भारत विरोधी अरबपति जॉर्ज सोरोस की करीबी महिला के साथ राहुल गाँधी क्यों?

राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा एक बार फिर से विवादों में है। बीजेपी ने अमेरिका यात्रा के दौरान संसद से अयोग्‍य घोषित हो चुके राहुल गांधी की भारत विरोधी अमेरिकी अरबपति जार्ज सोरोस की करीबी सुनीता विश्वनाथ और जमात-ए-इस्लामी से जुड़े तजीम अंसारी के साथ बैठक पर सवाल उठाए हैं। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि कई दस्तावेज प्रमाण दे रहे हैं कि भारत की लोकतांत्रिक सरकार को हटाने की बात डंके की चोट पर कहने वाले जार्ज सोरोस द्वारा वित्त पोषित महिला सुनीता विश्वनाथ और जमात-ए-इस्लामी से जुड़े तजीम अंसारी के साथ अमेरिका में राहुल ने बैठक की। सोरोस के ही संस्थान ओपन सोसाइटी के ग्लोबल उपाध्यक्ष सलिल शेट्टी ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में भी हिस्सा लिया था। इससे साफ जाहिर है कि सत्ता के लिए कांग्रेस आज इतना नीचे गिर गई है कि वह देशविरोधी लोगों से भी हाथ मिलाने से गुरेज नहीं कर रही। सत्ता के लिए राहुल गांधी देश को कमजोर करने और देश को नीचा तक दिखाने के लिए तैयार हैं।

जार्ज सोरोस के सहयोगी से मिलने की राहुल की क्या है मजबूरी?

भाजपा मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में स्मृति ईरानी ने कहा कि भाजपा ने इस विषय को पहले भी उठाया था कि कैसे जार्ज सोरोस भारत में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को हटाना चाहते हैं। सोरोस के इरादे हर भारतवासी को पता थे, तब भी ऐसी क्या मजबूरी थी कि राहुल गांधी ने जार्ज सोरोस के एक सहयोगी के साथ अमेरिका में बैठक की। ईरानी ने सवाल किया कि राहुल को जवाब देना चाहिए कि वे लोगों के साथ क्या बात कर रहे थे? स्मृति ईरानी ने कहा कि राहुल गांधी अमेरिका दौरे पर 4 जून को जमाते इस्लामी से संबंधित एक इस्लामी संगठन से मिले थे। इस मुलाकात पर सवाल उठाते हुए स्मृति ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पर चर्चा करते हुए कहा कि इस दौरान भी सोरोस के ओपन सोसायटी के मेंबर सलिल सेठी भी राहुल गांधी के साथ दिखाई दिए थे। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर मुद्दे को उठाने पर बीजेपी नेता के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है। यह सच को दबाने की कोशिश है। उन्होंने पूछा कि जो भारत की सरकार को गिराना चाहता है उसके साथ राहुल गांधी आखिर क्या कर रहे हैं। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में फोटो भी शेयर किए।

अमित मालवीय ने राहुल की सच्चाई दिखाई तो कांग्रेस को मिर्ची लगी

दरअसल, कर्नाटक में भाजपा के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग के प्रमुख अमित मालवीय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के सदस्य रमेश बाबू ने यह शिकायत दर्ज कराई है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया है कि मालवीय ने कांग्रेस और राहुल गांधी का मजाक उड़ाते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर माहौल बिगाड़ने और लोगों को उकसाने का काम किया। जबकि इस वीडियो इसमें उन्हीं बातों को दिखाया गया है जो कि राहुल गांधी अपने ब्रिटेन और अमेरिकी दौरे पर कहते रहे हैं। इसमें दिखाया गया है कि वे भारत के विरोधी हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नीचा दिखाने के लिए विदेशों में भारत को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।
सुनीता विश्वनाथ ने किया था पीएम मोदी के दौरे का विरोध
सुनीता विश्वनाथ हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (एचएफएचआर) की कोफाउंडर हैं। वह अमेरिका में इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल के साथ कई कार्यक्रमों में शिरकत करती हैं। यह एक कट्टर संगटन है। खबरों के अनुसार इस संगठन का पश्चिम में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के साथ सांठगांठ है। संदिग्ध संगठन ‘हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स’ ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरे का विरोध किया था। इसके खिलाफ प्रोपेगेंडा के लिए विशेष टूलकिट लेकर आया था। संगठन द्वारा जारी टूलकिट उसके मोदी विरोधी अभियान का हिस्सा था। “मोदी प्रोटेस्ट टूलकिट” शीर्षक वाला 24 पेज का दस्तावेज़ एचएफएचआर की वेबसाइट पर खुले तौर पर उपलब्ध था।
अमेरिका में राहुल का जमात, सुनीता विश्वनाथ कनेक्शन, फोटो ने खोल दी पोल
राहुल गांधी पीएम मोदी के अमेरिका दौरे से पहले 30 मई को अमेरिका पहुंचे थे। राहुल गांधी के विदेश दौरे का उद्देश्य भारत को नीचा दिखाना, पीएम मोदी और भाजपा को बदनाम करना और भारत में मुसलमान खतरे हैं, यही बताना रहता है। यह काम वह पिछले कई विदेश दौरे से करते आ रहे हैं। लेकिन जिस तरह सोशल मीडिया पर उनका एक फोटो वायरल हुआ उसने उनकी पोल खोलकर रख दी है। जिस अमेरिकी अरबपति कारोबारी जार्ज सोरोस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जहर उगला था, जिसने पीएम मोदी को सत्ता से हटाने की बात कही थी, जिसने राष्ट्रवाद से लड़ने के लिए 100 अरब डॉलर का फंड देने की बात कही थी, अब राहुल गांधी उसी के करीबी सहयोगी सुनीता विश्वनाथ के साथ बैठते करते देखे गए। आखिर राहुल गांधी देश विरोधी लोगों से क्यों मिल रहे थे? क्या भारत को कमजोर करने की जार्ज सोरोस की साजिश में वे भी शामिल हैं? राहुल गांधी का जमात, ISI और जॉर्ज सोरोस से जुड़े लोगों से मिलना यह साबित करता है कि वे भारत से प्रेम नहीं करते बल्कि सत्ता के लिए देश को कमजोर करने से लेकर किसी भी हथकंडे को अपना सकते हैं।
जॉर्ज सोरोस की प्रतिनिधि हैं सुनीता विश्वनाथ

सुनीता विश्वनाथ जॉर्ज सोरोस की प्रतिनिधि हैं, जिसने विपक्षी नेताओं, थिंक टैंक, पत्रकारों, वकीलों और कार्यकर्ताओं के एक नेटवर्क के माध्यम से भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने के लिए 1 अरब डॉलर देने का वादा किया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राहुल गांधी सत्ता पाने के लिए इस हद तक समझौता कर रहे हैं। अमेरिकी एक्टिविस्ट सुनीता विश्वनाथ वही हैं जिन्हें तीन साल पहले अयोध्या में एंट्री से रोक दिया गया था।
कुछ समय पहले विवादित ‘काली’ वेब सीरीज पर उठे विवाद पर इस महिला ने आकर सीरीज की निर्माता के पक्ष में हिंदू देवताओं के लिए उल-जुलूल बातें की थीं। अपने लेख में सुनीता ने महादेव की चिलम फूँकती तस्वीर लगाकर कहा था कि हिंदुओं में शराब और सिगरेट कुछ भी निषेध नहीं है। देवताओं को ये सब चढ़ता है।
सुनीता ने अपने लेख में सेक्स और समलैंगिकता को घुसाकर ये तक लिखा था कि धर्मग्रंथों में अनगिनत ऐसी कहानियाँ भरी पड़ी हैं, जिन्हें पढ़कर समलैंगिकता से पैदा हुए बच्चों का पता चलता है। सुनीता ने यह भी लिखा था कि हिंदुओं के कुछ देवता तो समलैंगिक भी हैं। काली के आपत्तिजनक दृश्यों को सपोर्ट करने के लिए सुनीता ने साफ लिखा था कि हिंदू देवता धूम्रपान, मदिरापान करते हैं। इसके अलावा वो मांस भी खाते हैं।

कौन हैं जॉर्ज सोरोस

92 साल के जॉर्ज सोरोस एक अमेरिकी अरबपति हैं, जो स्टॉक मार्केट में निवेश करके लाभ कमाते हैं। उनका जन्म 1930 में पश्चिमी देश हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में एक यहूदी परिवार में हुआ था। कहा जाता है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब यहूदियों पर अत्याचार हो रहा था, तब उन्होंने झूठा पहचान पत्र बनाकर अपना और अपने परिवार की जान बचाई थी।
जब विश्वयुद्ध खत्म हुआ और हंगरी में कम्युनिस्ट सरकार बनी तो वे 1947 में इंग्लैंड की राजधानी लंदन चले गए। वहाँ उन्होंने रेलवे स्टेशन पर कुली और क्लबों में वेटर का भी काम किया। इस दौरान वे लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाई की। इसके बाद कुछ समय तक उन्होंने लंदन मर्चेंट बैंक में भी काम किया।
साल 1956 में वे लंदन छोड़कर अमेरिका आ गए और फाइनांस एवं इन्वेस्टमेंट में कदम रखा। उसके बाद उनकी किस्मत चमक उठी और रात दूनी दिन चौगुनी तरक्की करने लगे और खूब संपत्ति इकट्ठा की। वित्तीय पत्रिका फोर्ब्स मैगजीन के अनुसार 17 फरवरी 2023 तक उनके पास 6.7 बिलियन डॉलर (लगभग 55,455 करोड़ रुपए) की संपत्ति है।
सन 1973 में उन्होंने सोरोस फंड मैनेजमेंट की स्थापना की और कथित अत्याचार पीड़ितों की मदद करने लगे। इस दौरान उन्होंने ब्लैक लोगों की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप देना शुरू किया। उनका दावा है कि उन्होंने अब 32 अरब डॉलर (2.62 लाख करोड़ रुपए) जरूरतमंदों को दे चुके हैं। सन 1984 में उन्होंने ओपन सोसायटी नामक संस्था की स्थापना की। आज यह संस्था 70 से अधिक देशों में कार्यरत है।
इन सब मानवीय सेवाओं और दानों के पीछे उनका एक विकृत चेहरा भी है। उन्होंने लाभ कमाने के लिए कई संस्थानों और देशों में वित्तीय संकट खड़ा कर दिया। इसके अलावा, उन्होंने कई देशों की सरकारों के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाने और उन्हें गिराने के लिए फंडिंग करने का काम किया। ओपन सोसायटी का इसमें नाम आया है। इस तरह के आरोप उन पर लगते रहे हैं।
अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को हटाने के लिए अथाह पैसे खर्च किए थे। साल 2003 में उन्होंने कहा था कि जॉर्ज बुश को हटाना उनके लिए जिंदगी और मौत का सवाल है। उन्होंने कहा था कि अगर बुश को सत्ता से हटाने की अगर कोई गारंटी लेता है और वे अपनी पूरी संपत्ति उस पर लुटा देंगे। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ बुश की कार्रवाई का भी खूब विरोध किया था। बुश को हराने के लिए उन्होंने 250 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए थे।
सोरोस को चीन, भारत के नरेंद्र मोदी, ब्लादिमीर पुतिन, अमेरिका पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता पसंद नहीं हैं। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को ठग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तानाशाह कहा था। और यही बोली भारत में मोदी विरोधी बोल रहे हैं। उन्होंने दुनिया में ‘राष्ट्रवाद’ के बयार से लड़ने के लिए लगभग 100 अरब डॉलर की फंड की स्थापना की है। इन फंड का इस्तेमाल इन लोगों के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाने के लिए किया जाता है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उन्होंने कहा था कि दुनिया में राष्ट्रवाद तेजी से बढ़ रहा है। इसका सबसे खतरनाक नतीजा भारत में देखने को मिला है।

सोरोस ने वित्तीय संकट पैदा किया और लाभ कमाया

जॉर्ज सोरोस को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जाना जाता है, जिसने बैंक ऑफ इंग्लैंड को बर्बाद कर दिया। बैंक ऑफ इंग्लैंड यूनाइटेड किंगडम का केंद्रीय बैंक और यह भारत के RBI के समानांतर है। हेज फंड मैनेजर सोरोस ने अपनी साजिशों से ब्रिटिश मुद्रा पाउंड की वैल्यू को गिरा दिया था। इससे उन्होंने लगभग 1 बिलियन डॉलर (8277 करोड़ रुपए) का लाभ कमाया था। उन्हें वित्तीय युद्ध अपराधी तक कहा गया है।
यह कुछ हिंडनबर्ग रिसर्च की तरह ही है। हिंडनबर्ग भी अपनी रिपोर्ट में किसी कंपनी की वित्तीय स्थिति को खराब बताया है। इससे उसके शेयर गिरने लगते हैं और उसे शॉर्ट सेल करके लाभ कमाता है। अडानी मामले में भी हिंडनबर्ग ने यही तरीका अपनाया। इसके पहले भी वह ऐसा ही करता है। जॉर्ज सोरोस ने बैंक ऑफ इंग्लैंड के मामले में लगभग यही रणनीति अपनाई थी।
साल 1997 में थाईलैंड की मुद्रा बाहत पर सट्टेबाजी हमलों (Speculative Attack) के लिए सोरोस को जिम्मेदार ठहराया गया था। थाईलैंड की मुद्रा में आई गिरावट के कारण उस साल एशिया के अधिकांश देशों में वित्तीय संकट फैल गया था। मलेशिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री महाथिर बिन मोहम्मद ने भी वहाँ की मुद्रा रिंगित की गिरावट के लिए सोरोस को जिम्मेदार ठहराया था। हालाँकि, सोरोस ने इसका खंडन किया था।
इसके अलावा, सोरोस पर अन्य अनैतिक तरीकों से संपत्ति कमाने का आरोप लगा है। वर्ष 2002 में फ्रांस की अदालत ने सोरोस को अनैतिक और अनधिकृत व्यापार का दोषी पाते हुए उन पर 23 लाख डॉलर का जुर्माना लगाया था। सोरोस ने अदालत के इस फैसले को फ्रांस की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने सोरोस पर लगाए गए इस जुर्माने को बरकरार रखा।
अमेरिका में भी जॉर्ज सोरोस पर बेसबॉल खेलों में पैसा लगाकर अनैतिक तरीके से लाभ कमाने का आरोप लगा। इसी तरह इटली की फुटबॉल टीम एएस रोमा को लेकर भी सोरोस विवादों में आए था। इतना ही नहीं, सोरोस ने साल 1994 में खुलासा किया था कि उन्होंने आत्महत्या करने में अपनी माँ मदद की थी।

सरकारों के खिलाफ प्रोपगेंडा और भारत

राफेल डील में जाँच के लिए फंडिंग: फ्रांस से भारत ने 36 राफेल विमानों को खरीदा था। इसको लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने हंगामा किया था और कहा था कि इसमें दलाली हुई है। हालाँकि, यहाँ की सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। इसके बाद फ्रांस की एनजीओ शेरपा एसोसिएशन ने इसमें भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराकर जाँच की माँग की थी। इस एनजीओ को जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से फंड जारी किया जाता है।
भारत जोड़ो यात्रा और सोरोस: कांग्रेस नेता राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा से भी जॉर्ज सोरोस के नाम जुड़े हैं। 31 अक्टूबर 2022 को सलिल शेट्टी नाम का एक व्यक्ति राहुल गांधी की कर्नाटक के हरथिकोट में उनकी भारत जोड़ी यात्रा में शामिल हुआ। सलिल शेट्टी जॉर्ज सोरोस द्वारा स्थापित ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन के वैश्विक उपाध्यक्ष हैं। इसके पहले शेट्टी एमनेस्टी इंटरनेशनल से जुड़े थे।
CAA प्रोटेस्ट: सीएए प्रोटेस्ट में भी जॉर्ज सोरोस का नाम जुड़ा है। कहा जाता है कि नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ इतने बड़े पैमाने पर हुए विरोध को हवा देने के लिए जॉर्ज सोरो ने फंडिंग की थी। इसकी पुष्टि उनके बयानों से भी होती है। सोरोस ने भारत में लागू किए जा रहे NRC और CAA को मुस्लिम विरोधी बताया था।
कश्मीर से धारा 370 का खात्मा: इसी तरह कश्मीर से जब केंद्र की मोदी सरकार ने धारा 370 को खत्म कर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त किया था, तब भी सोरोस सामने आए थे। उन्होंने मोदी सरकार के इस फैसले का विरोध किया था। सोरोस ने कहा था कि भारत हिंदू राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है। इसी तरह किसान आंदोलन और भारत द्वारा कोरोना का वैक्सीन बनाने के बाद उसके खिलाफ वैश्विक मुहिम चलाने में भी सोरोस का नाम आ चुका है।
दरअसल, जॉर्ज सोरोस की भूमिका उन हर बातों में लगभग सामने आई, जो केंद्र की भाजपा सरकार और नरेंद्र मोदी के खिलाफ रही। जॉर्ज सोरोस की नरेंद्र मोदी के खिलाफ कितनी नफरत है, इसका वे तानाशाह कहकर सबूत दे चुके हैं और समय-समय पर अन्य आरोपों के जरिए इसकी पुष्टि भई करते रहते हैं। वैसे तो सोरोस की कहानी सैकड़ों पन्नों में भी नहीं खत्म होगी, लेकिन फिलहाल संक्षिप्त में इतना ही।

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