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उद्धव ठाकरे, मेरे पत्रकारों को रिहा करो। आपने कानून तोड़ा है : अर्नब गोस्वामी

अर्नब गोस्वामी/ उद्धव ठाकरे
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
महाराष्ट्र मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सुशांत सिंह हत्या पर हो रही कार्यवाही से इतने विचलित क्यों हो रहे हैं? क्या उनकी सरकार ड्रग माफियों के सहारे चल रही है? यदि नहीं रिपब्लिक टीवी पर पाबन्दी लगाने का क्या मतलब निकाला जाए? क्या जिस उद्देश्य से आपके पिताश्री बालासाहेब ने शिव सेना उसे क्यों ताक रख सुशांत हत्या की आड़ में बॉलीवुड के माध्यम से पूरे देश में फ़ैल रही गंदगी के उजागर होने से क्यों परेशानी हो रही है? क्यों पत्रकारों को गिरफ्तार किया? जितना इस मुद्दे को उलझाया जाएगा, उससे कहीं अधिक गुल खिलाने वाला है। 
रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के मुखिया अर्नब गोस्वामी ने हाल ही में गिरफ्तार किए गए अपने दो कर्मचारियों की तत्काल रिहाई की मॉंग महाराष्ट्र सरकार से की है। साथ ही रिपब्लिक टीवी का प्रसारण बंद करने को लेकर केबल ऑपरेटर्स को शिवसेना की ओर से दी गई धमकी को लेकर भी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चेताया है।
रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के रिपोर्टर अनुज कुमार और कैमरामैन यशपालजीत सिंह को महाराष्ट्र पुलिस ने उस वक़्त हिरासत में लिया था, जब दोनों रिपोर्टिंग के लिए रायगढ़ गए थे। अर्नब गोस्वामी ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के खिलाफ तीखा हमला करते हुए दोनों पत्रकारों को तत्काल रिहा करने की माँग की है।
अर्नब गोस्वामी ने कहा, “उद्धव ठाकरे, मेरे पत्रकारों को रिहा करो। आपने कानून तोड़ा है और हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। आपने संविधान नहीं लिखा और आपको इसे अपने हिसाब से चलाने का कोई अधिकार नहीं है।”
अर्नब गोस्वामी ने कहा, “उद्धव ठाकरे, मेरे पत्रकारों को रिहा करो। आपने कानून तोड़ा है और हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। आपने संविधान नहीं लिखा और आपको इसे अपने हिसाब से चलाने का कोई अधिकार नहीं है।”
अर्नब गोस्वामी ने मुख्यमंत्री से कहा है,” मेरे पत्रकारों को तुरंत रिहा करें और अपने संवैधानिक कर्तव्य को निभाते हुए अपने पार्टी के नेताओं को गिरफ्तार करें, जो केबल ऑपरेटरों को सरेआम धमकी देते हुए रंगे हाथों पकड़े गए हैं।”
गोस्वामी ने रिपब्लिक चैनल के लिए की गई कड़ी मेहनत और प्रयास को लेकर कहा,”मैं एक मुंबईकर हूँ।” साथ ही अपने चैनलों पर मनमाने प्रतिबंध के खिलाफ चेतावनी जारी करते हुए अर्नब गोस्वामी ने कहा कि शिवसेना उनके नेटवर्क को छू भी नहीं सकती है, क्योंकि मुंबई, महाराष्ट्र और भारत के लोग उनके साथ हैं।
रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ ने कहा कि अगर उद्धव ठाकरे पत्रकारों को रिहा नहीं करते हैं, तो वह जनता और देश की सर्वोच्च अदालत में उनसे लड़ेंगे। रिपब्लिक टीवी ने यह भी जानकारी दी कि महाराष्ट्र सरकार उनके रिपोर्टर अनुज कुमार से जबरन पूछताछ का प्रयास कर रही है।


अर्नब गोस्वामी की हालिया सुशांत सिंह राजपूत और पालघर में हिंदू साधुओं की हत्या में मामले में व्यापक कवरेज और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के खिलाफ किए गए हमलावर सवालों की वजह से रिपब्लिक टीवी को डराने और धमकाने का काम किया जा रहा है।
सितम्बर 10 को जारी एक पत्र में शिवसेना से जुड़े ‘शिव केबल सेना’ ने महाराष्ट्र में केबल टीवी ऑपरेटरों से रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने को कहा था। शिवसेना ने केबल ऑपरेटरों को अर्नब गोस्वामी के नेतृत्व वाले मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने या परिणाम भुगतने जैसी धमकियाँ भी जारी की थी।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार महाराष्ट्र सरकार द्वारा रिपब्लिक भारत पर पाबन्दी कांग्रेस द्वारा 1975 में लगाई आपातका....
शिवसेना द्वारा प्रमुख टीवी केबल ऑपरेटर हैथवे, डेन, इन केबल, जीटीपीएल, सेवन स्टार, सिटी केबल्स को लिखे पत्र में कहा है कि ‘रिपब्लिक टीवी’ ने सीएम उद्धव ठाकरे, गृह मंत्री के लिए अपमानजनक भाषा का बार-बार इस्तेमाल कर पत्रकारिता की नैतिकता और दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है। इसमें कहा गया है कि अर्नब गोस्वामी ने न्यूज़रूम में एक ‘समानांतर अदालत’ बना ली है। इस पत्र में कंगना राउत को ‘हरामखोर’ कहने वाले शिवसेना नेता संजय राउत को ‘मुख्य मार्गदर्शक’ बताया गया है।

महाराष्ट्र सरकार का अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला ;अघोषित आपातकालीन

शिवसेना-रिपब्लिक टीवी
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
महाराष्ट्र सरकार द्वारा रिपब्लिक भारत पर पाबन्दी कांग्रेस द्वारा 1975 में लगाई आपातकाल की याद करवा दी है। इस दौरान प्रेस सेंसरशिप के साथ गायक किशोर कुमार द्वारा संजय गाँधी के एक कार्यक्रम में जाने से मना करने की वजह से किशोर के रेडियो और फिल्मों में गायन पर पाबन्दी के साथ संजीव कुमार और सुचित्रा सेन अभिनीत फिल्म "आंधी" पर प्रतिबन्ध केवल इसलिए लगाया कि नायिका इंदिरा गाँधी की छवि प्रस्तुत कर रही थी, अभिनेता-निर्माता और निर्देशक मनोज कुमार की फिल्म "रोटी कपडा और मकान" एक गीत "हाय महंगाई मार गयी...." को फिल्म से निकलवाने के साथ-साथ रेडियो प्रसारण पर भी पाबन्दी इसलिए लगाई कि यह चर्चित हो रहा था। इस गीत के रेडियो प्रसारण पर भी पूर्णरूप से प्रतिबन्ध लगा दिया गया था। फिल्म "किस्सा कुर्सी का" को सेंसर से पास नहीं होने दिया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के विरुद्ध बोलने वाले नेताओं को जेलों में डाल दिया था। यानि जिस तरह कांग्रेस ने आपातकाल में व्यक्ति की अभिव्यक्ति पर पूर्णरूप से पाबन्दी लगा दी थी, उसी राह पर कांग्रेस के सहयोग से चल रही शिव सेना सरकार चल पड़ी है। 
पत्रकारों और मीडिया नेटवर्क को धमकाने, डराने के अपने काम को जारी रखते हुए, शिवसेना ने सितम्बर 10, 2020 को महाराष्ट्र में स्थानीय केबल ऑपरेटरों को ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहा है। संजय राउत को अपना मार्गदर्शक बताते हुए, शिवसेना ने ऐसा ना करने पर इसका ‘अंजाम भुगतने’ तक की भी धमकी दी है।
बृहस्पतिवार को जारी एक पत्र में शिवसेना से जुड़े ‘शिव केबल सेना’ ने महाराष्ट्र में केबल टीवी ऑपरेटरों से रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने को कहा है। शिवसेना ने केबल ऑपरेटरों को अर्नब गोस्वामी के नेतृत्व वाले मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने या परिणाम भुगतने जैसी धमकियाँ भी जारी की हैं।
शिवसेना द्वारा ‘रिपब्लिक टीवी’ के खिलाफ उठाया गया यह कदम बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर रिपब्लिक टीवी द्वारा की जा रही रिपोर्टिंग के बीच आई है। इसके अलावा, हाल ही में अभिनेत्री कंगना रानौत के ऑफिस में द्वारा BMC द्वारा किए गए विवादास्पद नुकसान को लेकर भी महाराष्ट्र कि शिवसेना घिरती हुई नजर आ रही है और रिपब्लिक टीवी ने इसे भी प्रमुखता से अपने समाचार चैनल पर जगह दी है।
                शिव सेना द्वारा महाराष्ट्र के केबल ऑपरेटर्स
को लिखा गया पत्र
शिवसेना द्वारा प्रमुख टीवी केबल ऑपरेटर हैथवे, डेन, इन केबल, जीटीपीएल, सेवन स्टार, सिटी केबल्स को लिखे पत्र में कहा है कि ‘रिपब्लिक टीवी’ ने सीएम उद्धव ठाकरे, गृह मंत्री के लिए अपमानजनक भाषा का बार-बार इस्तेमाल कर पत्रकारिता की नैतिकता और दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया है।
इसमें कहा गया है कि अर्नब गोस्वामी ने न्यूज़रूम में एक ‘समानांतर अदालत’ बना ली है। इस पत्र में कंगना राउत को ‘हरामखोर’ कहने वाले शिवसेना नेता संजय राउत को ‘मुख्य मार्गदर्शक’ बताया गया है।
अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला 
शिवसेना द्वारा रिपब्लिक टीवी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने के प्रयासों के बाद, रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने एक बयान जारी किया है जिसमें कहा गया है कि शिवसेना केबल, जो कि शिवसेना विंग का हिस्सा है, ने ‘संजय राउत के मार्गदर्शन’ के तहत एक आदेश जारी किया। रिपब्लिक टीवी ने कहा कि यह आदेश पूरे महाराष्ट्र में केबल ऑपरेटरों के लिए एक खुला खतरा है।


रिपब्लिक टीवी ने इस पर बयान देते हुए कहा, “किसी समाचार चैनल को उसके दर्शकों तक पहुँचने से रोकने के लिए सत्तारूढ़ पार्टी मशीनरी और डराने के तरीकों का उपयोग करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत उल्लंघन है। रिपब्लिक भारत को रोकने करने का यह प्रयास एक स्वतंत्र प्रेस पर हमला है और एक आपातकालीन मानसिकता को दर्शाता है जो हमारे समय में एक अराजकतावाद है और इस महान लोकतंत्र के लिए एक विडंबना है।”
मीडिया नेटवर्क ने अपने बयान में कहा, “वे हर घर में दर्शकों तक पहुँचने के अपने रिपोर्ट के अधिकार और बचाव के लिए हर सम्भव प्रयास करेंगे। मीडिया नेटवर्क ने कहा कि वे रिपब्लिक के सवालों को बंद करना चाहते हैं और रिपब्लिक टीवी की रिपोर्टिंग को रोकना चाहते हैं। हालाँकि, वे रिपब्लिक टीवी को ब्लॉक नहीं कर सकते क्योंकि भारत के लोग हमारे साथ हैं।”
महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की मॉब लिंचिंग की घटना के कवरेज के बाद से ही रिपब्लिक टीवी चैनल महाराष्ट्र सरकार के निशाने पर है। इसके बाद बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के घर पर बीएमसी द्वारा की गई तोड़फोड़ कि कवरेज के दौरान भी मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक चैनल के पत्रकारों से धक्का-मुक्की की और उन्हें गिरफ्तार भी किया।

‘बेशर्म(कंगना रनौत), तू इस्लाम की बात करती है?’ 'बदतमीज महिला' : सपा प्रदेश अध्यक्ष अबू आजमी

अबू आजमी, कंगना रनौत
80 के दशक में प्रदर्शित जीतेन्द्र और सुलक्षणा पंडित अभिनीत फिल्म "अपनापन" का एक गीत "आदमी मुसाफिर है आता और जाता है ...." सुशांत राजपूत केस में चरितार्थ हो रहा है, सुशांत दुनियां में आया और गया, लेकिन अपनी हत्या से बॉलीवुड के घिनौने चेहरे को उजागर कर गया। ड्रग्स के बहाने अभी तो परदे को मात्र हाथ लगाया है, परदे के पीछे और परदे के पीछे और बिछी चादर उठनी बाकी है और जब पूरा पर्दा हटेगा, तब क्या हालत होगी, बॉलीवुड से लेकर सियासत तक जो खलबली मच रही है, स्पष्ट संकेत दिखने शुरू हो गए हैं। इस चकाचौंध दुनियां कितनी गंदगी से भरी पड़ी है। अगर गंभीरता से जाँच हुई, पता नहीं कितने धुरंदर नपेंगे, जो छद्दम सेकुलरिज्म का चोला ओढ़े सत्ता के गलियारों में बैठ जनता के धन पर मालपुए खाने के साथ-साथ अपनी तिजोरियां भर रहे हैं। आगे देखो होता क्या है? 
महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अबू आजमी कंगना रनौत से खासे खफा हैं और इसी क्रम में उन्होंने शिवसेना के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत का अनुसरण करते हुए कंगना रनौत पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर डाली। कंगना को अबू आजमी ने बेशर्म करार दिया। अबू आजमी ने दावा किया कि कंगना रनौत ने कहा था कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में इस्लामी वर्चस्व ख़त्म कर दिया। इसके बाद उन्होंने पूछा, ‘ बेशर्म! इस्लाम के बारे में बात करती है तू?’
अबू आजमी ने महाराष्ट्र विधानसभा की कार्यवाही के दौरान ये बातें कही। उन्होंने मीडिया में बयान देते हुए भी कंगना पर अलग-अलग टिप्पणी की है। इससे पहले उन्होंने कहा कि अगर कंगना रनौत को मुंबई पुलिस पर भरोसा नहीं है तो वो अपने राज्य हिमाचल प्रदेश में रहे और वहीं काम करे। उन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस कभी नाकामयाब नहीं रही है। उन्होंने कहा कि वो पहले से ही ड्रग्स को लेकर आवाज़ उठाते रहे हैं लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
लोगों की प्रक्रियाएं 


सपा नेता ने ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ की अभिनेत्री को ‘बदतमीज महिला’ बताते हुए कहा कि वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भाषा बोल रही हैं। उन्होंने ये भी कहा कि शिवसेना जो भी कर रही है, वो ठीक कर रही है। अबू आजमी वैसे तो शिवसेना के खिलाफ बोलते रहे हैं लेकिन इस बार उन्होंने कंगना रनौत के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी का पक्ष ले रहे हैं। अबू आजमी की टिप्पणियों के बाद लोगों ने उनका विरोध किया।
कुछ ही महीनों पहले सपा प्रदेश अध्यक्ष ने एक महिला पुलिसकर्मी के साथ बदतमीजी की थी। बाद में उलटा महाराष्ट्र सरकार ने अधिकारी का ही ट्रांसफर कर दिया था। आजमी ने शर्मा के सस्पेंड करने की माँग करते हुए कहा था, “ये औरत कहती है कि आप पुलिस पे इल्जाम लगाते हो, मैं बात नहीं करूँगी। तेरे बाप के बाप के बाप को बात करनी पड़ेगी।” शर्मा के तबादले को लेकर बीजेपी के पूर्व सांसद किरीट सौमैया ने उद्धव सरकार को घेरा था।
फराह खान-रिया चक्रवर्ती
फराह खान उतरी रिया के समर्थन में, कभी जिसका शौहर भी जो चूका है ड्रग्स के मामले में गिरफ्तार
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी ने भारतीय फिल्म उद्योग की कई सच्चाइयों को उजागर किया है। अभिनेता ऋतिक रोशन से संबंधित होने के लिए पहचाने जाने वाली ऐसी ही एक तथाकथित बॉलीवुड ’सेलिब्रिटी’ फराह खान ने अभिनेत्री रिया खान के साथ सहानुभूति जताने के लिए ट्विटर का सहारा लिया है।
ड्रग्स खरीदने और उसके इस्तेमाल के लिए रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार किए जाने के तुरंत बाद, फराह खान ने रिया को ‘कठिन समय में मजबूत रहने’ के लिए कहा है। फराह खान ने कहा कि ‘जब तक आपका विवेक साफ है, तब तक आप मजबूत रहेंगे।’
फराह खान ने रिया को नसीहत दी कि ‘ईश्वर में विश्वास रखें और हर दिन प्रार्थना करें’, क्योंकि उन्होंने कहा था कि ‘अगर ईश्वर ने आपको यहाँ पहुँचाया है तो सिर्फ यह ध्यान रखें कि वही आपको इससे बाहर भी निकालेगा।”
फराह खान ने खुद ही स्वीकारा है कि हालाँकि, वह रिया चक्रवर्ती से कभी नहीं मिली हैं, ना ही उन्हें, ना ही उनके परिवार को जानती हैं, फिर भी फराह खान ने रिया को मजबूत रहने की सलाह दी है।
रिया की गिरफ्तारी को लेकर फराह खान की भावनाएँ इतनी गहरी थीं कि उसने ‘टाइम्स नाउ’ की पत्रकार नविका कुमार के खिलाफ भी अपशब्द कहे। दरअसल, नाविका कुमार ने ही रिया की गिरफ्तारी की खबर शेयर करते हुए कहा था कि पहली बार ड्रग्स की कहानी उनके द्वारा ही सामने रखी गई थी।
फराह खान ने वरिष्ठ पत्रकार नविका कुमार को यह कहकर लताड़ लगाई, “एक दिन आप दूसरी तरफ होंगे और फिर वहाँ ऐसे लोग भी होंगे जो आपके लिए उतने ही निर्दयी होंगे जितने कि आप हैं। मेरी बात याद रखना।”
आश्चर्य की बात यह है कि अगर फराह खान कभी रिया से नहीं मिली, उन्हें जानती तक नहीं तो फिर वह रिया चक्रवर्ती के समर्थन में कूदने वाली पहली महिला क्यों थी? संभवतः वह रिया के दर्द को महसूस कर रही होंगी। इन्हे शायद यह भी डर सता रहा होगा कि ड्रग्स मामले में उनके शौहर या फिर उनका नाम भी न आ जाए। 
फराह खान के पति डीजे अकील 2007 में दुबई में ड्रग्स रखने के आरोप में पकड़े गए थे। हालाँकि, डीजे अकील को कुछ दिनों के बाद रिहा कर दिया गया था, जब अधिकारी उस पर किए गए परीक्षणों में ड्रग्स के सबूत खोजने में विफल रहे।
फराह खान के बारे में बहुत लोग कुछ भी नहीं जानते, लेकिन लोग बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन को जानते हैं। यह कम सुनाई देने वाली ’सेलिब्रिटी’ ऋतिक रोशन की पूर्व पत्नी सुज़ैन खान की बहन और संजय खान की बेटी है। वही संजय खान, जो 1990 के दशक की शुरुआत में एक लोकप्रिय टेलीविजन श्रृंखला में टीपू सुल्तान की भूमिका के लिए जाने जाते थे।
वह उन इस्लाम समर्थकों में से एक थीं, जो अभिनेता तुषार कपूर के पीछे सिर्फ इस कारण पड़ गई थी क्योंकि उन्होंने दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों को फ़ेक फेक न्यूज़ फ़ैलाने से बचने की अपील की थी। उन्होंने भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर पर भी दंगे भड़काने का आरोप लगाया था।
फरहा पाकिस्तान आर्मी का भी समर्थन कर चुकी है 
रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी के बाद उसके समर्थन में सामने आने वाली फराह खान ने एक बार पाकिस्तान के लिए भी अपना समर्थन जताया था। धर्मनिरपेक्ष और सहिष्णु दिखने की अपनी कोशिश में, उसने पूर्व पाकिस्तानी सेना प्रवक्ता द्वारा एक फर्जी प्रोपेगेंडा ट्वीट को री-ट्वीट किया था, जिसमें कश्मीर को ‘इंडिया ऑक्युपाइड जम्मू कश्मीर’ कहा गया था।
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सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में बॉलीवुड में सरेआम इस्तेमाल और सप्लाई किए जा रहे ड्रग्स का एंगल सामने आया है.....
जब उसे इस मूर्खता का आभास कराया गया तो उसने और भी मूर्खता के साथ जवाब देते हुए कहा कि उसने आसिफ गफूर के प्रोपेगेंडा ट्वीट को सिर्फ इस कारण समर्थन के योग्य माना क्योंकि उसके ट्विटर हैंडल में लिखा गया था- ‘पीस फॉर चेंज।’

राजदीप के लिए कभी दाऊद इब्राहिम भी था ‘विक्टिम’

रिया के झूठ की पोल खोलता सुशांत का पुराना इंटरव्यू वायरल, राजदीप और रिया के  PR स्टंट का पर्दाफ़ाश | द छीछालेदरफिलहाल रिया चकवर्ती का ‘प्रायोजित साक्षात्कार’ करने को लेकर राजदीप सरदेसाई विवादों में हैं। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में रिया मुख्य आरोपित हैं। वैसे यह पहला मौका नहीं है जब राजदीप ने अपने पाखंड से आरोपित का इमेज गढ़ने की कोशिश की है।
अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के लिए भी वे सालों पहले ऐसी ही दरियादिली दिखा चुके हैं। यह वाकया 1993 का है, जब मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों से दहल गया था। इन धमाकों में 257 लोगों की मौत हुई थी और 1,400 लोग घायल हुए थे। पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI की शह पर दाऊद ने इसे अंजाम दिया था। लेकिन उस वक्त टाइम्स ऑफ इंडिया में काम करने वाले राजदीप ने एक लेख लिखकर उसे ऐसे पेश किया जैसे वह ही पीड़ित हो। ठीक वैसे ही जैसा अभी उन्होंने रिया चकवर्ती के मामले में करने की कोशिश की है।
riya chakravarthi now with sushant singh rajput
क्या रिया चक्रवर्ती और महेश भट्ट के
मकरकाल में फंस गए थे सुशांत सिंह ? 
रिया के साथ साक्षात्कार में राजदीप ने सुशांत सिंह की कथित मानसिक बीमारी पर ज़ोर दिया। इसे ऐसे पेश किया मानो मानसिक बीमारी का आरोप वास्तविक तथ्य है, जबकि सुशांत सिंह का परिवार इस मुद्दे पर अपना पक्ष पहले ही रखा चुका है। उन्होंने कहा था कि पहले कभी सुशांत सिंह को इस तरह की कोई दिक्कत नहीं हुई थी। न ही किसी विशेषज्ञ ने उनके संबंध में ऐसा कुछ कहा था।
सुशांत पर मानसिक रूप से बीमार होने का आरोप अभी तक सिर्फ और सिर्फ रिया चक्रवर्ती ने लगाया है, जिन पर खुद इस मामले के संबंध में जाँच चल रही है। इतना ही नहीं इंटरव्यू के दौरान राजदीप ने रिया को अपनी कहानी सुनाने का भरपूर मौका देते हुए उन सवालों का जिक्र तक नहीं किया जिनके कारण रिया कठघरे में हैं।
ये कोई पहला मामला नहीं है जहाँ राजदीप सरदेसाई अपराधियों का सहयोग कर रहा हो, इस से पहले इसने कुख्यात आतंकवादी दावूद इब्राहीम को देशभक्त भी बताया था।  
India First - "MUSLIMS AND THE BLASTS Must They Wear A... | Facebookइसी तरह 1993 के बम धमाकों के बाद राजदीप ने अपने लेख में लिखा था। जिस पर पूर्व पत्रकार एसजी मूर्ति ने इस मुद्दे को चार साल पहले उठाया था और बताया था साल 1993 में राजदीप ने कैसे अपने लेख में दाऊद को ‘राष्ट्रवादी’ बताकर उसे बचाने का प्रयास किया था। लेकिन राजदीप ने तब प्रतिक्रिया के रूप में एक वीडियो बना दी और कई कुतर्क करते हुए दोबारा अपने उस दावे को सही ठहराने की कोशिश की, जहाँ उन्होंने दाऊद को ‘राष्ट्रवादी’ बताया था। इस वीडियो में उन्होंने बताया कि जिस दोषपूर्ण मानदंडों पर उन्होंने उसे राष्ट्रवादी कहा, उसकी पैरोकारी शिवसेना अध्यक्ष बाला साहब ठाकरे भी किया करते थे।
हालाँकि, यदि राजदीप के उस आर्टिकल पर नजर डाली जाए तो ये मालूम चलता है कि वाकई राजदीप ने दाऊद को राष्ट्रवादी नहीं कहा था। बल्कि वो आर्टिकल तो पूर्णत: इस बात पर था कि चूँकि भारत में मुस्लिमों को दबाया जाता है, इसलिए दाऊद ने मुस्लिम होने के नाते यह ब्लास्ट करवाए।
इसलिए यह कहना गलत नहीं है कि भले ही राजदीप ने तब दाऊद को राष्ट्रवादी नहीं कहा, लेकिन अपने कुतर्कों से उसे पीड़ित दिखाने की कोशिश जरूर की और उसको साल दर साल जस्टिफाई करते रहे। साल 2015 में उन्होंने हिंदुस्तान के एक लेख में फिर अपने पुराने प्रश्न का जिक्र किया कि आखिर साल 1992 में भारत-पाक मैच में तिरंगा लहराते हुए, भारतीय टीम को तोहफे देने वाला दुबई का स्मगलर 6 महीने में कराची का आतंकी कैसे बन गया? क्या उसके लिए बाबरी मस्जिद एक टर्निंग प्वाइंट था?
राजदीप सरदेसाई के लिए पत्रकारिता का मतलब प्रोपेगेंडा शुरुआत से ही रहा है। उनके लिए गुजरात दंगों के मामले में नरेंद्र मोदी को सुप्रीम कोर्ट से मिली क्लीनचिट मायने नहीं रखती, लेकिन दूसरी ओर चिदंबरम से माफ़ी माँगते उन्हें देर नहीं लगती। याद दिला दें कि सीएनएन आईबीएन में रहते राजदीप पर कैश फॉर वोट की स्टिंग की सीडी भी डकारने के आरोप लगे थे। इसके अलावा राडिया केस में भी राजदीप का नाम उछल चुका है।

सुशांत सिंह राजपूत : कभी गुजरात दंगों पर ‘प्रोपेगेंडा’ से रोटियॉं सेकने वाले अब रिया में अपनी TRP की तलाश

राजदीप-रिया
न्यूज़ रूम से समाचार पढ़ना और अपने विचार थोप देना एक समय तक भारतीय मीडियाकारों की सच्चाई रहा है। लेकिन तब बाजार में आज की तरह प्रतिस्पर्धा, संचार के मध्यम और सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म भी मौजूद नहीं थे। राजदीप सरदेसाई जैसे तथाकथित पत्रकारों ने शायद ही कभी सोचा होगा कि उन्हें न्यूज़रूम में बने बनाए माहौल के अलावा कभी दोहरे संचार के लिए भी लोगों के बीच होना होगा और जिस दिन ऐसा हुआ उस दिन वो लोगों के साथ मुक्केबाजी करते नजर आए।
24×7 समाचार पढ़ने और सोशल मीडिया के कारण हर शब्द के लिए जनता के प्रति जवाबदेही से राजदीप सरदेसाई जैसे लोग बौखलाए हुए हैं। दरअसल, इस हर समय जनता के सामने और जनता के बीच होने की वजह से इन पत्रकारों का वास्तविक चेहरा भी अब सबके सामने है क्योंकि हर समय आप अपने शब्दों के चयन और अपने व्यवहार के लिए न्यूज़रूम के बनाए बनाए माहौल और स्क्रिप्ट के अनुसार नहीं चल सकते।
राजदीप सरदेसाई जैसे लोग, जिन्होंने अपनी पत्रकारिता का करियर ही 2002 के गुजरात दंगों में नरेन्द्र मोदी को विलेन साबित करने और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के खिलाफ खुद ही न्यायधीश बनकर बनाया है, आज बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह की मौत में उनके परिवार द्वारा मुख्य आरोपित बताई गई रिया चक्रवर्ती का मीडिया मैनेजमेंट कर रहे हैं।
इसके साथ ही राजदीप सरदेसाई अपने निष्पक्ष होने का भी दावा करना चाहते हैं और साथ ही तटस्थ रिपोर्टर होने का भी दावा करते हैं। उससे भी बड़ी विडंबना यह कि रिया चक्रवर्ती जैसी एक विफल अभिनेत्री में राजदीप अपनी पत्रकारिता का भविष्य तलाश रहे हैं।
नरेंद्र मोदी की खरी-खरी 
यह 2014 के आम चुनावों से ठीक पहले की ही बात है जब भाजपा ने पार्टी के चेहरे के रूप में नरेंद्र मोदी को चुना और भारत अपने अगले युग के राजनितिक बदलाव की तैयारियाँ कर रहा था। राजदीप सरदेसाई इस समय सीएनएन-IBN के न्यूज़ रिपोर्टर हुआ करते थे।
राजदीप सरदेसाई ने शायद ही सोचा होगा कि उन्हें अपनी वर्षों पुरानी रोजी-रोटी के जुगाड़ की कहानी को ही फिर से दोहराने के लिए नरेंद्र मोदी की ओर से इतना स्पष्ट जवाब मिलेगा। रैली के दौरान ही राजदीप सरदेसाई ने अपने लिए नरेंद मोदी के पास जगह बनाई और माइक पर उनसे सवाल किया कि क्या 2002 के दंगे उनके भविष्य की राजनीति की राह में बाधक साबित होंगे?
इस पर नरेंद्र मोदी ने जो जवाब दिया था उसके स्वर आज तक राजदीप के कानों में गूँजते होंगे। नरेंद्र मोदी ने कहा – “मैं राजदीप सरदेसाई को शुभकामना देता हूँ कि वो पिछले दस साल से इसी मुद्दे के भरोसे जी रहे हैं।”
इस पर जब राजदीप ने अपने भावों को नियंत्रित करते हुए नरेंद्र मोदी को टोकने का प्रयास किया तो नरेंद्र मोदी ने उनसे कहा- “नहीं, सुनना पड़ेगा। इसी मुद्दे से आपकी रोजी-रोटी चलती है। और मैंने तो ऐसा भी सुना है कि मोदी को गाली देने वालों को राज्यसभा की सीट मिलती है, पद्म भूषण और अन्य पुरस्कार मिलते हैं। मेरी राजदीप को शुभकामना है कि आप अपना यह अभियान जारी रखिए और ऐसे मित्रों की मदद से राज्यसभा पहुँच जाइए…पद्म भूषण, पद्म विभूषण कुछ प्राप्त करिए।”
राजदीप ने फिर अपना घटिया और घिसा-पिटा सवाल जारी रखा और ‘कहीं ना कहीं’ को कई बार दोहराते हुए फिर कहा कि 2002 मोदी के राजनीतिक जीवन में रुकावट पैदा कर सकता है।
इस पर नरेंद्र मोदी ने उन्हें फिर उसी भाषा में जवाब देते हुए कहा – “राजदीप सरदेसाई आपके पास आपका न्यूज़ चैनल है। आप घंटों तक इस पर डिबेट चलाइए।” नरेंद्र मोदी तब भी आज जितने ही अपने पूरे नियंत्रण में थे, जबकि राजदीप के चेहरे और आवाज में आज जितना ही छिछोरापन!
राजदीप सरदेसाई और नरेंद्र मोदी के बीच बातचीत के इस दुर्लभ क्षण को इस लिंक पर देखा सकते हैं –


इसके बाद नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन में जो कुछ घटा है, वह सब हम सबके सामने है। और राजदीप के साथ क्या कुछ घटित हो रहा है वह भी हम सब देख रहे हैं। राजदीप को आज एक बॉलीवुड की ऐसी अभिनेत्री का मीडिया मैनेजमेंट करके जीवन यापन करना पड़ रहा है, जिसके खाते में उसके द्वारा की गई फिल्मों से ज्यादा उस पर एक सफल अभिनेता की मौत से जुड़े आरोप लग चुके हैं।
यह भी वास्तविकता है कि राजदीप सरदेसाई को ना ही रिया चक्रवर्ती से और ना ही सुशांत सिंह राजपूत से ही संवेदना है। वह बस TRP की रेस में किसी तरह खुद को खबरों में बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। और उन्होंने रिया चक्रवर्ती का प्रायोजित इंटरव्यू कर साबित कर दिया है कि इसके लिए वो किसी भी हद तक गुजरने के लिए भी तैयार हैं।
राजदीप के लिए यह कोई समझौते वाली बात भी नहीं है, वास्तव में यही उनका वास्तविक नजरिया है। 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही मानो राजदीप सरदेसाई पर वज्रपात हो गया। इसके रुझान न्यूयॉर्क के मेडिसन स्क्वायर पर उनके द्वारा मोदी समर्थकों के साथ की गई मुक्केबाजी थी। इसी बीच उन्होंने राज ठाकरे से भी इंटरव्यू के दौरान डाँट भी खाई। लेकिन यही राजदीप का स्वभाव है और यही उनकी फितरत है।
उन्हें तो अब यह महसूस होना भी बंद हो गया होगा कि वह अपने इस स्वभाव, जिसे वो पत्रकारिता कहते हैं, के कारण उन्हीं के पूर्व सहयोगी रवीश कुमार द्वारा ‘दुकानदार’ तक कह दिया गया। रिया चक्रवर्ती के इंटरव्यू के बाद वह हमेशा से ही विवादित बरखा दत्त से भी फटकार खा चुके हैं। जनता उन्हें रोज ही भली-बुरी बातें सुना रही है।
यही वो राजदीप सरदेसाई भी है, जो आज भी मौका मिलते ही पीएम मोदी पर गुजरात दंगों का आरोप लगाने का अवसर नहीं गँवाते। सुप्रीम कोर्ट कब की पीएम मोदी पर लगे आरोपों के बाद उन्हें दोषमुक्त भी घोषित कर चुकी है। लेकिन राजदीप की अपनी एक निजी अदालत है ; यह अदालत सस्ती लोकप्रियता और TRP के लिए उन्हें कभी न्यायधीश तो कभी वादी और कभी प्रतिवादी बना रही है। यही वजह है कि वो एक ऐसे व्यक्ति की मौत की जाँच तक को समय की बर्बादी बताने से नहीं चूकते, जो अभी अपने अभिनय के करियर के शुरूआती दिनों में ही था।
राजदीप ने सोहराबुद्दीन केस में मांगी थी माफ़ी 
इसके अलावा, राजदीप की पत्रकारिता के खोजी संस्करणों में एक बड़ी उपलब्धि तब जुड़ी थी, जब उन्होंने मई 2007 में, सीएनएन-आईबीएन के तत्कालीन प्रधान संपादक रहते सोहराबुद्दीन मामले पर एक कार्यक्रम चलाया था, जिसका शीर्षक था ’30 मिनट – सोहराबुद्दीन, द इनसाइड स्टोरी।’
सोहराबुद्दीन केस में झूठी रिपोर्टिंग के लिए ‘पत्रकार’ राजदीप सरदेसाई को कोर्ट से बिना शर्त माफी माँगनी पड़ी थी। दरअसल, इस कार्यक्रम में राजदीप सरदेसाई द्वारा पेश की गई न्यूज रिपोर्ट में कहा गया था, “पुलिस सूत्रों का कहना है कि वंजारा और पांडियन ने हैदराबाद स्पेशल इंवेस्टिगेशन यूनिट के एसपी राजीव त्रिवेदी की मदद से बीदर में सोहराबुद्दीन और कौसर बी को पकड़ा। राजीव त्रिवेदी ने फर्जी नंबर प्लेट वाली कारें मुहैया कराईं, जिसमें सोहराबुद्दीन को अहमदाबाद लाया गया और फिर एक फर्जी मुठभेड़ में मारा गया।
इस कार्यक्रम के बाद आंध्र प्रदेश स्टेट द्वारा राजदीप सरदेसाई और सीएनएन-आईबीएन के 10 अन्य पत्रकारों के खिलाफ हैदराबाद की एक अदालत में शिकायत दर्ज की गई। आईपीएस राजीव त्रिवेदी को बिना शर्त माफी जारी करते हुए राजदीप सरदेसाई ने कहा, “मैंने महसूस किया कि इसमें कोई साक्ष्य नहीं है कि स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव यूनिट के एसपी राजीव त्रिवेदी की मदद से वंजारा और पांडियन ने सोहराबुद्दीन और कौसर बी को बीदर में पकड़ा। श्री राजीव त्रिवेदी, आईपीएस के बारे में यह झूठी खबर थी।”
मोदी की कुत्ते से तुलना की थी 
इसके अलावा पीएम मोदी के लिए राजदीप की नफरत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह उनके नाम की तुलना एक कुत्ते तक से कर चुके हैं। आम चुनाव प्रचार के दौरान, जब समर्थकों ने नरेंद्र मोदी के लिए ‘नमो’ और राहुल गाँधी के लिए ‘रागा’ जैसे नामकरण करने शुरू किए थे, तो राजदीप ने फरवरी 08, 2014 को एक ट्वीट में अपने पालतू कुत्ते का नाम ‘निमो’ रखा और भारतीय पीएम उम्मीदवार की कुत्ते से तुलना करते हुए भड़काऊ ट्वीट किए।

पत्रकारिता की आड़ में वर्षों से एक परिवार और उसके कार्यकर्ताओं की ‘स्वामिभक्ति’ करने वाले राजदीप अपने अन्नदाताओं के प्रति कितने निष्ठावान हैं इस बात का उदाहरण इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब पी चिदंबरम सीबीआई से भाग रहे थे, तब राजदीप ने कहा था कि चिदंबरम राजनीतिक साजिश का शिकार बनाए गए हैं। चिदंबरम तिहाड़ में थे और राजदीप न्यूज़रूम में।
2010 में जब सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में अमित शाह को जेल भेजा गया था, तब राजदीप सरदेसाई ने इसे क़ानून की जीत बताया था। जबकि इसी राजदीप को चिदंबरम को जेल भेजे जाने पर उन्हें साजिश नज़र आ रही है।
आज यही राजदीप रिया चक्रवर्ती को निर्दोष साबित करने के लिए सुबह शाम सोशल मीडिया पर और बची हुई कसर अपने न्यूज़ चैनल पर पूरी करते देखे जा सकते हैं। वर्ष 1993 के मुंबई बम धमाके में दाउद इब्राहिम का नाम आने पर रिया चक्रवर्ती की ही तरह का ‘कवर-अप’ करते हुए राजदीप ने उसे निर्दोष बताने के लिए टाइम्स ऑफ़ इंडिया में लेख तक लिखा था।
गैर-कॉन्ग्रेसी प्रधानमंत्री से नफरत और दक्षिणपंथियों का विरोध ही राजदीप सरदेसाई की पत्रकारिता का असली चेहरा है। इसके अलावा जो कुछ है, वह सब आडम्बर और प्रासंगिक बने रहने की चाह है।

रिया चक्रवर्ती के बोल्डनेस का जबरदस्त तड़का

एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती छोटे पर्दे से लेकर बड़े तक काम कर चुकी हैं. जल्द ही वह अमिताभ बच्चन और इमराम हाशमी के साथ फिल्म चेहरे में नजर आने वाली है.फिलहाल वह सुशांत सिंह राजपूत के साथ अपने रिलेशनशिप की खबरों को लेकर चर्चा में बनी रहती है. रिया और सुशांत को कई जगह एक साथ स्पॉट किया जाता है और दोनों सोशल मीडिया पर भी अपनी तस्वीरें शेयर करते रहते हैं.
रिया चक्रवर्ती अपनी फिल्मों के साथ साथ सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती है. यूट्यूब से लेकर इंस्टाग्राम पर उनके हॉट अंदाज छाए रहते हैं. इंस्टाग्राम प रिया हमेशा ही अपनी हॉट सेक्सी फोटो वीडियो शेयर करती रहती है. फैंस भी उनके इन सेक्सी अवतार को काफी पसंद करते हैं. खूबसूरत और ग्लैमरस अंदाज से भरपूर रिया के जबरदस्त लुक को देख आप भी उनके दीवाने हो जाएंगे. देखिए रिया का बेहद हसीन लुक.
रिया चक्रवर्ती अपने बोल्ड सेक्सी लुक से सोशल मीडिया पर कहर बरपाती रहती है. सोशल मीडिया पर रिया की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि अकेले इंस्टाग्राम पर उनके 2.3 मिलियन के करीब फॉलोअर्स हैं.इसके साथ ही यूट्यूब पर भी उनके हॉट वीडियो खूब देखे जाते हैं. इसके अलावा रिया आए दिन फोटोशूट भी कराती रहती है, जिसकी तस्वीरें वो फैंस के साथ शेयर करती है.


बता दें कि रिया साउथ से लेकर बॉलीवुड तक की फिल्मों में काम कर चुकी है. वैसे तो अपने करियर की शुरुआत रिया ने टीवी शो से की. लेकिन बड़े पर्दे पर वह सबसे पहली बार तेलुगू फिल्म तुनेगा तुनेगा में नजर आई. इसके बाद उन्होंने फिल्म सोनाली केबल के साथ अपना बॉलीवुड डेब्यू किया. हालांकि ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल तो नहीं दिखा सकी लेकिन रिया के एक्टिंग की काफी तारीफ की गई. इसके बाद रिया बैंकचोर, हाफ गर्लफ्रेंड, जलेबी जैसी फिल्मों में दिखी.