्रकार प्रदीप भंडारी, टाइम्स नाउ के प्रधान संपादक राहुल शिवशंकर और समूह संपादक नविका कुमार शामिल हैं। याचिका में बॉलीवुड को लेकर गैर जिम्मेदाराना, अपमानजनक और बदनाम करने वाली बयानबाजी और मीडिया ट्रायल्स करने से रोकने की अपील की गई है। याचिका दायर करने वालों में चार फिल्म इंडस्ट्री एसोसिएशनों के साथ आमिर खान, शाहरुख खान, सलमान खान, करण जौहर, अजय देवगन, अनिल कपूर, रोहित शेट्टी के प्रोडक्शन हाउस भी शामिल हैं।

फिल्म निर्माताओं की ओर से दायर ये याचिका पत्रकारों को खबर तक पहुंच और आम लोगों तक जानकारी को पहुंचाने से रोकने के लिए हैं। ऐसे में एडिटर्स गिल्ड की जिम्मेदारी कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है कि सभी पत्रकार एक साथ आकर इस तरह के कदम को विरोध करें, लेकिन एडिटर्स गिल्ड के चीफ शेखर गुप्ता खुद पत्रकारों की जगह बॉलीवुड के समर्थन में आगे आ गए हैं। शेखर गुप्ता ने ट्वीट किया, “झूठे इल्जामों के खिलाफ सामूहिक कानूनी कार्रवाई बॉलीवुड के लिए एक टर्निंग प्वाइंट हो सकती हैं। इससे ‘उद्योग’ को एक संस्था की तरह देखने की हिम्मत मिलेगी और एक संस्था में हमेशा रीढ़ होनी चाहिए।”

शेखर गुप्ता का ट्वीट पोस्ट होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें लताड़ लगानी शुरू कर दी।

कहते हैं अगर व्यक्ति सकारात्मक सोंच रखता है, वह किसी बुराई से भी सकारात्मक शब्द निकालने में समर्थ होता, परन्तु नकारात्मक सोंच वाले को सकारात्मक में भी नकारात्मक ही हाथ लगता है। जिसे चरितार्थ कर रहे हैं कांग्रेस के पूर्व केन्द्रीय मंत्री मनीष तिवारी, जो अपने अनुभव अपने ट्वीट में बता रहे हैं। यानि जो जैसा होता है सामने वाले को भी वैसा ही समझता है। जिस तरह इन्होंने अपने यूपीए कार्यकाल में मीडिया को अपने कब्जे में कर, इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने बेगुनाह हिन्दू साधु-संतों को जेलों में डाल रहे थे। इन्हीं के तत्कालीन गृह मंत्री सुशील शिंदे "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" नाम से हिन्दू होते हुए हिन्दू धर्म को अपमानित कर रहे थे। चलो देर आए दुरुस्त आए, सच्चाई कबूल दी।   


दीपिका पादुकोण ने जब पति रणवीर सिंह को कहा था ‘सुपर ड्रग’

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 

कहते हैं कि पत्रकारिता और फिल्में समाज का आईना होते हैं, जिसे यदा-कदा चरितार्थ भी किया जाता रहा है, लेकिन सरकार और केंद्रीय तंत्र आँखें मूंदे रहे, विपरीत इसके शिकायत करने वाले को इस ड्रग गिरोह की धमकियों का सामना करना पड़ता है। 

80 और 90 के दशक में अभिनेता, निर्माता-निर्देशक देव आनद की सदाबहार फिल्म "हरे कृष्णा हरे राम" के अलावा "नशा" आदि कई फिल्में प्रदर्शित हुई थीं, लेकिन किसी भी सरकार एवं राजनीतिक दल ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, उसी का कारण है कि ड्रग माफिया बॉलीवुड में भी अपना आसन जमा चुका है। परन्तु एक प्रश्न राष्ट्र जानना चाहता है कि आखिर चरस, अफीम, गांजा, कोकीन, स्मैक और हीरोइन आदि किस रास्ते भारत में आती हैं? हमारी सुरक्षा एजेंसीज और अन्य सीमा सुरक्षा दल क्या करती हैं? आज स्थिति इतनी भयानक हो गयी है कि गली-गली में इस्तेमाल हो रही है। भिखारी तक इस्तेमाल कर रहे हैं। दिल्ली के जमुना बाजार में पुल के नीचे इन नशेड़ियों को देखा जा सकता है। जहाँ बनी पुलिस बीट को जब देखा बंद ही देखा। क्या स्थानीय पुलिस को नहीं मालूम? दूसरे, स्थानीय पुलिस तो बाद में आती है, उससे पहले केन्द्रीय सुरक्षा का दायित्व है, इस विषम ड्रग के भारत में वितरित होने के जवाब देने का। हमारे युवा दिनों में यदि भांग खुलेआम उपलब्ध थी लेकिन कोकीन के लिए लाइसेंस बनता था। बिना परमिट के कोकीन बेचना अपराध था। परन्तु आज इस नशे के व्यापार में केंद्रीय स्तर से लेकर स्थानीय स्तर तक मालामाल हो रहे हैं, उन पर कार्यवाही कब? बॉलीवुड तो केवल एक झांकी है। सरकार को उन तत्वों को भी आखिर दुबई और पाकिस्तान से ड्रग किस तरह और किन लोगों के कारण भारत में आती है। 

सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में रिया चक्रवर्ती से पूछताछ के बाद ड्रग कनेक्शन में कई बॉलीवुड स्टार के नाम सामने आ रहे हैं। सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह और श्रद्धा कपूर के बाद अब दीपिका पादुकोण के नाम ने सभी को चौंका दिया है।

दीपिका पादुकोण अपनी मैनेजर करिश्मा के साथ एक चैट में पूछ रही हैं ‘माल है क्या’। इस चैट का खुलासा होने के बाद सोशल मीडिया पर दीपिका को ट्रोल किया जा रहा है।

इस बीच इंस्टाग्राम पर दीपिका पादुकोण का एक पुराना पोस्ट वायरल हो रहा है। इस पोस्ट में दीपिका ने अपने पति रणवीर सिंह को अपना सुपर ड्रग कहा था। इंस्टाग्राम पर 19 नवंबर 2019 को शेयर इस पोस्ट में रणवीर सिंह की टी-शर्ट पर लिखा था, लव इज ए सुपर पावर’ यानी ‘प्यार एक सुपर पॉवर है’। दीपिका ने इस तस्वीर के कैप्शन में लिखा था, ‘और तुम… मेरा सुपर ड्रग हो।’ अब ड्रग मामले में दीपिका का नाम आने के बाद ये तस्वीर वायरल हो रही है।

बॉलीवुड ड्रग मामले में नाम आने के बाद ट्रोल हो रहीं 

सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले के बाद सामने आए ड्रग कनेक्शन में अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का भी नाम आ रहा है। दीपिका की अपनी मैनेजर करिश्मा प्रकाश के बीच ड्रग चैट का खुलासा होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स उन्हें जमकर ट्रोल कर रहे हैं। ट्विटर पर #चरसी_दीपिका_पादुकोण ट्रेंड कर रहा है। यूजर्स उनकी फिल्मों के सीन और डायलॉग पर आधारित मीम्स भी शेयर कर रहे हैं।