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एक साल में अमित शाह को घाटा, बढ़ गई नरेंद्र मोदी की संपत्ति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल थोड़े और पैसे वाले हो गए हैं। वहीं अमित शाह के साथ ठीक उल्टा हुआ हैअमित शाह ने जो शेयर खरीदे थे, उसमें आई गिरावट के कारण पहले की तुलना में उनकी संपत्ति घट गई हैवहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की संपत्ति में कोई खास बदलाव नहीं आया है उनकी संपत्ति उतनी ही है, जितनी पहले थी ये हम नहीं कह रहे हैं प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से ये जानकारी जनता को दी गई है

मोदी की संपत्ति कितनी है? 

प्रधानमंत्री मोदी की कुल संपत्ति दो करोड़ 85 लाख रुपए है पिछले साल मोदी के पास दो करोड़ 49 लाख की संपत्ति थी यानी मोदी की संपत्ति में लगभग 36 लाख रुपये की बढ़ोतरी हुई है ये आंकड़ा 30 जून, 2020 का है मोदी ने अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्‍सा टर्म डिपॉजिट्स और सेविंग्‍स अकाउंट्स में जमा कर रखा है मोदी के पास कुल एक करोड़ 75 लाख 63 हजार 618 रुपये की चल संपत्ति है

पिछले साल के मुकाबले उनकी चल संपत्ति 26.26% बढ़ी है इस बढ़त के पीछे उनके वेतन से हुई बचत और फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट से मिले ब्‍याज का दोबारा निवेश मुख्‍य कारण है मोदी के पास इनहैंड कैश 31,450 रुपए है स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया SBI की गांधीनगर शाखा में 1,60,28,939 रुपए की एफडी है मोदी ने लाइफ इंश्‍योरेंस के अलावा नैशनल सेविंग्‍स सर्टिफिकेट्स (NSCs) और इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर बॉन्‍ड्स लिए हैं उन्‍होंने NSCs में ज्‍यादा पैसा लगाया है और उनका बीमा प्रीमियम भी कम हो गया है मोदी के पास 8,43,124 के NSCs हैं बीमा का प्रीमियम 1,50,957 रुपये जाता है जनवरी 2012 में उन्‍होंने 20 हजार रुपये का इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर बॉन्‍ड खरीदा था जो अबतक मेच्‍योर नहीं हुआ है

मोदी की अचल संपत्तियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है मोदी के नाम पर गांधीनगर में एक जमीन है जिसकी कीमत 1.1 करोड़ रुपये है गुजरात का मुख्यमंत्री बनने से पहले उन्होंने ये जमीन खरीदी थी उस समय इसकी कीमत 1.3 लाख रुपए थी इसमें उनके परिवार का भी हिस्सा है मोदी पर किसी तरह का कोई लोन नहीं है मोदी के पास सोने की चार अंगूठिया हैं जिसकी कीमत एक लाख 50 हजार के आसपास है

अमित शाह की संपत्ति का क्या हुआ?

जून 2020 तक अमित शाह के पास 28.63 करोड़ रुपये की संपत्ति थी, जबकि पिछले साल उनके पास 32.3 करोड़ रुपये की संपत्ति थी अमित शाह के पास 10 अचल संपत्तिया हैं सभी गुजरात में हैं अमित शाह के पास 13 करोड़ 56 लाख की प्रॉपर्टी है, इसमें उनकी मां का भी हिस्सा है अमित शाह के पास इन हैंड कैश 15,814 रुपए है 1.04 करोड़ बैंक बैलेंस है 13.47 लाख की पेंशन और इंश्योरेंस पॉलिसी है44.47 की जूलरी और 2.79 फिक्स डिपोजिट है

शाह की नेटवर्थ में कमी आई है ऐसा हुआ है शेयर मार्केट में आई गिरावट की वजह से जिन शेयरों में उन्होंने निवेश किया था उसकी कीमत घटी है अमित शाह को विरासत में मिली संपत्ति की कीमत 12.10 करोड़ है जबकि उनकी खुद की संपत्ति 1.4 करोड़ है दोनों को मिला दें तो टोटल वैल्यू होता है 13.5 करोड़ पिछले साल यह 17.9 करोड़ था यानी संपत्ति की कीमत घटी है अमित शाह के पास 15.77 लाख रुपये की देनदारियां हैं उनकी पत्नी की कुल संपत्ति 8.53 करोड़ रुपये है जो पिछले साल 9 करोड़ रुपए थी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की संपत्ति पिछले साल की तुलना में बहुत अधिक नहीं बदली हैउन्होंने 1.97 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 2.97 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति की घोषणा की है

AAP की आरती ने ‘नाजी सैल्यूट’ से की ‘वन्दे मातरम्’ की तुलना

वन्दे मातरम्, अरविन्द केजरीवाल
आरती चड्ढा ने की पुष्टि- केजीरवाल ने 'वन्दे मातरम' पर नहीं उठाया हाथ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 74वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किला पर ध्वजारोहण किया और उसके बाद देश को सम्बोधित किया। इस दौरान केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई सदस्यों के साथ-साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भी वहाँ उपस्थित थे। भाजपा नेताओं का आरोप है कि जब पीएम मोदी ने जब ‘वन्दे मातरम्’ का उद्घोष किया तो, केजरीवाल ने न इसे दोहराया और न हाथ उठाया।
लेकिन ट्विटर पर केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का भी यह ट्वीट खूब चल रहा है: 

आदेश गुप्ता, मीनाक्षी लेखी, तजिंदर बग्गा, कपिल मिश्रा, मनोज तिवारी और प्रवेश साहिब सिंह वर्मा जैसे नेताओं ने इस आरोप को आगे बढ़ाया और भाजपा के दिल्ली व बिहार के आधिकारिक ट्विटर हैंडलों से इसे ट्वीट किया गया। अब खुद आम आदमी पार्टी (AAP) ही इसकी पुष्टि कर रही है कि दिल्ली सीएम ने उस समय बाकियों से अलग रुख अपनाया, जिसका अर्थ है कि उन्होंने ‘वन्दे मातरम्’ को न तो दोहराया और न ही हाथ उठाया।
आम आदमी पार्टी की नेशनल सोशल मीडिया टीम का हिस्सा आरती चड्ढा ने ट्विटर पर भारत के राष्ट्रगीत के उद्घोष की तुलना जर्मनी में नाजी युग के सैल्यूट यानी हैल हिटलर (Heil Hitler) के साथ की। उन्होंने दो तस्वीरें साझा की जिसमें एक जर्मनी का है और जहाँ सारे लोग ‘हैल हिटलर’ पर हाथ उठा कर सम्मान देते हुए नज़र आते हैं, वहीं एक व्यक्ति है जो भीड़ में खड़ा है, कोई मूवमेंट नहीं कर रहा। इसकी तुलना आरती ने कल के केजरीवाल के वायरल फोटो के साथ की।



आरती का कहना है कि जिस तरह नाजी जर्मनी में ‘ हैल हिटलर’ पर हाथ उठा कर सम्मान नहीं दिया, ठीक वैसा ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में ‘वन्दे मातरम्’ के साथ किया। साथ ही आरती ने ये भी लिखा कि एक ऐसा व्यक्ति को बाकियों से अलग खड़ा होने की हिम्मत रखता है। आरती ने अरविन्द केजरीवाल को जन्मदिन विश करते हुए ऐसा कहा।
अब पूरा माजरा समझते हैं। सबसे पहले भाजपा नेता तजिंदर बग्गा ने ट्विटर पर इस वीडियो को शेयर करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री की आलोचना की। दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता तजिंदर बग्गा द्वारा शेयर किए गए वीडियो में दिख रहा है कि जब पीएम मोदी ‘वन्दे मातरम्’ का उद्घोष करते हैं तो वहाँ उपस्थित सभी लोग अपने दोनों हाथ उठा कर इसे दोहराते हैं, लेकिन अरविन्द केजरीवाल चुपचाप मास्क लगा कर बैठे हुए हैं और उन्होंने कोई मूवमेंट नहीं की।
भाजपा नेता ने ट्विटर पर इस वीडियो को शेयर करते हुए आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो से पूछा कि बाटला हाउस एनकाउंटर के आतंकवादियो के लिए तो आपके हाथ बड़ी जल्दी खड़े हुए थे, सर्जिकल स्ट्राइक के समय सेना से सबूत माँगने के लिए तो आपके हाथ बड़ी जल्दी खड़े हुए थे, तो आज आपको कौन सी बीमारी हो गई कि आपने ‘वन्दे मातरम्’ पर आपने हाथ खड़े करने से मना कर दिया?
तजिंदर बग्गा ने केजरीवाल से यह भी पूछा कि क्या ‘वन्दे मातरम्’ का सम्मान करने से उनका वोट-बैंक नाराज़ हो जाएगा? सोशल मीडिया पर इस ट्वीट की रिप्लाई में कई लोग भी दिल्ली सीएम से नाराज़ दिखे और लोगों इसका कारण पूछा कि आखिर उन्होंने भारत के राष्ट्रीय गीत से लिए गए उद्घोष का सम्मान नहीं किया? जबकि उनके आसपास बैठे बाकी सभी लोगों ने इस उद्घोष को पूरे जोश में दोहराया।
वहीं पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा कि 0.01% ऐसे रह जाते हैं, जो डिटॉल से भी नहीं जाते। वहीं अरविन्द केजरीवाल ने जब खुद झंडा फहराया तो उन्होंने अपने मंच से ‘इंकलाब ज़िंदाबाद’ के साथ-साथ ‘वन्दे मातरम्’ का नारा भी लगवाया। इस पर भाजपा सांसद मिनाक्षी लेखी ने कहा कि जब पीएम मोदी ने ये उद्घोष किया तो केजरीवाल शांत बैठे रहे और जब उन्होंने खुद ये नारा लगाया तो उनके पार्टी के नेताओं ने इसे नहीं दोहराया।
वहीं सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा कि ‘सड़ जी’ के वंदे मातरम कहने पर उनके पार्टी के मंत्री-कार्यकर्ता चुप्पी लगा गए। साथ ही उन्होंने ‘बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होए’ वाली कहावत का जिक्र करते हुए पूछा कि कैसे लोग हैं ये? उन्होंने कहा कि जब यही नारा पीएम मोदी ने लगवाया तो केजरीवाल के मुँह से कुछ नहीं फूटा। वहीं बिहार भाजपा ने भी चुटकी लेते हुए कहा, “पहले लगा था कि केजरीवाल बिहार से दिल्ली जाने वाले श्रमिकों के खिलाफ हैं, लेकिन ये तो ‘वंदे मातरम’ बोलने के भी खिलाफ हैं जी!
नोट करने वाली बात है कि जब दिल्ली का मुख्यमंत्री नारा लगाता है, दूसरी तरफ से वह जवाब नहीं मिलता, जो राष्ट्रीय पर्व पर मिलना चाहिए


दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी इस वीडियो को ट्वीट करते हुए कहा कि आज लाल किले की प्राचीर से भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी ने भारत माँ का जयघोष करवाया, लेकिन पता नही इस एक शख़्स को भारत माता की जय से क्या तकलीफ है? इसके बाद उन्होंने पूछा कि कहीं ये आप तो नहीं अरविन्द केजरीवाल जी? वहीं दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता भी नाराज़ नज़र आए।
आदेश गुप्ता ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ‘वन्दे मातरम्’ ना बोलकर कौन सी धर्मनिरपेक्ष होने की राजनीति कर रहें हैं, ऐसा करके किसे खुश करना चाहते हैं? हर एक दिल्लीवासी आपकी इस राजनीति को देखकर दुखी होगा। इसके बाद उन्होंने पूछा कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश ‘वन्दे मातरम्’ के नारे से गूँज रहा है तो केजरीवाल खामोश क्यों हैं? कई लोग भी इससे नाराज़ नज़र आए।
इस पर जनता की ट्विटर पर प्रतिक्रियाएं


इस पर पार्टी का कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है। लेकिन, अब आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय सोशल मीडिया टीम की सदस्य आरती ने ही इसकी पुष्टि कर दी है।

महात्मा गाँधी प्रेमियों को गोडसे के 150 बयान घर-घर बंटवाने में क्या आपत्ति है?

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
"I have however no doubt that had the audience of that day been constituted into a jury and entrusted with the task of deciding Godse's appeal, they would have brought in a verdict of 'not guilty' by overwhelming majority".
                                        Justice Khosla
                  The Murder of the Mahatma
                                             (page 234)
Image may contain: one or more people"यदि देश-भक्ति पाप है तो मै मानता हूँ मैंने पाप किया है। यदि प्रशंसनीय है तो मै आपको उस प्रशंसा का अधिकारी समझता हूँ। मुझे विश्वास है की मनुष्यों द्वारा स्थापित न्यायालय के ऊपर कोई न्यायालय हो तो उसमें मेरे काम को अपराध नहीं समझा जाएगा। मैंने देश और जाति की भलाई के लिए यह काम किया। मैंने उस व्यक्ति पर गोली चलाई जिसकी नीति से हिन्दुओं पर घोर संकट आए, हिन्दू नष्ट हुए।
मेरा विश्वास अडिग है कि मेरा कार्य नीति की दृष्टि से पूर्णतया उचित है। मुझे इस बात में लेशमात्र भी सन्देह नहीं कि भविष्य में किसी समय सच्चे इतिहासकार इतिहास लिखेंगे तो वे मेरे कार्य को उचित ठहराएंगे।"
                                                                                           -- नाथूराम गोडसे    
*देश को सत्य बताना यदि गुनाह है तो मैं यह गुनाह बार -बार करूंगी :साध्वी प्रज्ञा*
भोपाल से सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने लोकसभा में गोडसे को बताया 'देशभक्‍त', हंगामे के बाद BJP सांसदों ने ही उन्‍हें बैठाया
वो आतंकियों का भी खुलकर समर्थन करते है हम। देशभक्तों का भी खुलकर समर्थन नही कर पाते हैं....आखिर अखण्ड भारत का स्वप्न दिलो दिमाग मे रखने वाला व्यक्ति देशभक्त नही होता है क्या?
ऐसा स्पष्ट बयान देश की लोकसभा में देने वाली साध्वी प्रज्ञा पर हमें गर्व है! 
Image may contain: textमहात्मा गाँधी प्रेमियों(चाहे किसी भी राजनीतिक दल से हों) से निवेदन है एक बार घर-घर नाथूराम गोडसे के कोर्ट में दर्ज 150 बयानों को बंटवा दें। जनता बता देगी "महान देशभक्त कौन? नाथूराम गोडसे या महात्मा गाँधी?" अपने बयान नंबर 1 से लेकर 150 तक किसी बयान में माफ़ी नहीं मांगी, बल्कि मारने का कारण बताए हैं। अंत में यह भी बताया कि "गाँधी का अब जीवित रहना देश का एक और विभाजन", क्योकि जिन्ना की लाहौर से लेकर ईस्ट पाकिस्तान(वर्तमान बांग्लादेश) तक वाया दिल्ली 16 मीटर चौड़ी सड़क, जिसके दोनों तरफ केवल मुस्लिम आबादी रहे, मांग ने गोडसे ने गाँधी को जीवित रखना देश के लिए घातक समझा। वास्तव में अगर गाँधी जीवित रहते, 1949 में एक और बटवारे की आधारशिला रख दी गयी होती। जिस तरह आज वर्तमान सरकार पाकिस्तान पर भारी पड़ रही है, पाकिस्तान भारत पर हावी होता। PoK को क्या आज तक वापस ले पाए? वह तो मात्र एक छोटा-सा टुकड़ा है, जिन्ना की मांग पूरी होने पर देश का कितना बड़ा हिस्सा देश से कट गया होता, जिसे नेताओं की तुष्टिकरण नीति के चलते क्या स्थिति होती भारत के नक़्शे की, समझा जा सकता है।  
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अखंड भारत का इंतज़ार करती गोडसे की अस्थियां 
 गोडसे ने अपनी वसीयत में कहा है कि मेरे अंतिम संस्कार के बाद मेरी अस्थियों को तब तक रखना जब तक भारत अखंड न हो जाये तब मेरी अस्थियों को सिंधु नदी में ही प्रवाह करना। अब बताओं देशभक्त कौन? 

ऊधम सिंह ने लंदन जाकर जलियांवाला बाग के हत्यारे जनरल डायर को मारा! वैसे ही गांधी ने बटवारे पूर्व पाकिस्तान में रह रहे हिन्दुओं को भरोसा दिया था कि देश का बंटवारा उसकी लाश पर होगा और लोगों ने उस पर भरोसा करके पाकिस्तान में रुक गए किन्तु एकाएक बिना पर्याप्त समय दिए बटवारे की घोषणा हो गई जिससे लाखों हिन्दुओं का कत्लेआम हुआ .... ऐसे हत्यारे गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे भी सच्चे देशभक्त हैं ....
इतना ही नहीं, महात्मा गाँधी भक्त देश को बताएं कि "जब ऊधम सिंह ने जनरल डायर को मारा था, तब गाँधी ने ब्रिटिश सरकार से क्या कहा था? क्या कोई देशभक्त ऐसी बात बोल सकता है?" दूसरे, जब जयपुर में जतिन दास की ब्रिटिश सरकार की गोली से हत्या होने पर, जब गाँधी(उस समय गाँधी जयपुर में ही थे) से श्रद्धांजलि देने के लिए आग्रह किया गया तो क्यों गाँधी ने श्रद्धांजलि देने से इंकार कर दिया था?(पढ़िए गोडसे के 150 बयानों में)
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Image result for चितपावन ब्राह्मणफिर क्या कारण है कि आज तक गाँधी हत्या पर हुए अब तक के सबसे भयंकर नरसंहार की क्यों नहीं जाँच हुई? क्या चितपावन ब्राह्मण इंसान नहीं थे? यह स्वतंत्र भारत का सर्वाधिक भयंकर नरसंहार था, जिसमे 30,000 से अधिक चितपावन ब्राह्मणों को जिन्दा जलाया/मारा गया था, क्योकि गोडसे चितपावन ब्राह्मण थे। 
पिताश्री एम.बी.एल.निगम 
गाँधी का एक और हिन्दू विरोधी बयान जिसके मेरे पिताश्री एम.बी.एल.निगम ने अपनी आँखों से देखा था। ब्रिटिश राज हर वर्ष बकरा ईद पर दिल्ली के सदर बाजार में गऊ हत्या को लेकर दंगा होता था। 
बात सन 1945 की है, बकरा ईद के दिन पिताश्री अपने अनुज की ससुराल करोल बाग़ से घर वापस जब आ रहे थे, उनको झंडेवालान मंदिर के पास रोक लिया गया, मालूम हुआ कि लोटन पहलवान ने आज गाय को बचाते मुसलमानों से टक्कर ली है और पुलिस उसे गिरफ्तार कर थाने ला रही है। उस दिन पहली बार पिताश्री ने लोटन पहलवान को लहू-लुहान स्थिति में पुलिस ट्रक पर देखा था, घर पहुँच मौहल्ले में सबको बताया। उन दिनों गाँधी मंदिर मार्ग स्थित बाल्मीकि कॉलोनी में शाम के समय प्रवचन देते थे, जिसका सीधा रेडियो पर प्रसारण होता था।  देखिए गाँधी जी महाराज अपने प्रसारण में क्या फरमाते हैं:-
सत्यधर्म प्रकाशन
डी-12, सेक्टर-8
रोहिणी, दिल्ली 
"आज दिल्ली में सब कुछ ठीक-ठाक रहा, बस पुलिस ने एक दंगाई को गिरफ्तार कर लिया है।" क्या गौ-रक्षक लोटन पहलवान दंगाई था? क्यों नहीं गाँधी ने सच्चाई बताई? लोटन के इस साहसिक कदम से फिर बकरा ईद पर गौ-हत्या नहीं हुई।   
लोकसभा में एसपीजी संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताए जाने पर सियासी पारा बढ़ गया। अब इसे सच्चाई से मुंह फेरना न कहा जाए तो क्या कहा जाए?
महात्मा गाँधी के अंधभक्तों को यदि नाथूराम गोडसे से इतनी नफरत है तो घर-घर गोडसे के कोर्ट में दर्ज उन बयानों को क्यों नहीं बंटवाते? अपने-आप जनता निर्णय कर लेगी कि गाँधी और गोडसे में कौन महान? क्या कारण था तत्कालीन जवाहर लाल नेहरू की सरकार ने उन बयानों के सार्वजनिक होने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था? देश के लिए सबसे बड़ी दुःख की बात यह है कि नेहरू सरकार से लेकर आज वर्तमान मोदी सरकार तक गाँधी की बुराइयों पर पर्दा डाल रही है। 
हेमगंगा प्रकाशन
27, राजपुर रोड,
सिविल लाइन्स, दिल्ली 
सूर्य-भारती प्रकाशन
नई सड़क,
दिल्ली 
विपक्षी दल तो उनका विरोध कर रही रहे हैं लेकिन अब वे अपनी ही पार्टी के नेताओं के निशाने पर आ गई हैं। नवम्बर 27 को लोकसभा में राजनाथ  सिंह ने कहा कि अगर कोई नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताता है, तो हमारी पार्टी इसकी कड़ी निंदा करती है। महात्मा गांधी हमारे लिए आदर्श हैं, वह हमारे पथ प्रदर्शक हैं और हमेशा रहेंगे। उन्होंने कहा कि नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाली सोच समाप्त होनी चाहिए।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ''नाथू राम गोडसे को देशभक्त कहना तो दूर, उन्हें देशभक्त मानने की सोच का भी हमारी पार्टी निंदा करती है। महात्मा गांधी की विचारधारा हमेशा प्रासंगिक थी, है और रहेगी।''
सदन की कार्यवाही आरंभ होने के बाद सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने प्रज्ञा के विवादित बयान का मुद्दा उठाया और कहा कि यह सदन इस तरह के बयानों की अनुमति कैसे दे सकता है। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि टिप्पणी को रिकॉर्ड से हटा दिया गया है और ऐसी स्थिति में इस पर सदन के भीतर चर्चा करने का कोई मतलब नहीं है। इसके बाद कड़ी आपत्ति जताते हुए कांग्रेस के सभी सांसदों ने सदन से वॉकआउट कर दिया

नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाले बयान को लेकर प्रज्ञा सिंह ठाकुर का राजनैतिक दुनिया के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी इसका जमकर विरोध हो रहा है। नवम्बर 26 को लोकसभा सदन में  द्रमुक सदस्य ए राजा ने चर्चा में भाग लेते हुए नकारात्मक मानसिकता को लेकर गोडसे का उदाहरण दिया, जिस पर प्रज्ञा अपने स्थान पर खड़ी हो गईं और कहा कि 'देशभक्तों का उदाहरण मत दीजिए'। इससे पहले भी प्रज्ञा सिंह नाथुराम गोडसे को देशभक्त बता चुकी हैं, जिसे लेकर काफी विवाद खड़ा हो गया था। इसके अलावा कुछ दिनों पहले ही भोपाल से BJP की सांसद साध्वी ठाकुर ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता की जगह राष्ट्रपुत्र बताया था। 
प्रज्ञा ठाकुर की सफाई, कहा- बस, मैंने उधम सिंह का अपमान नहीं सहा
लोकसभा में बुधवार को महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को 'देशभक्त' बताने वाली टिप्पणी पर भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर की सफाई आई है। प्रज्ञा ठाकुर ने ट्वीट करते हुए कहा कि यह झूठ है, मैंने केवल उधम सिंह का अपमान नहीं सहा। उन्होंने लिखा है, 'कभी-कभी झूठ का बवंडर इतना गहरा होता है कि दिन में भी रात लगने लगती है लेकिन सूर्य अपना प्रकाश नहीं खोता। पलभर के बवंडर में लोग भ्रमित न हों सूर्य का प्रकाश स्थाई है। सत्य यही है कि मैंने उधम सिंह जी का अपमान नहीं सहा बस।' बता दें, प्रज्ञा ठाकुर की इस टिप्पणी पर भाजपा ने भी कार्रवाई की है। केंद्र सरकार ने उनका नाम रक्षा मामलों की समिति से हटा दिया है
नाथुराम गोडसे पर सांसद प्रज्ञा ठाकुर की टिप्पणी की भारतीय जनता पार्टी ने निंदा की है। भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने कहा कि भाजपा, लोकसभा सांसद प्रज्ञा ठाकुर की टिप्पणी की निंदा करती है, पार्टी ऐसे बयानों का कभी समर्थन नहीं करती। नड्डा ने कहा, प्रज्ञा ठाकुर संसद सत्र के दौरान भाजपा संसदीय दल की बैठक में हिस्सा नहीं ले सकेंगी। 

वहीं, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी निशाना साधा है। राहुल गांधी ने प्रज्ञा ठाकुर को 'आतंकी' कहा है. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है, 'आतंकी प्रज्ञा ने आतंकी गोडसे को एक देशभक्त कहा है। यह भारतीय संसद के इतिहास में एक दुखदायी दिन है।' वहीं, मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रज्ञा ठाकुर जो बोल रही है वह बीजेपी और आरएसएस की आत्‍मा है। मैं क्‍या कह सकता हूं। यह कोई छुपा हुआ नहीं है।मैं अपना समय उस महिला के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई की मांग करके गंवाना नहीं चाहता हूं।
ऐसे में प्रश्न होता है कि जब लोकसभा महात्मा गाँधी के विरुद्ध कुछ नहीं सुन सकती, फिर किस आधार पर नाथूराम गोडसे को आतंकी सुन चुप्पी साध ली?
संसद में प्रज्ञा ठाकुर द्वरा नाथुराम गोडसे को देशभक्‍त के रूप में व्‍यक्‍त करने को लेकर विपक्षी दलों ने कड़ा रूख अपनाया है। इस बयान पर सदन में रक्षा मंत्री को बयान देना पड़ा है। विपक्षी दलों के हंगामें के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि महात्‍मा गांधी सभी के आदर्श हैं। वे जाति, धर्म, प्रांत से परे हैं

गौरतलब है कि   
प्रज्ञा ठाकुर ने तब एक टिप्पणी कर विवाद खड़ा कर दिया था जब द्रमुक सदस्य ए राजा अदालत के समक्ष नाथूराम गोडसे द्वारा दिये गए उस बयान को उद्धृत कर रहे थे कि उसने महात्मा गांधी को क्यों मारा ठाकुर की टिप्पणी को लेकर विपक्षी सदस्यों द्वारा विरोध जताए जाने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि एसपीजी (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान सिर्फ द्रमुक नेता का बयान ही रिकॉर्ड में जाएगा। लोकसभा सचिवालय ने बाद में एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि ठाकुर की टिप्पणी 'दर्ज नहीं की गई है
No photo description available.सत्ता का अहंकार
एससी/एसटी एक्ट का कठोर प्रावधान, सावरकर, गोकुल सिंह के स्थान पर, अम्बेडकर व गांधी का महिमामंडन, केवल मुसलमान की बेटी ही संघ+भाजपा की बेटी हैं, अहिन्दू (अल्पसंख्यक) सशक्तिकरण,
समलैंगिक व्याभिचार को स्वीकृति देना, भाजपा गौसेवा प्रकोष्ठ की समाप्ति, गौरक्षको को गुण्डे घोषित करके, उनके विरूद्ध कार्यवाही करने हेतु सभी राज्यों को दिशानिर्देश देना, कत्लखानों को सब्सिडी देना, ...इत्यादि... से ही संघ भाजपा का पतन होना शुरू हुआ।
मार्च 2018 तक जो भाजपा देश के सर्वाधिक राज्यों पर सत्तासीन थी, वो अपने नेताओं के अहंकार व सरकार की हिन्दू विरोधी नीतियों के चलते नवंबर 2019 तक देश के कुछ ही राज्यों तक सीमित हो गई।

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भारतीय मानसिकता भी क्या मानसिकता है समझ नहीं आता? हमारे छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेता भी अपने मीडिया सहयोगियों से साठग....

Rafael Aircraft: राजनाथ सिंह ने बताया- कैसी थी राफेल में उनकी उड़ान, बोले- मैंने तो कल्पना भी नहीं की थी

Rajnath Singh
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फ्रांस से खरीदे गए 36 राफेल लड़ाकू विमानों का पहला विमान मंगलवार को औपचारिक रूप से प्राप्त कर लिया। इसके दौरान उन्होंने इसकी पूजा भी की। राजनाथ सिंह ने उस पर ओम तिलक लगाया और फूल और नारियल चढ़ाया। इसके बाद उन्होंने इसमें उड़ान भरी। उड़ान भरने के बाद सिंह ने कहा, 'यह बहुत ही आरामदायक और स्मूथ उड़ान थी। यह एक अभूतपूर्व क्षण था, मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मैं किसी विमान में सुपर सोनिक गति से उड़ूंगा।' 
रक्षा मंत्री ने कहा, 'फरवरी 2021 तक हमें 18 राफेल विमानों की डिलीवरी मिल जाएगी और अप्रैल-मई 2022 तक हमें सभी 36 विमान मिल जाएंगे। यह हमारी आत्मरक्षा का एक हिस्सा है न कि किसी के खिलाफ आक्रामकता का संकेत। यह एक निवारक है।'

राजनाथ सिंह ने राफेल में करीब 25 मिनट लंबी उड़ान भरी। इसे दसॉ एविएशन के हेड टेस्ट पायलट फिलिप ड्यूचेटो द्वारा उड़ाया गया। दसॉ एविएशन के सीईओ ने कहा, 'यह भारतीय वायु सेना और भारत के लिए, साथ ही फ्रांस और दसॉ एविएशन के लिए भी महान दिन है। हमने वही किया जो अनुबंध में था और अब यह उड़ान भरने के लिए तैयार है। हमें बहुत गर्व है।' 
राफेल विमान सौंपे जाने के लिए आयोजित समारोह में राजनाथ सिंह ने कहा, 'हमारी वायुसेना दुनिया में चौथी सबसे बड़ी वायुसेना है और मेरा मानना है कि राफेल मीडिमय मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट हमारी वायुसेना की शक्ति में वृद्धि लाएगा तथा क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वायु क्षेत्र में भारत की शक्ति को बढ़ाएगा। मुझे बताया गया है कि फ्रेंच शब्द राफेल का अर्थ आंधी है। मैं इस बात को लेकर आश्वस्त हूं कि विमान अपने नाम को सार्थक करेगा।' 
भारत ने 59,000 करोड़ रुपए के सौदे के तहत सितंबर 2016 में फ्रांस से 36 लड़ाकू विमान खरीद का ऑर्डर दिया था। चार लड़ाकू विमानों की प्रथम खेप भारत में वायुसेना के अड्डे पर मई 2020 में आएगी। सभी 36 लड़ाकू विमानों के सितंबर 2022 तक भारत पहुंचने की उम्मीद है। दो इंजन वाला यह विमान विमान वाहक पोत और एक छोटे से रनवे से उड़ान भरने में सक्षम है।

दुनिया की कोई ताकत पाकिस्तान के टुकड़े-टुकड़े होने से नहीं रोक सकती: राजनाथ सिंह

पाकिस्तान के टुकड़े-टुकड़े होने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती: राजनाथ सिंह
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुजरात के सूरत में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत से अलग होने के बाद पाकिस्तान के दो टुकड़े हो गए। अब जिस तरह वहां अल्पसंख्यक, बलूचियों, सिंधियों और पख्तूनियों के साथ अन्याय हो रहा है, उससे लगता है अब पाकिस्तान के टुकड़े-टुकड़े होने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती है।  
राजनाथ ने भारतीय वीर जवान ट्रस्ट के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, "मजहब की राजनीति करने वाले पाकिस्तान के 1971 में दो टुकड़े हो गए और बांग्लादेश बना। यदि मजहब पर आधारित राजनीति पाकिस्तान में चलती है, तो कोई भी इसे कई भागों में विभाजित होने से नहीं रोक सकता है... यदि पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थन करना बंद नहीं करता है तो भविष्य में इसे खंड-खंड होने से दुनिया की कोई भी ताकत नहीं रोक सकती।”
रक्षा मंत्री ने जम्मू-कश्मीर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृढ़ रुख को दोहराया और कहा कि नई दिल्ली अब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के मुद्दे पर इस्लामाबाद के साथ बात करेगी। राजनाथ ने कहा, "मैंने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता होती है, तो यह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) पर होगी।"

इस दौरान राजनाथ ने कहा कि भारत कभी भी जाति, पंथ और मजहब की राजनीति में नहीं बल्कि इंसाफ और इंसानियत में विश्वास करता है। राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के भारत के फैसले को पाकिस्तान पचा नहीं पा रहा था और इसे गुमराह करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में गया। अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह मानने को तैयार नहीं है कि पाकिस्तान क्या कह रहा है। राजनाथ सिंह ने कहा- आजादी के बाद भारत की अल्पसंख्यक आबादी बढ़ी है, जबकि पाकिस्तान में सिखों, बौद्धों और अन्य लोगों के अधिकारों का उल्लंघन होता रहता है। भारत में अल्पसंख्यक समुदाय सुरक्षित थे, सुरक्षित हैं और सुरक्षित रहेंगे। भारत लोगों को जाति या धर्म के आधार पर विभाजित नहीं करता है> पाकिस्तान को तोड़ने की जरुरत नहीं है वह खुद टूट जाएगा। पाकिस्तान को आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद करना होगा, वरना इसके टुकड़े-टुकड़े होने से कोई नहीं रोक सकेगा।
रक्षा मंत्री सूरत में एक समारोह में भाग लेने के लिए आए थे, जिसका उद्देश्य सैनिकों के परिवारों का सम्मान करना था। इस दौरान उन्होंने कहा, "मुझे शहीद सैनिकों के 120 से अधिक परिवारों को सम्मानित करने का अवसर मिला। शहीद सैनिकों के परिवारों के साथ शक्ति के स्रोत के रूप में खड़ा होना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है।"

ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाने वाले 122 सैनिकों के परिवारों के लिए एक सत्कार कार्यक्रम में बोलते हुए राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि अगर उसके लोग नियंत्रण रेखा पार करते हैं तो भारतीय सेना तैयार है और उन्हें वापस जाने की अनुमति नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा- “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने नियंत्रण रेखा पार न करने के लिए अपने लोगों को अच्छी सलाह दी है क्योंकि भारतीय सैनिक तैयार हैं और उन्हें वापस नहीं आने देंगे।”

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साल 2019 को सेना द्वारा 'नेक्स्ट ऑफ किन' के रूप में भी देखा जा रहा है। देश के शहीद सैनिकों और अधिकारियों के परिवारों के संपर्क में आने के लिए सेना द्वारा किया जाने वाला प्रयास है
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महाभारत युद्ध के बाद क्या फिर से परमाणु हमले में तबाह हो जाएगा पाकिस्तान?

mabharat pakistanभारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान द्वारा  बार बार दी जा रही परमाणु धमकी के जवाब में कहा कि हमारी नीति रही है कि हम परमाणु हथियार का पहले प्रयोग नहीं करेंगे। लेकिन आगे क्या होगा, यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है। राजनाथ सिंह ने यह बयान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि पर पोखरण में दिया था। भारत के विशेषज्ञ मानते हैं कि परमाणु हमले का इंतज़ार करने के बाद फिर परमाणु हमला करना मूर्खता होगी।
इस बयान के बाद समूचे पाकिस्तान में डर का माहौल कायम हो गया और खौफजदा प्रधानमंत्री इमरान खान ने लगातार कई ट्वीट्स करके भारत के परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गुहार लगाई है। इमरान खान ने लिखा कि भारत के परमाणु हथियार का नियंत्रण फासीवादी मोदी सरकार के हाथ में है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिससे केवल क्षेत्र पर ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर इसका प्रभाव पड़ेगा। इमरान खान ने एक ट्वीट में लिखा, "हिन्दुत्ववादी मोदी सरकार केवल पाकिस्तान के लिए ही नहीं बल्कि भारत के अल्पसंख्यकों और 'नेहरू-गांधी के भारत' के लिए भी खतरा है।"
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ज्ञात हो, जब से पाकिस्तान ने परमाणु बनाया है, तब से पाकिस्तान के हुक्ममरान भारत को परमाणु धमकियों से नवाज़ते रहे, लेकिन पिछली किसी भी सरकार ने पाकिस्तान की धमकी का माकूल जवाब नहीं दिया। और पाकिस्तान इस धमकी को अपना ब्रह्मास्त्र समझने की भूल में फलीफूत हो, भारत की धरती को लाल करता रहा। समय ने पलटा खाया, कि जब उसी की भाषा में धमकी का जवाब धमकी देते ही, बिलख रहा है। दूसरे, जब भारत और पाकिस्तान ने परमाणु परिक्षण किए थे, तब भारत के परमाणु का असर दूर देशों तक हुआ था, जबकि पाकिस्तान परमाणु का असर केवल अफ़ग़ानिस्तान तक ही महसूस किया गया था। जो सिद्ध करता है कि भारत के परमाणु पाकिस्तान से कहीं अधिक खतरनाक हैं। 
फिर कहते हैं कि इतिहास लिखा नहीं जाता, दोहराया जाता है, जो धूमिल हुए इतिहास को मुखरित कर देता है। पाकिस्तान को रामायण और महाभारत ग्रंथों को अध्धयन करने की जरुरत है।  
क्या महाभारत में छोड़े गए ब्रह्मास्त्र से नष्ट हुई थी सिंधु घाटी?
अब हम जरा इतिहास में जाते हैं। महाभारत काल में कंबोज, गांधार, कैकय, कुरु, पांचाल, वृत्सु, सीबीर, बल्हिक, यदु और मद्र जनपद अस्तित्व में थे। इन्हीं के कुछ हिस्सों को मिलाकर आज का पाकिस्तान है। दरअसल, उस काल में अधिकतर लोग सिंधु और सरस्वती के किनारे ही रहते थे। यहीं पर उसी काल में सिंधु घाटी की सभ्यता अपने चरम पर थी। यह सभी लोग दृविड़ ही थे जिन्हें आर्य कहा जाता था। वर्तमान में सिंधु घाटी का एक बहुत बड़ा हिस्सा पाकिस्तान में हैं।
आज जिस हिस्से को पाकिस्तान और अफगानिस्तान कहा जाता है, महाभारत काल में उसके उत्तरी हिस्से को गांधार, मद्र, कैकय और कंबोज की स्थली कहा जाता था। अयोध्या और मथुरा से लेकर कंबोज (अफगानिस्तान का उत्तर इलाका) तक आर्यावर्त के बीच वाले खंड में कुरुक्षेत्र होता था, जहां यह युद्ध हुआ। उस काल में कुरुक्षेत्र बहुत बड़ा क्षेत्र होता था। आज कल यह हरियाणा का एक छोटा-सा क्षेत्र है।
उस काल में सिन्धु और सरस्वती नदी के पास ही लोग रहते थे। सिन्धु और सरस्वती के बीच के क्षेत्र में कुरु रहते थे। यहीं सिन्धु घाटी की सभ्यता और मोहनजोदड़ो के शहर बसे थे, जो मध्यप्रदेश की नर्मदा घाटी तक फैले थे। सिन्धु घाटी सभ्यता के मोहनजोदड़ो, हड़प्पा आदि स्थानों की प्राचीनता और उनके रहस्यों को आज भी सुलझाया नहीं जा सका है। मोहनजोदड़ो सिन्धु नदी के दो टापुओं पर स्थित है।
जब पुरातत्व शास्त्रियों ने पिछली शताब्दी में मोहनजोदड़ो स्थल की खुदाई के अवशेषों का निरीक्षण किया था तो उन्होंने देखा कि वहां की गलियों में नरकंकाल पड़े थे। कई अस्थिपंजर चित अवस्था में लेटे थे और कई अस्थिपंजरों ने एक-दूसरे के हाथ इस तरह पकड़ रखे थे, मानो किसी विपत्ति ने उन्हें अचानक उस अवस्था में पहुंचा दिया था।
उन नरकंकालों पर उसी प्रकार की रेडियो एक्टिविटी के चिह्न थे, जैसे कि जापानी नगर हिरोशिमा और नागासाकी के कंकालों पर एटम बम विस्फोट के पश्चात देखे गए थे। मोहनजोदड़ो स्थल के अवशेषों पर नाइट्रिफिकेशन के जो चिह्न पाए गए थे, उसका कोई स्पष्ट कारण नहीं था, क्योंकि ऐसी अवस्था केवल अणु बम के विस्फोट के पश्चात ही हो सकती है।
उल्लेखनीय है कि उसी काल में महाभारत का युद्ध हुआ था। उस दौरान गुरु द्रोण के पुत्र अश्‍वत्थामा ने भगवान कृष्ण के मना करने के बावजूद ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया। अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र छोड़ा, प्रत्युत्तर में अर्जुन ने भी छोड़ा। अश्वत्थामा ने पांडवों के नाश के लिए छोड़ा था और अर्जुन ने उसके ब्रह्मास्त्र को नष्ट करने के लिए। दोनों द्वारा छोड़े गए इस ब्रह्मास्त्र के कारण लाखों लोगों की जान चली गई थी। महाभारत में इस ब्रह्मास्त्र के प्रभाव का वर्णन मिलता है।
तदस्त्रं प्रजज्वाल महाज्वालं तेजोमंडल संवृतम।
सशब्द्म्भवम व्योम ज्वालामालाकुलं भृशम।
चचाल च मही कृत्स्ना सपर्वतवनद्रुमा।। महाभारत ।। 8-10-14 ।।
अर्थात : ब्रह्मास्त्र छोड़े जाने के बाद भयंकर वायु जोरदार तमाचे मारने लगी। सहस्रावधि उल्का आकाश से गिरने लगे। भूतमात्र को भयंकर महाभय उत्पन्न हो गया। आकाश में बड़ा शब्द हुआ। आकाश जलने लगा। पर्वत, अरण्य, वृक्षों के साथ पृथ्वी हिल गई।
महाभारत में सौप्तिक पर्व के अध्याय 13 से 15 तक ब्रह्मास्त्र के परिणाम दिए गए हैं। यह परिणाम ऐसे ही हैं जैसा कि वर्तमान में परमाणु अस्त्र छोड़े जाने के बाद घटित होते हैं। कुछ जानकारों के अनुसार अश्‍वत्थामा द्वारा छोड़ा गया ब्रह्मास्त्र परमाणु बम जैसा ही था। इसमें इसका उल्लेख भी मिलता है कि ब्रह्मास्त्र छोड़े जाने के बाद 12 वर्ष तक धरती पर निर्जन रहता है। वर्षा नहीं होती है और प्रभावित होने वाले संपूर्ण क्षेत्र में जीव जंतु और सभी तरह के प्राणी मर जाते हैं।
परमाणु बम छोड़े जाने के बाद भी कुछ इसी तरह के प्रभाव होने का उल्लेख मिलता है। आधुनिक काल में जे. रॉबर्ट ओपनहाइमर ने महाभारत में बताए गए ब्रह्मास्त्र की संहारक क्षमता पर शोध किया और अपने मिशन को नाम दिया ट्रिनिटी (त्रिदेव)। रॉबर्ट के नेतृत्व में 1939 से 1945 का बीच वैज्ञानिकों की एक टीम ने यह कार्य किया। 16 जुलाई 1945 को इसका पहला परीक्षण किया गया था।
शोध कार्य के बाद विदेशी वैज्ञानिक मानते हैं कि वास्तव में महाभारत में परमाणु बम का प्रयोग हुआ था। 42 वर्ष पहले पुणे के डॉक्टर व लेखक पद्माकर विष्णु वर्तक ने अपने शोध कार्य के आधार पर कहा था कि महाभारत के समय जो ब्रह्मास्त्र इस्तेमाल किया गया था वह परमाणु बम के समान ही था। डॉ. वर्तक ने 1969-70 में एक किताब लिखी ‘स्वयंभू’। इसमें इसका उल्लेख मिलता है।
एरिक वॉन अपनी बेस्ट सेलर पुस्तक 'चैरियट्स ऑफ गॉड्स' में लिखते हैं, 'लगभग 5,000 वर्ष पुरानी महाभारत के तत्कालीन कालखंड में कोई योद्धा किसी ऐसे अस्त्र के बारे में कैसे जानता था जिसे चलाने से 12 साल तक उस धरती पर सूखा पड़ जाता, ऐसा कोई अस्त्र जो इतना शक्तिशाली हो कि वह माताओं के गर्भ में पलने वाले शिशु को भी मार सके? इसका अर्थ है कि ऐसा कुछ न कुछ तो था जिसका ज्ञान आगे नहीं बढ़ाया गया अथवा लिपिबद्ध नहीं हुआ और गुम हो गया।'
भारतीय सेना पाकिस्तान का वजूद मिटा देने की क्षमता रखती है फिर भले ही इसमें चीन किसी भी प्रकार का अडंगा डाले। वर्तमान में चीन और पाकिस्तान ने भारत के डर से भारत को उलझाने के लिए कश्मीर और अन्य राज्यों में अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। वे दोनों मिलकर दक्षिण एशिया में एक खतरनाक खेल खेल रहे हैं और आने वाले समय में यदि यह खेल और बढ़ता है तो ऐसी आशंका है कि पाकिस्तान का नामोनिशान मिट जाएगा, क्योंकि भारत अब पहले का भारत नहीं रहा। वर्तमान सरकार की नीति घर में घुसकर मारने की है और जैसा की रक्षा मंत्री राजनाथ ने संकेत दिए हैं कि भारत अपनी सुरक्षा के हित में पहले भी परमाणु हमला कर दे तो कोई आश्चर्य नहीं। भारत किसी भी हालत में नहीं चाहेगा कि पाकिस्तान को कोई मौका दिया जाए।
पिछले वर्ष अमेरिका में दक्षिण एशियाई मामलों के एक शीर्ष परमाणु विशेषज्ञ ने दावा किया था कि अगर भारत को यह आशंका हुई कि पाकिस्तान उस पर परमाणु हथियार से आक्रमण कर सकता है तो वह परमाणु का 'पहले इस्तेमाल नहीं करने' की अपनी नीति को संभवत: त्याग सकता है और पाकिस्तान के खिलाफ उसके हमला से पहले ही हमला कर सकता है।
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में दक्षिण एशियाई परमाणु रणनीति के विशेषज्ञ विपिन नारंग ने वॉशिंगटन में एक कार्यक्रम के दौरान कहा 'ऐसे दावे बढ़ रहे हैं कि भारत पाकिस्तान को पहले कदम उठाने की इजाजत नहीं देगा।' उन्होंने कहा कि भारत पहले परमाणु इस्तेमाल नहीं करने की अपनी नीति छोड़ सकता है और अगर उसे शक हुआ कि पाकिस्तान उसके खिलाफ परमाणु हथियारों या 'टैक्टिकल' परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने जा रहा है तो वह पाकिस्तान के हमला करने से पहले ही हमला कर सकता है। बहरहाल, उन्होंने यह उल्लेख किया कि भारत का पहले हमला परंपरागत हमला नहीं होगा और वह पाकिस्तान के 'टैक्टिकल' परमाणु हथियारों के मिसाइल लॉन्चरों को भी निशाना बना सकता है।
लेकिन यदि जवाब में पाकिस्तान ने परमाणु हमला किया तो फिर विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भारत ने जवाब में सिर्फ एक ही परमाणु बम छोड़ दिया तो पाकिस्तान का वजूद ही मिट जाएगा। पाकिस्तान के नदी, तालाब, जंगल सभी जलकर नष्ट हो जाएंगे। यह विश्व की सबसे भयानक त्रासदी होगी। निश्चित ही भारत का जवाब बहुत तगड़ा होगा। क्या आप सोच सकते हैं कि पाकिस्तान के जवाब में भारत चुप बैठा रहेगा? पाकिस्तान और भारत में पल रहे पाकिस्तान समर्थकों को वर्तमान मोदी सरकार की नीतियों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। इन्हें किसी भ्रम में नहीं रहना चाहिए। परन्तु पाकिस्तान ने अपनी फौज के इशारों पर चलते खुद ही अपनी दुर्दशा कर ली है। अगर वर्तमान इमरान सरकार कश्मीर को भूल वहां बढ़ती महंगाई और जनता में होते रोष को शांत करने का प्रयास करती है,तो फौज अपना बगावती तेवर दिखाने में संकोच नहीं करेगी या फिर वहां पनप रहे आतंकवाद पर लगाम कसती है तो भी फौज बगावत पर आकर तख्ता पलट सकती है। स्थिति यह है कि खरबूजा चाकू पर गिरे या चाकू खरबूजे पर कटना खरबूजे ने ही है, यानि पाकिस्तान सरकार इस समय हाशिये पर है, इस कटु सच्चाई को जानने और समझने की जरुरत है।