अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी मामले पर आज (नवंबर 6, 2020) सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र विधानसभा के सचिव को फटकार लगाई है। कोर्ट ने पूरे मामले पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करके उनके पत्र पर उनसे दो हफ्तों में जवाब माँगा है।
इसके साथ ही कोर्ट ने अर्णब को राहत प्रदान करते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि उन्हें वर्तमान कार्यवाही के बाद गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
लाइव लॉ के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेआई ने महाराष्ट्र विधानसभा के सचिव को शीर्ष न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने का नोटिस जारी किया और इसमें उनसे कारण बताने को कहा गया कि आखिर क्यों उनके द्वारा लिखे पत्र के विरुद्ध कार्यवाही नहीं शुरू की जानी चाहिए।
[Breaking] Supreme Court Issues Contempt Notice To Maharashtra Assembly Secretary Over Letter To Arnab Goswami; Stays Arrest Of Republic TV Anchor https://t.co/NGH4PzKehD
आज सुप्रीम कोर्ट में अर्णब की गिरफ्तारी का पूरा मामला वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने उठाया और अर्णब को किसी भी प्रकार की कार्रवाई से बचाने की अपील की। उन्होंने अर्णब की ओर से बताया कि उन्हें धमकी दी जा चुकी थी, “तुमने हमें गाली दी है। ये दीवाली तुम जेल में बिताओगे।”
कोर्ट ने सारा पक्ष सुनकर पूरे मामले पर हैरानी जताई कि आखिर किसी नागरिक को कोर्ट जाने से कैसे रोका सकता है। उसे कैसे धमकाया जा सकता है। सीजेआई ने नाराजगी महाराष्ट्र विधानसभा सचिव पर जाहिर करते हुए कि आखिर अनुच्छेद 32 किसलिए है?
#CJI: Though the Respondents have been served apparently on October 5, 2020 (affidavit of service October 13), they have issued a letter dated October 13 to #ArnabGoswami. We therefore issue notice to the Secretary of Maharashtra Legislative Assembly.
सीजेआई ने कहा, “हमारे पास पत्र लिखने वाले के लिए गंभीर सवाल है और हमारे लिए इसे अनदेखा करना बेहद मुश्किल है।” सीजेआई विधानसभा सचिव के पत्र पर बोले, “ये न्याय की प्रक्रिया में व्यवधान है, पत्र लिखने वाले की भाषा अर्णब को धमकाने वाली है। ऐसा लगता है जैसे पत्र लिखने वाली की मंशा याचिकाकर्ता को डराने वाली थी क्योंकि उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।”
अर्णब गोस्वामी को बुधवार को बिना समन जारी किए जबरदस्ती घर से उठाया गया था। कुछ पुलिस अधिकारी उनके घर पहुँचे थे और उनके साथ मारपीट करते हुए उन्हें एक पुराने केस में गिरफ्तार किया था।
इसके बाद अर्णब की कई वीडियोज सामने आई थी। वीडियो में उनके शरीर पर मारपीट के निशान साफ नजर आए थे, जिसे देख जगह-जगह मुंबई पुलिस के रवैये की आलोचना हुई थी।
देर रात तक अदालत की सुनवाई चलने के बाद अर्णब को कल 18 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया जबकि मुंबई पुलिस लगातार 14 दिन की हिरासत का अनुरोध कर रही थी। अदालत ने पुलिस से कहा कि हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है।
जिस तरीके से रिपब्लिक टीवी के मुख्य संपादक अर्नब गोस्वामी को गिरफ्तार किया गया है, 1975 में देश में लगी इमरजेंसी के दौरान दैनिक The Motherland और Organiser साप्ताहिक के मुख्य संपादक केवल रतन मलकानी(स्व) की गिरफ़्तारी को तरोताजा कर दिया है। इमरजेंसी लगते ही, The Motherland के ऑफिस और मलकानी जी के घर को पुलिस ने चारों तरफ से घेर लिया था। शायद मेरे से वरिष्ठ पत्रकार और नेता भी मलकानी जी गिरफ़्तारी को नहीं भूले होंगे और अगर भूल गए होंगे, तो अर्नब ने लगभग 45 वर्ष पूर्व मलकानी जी को याद करवा दिया है। महाराष्ट्र की कांग्रेस शिवसेना सरकार ने एक बार फिर इमरजेंसी की याद दिला दी है। उद्धव ठाकरे सरकार की मुंबई पुलिस ने बुधवार तड़के रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी के घर पहुंच उनके साथ मारपीट की फिर गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई। फ्रीडम ऑफ प्रेस पर कांग्रेस-शिवसेना सरकार ने प्रहार किया है। कांग्रेस के साथ शिवसेना ने यह कदम उठाकर एक तरह से अघोषित आपातकाल का संकेत दे दिया है। अर्नब की गिरफ्तारी को लेकर सोशल मीडिया पर प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर लोग अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।
महाराष्ट्र में आपातकल जैसी स्थिति हो गई है। उद्धव सरकार के खिलाफ उठ रही आवाज को दबाने के लिए अब मुंबई पुलिस दमन पर उतर आई है। मीडिया का गला घोंटने के लिए मुंबई पुलिस ने आत्महत्या के एक पुराने और बंद पड़े मामले में बुधवार सुबह रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन चीफ अर्नब गोस्वामी पर कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया। यहां तक कि पुलिस ने बिना किसी दस्तावेज के, अर्नब के घर में घुसकर उनके साथ मारपीट की। इसके बाद गिरफ्तार कर अपने साथ पुलिस वैन में ले गई।
#BREAKING on #IndiaWithArnab | अर्नब गोस्वामी ने अपने निवास में पुलिस द्वारा शारीरिक हमले की पुष्टि की; जब वो पुलिस वैन की खिड़की से बोल रहे थे तो रिपब्लिक की क्रू टीम को धक्का दिया गया
Every person who believes in a free press and freedom of expression is furious at the Maharashtra Government’s bullying and harassment of Arnab Goswami. This is yet another instance of Sonia and Rahul Gandhi-directed antic of silencing those who disagree with them. Shameful!
We condemn the attack on press freedom in #Maharashtra. This is not the way to treat the Press. This reminds us of the emergency days when the press was treated like this.@PIB_India@DDNewslive@republic
अर्नब ने पुलिस पर अपने साथ मारपीट का आरोप लगाया। रिपब्लिक टीवी ने अर्नब के घर के लाइव फुटेज भी दिखाए जिसमें पुलिस और अर्नब के बीच झड़प होती दिख रही है। अर्नब गोस्वामी का कहना है कि मुंबई पुलिस ने उनकी सास, सुसर, बेटे और पत्नी के साथ मारपीट की। रिपब्लिक टीवी पर प्ले की गई वीडियो के मुताबिक मुंबई पुलिस ने अर्नब गोस्वामी के साथ भी मारपीट की।
जब अर्नब को जबरदस्ती पुलिस वैन में बिठाया जा रहा था, तब उन्होंने कैमरे को देखकर कुछ बोलने की कोशिश की। वैन की खिड़की से उन्होंने बोला- “उन्होंने मेरे बेटे के साथ मारपीट की। मेरे रिश्तेदारों से मिलने नहीं दिया। मेरे साथ मेरे घर में मारपीट की गई। मैं चाहता हूं कि भारत की न्याय व्यवस्था और देश के लोग इसे देखें।”
सीनियर एग्जीक्यूटिव एडिटर और अर्नब की पत्नी सम्यब्रता रे गोस्वामी ने कहा कि पुलिस ने अर्नब गोस्वामी के साथ गलत व्यवहार किया और जांच अधिकारी ने अर्नब को ये कहते हुए धमकी दी कि “मैं कुछ भी कर सकता हूं।” हमारे कैमरे तब तक चालू नहीं थे, लेकिन उन्होंने अर्नब की पिटाई कर दी, उन्होंने अपने भी कैमरे बंद कर दिए। उन्होंने उन्हें बालों से पकड़ रखा था। अर्नब ने कहा कि उन्हें वकील चाहिए। उन्होंने मुझे कुछ कागज पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया।
सम्यब्रता रे गोस्वामी ने कहा कि पुलिस ने अर्नब से कहा कि वे उन्हें रायगढ़ पुलिस स्टेशन ले जाएंगे। लगभग 20 मिनट तक अर्नब कहते रहे कि मुझे दवाइयां लेने दो, हम अपने माता-पिता को भी नहीं बता सके, वहां महिला पुलिसकर्मी थी जिन्होंने हमें रोका।”
गौरतलब है कि मुंबई पुलिस के एक दर्जन से अधिक अधिकारी सुबह 6:30 बजे मुंबई के परेल में अर्नब के आवास पर पहुंचे और सभी प्रवेश और निकास मार्गों को ब्लॉक कर दिया। पुलिस ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के संपादकों निरंजन नारायणस्वामी और संजय पाठक को भी अर्नब के निवास में प्रवेश करने से रोक दिया।
मुंबई पुलिस के एनकाउंटर-विशेषज्ञ एपीआई सचान वेज़ ने रिपब्लिक को पुष्टि की कि अर्नब गोस्वामी को एक ऐसे मामले में गिरफ्तार किया गया है, जिसका टीआरपी मामले से कोई लेना-देना नहीं है, जिसमें रिपब्लिक को फंसाने की कोशिश की गई है। मिली जानकारी के अनुसार अब उन्हें रायगढ़ पुलिस स्टेशन ले जाया गया। अर्नब गोस्वामी को 2018 में इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक और उनकी मां कुमुद नाइक की आत्महत्या की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया है।
अर्नब के विरुद्ध की गयी इस कार्यवाही पर लोगों की प्रक्रियाएं :-
अर्नब से सहमत हो न हो इस बात पर हम सब को सहमत होना ज़रूरी है कि उनके साथ जो हो रहा है वो सरासर ग़लत है। असहमति के मायने अगर गिरफ़्तारी है तो आगे आपकी बारी है।
वैसे तो कांग्रेस का आपातकाल से लगाव सबके सामने है पर सोचिए कि अर्नब गोस्वामी को पुराना मामला खोलकर पुलिस उठाकर ले जाती है और रवीश कुमार के भाई के यौन शोषण के पुराने मामले को इग्नोर मारकर चुनाव का टिकट मिलता है।फिर भी ये और इनके पिद्दी पत्रकार दूसरों को गोदी मीडिया बताते नहीं थकते
अर्नब गोस्वामी की पत्रकारिता के कई पहलू ऐसे हैं जिनसे जरूरी नहीं कि आप सहमत हों। लेकिन मुंबई पुलिस की कार्रवाई बदले की भावना से की गई है। पुलिस को यह ध्यान रखना होगा कि वह किसी राजनीतिक दल या नेता की निजी सेना की तरह काम नहीं कर सकती। पुलिस कार्रवाई निंदनीय और भर्त्सनीय है।
अर्णव से आप असहमत हो सकते है। पर अर्णव से पुलिसिया बदसलूकी और गिरफ़्तारी अभिव्यति की आज़ादी पर हमला है।इतिहास ने पहले भी साबित किया है कि गिरफ़्तारी से अभिव्यक्ति की आज़ादी का गला नही घोंटा जा सकता है। हम इसकी निंदा करते है। @republic@YRDeshmukhhttps://t.co/GEldyesUcK
आप किसी से सहमत या सहमत हो सकते हैं लेकिन पुलिस भेज कर जबरन घर में घुसकर मारपीट नहीं कर सकते, #ArnabGoswami का क़सूर सवाल पूछना है तो सभी पत्रकारों को जेल डाल दो ? महाराष्ट्र में इमरजेंसी का स्वागत हैं ?
अर्नब के साथ मारपीट करने वाले मुम्बई पुलिस के इन जांबाजों को कुर्ला में लॉकडाउन के दौरान नमाजियों की नमाज बंद करने क्यों नही भेजा गया? वहॉ इनकी बहादुरी की बेहद सख्त जरूरत भी थी। वहॉ इनकी बहादुरी कैसी पानी मांग रही थी ये वीडियो उस बात की तसदीक करता है। pic.twitter.com/9TTSWtiAWV
देश में आपातकाल जैसा माहौल कल जम्मू में अमनदीप सिंह को तिरंगा फहराने पर अरेस्ट कर लिया था और आज महाराष्ट्र में अर्णव गोस्वामी को सुशांत राजपूत और पालघर के साधुओं की हत्या के मामले में लगातार सवाल पूछने पर अरेस्ट कर लिया गया pic.twitter.com/PfPEirSbbx
रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी इंटीरियर डिजाइनर को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में गिरफ्तार। धन्यवाद मुंबई पुलिस। इंसाफ होना चाहिए। #WellDoneMumbaiPolicepic.twitter.com/o7TRi6UQ00
Sir🙏, But when will u take immediate & Strict action agst #mahagovt ? Ye sirf commentary chalu rahegi ya kuchh kade action le rahe ho aap ? Satte mein aake kisi ke upar farzi aarop laga diya jata hai aur phir usse nikalne ke liye lamba procedure follow karna padta hai, kyun?
भारत में अनकहा आपातकाल घोषित किया गया है? क्या भारत की राजधानी दिल्ली से मुंबई स्थानांतरित कर दी गई है? अवार्ड वापिस गैंग कहाँ है? क्या महाराष्ट्र चीन बन गया है? आज राजनैतिक आतंकवादी द्वारा लोकतंत्र की हत्या कर दी गई!#IAmRepublic#PresidentRuleInMaharashtra#justiceforArnab
— YuvaAnchal🎙Voice Of Youngisthan (@SumitGuha621) November 4, 2020
2019 चुनाव में अपने प्रचार के दौरान साध्वी प्रज्ञा द्वारा ATS अधिकारी करकरे के विरुद्ध बोलने पर विपक्षी अपनी पोल खुलती देख चुनाव आयुक्त के पास रोना-रोने पहुँच गए थे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी किसी मजबूरी में उनसे अपनी नाराजगी दिखाई, लेकिन प्रताड़ना भोगी की उत्पीड़न किसी सुनी। अक्सर अपने लेखों में बेगुनाह साध्वी प्रज्ञा, स्वामी असीमानंद और कर्नल पुरोहित को किस तरह कांग्रेस समर्थित तत्कालीन यूपीए सरकार इस्लामिक आतंकियों को बचाने के लिए "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के झूठे प्रचार को बल देने के लिए इनको पकड़ जेलों में डाल यातनाएं दे रही थी, विपरीत इसके छद्दम देशप्रेम दिखाने के लिए पकडे गए आतंकवादियों को कोरमा, बिरयानी खिलाया जाता था। रिपब्लिक टीवी को साक्षात्कार देते हुए भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा ने आज अर्नब गोस्वामी और पूरे देश के सामने लगातार कई चौंकाने वाले खुलासे किए। इस इंटरव्यू में उन्होंने मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा है कि 3-4 पुलिसकर्मियों की उपस्थिति में उनको व्यक्तिगत रूप से बहुत ज्यादा प्रताड़ित किया और हिरासत में लेकर उन्हें बेल्ट से इस तरह पीटा गया कि उन्हें वेंटीलेटर तक पर जाना पड़ा। उनकी रीढ़ की हड्डी भी टूट गई।
इतना ही नहीं भगवा आतंक के नाम पर पुलिस बर्बरता झेल चुकी साध्वी प्रज्ञा का कहना है कि जब जब उनकी बेल की बात चली तो न्यायाधीशों तक को धमकी देने का काम हुआ। उन्होंने परमबीर सिंह पर आरोप लगाया है कि उन्हें हिरासत के दौरान पॉर्न वीडियो दिखाई गईं और उनसे भद्दे सवाल किए गए।
मेरे ऊपर फर्जी केस लगाया गया। महाराष्ट्र ATS ने वर्दी का दुरुपयोग किया। ये देशद्रोही केस था, मुझे मालेगांव मामले में मास्टरमाइंड बनाया गया: साध्वी प्रज्ञा- सांसद, BJP
पहले हमको भगवा आतंकवादी कहलवाया गया। भारत को आतंकवादी देश घोषित करना इनका षड्यंत्र था। ये कांग्रेस का षड्यंत्र था। ऐसे देशघाती लोगों के सामने रुकेंगे नहीं झुकेंगे नहीं: साध्वी प्रज्ञा- सांसद, BJP
परमबीर सिंह अत्याचारी और निम्न स्तर का व्यक्ति है। गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त है। इस व्यक्ति ने मुझे जेल में डाल करके, जिन्हें पिटने का अधिकार नहीं होता है उसने इतनी भयानक यातनाएं दी जो किसी अन्य महिला को नहीं दी गई होगी: साध्वी प्रज्ञा- सांसद, BJPhttps://t.co/G945HvzM0Zpic.twitter.com/ICNHOP7gkh
महाराष्ट्र सरकार एक बार अन्याय कर चुकी है। मालेगांव कांड में हिंदुओं का नाम डाला। इसमें कितने लोग आहत हो रहे हैं इससे उन्हें कोई मतलब नहीं है: साध्वी प्रज्ञा- सांसद, BJP
इनका षड्यंत्र था, हमें सालों साल जेल में रखा जाए। ऐसे अफसर राजनीतिक तौर पर चलते हैं। कांग्रेस परमबीर जैसे लोगों को पालती है: साध्वी प्रज्ञा- सांसद, BJP
परमबीर वहां पर खड़े थे, इंस्पेक्टर अवाड, स्वर्णा शिंदे थी। 7-8 लोगों ने सर्कल करके मुझे पीटा। मुझे पैरों के तलों में बेल्ट से मारा जाता था: साध्वी प्रज्ञा- सांसद, BJP
परमबीर ने इंस्पेक्टर की बेल्ट छीनकर, जितनी ताकत थी उतनी ताकत से मुझे पीटा। परमबीर के सामने मुझे गंदी फिल्में सुनाई गई। परमबीर ने वकालतनामा साइन नहीं करने दिया। परमबीर के रहते महाराष्ट्र पुलिस में न्याय नहीं हो सकता: साध्वी प्रज्ञा- सांसद, BJP pic.twitter.com/Q51UUADCA8
साध्वी प्रज्ञा ने यह भी कहा कि उन्हें 7-8 लोगों के सर्कल के बीच में उन्हें मारा गया। उनके पैरों के तलों तक में बेल्ट से पिटाई हुई। साध्वी ने इस इंटरव्यू में कहा है कि वह परमबीर के षड्यंत्र के विरुद्ध कुछ करने वाली हैं, जिन जिन लोगों ने उन्हें प्रताड़ित किया, उन पर भी केस होगा और उन्हें दंड दिलवाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पहले उनको भगवा आतंकी कहा गया कहा गया और फिर भारत को आतंकवादी देश घोषित करवाने का प्रयास हुआ। उनका आरोप है कि ये सारा षड्यंत्र कॉन्ग्रेस का था।
ट्विटर पर लोगों की प्रक्रिया :-
जिस दिन हिन्दू भगवा आतंकवादी बन गया तो बाकी धर्म के लोग हिन्दुस्तान छोड़कर भाग जाएगे न कोई कॉग्रेस रहेगी न कम्युनिस्ट न बॅालीवुड रहेगा
नपुंसक परम.. की औकात बताती हुई साध्वी प्रज्ञा, इतना टॉर्चर किया रीड की हड्डी तक तोड़ दी वर्दी के अंदर छिपा दरिंदा, हैवान, वर्दी पर कलंक है यह देशद्रोही, इतने बड़े पद पर ऐसे नीच व्यक्ति को बैठाना देश का अपमान है,संविधान का अपमान है😡#SadhviExposesParamBir pic.twitter.com/AZP9l63BRp
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर खुद लवजिहाद के झूठे मामलों को भी टवीटर पर शेयर करतीं हैं ओर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाती है ओर दुसरी बात ये की खुद गोडसे वादी है पहले कानून तोडते है ओर जब कानून अपना काम करता है तो इनको दर्द होता है जैसे नशेड़ी सपांदक अर्नब गोस्वामी को होता है
बहुत ही अच्छा अर्णव जी।मेरे सुझाव को आपने मानकर साध्वी जी को बुलाया बहुत बहुत धन्यवाद।परमवीर को आज देश के सामने साध्वी जी ने नंगा कर दिया ओर उसके काले कारनामों का पर्दाफाश कर दिया।ये देश की जनता को बताना जरूरी था।अब परमवीर को इस्तीफा दे देना चाहिए।
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार जिस तरह पालघर में साधुओं की हत्या, बॉलीवुड में ड्रग माफिया और सुशांत सिंह राजपूत की हत्या आदि को रिपब्लिक टीवी उछाल रहा है, उससे महाराष्ट्र सरकार इतनी बौखला कर उन कामों को अंजाम से रही है, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने संघ के अंग्रेजी दैनिक Motherland, Organiser Weekly और इन दोनों प्रकाशनों के मुख्य संपादक केवल रतन मलकानी के साथ भी नहीं किया। मुझसे वरिष्ठ पत्रकार और नेता इस बात से भलीभांति परिचित होंगे। आपातकाल को छोड़, इंदिरा गाँधी ने भी कभी अपनी घोर विरोधी प्रेस पर इतने प्रहार नहीं किए, जो आज महाराष्ट्र में एनसीपी और कांग्रेस की बैसाखियों पर चलने वाली उद्धव सरकार रिपब्लिक टीवी के साथ कर रही है।
हैरानी इस बात पर होती है, कि Freedom of expression पर शोर मचाने वाला गैंग भी खामोश है, मानो उनके कानों में सीसा डाला हुआ है। क्या एनसीपी और कांग्रेस की बैसाखियों पर चलने वाली उद्धव सरकार और Freedom of expression पर शोर मचाने वाला गैंग देश से ड्रग्स माफिया को समाप्त करना नहीं चाहता? क्या इन्हीं लोगों की छत्रसाया में ड्रग माफिया फलफूल रहा है?
How badly reporter sohel is treated by bombay police. Home minister of india must interfere and take legal action againest bombay police commissner It's shameful for Home Minister of India not taken any legal action against bombay police commissner up till now.
Tomorrow SARAMveer will sit on the head of PM & HM also....had they keep their mouth shut? I am really feeling shame on PM & HM now...what they are waiting for? Have they also surrendered to the Maha Agadi Govt? What is happening? Where is Supreme Court? #BharatwithArnabGoswami
What is the central Government doing. The people of India already know that the MVA is playing dirty politics and using the state police to even its score
Why arent the courts, the judges, the Judiciary of this country failing minute by minute.#RepublicWitchhunt
महाराष्ट्र में पूरी तरह आपातकाल की स्थिति है। उद्धव सरकार और पुलिस कानून की धज्जियां उड़ा रही हैं। जहां रिपब्लिक टीवी को परेशान करने के लिए मुंबई पुलिस तरह तरह के आदेश जारी कर रही है और हथकंडे अपना रही है, वहीं रिपब्लिक टीवी के कर्मचारियों पर हमले भी हो रहे हैं। महाराष्ट्र के गृहमंत्री से सवाल पूछने पर रिपब्लिक टीवी के पत्रकार सोहेल पर हमला किया गया। उनके साथ मारपीट की गई, जिससे उनके मुंह से खून निकलने लगा। किस कारण पत्रकार को पीटा गया? क्या पत्रकार चोर, डाकू अथवा कोई लुटेरा था, जो उसे इतनी बेदर्दी से पीटा गया? क्या महाराष्ट्र गृहमंत्री अपने साथ गुंडों की फौज लेकर चलती है, यदि नहीं तो फिर किस कारण इतना पीटा की खून निकलने लगे? अपने विरोधी प्रेस पर इतना अत्याचार तो इंदिरा गाँधी ने भी नहीं किया।
महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख का काफिला जब निकल रहा था, उस समय रिपब्लिक टीवी के पत्रकार सोहेल अनिल देशमुख का बयान लेने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन पुलिस और अन्य लोग उन्हें रोकने की कोशिश कर रहे थे। आप वीडियो में देख सकते हैं कि किस तरह सोहेल को रोका जा रहा है। इस दौरान सोहेल के साथ मारपीट की गई, जिससे वे घायल हो गए।
TRP स्कैम में ‘Republic TV’ का नाम लेने के लिए गवाहों पर दबाव बना रही मुंबई पुलिस
TRP स्कैम का मुद्दा गर्माने के बाद से मुंबई पुलिस की भूमिका लगातार शक के घेरे में है। पहले इस बात का खुलासा हुआ कि मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में निराधार ही Republic TV का नाम पूरे घोटाले मेंलिया, जबकि दर्ज शिकायत में समाचार चैनल ‘इंडिया टुडे’ का नाम था, और अब ताजा खुलासे में यह पता चला है कि कैसे मुंबई पुलिस अपनी मनमर्जी से गवाह के बयान को तोड़-मरोड़ कर ‘Republic TV’ को इस पूरे घोटाले का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रही है।
‘ऑपइंडिया’ के पास आई एक कॉल रिकॉर्डिंग इस बात की पुष्टि करती है कि रिपब्लिक टीवी को फँसाने के लिए मुंबई पुलिस गवाहों पर भी दबाव बना रही है। जिस गवाह ने यह खुलासा आपने पड़ोसी के सामने किया है, उसके घर में एक बार-ओ-मीटर लगाया गया है।
ये रिकॉर्डिंग दो लोगों के बीच की है। पहला – जिसके घर ‘बार-ओ-मीटर’ लगाए और दूसरा- उसका पड़ोसी! गौरतलब है कि भारत में ब्रॉडकास्ट ऑडिएंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) 45 हजार से अधिक घरों में एक उपकरण लगाकर प्वाइंट की गिनती करता है। इस उपकरण को ‘बार ओ मीटर’ कहा जाता है।
ऑडियो में क्या है?
इसकी जानकारी देने से पहले बता दें कि ऑपइंडिया के पास यह रिकॉर्डिंग बेहद विश्वसनीय स्रोत्र के जरिए आई है। इससे मालूम पड़ रहा है कि व्यक्ति अपने परिवार व अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता में है क्योंकि कॉल रिकॉर्डिंग के अनुसार, मुंबई पुलिस उसके घर में रात 3:00 -3:30 बजे घुस गई। दोनों के बीच की बातचीत से स्पष्ट होता है कि मुंबई पुलिस ‘रिपब्लिक टीवी’ के खिलाफ बयान देने के लिए दबाव बना रही है, जिसके कारण गवाह अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर काफी डरा हुआ है।
ऑडियो में पहला व्यक्ति अपने पड़ोसी को बताता है कि मुंबई पुलिस उनके घर में मशीन (बार ओ मीटर) की जानकारी जुटाने आई थी और उनसे कहा कि उन्होंने किसी को अरेस्ट किया है जिसने पूछताछ में उन लोगों का नाम लिया है। इसके बाद उन्होंने मशीन के बारे में पूछा। साथ ही ये भी जानना चाहा कि उन्हें पैसे कैसे मिलते हैं, उन्हें कौन पैसे देता है, और कहाँ से उन्हें पैसे मिलते हैं।
कॉल पर पड़ोसी से बात करते हुए व्यक्ति बेहद घबराया हुआ प्रतीत होता है और बार-बार कहता है कि 10-12 पुलिस वाले आए थे, अगर ऐसे ही आते रहे तो उसके आस पड़ोस के लोग क्या बोलेंगे। वह कहता है कि पुलिस ने उन्हें बताया कि गिरफ्तार हुए शख्स ने उसके परिवार का नाम लेकर कहा है कि उसने यहाँ 500 रुपए दिए हैं और 200 रुपए अकॉउंट में भेजे हैं। पड़ोसी को व्यक्ति ने यह भी बताया कि जब उसके घर में पुलिस आई तब वह ड्यूटी पर था और पुलिस उसके घरवालों से उससे जुड़ी सारी जानकारी लिख कर ले गई।
यहाँ पड़ोसी ने व्यक्ति को झूठ बोलने की सलाह दी कि वह बता दे कि वह कोई चैनल नहीं देखता उसे ढाई सौ रुपए भाड़े के मिलते हैं। हालाँकि घबराए व्यक्ति ने झूठ बोलने से साफ मना कर दिया और कहा कि जब गिरफ्तार हुआ युवक कह चुका है कि उसने पैसे दिए तो झूठ बोलने का कोई मतलब नहीं है।
इसके बाद, पड़ोसी ने पूछा कि क्या पुलिस ने उनसे यह भी पूछा कि वह कौन सा चैनल देखते हैं। इस पर पहले व्यक्ति ने कहा कि उसके घरवालों ने पुलिस को बताया कि ‘न्यूज नेशन’ पर स्कीम आई थी और उन्होंने उस स्कीम से खुद को जोड़ा, बाद में उन्हें सुविधा मिलने लगी।
इस पर पुलिस ने उन्हें कहा कि इस केस का ‘न्यूज नेशन’ से लेना देना नहीं है। इसमें इंडिया टुडे और रिपब्लिक भारत हैं। जिसे सुनकर व्यक्ति के बेटे ने कहा कि वो दोनों में से कोई चैनल नहीं देखते। जब उनके पिता घर पर होते हैं तो ही वह न्यूज नेशन देखते हैं।
फोन पर घबराई आवाज में व्यक्ति साफ कहता है कि पुलिस ने ‘रिपब्लिक भारत’ का नाम लिख लिया है। इस पर दूसरा व्यक्ति कहता है कि पुलिस ये सब उन्हें (अनुमान के मुताबिक रिपब्लिक टीवी) फँसाने के लिए कर रही है। इस पर व्यक्ति और ज्यादा चिंता में पड़ जाता है और कहता है कि पुलिस उसके ख़िलाफ़ भी झूठे आरोप लगा देगी।
ऑडियो में एक जगह पड़ोसी घबराए व्यक्ति को यह भी सलाह देता है कि अगर उनके घर 20 पुलिसकर्मी भी आए होते तो उन्हें बताना चाहिए था कि रिपब्लिक भारत उन्हें पैसे नहीं देता। आगे पड़ोसी बताता है कि महाराष्ट्र सरकार रिपब्लिक भारत के ख़िलाफ़ है और उसी के लिए कुछ सबूत ढूँढने का प्रयास कर रही है। वह लोग (बार ओर मीटर वाले घर के लोग) तो बस ग्राहक हैं। उसने कहा कि अगर कोई उन्हें पैसे देगा तो उन्हें उनके चैनल को देखने में भी दिक्कत नहीं होगी।
ध्यान देने वाली बात है कि अभी तक की बातचीत से साफ पता चल रहा है कि ‘न्यूज नेशन’ व्यक्ति के घरवालों को पैसे देता था, रिपब्लिक भारत नहीं। इसके अलावा, व्यक्ति यह भी कहता है कि जरूर पुलिस ने गिरफ्तार हुए आदमी को पीटा होगा।
व्यक्ति बताता है कि 10-12 पुलिसकर्मी उसके घर में आए थे और 5-6 बाहर खड़े थे। उन लोगों ने पहले ही अपने कागज पर ‘आर भारत’ का नाम लिखा था। वह चिंता व्यक्त करता है कि आज पुलिस का एक विभाग आया है कल को दूसरा विभाग दरवाजे पर आएगा। ऐसे तो आस पास के लोग उसे जगह खाली करने को कह देंगे।
सारी बात सुनकर पड़ोसी कहता है कि महाराष्ट्र पुलिस केवल रिपब्लिक भारत के ख़िलाफ़ केस बनाना चाह रही है। वहीं, व्यक्ति किसी भी प्रकार के ‘लफड़े’ को लेकर, कोर्ट कचहरी को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करता है। साथ ही कहता है कि उसकी पत्नी घर में अकेले रहती है वो क्या बात कर पाएगी पुलिस वालों से?
गौरतलब है कि इस ऑडिया रिकॉर्डिंग में जिस शख्स की गिरफ्तारी की बात हो रही है और जिसके बयान के आधार पर पुलिस व्यक्ति के घर पहुँची, उसका नाम उमेश हैं। ऑपइंडिया ने यह मामला सामने आने के बाद उमेश के वकील गिरी को सम्पर्क किया। वकील ने बताया कि उमेश का संबंध कॉल वाले व्यक्ति से है। हालाँकि, जब हमने ऑडियो की प्रमाणिकता और उसमें हो रही बातचीत पर सवाल किए तो उन्होंने कहा कि ये मामला अभी उपन्यायिक है इसलिए इसकी प्रमाणिकता पर कुछ कहना उचित नहीं है। (एजेंसीज इनपुट्स सहित)
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार महाराष्ट्र मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सुशांत सिंह हत्या पर हो रही कार्यवाही से इतने विचलित क्यों हो रहे हैं? क्या उनकी सरकार ड्रग माफियों के सहारे चल रही है? यदि नहीं रिपब्लिक टीवी पर पाबन्दी लगाने का क्या मतलब निकाला जाए? क्या जिस उद्देश्य से आपके पिताश्री बालासाहेब ने शिव सेना उसे क्यों ताक रख सुशांत हत्या की आड़ में बॉलीवुड के माध्यम से पूरे देश में फ़ैल रही गंदगी के उजागर होने से क्यों परेशानी हो रही है? क्यों पत्रकारों को गिरफ्तार किया? जितना इस मुद्दे को उलझाया जाएगा, उससे कहीं अधिक गुल खिलाने वाला है। रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के मुखिया अर्नब गोस्वामी ने हाल ही में गिरफ्तार किए गए अपने दो कर्मचारियों की तत्काल रिहाई की मॉंग महाराष्ट्र सरकार से की है। साथ ही रिपब्लिक टीवी का प्रसारण बंद करने को लेकर केबल ऑपरेटर्स को शिवसेना की ओर से दी गई धमकी को लेकर भी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चेताया है। रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के रिपोर्टर अनुज कुमार और कैमरामैन यशपालजीत सिंह को महाराष्ट्र पुलिस ने उस वक़्त हिरासत में लिया था, जब दोनों रिपोर्टिंग के लिए रायगढ़ गए थे। अर्नब गोस्वामी ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के खिलाफ तीखा हमला करते हुए दोनों पत्रकारों को तत्काल रिहा करने की माँग की है। अर्नब गोस्वामी ने कहा, “उद्धव ठाकरे, मेरे पत्रकारों को रिहा करो। आपने कानून तोड़ा है और हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। आपने संविधान नहीं लिखा और आपको इसे अपने हिसाब से चलाने का कोई अधिकार नहीं है।” अर्नब गोस्वामी ने कहा, “उद्धव ठाकरे, मेरे पत्रकारों को रिहा करो। आपने कानून तोड़ा है और हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। आपने संविधान नहीं लिखा और आपको इसे अपने हिसाब से चलाने का कोई अधिकार नहीं है।” अर्नब गोस्वामी ने मुख्यमंत्री से कहा है,” मेरे पत्रकारों को तुरंत रिहा करें और अपने संवैधानिक कर्तव्य को निभाते हुए अपने पार्टी के नेताओं को गिरफ्तार करें, जो केबल ऑपरेटरों को सरेआम धमकी देते हुए रंगे हाथों पकड़े गए हैं।” गोस्वामी ने रिपब्लिक चैनल के लिए की गई कड़ी मेहनत और प्रयास को लेकर कहा,”मैं एक मुंबईकर हूँ।” साथ ही अपने चैनलों पर मनमाने प्रतिबंध के खिलाफ चेतावनी जारी करते हुए अर्नब गोस्वामी ने कहा कि शिवसेना उनके नेटवर्क को छू भी नहीं सकती है, क्योंकि मुंबई, महाराष्ट्र और भारत के लोग उनके साथ हैं। रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ ने कहा कि अगर उद्धव ठाकरे पत्रकारों को रिहा नहीं करते हैं, तो वह जनता और देश की सर्वोच्च अदालत में उनसे लड़ेंगे। रिपब्लिक टीवी ने यह भी जानकारी दी कि महाराष्ट्र सरकार उनके रिपोर्टर अनुज कुमार से जबरन पूछताछ का प्रयास कर रही है।
#FreeAnujNow . The Maharashtra Govt is literally scared of investigative journalists, particularly @republic ; reports show that some one from Thackeray family might be involved.
अर्नब गोस्वामी की हालिया सुशांत सिंह राजपूत और पालघर में हिंदू साधुओं की हत्या में मामले में व्यापक कवरेज और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के खिलाफ किए गए हमलावर सवालों की वजह से रिपब्लिक टीवी को डराने और धमकाने का काम किया जा रहा है। सितम्बर 10 को जारी एक पत्र में शिवसेना से जुड़े ‘शिव केबल सेना’ ने महाराष्ट्र में केबल टीवी ऑपरेटरों से रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने को कहा था। शिवसेना ने केबल ऑपरेटरों को अर्नब गोस्वामी के नेतृत्व वाले मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने या परिणाम भुगतने जैसी धमकियाँ भी जारी की थी। अवलोकन करें:-
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार महाराष्ट्र सरकार द्वारा रिपब्लिक भारत पर पाबन्दी कांग्रेस द्वारा 1975 में लगाई आपातका....
शिवसेना द्वारा प्रमुख टीवी केबल ऑपरेटर हैथवे, डेन, इन केबल, जीटीपीएल, सेवन स्टार, सिटी केबल्स को लिखे पत्र में कहा है कि ‘रिपब्लिक टीवी’ ने सीएम उद्धव ठाकरे, गृह मंत्री के लिए अपमानजनक भाषा का बार-बार इस्तेमाल कर पत्रकारिता की नैतिकता और दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है। इसमें कहा गया है कि अर्नब गोस्वामी ने न्यूज़रूम में एक ‘समानांतर अदालत’ बना ली है। इस पत्र में कंगना राउत को ‘हरामखोर’ कहने वाले शिवसेना नेता संजय राउत को ‘मुख्य मार्गदर्शक’ बताया गया है।
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार महाराष्ट्र सरकार द्वारा रिपब्लिक भारत पर पाबन्दी कांग्रेस द्वारा 1975 में लगाई आपातकाल की याद करवा दी है। इस दौरान प्रेस सेंसरशिप के साथ गायक किशोर कुमार द्वारा संजय गाँधी के एक कार्यक्रम में जाने से मना करने की वजह से किशोर के रेडियो और फिल्मों में गायन पर पाबन्दी के साथ संजीव कुमार और सुचित्रा सेन अभिनीत फिल्म "आंधी" पर प्रतिबन्ध केवल इसलिए लगाया कि नायिका इंदिरा गाँधी की छवि प्रस्तुत कर रही थी, अभिनेता-निर्माता और निर्देशक मनोज कुमार की फिल्म "रोटी कपडा और मकान" एक गीत "हाय महंगाई मार गयी...." को फिल्म से निकलवाने के साथ-साथ रेडियो प्रसारण पर भी पाबन्दी इसलिए लगाई कि यह चर्चित हो रहा था। इस गीत के रेडियो प्रसारण पर भी पूर्णरूप से प्रतिबन्ध लगा दिया गया था। फिल्म "किस्सा कुर्सी का" को सेंसर से पास नहीं होने दिया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के विरुद्ध बोलने वाले नेताओं को जेलों में डाल दिया था। यानि जिस तरह कांग्रेस ने आपातकाल में व्यक्ति की अभिव्यक्ति पर पूर्णरूप से पाबन्दी लगा दी थी, उसी राह पर कांग्रेस के सहयोग से चल रही शिव सेना सरकार चल पड़ी है। पत्रकारों और मीडिया नेटवर्क को धमकाने, डराने के अपने काम को जारी रखते हुए, शिवसेना ने सितम्बर 10, 2020 को महाराष्ट्र में स्थानीय केबल ऑपरेटरों को ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहा है। संजय राउत को अपना मार्गदर्शक बताते हुए, शिवसेना ने ऐसा ना करने पर इसका ‘अंजाम भुगतने’ तक की भी धमकी दी है। बृहस्पतिवार को जारी एक पत्र में शिवसेना से जुड़े ‘शिव केबल सेना’ ने महाराष्ट्र में केबल टीवी ऑपरेटरों से रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने को कहा है। शिवसेना ने केबल ऑपरेटरों को अर्नब गोस्वामी के नेतृत्व वाले मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने या परिणाम भुगतने जैसी धमकियाँ भी जारी की हैं। शिवसेना द्वारा ‘रिपब्लिक टीवी’ के खिलाफ उठाया गया यह कदम बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर रिपब्लिक टीवी द्वारा की जा रही रिपोर्टिंग के बीच आई है। इसके अलावा, हाल ही में अभिनेत्री कंगना रानौत के ऑफिस में द्वारा BMC द्वारा किए गए विवादास्पद नुकसान को लेकर भी महाराष्ट्र कि शिवसेना घिरती हुई नजर आ रही है और रिपब्लिक टीवी ने इसे भी प्रमुखता से अपने समाचार चैनल पर जगह दी है।
शिव सेना द्वारा महाराष्ट्र के केबल ऑपरेटर्स को लिखा गया पत्र
शिवसेना द्वारा प्रमुख टीवी केबल ऑपरेटर हैथवे, डेन, इन केबल, जीटीपीएल, सेवन स्टार, सिटी केबल्स को लिखे पत्र में कहा है कि ‘रिपब्लिक टीवी’ ने सीएम उद्धव ठाकरे, गृह मंत्री के लिए अपमानजनक भाषा का बार-बार इस्तेमाल कर पत्रकारिता की नैतिकता और दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया है। इसमें कहा गया है कि अर्नब गोस्वामी ने न्यूज़रूम में एक ‘समानांतर अदालत’ बना ली है। इस पत्र में कंगना राउत को ‘हरामखोर’ कहने वाले शिवसेना नेता संजय राउत को ‘मुख्य मार्गदर्शक’ बताया गया है। अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला शिवसेना द्वारा रिपब्लिक टीवी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने के प्रयासों के बाद, रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने एक बयान जारी किया है जिसमें कहा गया है कि शिवसेना केबल, जो कि शिवसेना विंग का हिस्सा है, ने ‘संजय राउत के मार्गदर्शन’ के तहत एक आदेश जारी किया। रिपब्लिक टीवी ने कहा कि यह आदेश पूरे महाराष्ट्र में केबल ऑपरेटरों के लिए एक खुला खतरा है।
#CantBlockRepublic | Open threat to cable operators across Maharashtra to ban Republic Media Network or 'face consequences'. Join the call to defend the right to report, sign the petition, Tweet us your videos and watch them on-air on Republic https://t.co/Y9zlarecVl
I did sign the petition and will forward to all my contact. This is not good for our democracy and i strongly believe that now there has to be Presidential rule in Maharashtra.#ShameOnUddhavThackeray
रिपब्लिक टीवी ने इस पर बयान देते हुए कहा, “किसी समाचार चैनल को उसके दर्शकों तक पहुँचने से रोकने के लिए सत्तारूढ़ पार्टी मशीनरी और डराने के तरीकों का उपयोग करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत उल्लंघन है। रिपब्लिक भारत को रोकने करने का यह प्रयास एक स्वतंत्र प्रेस पर हमला है और एक आपातकालीन मानसिकता को दर्शाता है जो हमारे समय में एक अराजकतावाद है और इस महान लोकतंत्र के लिए एक विडंबना है।” मीडिया नेटवर्क ने अपने बयान में कहा, “वे हर घर में दर्शकों तक पहुँचने के अपने रिपोर्ट के अधिकार और बचाव के लिए हर सम्भव प्रयास करेंगे। मीडिया नेटवर्क ने कहा कि वे रिपब्लिक के सवालों को बंद करना चाहते हैं और रिपब्लिक टीवी की रिपोर्टिंग को रोकना चाहते हैं। हालाँकि, वे रिपब्लिक टीवी को ब्लॉक नहीं कर सकते क्योंकि भारत के लोग हमारे साथ हैं।” महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की मॉब लिंचिंग की घटना के कवरेज के बाद से ही रिपब्लिक टीवी चैनल महाराष्ट्र सरकार के निशाने पर है। इसके बाद बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के घर पर बीएमसी द्वारा की गई तोड़फोड़ कि कवरेज के दौरान भी मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक चैनल के पत्रकारों से धक्का-मुक्की की और उन्हें गिरफ्तार भी किया।
सुप्रीम कोर्ट ने आज (अप्रैल 24, 2020) रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी (Arnab Goswami) की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनकी गिरफ़्तारी पर 3 सप्ताह के लिए रोक लगा दी है। इस दौरान वे अग्रिम जमानत भी माँग सकते हैं। अपने खिलाफ विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर (FIR) को लेकर अर्नब ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी ओर से वकील मुकुल रोहतगी ने राहत के लिए याचिका दायर की थी। रोहतगी ने कहा, अर्नब के खिलाफ दर्ज इन FIR की भाषा एक जैसी है। कांग्रेस नेता ऐसे ट्वीट कर रहे हैं, जैसे वो मानहानि का मुकदमा दायर करने जा रहे हैं, जबकि मानहानि का मुकदमा सिर्फ पीड़ित पक्ष की ओर से किया जा सकता है। आज (शुक्रवार) को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की दो सदस्यीय पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। जहाँ रोहतगी ने अपने मुवक्किल की ओर से कहा कि रात को घर लौटते वक्त अर्नब और उनकी पत्नी पर मोटरसाइकिल सवार दो लोगों ने हमला किया। यह अभिव्यक्ति की आजादी को दबाने की कोशिश है। इसके बाद विपक्ष के वकील कपिल सिब्बल ने भी अपना पक्ष रखा। सिब्बल ने कोर्ट में आर्टिकल 32 का हवाला दिया। उन्होंने कहा यह मामला सुप्रीम कोर्ट के दखल का नहीं है। इसलिए, मुकदमा दर्ज हुआ है, तो पुलिस को अपना काम करने देना चाहिए। हाँ, सभी एफआईआर को एक साथ जोड़ा जा सकता है, ताकि एक साथ जाँच हो पर ऐसे एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती।
Rohatgi argues that a case if defamation can be filed only by the person aggrieved and not by someone else.
Rohatgi (in picture) continues, says most of the complaints are identical and all invoke same provisions of the law, i.e., Section 153, 153A, 500, 504, 295A #MukulRohatgipic.twitter.com/qv9TFQ8hlR
Supreme Court stays all FIRs against Arnab Goswami except one which was filed in Nagpur and which has now been transferred to Mumbai. SC also directs Mumbai Police Commissioner to provide security to Arnab Goswami and Republic TV https://t.co/klkeYWHKvr
मुकल रोहतगी ने आज मामले की सुनवाई शुरु होने पर कहा, अर्नब ने अपने प्रोग्राम में पुलिस के गैर जिम्मेदाराना रवैये पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष की खामोशी पर सवाल खड़े करते हुए पूछा था कि अगर मरने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के होते तो क्या तब भी वो यूँ ही खामोश रहतीं। मगर, 21 अप्रैल को प्रसारित हुए इस प्रोग्राम के बाद ही कई राज्यों में उन पर एफआईआऱ दर्ज करवा दी गई। सिब्बल ने ये भी कहा कि अगर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एफआईआर दर्ज कराई है, तो उसमें दिक्कत क्या है? राहुल गाँधी ने बीजेपी कार्यकर्ताओं की ओर से दायर मानहानि के मुकदमों को झेला है। छत्तीसगढ़ के वकील विवेक तन्खा ने भी कहा कि अर्नब ने ब्रॉडकास्ट लाइसेंस का उल्लंघन कर सांप्रदायिक उन्माद फैलाया। उन्हें इसके लिए कोई रियायत नहीं दी जानी चाहिए। दोनों पक्ष के मत सुनकर, SC ने माना कि अर्नब गोस्वामी के खिलाफ एक ही मामले में कई राज्यों में मुकदमा नही चलाया जा सकता। लिहाजा सभी एफआईआऱ को एक साथ जोड़ा जाए। अदालत ने अर्नब को जाँच में सहयोग करने को कहा। अब इस मामले पर सुनवाई 8 हफ्तों के बाद होगी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता अर्नब को भी याचिका में संशोधन करने को कहा। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता कोर्ट से सभी याचिकाओं को एक साथ जोड़े जाने का आग्रह करें। अवलोकन करें:-
कांग्रेस यूथ नेता प्रतीक मिश्रा और अरुण बुराड़े का सच रिपब्लिक टीवी के एंकर अर्नब गोस्वामी पर कल(अप्रैल 22) देर रात .....
इसके अलावा, इस मामले की सुनवाई में जस्टिस चंद्रचूड़ ने एक महत्तवपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि मीडिया पर कोई अंकुश नहीं होना चाहिए। मैं मीडिया पर किसी भी तरह की पाबंदी लगाने का विरोधी हूँ। बीते दिनों कांग्रेस नेताओं ने अर्नब गोस्वामी के डिबेट के बाद उन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की । जिसे लेकर उनके ख़िलाफ़ महाराष्ट्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पदाधिकारियों ने अर्नब के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी और रात में यूथ कांग्रेस के सदस्यों ने उन पर हमला भी किया था।