आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
लगभग एक डेढ़ महीने से NCB ड्रग लेने के आरोप में लगातार फिल्मी नायिकाओं को जांच के लिए बुला रहा है और मीडिया इनकी सनसनीखेज खबर बनाकर दिनभर यह समाचार दिखा रहा है। जबकि बॉलीवुड में एक से बढ़कर एक रहस्यमयी मृत्यु हुई, तब क्यों नहीं मीडिया ने उन पर चर्चा क्यों नहीं की? यदि समय रहते उन पर जाँच की होती संभव है सुशांत अकाल मृत्यु के गाल में नहीं समाता। अकाल मृत्यु के गाल में समाने वाला सुशांत सिंह पहला नायक नहीं है, इस बात से कोई इंकार नहीं सकता। यह कटु सच्चाई है। ड्रग्स का जाल अपनी युवा अवस्था में आने से पूर्व देखता आ रहा हूँ, आज कोई नहीं बात नहीं। आज लगभग 5 दशक बीतने बाद ड्रग्स पर कैसे आँख खुली, यह भी एक रहस्य है। सुशांत जाँच एक बहाना है, निशाना कहीं और है। NCB और CBI दोनों अलग विभाग हैं और कार्यक्षेत्र भी भिन्न। जाँच में दोनों है, फिर केवल एक ही के कार्य पर मीडिया में चर्चा, क्या संदेह नहीं होता?
बात शुरू हुई थी सुशांत सिंह ने आत्महत्या की है अथवा हत्या की गयी है, परन्तु चर्चा हो रही है ड्रग्स पर, सीबीआई जाँच कहाँ तक पहुंची है या उस जाँच का क्या हुआ, कहीं कोई चर्चा नहीं, क्यों? अगर सुशांत की हत्या हुई है, तो क्या ड्रग्स की आड़ में कातिल को बचाया जा रहा है? जब संदेह की सुई रिया चक्रवर्ती पर है, और वह गिरफ्त में है, लेकिन पूछताछ हो रही है ड्रग्स पर। आज NCB ड्रग्स पर इतनी गंभीर क्यों?
कोई एनसीबी से ये नहीं पूछ रहा है कि वे
उल्टी जांच क्यों कर रहे हैं पहले मुख्य अपराधियों को तो पकड़ो ये फिल्मी
हिरोइनें कहां जाएंगी इनकी चेट आपके पास है तो बाद में पकड़ लेना। या
एनसीबी इनसे जांच करने के बहाने मुख्य अभियुक्तों को अवसर दे रही है कि वे
पूरे सबूत मिटा दें या जो उनके पास माल पडा है उसको बेच कर सारे सबूत नष्ट
कर दें और विदेश चले जाएं ताकि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो। बच्चों का
खेल हो रहा है आज इस नायिका को बुलाओ कल दूसरी को बुलाओ।
जबकि एनसीबी
को चाहिए था कि ड्रग पेडलर से पूछते कि वो ड्रग कहां से लाया फिर उनसे जांच
करते कि उसको किसने सप्लाई की है । जो ड्रग एडिक्ट अपना इलाज करवा रहे हैं
उनसे जांच करते कि उनको कौन सप्लाई करता था उस चैन को पकड़ते किस देश से
आ रही है कहां सबसे पहले पहुंचती है और वहां से किन किन एजेंटो के पास जाती
है और कौन कौन स्टाकिस्ट हैं।
एक बात और एनसीबी, ईडी और सीबीआई के उन
सूत्रों की कोई जांच नहीं कर रहा है जो रोजाना मीडिया को गुप्त रुप से बता
रहे हैं कि किस गवाह ने क्या कबूला है और क्या कहा है एक दो चैनल वाले तो
ये कह रहे हैं कि हमारी अधिकारियों से बात हुई है और वो बता रहे हैं कि
क्या जांच चल रही है और अब किसको बुलाया जाएगा। जबकि कानूनन जांच बिलकुल गुप्त होती है किसीको कुछ नहीं बताया जाता है,
क्योंकि अपराधी को जरा-सी भनक लग जाए तो वह सबूत नष्ट कर फरार हो
जाता है। कानून जानकारों के अनुसार किसी को भी केस डायरी नहीं
दिखाई जाती किसने क्या बयान दिया है या किस आरोपी ने क्या कहा है किसी को
नहीं बताया जाता है और यदि कोई पुलिस वाला जांच के बारे में कोई खबर दे
देता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होती है। पर यहां तो किसने क्या पूछा और
किसने क्या जवाब दिया सबकुछ दिखाया जा रहा है। यह भी बताया जा रहा है कि रिया
बार-बार बयान बदल रही है झूठ बोल रही है आदि आदि। इसलिए उन सूत्रों को तुरंत गिरफ्तार करना चाहिए जो जांच की बातें बता रहे हैं।
अवलोकन करें:-
ईडी के पास इतना समय है कि सुशांत मामले में जांच कर रही है जहां सिर्फ15 करोड रूपए का आरोप है और वो भी वह भी झूठ निकला लेकिन नेताओं के पास अरबों-खरबों रुपए है वहां जांच नहीं कर रहे हैं स्विस बैंकों में किनका पैसा पडा है वो जांच नहीं कर रहे हैं सीबीआई भी डेढ़ महीने से सुशांत केस में लगी है।
ईडी
और सीबीआई दोनों संस्थाएं काले धन की जांच करती, उनकी चैट का पता लगाती
तो आज देश की आर्थिक स्थिति कुछ ओर होती और इस कोरोना काल में मध्यम
परिवारों को सहायता मिल जाती बेरोजगार युवाओं को भी राहत मिल जाती।
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