आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
जिस तरह पालघर में साधुओं की हत्या, बॉलीवुड में ड्रग माफिया और सुशांत सिंह राजपूत की हत्या आदि को रिपब्लिक टीवी उछाल रहा है, उससे महाराष्ट्र सरकार इतनी बौखला कर उन कामों को अंजाम से रही है, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने संघ के अंग्रेजी दैनिक Motherland, Organiser Weekly और इन दोनों प्रकाशनों के मुख्य संपादक केवल रतन मलकानी के साथ भी नहीं किया। मुझसे वरिष्ठ पत्रकार और नेता इस बात से भलीभांति परिचित होंगे। आपातकाल को छोड़, इंदिरा गाँधी ने भी कभी अपनी घोर विरोधी प्रेस पर इतने प्रहार नहीं किए, जो आज महाराष्ट्र में एनसीपी और कांग्रेस की बैसाखियों पर चलने वाली उद्धव सरकार रिपब्लिक टीवी के साथ कर रही है।
हैरानी इस बात पर होती है, कि Freedom of expression पर शोर मचाने वाला गैंग भी खामोश है, मानो उनके कानों में सीसा डाला हुआ है। क्या एनसीपी और कांग्रेस की बैसाखियों पर चलने वाली उद्धव सरकार और Freedom of expression पर शोर मचाने वाला गैंग देश से ड्रग्स माफिया को समाप्त करना नहीं चाहता? क्या इन्हीं लोगों की छत्रसाया में ड्रग माफिया फलफूल रहा है?
#ParamBirWitnessScam | सवाल पूछने पर रिपब्लिक के रिपोर्टर से मारपीट क्यों? देखिए 'महाभारत' सुचरिता कुकरेती के साथ रिपब्लिक भारत पर #LIVE : https://t.co/G945HvzM0Z
— रिपब्लिक.भारत (@Republic_Bharat) October 23, 2020
YouTube live TV:https://t.co/P8bk9R5TiX pic.twitter.com/PvSxxm3YBo
#ParambirSingh ग़द्दार ओर कितना गिरेगा तू 😡#ShameonParambirsingh 😡#ShameOnMahaGovt
— gagan honda (@gagan_honda) October 23, 2020
#RepublicWitchhunt | @pradip103 is #LIVE on the unprecedented action of the Mumbai Police against Republic's entire editorial staff; Tune in to watch here - https://t.co/rGQJsiKgt2 pic.twitter.com/UmL1Bvw1mT
— Republic (@republic) October 23, 2020
How badly reporter sohel is treated by bombay police.
— Dilip Bhandari (@DilipBhandariIN) October 23, 2020
Home minister of india must interfere and take legal action againest bombay police commissner
It's shameful for Home Minister of India not taken any legal action against bombay police commissner up till now.
23rd October will be remembered as the "Black Day" in the history of @republic Media Network, the biggest and the most loved media house in India.
— Neo (@iAmSubhra17) October 23, 2020
23rd Oct will also be remembered for One "Black Sheep" being responsible for tarnishing the image of Mumbai Police permanently.
Tomorrow SARAMveer will sit on the head of PM & HM also....had they keep their mouth shut? I am really feeling shame on PM & HM now...what they are waiting for? Have they also surrendered to the Maha Agadi Govt? What is happening? Where is Supreme Court? #BharatwithArnabGoswami
— Rajesh Sharma (@RajeshS71157876) October 23, 2020
What is the central Government doing.
— Dimple B (@dimple_87b) October 23, 2020
The people of India already know that the MVA is playing dirty politics and using the state police to even its score
Why arent the courts, the judges, the Judiciary of this country failing minute by minute.#RepublicWitchhunt
महाराष्ट्र में पूरी तरह आपातकाल की स्थिति है। उद्धव सरकार और पुलिस कानून की धज्जियां उड़ा रही हैं। जहां रिपब्लिक टीवी को परेशान करने के लिए मुंबई पुलिस तरह तरह के आदेश जारी कर रही है और हथकंडे अपना रही है, वहीं रिपब्लिक टीवी के कर्मचारियों पर हमले भी हो रहे हैं। महाराष्ट्र के गृहमंत्री से सवाल पूछने पर रिपब्लिक टीवी के पत्रकार सोहेल पर हमला किया गया। उनके साथ मारपीट की गई, जिससे उनके मुंह से खून निकलने लगा। किस कारण पत्रकार को पीटा गया? क्या पत्रकार चोर, डाकू अथवा कोई लुटेरा था, जो उसे इतनी बेदर्दी से पीटा गया? क्या महाराष्ट्र गृहमंत्री अपने साथ गुंडों की फौज लेकर चलती है, यदि नहीं तो फिर किस कारण इतना पीटा की खून निकलने लगे? अपने विरोधी प्रेस पर इतना अत्याचार तो इंदिरा गाँधी ने भी नहीं किया।
महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख का काफिला जब निकल रहा था, उस समय रिपब्लिक टीवी के पत्रकार सोहेल अनिल देशमुख का बयान लेने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन पुलिस और अन्य लोग उन्हें रोकने की कोशिश कर रहे थे। आप वीडियो में देख सकते हैं कि किस तरह सोहेल को रोका जा रहा है। इस दौरान सोहेल के साथ मारपीट की गई, जिससे वे घायल हो गए।
TRP स्कैम में ‘Republic TV’ का नाम लेने के लिए गवाहों पर दबाव बना रही मुंबई पुलिस
TRP स्कैम का मुद्दा गर्माने के बाद से मुंबई पुलिस की भूमिका लगातार शक के घेरे में है। पहले इस बात का खुलासा हुआ कि मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में निराधार ही Republic TV का नाम पूरे घोटाले में लिया, जबकि दर्ज शिकायत में समाचार चैनल ‘इंडिया टुडे’ का नाम था, और अब ताजा खुलासे में यह पता चला है कि कैसे मुंबई पुलिस अपनी मनमर्जी से गवाह के बयान को तोड़-मरोड़ कर ‘Republic TV’ को इस पूरे घोटाले का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रही है।
‘ऑपइंडिया’ के पास आई एक कॉल रिकॉर्डिंग इस बात की पुष्टि करती है कि रिपब्लिक टीवी को फँसाने के लिए मुंबई पुलिस गवाहों पर भी दबाव बना रही है। जिस गवाह ने यह खुलासा आपने पड़ोसी के सामने किया है, उसके घर में एक बार-ओ-मीटर लगाया गया है।
ये रिकॉर्डिंग दो लोगों के बीच की है। पहला – जिसके घर ‘बार-ओ-मीटर’ लगाए और दूसरा- उसका पड़ोसी! गौरतलब है कि भारत में ब्रॉडकास्ट ऑडिएंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) 45 हजार से अधिक घरों में एक उपकरण लगाकर प्वाइंट की गिनती करता है। इस उपकरण को ‘बार ओ मीटर’ कहा जाता है।
ऑडियो में क्या है?
इसकी जानकारी देने से पहले बता दें कि ऑपइंडिया के पास यह रिकॉर्डिंग बेहद विश्वसनीय स्रोत्र के जरिए आई है। इससे मालूम पड़ रहा है कि व्यक्ति अपने परिवार व अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता में है क्योंकि कॉल रिकॉर्डिंग के अनुसार, मुंबई पुलिस उसके घर में रात 3:00 -3:30 बजे घुस गई। दोनों के बीच की बातचीत से स्पष्ट होता है कि मुंबई पुलिस ‘रिपब्लिक टीवी’ के खिलाफ बयान देने के लिए दबाव बना रही है, जिसके कारण गवाह अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर काफी डरा हुआ है।
ऑडियो में पहला व्यक्ति अपने पड़ोसी को बताता है कि मुंबई पुलिस उनके घर में मशीन (बार ओ मीटर) की जानकारी जुटाने आई थी और उनसे कहा कि उन्होंने किसी को अरेस्ट किया है जिसने पूछताछ में उन लोगों का नाम लिया है। इसके बाद उन्होंने मशीन के बारे में पूछा। साथ ही ये भी जानना चाहा कि उन्हें पैसे कैसे मिलते हैं, उन्हें कौन पैसे देता है, और कहाँ से उन्हें पैसे मिलते हैं।
कॉल पर पड़ोसी से बात करते हुए व्यक्ति बेहद घबराया हुआ प्रतीत होता है और बार-बार कहता है कि 10-12 पुलिस वाले आए थे, अगर ऐसे ही आते रहे तो उसके आस पड़ोस के लोग क्या बोलेंगे। वह कहता है कि पुलिस ने उन्हें बताया कि गिरफ्तार हुए शख्स ने उसके परिवार का नाम लेकर कहा है कि उसने यहाँ 500 रुपए दिए हैं और 200 रुपए अकॉउंट में भेजे हैं। पड़ोसी को व्यक्ति ने यह भी बताया कि जब उसके घर में पुलिस आई तब वह ड्यूटी पर था और पुलिस उसके घरवालों से उससे जुड़ी सारी जानकारी लिख कर ले गई।
यहाँ पड़ोसी ने व्यक्ति को झूठ बोलने की सलाह दी कि वह बता दे कि वह कोई चैनल नहीं देखता उसे ढाई सौ रुपए भाड़े के मिलते हैं। हालाँकि घबराए व्यक्ति ने झूठ बोलने से साफ मना कर दिया और कहा कि जब गिरफ्तार हुआ युवक कह चुका है कि उसने पैसे दिए तो झूठ बोलने का कोई मतलब नहीं है।
इसके बाद, पड़ोसी ने पूछा कि क्या पुलिस ने उनसे यह भी पूछा कि वह कौन सा चैनल देखते हैं। इस पर पहले व्यक्ति ने कहा कि उसके घरवालों ने पुलिस को बताया कि ‘न्यूज नेशन’ पर स्कीम आई थी और उन्होंने उस स्कीम से खुद को जोड़ा, बाद में उन्हें सुविधा मिलने लगी।
इस पर पुलिस ने उन्हें कहा कि इस केस का ‘न्यूज नेशन’ से लेना देना नहीं है। इसमें इंडिया टुडे और रिपब्लिक भारत हैं। जिसे सुनकर व्यक्ति के बेटे ने कहा कि वो दोनों में से कोई चैनल नहीं देखते। जब उनके पिता घर पर होते हैं तो ही वह न्यूज नेशन देखते हैं।
फोन पर घबराई आवाज में व्यक्ति साफ कहता है कि पुलिस ने ‘रिपब्लिक भारत’ का नाम लिख लिया है। इस पर दूसरा व्यक्ति कहता है कि पुलिस ये सब उन्हें (अनुमान के मुताबिक रिपब्लिक टीवी) फँसाने के लिए कर रही है। इस पर व्यक्ति और ज्यादा चिंता में पड़ जाता है और कहता है कि पुलिस उसके ख़िलाफ़ भी झूठे आरोप लगा देगी।
ऑडियो में एक जगह पड़ोसी घबराए व्यक्ति को यह भी सलाह देता है कि अगर उनके घर 20 पुलिसकर्मी भी आए होते तो उन्हें बताना चाहिए था कि रिपब्लिक भारत उन्हें पैसे नहीं देता। आगे पड़ोसी बताता है कि महाराष्ट्र सरकार रिपब्लिक भारत के ख़िलाफ़ है और उसी के लिए कुछ सबूत ढूँढने का प्रयास कर रही है। वह लोग (बार ओर मीटर वाले घर के लोग) तो बस ग्राहक हैं। उसने कहा कि अगर कोई उन्हें पैसे देगा तो उन्हें उनके चैनल को देखने में भी दिक्कत नहीं होगी।
ध्यान देने वाली बात है कि अभी तक की बातचीत से साफ पता चल रहा है कि ‘न्यूज नेशन’ व्यक्ति के घरवालों को पैसे देता था, रिपब्लिक भारत नहीं। इसके अलावा, व्यक्ति यह भी कहता है कि जरूर पुलिस ने गिरफ्तार हुए आदमी को पीटा होगा।
व्यक्ति बताता है कि 10-12 पुलिसकर्मी उसके घर में आए थे और 5-6 बाहर खड़े थे। उन लोगों ने पहले ही अपने कागज पर ‘आर भारत’ का नाम लिखा था। वह चिंता व्यक्त करता है कि आज पुलिस का एक विभाग आया है कल को दूसरा विभाग दरवाजे पर आएगा। ऐसे तो आस पास के लोग उसे जगह खाली करने को कह देंगे।
सारी बात सुनकर पड़ोसी कहता है कि महाराष्ट्र पुलिस केवल रिपब्लिक भारत के ख़िलाफ़ केस बनाना चाह रही है। वहीं, व्यक्ति किसी भी प्रकार के ‘लफड़े’ को लेकर, कोर्ट कचहरी को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करता है। साथ ही कहता है कि उसकी पत्नी घर में अकेले रहती है वो क्या बात कर पाएगी पुलिस वालों से?
गौरतलब है कि इस ऑडिया रिकॉर्डिंग में जिस शख्स की गिरफ्तारी की बात हो रही है और जिसके बयान के आधार पर पुलिस व्यक्ति के घर पहुँची, उसका नाम उमेश हैं। ऑपइंडिया ने यह मामला सामने आने के बाद उमेश के वकील गिरी को सम्पर्क किया। वकील ने बताया कि उमेश का संबंध कॉल वाले व्यक्ति से है। हालाँकि, जब हमने ऑडियो की प्रमाणिकता और उसमें हो रही बातचीत पर सवाल किए तो उन्होंने कहा कि ये मामला अभी उपन्यायिक है इसलिए इसकी प्रमाणिकता पर कुछ कहना उचित नहीं है। (एजेंसीज इनपुट्स सहित)
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