Showing posts with label drugs. Show all posts
Showing posts with label drugs. Show all posts

केरल : ड्रग्स में डूबी है मलयालम फिल्म इंडस्ट्री, नशे में धुत अभिनेताओं पर बैन; पुलिस के पहरे में शूटिंग

एक्टर शेन निगम पर केरल फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने बैन लगा दिया है (फोटो साभारः peepingmoon.com)
मलयालम फिल्म इंडस्ट्री काफी समय से विवादों में है। इसका कारण ड्रग्स के बढ़ते मामले हैं। इंडस्ट्री में काम करने वालों कलाकारों ने खुद इसका खुलासा किया है। उनके मुताबिक, मलयालम सिनेमा में नशीली दवाओं का उपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा है। कुछ दिन पहले फिल्म के सेट पर एक्टर्स शेन निगम (Shane Nigam) और श्रीनाथ भासी (Sreenath Bhasi) को नशे में धुत पाया गया, जिसके बाद ‘द फिल्म एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ केरल’ (एफईएफकेए)’ और ‘केरल फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन’ ने इन दोनों को 25 अप्रैल 2023 को बैन कर दिया। अब दोनों अभिनेता भविष्य में किसी भी प्रोजेक्ट पर काम नहीं कर सकेंगे। लेकिन उन्हें पहले से साइन किए गए सभी कार्यों को पूरा करना होगा।

जाने-माने फिल्म निर्माता एम रंजीत ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि दोनों अभिनेता ड्रग्स के नशे में फिल्म के सेट पर आते थे। इसके अलावा एक्टर्स पर अभद्र व्यवहार करने समेत सेट पर देर से आने, शेड्यूल के मुताबिक काम नहीं करने और स्पॉट एडिट की माँग करने के आरोप लगाए गए हैं। केरल फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (KFPA) ने घोषणा की है कि वे शेन निगम और श्रीनाथ भासी के साथ और कॉपरेट नहीं कर सकते हैं। इसके चलते अब से फिल्म की शूटिंग के सभी लोकेशन्स पर पुलिस मौजूद रहेगी।

शेन निगम और श्रीनाथ भासी की खबर वायरल होने के बाद कई अन्य अभिनेताओं और निर्माताओं ने फिल्म के सेट पर बड़े पैमाने पर ड्रग्स के इस्तेमाल पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। निर्माता सैंड्रा थॉमस ने 3 मई 2023 को सिनेमा एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में बताया, “यह सच है कि मलयालम सिनेमा में ड्रग्स का उपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा है। अब समय आ गया है कि हम इसे कंट्रोल करें, क्योंकि इसके साथ बहुत सारे मुद्दे जुड़े हुए हैं। जो लोग ड्रग्स का सेवन करते हैं उन्हें रात में नींद नहीं आती है, इसलिए उन्हें शूट के लिए हमेशा देर हो जाती है। हम यह भी नहीं जानते कि वे कब शांत हो जाते हैं। वे हमारी सभी बातों पर हामी भरेंगे, लेकिन उसे सुनेंगे नहीं। डेट ही भूल जाते हैं, जिसका खामियाजा निर्माता को भुगतना पड़ता है।”

वहीं ​बीते दिनों काम के दौरान ड्रग्स लेने वाले इन दोनों अभिनेताओं का नाम सामने आने के बाद हास्य अभिनेता टिनी टॉम ने कहा कि इंडस्ट्री में ड्रग्स के सेवन के जोखिम के कारण वह और उनकी पत्नी नहीं चाहते हैं कि उनका बेटा मलयालम सिनेमा में काम करे। ध्यान दें कि एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स (एएमएमए) के महासचिव एडावेला बाबू ने सबसे पहले इस विवाद के बारे में खुलासा किया था। उन्होंने हाल ही में एक बयान दिया कि वे केरल सरकार को उन अभिनेताओं की एक सूची देंगे, जो ड्रग्स के नशे में काम करते हैं।

इससे पहले सितंबर 2022 में केरल फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (KFPA) ने मलयालम अभिनेता श्रीनाथ भासी पर एक यूट्यूब चैनल को दिए साक्षात्कार के दौरान एक महिला एंकर के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप में फिल्मों से अस्थायी रूप से बैन लगाने का फैसला किया था।

पश्चिम बंगाल : युवाओं द्वारा नशे के लिए हो रहा कंडोम का इस्तेमाल

एक समय था जब महीने में 3/4 दिन शराब की दुकाने बंद होने के कारण नशेड़ी स्प्रिट और नींद की गोलियों आदि का इस्तेमाल करते थे, लेकिन आज जब ऐसी कोई बात न होने पर नशेड़ियों द्वारा नशे के लिए कंडोम का इस्तेमाल करने का बहुत ही चौकाने वाला समाचार है।  
सामान्यतया कंडोम का इस्तेमाल सुरक्षित यौन संबंधों के लिए किया जाता है, लेकिन पश्चिम बंगाल से इसके जरिए नशा करने का मामला सामने आया है। अचानक से कंडोम की बड़ी माँग ने प्रशासन को चिंता में डाल दिया है। स्थिति ये है कि दुर्गापुर शहर में मेडिकल स्टोर्स पर कंडोम आते ही खत्म हो जा रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, दुर्गापुर जिले के सिटी सेंटर, बेनाचिती, मुचिपारा, बिधाननगर, सी जोन, ए जोन में कुछ लोग धड़ल्ले से फ्लेवर्ड कंडोम खरीद रहे हैं। जब एक दुकानदार ने इसके बारे में जानने की कोशिश की तो पता चला कि नशे के लिए कंडोम का इस्तेमाल किया जा रहा है। दुकानदारों का कहना है कि पहले प्रतिदिन केवल 3-4 कंडोम ही बिकते थे, लेकिन अब तो एक झटके में सभी बिक जा रहे हैं।

कैसे होता है कंडोम से नशा 

कंडोम से नशे की एक प्रक्रिया है। इसको लेकर दुर्गापुर मंडल में काम करने वाले धीमान मंडल बताते हैं कि कंडोम में कुछ महकने वाले यौगिक पाए जाते हैं, लेकिन जब एल्कोहल तैयार करने के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता है तो ये टूट जाता है। इसके इस्तेमाल से नशा जैसा महसूस होता है। ये लोगों को लती बनाने के लिए काफी होते हैं। धीमान के मुताबिक, डेंड्राइट में भी यही सुगन्धित पदार्थ पाया जाता है, इसलिए कई लोग उसका भी नशे के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।

दुर्गापुर आरई मेडिकल कॉलेज स्कूल के केमिस्ट्री विभाग के शिक्षक नूरुल हक के मुताबिक, कंडोम को गर्म पानी में लंबे समय तक भिगोकर रखने से इसमें मौजूद कार्बनिक अणु अल्कोहल यौगिक के तौर पर टूट जाते हैं। इसी से नशा होता है। इसी तरह से नाइजीरिया में टूथपेस्ट और जूते की माँग अचानक से 6 गुणा तक बढ़ गई थी। इसका इस्तेमाल भी नशे के लिए किया गया था। बहरहाल अब प्रशासन की चिंताएँ बढ़ी हुई हैं।

अमेज़न ने करी पत्ता की आड़ में 1000 किलो गाँजे की ऑनलाइन सप्लाई में 4 महीने में 1.10 करोड़ रूपए कीमत की बेच डाला

अमेजॉन के जरिए गाँजा की तस्करी के मामले में तीन गिरफ्तार
 (फोटो साभार: रॉयटर्स)

ऑनलाइन शॉपिंग के लिए प्रसिद्ध अतंर्राष्ट्रीय ई-कॉमर्स कंपनी अमेजॉन के माध्यम से गाँजा की तस्करी का मामला सामने आया है। गाँजा की तस्करी आंध्र प्रदेश से करी पत्ता की आड़ में की जाती थी। सूचना के आधार पर पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही उनकी निशानदेही पर 20 किलोग्राम गाँजा भी जब्त किया है। पिछले 4 महीने में आरोपियों ने अमेजॉन के जरिए 1,000 किलोग्राम गाँजा की ऑनलाइन आपूर्ति की है, जिसकी कीमत लगभग एक करोड़ 10 लाख रुपये है।

मध्य प्रदेश के भिंड जिले के पुलिस अधीक्षक मनोज सिंह ने बताया, “अमेजॉन द्वारा गाँजे की तस्करी पर कार्रवाई की गई है। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम से गाँजा लाकर मध्य प्रदेश से अन्य स्थानों पर 2-2kg का कन्साइनमेंट बनाकर भेजा जा रहा था। कल्लू नाम के एक व्यक्ति को भिंड के छिमका स्थित गोविंद ढाबा से अरेस्ट किया गया है और पिन्टू नाम का जो ढाबा संचालक है, उसके नाम से भी अमेजॉन का कन्साइनमेंट आया था। हरिद्वार के रहने वाले मुकेश जायसवाल को वहाँ के पुलिस के माध्यम से अभिरक्षा में लिया गया है।”

एसपी मनोज सिंह ने बताया कि हर कन्साइनमेंट के साथ अमेजॉन द्वारा 67 प्रतिशत की वसूली की जाती थी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अमेजॉन से जानकारी माँगी गई है और अगर उनकी संलिप्तता पाई जाती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। कल्लू ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि उसने अमेजॉन प्लेटफॉर्म के जरिये पिछले 4 महीने में 1 टन (1,000 किलोग्राम) गाँजा की तस्करी की है। आरोपी Babu Tax नाम से एक फर्म बनाकर इसे विशाखापत्तनम में अमेजॉन के सेलर के रूप में पंजीकृत कराया था।

इस मामले पर अमेजॉन इंडिया ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। अमेजॉन इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, “वर्तमान में हम जाँच कर रहे हैं कि विक्रेता की ओर से नन-कम्पलाएंस का मामला तो नहीं है। हम इस मामले की जाँच कर रहे अधिकारियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आवश्यक और पूर्ण सहयोग देंगे।” कंपनी ने आगे कहा, “हम उन उत्पादों की लिस्टिंग और बिक्री की अनुमति नहीं देते हैं, जिन्हें भारत में बेचने के लिए कानून के तहत प्रतिबंधित किया गया है।” पूछताछ के लिए पुलिस ने अमेजॉन के स्थानीय अधिकारी को बुलाया है।

इस मामले के सामने आने के बाद व्यवसायियों की संस्था CAIT (कैट) के प्रदेश (मध्य प्रदेश) अध्यक्ष भूपेंद्र जैन ने कहा कि अमेजॉन से कढ़ी पत्ता के नाम पर गाँजा की सप्लाई होना गंभीर बात है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। कैट मंगलवार (16 अक्टूबर) से देश भर में अमेजॉन पर कार्रवाई के लिए अभियान चलाएगी। इस संबंध में प्रदेश व देश के गृहमंत्री से मिलकर उच्चस्तरीय जाँच की माँग की जाएगी।

दरअसल, मध्य प्रदेश की भिंड पुलिस को अमेजॉन द्वारा गाँजा की तस्करी की सूचना मिली थी, इसके बाद भिंड के एसपी ने साइबर सेल की टीम को इस मामले की जाँच की जिम्मेदारी सौंपी थी। इस मामले में ग्वालियर के मुरार निवासी कल्लू को संदिग्ध पाया गया। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसकी निशानदेही पर गोविंद ढाबा से पिंटू को भी गिरफ्तार किया गया। वहाँ पुलिस ने 20 किलोग्राम गाँजा सहित अमेजॉन की पैकिंग के डब्बे, रैपर, बारकोड टैगिंग आदि सामान भी जब्त किया है।

किसी भी वक्त गिरफ्तार हो सकते हैं AAP सांसद संजय सिंह

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं, किसी भी वक्त पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। संजय सिंह के खिलाफ लुधियाना की एक अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है और कहा है कि वो जहां भी हों, उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाए। यह वारंट पूर्व मंत्री और अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की ओर से दायर मानहानि मामले में जारी किया गया है। कोर्ट के आदेश के बावजूद संजय सिंह के अदालत में पेश नहीं होने की वजह से उनके खिलाफ कोर्ट ने गिरफ्तारी वांरट जारी करने के आदेश दिए है। 

6 सितंबर को मानहानि के इस मामले में संजय सिंह को पेश होना था, संजय सिंह के कोर्ट में पेश नहीं होने पर उनके वकीलों ने एक एप्लीकेशन दी थी कि वह पेश नहीं हो सकते है। जिसके बाद अदालत ने उनका बेल बांड रद्द कर दिया और उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया है। अदालत की ओर से इस सख्ती के बाद अब उनको अदालत में खुद पेश होना होगा या फिर उन्हें पुलिस कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। 

2017 में विधानसभा चुनाव के दौरान संजय सिंह ने पूर्व मंत्री और वरिष्ठ अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया पर नशे के व्यापार से जुड़ने और अन्य कई तरह के आरोप लगाए थे। जिसके बाद मजीठिया ने कोर्ट में मानहानि का केस दायर कर दिया था, इससे पहले अरविंद केजरीवाल विक्रम सिंह मजीठिया से माफी मांग चुके है। 

जहाँ तक माफ़ी की बात है, यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। जब केजरीवाल की आम आदमी पार्टी का इतिहास देखते हैं, पार्टी hit & run नीति पर चल जनता को गुमराह करती आ रही है। और जब पार्टी से उन आरोपों के प्रमाण मांगे जाते हैं, तुरंत माफ़ी मांग लेते हैं। यानि उस समय विपक्ष को जो नुकसान होना होता है, हो चूका होता है। 

तालिबान कौन हैं और क्या है इनका असली मकसद? भारतीयों ऑंखें खोलो

अपने देश में अपनी पत्नी बेटी और बहन को आतंकियों को सौंप कर भागते पठानों को देख कर जंजीर फ़िल्म का वो पठान का बच्चा याद आ गया जो दोस्त के लिए जान कुर्बान करने का माद्दा रखता था। कितना फर्जीवाड़ा तैयार किया गया था स्क्रिप्ट राइटरों द्वारा। भोगल का पूरा इलाका अफगानी पठानों से पटा पड़ा है। ड्रग्स और सेक्स का कारोबार करते हैं। भोगल में पाकिस्तान से आये पंजाबी शरणार्थियों के लिए मकान अब अफगान पठानों से गुलजार रहते हैं। इनकी वजह से भोगल काफी महंगा हो चुका है। अब धीरे धीरे यहां के पंजाबियों ने अलग फ्लैट ले लिए पर वह अपने पुराने मकानों को अफगान पठानों को ही देना ज्यादा पसंद करते क्योंकि उन्हें ज्यादा पैसे मिलते हैं। आजकल भोगल में अफगानी दुकानें बड़ी मात्रा में खुल रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, फ़ूड, मेडिकल, जिम इत्यादि क्षेत्रों में इनकी बड़ी संख्या देखी जा सकती है। कुछ तो यहाँ के मुसलमानों से शादी कर स्थाई निवासी भी बन चुके हैं, सनद रहे कि इनके आर्थिक मजबूती का आधार इनकी औरतें और ड्रग्स के धंधे हैं। 

इन पर न तो सरकार की दृष्टि जाती है न ही आम जनता जिसमें खासकर पंजाबी समुदाय शामिल है उसको आने वाले खतरे के बारे में पता है। इसका कारण है कि उनके मुंह में अवैध धंधे वाले पैसे ठूंसे गए हैं। सूत्र बताते हैं कि इनमें उन पठानों के लक्षण नही दिखे जो फिल्मों में सलीम जावेद की जोड़ी दिखाती है। खुदा गवाह में एक ठाकुर और पठान के किस्से को जिस तरीके से फिल्माया उससे भी यह लगा कि पठान का बच्चा हाथ पर अपना सिर लेकर आएगा पर आएगा जरूर लेकिन यहां जब देखता हूँ तो सिवाय मुंह छिपाने, जाहिलियत और काइयाँपन के कुछ नज़र नही आता। हो सकता कि कुछ अपवाद हों पर कोई कौम अपवादों के सहारे इतना बड़ा नरेटिव सेट नही कर सकती। 

काबुल हवाई अड्डे पर जो कुछ हुआ वह देख कर लगा कि एक नामर्द कौम जो अपनी बीबी और मासूम बच्चों को बलात्कृत होने को छोड़ दे और भाग जाए उसे मर्द का बच्चा कैसे परिभाषित कर दुनिया को दिखाया गया। अशरफ गनी भाग गया, अधिकारी भाग गए, लोग भाग रहे, ऐसे भगोड़ों को क्या बहादुर कौम कहा जा सकता है? भागते तो ठीक पर अपने परिवार के साथ भागते तो वह न्यायोचित होता, परिवार की रक्षा में मर जाते तो यह समझा जाता कुर्बानी देने वाली कौम है। 

पंडित राजेश और पठान का बच्चा

अफगानिस्तान में यदि कोई वीर है तो वह एक मंदिर में धर्मध्वजा को पकड़े एक पंडित राजेश नाम का मनुष्य है जो यह जानता है कि आतंकी उसे छोड़ेंगे नही पर वह अपने धर्म से एक माशा भी नही डिगा है पर वह यह भी जानता है कि शरीर के नष्ट होने से आत्मा नही मरती, वह धर्म को धारण करने के लिए पुनः शरीर धारण करेगा। यह होती है सनातन की शक्ति यह होता है ब्रह्म तेज जिसने शताब्दियों तक भीषण प्रहार झेला फिर भी आज तक टिका हुआ है।

सिकन्दर ने भारत पर जब 326 B.C. आक्रमण किया कहते हैं तब पंजाब छोटे छोटे राज्यों में बंटा हुआ था अतः वह कुछ छोटे राज्य जीतने में सफल हो गया।

किन्तु 305 B. C. में जब उसके उत्तराधिकारी सेल्यूकस ने भारत पर आक्रमण किया तो उसका सामना चंद्रगुप्त मौर्य के एकछत्र शासन से हुआ। परिणामस्वरूप न केवल उसकी हार हुई बल्कि उसे अपनी पुत्री हेलेना की शादी चंन्द्रगुप्त से करनी पडी तथा काबुल, कंधार, हेरात व बिलोचिस्तान 4 प्रांत भी देने पडे जो आज अफगानिस्तान व पाकिस्तान हैं।

ऐसे ही जब मुहम्मद बिन कासिम, महमूद गजनवी, मौहम्मद गौरी, तैमूर और बाबर ने भारत पर आक्रमण किये थे भारत बिखरा हुआ था इसलिए वे लोग सफल हो गये।

किन्तु इस समय भारत एक मजबूत देश है इसलिए अगर किसी पाकिस्तानी या तालिबानी या उनके किसी भारतीय रिश्तेदार को लगता हो कि वो भारत पर कब्जा कर लेंगे तो भूल जाना।पिटोगे तो लेकिन हेलेना भी देनी पड़ेगी।अखण्ड भारत का नक्शा अभी बहुतों ने संभाल कर रक्खा है। 

भारतीयों ऑंखें खोलो 

म्यांमार में जब मुसलमान बौद्ध लड़कियों का बलात्कार कर रहा था, भारत का मुसलमान खामोश था।

जब बौद्धों ने रोहिंग्या मुसलमानों को उन्हीं की जुबान में पलट वार शुरू किया, भारत का मुसलमान बिलबिला उठा और भारत की आर्थिक राजधानी को दंगो की आग में झोंक दिया।

जब मुसलमान फ्रांस में लूट-मार,चोरी व बलात्कार कर रहा था, तब भी भारत का मुसलमान खामोश था, पर जैसे ही फ्रांस ने पलट वार किया तो भारत का मुसलमान फिर से देश को आग में झोंकना चाहता था पर मौजूदा राष्ट्रवादी मोदी सरकार के चलते अपने मकसद में कामयाब नही हो पाया।

जब मुसलमान इजराइल में, दंगे-फसाद, लूट-मार कर रहा था, तो भारत का मुसलमान खामोश था, लेकिन जैसे ही यहूदियों ने पलट वार किया, भारत का  मुसलमान फिर से देश जलाने निकला था, पर बीजेपी सरकार के चलते कामयाब न हो सका।

जब आईएसआईएस सीरिया और इराक में मुसलमानों को मारता है तो भारत मुसलमान खामोश रहता है। आज तालिबान अफ़ग़ानिस्तान में मुसलमानों को मार रहा है तो भी भारत का मुसलमान खामोश है। 

कारण - क्योकि दुनिया के हर मुसलमान का एक ही मकसद है, पूरी दुनिया का इस्लामीकरण, और इस मकसद के रास्ते मे सबसे बड़ा रोड़ा है हिन्दू,

इसलिये पहले हिंदुस्तान में (गज़वा-ऐ-हिन्द) फिर सारा जहां

अफ़ग़ानिस्तान के झूठे आंसुओ में मत आना,

एक बार यूरोप सीरिया के मुसलमान शरणार्थियों को अपने यहां पनाह देकर आज तक पछता रहा है, मुसलमान जिस देश मे शरण मांग के जाता है, उसी देश के कानून को नही मानता, और कुछ सालों बाद, वहां के नागरिकों से ज्यादा अधिकार मांगने लगता है, यही है हादसे,अधिकारों की बात करने लगता है। 

इसलिये इन अफ़ग़ानिस्तान के झूठे आंसू देख के बहक मत जाना

दुनिया मे 57 मुस्लिम देश है, 10+ देश इतने अमीर है कि पूरे 57 देशों को पाल ले, पर किसी भी एक देश ने न सीरिया के मुसलमानों को शरण दी और न ही वो अब अफ़ग़ानिस्तान के मुसलमानों को शरण देंगे।

आंख खोल हिंदुस्तानी दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी इंडोनेशिया के बाद, भारत मे ही रह रही है, जिस दिन उनकी संख्या बढ गयी और काग्रेसी, वामपंथी सत्ता मे आ गये उस दिन तू फिर से देश के टुकड़े देखने के लिये तैयार रहियो। भारत की मोदी सरकार पर इतना दबाव बनाओ कि किसी अफगानी को भारत में शरण न दे। मानवता नहीं भारत के भविष्य को बचाना है। 

देखिए सोशल मीडिया पर धर्म योद्धा ग्रुप से प्रोफेसर चंद्र प्रकाश का ऑंखें खोलने वाला लेख :-

तालिबान हैं कौन?

तालिबान ने युद्ध समाप्ति की घोषणा कर दिया है। बिना किसी खास विरोध के तालिबान के लड़ाके काबुल में प्रविष्ट हो गये और राष्ट्रपति सहित पूरा अफगान प्रशासन काबुल से भाग खड़ा हुआ। करीब 20 साल बाद अब काबुल पर तालिबान का दोबारा कब्जा हो गया है। लेकिन ये तालिबान हैं कौन? कहां से पैदा हुए? इनकी विचारधारा किस इस्लाम से प्रेरित है? 

तालिब का अर्थ होता है विद्यार्थी। तालिबान का अर्थ हुआ विद्यार्थियों का समूह। आज अफगानिस्तान में "विद्यार्थियों के जिस समूह" के कारण तालिबान चर्चा में हैं इनका जन्म पाकिस्तान के एक मदरसे दारुल उलूम हक्कानिया में हुआ था। पाकिस्तान को अमेरिका द्वारा मुजाहिद (मजहबी योद्धा) तैयार करने का आदेश और डॉलर मिला था जिसे पूरा करने के लिए पाकिस्तानी फौज ने  दारुल उलूम हक्कानिया को चुना। इसी मदरसे से एक तालिब पढकर निकला था जिसका नाम था मुल्ला उमर जो उस समय कराची में कुरान पढाता था। 

दारुल उलूम हक्कानिया के उस समय प्रिंसिपिल थे मौलाना समी उल हक उर्फ मौलाना सैंडविच। मौलाना समी उल हक मुल्ला उमर से बहुत प्रभावित थे। उन्हें जब पाक फौज का आदेश मिला कि अफगानिस्तान में सोवियत सेना के खिलाफ जिहाद करना है तो उन्होंने कराची में रह रहे मुल्ला उमर से संपर्क किया। अफगानिस्तान में पैदा हुआ मुल्ला उमर अफगान लैंडलार्ड से छापामार लड़ाइयां लड़ता रहा था इसलिए यह मौका मिलते ही वह अफगानिस्तान में जिहाद के लिए तैयार हो गया और इस तरह तालिबान का जन्म हुआ। 

दारुल उलूम हक्कानिया देओबंदी इस्लाम की शिक्षा देने वाला मदरसा है इसलिए वहां से जो तालिबान निकले वो देओबंदी इस्लाम की शिक्षाओं को मानने वाले हैं। देओबंद भारत में सहारनपुर जिले का एक कस्बा है जहां हनफी इस्लाम पर आधारित एक मदरसा संचालित होता है जिसका नाम है दारुल उलूम। दारुल उलूम देओबंद दुनिया की सबसे कट्टर इस्लामिक विचारधाराओं में से एक है। इसकी कट्टरता के कारण ही इस मदरसे की तुलना मिस्र की अल अजहर युनिवर्सिटी से की जाती है जिसने अल कायदा को जन्म दिया। 

दारुल उलूम देओबंद को माननेवाले देओबंदी मुसलमान कहे जाते हैं। ये देओबंदी मुसलमान अपनी मान्यताओं को लेकर बहुत कट्टर होते हैं और अपने नबी की सुन्नत को बहुत कड़ाई से पालन करते हैं। उनकी सबसे आसान पहचान ये होती है कि वो एक खास तरह का ड्रेस पहनते हैं जिसे सलवार कमीज कहा जाता है लेकिन उनका सलवार उनके टखने के ऊपर ही रहता है। इसके अलावा वो सिर पर पगड़ी बांधते हैं। भारतीय उपमहाद्वीप में कट्टर इस्लाम का सबसे बड़ा प्रचार दारुल उलूम देओबंद ही करता है। भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश में देओबंदी इस्लाम को मानने वाले कट्टर और आक्रामक माने जाते हैं। ऐसा अनुमान है कि भारतीय उपमहाद्वीप में लगभग 20 प्रतिशत मुसलमान इस समय देओबंदी इस्लाम को अनुसरण करते हैं। 

दारुल उलूम देओबंद एक ऐसे इस्लामिक स्टेट का स्वप्न देखता है जिसमें शिर्क न हो। शिर्क का अर्थ हुआ जहां अल्लाह के अलावा और किसी को मानने और पूजनेनाले न रहते हों। इसके लिए उनके मदरसों से तालिबान तैयार किये जाते हैं जो ये मानते हैं कि शासन करने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ देओबंदी मुसलमान के पास है। बाकी जो गैर मुस्लिम या फिर गैर देओबंदी मुस्लिम भी शासन कर रहे हैं उनको शासन से बाहर निकाल देना उनका इस्लामिक दायित्व है। इसलिए आज अफगानिस्तान में तालिबान इस्लामिक शासन के खिलाफ ही लड़ रहा है। 

आपको यह जानकर थोड़ा आश्चर्य होगा लेकिन सत्य यही है। अफगानिस्तान में अफगान सेना और तालिबान के बीच जारी ताजा लड़ाई के लिए गोला बारुद और हथियार भले ही पाकिस्तान और चीन दे रहे हों लेकिन उसका वैचारिक आधार भारत ने दिया है। भारत के एक मदरसे ने दिया है जिसका नाम दारुल उलूम देओबंद है। पाकिस्तान का पूरा आतंकी नेटवर्क देओबंदी और जमाती विचारधारा ही चलाती है। अब इस उपलब्धि पर हम भारतीय चाहें तो शर्म कर सकते हैं या फिर चाहे तो गर्व। लेकिन जो आज अफगानिस्तान में हो रहा है, वह कल पाकिस्तान में होगा और वही परसों हिन्दुस्तान में भी होगा। आज काबुल ढहा है। कल इस्लामाबाद ढहेगा। और हम नही जागे तो परसों नई दिल्ली भी जमींदोज हो जाएगा।

दुख्तरे अफगानिस्तान नीलाम ए तीन सौ डॉलर

अफगानिस्तान के गजनी मे शहर के बाहर एक बड़ा चौक है, उसमे बने एक चबूतरे पर कभी हिंदू बेटियां दो-दो दीनार में नीलाम की गई थीं। उस स्थान पर इस याद के लिए आक्रमणकारी मुसलमानों ने एक स्तम्भ बनवाया था, जो आज भी उस नीलामी के याद में अफगानिस्तान में धरोहर के रूप में संजोकर रखा गया है, जिस पर लिखा है -

दुख्तरे हिन्दोस्तान : नीलामे दो दीनार

अर्थात यहाँ हिन्दुस्तानी औरते दो-दो दीनार मे नीलाम हुई। 

ईश्वरीय न्याय देखिए की आज उसी अफगानिस्तान मे अफगानी लड़कियां तीन तीन सौ डॉलर मे बेची जा रही हैं वो भी तथाकथित इस्लाम के रक्षक तालिबानियों द्वारा।

इसी को कहते हैं कि ईश्वर की लाठी में आवाज नही होता है !

असम : ड्रग्स खरीदने के लिए 40,000 रूपए में अपने बेटे को ही बेच दिया

                                                                              आरोपित अमीनुल इस्लाम (फोटो : टाइम्स ऑफ इंडिया)
असम के मोरीगाँव जिले से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। लहरियाघाट के रहने वाले अमीनुल इस्लाम ने अवैध ड्रग्स खरीदने के लिए अपने ही ढ़ाई साल के बच्चे को 40,000 रूपए में बेच दिया। पुलिस ने बच्चे के पिता और उसे खरीदने वाले को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्चे की माँ रुक्मिना बेगम ने गुरुवार (05 अगस्त 2021) को एफआईआर दर्ज कराई थी। इस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने बरबरी की रहने वाली साजिदा बेगम के पास से रुक्मिना के बेटे को बरामद कर लिया और साजिदा व अमीनुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया।

रुक्मिना द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अमीनुल के ड्रग तस्करी में संलिप्त रहने के कारण रुक्मिना की उससे रोज लड़ाई होती रहती थी। इसी कारण पिछले कुछ समय से रुक्मिना अपने पिता के घर रह रही थी। एफआईआर के मुताबिक, कुछ दिन पहले अमीनुल, रुक्मिना के पिता के घर पहुँचा और बच्चे को यह कहते हुए अपने साथ ले आया कि उसका आधार कार्ड बनवाना है। लेकिन दो-तीन दिन बीत जाने के बाद भी अमीनुल बच्चे को लेकर वापस उसकी माँ के पास नहीं पहुँचा।

अमीनुल ड्रग्स लेने का आदी है और पिछले तीन सालों से ड्रग्स की तस्करी समेत कई अन्य गंभीर अपराधों में संलिप्त है। इसके अलावा, उसके ऊपर सेक्स रैकेट चलाने का भी आरोप है। पुलिस का कहना है कि इन सभी आरोपों की पूरी जाँच की जा रही है।

असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में ड्रग और नशीले पदार्थों की तस्करी पर जबरदस्त कार्रवाई की जा रही है। सीएम सरमा खुद भी ड्रग, हेरोइन और नशीली गोलियों को सार्वजनिक रूप से नष्ट करते हुए देखे गए। कभी उन्होंने ड्रग निस्तारण कार्यक्रम में नशीले पदार्थों को आग लगाई तो कभी उन पर बुलडोजर चलाकर उन्हें नष्ट किया। जुलाई महीने में ही असम में लगभग 163 करोड़ रुपए की ड्रग को नष्ट किया जा चुका है। इसके साथ ही ड्रग तस्करी से जुड़े लगभग 900 मामलों में 2,000 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

करण जौहर की ‘ड्रग्स पार्टी’ की शिकायत करने वाले सिरसा को पाकिस्तान से धमकी : ‘केस वापस ले, वरना ठोक देंगे’

भारत में होती ड्रग्स पर कार्यवाही से होती पाकिस्तान में घबराहट से लगता है कि पाकिस्तान की कमाई का शायद यह ही सर्वोत्तम श्रोत है। और इसी कारण बॉलीवुड पाकिस्तान कलाकारों को भारतीय फिल्मों में लेते हैं, जिनके कारण इन्हें ड्रग्स मिलने में आसानी होती रहती है। जबकि पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों में प्रदर्शन पर सख्ती है। 
शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने पाकिस्तान से धमकी भरा कॉल आने का दावा किया है। धमकी में उन्हें बॉलीवुड फिल्म निर्माता करण जौहर के खिलाफ दर्ज शिकायत वापस लेने या गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई है। अकाली दल नेता ने धमकी देने वाले शख्स का नाम और फोन नंबर शेयर करते हुए दिल्ली पुलिस से मामले को संज्ञान में लेने का अनुरोध किया है।

अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर शेयर किए गए एक वीडियो संदेश में सिरसा ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, “अभी मेरे पास पाकिस्तान से एक फोन आया। फोन करने वाले ने अपना नाम मोहम्मद वसीम बताया और मुझे धमकी दी कि ‘भाई’ ने कहा है कि बॉलीवुड वाला करण जौहर वाला केस है, उसे 2 दिन में वापस लेकर नौटंकी बंद कर, वरना तेरे को ठोकेंगे। जब मैंने पूछा कि ‘भाई’ कौन है, तो उसने कहा कि तू ‘भाई’ को नहीं जानता। ‘भाई’ को पूरा देश जानता है। क्यों मरना चाहता है। ये नौटंकी बंद करो, वरना ठोक देंगे। उसने मुझे कहा कि जब हम तुम्हें ठोकेंगे तो तुम्हें क्या, तुम्हारे परिवार को भी पता चल जाएगा कि भाई कौन है।”

सिरसा ने कहा कि वे इसकी शिकायत पंजाबी बाग पुलिस स्टेशन के एसएचओ के साथ पश्चिम जिला डीसीपी को दे रहे हैं। वो चाहते हैं कि दिल्ली पुलिस इस पर संज्ञान लेकर जाँच करे। सिरसा ने आगे कहा कि वह इस तरह की धमकियों से डरने वाले नहीं है और बॉलीवुड में नशीली ड्रग्स के खिलाफ लगातार काम करते रहेंगे।

सिरसा ने फोन करने वाले को संबोधित करते हुए कहा, “भाई हम तेरे से डरने वाले नहीं हैं। तुमने बहुत गलत आदमी को धमकी दिलवाई है। तुम्हें बहुत बड़ी गतफहमी है कि मैं तुम्हारे गलतफहमी से डर जाऊँगा। ये सिद्धांत की लड़ाई है और मैं इसे लड़ूँगा। इस धमकी का मुझे एक फायदा हुआ है, अब मैं इस लड़ाई को और भी शिद्दत से लड़ूँगा। और इतनी शिद्दत से लड़ूँगा कि जो लोग मुझे डरा रहे हैं, मुझे जान से मारने की धमकी दे रहे हैं, उन्हें यह गलती पूरी जिंदगी याद रहेगी। उनको इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा। भाई को मैं कहना चाहता हूँ कि तेरे जैसे भाई दरवाजे के बाहर खड़े हैं, गलियों में भीख माँग रहे हैं। तेरे जैसे भाई से हम डरते नहीं है, तू अपने घर पर भाई होगा, मुझे डरा-धमका नहीं सकता।”

सिरसा ने एनसीबी प्रमुख राकेश अस्थाना से 15 सितंबर को मुलाकात की थी, जिसमें करण जौहर, दीपिका पादुकोण, शाहिद कपूर, अर्जुन कपूर, विक्की जैसे कई शीर्ष बॉलीवुड नामों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी।

बीते साल करण जौहर के घर एक पार्टी का आयोजन किया गया था। इस पार्टी का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें दीपिका पादुकोण, मलाइका अरोड़ा, अर्जुन कपूर, शाहिद कपूर, विक्की कौशल, वरुण धवन सहित अन्य सितारे नजर आ रहे थे। मनजिंदर सिंह सिरसा ने आरोप लगाया कि पार्टी में शामिल होने वाले लोगों ने ड्रग्स का इस्तेमाल किया गया था।

मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिल्ली में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो प्रमुख राकेश अस्थाना से मुलाकात कर करण जौहर की पार्टी में शामिल होने वाले स्टार्स के खिलाफ जाँच और कार्रवाई की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि शाहिद कपूर ‘उड़ता पंजाब’ में पूरी दुनिया के सामने सिख युवाओं को नशेड़ी बताते हैं। लेकिन सच्चाई उड़ता बॉलीवुड है।

सुशांत सिंह हत्या मामले में NCB ड्रग्स की जांच कर रही है या गुमराह कर रही है?

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
लगभग एक डेढ़ महीने से NCB ड्रग लेने के आरोप में लगातार फिल्मी नायिकाओं को जांच के लिए बुला रहा है और मीडिया इनकी सनसनीखेज खबर बनाकर दिनभर यह समाचार दिखा रहा है। जबकि बॉलीवुड में एक से बढ़कर एक रहस्यमयी मृत्यु हुई, तब क्यों नहीं मीडिया ने उन पर चर्चा क्यों नहीं की? यदि समय रहते उन पर जाँच की होती संभव है सुशांत अकाल मृत्यु के गाल में नहीं समाता। अकाल मृत्यु के गाल में समाने वाला सुशांत सिंह पहला नायक नहीं है, इस बात से कोई इंकार नहीं सकता। यह कटु सच्चाई है। ड्रग्स का जाल अपनी युवा अवस्था में आने से पूर्व देखता आ रहा हूँ, आज कोई नहीं बात नहीं। आज लगभग 5 दशक बीतने बाद ड्रग्स पर कैसे आँख खुली, यह भी एक रहस्य है। सुशांत जाँच एक बहाना है, निशाना कहीं और है। NCB और CBI दोनों अलग विभाग हैं और कार्यक्षेत्र भी भिन्न। जाँच में दोनों है, फिर केवल एक ही के कार्य पर मीडिया में चर्चा, क्या संदेह नहीं होता?
दूसरे, किसे नहीं मालूम कि फिल्मों में किसका कितना धन लगता है? क्या उस ओर किसी ने कभी चर्चा करने का साहस किया? पहले भारतीय संस्कृति आधारित फिल्में निर्मित होती थी और आज पश्चिमी सभ्यता पर क्यों? किसके इशारे पर यह सब परिवर्तन हुआ?  

बात शुरू हुई थी सुशांत सिंह ने आत्महत्या की है अथवा हत्या की गयी है, परन्तु चर्चा हो रही है ड्रग्स पर, सीबीआई जाँच कहाँ तक पहुंची है या उस जाँच का क्या हुआ, कहीं कोई चर्चा नहीं, क्यों? अगर सुशांत की हत्या हुई है, तो क्या ड्रग्स की आड़ में कातिल को बचाया जा रहा है? जब संदेह की सुई रिया चक्रवर्ती पर है, और वह गिरफ्त में है, लेकिन पूछताछ हो रही है ड्रग्स पर। आज NCB ड्रग्स पर इतनी गंभीर क्यों?  
कोई एनसीबी से ये नहीं पूछ रहा है कि वे उल्टी जांच क्यों कर रहे हैं पहले मुख्य अपराधियों को तो पकड़ो ये फिल्मी हिरोइनें कहां जाएंगी इनकी चेट आपके पास है तो बाद में पकड़ लेना। या एनसीबी इनसे जांच करने के बहाने मुख्य अभियुक्तों को अवसर दे रही है कि वे पूरे सबूत मिटा दें या जो उनके पास माल पडा है उसको बेच कर सारे सबूत नष्ट कर दें और विदेश चले जाएं ताकि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो। बच्चों का खेल हो रहा है आज इस नायिका को बुलाओ कल दूसरी को बुलाओ।
जबकि एनसीबी को चाहिए था कि ड्रग पेडलर से पूछते कि वो ड्रग कहां से लाया फिर उनसे जांच करते कि उसको किसने सप्लाई की है । जो ड्रग एडिक्ट अपना इलाज करवा रहे हैं उनसे जांच करते कि उनको कौन सप्लाई करता था उस चैन को पकड़ते किस देश से आ रही है कहां सबसे पहले पहुंचती है और वहां से किन किन एजेंटो के पास जाती है और कौन कौन स्टाकिस्ट हैं।
एक बात और एनसीबी, ईडी और सीबीआई के उन सूत्रों की कोई जांच नहीं कर रहा है जो रोजाना मीडिया को गुप्त रुप से बता रहे हैं कि किस गवाह ने क्या कबूला है और क्या कहा है एक दो चैनल वाले तो ये कह रहे हैं कि हमारी अधिकारियों से बात हुई है और वो बता रहे हैं कि क्या जांच चल रही है और अब किसको बुलाया जाएगा। जबकि कानूनन जांच बिलकुल गुप्त होती है किसीको कुछ नहीं बताया जाता है, क्योंकि अपराधी को जरा-सी भनक लग जाए तो वह सबूत नष्ट कर फरार हो जाता है। 
कानून जानकारों के अनुसार किसी को भी केस डायरी नहीं दिखाई जाती किसने क्या बयान दिया है या किस आरोपी ने क्या कहा है किसी को नहीं बताया जाता है और यदि कोई पुलिस वाला जांच के बारे में कोई खबर दे देता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होती है। पर यहां तो किसने क्या पूछा और किसने क्या जवाब दिया सबकुछ दिखाया जा रहा है। यह भी बताया जा रहा है कि रिया बार-बार बयान बदल रही है झूठ बोल रही है आदि आदि। इसलिए उन सूत्रों को तुरंत गिरफ्तार करना चाहिए जो जांच की बातें बता रहे हैं।

अवलोकन करें:-

NCB ने दीपिका पादुकोण को कहा : इमोशनल कार्ड न खेलें

NIGAMRAJENDRA28.BLOGSPOT.COM
NCB ने दीपिका पादुकोण को कहा : इमोशनल कार्ड न खेलें
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार नारकोटिक्स कण्ट्रोल ब्यूरो ने सितम्बर 26, 2020 को ड्रग्स मामले में बॉलीवुड की तीन बड़ी अभि....

ईडी के पास इतना समय है कि सुशांत मामले में जांच कर रही है जहां सिर्फ15 करोड रूपए का आरोप है और वो भी वह भी झूठ निकला लेकिन नेताओं के पास अरबों-खरबों रुपए है वहां जांच नहीं कर रहे हैं स्विस बैंकों में किनका पैसा पडा है वो जांच नहीं कर रहे हैं सीबीआई भी डेढ़ महीने से सुशांत केस में लगी है।
ईडी और सीबीआई दोनों संस्थाएं काले धन की जांच करती, उनकी चैट का पता लगाती तो आज देश की आर्थिक स्थिति कुछ ओर होती और इस कोरोना काल में मध्यम परिवारों को सहायता मिल जाती बेरोजगार युवाओं को भी राहत मिल जाती।

दीपिका पादुकोण ने जब पति रणवीर सिंह को कहा था ‘सुपर ड्रग’

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 

कहते हैं कि पत्रकारिता और फिल्में समाज का आईना होते हैं, जिसे यदा-कदा चरितार्थ भी किया जाता रहा है, लेकिन सरकार और केंद्रीय तंत्र आँखें मूंदे रहे, विपरीत इसके शिकायत करने वाले को इस ड्रग गिरोह की धमकियों का सामना करना पड़ता है। 

80 और 90 के दशक में अभिनेता, निर्माता-निर्देशक देव आनद की सदाबहार फिल्म "हरे कृष्णा हरे राम" के अलावा "नशा" आदि कई फिल्में प्रदर्शित हुई थीं, लेकिन किसी भी सरकार एवं राजनीतिक दल ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, उसी का कारण है कि ड्रग माफिया बॉलीवुड में भी अपना आसन जमा चुका है। परन्तु एक प्रश्न राष्ट्र जानना चाहता है कि आखिर चरस, अफीम, गांजा, कोकीन, स्मैक और हीरोइन आदि किस रास्ते भारत में आती हैं? हमारी सुरक्षा एजेंसीज और अन्य सीमा सुरक्षा दल क्या करती हैं? आज स्थिति इतनी भयानक हो गयी है कि गली-गली में इस्तेमाल हो रही है। भिखारी तक इस्तेमाल कर रहे हैं। दिल्ली के जमुना बाजार में पुल के नीचे इन नशेड़ियों को देखा जा सकता है। जहाँ बनी पुलिस बीट को जब देखा बंद ही देखा। क्या स्थानीय पुलिस को नहीं मालूम? दूसरे, स्थानीय पुलिस तो बाद में आती है, उससे पहले केन्द्रीय सुरक्षा का दायित्व है, इस विषम ड्रग के भारत में वितरित होने के जवाब देने का। हमारे युवा दिनों में यदि भांग खुलेआम उपलब्ध थी लेकिन कोकीन के लिए लाइसेंस बनता था। बिना परमिट के कोकीन बेचना अपराध था। परन्तु आज इस नशे के व्यापार में केंद्रीय स्तर से लेकर स्थानीय स्तर तक मालामाल हो रहे हैं, उन पर कार्यवाही कब? बॉलीवुड तो केवल एक झांकी है। सरकार को उन तत्वों को भी आखिर दुबई और पाकिस्तान से ड्रग किस तरह और किन लोगों के कारण भारत में आती है। 

सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में रिया चक्रवर्ती से पूछताछ के बाद ड्रग कनेक्शन में कई बॉलीवुड स्टार के नाम सामने आ रहे हैं। सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह और श्रद्धा कपूर के बाद अब दीपिका पादुकोण के नाम ने सभी को चौंका दिया है।

दीपिका पादुकोण अपनी मैनेजर करिश्मा के साथ एक चैट में पूछ रही हैं ‘माल है क्या’। इस चैट का खुलासा होने के बाद सोशल मीडिया पर दीपिका को ट्रोल किया जा रहा है।

इस बीच इंस्टाग्राम पर दीपिका पादुकोण का एक पुराना पोस्ट वायरल हो रहा है। इस पोस्ट में दीपिका ने अपने पति रणवीर सिंह को अपना सुपर ड्रग कहा था। इंस्टाग्राम पर 19 नवंबर 2019 को शेयर इस पोस्ट में रणवीर सिंह की टी-शर्ट पर लिखा था, लव इज ए सुपर पावर’ यानी ‘प्यार एक सुपर पॉवर है’। दीपिका ने इस तस्वीर के कैप्शन में लिखा था, ‘और तुम… मेरा सुपर ड्रग हो।’ अब ड्रग मामले में दीपिका का नाम आने के बाद ये तस्वीर वायरल हो रही है।

बॉलीवुड ड्रग मामले में नाम आने के बाद ट्रोल हो रहीं 

सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले के बाद सामने आए ड्रग कनेक्शन में अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का भी नाम आ रहा है। दीपिका की अपनी मैनेजर करिश्मा प्रकाश के बीच ड्रग चैट का खुलासा होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स उन्हें जमकर ट्रोल कर रहे हैं। ट्विटर पर #चरसी_दीपिका_पादुकोण ट्रेंड कर रहा है। यूजर्स उनकी फिल्मों के सीन और डायलॉग पर आधारित मीम्स भी शेयर कर रहे हैं।

 

उद्धव ठाकरे, मेरे पत्रकारों को रिहा करो। आपने कानून तोड़ा है : अर्नब गोस्वामी

अर्नब गोस्वामी/ उद्धव ठाकरे
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
महाराष्ट्र मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सुशांत सिंह हत्या पर हो रही कार्यवाही से इतने विचलित क्यों हो रहे हैं? क्या उनकी सरकार ड्रग माफियों के सहारे चल रही है? यदि नहीं रिपब्लिक टीवी पर पाबन्दी लगाने का क्या मतलब निकाला जाए? क्या जिस उद्देश्य से आपके पिताश्री बालासाहेब ने शिव सेना उसे क्यों ताक रख सुशांत हत्या की आड़ में बॉलीवुड के माध्यम से पूरे देश में फ़ैल रही गंदगी के उजागर होने से क्यों परेशानी हो रही है? क्यों पत्रकारों को गिरफ्तार किया? जितना इस मुद्दे को उलझाया जाएगा, उससे कहीं अधिक गुल खिलाने वाला है। 
रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के मुखिया अर्नब गोस्वामी ने हाल ही में गिरफ्तार किए गए अपने दो कर्मचारियों की तत्काल रिहाई की मॉंग महाराष्ट्र सरकार से की है। साथ ही रिपब्लिक टीवी का प्रसारण बंद करने को लेकर केबल ऑपरेटर्स को शिवसेना की ओर से दी गई धमकी को लेकर भी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चेताया है।
रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के रिपोर्टर अनुज कुमार और कैमरामैन यशपालजीत सिंह को महाराष्ट्र पुलिस ने उस वक़्त हिरासत में लिया था, जब दोनों रिपोर्टिंग के लिए रायगढ़ गए थे। अर्नब गोस्वामी ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के खिलाफ तीखा हमला करते हुए दोनों पत्रकारों को तत्काल रिहा करने की माँग की है।
अर्नब गोस्वामी ने कहा, “उद्धव ठाकरे, मेरे पत्रकारों को रिहा करो। आपने कानून तोड़ा है और हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। आपने संविधान नहीं लिखा और आपको इसे अपने हिसाब से चलाने का कोई अधिकार नहीं है।”
अर्नब गोस्वामी ने कहा, “उद्धव ठाकरे, मेरे पत्रकारों को रिहा करो। आपने कानून तोड़ा है और हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। आपने संविधान नहीं लिखा और आपको इसे अपने हिसाब से चलाने का कोई अधिकार नहीं है।”
अर्नब गोस्वामी ने मुख्यमंत्री से कहा है,” मेरे पत्रकारों को तुरंत रिहा करें और अपने संवैधानिक कर्तव्य को निभाते हुए अपने पार्टी के नेताओं को गिरफ्तार करें, जो केबल ऑपरेटरों को सरेआम धमकी देते हुए रंगे हाथों पकड़े गए हैं।”
गोस्वामी ने रिपब्लिक चैनल के लिए की गई कड़ी मेहनत और प्रयास को लेकर कहा,”मैं एक मुंबईकर हूँ।” साथ ही अपने चैनलों पर मनमाने प्रतिबंध के खिलाफ चेतावनी जारी करते हुए अर्नब गोस्वामी ने कहा कि शिवसेना उनके नेटवर्क को छू भी नहीं सकती है, क्योंकि मुंबई, महाराष्ट्र और भारत के लोग उनके साथ हैं।
रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ ने कहा कि अगर उद्धव ठाकरे पत्रकारों को रिहा नहीं करते हैं, तो वह जनता और देश की सर्वोच्च अदालत में उनसे लड़ेंगे। रिपब्लिक टीवी ने यह भी जानकारी दी कि महाराष्ट्र सरकार उनके रिपोर्टर अनुज कुमार से जबरन पूछताछ का प्रयास कर रही है।


अर्नब गोस्वामी की हालिया सुशांत सिंह राजपूत और पालघर में हिंदू साधुओं की हत्या में मामले में व्यापक कवरेज और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के खिलाफ किए गए हमलावर सवालों की वजह से रिपब्लिक टीवी को डराने और धमकाने का काम किया जा रहा है।
सितम्बर 10 को जारी एक पत्र में शिवसेना से जुड़े ‘शिव केबल सेना’ ने महाराष्ट्र में केबल टीवी ऑपरेटरों से रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने को कहा था। शिवसेना ने केबल ऑपरेटरों को अर्नब गोस्वामी के नेतृत्व वाले मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने या परिणाम भुगतने जैसी धमकियाँ भी जारी की थी।
अवलोकन करें:-


NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार महाराष्ट्र सरकार द्वारा रिपब्लिक भारत पर पाबन्दी कांग्रेस द्वारा 1975 में लगाई आपातका....
शिवसेना द्वारा प्रमुख टीवी केबल ऑपरेटर हैथवे, डेन, इन केबल, जीटीपीएल, सेवन स्टार, सिटी केबल्स को लिखे पत्र में कहा है कि ‘रिपब्लिक टीवी’ ने सीएम उद्धव ठाकरे, गृह मंत्री के लिए अपमानजनक भाषा का बार-बार इस्तेमाल कर पत्रकारिता की नैतिकता और दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है। इसमें कहा गया है कि अर्नब गोस्वामी ने न्यूज़रूम में एक ‘समानांतर अदालत’ बना ली है। इस पत्र में कंगना राउत को ‘हरामखोर’ कहने वाले शिवसेना नेता संजय राउत को ‘मुख्य मार्गदर्शक’ बताया गया है।