क्या एडिटर्स गिल्ड के चीफ शेखर गुप्ता पत्रकार बिरादरी के खिलाफ काम कर रहे हैं? यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि क्योंकि आज जब कुछ लोग पत्रकारों की अभिव्यक्ति की आजादी पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहे हैं, तब शेखर गुप्ता पत्रकारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने के बजाय विरोधी पक्ष के साथ खड़े हैं।
अक्टूबर 5 को बॉलीवुड के प्रमुख निर्माताओं ने फिल्म जगत की छवि बिगाड़ने का आरोप लगाकर रिपब्लिक टीवी और टाइम्स नाउ न्यूज चैनल और चार पत्रकारों के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर किया। चार पत्रकारों में रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी और पत्रकार प्रदीप भंडारी, टाइम्स नाउ के प्रधान संपादक राहुल शिवशंकर और समूह संपादक नविका कुमार शामिल हैं। याचिका में बॉलीवुड को लेकर गैर जिम्मेदाराना, अपमानजनक और बदनाम करने वाली बयानबाजी और मीडिया ट्रायल्स करने से रोकने की अपील की गई है। याचिका दायर करने वालों में चार फिल्म इंडस्ट्री एसोसिएशनों के साथ आमिर खान, शाहरुख खान, सलमान खान, करण जौहर, अजय देवगन, अनिल कपूर, रोहित शेट्टी के प्रोडक्शन हाउस भी शामिल हैं।
This collective legal action agains calumny can be a turning point for Bollywood. It could mark an ‘industry’ daring to see itself as an institutions. And institutions must have a spine.
— Shekhar Gupta (@ShekharGupta) October 12, 2020
फिल्म निर्माताओं की ओर से दायर ये याचिका पत्रकारों को खबर तक पहुंच और आम लोगों तक जानकारी को पहुंचाने से रोकने के लिए हैं। ऐसे में एडिटर्स गिल्ड की जिम्मेदारी कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है कि सभी पत्रकार एक साथ आकर इस तरह के कदम को विरोध करें, लेकिन एडिटर्स गिल्ड के चीफ शेखर गुप्ता खुद पत्रकारों की जगह बॉलीवुड के समर्थन में आगे आ गए हैं। शेखर गुप्ता ने ट्वीट किया, “झूठे इल्जामों के खिलाफ सामूहिक कानूनी कार्रवाई बॉलीवुड के लिए एक टर्निंग प्वाइंट हो सकती हैं। इससे ‘उद्योग’ को एक संस्था की तरह देखने की हिम्मत मिलेगी और एक संस्था में हमेशा रीढ़ होनी चाहिए।”
शेखर गुप्ता का ट्वीट पोस्ट होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें लताड़ लगानी शुरू कर दी।
If fighting for justice invites court cases, bring it on. All the a-listers can come together but India will continue to fight for the truth. You can’t intimidate us @TimesNow & can’t take away the viewers who believe in us. Let Truth prevail. @aamir_khan @iamsrk @karanjohar
— Navika Kumar (@navikakumar) October 12, 2020
Nation wants to know the involvement of #vulture in #TerroristAttackOnParliament @narendramodi ji @AmitShah
— Babjipv (@pvbabji) October 12, 2020
There is very little left to be said about those acting holy in the TRP game. @sambitswaraj has said the last word. pic.twitter.com/FmgCYUt1js
Cases against journalists of @TIMESNOW that have only sought justice for those who are wronged are a bad precedent. The mighty may think they can weaken the resolve of the fearless at #TIMESNOW but they are wrong. @aamir_khan @ajaydevgn @karanjohar @KanganaTeam @BeingSalmanKhan
— Rahul Shivshankar (@RShivshankar) October 12, 2020
कहते हैं अगर व्यक्ति सकारात्मक सोंच रखता है, वह किसी बुराई से भी सकारात्मक शब्द निकालने में समर्थ होता, परन्तु नकारात्मक सोंच वाले को सकारात्मक में भी नकारात्मक ही हाथ लगता है। जिसे चरितार्थ कर रहे हैं कांग्रेस के पूर्व केन्द्रीय मंत्री मनीष तिवारी, जो अपने अनुभव अपने ट्वीट में बता रहे हैं। यानि जो जैसा होता है सामने वाले को भी वैसा ही समझता है। जिस तरह इन्होंने अपने यूपीए कार्यकाल में मीडिया को अपने कब्जे में कर, इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने बेगुनाह हिन्दू साधु-संतों को जेलों में डाल रहे थे। इन्हीं के तत्कालीन गृह मंत्री सुशील शिंदे "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" नाम से हिन्दू होते हुए हिन्दू धर्म को अपमानित कर रहे थे। चलो देर आए दुरुस्त आए, सच्चाई कबूल दी।
Congress’s Manish Tewari goes beyond calling journalists pliable, suggests that they are up for sale and he claims to be speaking from his experience as I&B Minister. Let me know if you see President of Editors Guild take exception to this. Oh wait! pic.twitter.com/Gs7NGdJTo4
— sunil jaggi (@Toddarmal) October 12, 2020
It's irony to see all the torch bearers of FoE in media coming out & appreciating Bollywood for trying to suppress the freedom of expression of their own competitors in profession. This doesn't augur well neither for Indian journalism nor for right to FoE.
— Raju (@nbrengaraju) October 12, 2020
Mungeri Lal Coupta ji ke Haseen Sapney.
— Raghunath।रघुनाथ। (@asraghunath) October 12, 2020
Turning point for the Drugwood is not their going to court. But the people's resolve to punish these lumpen druggies a lesson. Sadak2 was just the first demonstration of that resolve.#KBC12's poorest TRP is another. Wait, more ahead.
नहीं जी सच्चाई उजागर करना तो पत्रकारिता है ही नहीं, सच्चाई को छुपा के समझौता करके पैसा लेके जो घर चलाता हो उसे आदर्श पत्रकार केहते है,जैसे गांजा फूकने वालों के तारीफ में ट्वीट करते है।अभिनेताओं के बारे में नहीं जानता पर समाज में जो लोग गांजा फूंकते है उनको आम आदमी गंजाखोर कहते है
— ARUNDHUTI BOYAL (@Arundhutiboyaal) October 14, 2020
Guptaji sharing.
— Ordinary Being (@NayyarSanjeev) October 13, 2020
Now that some Bollywood Producers taken 2 Times Now Anchors to Delhi HC, shd they be questioned in Court why Bollywood show Hindus in poor light & Pakistan is good light.
Amrit throws light on former.https://t.co/is73O5BETR
जी हां भाइयो और बहनों ये है पत्रकारों के सर सेठ हुकुमचंद जो चाहते है कि साथी पत्रकारों पे मुकदमा चलाया जाए फिल्मी माफिया द्वारा। वाह जी वाह , फिर तो आर्मी को भी इनपे केस करा जाना चाहिए, तख्ता पलट की झूठी खबर फैलाने के लिए ।
— Dada Kondke (@dadakondkie) October 12, 2020
This wld have a adverse effect on the industry.. mark my words.. Politicans have been accused like this so many times .. congress and BJp too.. Bollywood need to have thick skin ..rem ur experience with them.. That shld be eye opener for us.. we have made them what they are
— abhay oberoi (@zedekiahprod) October 12, 2020
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