आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
जिस तरीके से रिपब्लिक टीवी के मुख्य संपादक अर्नब गोस्वामी को गिरफ्तार किया गया है, 1975 में देश में लगी इमरजेंसी के दौरान दैनिक The Motherland और Organiser साप्ताहिक के मुख्य संपादक केवल रतन मलकानी(स्व) की गिरफ़्तारी को तरोताजा कर दिया है। इमरजेंसी लगते ही, The Motherland के ऑफिस और मलकानी जी के घर को पुलिस ने चारों तरफ से घेर लिया था। शायद मेरे से वरिष्ठ पत्रकार और नेता भी मलकानी जी गिरफ़्तारी को नहीं भूले होंगे और अगर भूल गए होंगे, तो अर्नब ने लगभग 45 वर्ष पूर्व मलकानी जी को याद करवा दिया है।
महाराष्ट्र की कांग्रेस शिवसेना सरकार ने एक बार फिर इमरजेंसी की याद दिला दी है। उद्धव ठाकरे सरकार की मुंबई पुलिस ने बुधवार तड़के रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी के घर पहुंच उनके साथ मारपीट की फिर गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई। फ्रीडम ऑफ प्रेस पर कांग्रेस-शिवसेना सरकार ने प्रहार किया है। कांग्रेस के साथ शिवसेना ने यह कदम उठाकर एक तरह से अघोषित आपातकाल का संकेत दे दिया है। अर्नब की गिरफ्तारी को लेकर सोशल मीडिया पर प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर लोग अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।महाराष्ट्र में आपातकल जैसी स्थिति हो गई है। उद्धव सरकार के खिलाफ उठ रही आवाज को दबाने के लिए अब मुंबई पुलिस दमन पर उतर आई है। मीडिया का गला घोंटने के लिए मुंबई पुलिस ने आत्महत्या के एक पुराने और बंद पड़े मामले में बुधवार सुबह रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन चीफ अर्नब गोस्वामी पर कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया। यहां तक कि पुलिस ने बिना किसी दस्तावेज के, अर्नब के घर में घुसकर उनके साथ मारपीट की। इसके बाद गिरफ्तार कर अपने साथ पुलिस वैन में ले गई।
अर्नब ने पुलिस पर अपने साथ मारपीट का आरोप लगाया। रिपब्लिक टीवी ने अर्नब के घर के लाइव फुटेज भी दिखाए जिसमें पुलिस और अर्नब के बीच झड़प होती दिख रही है। अर्नब गोस्वामी का कहना है कि मुंबई पुलिस ने उनकी सास, सुसर, बेटे और पत्नी के साथ मारपीट की। रिपब्लिक टीवी पर प्ले की गई वीडियो के मुताबिक मुंबई पुलिस ने अर्नब गोस्वामी के साथ भी मारपीट की।
जब अर्नब को जबरदस्ती पुलिस वैन में बिठाया जा रहा था, तब उन्होंने कैमरे को देखकर कुछ बोलने की कोशिश की। वैन की खिड़की से उन्होंने बोला- “उन्होंने मेरे बेटे के साथ मारपीट की। मेरे रिश्तेदारों से मिलने नहीं दिया। मेरे साथ मेरे घर में मारपीट की गई। मैं चाहता हूं कि भारत की न्याय व्यवस्था और देश के लोग इसे देखें।”
सीनियर एग्जीक्यूटिव एडिटर और अर्नब की पत्नी सम्यब्रता रे गोस्वामी ने कहा कि पुलिस ने अर्नब गोस्वामी के साथ गलत व्यवहार किया और जांच अधिकारी ने अर्नब को ये कहते हुए धमकी दी कि “मैं कुछ भी कर सकता हूं।” हमारे कैमरे तब तक चालू नहीं थे, लेकिन उन्होंने अर्नब की पिटाई कर दी, उन्होंने अपने भी कैमरे बंद कर दिए। उन्होंने उन्हें बालों से पकड़ रखा था। अर्नब ने कहा कि उन्हें वकील चाहिए। उन्होंने मुझे कुछ कागज पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया।
सम्यब्रता रे गोस्वामी ने कहा कि पुलिस ने अर्नब से कहा कि वे उन्हें रायगढ़ पुलिस स्टेशन ले जाएंगे। लगभग 20 मिनट तक अर्नब कहते रहे कि मुझे दवाइयां लेने दो, हम अपने माता-पिता को भी नहीं बता सके, वहां महिला पुलिसकर्मी थी जिन्होंने हमें रोका।”
गौरतलब है कि मुंबई पुलिस के एक दर्जन से अधिक अधिकारी सुबह 6:30 बजे मुंबई के परेल में अर्नब के आवास पर पहुंचे और सभी प्रवेश और निकास मार्गों को ब्लॉक कर दिया। पुलिस ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के संपादकों निरंजन नारायणस्वामी और संजय पाठक को भी अर्नब के निवास में प्रवेश करने से रोक दिया।
मुंबई पुलिस के एनकाउंटर-विशेषज्ञ एपीआई सचान वेज़ ने रिपब्लिक को पुष्टि की कि अर्नब गोस्वामी को एक ऐसे मामले में गिरफ्तार किया गया है, जिसका टीआरपी मामले से कोई लेना-देना नहीं है, जिसमें रिपब्लिक को फंसाने की कोशिश की गई है। मिली जानकारी के अनुसार अब उन्हें रायगढ़ पुलिस स्टेशन ले जाया गया। अर्नब गोस्वामी को 2018 में इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक और उनकी मां कुमुद नाइक की आत्महत्या की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया है।
अर्नब के विरुद्ध की गयी इस कार्यवाही पर लोगों की प्रक्रियाएं :-